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Interchange: 15 अक्टूबर से EPE-Yamuna Expressway का सीधा रूट

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अगर आप Delhi-NCR में रहते हैं और अक्सर गाज़ियाबाद, मेरठ, सोनीपत, पलवल या कुंडली की तरफ से यमुना एक्सप्रेसवे होते हुए आगरा या जेवर की तरफ जाते हैं, तो एक खबर आपके रोज़ के सफर को काफी आसान कर सकती है। खासकर अगर आपने कभी परी चौक के आसपास ट्रैफिक में फंसकर 20-30 मिनट सिर्फ इसी सोच में निकाल दिए हों कि आखिर यहां से निकलेंगे कब! अब इसी परेशानी को कम करने के लिए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे को सीधे जोड़ने वाला Interchange 15 अक्टूबर 2026 से खोलने की तैयारी है। इसका मतलब यह है कि जो गाड़ियां अभी एक्सप्रेसवे से उतरकर कासना, ग्रेटर नोएडा और परी चौक की तरफ से घूमती हैं, उन्हें आगे चलकर सीधे एक एक्सप्रेसवे से दूसरे एक्सप्रेसवे पर जाने का रास्ता मिलेगा। यह बदलाव सिर्फ रास्ता छोटा करने तक सीमित नहीं है। इससे समय, ईंधन और शहर की अंदरूनी सड़कों पर बढ़ने वाला ट्रैफिक भी कम हो सकता है। तो आखिर यह Interchange है क्या, कहां बना है और इससे जेवर एयरपोर्ट जाने वालों को कितना फायदा मिलने वाला है? चलिए आसान भाषा में पूरी बात समझते हैं। अभी तक EPE और यमुना एक्सप्रेसवे के बीच सीधा रास्ता क्यों नहीं था? दिलचस्प बात यह है कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे एक-दूसरे को क्रॉस करते हैं, लेकिन लंबे समय तक दोनों के बीच सीधा कनेक्शन नहीं था। यानी दोनों एक्सप्रेसवे पास होने के बावजूद एक से दूसरे पर सीधे चढ़ने या उतरने की सुविधा मौजूद नहीं थी। यही वजह थी कि यात्रियों को बीच में एक्सप्रेसवे छोड़कर स्थानीय सड़कों का सहारा लेना पड़ता था। मान लीजिए आप गाज़ियाबाद या मेरठ की तरफ से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर आ रहे हैं और आपको आगरा की तरफ जाना है। ऐसे में आपको पहले EPE से बाहर निकलना पड़ता था और फिर ग्रेटर नोएडा की तरफ की सड़कों से होते हुए यमुना एक्सप्रेसवे तक पहुंचना पड़ता था। इस रास्ते में कासना और परी चौक जैसे इलाके आते हैं, जहां ट्रैफिक बढ़ने पर कुछ किलोमीटर का रास्ता काफी लंबा लगने लगता है। नया Interchange इसी पुराने चक्कर को खत्म करने के लिए बनाया जा रहा है। परी चौक और कासना के जाम से कैसे मिलेगी राहत? परी चौक ग्रेटर नोएडा का एक महत्वपूर्ण ट्रैफिक पॉइंट है और यहां से रोज़ बड़ी संख्या में स्थानीय और बाहरी वाहन गुजरते हैं। समस्या तब ज्यादा बढ़ जाती है जब एक्सप्रेसवे का ट्रैफिक भी शहर की सड़कों पर आ जाता है। ट्रक, बस, कार और स्थानीय वाहन एक ही रास्ते पर आने लगते हैं और फिर जाम का असर आसपास के इलाकों तक दिखाई देता है। नया Interchange इस ट्रैफिक को शहर की अंदरूनी सड़कों से दूर रखने में मदद करेगा। EPE से आने वाले वाहनों को यमुना एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए परी चौक की तरफ जाने की जरूरत कम होगी। इससे एक तरफ यात्रियों का चक्कर कम होगा और दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा की स्थानीय सड़कों पर भी बाहरी ट्रैफिक का दबाव घट सकता है। कहां बनाया जा रहा है यह नया Interchange? यह Interchange ग्रेटर नोएडा में गलगोटियास यूनिवर्सिटी और जगनपुर-अफजलपुर गांव के आसपास बनाया जा रहा है। इसकी लोकेशन ऐसी रखी गई है कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों को यमुना एक्सप्रेसवे तक सीधा कनेक्शन मिल सके। यह जगह यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो पॉइंट से लगभग 10 किलोमीटर आगे बताई जा रही है। यानी परी चौक के आसपास से निकलने के बजाय एक्सप्रेसवे के रास्ते ही आगे बढ़कर दूसरे एक्सप्रेसवे पर पहुंचने का विकल्प मिलेगा। यही इस पूरे Interchange की सबसे बड़ी खासियत है। क्लोवरलीफ डिजाइन वाला यह Interchange इतना खास क्यों है? यह कोई साधारण कट या फ्लाईओवर नहीं है। इसे क्लोवरलीफ डिजाइन पर तैयार किया जा रहा है। इस डिजाइन में अलग-अलग दिशाओं से आने वाली गाड़ियों को सीधे दूसरी सड़क पर ले जाने के लिए घुमावदार लूप बनाए जाते हैं। इस Interchange में कुल चार एंट्री और चार एग्जिट लूप हैं। यानी अलग-अलग दिशाओं से आने वाली गाड़ियों के लिए अलग रास्ते तैयार किए गए हैं। इन लूप्स की कुल लंबाई करीब 13 किलोमीटर बताई जा रही है और पूरा प्रोजेक्ट लगभग 83 हेक्टेयर जमीन में फैला हुआ है। इसका फायदा यह होगा कि वाहन चालकों को किसी सामान्य चौराहे की तरह रेड लाइट पर रुककर दूसरी दिशा का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। एक्सप्रेसवे से आने वाली गाड़ियां निर्धारित लूप के जरिए दूसरी दिशा में जा सकेंगी। इससे हाईवे का ट्रैफिक ज्यादा व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ सकता है। 15 अक्टूबर से क्या बदलेगा यात्रियों के लिए? अगर तय कार्यक्रम के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 से यह Interchange आम यातायात के लिए खुलता है, तो EPE से यमुना एक्सप्रेसवे की तरफ जाने वाले यात्रियों के लिए रास्ता काफी सीधा हो जाएगा। अभी जहां लोगों को एक्सप्रेसवे से उतरकर स्थानीय सड़कों और परी चौक की तरफ जाना पड़ता है, वहीं नया रास्ता उन्हें सीधे यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ देगा। अलग-अलग रूट और ट्रैफिक की स्थिति के हिसाब से करीब 15 से 30 मिनट तक की बचत होने की उम्मीद बताई जा रही है। सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जिन्हें रोज़ या अक्सर पश्चिमी उत्तर प्रदेश से यमुना एक्सप्रेसवे की तरफ जाना पड़ता है। उनके लिए Interchange सिर्फ एक नया रास्ता नहीं, बल्कि रोज़ के सफर में समय बचाने वाला कनेक्शन बन सकता है। जेवर एयरपोर्ट जाने वालों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कनेक्शन? नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर के आसपास आने वाले समय में यातायात बढ़ने की उम्मीद है। एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए अच्छी सड़क कनेक्टिविटी का होना जरूरी है और इस मामले में यह Interchange एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है। पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और Delhi-NCR के कुछ हिस्सों से आने वाले यात्रियों के लिए EPE पहले से ही एक बड़ा एक्सप्रेसवे कनेक्शन है। अब अगर उसी से यमुना एक्सप्रेसवे पर सीधे जाने का रास्ता मिल जाता है, तो उन्हें ग्रेटर नोएडा की अंदरूनी सड़कों से होकर जाने की जरूरत कम पड़ेगी। इससे एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के साथ-साथ भारी वाहनों और दूसरे बाहरी ट्रैफिक को भी शहर के अंदर आने से रोका जा सकता है। इसलिए Interchange की अहमियत सिर्फ आज के ट्रैफिक

