शालीमार बाग़ कश्मीर की धरती पर मुगल मोहब्बत का बेशकीमती नग़मा
शालीमार बाग़ क्या है?
कश्मीर को धरती की जन्नत कहा जाता है, और इस जन्नत का सबसे खूबसूरत मोती है शालीमार बाग़। श्रीनगर के डल झील किनारे बसा यह बाग़ मुगल बादशाह जहांगीर ने 1619 में अपनी बेगम नूरजहां को खुश करने के लिए बनवाया था। कहते हैं कि जहांगीर और नूरजहां के प्रेम की असली खुशबू इसी बाग़ में बसती है। यहां घूमते हुए अक्सर ऐसा लगता है कि आप किसी फिल्मी दुनिया में चल रहे हों। हल्की हवा, लाल चिनार के पेड़, बहते पानी की मधुर आवाज़ और दूर खड़े पहाड़ जो धुंध में लिपटे रहते हैं, आपकी हैरत का कारण बन सकते हैं। क्योंकि यह पहली बार होगा जब आप कोई इतनी खूबसूरत जगह का दीदार कर रहे होंगे। शालीमार बाग़ सिर्फ एक गार्डन नहीं है, बल्कि मुगल इंजीनियरिंग और कश्मीर की प्रकृति का नायाब संगम है। इस बाग़ का हर कोना जैसे कोई कहानी सुनाता है, यकीन मानिए आप एक बार आने के बाद, बार-बार आने की जिद करोगे! पहाड़ियों का सुकून, फूलों की खुशबू और फव्वारों की ताल एक ऐसा माहौल बनाते हैं जो दिल को बिल्कुल शिथिल कर देता है। करीब 31 एकड़ में फैला यह बाग़ श्रीनगर पर्यटन का सबसे खास तोहफा है।
मुगल काल की मोहब्बत, कला और शान की दास्तान

शालीमार बाग़ का इतिहास बहुत ही दिलचस्प है। यह बाग़ शुरुआत में कश्मीर के राजा प्रवरसेन ने तीसरी शताब्दी में बनाया था, जिसे बाद में मुगल बादशाह जहांगीर ने अपने अंदाज़ में बदलकर नया रूप दिया। जहांगीर और नूरजहां अक्सर कश्मीर आते थे और कहते हैं कि यह बाग़ उनका पसंदीदा ठिकाना था, एक ऐसी जगह जहां बादशाह अपनी सारी चिंताएं भूलकर बस प्रकृति का आनंद लेते थे। वैसे तो बाग़ तीन हिस्सों में बांटा गया था! जिनमें आम जनता के लिए, खास मेहमानों के लिए, और सबसे ऊपर दीवान-ए-खास जो सिर्फ बादशाह और बेगम के लिए था। यह ऊपरी हिस्सा वह जगह थी जहां जहांगीर अक्सर बैठकर कश्मीर की वादियों को निहारते थे। यहां बहने वाले फव्वारों का पानी उस समय के प्राकृतिक गुरुत्वाकर्षण सिस्टम से चलता था, जिसे मुगल इंजीनियरिंग का सबसे कमाल का उदाहरण माना जाता है। पतझड़ के मौसम में जब चिनार के पत्ते सुर्ख लाल हो जाते हैं, तो पूरा बाग़ ऐसा लगता है जैसे किसी ने लाल मखमल की चादर ओढ़ा दी हो। शालीमार का इतिहास केवल राजाओं का इतिहास नहीं है, यह कला, प्रेम, संस्कृति और प्रकृति की अनूठी विरासत की कहानी है।
शालीमार बाग़ में क्या खास है?

शालीमार बाग़ की खूबसूरती इसकी बनावट में छिपी है। यह एक तीन स्तरीय मुगल गार्डन है। नीचे से ऊपर जाते हुए हर स्तर का रंग और रूप बदल जाता है। बीच से बहती पानी की नहरें और दोनों ओर फव्वारे पूरे बाग़ को एक संगीत में बदल देते हैं। पानी की आवाज़ और पेड़ों की सरसराहट मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं कि आपको खुद में एक अजीब-सी शांति महसूस होती है। चिनार के पेड़ यह बाग़ की सबसे बड़ी पहचान हैं। ये ऊंचे-ऊंचे पेड़ पतझड़ में लाल और सुनहरी रोशनी से चमकते हैं और गर्मियों में गहरी छांह देते हैं। जैसा की मैनें पहले बताया दीवान-ए-खास बाग़ का सबसे ऊपरी और सबसे खूबसूरत हिस्सा है। जहां से डल झील, पहाड़ और श्रीनगर की वादियों का नज़ारा एक साथ दिखाई देता है जो आपको रोमांच से भर देता है। लंबे वॉकवे और मुगल शैली के मेहराब ये इस बाग़ को एक शाही अंदाज़ देते हैं। एक और बात बारिश के बाद बाग़ का हर पत्थर चमकने लगता है और पानी में बने प्रतिबिंब किसी सपने जैसे दिखते हैं।
शालीमार बाग़ कहां है और कैसे पहुंचे?

