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दिल्ली में 370 वर्षों बाद फिर खुला शीश महल, मुगल विरासत को मिली नई पहचान

दिल्ली के उत्तरी हिस्से में स्थित शालीमार बाग का ऐतिहासिक शीश महल, जो सदियों से समय की धूल में छिपा हुआ था, अब एक भव्य रूप में जनता के सामने है। करीब 370 वर्षों के बाद इस मुगलकालीन इमारत को पूरी तरह पुनर्स्थापित कर आम लोगों के लिए खोल दिया गया है

भारत और इसके पड़ोसी इलाकों के इतिहास में ‘शीश महल’ हमेशा से ही शाही ठाट-बाट और बेमिसाल कारीगरी के प्रतीक रहे हैं। इन महलों को पुराने समय में राजा-महाराजाओं और नवाबों की नवाबी जिंदगी को दिखाने के लिए बनवाया जाता था। दीवारों और छतों पर जड़े हुए छोटे-छोटे शीशे इनकी खासियत होते थे, जो रौशनी पड़ने पर चमकते, तो ऐसा लगता मानो आसमान के तारे जमीन पर उतर आ गए हों। यहां शाही कार्यक्रम और संगीत समारोह भी आयोजित की जाते थे।

शीश महल

यह महल सन् 1653 में बनवाया गया था। यह महल न केवल स्थापत्य की दृष्टि से बेमिसाल है, बल्कि यह इतिहास के कई अहम लम्हों का गवाह भी रहा है। यहीं पर 1658 में औरंगज़ेब का राज्याभिषेक हुआ था। इस महल और उसके आस-पास के बगीचे का निर्माण 1653 में सम्राट शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान हुआ जो अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के तहत संरक्षित स्मारक हैं। लंबे समय से यह जर्जर अवस्था में थे। इसके बाद तो ऐसा लगता है कि दिल्ली का यह शीश महल मानो चीख चीख कर कह रहा हो-
“हमने वक़्त देखा है, अब तुम हमें देखो।”

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली की ऐतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित करने के प्रयासों की प्रशंसा की।

आप बस, मेट्रो या कब किसी भी वाहन से बेहद आसानी से पहुच सकते हैं दिल्ली के शीश महल।
मेट्रो– शालीमार बाग (Pink Line) और जहाँगीरपुरी (Yellow Line) मेट्रो स्टेशन से लगभग 5–10 मिनट की दूरी पर ऑटो, कैब या ई‑रिक्शा से शीश महल पहुँचा जा सकता है।
DTC buses – 19A, 212, 425, 721, 817N
कैब के जरिए भी आप आसानी से शीश महल पहुच सकते हैं।

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