Co-ord Set Bazar Latest Travel

पूरा दिन घूमने के लिए कैसा है ये Co-ord Set? जानें फायदे

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ट्रैवल करते समय सबसे ज्यादा परेशानी कपड़े चुनने में होती है। हमें ऐसे कपड़े चाहिए जो पूरे दिन पहनने के बाद भी आरामदायक रहें, चलने-फिरने में परेशानी न हो और तस्वीरों में भी अच्छे दिखें। खासकर जब किसी शहर को घूमने के लिए पूरा दिन बाहर रहना हो, तो बहुत ज्यादा टाइट या भारी कपड़े कुछ घंटों बाद ही परेशान करने लगते हैं। इसके साथ एक और बात रहती है—धूप। ट्रैवल के दौरान कई बार सुबह से शाम तक बाहर रहना पड़ता है और ऐसे में शरीर का काफी हिस्सा सीधे धूप के संपर्क में रहता है। इसलिए बहुत सी लड़कियां ऐसे कपड़े पसंद करती हैं जो शरीर को अच्छी तरह ढकें और साथ ही पहनने में हल्के और आरामदायक हों। हालांकि, कोई भी कपड़ा टैनिंग को पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं देता, लेकिन शरीर को ढकने वाले कपड़े सीधे धूप के संपर्क को कम जरूर कर सकते हैं। यहीं पर इस तरह का Co-ord Set काम आता है। ऊपर जैकेट जैसी पूरी आस्तीन वाली ड्रेस और नीचे ढीली-सी पैंट—दोनों एक ही रंग और लुक में हैं, इसलिए अलग-अलग कपड़े मिलाने की मेहनत भी नहीं करनी पड़ती। एक ही कपड़े से पूरा लुक तैयार इस Co-ord Set की सबसे अच्छी बात यही है कि इसमें ऊपर और नीचे के कपड़े को अलग-अलग सोचने की जरूरत नहीं पड़ती। दोनों पहले से एक-दूसरे के साथ मेल खाते हैं। यानी अगर सुबह जल्दी निकलना है और आपको समझ नहीं आ रहा कि कौन-सा टॉप किस पैंट के साथ पहनें, तो ऐसी स्थिति में यह सेट काफी आसान विकल्प बन जाता है। ऊपर की जैकेट जैसी ड्रेस में पूरी आस्तीन दिखाई दे रही है और नीचे चौड़ी पैंट है। पूरा लुक ढीला और आरामदायक रखा गया है, इसलिए इसे सिर्फ फैशन के लिए नहीं बल्कि लंबे ट्रैवल वाले दिन के लिए भी देखा जा सकता है। ट्रैवल के लिए क्यों काम आ सकता है यह Co-ord Set? ट्रैवल में कपड़ों की खूबसूरती से ज्यादा जरूरी होता है कि उन्हें पहनकर आप कितनी आसानी से पूरा दिन निकाल सकती हैं। मान लीजिए आप सुबह होटल से निकलती हैं। पहले स्टेशन या एयरपोर्ट जाना है, फिर गाड़ी से काफी लंबा सफर करना है और पहुंचने के बाद किसी बाजार, कैफे या घूमने वाली जगह पर जाना है। ऐसे दिन में बार-बार कपड़े बदलना आसान नहीं होता। ऐसे में एक आरामदायक Co-ord Set काफी काम आ सकता है। इसके ऊपर और नीचे का रंग एक जैसा होने की वजह से पूरा पहनावा पहले से तैयार लगता है। आपको बस जूते, बैग और कुछ छोटी एक्सेसरीज़ के साथ इसे पूरा करना है। ढीली पैंट लंबे सफर में दे सकती है ज्यादा आराम ट्रैवल करते समय सबसे ज्यादा परेशानी अक्सर पैंट से होती है। बहुत ज्यादा टाइट पैंट में लंबे समय तक बैठना, गाड़ी में सफर करना या किसी जगह घूमते हुए लगातार चलना असहज लग सकता है। इस तस्वीर में नीचे चौड़ी और ढीली पैंट दिखाई दे रही है। कमर पर बांधने के लिए डोरी भी दी गई है, इसलिए इसका लुक काफी आरामदायक दिखाई देता है। ऐसी पैंट को आप ट्रेन, बस, फ्लाइट या कार से लंबे सफर के दौरान पहनने के बारे में सोच सकती हैं। खासकर तब, जब आपका पूरा दिन घूमने में निकलने वाला हो। हालांकि खरीदने से पहले अपने साइज़ और कमर की फिटिंग जरूर देखनी चाहिए, क्योंकि ढीला डिज़ाइन होने के बावजूद हर व्यक्ति को एक जैसी फिटिंग आरामदायक नहीं लगती। ऊपर की पूरी आस्तीन भी ट्रैवल में काम आ सकती है ट्रैवल के दौरान कपड़े सिर्फ अच्छे दिखने के लिए नहीं चुने जाते। उनका काम मौसम और जगह के हिसाब से भी होना चाहिए। इस Co-ord Set में ऊपर की ड्रेस पूरी आस्तीन वाली है। अगर आप सुबह जल्दी निकल रही हैं या शाम के समय मौसम थोड़ा ठंडा है, तो पूरी आस्तीन वाला ऊपर का हिस्सा उपयोगी हो सकता है। और दिन में अगर धूप तेज है, तो शरीर का ज्यादा हिस्सा ढका हुआ रहता है। इससे त्वचा का सीधे धूप के संपर्क में आने वाला हिस्सा कम हो सकता है। लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है—सिर्फ कपड़े पहनने से टैनिंग पूरी तरह नहीं रुकती। धूप में लंबे समय तक रहने पर सनस्क्रीन, धूप से बचने की आदत और जरूरत के हिसाब से दूसरी सुरक्षा भी जरूरी है। ग्रे रंग का फायदा स्क्रीनशॉट में यह सेट ग्रे रंग में दिखाई दे रहा है। ग्रे एक ऐसा रंग है जिसे अलग-अलग जगहों पर आसानी से पहना जा सकता है। अगर आप इसे सफेद जूतों के साथ पहनती हैं तो पूरा लुक काफी साफ-सुथरा दिखाई देगा। इसके साथ छोटा कंधे वाला बैग या फिर ट्रैवल बैग रखा जा सकता है। अगर थोड़ा कैज़ुअल लुक चाहिए तो स्पोर्ट्स शूज़ के साथ इसे पहना जा सकता है। वहीं अगर घूमने के लिए किसी कैफे या अच्छी जगह जाना है, तो छोटे आभूषण और एक छोटा बैग जोड़कर लुक को थोड़ा अलग बनाया जा सकता है। एक ही सेट को अलग-अलग तरीके से पहन सकती हैं Co-ord Set खरीदने का एक फायदा यह भी है कि जरूरी नहीं कि आपको हमेशा ऊपर और नीचे दोनों कपड़े साथ ही पहनने पड़ें। अगर ऊपर वाली ड्रेस अलग से अच्छी लग रही है तो उसे किसी दूसरी पैंट या जींस के साथ पहना जा सकता है। इसी तरह नीचे वाली पैंट को किसी साधारण टॉप या टी-शर्ट के साथ भी पहना जा सकता है। यानी एक ही सेट से आगे चलकर अलग-अलग पहनावे बनाए जा सकते हैं। ट्रैवल के लिए यह खास तौर पर अच्छा है, क्योंकि बैग में कम कपड़े रखकर भी अलग-अलग लुक बनाए जा सकते हैं। ट्रैवल फोटो में भी अच्छा लगेगा आजकल ट्रैवल का मतलब सिर्फ जगह घूमना नहीं रह गया है। रास्ते में तस्वीरें लेना, वीडियो बनाना और अलग-अलग जगहों पर यादें कैद करना भी ट्रैवल का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में कपड़ों का रंग और पूरा लुक भी मायने रखता है। ग्रे रंग का यह Co-ord Set काफी साधारण और साफ लुक देता है। किसी एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, कैफे, होटल या शहर की सड़क पर इसे पहनकर तस्वीरें ली जा सकती हैं। अगर बैकग्राउंड में कोई पुरानी इमारत

