दिसंबर का महीना वैसे ही दुनिया का सबसे खूबसूरत महीना माना जाता है। सर्दी की हल्की-हल्की ठंड, शहरों में जगमगाती रोशनियां, क्रिसमस की तैयारी, साल का आखिरी पड़ाव और बीच में एक ऐसा त्यौहार जो रोशनी का असली मतलब समझाता है Hanukkah। जिसे यहूदी भाषा में ‘चानूका’ भी कहा जाता है। हर साल की तरह इस बार भी Hanukkah 4 दिसंबर से शुरू होकर 12 दिसंबर की रात को खत्म होगा। ये पूरे आठ दिनों तक चलने वाला ऐसा उत्सव है जो सिर्फ मोमबत्तियां जलाने भर का समारोह नहीं है, बल्कि हजारों साल पुरानी बहादुरी, संघर्ष, धर्म-स्वतंत्रता और चमत्कार की कहानी को याद करता है।

यह त्यौहार आपको सिखाता है कि कितनी भी मुश्किलें क्यों न हों, जीत रोशनी की ही होती है। अगर जिंदगी में उम्मीद बची है, भरोसा जिंदा है, तो कोई भी अंधेरा हमेशा नहीं रहता। शायद इसी वजह से आज ना सिर्फ यहूदी समुदाय बल्कि दुनिया भर के यात्री और संस्कृति प्रेमी भी Hanukkah को देखने और उसमें शामिल होने के लिए यात्रा करते हैं।(बल्कि हजारों साल पुरानी बहादुरी, संघर्ष, धर्म-स्वतंत्रता और चमत्कार की कहानी को याद करता है। )
कब से शुरू हुआ हनुक्काह?

इस त्यौहार की शुरुआत कब और कैसे हुई, इसे जानना बेहद जरूरी है क्योंकि बिना इतिहास के कोई भी सांस्कृतिक अनुभव अधूरा है। करीब 2000 साल पहले का समय था, जब इज़राइल पर ग्रीक-सीरियन साम्राज्य का कब्ज़ा था। यहूदी लोगों के धार्मिक अधिकार छीन लिए गए थे। उनकी परंपराओं पर रोक लगा दी गई थी और Jerusalem का पवित्र मंदिर भी अपमानित कर दिया गया था। लेकिन तभी एक छोटा-सा समूह जिसे Maccabees कहा जाता है आगे आया और उन्होंने अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उनकी संख्या बहुत कम थी, साधन कम थे, लेकिन हिम्मत और विश्वास बड़ा था।

इससे जुड़ी कहानी
लंबी जंग के बाद आखिरकार यहूदी लोगों ने अपनी धरती वापस हासिल की और मंदिर को फिर से शुद्ध करके धार्मिक जीवन शुरू किया। जब तेज़ी से साफ-सफाई करके पूजा करने का समय आया, तो वहां सिर्फ थोड़ा-सा पवित्र तेल बचा था, जो केवल एक दिन के लिए काफ़ी था। लेकिन चमत्कार हुआ वो तेल लगातार आठ दिनों तक जलता रहा। इसी चमत्कार की याद में हर साल Hanukkah मनाया जाता है। हर दिन एक नई मोमबत्ती जलाई जाती है ताकि आठवीं रात तक पूरा दीपक जगमगा उठे। यही तेल का चमत्कार इस त्यौहार की आत्मा है छोटा सा भरोसा भी बड़े से बड़े अंधेरे को मात दे सकता है।

कैसे मनाया जाता है?
Hanukkah के समारोह में एक खास स्थान होता है Menorah का जिसे Hanukkiah भी कहा जाता है। यह एक दीपक नुमा स्टैंड होता है जिसमें कुल नौ शाखाएं होती हैं। आठ मोमबत्तियों के लिए और एक Shamash के लिए, जो अन्य मोमबत्तियों को जलाने के काम आता है। हर शाम परिवार और समुदाय इकट्ठा होते हैं, प्रार्थना करते हैं, गीत गाते हैं और menorah की मोमबत्तियां जलाते हैं। यह दृश्य देखने में इतना शांत, पवित्र और भावुक होता है कि दिल छू जाता है। लोग यह मानते हैं कि हर मोमबत्ती सिर्फ रोशनी नहीं बल्कि उम्मीद, आज़ादी, यादों और संस्कृति की लौ है। त्यौहार में तेल में बनी चीज़ों को खाना खास परंपरा है, क्योंकि यह चमत्कार तेल से जुड़ा हुआ है। Latkes आलू के पैनकेक, Sufganiyot जेली भरे गोल-गप्पे जैसे मीठे, अलग-अलग फ्राइड स्नैक्स, घर-घरेलू पकवान पूरे त्यौहार में प्रमुख होते हैं।

साथ ही बच्चे और परिवार gelt यानी चॉकलेट के सिक्के या असली पैसे भी उपहार में पाते हैं। Dreidel नामक एक घूमने वाला टॉप-खेल भी खेला जाता है, जिसमें हर अक्षर का अलग अर्थ है और जो युद्ध के दिनों में एक प्रतीक माना जाता है।
कहां कहां मनाया जाता है?

