दिल्ली का तीन मूर्ति भवन सिर्फ एक संग्रहालय नहीं, बल्कि भारत के आधुनिक इतिहास का जिंदा पन्ना है। नेहरू जी की यादों, उनके काम, उनके सपनों और आज़ाद भारत की शुरुआती कहानी को समझने के लिए इससे बेहतर जगह शायद ही कोई हो। हर साल 14 नवंबर, यानी नेहरू चाचा के जन्मदिन पर, इस भवन की रौनक और भी बढ़ जाती है। लोग यहां सिर्फ श्रद्धांजलि देने नहीं आते, बल्कि यह देखने आते हैं कि आखिर भारत का यह पहला प्रधानमंत्री किस माहौल में रहता था, कैसे काम करता था और देश को किस दिशा में ले गया।

तीन मूर्ति भवन का इतिहास
इसका इतिहास भी बहुत दिलचस्प रहा है। ब्रिटिश काल में यह भवन कमांडर-इन-चीफ का निवास हुआ करता था। आज़ादी के बाद यह नेहरू जी को मिला और वहीँ से उन्होंने भारत की विदेश नीति, विज्ञान, शिक्षा और लोकतंत्र की नींव को मजबूत किया। यहां की दीवारें, कमरे, उनकी लाइब्रेरी और उनका स्टडी रूम सब कुछ वैसा ही सहेजकर रखा गया है। ऐसा लगता है जैसे नेहरू जी अभी भी वहीं बैठकर किसी दस्तावेज़ पर लिख रहे हों। उनकी कलम, किताबें, डायरी और पत्र ये सब इतिहास को बेहद नजदीक से महसूस कराते हैं। नेहरू मेमोरियल म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी तीन मूर्ति भवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां भारत की स्वतंत्रता से लेकर पहली पंचवर्षीय योजना, गुटनिरपेक्ष आंदोलन और विज्ञान-तकनीक के विकास तक का पूरा सफर खूबसूरती से दिखाया गया है।

बच्चों से चाचा नेहरू का जुड़ाव
बच्चों के लिए यह जगह किसी मजेदार इतिहास यात्रा जैसी है तस्वीरें, डॉक्यूमेंट्स, मॉडल्स और मल्टीमीडिया डिस्प्ले इसे बेहद दिलचस्प बना देते हैं। इसलिए इसे नेहरू चाचा के जन्मदिन पर घूमने के लिए बिल्कुल सही जगह माना जाता है। तीन मूर्ति भवन के लॉन और परिसर भी बहुत शानदार हैं। शांत माहौल, पुराने पेड़ और बड़े-बड़े खुले क्षेत्र आपको कुछ देर बैठकर सोचने का मौका देते हैं। यहां बच्चों के आने का एक खास कारण यह भी है कि नेहरू चाचा हमेशा बच्चों से बहुत प्यार करते थे और उनकी शिक्षा व भविष्य पर सबसे ज्यादा ध्यान देते थे। यहां आकर बच्चे न सिर्फ नेहरू जी के बारे में सीखते हैं, बल्कि समझते हैं कि आज़ादी के बाद देश को खड़ा करने में कितनी मेहनत लगी थी। यदि आप दिल्ली में रहते हैं या नेहरू चाचा के जन्मदिन के मौके पर राजधानी आने का प्लान कर रहे हैं, तो तीन मूर्ति भवन जरूर जाएं। यह यात्रा आपको इतिहास से जोड़ेगी, देश की शुरुआती संघर्षों और उपलब्धियों को दिखाएगी, और यह एहसास दिलाएगी कि आज का भारत कितनी मेहनत और सोच का परिणाम है।

क्यों नेहरू के लिए खास था तीन मूर्ति भवन?
तीन मूर्ति भवन नेहरू जी के लिए सिर्फ एक घर नहीं था, बल्कि उनका कार्यस्थल, उनका विचार कक्ष और स्वतंत्र भारत के निर्माण का पहला मुख्यालय था। आज़ादी के बाद जब उन्हें देश का पहला प्रधानमंत्री बनाया गया, तब यही भवन उनका आधिकारिक निवास बना। यह वही जगह है जहां नेहरू जी देर रात तक बैठकर अपने नोट्स लिखते थे, विदेशों के नेताओं से मुलाकात करते थे और देश की नई दिशा तय करने वाली चर्चाएं होती थीं। उनकी स्टडी रूम, लिखने की मेज, उनके चश्मे, डायरी, पत्र और किताबें आज भी उसी तरह सहेजी गई हैं, जैसे वह छोड़कर गए थे। इसलिए यह भवन उनकी सोच, उनकी आदतों और उनके सपनों को सबसे नज़दीक से महसूस करने वाली जगह है।(तीन मूर्ति भवन का इतिहास भी बहुत दिलचस्प है)

तीन मूर्ति भवन में नेहरू का भावनात्मक जुड़ाव भी गहरा था। वे कहते थे कि यहीं से वे भारत को एक आधुनिक, वैज्ञानिक और प्रगतिशील राष्ट्र के रूप में देखते हैं। इस भवन में उनकी बेटी इंदिरा गांधी और पोते-पोतियों की बचपन की यादें भी जुड़ी हैं। यही वजह है कि यह भवन इतिहास में हमेशा नेहरू जी के नाम से बसा रहेगा एक ऐसे नेता के रूप में जिसने इस घर से पूरा भारत बदलता हुआ देखा।