Best of My Blogs Destination Travel Uttar Pradesh

Taj Mahal: वो मोहब्बत, जिसे देखने पूरी दुनिया आती है

  • 0 Comments

दुनिया में कितनी ही अनगिनत जगह हैं जिन्हें ज़िंदग़ी में एक बार देख लेना भी किसी सपने के मुक़्क़मल होने से कम नहीं लगता। ऐसी ही नायाब जगहों में से एक है ताज महल। अगर दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों की बात हो, तो ताजमहल का नाम सबसे पहले लिया जाता है। आगरा में स्थित यह अमर धरोहर मुगल कला, तहज़ीब और मोहब्बत की ऐसी मिसाल है, जो हर बार देखने पर नई लगती है। (Taj mahal) आगरा: इतिहास, सत्ता और ताजमहल की पहचान देश की राजधानी से मात्र 234 किलोमीटर की दूरी पर बसा आगरा शहर न केवल ऐतिहासिक है बल्कि सदैव देश की सियासत का अहम् केंद्र भी रहा है। और आगरा को दुनिया भर में शौहरत दिलाने का काम किया है ताजमहल ने। जब  माँ बाप अपने बच्चों के नाम से जाने जाएँ तब उन्हें बेहद सुखद अहसास होता है और ऐसे ही ताजमहल के नाम से अपनी विशेष पहचान बनाने में निसंदेह आगरा फ़क़्र महसूस करता होगा। भी हम कहीं घूमने का कार्यक्रम बनाते हैं तो ज़हन में सबसे पहले नाम आता है, ताजमहल। इक़लौती ऐसी कविता जिसे संगमरमर से तराशा गया है। जिसका ऑरा कुछ ऐसा है कि सामने पाकर भी विश्वास कर पाना मुश्क़िल लगता है। बात कुछ ऐसी थी कि एक शाम जब फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल टीम के साथ बैठकर चाय का लुत्फ़ उठाया जा रहा था, साथ में नेक्स्ट डेस्टिनेशन की प्लानिंग की जा रही थी, टीम के एक साथी ने सुझाया ताजमहल। तो इस सुझाव को फाइनल होने में जरा भी समय नहीं लगा। बस फिर क्या, यहीं से जाने की तैयारियां शुरू हुई और क्योंकि सफ़र लंबा था तो यकीनन मज़ा भी बहुत आने वाला था। यूं तो रास्ते में ढ़ेरों ढ़ाबों ने रूकने का इशारा दिया लेकिन जब रास्ता इतना आरामदायक हो तो कहां कहीं रूकने का दिल करता है। बस तमाम सफर के दौरान यमुना एक्सप्रेस वे के बिलकुल मिडल में ही एक जगह रुक कर चाय का मजा लिया गया। एक प्याला चाय सारी थकान दूर भगाय। यमुना एक्सप्रेसवे से हम आगरा की तरफ बढ़ते जा रहे थे। क्या सुहाना सफ़र था। उगते सूरज को सलाम कर हम निकले और दोपहर तक आगरा पहुंचे, होटल पहले से बुक था। इसलिए होटल पहुँच कर सोचा पहले थोड़ा आराम फ़रमा लिया जाए फिर निकलेंगे ताजमहल के दीदार के लिए। दो-तीन घंटे आराम कर हल्की शाम होते ही हमने ताजमहल जाने की तैयारी की। संकरी गलियों से होकर ट्र्ैफिक की जद्दोजहद से निकलकर आख़िरकार हम उस अविश्वसनीय मीनार के क्षेत्र में पहुंच गए। ताजमहल परिसर और ऊंट गाड़ी ताजमहल परिसर में प्रवेश करते ही ताज से लगभग एक डेढ़ किलोमीटर दूर आपको अपनी कार पार्क करनी पड़ेगी। प्रदूषण के मध्यनज़र पार्किंग क्षेत्र को परिसर से थोड़ा दूर बनाया गया है। अच्छी बात ये है कि पार्किंग से ताज तक पैदल जाने के अलावा आपको मिलेगी ई रिक्शा और तांगा । आप आराम से तांगे की सवारी करते हुए टिकट खिड़की तक पहुँच सकते हैं।  