Best Hindi Travel Blog -Five Colors of Travel

Categories
Culture Destination Madhya pradesh Travel

Chausath Yogini Temple: यह वही मंदिर है जिसकी थीम पर बना भारत का संसद भवन!

Chausath Yogini Temple

Chausath Yogini Temple: जिसके हूबहू शैली में बनी है भारतीय संसद। अब आपका सवाल वाजिब है कि कैसे? तो आइए मैं बताता हूं कैसे? आज हम अपनी इस विशेष यात्रा में आपको ले चलते हैं, एक बेहद खास जगह। जो इतिहास का ऐसा उदाहरण है। जिसकी छवि आप भारत की पुरानी संसद भवन में देख सकते हैं। जी हां ग्वालियर शहर से मात्र 40 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है एक ऐसी रहस्यमय जगह जिसको देखकर आप भी दंग रह जाएंगे। बिल्कुल हमारी तरह। क्योंकि हमने जब इस मंदिर की सैकड़ों सीढ़ियां चढ़ीं और इसके दर्शन किए तो हमारी वही प्रतिक्रिया थी, जो एक असमान्य चीज देख लेने से किसी की भी होती है।

Chausath Yogini Temple

यहां की खूबसूरती

यह इलाके आधुनिक चीजों से थोड़े पीछे हैं, पर यह जगह भारत की वास्तविक आत्मा को समझने के लिए सबसे बढ़िया हैं। यहां आप शुद्ध हवा का लुत्फ उठा सकते हैं और पक्षियों की आवाजें सुन सकते हैं। साथ ही सूर्य उदय और अस्त देख पाना सौभाग्य का पल होगा। यह समय यहां बिताना किसी सपने से कम से नहीं है, आपके पास समय हो तो एक बार यहां के गांव में घूमें और लोकल लोगों से बात करें। आपको नए नए अनुभव देखने और सुनने को मिल सकते हैं। यहां के लोग बहुत प्यारे हैं। उनका बोलना और बात करना बहुत अच्छा है। बहुत ही सम्मान के साथ आपसे बात करते हैं और आपसे भी वह यही उम्मीद करते हैं। (जिसके हूबहू शैली में बनी है भारतीय संसद। )

Chausath Yogini Temple

कैसे बना यह चौंसठ योगनियों का मंदिर?

लगभग 100 फीट की ऊंचाई पर बना यह मंदिर गूढ़ रहस्यों का स्थान तो है ही और कमाल की बात यह है कि बहुत ही पवित्र भी। क्योंकि अभी तक यह मंदिर भीड़ भाड़ से बचा हुआ है। इस खास जगह को कच्छप राजा देवपाल द्वारा लगभग 1383 में बनाया गया था। कुछ किंवदंतियों का मानना है की इस मंदिर को 9 वीं शताब्दी में भौम वंश की रानी हीरा देवी ने की थी। जो अभी तक उसी अंदाज में इतिहास की कहानियों को बयां करते हुए खड़ा है। यहां जाने के बाद जब हमने यहां के लोकल लोगों से पूछा तो एक और बात पता चली कि यह मंदिर तंत्र मंत्र विद्या के लिए जाना जाता है

Chausath Yogini Temple

हालांकि आज के समय में यह चौसठ योगनियों के मंदिर वैसे ही बने हैं। जैसे इनका निर्माण हुआ था। चौसठ योगनियों का मंदिर इसका नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इस मंदिर में चौसठ कमरे हैं जो आप आज भी वैसे ही देख सकते हैं।  जैसे निर्माण के वक्त थे। चौसठ कमरे चौसठ योगनियों को समर्पित हैं जो भगवान शिव की आराधना करती थीं। या तप करती थीं। इन चौसठ कमरों के बिलकुल बीच में बना है भगवान शिव का मंदिर। जिसमें लगभग 2 फीट ऊंची शिवलिंग विराजमान है। एक और प्राचीन शिवलिंग बीचों बीच इस मंदिर के चबूतरे पर रखी हुई है। जिसको देखने पर ऐसा लगता है जैसे यह शिवलिंग मंदिर से भी ज्यादा प्राचीन है। सैकड़ों साल से कई भूकंप और आंधियां आईं पर इस चौसठ योगनियों के पवित्र मंदिर की नींव हिला न सकीं। यही खासियत है इतिहास के इस बेजोड़ नमूने की।

Chausath Yogini Temple

कहां है और कैसे पहुंचे?

यह मंदिर मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में आता है और मुरैना से लगभग 34 किलोमीटर दूर मितावली गांव में स्थित यह मंदिर इतिहास प्रेमियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आपको ग्वालियर या मुरैना से यहां पहुंचने में ज्यादा समय नहीं मात्र 1 घंटा लग सकता है। जैसा कि इतनी ही दूरी ग्वालियर की है तो बिल्कुल इतना ही समय यहां से भी आपको देना पड़ सकता है।

Chausath Yogini Temple

ट्रेन के जरिए

ग्वालियर एक ऐसा जंक्शन है जहां से देश के किसी भी कोने में आप कहीं भी आ जा सकते हैं। इसके अलावा आप मुरैना से भी यहां पहुंच सकते हैं। मुरैना में भी रेलवे स्टेशन मौजूद है। पर बात आती है मुरैना या ग्वालियर से यहां तक कैसे पहुंचे? तो आप यहां से टैक्सी या ऑटो बुक कर सकते हैं।

Chausath Yogini Temple

बस से कैसे पहुंचे?