Rang Ras Rooh Delhi Five Colors of Delhi Latest Travel

Rang Ras Rooh: Nizami Brothers के साथ Delhi की खास शाम

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Delhi में अगर आपको सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि एक ऐसी शाम बितानी है जहां कला, संगीत, खाने-पीने की खुशबू और देश की अलग-अलग सांस्कृतिक झलक एक ही जगह देखने को मिले, तो इस बार Rang Ras Rooh आपके लिए खास हो सकता है। 26 और 27 सितंबर को Baansera Park में होने वाला Rang Ras Rooh भारत की कला, संस्कृति, स्वाद और संगीत को एक साथ सामने लाने वाला आयोजन है। इस आयोजन की सबसे खास बात इसका माहौल है, जहां आप सिर्फ मंच पर होने वाला कार्यक्रम देखने नहीं जाएंगे, बल्कि आसपास के रंग, सजावट, खाने की खुशबू, लोगों की भीड़ और संगीत के बीच पूरा माहौल महसूस कर सकेंगे। पोस्टर के मुताबिक, Rang Ras Rooh में Nizami Brothers की प्रस्तुति भी होने वाली है। यानी अगर आपको सूफियाना संगीत और ऐसी आवाजें पसंद हैं जिनमें एक अलग तरह की गहराई होती है, तो यह आयोजन आपके लिए दिलचस्प हो सकता है। और सबसे अच्छी बात यह है कि प्रवेश शुल्क सिर्फ ₹50 रखा गया है। तो अगर आप इस सप्ताहांत Delhi में हैं और सोच रहे हैं कि इस बार कुछ अलग किया जाए, तो Rang Ras Rooh को अपनी सूची में शामिल किया जा सकता है। Rang Ras Rooh आखिर क्या है? Rang Ras Rooh नाम ही अपने आप में इस आयोजन की पूरी भावना को सामने रखता है। रंग यानी कला और उत्सव की खूबसूरती, रस यानी स्वाद और अनुभव, और रूह यानी वह एहसास जो संगीत और संस्कृति के जरिए सीधे दिल तक पहुंचता है। पोस्टर में इसे भारत की कला, संस्कृति, स्वाद और आत्मीय परंपराओं का उत्सव बताया गया है। इसलिए इसे केवल संगीत कार्यक्रम समझना सही नहीं होगा। Rang Ras Rooh का विचार ही कुछ ऐसा दिखाई देता है जहां अलग-अलग अनुभवों को एक साथ लाने की कोशिश की गई है। आप वहां संगीत सुन सकते हैं, आसपास की सजावट और कला को देख सकते हैं, खाने-पीने की चीजों का आनंद ले सकते हैं और दोस्तों या परिवार के साथ खुले माहौल में समय बिता सकते हैं। यानी यह उन लोगों के लिए भी है जिन्हें संगीत पसंद है और उन लोगों के लिए भी जो Delhi में कोई नया सांस्कृतिक अनुभव ढूंढ रहे हैं। Baansera Park में होने वाला है यह रंगीन आयोजन Rang Ras Rooh का आयोजन Baansera Park में 26 और 27 सितंबर को होने वाला है। Baansera Park का खुला और हरियाली वाला वातावरण ऐसे आयोजन के लिए एक अलग माहौल बना सकता है। खासकर जब किसी कार्यक्रम में संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल हों, तो खुले स्थान का अनुभव किसी बंद सभागार से बिल्कुल अलग होता है। शाम का समय, आसपास रोशनी, लोगों की आवाजाही और मंच से आती संगीत की आवाज—इन सबके बीच Rang Ras Rooh का अनुभव सामान्य Delhi की भागदौड़ से थोड़ा अलग हो सकता है। अगर आप ऐसे आयोजनों में जाना पसंद करते हैं जहां सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि पूरा माहौल देखने को मिलता है, तो इस आयोजन को देखा जा सकता है। 26 और 27 सितंबर को क्या है खास? इस आयोजन की तारीख 26 और 27 सितंबर है। मतलब आपके पास Rang Ras Rooh देखने के लिए दो दिन का मौका रहेगा। दो दिन का आयोजन होने की वजह से Delhi के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले लोगों के लिए भी अपनी सुविधा के हिसाब से दिन चुनना आसान हो सकता है। हालांकि आयोजन में किस दिन कौन-सी प्रस्तुति होगी, इसकी पूरी जानकारी पोस्टर में नहीं दी गई है, इसलिए जाने से पहले आयोजकों की तरफ से जारी ताजा जानकारी जरूर देख लें। लेकिन इतना साफ है कि इन दोनों दिनों में Baansera Park कला, संस्कृति और संगीत के रंग में रंगा दिखाई देगा। Nizami Brothers की प्रस्तुति बनेगी खास आकर्षण Rang Ras Rooh के पोस्टर में Nizami Brothers का नाम खास तौर पर दिया गया है। Nizami Brothers की प्रस्तुति इस आयोजन को संगीत के लिहाज से खास बना सकती है। सूफियाना संगीत की अपनी एक अलग खूबसूरती होती है। इसमें केवल गीत सुनना ही अनुभव नहीं होता, बल्कि शब्दों और सुरों के साथ एक भाव भी जुड़ा होता है। ऐसे में जब खुले वातावरण में लोग बैठकर संगीत सुनते हैं, आसपास रोशनी होती है और शाम का माहौल बन रहा होता है, तो इसका अनुभव और भी खूबसूरत हो सकता है। अगर आपको शास्त्रीय, सूफियाना या दिल को छूने वाला संगीत पसंद है, तो Rang Ras Rooh में Nizami Brothers की प्रस्तुति आपके लिए आकर्षण का बड़ा कारण हो सकती है। यहां सिर्फ संगीत सुनने नहीं जाना है कई बार किसी कार्यक्रम का नाम सुनते ही हमें लगता है कि वहां सिर्फ मंच पर कलाकार आएंगे और कार्यक्रम खत्म हो जाएगा। लेकिन Rang Ras Rooh की खासियत इसकी थीम में ही दिखाई देती है। यह आयोजन कला, संस्कृति, स्वाद और संगीत को एक साथ जोड़ने की बात करता है। यानी यहां पहुंचने के बाद आपका अनुभव सिर्फ मंच तक सीमित नहीं रहेगा। आसपास लगे स्टॉल, सजावट, खाने की खुशबू, लोगों की बातचीत और संगीत—इन सबको मिलाकर एक पूरा माहौल तैयार होगा। इसी वजह से Rang Ras Rooh दोस्तों के साथ शाम बिताने के लिए भी अच्छा विकल्प हो सकता है। Delhi में कुछ अलग करना है तो यहां जा सकते हैं Delhi में हर सप्ताह कुछ न कुछ होता रहता है। कहीं बाजार लगते हैं, कहीं प्रदर्शनियां होती हैं, कहीं संगीत कार्यक्रम होते हैं और कहीं खाने के आयोजन। लेकिन Rang Ras Rooh की खासियत यह है कि यहां आपको इन सभी चीजों का मिश्रण देखने को मिल सकता है। अगर आप लगातार मॉल, कैफे या सामान्य घूमने की जगहों पर जाकर थोड़ा ऊब चुके हैं, तो इस तरह का सांस्कृतिक आयोजन आपके सप्ताहांत को थोड़ा अलग बना सकता है। आप अपने दोस्तों के साथ जा सकते हैं, परिवार के साथ जा सकते हैं या फिर ऐसे किसी व्यक्ति के साथ जा सकते हैं जिसे संगीत और कला पसंद हो। सिर्फ युवाओं के लिए नहीं है Rang Ras Rooh ऐसे आयोजनों को देखकर अक्सर लगता है कि यह केवल युवाओं के लिए होंगे। लेकिन Rang Ras Rooh की थीम को देखें तो यह अलग-अलग उम्र के लोगों के

Meghalaya Destination Latest Travel

Meghalaya Travel Guide: 7 दिन में घूमने की पूरी जानकारी

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अगर आपको ऐसी जगह घूमने का मन है जहां सुबह आंख खुलते ही सामने बादल हों, रास्ते के दोनों तरफ हरे-भरे पहाड़ हों और थोड़ी दूर चलने पर कोई झरना अचानक सामने आ जाए, तो इस बार अपनी यात्रा की सूची में Meghalaya को जरूर शामिल करें। पूर्वोत्तर भारत का यह राज्य सिर्फ खूबसूरत पहाड़ों और बारिश के लिए ही मशहूर नहीं है, बल्कि यहां के गांव, स्थानीय बाजार, खाना, संगीत और लोगों की जीवनशैली भी इसे बाकी पहाड़ी जगहों से अलग बनाती है। पिछले कुछ समय में Meghalaya को लेकर यात्रियों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है। शिलांग, चेरापूंजी यानी सोहरा, दावकी, नोंग्रियट और वारी चोरा जैसी जगहें अब सोशल मीडिया पर लगातार दिखाई देती हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि यहां अभी भी ऐसी कई जगहें हैं जहां पहुंचकर आपको भीड़ से ज्यादा प्रकृति मिलेगी। अगर आप पहली बार Meghalaya जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि कितने दिन रखें, कहां से शुरुआत करें, कितना बजट लगेगा और कौन-सी जगहें सच में देखने लायक हैं। इसलिए इस गाइड में शिलांग से लेकर सोहरा, छुपे झरनों, गांवों, बजट स्टे और सात दिन के रूट तक सब कुछ आसान भाषा में समझते हैं। शिलांग से शुरू करें Meghalaya की पहली मुलाकात Meghalaya की यात्रा करने वाले ज्यादातर लोग अपनी शुरुआत शिलांग से करते हैं। राज्य की राजधानी शिलांग को लंबे समय से ‘स्कॉटलैंड ऑफ द ईस्ट’ कहा जाता है। यहां चीड़ के पेड़ों से घिरी पहाड़ियां, ठंडा मौसम, छोटे कैफे, पुराने बाजार और संगीत से जुड़ी संस्कृति शहर को अलग पहचान देते हैं। अगर आप गुवाहाटी से आ रहे हैं तो शिलांग पहुंचना काफी आसान है। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन या पलटन बाजार से साझा सूमो और दूसरी गाड़ियां मिल जाती हैं। सामान्य तौर पर साझा गाड़ी का किराया करीब ₹400 से ₹500 प्रति सीट के आसपास हो सकता है और यात्रा में लगभग तीन से साढ़े तीन घंटे लग सकते हैं। मौसम और मांग के हिसाब से किराया बदल सकता है, इसलिए निकलने से पहले स्थानीय किराया जरूर पूछ लें। उमियम झील पर रुकना आपकी यात्रा का पहला पड़ाव हो सकता है शिलांग की तरफ जाते समय उमियम झील यानी बारापानी पर रुकना Meghalaya की यात्रा की अच्छी शुरुआत हो सकती है। पहाड़ियों के बीच फैला शांत पानी और आसपास की हरियाली कुछ देर के लिए आपको रास्ते की थकान भुला देती है। यहां मौसम साफ हो तो झील का दृश्य काफी खूबसूरत दिखाई देता है। नौकायन और दूसरी गतिविधियों की सुविधा मौसम और स्थानीय संचालन के हिसाब से उपलब्ध हो सकती है। अगर आप फोटो खींचने के शौकीन हैं तो सुबह या शाम की रोशनी में यहां का नजारा खास लग सकता है। शिलांग में इन जगहों को अपनी सूची में जरूर रखें शिलांग में घूमने के लिए बहुत ज्यादा दिन की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन कुछ जगहें ऐसी हैं जिन्हें पहली यात्रा में छोड़ना ठीक नहीं होगा। एलिफेंट फॉल्स तीन स्तरों में नीचे गिरता झरना है और यहां सीढ़ियों के जरिए काफी करीब तक जाया जा सकता है। इसके बाद शिलांग पीक से शहर और आसपास की पहाड़ियों का दृश्य देखा जा सकता है। लाइतलम कैनियंस शिलांग से थोड़ा अलग अनुभव देता है, जहां हरी घाटियां और गहरी चट्टानें आपको शहर की भीड़ से काफी दूर महसूस कराती हैं। वार्ड्स लेक शहर के बीचों-बीच आराम से घूमने के लिए अच्छी जगह है। शाम को पुलिस बाजार और लेवदुह यानी बड़ा बाजार का रुख करें। यहां आपको कपड़ों और रोजमर्रा के सामान से लेकर स्थानीय फल, सब्जियां और खाने-पीने की चीजें तक मिल जाएंगी। अगर आप Meghalaya को सिर्फ पहाड़ों से नहीं बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से भी समझना चाहते हैं, तो इन बाजारों में थोड़ा समय जरूर बिताएं। शिलांग में स्थानीय खाना भी यात्रा का हिस्सा है Meghalaya घूमते समय सिर्फ होटल के सामान्य खाने तक सीमित रहने की जरूरत नहीं है। शिलांग में आपको स्थानीय खासी स्वाद चखने के कई मौके मिलेंगे। जादोह, दोह खलीह और तुंगरिम्बई जैसे स्थानीय व्यंजन यहां की खानपान संस्कृति का हिस्सा हैं। अगर आप स्थानीय मांसाहारी खाना खाते हैं तो जादोह और दोह खलीह ट्राई कर सकते हैं। वहीं हल्का खाना पसंद करने वालों के लिए मोमोज, चाय और दूसरे स्थानीय नाश्ते आसानी से मिल जाते हैं। खासी पान यानी क्वाइ भी यहां की रोजमर्रा की संस्कृति से जुड़ा हुआ है। किसी स्थानीय चीज को पहली बार खाते समय सामग्री और अपने स्वाद के हिसाब से चुनाव करें। सोहरा यानी चेरापूंजी में बदल जाता है पूरा माहौल शिलांग से आगे बढ़ते ही Meghalaya का वह हिस्सा शुरू होता है जिसके लिए यह राज्य पूरी दुनिया में जाना जाता है। सोहरा, जिसे आम तौर पर चेरापूंजी भी कहा जाता है, बारिश, बादलों और झरनों के लिए मशहूर है। यहां पहुंचते ही आपको पहाड़ियों के बीच फैले बादल और बारिश से बनी हरियाली दिखाई देने लगती है। मानसून और उसके आसपास का समय खासतौर पर झरनों के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन लगातार बारिश के कारण रास्ते फिसलन भरे भी हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ मौसम देखकर नहीं, बल्कि उस दिन की स्थानीय स्थिति देखकर ही ट्रेक और झरनों की योजना बनाएं। नोहाकालिकाई से लेकर सेवन सिस्टर्स तक झरनों की दुनिया सोहरा में नोहाकालिकाई फॉल्स सबसे प्रसिद्ध जगहों में से एक है। ऊंची चट्टान से नीचे गिरता पानी और सामने दिखाई देने वाली गहरी हरी घाटी इसे बेहद खूबसूरत बनाती है। इसके अलावा सेवन सिस्टर्स फॉल्स का दृश्य भी बारिश के मौसम में खास दिखाई देता है। मौसमाई गुफा और आसपास के प्राकृतिक क्षेत्र भी सोहरा यात्रा का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। हालांकि गुफाओं में जाते समय फिसलन और अंधेरे का ध्यान रखना जरूरी है। अच्छी पकड़ वाले जूते यहां सिर्फ सलाह नहीं, बल्कि काफी काम की चीज हैं। वेई सावडोंग और छुपे झरनों के लिए थोड़ा समय अलग रखें अगर आपको सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली आम जगहों से थोड़ा अलग घूमना है, तो Meghalaya के छोटे और कम चर्चित झरनों को अपनी योजना में जगह दें। वेई सावडोंग ऐसा ही एक झरना है, जहां कई स्तरों में गिरता पानी और चारों तरफ की हरियाली इसे खास बनाती है। लेकिन