जैसे ही ताज के पास पहुंचे महसूस हुआ जैसे मोहब्बत का नूर टपक रहा हो, वहां के हर एक पत्थर में, फूलों में, पत्तों में। जैसे रूहानियत का अलग ही जहां हो। सारी विशेष चीज़ें मानो एक ही थाली में परोस दी गईं हो। मुग़ल सम्राट शाहजहां के अरमानों को पूरा करता यह अद्भुत स्मारक बेग़म मुमताज़ के लिए बनाई गई अविश्वास्य इमारत जिसे हम मुमताज़ महल के नाम से भी जानते हैं। अकेले मक़बरे को बनने में क़रीब 11 वर्ष का समय लगा। ज़ाहिर है, इतनी ख़ूबसूरत इमारत जिसकी एक-एक ईंट अकल्पनीय कला की ग़वाही दे रही हों, चार दिन में तो बनकर तैयार हो नहीं सकती। इसीलिए समय तो लगना ही था और परिसर में मौजूद बाक़ी की इमारतों को भी तक़रीबन 21 से 22 वर्ष लगे। ताज को यमुना का स्पर्श ताजमहल केवल पर्यटक स्थल ही नहीं बल्क़ि कई प्रकार की कारीगरी का खज़ाना भी है। जैसे-जैसे आप इसके नज़दीक़ जाएंगे तो पाएंगे कि सिर्फ ताज ही नहीं, उसके आसपास बनाई गई सभी इमारतें अपने आप में बेमिसाल कारीगरी का नमूना है। वैसे यह झूठ नहीं है जिसे आर्किटेक्चर में दिलचस्पी है उसके लिए तो ताजमहल की यात्रा सोने की ख़दान से कम नहीं है। हिमालय की गोद से निकलती यमुना अपने 1370 कि.मी. के लंबे सफ़र में कई मोड़ और ठिकानों से होकर ग़ुज़रती है। उन्हीं ठिकानों में से एक है ताजमहल। वैसे शाहजहां ने भी क्या ख़ूब दिमाग़ दौड़ाया, सोचा अगर ताज को यमुना का स्पर्श मिल जाए तो क्या बात होगी, ताज की ख़ूबसूरती दोगुनी हो जाएगी और देखिए ऐसा ही हुआ। यमुना नदी पर ख़ासा ध्यान देते हुए मक़बरे तक जाने से पहले यह विशाल बालकनी बनाई गई है जहां खड़े होकर आप यमुना नदी को निहार सकते हैं और नदी की ओर से आने वाली ठंडी हवाएं आपको एकदम तरोताज़ा कर देती हैं। बेशक़ यह दृश्य आपको आश्चर्यचकित करने में ज़रा भी विफल नहीं होगा। ताजमहल को ग़ौर से देख लेने के बाद आपका दिल चाहेगा कि यहां बैठकर मन मोह लेने वाले गीत सुनते रहें और बस यहां की हवा में खो जाएं। कुछ ऐसा ही जादू है इस जगह में। दरवाज़ा ए रोज़ा बहरहाल, आइए इतिहास को थोड़ा खंगालते हुए मुग़लों के दौर में एक बार फिर चलते हैं और शुरूआत करते हैं दरवाज़ा ए रोज़ा से। आप जैसे ही ताजमहल के अंदर प्रवेश करते हैं तब आपको सबसे पहले दिखाई देता है एक विशाल दरवाज़ा जो दूर से ही ताज की अद्भुत झलक पेश करता है। ये इमारतें महज़ ख़ूबसूरती ही नहीं बल्क़ि मज़बूत इरादों की भी मिसाल क़ायम करती हैं। ताजमहल को अपने इतना नज़दीक पाना वाक़ई में सपने सा लग रहा था। ज़ाहिर है जिसे लोग देशभर से निहारने आते हैं, जिसकी सुंदरता की दुनियाभर में प्रशंसा की जाती है उससे भला हम कैसे अछूते रह जाते। दरवाज़ा ए रोज़ा ताजमहल परिसर के महत्वपूर्ण भागों में से एक है। जहां पहुंचने के लिए हमें कई पड़ाव पार करने होते हैं। वो कहते हैं ना किसी भी सुंदर चीज़ को देखने के लिए कुछ क़ीमत तो चुकानी पड़ती है। लिहाज़ा हमने भी टिकट ली और आगे बढ़े। दरवाज़े की बात की जाए तो उसके