बस से आप मुरैना और ग्वालियर होते हुए यहां पहुंच सकते हैं। मुरैना और ग्वालियर तक आपको कहीं से भी बस मिल जाएगी। लेकिन यहां से आपको टैक्सी या ऑटो ही बुक करना पड़ सकता है। यदि आप अपने ही वाहन से हैं तब तो बात अलग ही है। आप आराम से यहां पहुंच सकते हैं। रास्ता बढ़िया है, गाड़ी सरपट दौड़ती है।

आस पास के आकर्षण

Chausath Yogini Temple

जब भी आप यहां जाने का प्लान बना रहे हैं तो यहां के कुछ अदभुत स्थान आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल होने चाहिए जिनमें-

बटेश्वर धाम

वास्तव में जब भी आप ग्वालियर, मुरैना या मितावली के चौसठ योगनियों के मंदिर जाने का सोच रहें हैं, तो बटेश्वर धाम जाना बिल्कुल न भूलें। क्योंकि यह एक ऐसा स्थान है जहां आप जाते ही अपने आपको प्राचीन युग में पाएंगे। 100 मंदिरों का यह गढ़ आज भी अपनी जीवंतता बनाए हुए है। यहां के हर पत्थर में आपको कुछ न कुछ गढ़ा हुआ मिलेगा। इन सैकड़ों मंदिरों में आप देख पाएंगे दिव्य शिवलिंग। इन सैकड़ों छोटे बड़े मंदिरों की अद्भुत कहानी है जो अगली पेशकश में आप पढ़ पाएंगे।

Chausath Yogini Temple

शनि मंदिर

जब आप ग्वालियर से मितावली या गढ़मुक्तेश्वर जाते हैं तो रस्ते में ही आपको मिलेगा, प्राचीन और दिव्य शनि मंदिर। माना जाता है कि यह मंदिर उल्का पिंड के पत्थर से निर्मित है। इसपर कई मतभेद हैं। जो आप यहां आकर ही सुलझा सकते हैं।

गड़ी पढ़ावली

यात्रा के दौरान जब आप गढ़मुक्तेशर से मितावली जाते हैं तो रस्ते में ही आप पाएंगे। गड़ी पढ़ावली जहां पर एक प्राचीन किले का दीदार आप कर पाएंगे। जो बेहद खास जगह है इतिहास प्रेमियों के लिए। यहां आकर आप यहां की सुंदरता और ग्रामीण जीवन को समझ पाएंगे। और इतिहास के इन पन्नो को पलटकर इनमें छिपे रहस्य जान पाएंगे।

Chausath Yogini Temple

रुकने और खाने पीने का इंतजाम

मितावली, गड़ी पढ़ावली या बटेश्वर ये छोटे छोटे गांव व कस्बे हैं। यहां आपको ज्यादा सुविधाएं मुहैया नहीं हो पाएंगी। इसलिए आप एक दो दिन के सफर पर निकले हैं तो ग्वालियर और मुरैना में आप स्टे कर सकते हैं। और मुझे लगता है एक दो दिन आप रुकेंगे तो ग्वालियर और उसके आस पास के यह सब स्थान आप आसानी से घूम पाएंगे।

Chausath Yogini Temple

जब भी आप यहां आएं तो यहां का लोकल फूड चखें, और मध्यप्रदेश की आत्मा को महसूस करें। ग्वालियर बहुत अच्छा शहर है यहां आपको कई अच्छे होटल मिल सकते हैं। लेकिन एक सुझाव यह है कि पहले आप होटल को स्वयं जाकर देख लें। ऑनलाइन भी बुक कर सकते हैं लेकिन ऑनलाइन बुकिंग में आप धोखा भी खा सकते हैं। जैसे आपसे मौटा पैसा चार्ज किया जा सकता है और फैसिलिटी उतनी उम्दा न हो! इसलिए पहले चेक करें फिर बुक करें!

Chausath Yogini Temple

फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल की तरफ से 5 यात्रा सुझाव

1.सबसे पहला सुझाव आप यात्रा के दौरान खासकर, मितावली, गड़ी पढ़ावली और बटेश्वर जाने के दौरान पानी साथ में रखें। दुकानें यहां कम हैं।

2.यदि पॉवर बैंक साथ रखें तो बेहतर है क्योंकि फोन कभी भी बंद हो सकता है।

3. उतावले न बनें, इतिहास की इन नायाब चीजों को ध्यान से जिएं, खासकर बटेश्वर और मितावली को। (चौसठ योगनियों के मंदिर को)

4. मितावली के चौसठ योगनी मंदिर में प्रवेश करने से पहले जूते चप्पल बाहर ही उतार दें। यहां आपको किसी तरह की कोई रिस्ट्रिक्शन नहीं है, पर यह एक प्राचीन मंदिर है और बाकी आप समझदार हैं।

5. यदि अकेले हो तो किसी के भी बहकावे में न आएं!

Chausath Yogini Temple

टिकिट कितने की है?

अभी यह नायाब चीजें भीड़ भाड़ से मुक्त हैं। जिसके कारण अभी यहां टिकिट वगैरह की व्यवस्था नहीं है। बटेश्वर में आपको सेफ्टी गार्ड दिख जाएंगे। लेकिन मितावली में ऐसा कोई प्रोसीजर नहीं है। मतलब इन जगहों पर आप बिना किसी शुल्क के घूम सकते हैं और इस प्राचीन इतिहास को जी सकते हैं। कोई भी किसी तरह का पैसा मांगें तो न दें।

नोट:_ एक और बात भविष्य में यहां टिकिट जैसी चीजें आ सकतीं हैं फिलहाल नहीं है। तो इस बात का विशेष ध्यान रखें।

By Five Colors Of Travel

Five Colors of Travel भारत का एक भरोसेमंद Hindi Travel Blog है जहां आप ऑफबीट डेस्टिनेशन, culture, food, lifestyle और travel tips की authentic जानकारी पढ़ते हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *