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ताजमहल के उन बंद 22 कमरों की वह अनकही बातें जो शायद हीं आपको पता होगी,,,,

ताजमहल प्यार की एक निशानी ( Taj Mahal the Significance of Love)

कहते हैं मोहब्बत के बिना जिंदगी अधूरी है और ऐसी हजारों किस्से कहानियां हैं जो मोहब्बत के सही मायने को बताते हैं। उन्हीं हजारों कहानियों में से एक कहानी है शाहजहाँ और मुमताज बेगम की कहानी। जिसकी गवाही दुनिया का सातवां अजूबा ताजमहल देता है। संगमरमर के सफेद पत्थरों पर लिखी गई मोहब्बत की ऐसी कहानी जो ना सिर्फ लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है, बल्कि यह कहानी लोगों को हैरान भी करती है। आज इस ब्लॉग में हम आपको मुमताज के लिए शाहजहां की मोहब्बत की निशानी ताजमहल के बारे में कुछ ऐसे राज बताएंगे जिनके बारे में आपमें से बहुत कम लोगों को ही पता होगा।

ताजमहल को मोहब्बत की निशानी (significance of love) के तौर पर देखा जाता है। किसी के लिए यह एक ऐतिहासिक स्मारक है तो, किसी के लिए यह एक मोहब्बत की निशानी है। कोई यहां सिर्फ इसकी खूबसूरती की वजह से घूमने जाता है तो किसी को ताजमहल से जुड़े उन रहस्यों के बारे में दिलचस्पी है, जिन पर चर्चा तो होती है लेकिन वह आज भी अनसुलझे (unresolved mysteries) हैं। अपनी बेहतरीन खूबसूरती के लिए यह स्मारक दुनिया भर में प्रसिद्ध है और हर साल देश-विदेश से हजारों लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

इतिहास (History) :

ताजमहल के इतिहास के बारे में बात की जाए तो इस मकबरे (tomb) को मुगल बादशाह(Mughal Emperor) शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद और प्यार में बनवाया था। इस मकबरे का निर्माण 1632 में करवाया गया था। बताया जाता है कि शाहजहाँ ताजमहल के निर्माण के बाद उसके सामने काले ताजमहल (Black Taj Mahal) का निर्माण करवाना चाहते थे। लेकिन उनके बेटे औरंगजेब ने उन्हें आगरा के किले में हाउस अरेस्ट करके रख दिया था। अगर ताजमहल के आधुनिक इतिहास की बात की जाए तो इसे 1983 में यूनेस्को ने विश्व विरासत स्थल (world heritage site) के तौर पर चुना। साथ ही साथ इसे 2007 में दुनिया के सातवें अजूबे की उपाधि भी मिली।

ताजमहल के वास्तुकला का महत्व (Architectural value of the Taj Mahal)

अगर आर्किटेक्चर (architecture) की बात की जाए तो भारत में ताजमहल के जितना भव्य (grandeur) शायद ही कोई दूसरा ऐतिहासिक धरोहर होगा। अगर ताजमहल के नक्काशी के बारे में बात किया जाए तो इसमें पारसी इस्लामी और भारतीय वास्तुकला का मिला जुला प्रभाव देखने को मिलता है। ताजमहल को यमुना नदी के दक्षिणी तट पर बनवाया गया है। इसके निर्माण में सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है। जो इसकी सुंदरता (beauty) में चार चांद लगाते हैं।

ताजमहल की चारों मीनारें बाहर की तरफ झुकी हुईं हैं। इनको बनाते समय ही बाहर की तरफ झुका हुआ बनाया गया था। इसका कारण यह बताया जाता है कि अगर कभी भूकंप (earthquake) आने पर ये मीनारें गिरेंगे तो वह ताजमहल के मुख्य गुंबद को हानि नहीं पहुंचाएंगे। ताजमहल के आसपास चारबाग भी है। जो पानी के नलों से 4 भाग में बँट जाते हैं। इस बाग को इस तरह से बनाया गया है कि यह बाग ताजमहल की खूबसूरती को कई गुना ज्यादा बढ़ा देता है। हरे-भरे घास के मैदान चमकीले फूल और यहां का शांत माहौल पर्यटकों को जहां बैठकर आराम करने और फोटोग्राफी करने के लिए आकर्षित (Attracts) करते हैं।