Destination Uttar Pradesh

ताजमहल – प्यार की अमर निशानी | Taj Mahal Travel Guide in Hindi

  • 0 Comments

ताजमहल, आगरा में स्थित भारत की सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहर है। सिर्फ एक मकबरा या इमारत नहीं, बल्कि आप इसे मोहब्बत, कला और मुगल वास्तुकला के अद्भुत प्रतीक के रूप में देख सकते हैं। हर साल लाखों देशी-विदेशी पर्यटक ताजमहल देखने आगरा आते हैं। 1983 में इसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया था। (Tajmahal) ताजमहल का इतिहास ताजमहल का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज़ महल की याद में करवाया था। इसका निर्माण कार्य 1632 में शुरू हुआ और लगभग 22 वर्षों में पूरा हुआ। सफ़ेद संगमरमर से बना यह मकबरा आज भी प्रेम की सबसे खूबसूरत मिसाल माना जाता है। ताजमहल की वास्तुकला ताजमहल की वास्तुकला को दुनिया की सबसे बेहतरीन कलात्मक उपलब्धियों में गिना जाता है। यह मुगल, फारसी और इस्लामिक स्थापत्य शैली का अद्भुत संगम है, जिसमें संतुलन, समरूपता और बारीक कारीगरी साफ़ दिखाई देती है। ताजमहल सिर्फ़ एक मकबरा नहीं, बल्कि वास्तुकला की ऐसी रचना है जो सदियों से लोगों को मंत्रमुग्ध करती आ रही है। सफ़ेद संगमरमर की ख़ूबसूरती ताजमहल का निर्माण मुख्य रूप से मकराना (राजस्थान) के शुद्ध सफ़ेद संगमरमर से किया गया है। यह संगमरमर सूरज की रोशनी में अलग-अलग रंगों की आभा देता है — सुबह हल्का गुलाबी, दिन में दूधिया सफ़ेद और चाँदनी रात में चमकता हुआ सिल्वर सा दिखाई देता है। यही कारण है कि ताजमहल को दिन के अलग-अलग समय में देखने का अनुभव हर बार अलग लगता है। चार मीनारों की अनोखी डिजाइनिंग मुख्य मकबरे के चारों कोनों पर बनी चार मीनारें ताजमहल की पहचान हैं। ये मीनारें हल्की सी बाहर की ओर झुकी हुई बनाई गई हैं, ताकि भूकंप या किसी आपदा की स्थिति में वे मुख्य मकबरे पर न गिरें। यह उस समय की उन्नत इंजीनियरिंग और दूरदर्शिता को दर्शाता है। इन मीनारों से पूरी संरचना में संतुलन और भव्यता आती है। चारबाग़ शैली का सुंदर बाग़ ताजमहल के सामने बना बाग़ फारसी चारबाग़ शैली पर आधारित है, जिसे चार समान हिस्सों में बाँटा गया है। इन हिस्सों के बीच पानी की नहरें और फव्वारे बने हुए हैं, जो स्वर्ग की कल्पना को दर्शाते हैं। बाग़ के बीच से बहती जलधारा में ताजमहल की परछाईं एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती है, जो पर्यटकों और फ़ोटोग्राफ़रों को विशेष रूप से आकर्षित करती है। संगमरमर पर की गई कीमती पत्थरों की नक्काशी ताजमहल की दीवारों पर की गई नक्काशी इसकी सबसे बड़ी खासियतों में से एक है। इसे पिएत्रा ड्यूरा कला कहा जाता है, जिसमें संगमरमर पर नीलम, जैस्पर, मूंगा और फ़िरोज़ा जैसे कीमती पत्थरों को जड़ा गया है। फूलों और ज्यामितीय डिज़ाइनों की यह कारीगरी आज भी उतनी ही जीवंत और आकर्षक दिखाई देती है जितनी सैकड़ों साल पहले रही होगी। सूर्योदय और चाँदनी रात का जादू सूर्योदय के समय ताजमहल पर पड़ती पहली किरणें इसे सुनहरी आभा से भर देती हैं, जबकि चाँदनी रात में यह किसी स्वप्नलोक जैसा प्रतीत होता है। पूर्णिमा की रात को ताजमहल का नाइट व्यू देखने का अनुभव पर्यटकों के लिए बेहद खास माना जाता है। बदलती रोशनी के साथ ताजमहल के रंगों का बदलना इसकी वास्तुकला की जीवंतता को दर्शाता है। ताजमहल घूमने का सही समय ताजमहल टिकट और समय ताजमहल के पास घूमने की जगहें ताजमहल विजिट के लिए फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रैवल टिप्स

