Verification जरूरी! तत्काल टिकट बुकिंग में बड़ा बदलाव
अगर आप ट्रेन से सफर करते हैं, तो तत्काल टिकट बुक करने की परेशानी से जरूर गुजरे होंगे। सुबह टिकट बुकिंग शुरू होते ही लाखों लोग एक साथ वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर लॉगिन करने की कोशिश करते हैं। कुछ ही मिनटों में सीटें भर जाती हैं और बहुत से यात्रियों को कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता। कई बार तो यात्री अपनी सारी जानकारी भरने के बाद भुगतान तक पहुंच जाते हैं, लेकिन तब तक टिकट खत्म हो चुका होता है। इसके पीछे एक बड़ी वजह टिकटों की कालाबाजारी और बॉट्स यानी अपने आप काम करने वाले कंप्यूटर प्रोग्राम भी माने जाते हैं। इसी समस्या को रोकने के लिए रेलवे ने तत्काल टिकट बुकिंग में Verification की प्रक्रिया को जरूरी बनाया है। हाल ही में केरल हाई कोर्ट ने ऑनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग में आधार आधारित Verification को सही माना है। अदालत के सामने यह सवाल था कि क्या ऑनलाइन तत्काल टिकट बुक करने के लिए आधार से जुड़ी पहचान की प्रक्रिया जरूरी की जा सकती है। अदालत ने इस व्यवस्था को सही मानते हुए कहा कि अगर इसका उद्देश्य टिकटों की कालाबाजारी रोकना और असली यात्रियों को टिकट दिलाना है, तो ऐसी Verification प्रक्रिया सार्वजनिक हित में हो सकती है। समस्या की शुरुआत कहां से हुई? इस पूरे मामले की शुरुआत उस समस्या से होती है जिससे आम यात्री लंबे समय से परेशान हैं। तत्काल टिकट की बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही सेकंड में बड़ी संख्या में टिकट बुक हो जाते हैं। कई यात्रियों का आरोप रहा है कि दलाल और कुछ विशेष कंप्यूटर प्रोग्राम बहुत तेजी से टिकट बुक कर लेते हैं। इसके बाद वही टिकट अधिक कीमत पर बेचने की कोशिश की जाती है। ऐसे में जो व्यक्ति वास्तव में यात्रा करना चाहता है, वह टिकट के लिए परेशान होता रहता है। रेलवे का कहना है कि नई Verification व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य इसी तरह की गड़बड़ियों को कम करना है। रेलवे ने ऑनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग के लिए आधार आधारित Verification को अनिवार्य किया है। इसका मतलब है कि जो यात्री आईआरसीटीसी की वेबसाइट या मोबाइल ऐप से तत्काल टिकट बुक करना चाहते हैं, उन्हें अपने खाते की पहचान की पुष्टि करनी होगी। इस प्रक्रिया में यात्री की पहचान आधार से जुड़ी जानकारी और मोबाइल पर आने वाले एक बार इस्तेमाल होने वाले पासवर्ड के जरिए जांची जाती है। इस Verification के बाद रेलवे को यह समझने में मदद मिलती है कि टिकट बुक करने वाला व्यक्ति वास्तविक यात्री है या किसी तरह का स्वचालित कार्यक्रम। Verification का मतलब क्या है? यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है कि Verification का मतलब यह नहीं है कि हर बार टिकट बुक करते समय आपको पूरी प्रक्रिया दोहरानी होगी। आमतौर पर खाता सत्यापित होने के बाद यह प्रक्रिया एक बार पूरी करनी होती है। इसके बाद यात्री को तत्काल टिकट बुक करते समय पहले से तैयार खाते के साथ आगे बढ़ने में आसानी होती है। इसलिए अगर आप नियमित रूप से तत्काल टिकट बुक करते हैं, तो पहले से अपनी पहचान Verification पूरी कर लेना आपके लिए काफी उपयोगी हो सकता है। रेलवे ने टिकट बुकिंग में बॉट्स और स्वचालित कार्यक्रमों को रोकने के लिए कई स्तरों पर Verification व्यवस्था मजबूत की है। पहले कई बार ऐसा होता था कि टिकट बुकिंग शुरू होते ही कुछ खाते असामान्य तेजी से बड़ी संख्या में टिकट बुक कर लेते थे। ऐसे खातों की पहचान करना रेलवे के लिए एक बड़ी चुनौती थी। अब पहचान Verification, मोबाइल नंबर की पुष्टि और कंप्यूटर प्रणाली की निगरानी के जरिए संदिग्ध गतिविधियों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है। केरल हाई कोर्ट के फैसले में निजता का मुद्दा केरल हाई कोर्ट के फैसले में निजता का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा। याचिका में यह सवाल उठाया गया था कि क्या किसी व्यक्ति को तत्काल टिकट बुक करने के लिए आधार Verification से गुजरना जरूरी किया जा सकता है। अदालत ने इस मामले में माना कि रेलवे का उद्देश्य टिकटों की धोखाधड़ी और कालाबाजारी को रोकना है। अगर Verification का इस्तेमाल सीमित उद्देश्य के लिए किया जाता है और यात्रियों की जानकारी को सुरक्षित रखा जाता है, तो यह व्यवस्था असली यात्रियों के हित में हो सकती है। रेलवे की ओर से यह भी बताया गया है कि आधार नंबर को सीधे अपने पास रखने के बजाय पहचान की पुष्टि के लिए सीमित जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य यह जांचना होता है कि यात्री की पहचान सही है या नहीं। इस तरह की Verification व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों की निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि टिकट बुकिंग व्यवस्था को सुरक्षित बनाना बताया गया है। क्या बिना आधार Verification के तत्काल टिकट नहीं मिलेगा? अब सवाल यह है कि क्या आधार Verification के बिना तत्काल टिकट बुक नहीं किया जा सकता? ऑनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग के मामले में आधार आधारित Verification जरूरी है। हालांकि रेलवे काउंटर से टिकट लेने की प्रक्रिया अलग हो सकती है। अगर कोई यात्री ऑनलाइन बुकिंग नहीं करना चाहता, तो वह रेलवे के टिकट काउंटर से उपलब्ध नियमों के अनुसार टिकट लेने का विकल्प चुन सकता है। इसलिए यात्रियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन टिकट बुकिंग के नियमों के बीच अंतर समझना चाहिए। तत्काल टिकट बुकिंग में अधिकृत एजेंटों के लिए भी रेलवे ने अलग नियम बनाए हैं। एजेंटों को तत्काल टिकट खुलते ही शुरुआती समय में बुकिंग करने की अनुमति नहीं होती। इसका उद्देश्य यह है कि आम यात्री को टिकट बुक करने का पहला मौका मिले। पहले कई यात्रियों की शिकायत थी कि टिकट खुलते ही बड़ी संख्या में सीटें बुक हो जाती हैं और आम लोगों के लिए बहुत कम विकल्प बचते हैं। एजेंटों पर समय सीमा और Verification नियम लागू करने से इस समस्या को कम करने की कोशिश की जा रही है। IRCTC खाता Verification कैसे करें? अगर आप अपना आईआरसीटीसी खाता Verification करना चाहते हैं, तो यह प्रक्रिया बहुत मुश्किल नहीं है। आपको अपने खाते में जाकर पहचान Verification से जुड़े विकल्प को चुनना होता है। इसके बाद मांगी गई जानकारी भरनी होती है और मोबाइल पर आए पासवर्ड के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होती है। यह काम टिकट बुकिंग