शालीमार बाग़, श्रीनगर के डल झील के पूर्वी किनारे पर स्थित है। यह शहर के सेंटर से लगभग 15 किमी की दूरी पर है। श्रीनगर एयरपोर्ट से टैक्सी आसानी से मिल जाती है जो सीधे बाग़ तक ले आती है। डल झील के आसपास रुकने वाले लोगों के लिए शालीमार तक पहुंचना और आसान हो जाता है ऑटो, टैक्सी और यहां तक कि लोकल कैब भी बड़ी आसानी से मिल जाते हैं। बहुत से यात्री पहले डल झील की शिकारा राइड करते हैं और फिर सड़क से शालीमार बाग़ पहुंचते हैं। यह सफर इतना खूबसूरत होता है कि रास्ता भी एक यादगार अनुभव बन जाता है। खैर जाएंगे तो अनुभव भी पाएंगे! तो बैग पैक कीजिए और आइए इन खूबसूरत वादियों में आपका स्वागत है।(कश्मीर को धरती की जन्नत कहा जाता है,)
आयें तो कहां रुके?

शालीमार बाग़ घूमने के लिए आए हैं तो जान लीजिए! सबसे अच्छे ठहरने की जगहें हैं डल झील के हाउस बोट्स। ये हाउसबोट्स सिर्फ होटल नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक अनुभव हैं। लकड़ी की नक्काशी, जगमगाती लाइटें, शांत पानी और पहाड़ों का नज़ारा। जैसे आप सुबह आंख खोलते हैं और पानी पर चमकती धूप देखते हैं तो इससे बेहतर अनुभव शायद आप कहीं और ले पाएं। सच में यह अनुभव आपको किसी जादू जैसा लगेगा। इसके अलावा शालीमार रोड, निशात बाग़ और बुलवार्ड रोड पर कई बजट और लक्ज़री होटल हैं। दरअसल, श्रीनगर में रहने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपनी सुबह झील के किनारे चाय से शुरू कर सकते हैं और शामें मुगल गार्डन में टहलते हुए बिता सकते हैं। खैर, फैसला तो आपके हाथों में ही है।

आसपास घूमने की जगहें
सबसे पहले तो बता दूं! शालीमार बाग़ के आसपास घूमने के लिए बहुत कुछ है। निशात बाग़ शालीमार से कुछ ही दूरी पर है, यह गार्डन ऑफ़ ब्लिस के नाम से मशहूर भी है। यहां आप घूमने आ सकते हैं अच्छी जगह है मन को मोहित करने वाली है, चश्मे-शाही यहां का प्राकृतिक झरना पीने में बेहद हल्का और स्वादिष्ट होता है, चाहें तो आप इसका भी दीदार कर सकते हैं। हरि पर्वत एक ऐतिहासिक किला और मंदिरों का अद्भुत संगम है जो आपकी यात्रा में चार चांद लगाने का काम करता है। इसके अलावा आप आ सकते हैं डल झील, कश्मीर का दिल, जहां शिकारा की सवारी हर यात्री का सपना होती है। आखिर में कहूंगा की आप परी महल देखिए जो पहाड़ पर बना सात-स्तरीय बाग़ है, और यही सूरज ढलने का सबसे खूबसूरत पॉइंट होता है। लिस्ट में शंकराचार्य मंदिर भी है! जहां से पूरा श्रीनगर नज़र आता है, देखना है तो यह भी मजेदार और आनंद से भरपूर जगहों में से एक है। और यदि आपके पास एक-दो दिन और हों, तो गुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग का प्लान भी जोड़ सकते हैं।

कश्मीर की रसोई का लज़ीज़ स्वाद
शालीमार बाग़ घूमने के बाद आपको आस-पास कई फूड पॉइंट तो मिलेंगे। जहां असली कश्मीरी स्वाद मिलता है। कश्मीर का वज़वान यहां की शान है! रोगन जोश, रिस्ता, गोश्ताबा, यख़नी और दमआलू हर खाने वाले को अपने स्वाद से दीवाना बना देते हैं। शाकाहारी लोगों के लिए नादरू यख़नी, कश्मीरी राजमा, मूली छोकर, और चमन क़लिया बेहतरीन हैं। गर्म कहवा केसर वाली चाय, ठंडे मौसम में शरीर और दिल दोनों को गरम कर देती है। इसको भी आजमा सकते हैं। कश्मीरी बेकरी की लवाज़ा ब्रेड और ताज़े कुलचे यहां की सुबह को खास बना देते हैं, यह मेरा अपना सुझाव है आप एक बार इसको जरूर चखें।
फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल की तरफ से पांच यात्रा सुझाव!

सुबह-सुबह शालीमार बाग़ जाएं हल्की धूप और ठंडी हवा बाग़ की असली खूबसूरती उभारती है।
पतझड़ में घूमने का मौका न छोड़ें चिनार के लाल पत्ते पूरे बाग़ को सुनहरी चादर जैसा बना देते हैं।
शिकारा से बाग़ का प्रतिबिंब देखें डल झील के पानी में शालीमार का प्रतिबिंब शानदार फोटो देता है।
दीवान-ए-खास तक जरूर जाएं यहां से श्रीनगर और पहाड़ों का नज़ारा सबसे खूबसूरत दिखाई देता है।
शालीमार को तीनों मुगल गार्डन्स के साथ जोड़ें एक ही दिन में शालीमार, निशात और चश्मे-शाही—तीनों का टूर सबसे बढ़िया रहता है।