Best of My Blogs Destination Travel Uttar Pradesh

Taj Mahal-One of Seven Wonders

  • 0 Comments

Taj Mahal: मोहब्बत और तहज़ीब की अनोखी विरासत – ताज महल by Pardeep Kumar दुनिया में कितनी ही अनगिनत जगह हैं जिन्हें ज़िंदग़ी में एक बार देख लेना भी किसी सपने के मुक़्क़मल होने से कम नहीं लगता। ऐसी ही नायाब जगहों में से एक है ताज महल।(Taj mahal) देश की राजधानी से मात्र 234 किलोमीटर की दूरी पर बसा आगरा शहर न केवल ऐतिहासिक है बल्कि सदैव देश की सियासत का अहम् केंद्र भी रहा है। और आगरा को दुनिया भर में शौहरत दिलाने का काम किया है ताजमहल ने। जब  माँ बाप अपने बच्चों के नाम से जाने जाएँ तब उन्हें बेहद सुखद अहसास होता है और ऐसे ही ताजमहल के नाम से अपनी विशेष पहचान बनाने में निसंदेह आगरा फ़क़्र महसूस करता होगा। दरअसल जब भी हम कहीं घूमने का कार्यक्रम बनाते हैं तो ज़हन में सबसे पहले नाम आता है, ताजमहल। इक़लौती ऐसी कविता जिसे संगमरमर से तराशा गया है। जिसका ऑरा कुछ ऐसा है कि सामने पाकर भी विश्वास कर पाना मुश्क़िल लगता है। बात कुछ ऐसी थी कि एक शाम जब परिवार के साथ बैठकर चाय का लुत्फ़ उठाया जा रहा था तो ख़्याल आया क्यूं न कहीं घूमने जाया जाए। आमतौर पर मध्यवर्गीय परिवारों में थोड़ा क्वालिटी टाइम बिताने के लिए ही हम कहीं आउट ऑफ़ स्टेशन जाते हैं। किसी ने सुझाया ताजमहल। तो इस सुझाव को फाइनल होने में जरा भी समय नहीं लगा। बस फिर क्या, यहीं से जाने की तैयारियां शुरू हुई और क्योंकि सफ़र लंबा था तो यकीनन मज़ा भी बहुत आने वाला था। खाने-पीने की चीज़ें सबसे पहले पैक की गई, साथ ही चाय का एक बड़ा थर्मस। यूं तो रास्ते में ढ़ेरों ढ़ाबों ने रूकने का इशारा दिया लेकिन जब रास्ता इतना आरामदायक हो तो कहां कहीं रूकने का दिल करता है। बस तमाम सफर के दौरान यमुना एक्सप्रेस वे के बिलकुल मिडल में ही एक जगह रुक कर अपने घर की बनी चाय का मजा लिया गया। एक प्याला चाय सारी थकान दूर भगाय। यमुना एक्सप्रेसवे से हम आगरा की तरफ बढ़ते जा रहे थे। क्या सुहाना सफ़र था। उगते सूरज को सलाम कर हम निकले और भरी दोपहरी में आगरा पहुंचे, जहां का तापमान उबाल मार रहा था। इतनी गर्मी कि कोई हद-हिसाब नहीं इसीलिए सबसे पहले हमने होटल बुक करना ज़्यादा बेहतर समझा। सोचा पहले थोड़ा आराम फ़रमा लिया जाए फिर निकलेंगे ताजमहल के दीदार के लिए। दो-तीन घंटे आराम कर हल्की शाम होते ही हमने ताजमहल जाने की तैयारी की। संकरी गलियों से होकर ट्र्ैफिक की जद्दोजहद से निकलकर आख़िरकार हम उस अविश्वसनीय मीनार के क्षेत्र में पहुंच गए। ताजमहल परिसर और ऊंट गाड़ी ताजमहल परिसर में प्रवेश करते ही ताज से लगभग एक डेढ़ किलोमीटर दूर आपको अपनी कार पार्क करनी पड़ेगी। प्रदूषण के मध्यनज़र पार्किंग क्षेत्र को परिसर से थोड़ा दूर बनाया गया है। अच्छी बात ये है कि पार्किंग से ताज तक पैदल जाने के अलावा आपको मिलेगी ऊंट गाड़ी। आप आराम से ऊंट गाड़ी की सवारी करते हुए टिकट खिड़की तक पहुँच सकते हैं।  