
जानिए असम क्यों कहलाता है भारत का हैंडलूम कैपिटल?
भारत में हैंडलूम सिर्फ कपड़ा बनाने का तरीका नहीं है, बल्कि यह लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी और पुरानी परंपराओं से जुड़ा हुआ काम है। गांवों में आज भी
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भारत में हैंडलूम सिर्फ कपड़ा बनाने का तरीका नहीं है, बल्कि यह लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी और पुरानी परंपराओं से जुड़ा हुआ काम है। गांवों में आज भी

भारत में कई शहर अपने खास उद्योग और परंपराओं के कारण दुनिया भर में पहचाने जाते हैं। इन्हीं में से एक शहर ऐसा है जिसे “सिल्क सिटी ऑफ इंडिया”

पिछले कुछ दशकों में दुनिया भर में खाने-पीने की आदतों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लोग अब हेल्दी और पोषण से भरपूर भोजन की ओर तेजी से

दुनिया में आर्थिक विकास और बदलती जीवनशैली के साथ निजी वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आज कई देशों में कार सिर्फ एक परिवहन साधन नहीं रही, बल्कि

भारत एक ऐसा देश है जहाँ आधुनिकता और परंपरा साथ-साथ चलती हैं। यहाँ ऊँची इमारतों, चमकते बाज़ारों और तेज़ रफ्तार जिंदगी के बीच सदियों पुरानी विरासत भी उतनी ही

भारत को सदियों से मसालों, खुशबुओं और रंगों की धरती कहा जाता है। यहां का इतिहास केवल राजाओं और किलों में ही नहीं, बल्कि उन बाजारों में भी बसता

दुनिया की सबसे साधारण दिखने वाली सब्ज़ी अगर कोई है, तो वह है आलू। लेकिन यही साधारण सा आलू वैश्विक खाद्य व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। चाहे भारत

दिल्ली की पहचान केवल इंडिया गेट या कनॉट प्लेस जैसी आधुनिक जगहों से नहीं बनती, बल्कि इसकी असली रूह पुरानी दिल्ली की तंग, घुमावदार और हमेशा चहल-पहल से भरी

भारत के लगभग हर लोकप्रिय हिल स्टेशन में आपको Mall Roads जरूर मिलेंगे। चाहे वह शिमला की ठंडी वादियां हों, मसूरी की पहाड़ों से घिरी सड़कें हों, नैनीताल की

हम सभी के भीतर एक घुमक्कड़ छिपा होता है जो हर शुक्रवार की दोपहर दफ्तर की खिड़की से बाहर देखते हुए बस एक ही सपना बुनता है। किसी अनजानी






Best Documentary Category Award Winner in International Film Festival Chandigarh
लम्बे सफर पर चलते-चलते बीच राह किसी ढ़ाबे पर कड़क चाय पीने की तलब हमेशा मुझे ज़िंदा बनाये रखती
है।- प्रदीप कुमार Tweet