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Mussoorie Travel: 2 दिन में घूमने की पूरी Budget Guide

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Delhi की गर्मी, रोज का ट्रैफिक, ऑफिस या कॉलेज की भागदौड़ और ऊपर से वही रोज का रूटीन… ऐसे में कई बार मन करता है कि बस बैग उठाओ और कहीं पहाड़ों की तरफ निकल जाओ। अगर आपके पास सिर्फ दो दिन हैं और आप ऐसी जगह ढूंढ रहे हैं जहां ज्यादा लंबी छुट्टी भी न लेनी पड़े, तो मसूरी एक आसान और खूबसूरत विकल्प बन जाता है। Delhi से ज्यादा दूर नहीं, रास्ता भी सीधा और पहुंचने के बाद आपके पास घूमने के लिए पहाड़, झरने, पुराने बाजार, कैफे, जंगल और खूबसूरत व्यू-पॉइंट सब कुछ है। यही वजह है कि Mussoorie सिर्फ लंबे ट्रिप के लिए नहीं, बल्कि वीकेंड पर जल्दी से घूम आने वालों के बीच भी काफी पसंद की जाती है। लेकिन अगर आप पहली बार जा रहे हैं तो एक सवाल जरूर आएगा—दो दिन में आखिर क्या-क्या देखा जाए? क्या सिर्फ मॉल रोड और कैम्पटी फॉल देखकर वापस आ जाना चाहिए या फिर मसूरी के आसपास की ऐसी जगहें भी हैं जहां कम भीड़ मिलती है? इसीलिए इस गाइड में हम Mussoorie को सिर्फ एक सामान्य हिल स्टेशन की तरह नहीं, बल्कि दो दिन के एक ऐसे ट्रिप की तरह समझेंगे जिसमें आपको घूमने के साथ थोड़ा सुकून भी मिले। Delhi से पहुंचने के रास्ते से लेकर बजट, खाने की जगहों, लैंडौर, जबरखेत और सैंजी गांव तक, पूरी यात्रा हैं। दो दिन के लिए Mussoorie क्यों है इतना आसान वीकेंड प्लान? Mussoorie की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां जाने के लिए आपको एक हफ्ते की छुट्टी नहीं चाहिए। Delhi से सड़क के रास्ते देहरादून होते हुए मसूरी पहुंचा जा सकता है और अगर आप शुक्रवार रात निकलते हैं तो शनिवार की सुबह से ही अपना ट्रिप शुरू कर सकते हैं। यही तरीका उन लोगों के लिए काफी अच्छा है जो ऑफिस या कॉलेज के कारण ज्यादा छुट्टी नहीं ले पाते। शुक्रवार रात बस पकड़िए, सुबह देहरादून पहुंचिए और वहां से मसूरी निकल जाइए। इस तरह आपके शनिवार और रविवार दोनों दिन घूमने के लिए मिल जाते हैं। हालांकि वीकेंड पर यही सुविधा कभी-कभी परेशानी भी बन जाती है। शुक्रवार रात और शनिवार सुबह बड़ी संख्या में लोग पहाड़ों की तरफ निकलते हैं, जिसकी वजह से देहरादून से मसूरी वाले रास्ते पर ट्रैफिक बढ़ सकता है। इसलिए Mussoorie की दो दिन की यात्रा में समय का सही इस्तेमाल बहुत जरूरी है। अगर आप शनिवार को सुबह देर से पहुंचेंगे तो दिन का काफी हिस्सा रास्ते और ट्रैफिक में निकल सकता है। इसलिए जितना जल्दी पहुंचेंगे, उतना ज्यादा समय आपको असल में घूमने के लिए मिलेगा। Delhi से मसूरी कैसे पहुंचें? कार या बस, क्या रहेगा बेहतर? Delhi से Mussoorie की दूरी करीब 250 से 260 किलोमीटर के आसपास है। अपनी कार से जाने पर Delhi से देहरादून की तरफ निकलकर आगे मसूरी का पहाड़ी रास्ता पकड़ना होता है। Delhi-देहरादून एक्सप्रेसवे की वजह से यात्रा के कुछ हिस्से पहले की तुलना में आसान हुए हैं, लेकिन आखिरी पहाड़ी हिस्सा अभी भी मौसम और ट्रैफिक के हिसाब से समय ले सकता है। अगर आप अपनी कार से जा रहे हैं तो सुबह बहुत जल्दी निकलना बेहतर रहेगा। खासकर वीकेंड पर सुबह के समय शहरों से निकलने वाली भीड़ से बच जाएंगे और पहाड़ी चढ़ाई भी दिन में आराम से कर पाएंगे। कार से जाने का फायदा यह है कि आपके पास आसपास की जगहों तक जाने की आजादी रहती है। लेकिन अगर सिर्फ दो लोग जा रहे हैं तो पेट्रोल, टोल और पार्किंग जोड़ने के बाद यह बस से महंगा पड़ सकता है। दूसरी तरफ बस बजट यात्रियों के लिए काफी काम की है। Delhi के कश्मीरी गेट से देहरादून के लिए रात में कई बसें मिल जाती हैं। किराया बस के प्रकार के हिसाब से बदलता है, इसलिए बुकिंग से पहले उस दिन का किराया देख लेना बेहतर है। देहरादून पहुंचने के बाद मसूरी के लिए स्थानीय बस या टैक्सी ली जा सकती है। अगर आपका लक्ष्य कम खर्च में Mussoorie घूमना है तो सार्वजनिक परिवहन वाला विकल्प काफी पैसा बचा सकता है। दो दिन की यात्रा में पहला दिन कैसे बिताएं? दो दिन के ट्रिप में सबसे बड़ी गलती होती है कि पहले ही दिन बहुत सारी जगहों को ठूंस दिया जाए। इससे घूमने का मजा कम और जगह-जगह भागने की परेशानी ज्यादा हो जाती है। इसलिए पहले दिन ऐसी जगहों को रखें जो एक-दूसरे के रास्ते में आती हों। अगर आप सुबह मसूरी पहुंचते हैं तो सामान होटल में रखकर पहले कैम्पटी फॉल की तरफ जा सकते हैं। इसके बाद वापस शहर की तरफ आते हुए क्लाउड्स एंड या दूसरे आसपास के स्थान देखे जा सकते हैं। दोपहर बाद गन हिल और कैमेल्स बैक रोड का समय रखा जा सकता है। शाम को मॉल रोड पर आराम से घूमना इस दिन का अच्छा अंत रहेगा। इस तरह आपका पहला दिन प्रकृति, व्यू-पॉइंट और मसूरी की शाम—तीनों का मिश्रण बन सकता है। कैम्पटी फॉल से शुरू करें पहाड़ी सफर कैम्पटी फॉल Mussoorie के सबसे चर्चित पर्यटन स्थलों में से एक है। मसूरी से करीब 15 किलोमीटर दूर यह झरना पहाड़ों से नीचे गिरते पानी की वजह से खास लगता है। यहां पानी के आसपास बैठने और मौसम अच्छा हो तो पानी में उतरने का अनुभव भी लिया जा सकता है। लेकिन यहां एक बात ध्यान रखें कि वीकेंड पर कैम्पटी फॉल में भीड़ काफी बढ़ सकती है। इसलिए अगर आप शांत माहौल चाहते हैं तो सुबह जल्दी पहुंचने की कोशिश करें। झरने के आसपास छोटी-छोटी खाने की दुकानें भी मिलती हैं। पहाड़ों में घूमते हुए गरमा-गरम चाय और मैगी का अपना अलग मजा है। हालांकि खाने की कीमत और उपलब्धता जगह के हिसाब से बदल सकती है, इसलिए सिर्फ फोटो देखकर बहुत सटीक बजट न बनाएं। कैम्पटी फॉल को दो घंटे के आसपास का समय देना काफी हो सकता है, लेकिन अगर आप वहां ज्यादा समय बिताना चाहते हैं तो आगे के कार्यक्रम को उसी हिसाब से रखें। क्लाउड्स एंड: जहां जाकर शहर पीछे छूट जाता है अगर Mussoorie की भीड़ से थोड़ी दूरी चाहिए तो क्लाउड्स एंड का रास्ता आपको ज्यादा शांत अनुभव दे सकता है। यह इलाका घने जंगलों से घिरा है