ताजमहल को बनवाने में शाहजहाँ को 22 साल का समय लग गया। इसका निर्माण कार्य 1631 में शुरू हुआ था और 1653 में यह बनकर तैयार हुआ था। बताया जाता है कि ताजमहल के निर्माण में 20000 से भी ज्यादा मजदूरों को काम पर लगाया गया था। ताजमहल के आर्किटेक्चर में भारतीय, फारसी और इस्लामिक शैली की कारीगरी दिखने का कारण यह भी है कि ताजमहल के निर्माण के लिए जिन मजदूरों को चुना गया था। उनमें भारतीय मजदूरों के साथ-साथ कुछ तुर्की और फारसी मजदूर भी थे। इसलिए ही तीन अलग-अलग संस्कृतियों के मेल से यह शानदार(magnificent) मकबरा (tomb) बनकर तैयार हुआ।

ताजमहल से जुड़ी कुछ अनकही बातें (Untold things about Taj Mahal)

जब आप ताजमहल में एंटर करेंगे तो आपको वहां दो कब्र दिखेंगे। पर्यटकों को लगता है कि यह शाहजहाँ और मुमताज का असली कब्र है। लेकिन ऐसा नहीं है। शाहजहाँ और मुमताज का असली कब्र मुख्य गुंबद के नीचे है। जहां तक जाने के लिए नीचे की ओर सीढ़ियां बनाई गईं हैं। जो आम दिनों में हमेशा बंद रहते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि यह कब्र वाला कमरा हमेशा ही बंद रहता है। हर साल उर्स (Urs festival) के मौके पर पर्यटकों के लिए उस कमरे को खोला जाता है। तब आप वहां जाकर असली कब्र को देख सकते हैं।

ताजमहल के 22 बंद कमरों में दफन हैं कई राज (Secrets buried in the 22 locked rooms of Taj Mahal)

ताजमहल के नीचे कुल 22 कमरे हैं। जिन्हें सामान पर्यटकों के लिए खोला नहीं जाता है। यह कमरे बंद रहने के कारण से पर्यटकों के बीच उत्सुकता का कारण बनते हैं। यहां आने वाले लोगों को इन कमरों में छिपे रहस्यों (mysteries) को जानने में काफी दिलचस्पी (interest) होती है।

बताया जाता है कि इन कमरों को समय-समय पर साफ सफाई के लिए खोला जाता है। वैसे तो इन कमरों के ऊपर कई बार काफी विवाद हुआ है और इसे संप्रदायिकता (secularism) से भी जोड़ा गया है, लेकिन अगर रिसर्च की माने तो ताजमहल के नीचे के कमरे ताजमहल से लेकर नदी तक एक लाइन में बनाए गए हैं। जिनमें कुछ अंडर ग्राउंड (Under Ground) कमरे भी हैं। ये कमरें मुगल काल के स्थापत्य कला के प्रमुख (prominent) उदाहरण हैं। बताया जाता है कि पाकिस्तान के लाहौर में भी एक महल से नदी तक लगातार लाइन में कमरे बनाए गए थे।

शोधकर्ताओं (researchers) का मानना है कि इस तरह से बनाए गए कमरों का इस्तेमाल एक हवादार कमरे की तरह होता था। ताजमहल के नीचे के कमरों में भी बेहतरीन नक्काशी की गई है। यहां की खिड़कियों के जालियों पर काफी महीन नक्काशी उकेरी गई है। जो मुगल काल के वास्तुकला का एक नायाब नमूना है।

By Five Colors Of Travel

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