कर्नाटक सिर्फ इतिहास, मंदिरों और शहरों की रफ्तार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए ये किसी स्वर्ग से कम नहीं। यहां की पहाड़ियां, जंगल, बादलों से भरी वादियां और शांत रास्ते आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। दक्षिण भारत की धरती पर बने ये ट्रैक उन लोगों के लिए जन्नत हैं जो नेचर को नजदीक से महसूस करना चाहते हैं। नंदी हिल्स, स्कंदगिरि, कुमार पर्वत, अंतरगंगे और कोडचाड्री ये पांच जगहें हर उस इंसान की फेवरिट लिस्ट में जगह बना सकती हैं, जो एडवेंचर का मज़ा लेना चाहता है। इन जगहों की खूबी ये है कि यहां का माहौल, रास्तों का एक्सपीरियंस और शांति सब कुछ मन को शांत करता है और दिल को खुश।

नंदी हिल्स: बैंगलोर के सबसे पास बादलों की गोद में बैठने का मौका
नंदी हिल्स कर्नाटक के उन स्पॉट्स में से एक है जो सबसे ज्यादा मशहूर है। बैंगलोर से सिर्फ 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ये हिल स्टेशन बादलों में चलने का अहसास देता है। सूरज उगते वक्त नंदी हिल्स का नजारा किसी सपने जैसा लगता है। यहां की ठंडी हवा, पुराना किला, टीपू का ड्रॉप, योगानंदेश्वर मंदिर, सब कुछ मन मोह लेता है। यह जगह खासकर मॉर्निंग सनराइज़ के लिए फेमस है और ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए यह एक परफेक्ट शुरुआत है। बैंगलोर से टैक्सी, बाइक या बस तीनों से आराम से पहुंचा जा सकता है। एयरपोर्ट भी नजदीक ही है, इसलिए बाहर से आने वाले ट्रैवलर्स के लिए भी आसान।

स्कंदगिरि: बादलों के ऊपर से सूरज उगते देखने का शानदार मौका
स्कंदगिरि या कलावरा दुर्ग, नंदी हिल्स के पास ही एक और मशहूर नाइट-ट्रैकिंग स्पॉट है। इसकी खासियत रात में किया जाने वाला ट्रैक है। जैसे-जैसे आप ऊपर चढ़ते हैं, आसमान महसूस होने लगता है और चोटी पर पहुंचकर सुबह का पहला उजाला देखना ये एक लाइफटाइम याद बनने वाला अनुभव है। स्कंदगिरि की पहाड़ी का रास्ता थोड़ा एडवेंचर से भरा होता है, लेकिन यही ट्रैक को खास बनाता है। कैंपिंग और बादलों का नजारा यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है। बैंगलोर से लगभग 70 किलोमीटर दूर है। बस, कार या बाइक से 1.5–2 घंटे में पहुंचा जा सकता है। ट्रैक रात 2 बजे के बाद शुरू होता है।

कुमार पर्वत: पश्चिमी घाटों की सबसे खूबसूरत चढ़ाई
कुमार पर्वत को कर्नाटक का सबसे मुश्किल लेकिन सबसे खूबसूरत ट्रैक माना जाता है। पश्चिमी घाट का घना जंगल, ऊंची-नीची पगडंडियां, और चोटी पर फैला नीला आसमान, यह सब एक अलग ही जादू सा कर देते हैं। कुशलनगर और सोमवरपेट के बीच यह पर्वत ट्रेकर्स के सपनों की जगह है। कुमार धारा नदी के बहते झरने और घना जंगल आगे बढ़ने को और रोमांचक बनाते हैं। यह ट्रैक थोड़ा हार्ड है, लेकिन जो लोग असली ट्रैकिंग का मज़ा लेना चाहते हैं, उनके लिए यह परफेक्ट है। सुब्रमण्य कस्बा इसके सबसे पास है। मैंगलोर से ट्रेन या बस लेकर सुब्रमण्य पहुंचें, फिर ट्रैक की शुरुआत कुक्के मंदिर के पास से होती है।( सूरज उगते वक्त नंदी हिल्स का नजारा किसी सपने जैसा लगता है।)