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Kashmir: घूमने से पहले जानें रास्ते, खर्च और जरूरी बातें

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कश्मीर जाने का प्लान बनाते ही दिमाग में सबसे पहले बर्फ से ढके पहाड़, डल झील में चलती शिकारा, हरे-भरे मैदान और दूर तक फैली घाटियां आने लगती हैं। लेकिन असल में Kashmir घूमने का मजा तभी आता है जब आपको पहले से पता हो कि कहां रुकना है, किस जगह के लिए कितना समय रखना है और किस रास्ते से जाना आसान रहेगा। 2026 में Kashmir घूमने वालों के लिए एक और खास बात है। जम्मू से श्रीनगर की रेल कनेक्टिविटी पहले से बेहतर हुई है और दूसरी तरफ सोनमर्ग की ओर जाने वाले रास्ते में नई सुरंगों की वजह से यात्रा का अनुभव भी बदल रहा है। जम्मू तवी से श्रीनगर तक वंदे भारत की नियमित सेवा 2 मई 2026 से शुरू हुई, जबकि सोनमर्ग सुरंग 2025 में शुरू हो चुकी है। जून 2026 में ज़ोजिला सुरंग के मुख्य हिस्से की खुदाई पूरी होने से Kashmir से Ladakh तक सड़क संपर्क को लेकर भी बड़ी प्रगति हुई है। इसलिए अगर आप 2026 में Kashmir घूमने का सोच रहे हैं और आपको श्रीनगर, गुलमर्ग, पहलगाम के साथ आगे Ladakh का रोड ट्रिप भी करना है, तो यह गाइड आपके काम की है। इसमें कोशिश की गई है कि जरूरी जानकारी सीधी और आसान भाषा में मिले, ताकि घूमने से पहले आपको हर छोटी-बड़ी चीज के लिए अलग-अलग जगह भटकना न पड़े। 2026 में Kashmir घूमना पहले से कैसे अलग है? पिछले कुछ समय में Kashmir की यात्रा से जुड़ी कनेक्टिविटी में काफी बदलाव हुए हैं। सबसे बड़ा बदलाव रेल मार्ग को लेकर है। जम्मू तवी से श्रीनगर तक वंदे भारत की दो जोड़ी सेवाएं 2 मई 2026 से नियमित रूप से चल रही हैं। लगभग 266 किलोमीटर की यात्रा में एक सेवा करीब चार घंटे पचास मिनट लेती है और दोनों जोड़ी सेवाएं सप्ताह में छह दिन चलती हैं। इसका मतलब यह है कि अब Kashmir पहुंचने के लिए सिर्फ सड़क या हवाई यात्रा पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। खासकर जिन लोगों को ट्रेन से सफर करना पसंद है, उनके लिए जम्मू से श्रीनगर की रेल यात्रा खुद एक अनुभव बन सकती है। रास्ते में चिनाब रेल पुल और पहाड़ों के बीच से गुजरती रेल इस यात्रा को बाकी सामान्य ट्रेन यात्राओं से काफी अलग बना देती है। चिनाब पुल को दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च पुल बताया गया है। दूसरी तरफ सोनमर्ग सुरंग के शुरू होने से श्रीनगर से सोनमर्ग और आगे Ladakh की तरफ जाने वाले रास्ते को ज्यादा सुरक्षित और हर मौसम में इस्तेमाल करने लायक बनाने की दिशा में बड़ा कदम हुआ है। यह सुरंग 13 जनवरी 2025 को शुरू हुई थी और इसमें करीब 6.4 किलोमीटर की मुख्य सुरंग शामिल है। Kashmir जाने का सबसे आसान तरीका क्या है? अगर आप Delhi, मुंबई, बेंगलुरु या देश के किसी दूसरे बड़े शहर से Kashmir जा रहे हैं, तो आपके पास मुख्य रूप से हवाई जहाज, ट्रेन और सड़क के विकल्प हैं। अगर समय कम है तो श्रीनगर हवाई अड्डा सबसे आसान विकल्प रहता है। वहीं अगर आप यात्रा को ही अनुभव बनाना चाहते हैं, तो जम्मू से श्रीनगर की वंदे भारत एक अच्छा विकल्प हो सकती है। हवाई यात्रा में एक बात जरूर ध्यान रखें। वापसी के समय श्रीनगर हवाई अड्डे पर सुरक्षा जांच के लिए अतिरिक्त समय लेकर चलना बेहतर है। खासकर व्यस्त पर्यटन मौसम में आखिरी समय पर पहुंचने से परेशानी हो सकती है। इसलिए फ्लाइट से काफी पहले एयरपोर्ट पहुंचना समझदारी है। ट्रेन से आने वालों के लिए पहले जम्मू या कटरा पहुंचना और वहां से श्रीनगर की ट्रेन लेना आसान हो सकता है। 2026 में जम्मू तवी से श्रीनगर के बीच वंदे भारत की नियमित सेवा चल रही है और यात्रा करीब 266 किलोमीटर की है। सड़क से आने पर जम्मू से श्रीनगर का रास्ता भी खूबसूरत है, लेकिन पहाड़ी रास्ते में मौसम और ट्रैफिक के कारण समय बदल सकता है। इसलिए अगर आपका Kashmir प्लान सड़क यात्रा पर आधारित है, तो पूरे दिन को सिर्फ दूरी के हिसाब से तय करने के बजाय थोड़ा अतिरिक्त समय रखना बेहतर रहेगा। कितने दिन चाहिए? पांच दिन या सात दिन? अगर पहली बार Kashmir जा रहे हैं तो पांच दिन में श्रीनगर, गुलमर्ग और पहलगाम को देखा जा सकता है, लेकिन कार्यक्रम थोड़ा भागदौड़ वाला रहेगा। हर जगह आराम से घूमने और मौसम का मजा लेने के लिए कम से कम छह रात और सात दिन का समय ज्यादा सुविधाजनक रहेगा। पहले दिन श्रीनगर पहुंचकर होटल में सामान रखने के बाद शाम को डल झील में शिकारा राइड रख सकते हैं। दूसरे दिन श्रीनगर के मुगल गार्डन, हजरतबल, पुराने शहर और आसपास की जगहें देखी जा सकती हैं। तीसरे दिन गुलमर्ग का पूरा दिन रखा जा सकता है। चौथे दिन पहलगाम के लिए निकलें और रास्ते में आराम से रुकते हुए वहां पहुंचें। पांचवें दिन अरू वैली, बेताब वैली और चंदनवाड़ी जैसे इलाकों को देखा जा सकता है। छठे दिन श्रीनगर वापस आकर आराम या हाउसबोट में रुकने का अनुभव लिया जा सकता है। सातवां दिन खरीदारी और वापसी के लिए रखें। अगर आप आगे Ladakh भी जाना चाहते हैं तो इस सात दिन के Kashmir प्लान को अलग मानें। Ladakh के लिए कम से कम चार-पांच अतिरिक्त दिन रखना ज्यादा व्यावहारिक रहेगा, क्योंकि पहाड़ी रास्तों में सिर्फ दूरी देखकर समय तय करना सही नहीं होता। श्रीनगर में सिर्फ डल झील नहीं, शहर को भी समय दें Kashmir की पहली पहचान बहुत से लोगों के लिए डल झील है। लेकिन श्रीनगर को सिर्फ शिकारा राइड तक सीमित कर देना सही नहीं होगा। शहर में मुगल दौर के बाग, पुराने बाजार, धार्मिक स्थल और स्थानीय खान-पान भी इस यात्रा का जरूरी हिस्सा हैं। डल झील में सुबह का समय खास तौर पर अच्छा लगता है। पानी पर धीरे-धीरे चलती शिकारा, आसपास के पहाड़ और झील में होने वाली रोजमर्रा की गतिविधियां आपको Kashmir की अलग तस्वीर दिखाती हैं। अगर आपको ज्यादा शांति चाहिए तो निगीन झील भी देख सकते हैं। डल झील की तुलना में यहां माहौल थोड़ा शांत महसूस हो सकता है। दोनों जगहों का अनुभव अलग है, इसलिए अगर आपके पास समय है तो सिर्फ एक झील देखकर

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Ladakh में इस साल क्यों बढ़ी पर्यटकों की संख्या?