हमने थोड़ा समय बचाते हुए ऊंट गाड़ी की सवारी का भी आनंद उठाया। जैसे ही ताज के पास पहुंचे महसूस हुआ जैसे मोहब्बत का नूर टपक रहा हो, वहां के हर एक पत्थर में, फूलों में, पत्तों में। जैसे रूहानियत का अलग ही जहां हो। सारी विशेष चीज़ें मानो एक ही थाली में परोस दी गईं हो। मुग़ल सम्राट शाहजहां के अरमानों को पूरा करता यह अद्भुत स्मारक बेग़म मुमताज़ के लिए बनाई गई अविश्वास्य इमारत जिसे हम मुमताज़ महल के नाम से भी जानते हैं। अकेले मक़बरे को बनने में क़रीब 11 वर्ष का समय लगा। ज़ाहिर है, इतनी ख़ूबसूरत इमारत जिसकी एक-एक ईंट अकल्पनीय कला की ग़वाही दे रही हों, चार दिन में तो बनकर तैयार हो नहीं सकती। इसीलिए समय तो लगना ही था और परिसर में मौजूद बाक़ी की इमारतों को भी तक़रीबन 21 से 22 वर्ष लगे। ताज को यमुना का स्पर्श ताजमहल केवल पर्यटक स्थल ही नहीं बल्क़ि कई प्रकार की कारीगरी का खज़ाना भी है। जैसे-जैसे आप इसके नज़दीक़ जाएंगे तो पाएंगे कि सिर्फ ताज ही नहीं, उसके आसपास बनाई गई सभी इमारतें अपने आप में बेमिसाल कारीगरी का नमूना है। वैसे यह झूठ नहीं है जिसे आर्किटेक्चर में दिलचस्पी है उसके लिए तो ताजमहल की यात्रा सोने की ख़दान से कम नहीं है। हिमालय की गोद से निकलती यमुना अपने 1370 कि.मी. के लंबे सफ़र में कई मोड़ और ठिकानों से होकर ग़ुज़रती है। उन्हीं ठिकानों में से एक है ताजमहल। वैसे शाहजहां ने भी क्या ख़ूब दिमाग़ दौड़ाया, सोचा अगर ताज को यमुना का स्पर्श मिल जाए तो क्या बात होगी, ताज की ख़ूबसूरती दोगुनी हो जाएगी और देखिए ऐसा ही हुआ। यमुना नदी पर ख़ासा ध्यान देते हुए मक़बरे तक जाने से पहले यह विशाल बालकनी बनाई गई है जहां खड़े होकर आप यमुना नदी को निहार सकते हैं और नदी की ओर से आने वाली ठंडी हवाएं आपको एकदम तरोताज़ा कर देती हैं। बेशक़ यह दृश्य आपको आश्चर्यचकित करने में ज़रा भी विफल नहीं होगा। ताजमहल को ग़ौर से देख लेने के बाद आपका दिल चाहेगा कि यहां बैठकर मन मोह लेने वाले गीत सुनते रहें और बस यहां की हवा में खो जाएं। कुछ ऐसा ही जादू है इस जगह में। दरवाज़ा ए रोज़ा बहरहाल, आइए इतिहास को थोड़ा खंगालते हुए मुग़लों के दौर में एक बार फिर चलते हैं और शुरूआत करते हैं दरवाज़ा ए रोज़ा से। आप जैसे ही ताजमहल के अंदर प्रवेश करते हैं तब आपको सबसे पहले दिखाई देता है एक विशाल दरवाज़ा जो दूर से ही ताज की अद्भुत झलक पेश करता है। ये इमारतें महज़ ख़ूबसूरती ही नहीं बल्क़ि मज़बूत इरादों की भी मिसाल क़ायम करती हैं। ताजमहल को अपने इतना नज़दीक पाना वाक़ई में सपने सा लग रहा था। ज़ाहिर है जिसे लोग देशभर से निहारने आते हैं, जिसकी सुंदरता की दुनियाभर में प्रशंसा की जाती है उससे भला हम कैसे अछूते रह जाते। दरवाज़ा ए रोज़ा ताजमहल परिसर के महत्वपूर्ण भागों में से एक है। जहां पहुंचने के लिए हमें कई पड़ाव पार करने होते हैं। वो कहते हैं ना किसी भी सुंदर चीज़