अंतरगंगे: ज्वालामुखी पहाड़ियों के बीच रोमांच का अनोखा अनुभव
अंतरगंगे कर्नाटक का एक बेहद अलग और अनोखा ट्रैक स्पॉट है। यहां का ट्रैक पहाड़ियों से ज्यादा चट्टानों और गुफाओं के बीच से गुजरता है। इसलिए इसे कर्नाटक का छोटी गुफाओं वाला एडवेंचर ट्रैक भी कहते हैं। यह जगह अपने प्राकृतिक झरनों और मंदिरों के लिए भी मशहूर है। बैंगलोर के आसपास ट्रैकिंग सीखने और मज़े लेने वालों के लिए अंतरगंगे एकदम परफेक्ट शुरुआत माना जाता है। यहां का सबसे खास हिस्सा है गुफाओं में से रेंगकर आगे बढ़ने वाले छोटे-छोटे एडवेंचर मोमेंट। बैंगलोर से लगभग 70 किलोमीटर, कोलार जिले में स्थित। बसें आसानी से मिल जाती हैं या बाइक से भी आराम से पहुंचा जा सकता है।

कोडचाड्री: नेचर, जंगल और झरनों की धुन से भरी खूबसूरत ट्रेक जर्नी
कोडचाड्री ट्रैक कर्नाटक के शिमोगा जिले में स्थित है और इसे वाइल्ड एडवेंचर का असली घर कहा जाता है। यहां का सूरज ढलने का नजारा इतना खूबसूरत है कि लोग इसे दक्षिण भारत का सबसे खूबसूरत सनसेट स्पॉट कहते हैं। घने जंगल, पहाड़ी रास्ते, झरनों की आवाज़ और शांत माहौल—कोडचाड्री में सब कुछ है। यहां के रास्ते से गुजरते हुए हड्लुमाने फॉल्स का झरना देखने का मौका मिलता है, जो इस ट्रैक की जान माना जाता है। शिवमोग्गा से लगभग 75–80 किलोमीटर। कोल्लूर गांव तक बसें मिलती हैं। वहां से जीप राइड या ट्रैक शुरू किया जा सकता है।

इन पांच ट्रैक्स में क्या खास है जो इन्हें बाकी से अलग बनाता है
कर्नाटक में ट्रैकिंग का मतलब सिर्फ पहाड़ चढ़ना नहीं बल्कि अलग-अलग तरह के लैंडस्केप्स का अनुभव करना है कहीं बादलों की चादर, कहीं जंगलों की आवाज़, कहीं झरने, कहीं रोमांच भरने वाली गुफाएं, कहीं सूरज उगते या ढलते देखने का अद्भुत मौका। ये पांचों ट्रैक अपनी अलग पहचान रखते हैं। नंदी हिल्स आसान और फैमिली फ्रेंडली है, स्कंदगिरि नाइट ट्रैक का मज़ा देता है, कुमार पर्वत एडवांस ट्रैकर्स का सपना है, अंतरगंगे एडवेंचर और गुफाओं का यूनीक कॉम्बो है, जबकि कोडचाड्री नेचर लवर्स का स्वर्ग है।

कर्नाटक क्यों है ट्रैकिंग का सबसे बड़ा ठिकाना?
कर्नाटक की खासियत यह है कि यहां हर तरह का अनुभव मिल जाता है। चाहे आसान ट्रैक चाहिए, एडवांस चाहिए, फॉरेस्ट चाहिए या पहाड़ी, हर स्वाद का ट्रैक यहां मौजूद है। बैंगलोर जैसे बड़े शहर की नजदीकी बाहर से आने वालों के लिए इसे और सुविधाजनक बनाती है। मौसम ज्यादातर सुहावना रहता है और सुरक्षा के लिहाज से भी ट्रैकिंग रूट अच्छे हैं। यही कारण है कि नेचर, एडवेंचर और शांति तीनों को साथ में महसूस करने वाले लोग बार-बार कर्नाटक की इन पहाड़ियों का रुख करते हैं।

फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल की तरफ से पांच यात्रा सुझाव
- अच्छे जूते पहनें: फिसलन वाले और ऊंचे-नीचे रास्तों के लिए जरूरी है।
- लाइट बैग रखें: सिर्फ जरूरी सामान ही साथ रखें, ताकि चढ़ाई आसान हो।
- पानी और एनर्जी बार: पूरे ट्रैक में आपकी ताकत बनाए रखते हैं।
- मौसम देखकर जाएं: बारिश में कई ट्रैक स्लिपरी हो जाते हैं।
- लोकल गाइड लें: खासकर स्कंदगिरि, अंतरगंगे और कोडचाड्री जैसे ट्रैक्स में।


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