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अगर पहाड़ों के बीच लंबी सड़क, चारों तरफ बदलता हुआ रंग, दूर तक फैली सूखी पहाड़ियां, बर्फ से ढके दर्रे और नीले पानी वाली झील आपको अपनी तरफ खींचती हैं, तो Ladakh का नाम आपकी यात्रा सूची में जरूर होगा। पिछले कुछ वर्षों में Ladakh घूमने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है और 2026 में तो यहां आने वाले पर्यटकों के आंकड़े खास तौर पर चर्चा में हैं। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच Ladakh में 4 लाख 5 हजार से ज्यादा पर्यटक पहुंचे। यह संख्या पूरे 2025 में यहां पहुंचे पर्यटकों की संख्या से भी ज्यादा है। पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले भी इस साल पर्यटकों की संख्या में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। लेकिन सवाल यह है कि आखिर Ladakh में ऐसा क्या बदल रहा है कि लोग बार-बार यहां आने की योजना बना रहे हैं? इसकी एक वजह यहां की खूबसूरती जरूर है, लेकिन सिर्फ यही वजह नहीं है। अब लोग केवल Leh और Pangong Lake देखने के लिए Ladakh नहीं जा रहे। Kargil, Lamayuru, Suru Valley, Zanskar और छोटे-छोटे गांवों को भी अपनी यात्रा में शामिल कर रहे हैं। यानी आज Ladakh सिर्फ एक घूमने की जगह नहीं, बल्कि अलग-अलग तरह के अनुभवों वाली पूरी यात्रा बन चुका है। 2026 में Ladakh में इतनी भीड़ क्यों बढ़ रही है? Ladakh की लोकप्रियता पहले से ही काफी ज्यादा रही है, लेकिन 2026 के आंकड़े बताते हैं कि इस जगह को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ी है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच यहां 4,05,085 पर्यटकों के पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले यात्रियों के साथ विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। अगस्त 2026 में ही 74 हजार से ज्यादा पर्यटक यहां पहुंचे। इस बढ़ती लोकप्रियता के पीछे सड़क से यात्रा का बढ़ता चलन भी एक वजह है। पहले Ladakh को बहुत दूर और मुश्किल यात्रा माना जाता था। अब सड़क संपर्क बेहतर होने से लोग कार, बाइक, साझा टैक्सी और बस के जरिए यहां पहुंचने की योजना बनाने लगे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर Ladakh के पहाड़ों, झीलों और सड़कों की तस्वीरें और वीडियो भी लोगों को आकर्षित करते हैं। लेकिन अगर आप सच में Ladakh घूमने की योजना बना रहे हैं तो सिर्फ तस्वीरें देखकर यात्रा तय न करें। यहां ऊंचाई और मौसम दोनों को समझना बहुत जरूरी है। Srinagar से Ladakh जाने का रास्ता क्यों खास है? अगर आप पहली बार Ladakh जा रहे हैं और सड़क के रास्ते जाना चाहते हैं, तो Srinagar से Leh वाला रास्ता एक अलग अनुभव देता है। इस रास्ते की खासियत यह है कि ऊंचाई धीरे-धीरे बढ़ती है। अचानक बहुत ज्यादा ऊंचाई पर पहुंचने के बजाय रास्ते में Sonamarg, Drass और Kargil जैसे पड़ाव आते हैं। यात्रा के दौरान आपको कश्मीर की हरियाली से निकलकर धीरे-धीरे सूखे और ऊंचे पहाड़ी इलाके दिखाई देने लगते हैं। यही बदलाव इस रास्ते को खास बनाता है। Srinagar से आगे Sonamarg आता है। इसके बाद Zoji La को पार करके Drass की तरफ रास्ता बढ़ता है। Drass के बाद Kargil और फिर Lamayuru होते हुए Leh पहुंचा जाता है। अगर आपके पास समय है तो Ladakh पहुंचने के लिए इस पूरे रास्ते को ही अपनी यात्रा का हिस्सा बनाना चाहिए। पहला दिन: Srinagar से Kargil सुबह जल्दी Srinagar से निकलना बेहतर रहेगा। सबसे पहले Sonamarg आएगा। यहां कुछ देर रुककर आसपास के पहाड़ी नजारों को देखा जा सकता है। मौसम और सड़क की स्थिति ठीक होने पर इसके बाद Zoji La की तरफ बढ़ा जा सकता है। Zoji La पार करते ही आपको आसपास का पूरा वातावरण बदला हुआ दिखाई देगा। जहां कश्मीर की तरफ हरियाली और घने पहाड़ दिखाई देते हैं, वहीं आगे बढ़ने पर पहाड़ ज्यादा सूखे और भूरे नजर आने लगते हैं। यही वह बदलाव है जहां से आपको महसूस होना शुरू होता है कि अब आप Ladakh की तरफ बढ़ रहे हैं। इसके बाद Drass आता है। Drass अपनी ऊंचाई और ठंडे मौसम के लिए जाना जाता है। यह जगह 1999 के कारगिल युद्ध से जुड़े इतिहास के कारण भी महत्वपूर्ण है। यहां Drass War Memorial देखा जा सकता है। अगर आप इतिहास में रुचि रखते हैं तो यहां कुछ समय जरूर बिताएं। इसके बाद Kargil की तरफ बढ़ें और रात Kargil में रुकें। Srinagar से Leh तक एक ही दिन में जाने की कोशिश करने के बजाय Kargil में रुकना ज्यादा आरामदायक रहेगा। इससे अगले दिन की यात्रा भी आसान हो जाती है। दूसरा दिन: Kargil से Leh दूसरे दिन सुबह Kargil से Leh के लिए निकलें। यह रास्ता Ladakh के सबसे खूबसूरत हिस्सों में से एक है। रास्ते में Mulbekh, Namika La और Fotu La जैसे स्थान आते हैं। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते हैं, पहाड़ों का रंग और आकार लगातार बदलता जाता है। इसके बाद Lamayuru आता है। Lamayuru को क्यों कहा जाता है चांद की धरती? Lamayuru Ladakh की उन जगहों में से है जिसे देखकर आपको लगेगा कि आप किसी दूसरे ग्रह पर आ गए हैं। यहां की पहाड़ियों का रंग और बनावट बाकी पहाड़ी इलाकों से काफी अलग दिखाई देती है। इसी वजह से Lamayuru को अक्सर चांद जैसी धरती वाला इलाका कहा जाता है। यहां Lamayuru मठ भी है, जो इस इलाके का प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थान है। अगर आप Ladakh की यात्रा में केवल तस्वीरें लेने के बजाय यहां के इतिहास और संस्कृति को भी समझना चाहते हैं तो Lamayuru में थोड़ा समय जरूर बिताएं। इसके बाद रास्ता Leh की तरफ बढ़ता है। Leh पहुंचते ही सबसे पहले क्या करें? यह बात बहुत जरूरी है। Ladakh पहुंचते ही घूमना शुरू मत कर दीजिए। Leh समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर है और शरीर को इस ऊंचाई के अनुसार ढलने में समय लगता है। इसलिए Leh पहुंचने के बाद आराम करना बेहद जरूरी है। Ladakh पर्यटन विभाग की सलाह के अनुसार Leh पहुंचने के बाद कम से कम 48 घंटे शरीर को ऊंचाई के अनुसार ढलने का समय देना चाहिए। इस दौरान पर्याप्त पानी पीना, आराम करना और ज्यादा मेहनत वाले काम से बचना जरूरी है। यानी अगर आप सुबह Leh पहुंच गए हैं तो उसी दिन

Delhi Art Weekend Delhi Five Colors of Delhi Latest Travel

Delhi Art Weekend, sept, त्रावणकोर पैलेस में होगा खास आयोजन

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अगर आपको कला, पेंटिंग और कुछ नया देखने-समझने का शौक है, तो इस सप्ताह दिल्ली में आपके लिए एक खास मौका है। Delhi Art Weekend का आयोजन 26 और 27 सितंबर को त्रावणकोर पैलेस में किया जा रहा है। दो दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में कला से जुड़ी कई चीजें एक ही जगह देखने को मिलेंगी। दिल्ली में वैसे तो पूरे साल अलग-अलग प्रदर्शनियां और कला से जुड़े आयोजन होते रहते हैं, लेकिन Delhi Art Weekend को इस तरह तैयार किया गया है कि कला पसंद करने वाले लोग एक ही जगह पर अलग-अलग तरह के काम देख सकें। यहां कई आर्ट स्टोर और कला प्रदर्शनियां लगाई गई हैं, जिन्हें देखने के लिए आप अपने दोस्तों या परिवार के साथ भी जा सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि Delhi Art Weekend में जाने के लिए आपको किसी बड़े कला विशेषज्ञ होने की जरूरत नहीं है। अगर आपको बस अच्छी तस्वीरें देखना, कलाकारों के काम को समझना और कला की दुनिया को करीब से जानना पसंद है, तो यह आयोजन आपके लिए दिलचस्प हो सकता है। 26 और 27 सितंबर को लगेगा Delhi Art Weekend इस बार Delhi Art Weekend 26 और 27 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है। यानी आपके पास इसे देखने के लिए पूरे दो दिन हैं। आयोजन का समय सुबह 11 बजे से शाम 8 बजे तक रखा गया है। इसका मतलब है कि आप अपनी सुविधा के हिसाब से दिन में किसी भी समय यहां पहुंच सकते हैं। अगर आपको भीड़ से बचकर आराम से कला देखनी है, तो दिन के शुरुआती समय में जाना आपके लिए बेहतर हो सकता है। वहीं शाम के समय दिल्ली के दूसरे कामों के साथ इसे अपने दिन के कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है। Delhi Art Weekend का दो दिन चलना उन लोगों के लिए भी सुविधाजनक है जो सप्ताह के बाकी दिनों में व्यस्त रहते हैं। शनिवार और रविवार में से जिस दिन समय मिले, उस दिन आप त्रावणकोर पैलेस पहुंच सकते हैं। त्रावणकोर पैलेस में सजेगी कला की दुनिया Delhi Art Weekend का आयोजन त्रावणकोर पैलेस में किया जा रहा है। आयोजन की जगह भी इस पूरे अनुभव को खास बनाती है, क्योंकि यहां पहुंचकर आपको एक अलग माहौल में कला देखने का मौका मिलेगा। कार्यक्रम में अलग-अलग आर्ट स्टोर और कला प्रदर्शनियां लगाई गई हैं। ऐसे में यहां सिर्फ एक तरह की कला देखने के बजाय अलग-अलग कलाकारों और उनके काम को देखने का अवसर मिलेगा। अगर आप आमतौर पर संग्रहालय या कला दीर्घाओं में कम जाते हैं, तो Delhi Art Weekend आपके लिए कला को करीब से देखने का एक आसान मौका हो सकता है। यहां घूमते हुए आप अलग-अलग कलाकृतियों को देख सकते हैं और यह समझने की कोशिश कर सकते हैं कि कलाकार ने अपने विचारों को किस तरह तस्वीर या कला के रूप में सामने रखा है। यहां सिर्फ पेंटिंग देखने नहीं, कला को समझने का मौका भी मिलेगा कई बार हम किसी तस्वीर या पेंटिंग को देखकर सिर्फ इतना कहते हैं कि यह अच्छी है या सुंदर है। लेकिन कला की खासियत यही है कि हर व्यक्ति उसे अपने तरीके से समझ सकता है। Delhi Art Weekend जैसे आयोजन में आपको अलग-अलग कलाकारों के काम एक ही जगह देखने को मिलते हैं। किसी कलाकृति में रंग ज्यादा दिखाई दे सकते हैं, तो किसी में किसी विचार या भावना को सामने रखा गया हो सकता है। इसलिए यहां घूमते समय हर चीज को जल्दी-जल्दी देखने के बजाय थोड़ा समय देकर देखना अच्छा रहेगा। किसी तस्वीर को कुछ सेकंड ज्यादा देखकर शायद आपको उसमें ऐसी चीज दिखाई दे जाए, जिसे पहली नजर में आपने नोटिस ही नहीं किया था। यही वजह है कि Delhi Art Weekend सिर्फ तस्वीरें देखने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि कला को अपनी नजर से समझने का मौका भी बन सकता है। आर्ट स्टोर में क्या-क्या देखने को मिलेगा? इस आयोजन की एक खास बात यहां लगाए गए अलग-अलग आर्ट स्टोर हैं। इन स्टोर में कला से जुड़ी चीजें देखने को मिलेंगी और कला पसंद करने वाले लोगों के लिए यह हिस्सा काफी दिलचस्प हो सकता है। अगर आपको पेंटिंग, डिजाइन या कलात्मक चीजों में रुचि है, तो Delhi Art Weekend में आर्ट स्टोर वाला हिस्सा जरूर देखना चाहिए। ऐसे आयोजनों में कई बार ऐसी चीजें भी देखने को मिलती हैं जो सामान्य बाजार में आसानी से नजर नहीं आतीं। इसलिए अगर आप कला को सिर्फ दीवार पर लगी पेंटिंग तक सीमित नहीं मानते, तो इन स्टोर को देखने के लिए थोड़ा अतिरिक्त समय जरूर रखें। दिल्ली के कला प्रेमियों के लिए खास मौका दिल्ली में कला और संस्कृति को पसंद करने वालों की कमी नहीं है। शहर में समय-समय पर प्रदर्शनियां, संग्रहालयों के कार्यक्रम और अलग-अलग कला आयोजन होते रहते हैं। इसी कड़ी में Delhi Art Weekend भी कला प्रेमियों के लिए एक अच्छा सप्ताहांत कार्यक्रम बन सकता है। खासकर उन लोगों के लिए जो अपने सप्ताहांत में कुछ अलग करना चाहते हैं, यह जगह देखने लायक हो सकती है। हर बार सप्ताहांत का मतलब केवल बाजार, कैफे या फिल्म नहीं होता। कभी-कभी दो घंटे किसी कला प्रदर्शनी में बिताना भी आपके दिन को बिल्कुल अलग बना सकता है। Delhi Art Weekend में आप दोस्तों के साथ जाकर अपनी पसंद की कलाकृतियों पर बातचीत कर सकते हैं। अगर आपके साथ कोई ऐसा दोस्त है जिसे कला में ज्यादा रुचि है, तो उससे आपको अलग-अलग कलाकृतियों को समझने का एक नया नजरिया भी मिल सकता है। दोस्तों और परिवार के साथ कैसे बनाएं दिन का प्लान? अगर आप Delhi Art Weekend को सिर्फ एक घंटे में खत्म नहीं करना चाहते, तो इसे अपने पूरे दिन के छोटे से घूमने के प्लान का हिस्सा बनाया जा सकता है। सुबह या दोपहर में त्रावणकोर पैलेस पहुंचकर पहले पूरे आयोजन को आराम से देखें। जल्दबाजी में हर स्टोर और प्रदर्शनी को कवर करने की कोशिश न करें। जो चीज आपको पसंद आए, वहां थोड़ा ज्यादा समय दें। अगर आप दोस्तों के साथ जा रहे हैं तो हर व्यक्ति अपनी पसंद की कला चुन सकता है और बाद में आपस में उसके बारे में बात कर सकते

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1 अक्टूबर से Pink Card के बिना Delhi Bus में Free सफर मना

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पिंक टिकट की जगह अब स्मार्ट कार्ड से होगा मुफ्त बस सफर, जानिए कौन बनवा सकता है कार्ड, आवेदन का तरीका, जरूरी दस्तावेज और कार्ड से जुड़े सभी जरूरी नियम। अगर आप दिल्ली में बस से रोज कॉलेज, ऑफिस, बाजार या किसी दूसरे काम के लिए जाती हैं, तो आने वाले दिनों में आपके सफर का तरीका थोड़ा बदलने वाला है। Pink Card अभी तक बस में चढ़ने के बाद कंडक्टर से मिलने वाली गुलाबी पर्ची लेकर महिलाएं मुफ्त यात्रा करती थीं। लेकिन अब यह व्यवस्था खत्म होने जा रही है। दिल्ली परिवहन निगम यानी DTC ने कागज वाली पिंक टिकट व्यवस्था को 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाया है। इसके बाद 1 अक्टूबर 2026 से मुफ्त बस यात्रा के लिए Pink Card जरूरी होगा। यानी अगर आपके पास कार्ड नहीं है, तो सिर्फ महिला यात्री होने के आधार पर कागज वाली पिंक टिकट लेकर मुफ्त सफर नहीं किया जा सकेगा और सामान्य किराया देना पड़ सकता है। इस बदलाव का मकसद मुफ्त बस यात्रा को कागज से हटाकर डिजिटल व्यवस्था में लाना है। अब बस में सफर करते समय कंडक्टर की इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीन पर कार्ड टैप करना होगा। दिल्ली सरकार के मुताबिक अब तक 18.5 लाख से ज्यादा Pink Card जारी किए जा चुके हैं। 1 अक्टूबर से आखिर क्या बदल जाएगा? अभी तक दिल्ली की DTC और क्लस्टर बसों में पात्र महिला यात्रियों को कंडक्टर की तरफ से पिंक टिकट दिया जाता है। टिकट पर किराया शून्य होता है और इसी के आधार पर मुफ्त सफर की सुविधा मिलती है। अब Pink Card इस पूरी प्रक्रिया की जगह लेगा। 1 अक्टूबर से पात्र यात्री को बस में चढ़ने के बाद अपना कार्ड कंडक्टर की इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन पर टैप करना होगा। कार्ड की जानकारी मशीन में दर्ज होगी और मुफ्त यात्रा की प्रक्रिया डिजिटल तरीके से पूरी होगी। सबसे जरूरी बात यह है कि 1 अक्टूबर के बाद अगर कोई पात्र महिला कार्ड के बिना बस में सफर करती है, तो उसे सामान्य यात्री की तरह टिकट खरीदना पड़ सकता है। इसलिए आखिरी तारीख का इंतजार करने के बजाय कार्ड पहले ही बनवा लेना बेहतर रहेगा। Pink Card क्या है? Pink Card एक स्मार्ट कार्ड है जो नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड यानी NCMC तकनीक पर आधारित है। इसे खास तौर पर दिल्ली की पात्र महिलाओं और ट्रांसजेंडर यात्रियों को DTC और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने के लिए शुरू किया गया है। इस कार्ड की शुरुआत मार्च 2026 में हुई थी। पुराने कागज के टिकट की जगह कार्ड इस्तेमाल करने से यात्रा का रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से दर्ज किया जा सकता है। सरकार की तरफ से इसे मुफ्त बस यात्रा की व्यवस्था को ज्यादा डिजिटल और व्यवस्थित बनाने की कोशिश के रूप में बताया गया है। कार्ड का इस्तेमाल करते समय आपको बस में कोई अलग पर्ची लेने की जरूरत नहीं होगी। कार्ड को मशीन पर टैप करना होगा और यात्रा की प्रक्रिया वहीं दर्ज हो जाएगी।  Pink Card किसे मिलेगा यह कार्ड? Pink Card दिल्ली की पात्र महिला और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए है। हालिया जानकारी के मुताबिक दिल्ली निवासी महिला और ट्रांसजेंडर व्यक्ति, जिनकी उम्र कम से कम 5 साल है, इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान दिल्ली में निवास का प्रमाण जरूरी है। आधार जैसे पहचान दस्तावेज और उससे जुड़ा मोबाइल नंबर आवेदन की प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जा सकता है। अलग-अलग आवेदन माध्यम पर मांगे जाने वाले दस्तावेजों की जानकारी में बदलाव हो सकता है, इसलिए आवेदन करते समय अधिकृत केंद्र या पोर्टल की ताजा जानकारी देखना सही रहेगा। अगर आपका पहचान दस्तावेज दिल्ली के बाहर का पता दिखाता है, तो आवेदन करने से पहले पात्रता जरूर जांच लें। सिर्फ दिल्ली में रोज काम करने या पढ़ने से अपने आप मुफ्त बस यात्रा की पात्रता साबित नहीं होती। कार्ड बनवाने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए? कार्ड बनवाने से पहले अपने जरूरी दस्तावेज तैयार रखना अच्छा रहेगा। आम तौर पर पहचान और दिल्ली में निवास से जुड़ा दस्तावेज मांगा जाता है। आधार कार्ड और आधार से जुड़ा चालू मोबाइल नंबर आवेदन प्रक्रिया में उपयोगी रहेगा। ऑनलाइन आवेदन करने वालों को मोबाइल पर OTP मिल सकता है, इसलिए मोबाइल नंबर चालू होना जरूरी है। अगर आवेदन के दौरान फोटो या दूसरे दस्तावेज मांगे जाते हैं, तो उनकी साफ कॉपी अपने पास रखें। एक बात ध्यान रखने वाली है कि अलग-अलग चरणों में कार्ड की प्रक्रिया और दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी बदली जा सकती है। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति को दस्तावेज देने के बजाय अधिकृत केंद्र से ही आवेदन करवाएं। ऑफलाइन कार्ड बनवाना है तो क्या करना होगा? अगर आपको ऑनलाइन आवेदन करने में परेशानी होती है तो Pink Card ऑफलाइन भी बनवाया जा सकता है। इसके लिए अधिकृत DTC केंद्र, संबंधित सरकारी कार्यालय या निर्धारित कार्ड वितरण केंद्रों पर आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। केंद्र पर जाकर आपको अपना पहचान और निवास संबंधी दस्तावेज देना होगा। मोबाइल नंबर का सत्यापन OTP के जरिए किया जा सकता है। सत्यापन पूरा होने के बाद कार्ड जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। सरकार ने कार्ड वितरण के लिए कई केंद्र बनाए हैं ताकि महिलाओं को सिर्फ एक जगह जाकर लंबी लाइन में न लगना पड़े। मई में DTC से जुड़ी जानकारी में 73 केंद्रों के जरिए कार्ड जारी होने की बात सामने आई थी और बाद में वितरण केंद्रों की व्यवस्था को आगे बढ़ाया गया। इसलिए अपने इलाके के नजदीकी अधिकृत केंद्र की जानकारी पहले पता कर लेना अच्छा रहेगा।Pink Card घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? अगर आप मोबाइल से काम आसानी से कर लेती हैं तो Pink Card के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया भी उपलब्ध कराई गई है। आवेदन के दौरान आपको अपनी पहचान और मोबाइल से जुड़ी जानकारी दर्ज करनी होती है। सबसे पहले अधिकृत आवेदन माध्यम पर जाएं और अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें। इसके बाद जरूरी पहचान संबंधी जानकारी भरें और OTP से सत्यापन पूरा करें। आवेदन सफल होने के बाद आपको पंजीकरण या आवेदन से जुड़ी रसीद मिल सकती है। कार्ड प्राप्त करने के लिए आगे दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा। ऑनलाइन प्रक्रिया में कोई दिक्कत आए तो किसी अनजान व्यक्ति

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Travel के लिए Best है ये Co-ord Set? जानें इसकी खासियत

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ट्रैवल करते समय कपड़े चुनना जितना आसान लगता है, असल में उतना होता नहीं है। खासकर लड़कियों के लिए तो हर बार यही सोचना पड़ता है कि ऐसा क्या पहनें जो पूरे दिन आरामदायक रहे, घूमने-फिरने में परेशानी न हो और तस्वीरों में भी अच्छा लगे। कई बार हम अलग-अलग टॉप, शर्ट, जींस, पैंट और दूसरे कपड़े लेकर निकलते हैं, लेकिन ट्रिप पर पहुंचने के बाद समझ आता है कि किसके साथ क्या पहनना है। ऊपर से अगर दिनभर बाहर घूमना हो तो बहुत ज्यादा टाइट या भारी कपड़े कुछ समय बाद परेशान करने लगते हैं। और अगर धूप वाली जगह पर घूमना हो तो कपड़ों का ऐसा होना भी अच्छा रहता है जो शरीर को थोड़ा ज्यादा ढकें। इससे सीधे धूप के संपर्क को कम किया जा सकता है, हालांकि कोई भी कपड़ा टैनिंग को पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं देता। ऐसे में Co-ord Set उन लोगों के लिए एक आसान विकल्प हो सकता है जो बिना ज्यादा सोच-विचार के पूरा पहनावा तैयार रखना चाहती हैं। यह Shivansh Apna Kapda Co-ord Set ऊपर छोटे कॉलर और काले बॉर्डर वाली टी-शर्ट के साथ है, जबकि नीचे ढीली पैंट दी गई है। दोनों का रंग एक जैसा है और काले रंग की पट्टी पूरे पहनावे को थोड़ा अलग लुक देती है। एक ही सेट में पूरा पहनावा तैयार इस Co-ord Set की सबसे बड़ी सुविधा यही है कि आपको ऊपर और नीचे के कपड़े अलग-अलग मिलाने की जरूरत नहीं पड़ती। टी-शर्ट और पैंट पहले से एक-दूसरे के साथ मेल खाते हैं। बस जूते और बैग चुनिए और आपका पूरा लुक तैयार। ट्रैवल में यह छोटी-सी बात काफी काम आती है, क्योंकि सुबह जल्दी निकलते समय कपड़े चुनने में ज्यादा समय नहीं जाता। खासकर तब, जब आपको होटल से सुबह निकलकर सीधे किसी जगह घूमने जाना हो। ट्रैवल में आराम क्यों जरूरी है? ट्रैवल में हम सिर्फ एक जगह बैठकर समय नहीं बिताते। कभी पैदल चलना पड़ता है, कभी बस या ट्रेन में बैठना होता है, कभी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं और कई बार पूरा दिन किसी शहर की गलियों में घूमते हुए निकल जाता है। ऐसे में कपड़े देखने में कितने भी अच्छे क्यों न हों, अगर उन्हें पहनकर चलना मुश्किल है तो कुछ घंटों बाद वही कपड़े परेशान करने लगते हैं। इस Co-ord Set में पैंट का डिज़ाइन ढीला दिखाई दे रहा है। कमर पर डोरी भी दी गई है, जिससे इसे अपने हिसाब से संभालना आसान हो सकता है। यही वजह है कि इसे लंबे सफर, शहर घूमने या आराम से दिन बिताने वाले ट्रैवल के लिए देखा जा सकता है। ढीली पैंट का फायदा ट्रैवल के दौरान पैंट की फिटिंग बहुत मायने रखती है। बहुत टाइट पैंट में लंबे समय तक कार, ट्रेन या फ्लाइट में बैठना असहज लग सकता है। वहीं बहुत ज्यादा ढीली पैंट भी हर किसी को पसंद नहीं आती। इस सेट में नीचे की पैंट सीधी और आरामदायक फिट वाली दिखाई दे रही है। साथ में दोनों तरफ काली पट्टी दी गई है, जो साधारण रंग की पैंट को थोड़ा स्पोर्टी लुक देती है। अगर आप दिनभर घूमने वाली यात्रा पर हैं तो ऐसे ढीले पहनावे का फायदा यह है कि चलने-फिरने के दौरान शरीर पर कपड़ों का खिंचाव कम महसूस हो सकता है। ऊपर की टी-शर्ट भी काफी साधारण रखी गई है ऊपर की टी-शर्ट में हल्के रंग के साथ काले रंग का कॉलर और आस्तीन पर काला बॉर्डर दिया गया है। इससे पूरा पहनावा बहुत ज्यादा चमकीला नहीं लगता और साधारण होते हुए भी थोड़ा अलग दिखाई देता है। ऐसे रंग का फायदा यह है कि इसे अलग-अलग तरह के जूतों और बैग के साथ मिलाना आसान हो सकता है। अगर आप सफेद जूते पहनती हैं तो पहनावा हल्का और साफ दिखाई देगा। वहीं काले जूते पहनने पर ऊपर और नीचे की काली पट्टी के साथ पूरा लुक एक जैसा लग सकता है। टैनिंग को लेकर एक जरूरी बात ट्रैवल करते समय धूप में घूमना लगभग तय होता है। खासकर अगर आप किसी ऐतिहासिक जगह, पहाड़ी क्षेत्र, समुद्र किनारे या खुले बाजार में जा रही हैं तो कई घंटे बाहर निकल सकते हैं। इस तरह के कपड़े शरीर का कुछ हिस्सा ढकते हैं, इसलिए त्वचा का सीधे धूप के संपर्क में आने वाला हिस्सा कम हो सकता है। लेकिन इसे टैनिंग से बचने का पूरा उपाय नहीं समझना चाहिए। कपड़े की बनावट, रंग और वह शरीर को कितना ढक रहा है, इन सबका असर अलग हो सकता है। अगर आपको धूप में ज्यादा समय रहना है तो सनस्क्रीन, सनग्लासेस और जरूरत के हिसाब से दूसरी धूप से बचाव वाली चीजें भी साथ रखना बेहतर है। ट्रैवल फोटो के लिए भी अच्छा विकल्प आजकल ट्रैवल में कपड़े चुनते समय तस्वीरों का भी ध्यान रखा जाता है। क्योंकि किसी जगह घूमते हुए अचानक फोटो खिंचवाने का मौका मिल जाता है। अगर पहनावा पहले से ही पूरा मैच किया हुआ हो तो अलग से कुछ सोचने की जरूरत नहीं पड़ती। यह ग्रे और काले रंग वाला Co-ord Set शहर की गलियों, कैफे, होटल, एयरपोर्ट या किसी सामान्य घूमने वाली जगह पर आसानी से पहना जा सकता है। स्क्रीनशॉट में मॉडल इसे सफेद जूतों के साथ पहने हुए दिखाई दे रही है, जिससे पूरा लुक काफी साधारण और साफ लगता है। सिर्फ घूमने के लिए नहीं इस तरह के सेट को खरीदने का एक फायदा यह भी है कि इसे सिर्फ ट्रिप के दौरान ही पहनना जरूरी नहीं है। आप इसे कॉलेज जाते समय, दोस्तों के साथ बाहर निकलते समय, खरीदारी करने या कैज़ुअल दिन में भी पहन सकती हैं। यानी अगर आप कोई ऐसा पहनावा खरीद रही हैं जिसे साल में सिर्फ एक बार ट्रैवल के दौरान इस्तेमाल न करना पड़े, तो Co-ord Set इस मामले में काम का हो सकता है। एक ही सेट से अलग-अलग लुक कैसे बनाएं? जरूरी नहीं कि हर बार इस सेट को बिल्कुल उसी तरह पहनें जैसे तस्वीर में दिखाया गया है। आप इसके साथ अलग-अलग जूते और बैग इस्तेमाल करके लुक बदल सकती हैं। सफेद जूते से हल्का और साफ लुक बनेगा। काले जूते पूरे पहनावे की काली पट्टी के साथ अच्छा मेल खाएंगे। छोटा कंधे