अगर बात करें कि यह त्यौहार कहां सबसे ज़्यादा धूम-धाम से मनाया जाता है, तो पहला नाम आता है Jerusalem का वह पवित्र शहर जहां इस चमत्कार की शुरुआत हुई थी। Hanukkah के दौरान Jerusalem की गलियां, बाज़ार, मंदिर, पहाड़ियों का दृश्य और रात में हजारों menorah की रौशनियां यह सब मिलकर एक स्वप्न जैसा अनुभव देते हैं। Western Wall पर होने वाली सार्वजनिक menorah lighting दुनिया भर से आने वाले यात्रियों को आकर्षित करती है। वहां की प्रार्थना-धुन और माहौल ऐसा होता है कि आपके भीतर एक अद्भुत शांति उतर आती है। इसके अलावा Tel Aviv में Hanukkah एक मॉडर्न और बेहद खास अंदाज़ में मनाया जाता है। भारत में भी मुंबई, पुणे और कोलकाता में सीमित स्तर पर यह समारोह देखा जा सकता है, जहां यहूदी समुदाय Baghdadi और Bene Israel परिवारों के साथ इसका आयोजन करता है।

मनाने का तरीका, व्यंजन और परंपरा
Hanukkah के दौरान हर कोई कुछ न कुछ अनुभव कर सकता है प्रत्येक के लिए यह त्यौहार बिल्कुल परफेक्ट है क्योंकि इसमें हर भावना शामिल है इतिहास, सांस्कृतिक पहचान, स्वादिष्ट खाना, लोक संगीत, कला, आध्यात्म और रोमांच। वहीं Tel Aviv में समुद्र किनारे चलना, त्यौहार की रौशनी में कैफ़े बाज़ार घूमना, तेल में बनी मिठाइयां चखना और street celebrations देखना बिलकुल फिल्मी एहसास देता है। सबसे मजेदार बात यह है कि Hanukkah ऐसा त्यौहार है जिसमें बाहरी लोगों और यात्रियों का स्वागत किया जाता है और उन्हें समारोह का हिस्सा बनने में कोई हिचक नहीं होती। लोग आपको अपने घर, अपनी मेज और अपनी संस्कृति में शामिल करते हैं।

हनुक्काह क्यों इतना अहम है?
इस त्यौहार का सबसे गहरा अर्थ क्यों में छुपा है। आखिर Hanukkah क्यों इतना अहम है? यह त्यौहार सिर्फ इतिहास नहीं बताता, यह आज की दुनिया के लिए भी एक संदेश है कि बुराई कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अच्छे लोग अगर हिम्मत नहीं हारते तो जीत उनकी होती है। एक छोटा-सा दीपक भी आठ दिनों तक जल सकता है मतलब छोटी सी उम्मीद भी बड़ा चमत्कार कर सकती है। इसी वजह से Hanukkah को Festival of Lights या रोशनी का पर्व कहा जाता है। आज दुनिया भर में जब भी लोग मुश्किल परिस्थितियों में जीते हैं, संघर्ष करते हैं, या पहचान बचाने की लड़ाई लड़ते हैं Hanukkah उन्हें प्रेरित करता है कि वे हार न मानें।

क्या हर कोई इसे मना सकता है?
अब सवाल यह है कि Hanukkah कौन मनाता है? या कौन मना सकता है? तो वैसे तो मूल रूप से यह त्यौहार यहूदी समुदाय द्वारा मनाया जाता है, लेकिन इसके समारोहों में हिस्सा लेना हर संस्कृति के लोगों के लिए खुला है। दुनिया भर में लाखों लोग Hanukkah के दौरान ट्रैवल करते हैं कोई धार्मिक भावना से, कोई इतिहास देखने के लिए, कोई तस्वीरों और रोशनी के प्यार में और कोई बस जिंदगी का अलग स्वाद चखने के लिए। अगर आप चलने-फिरने, खोज-खबर रखने और दुनिया की विविधता समझने वाले इंसान हैं तो Hanukkah आपके लिए एक बेहतरीन अनुभव बन सकता है, चाहे आप फैमिली के साथ हों, दोस्तों के साथ हों या अकेले हों।

त्यौहार आपके लिए यात्रा बन सकता है
अंधेरे से उजाले का सफर, डर से हिम्मत का सफर, हार से जीत का सफर। अगर दिसंबर में दुनिया घूमने का इरादा है, और दिल चाहता है कि कुछ ऐसा देखा जाए जो जिंदगी का नजरिया बदल दे, तो 4-12 दिसंबर Hanukkah की यात्रा पर निकल पड़िए। यह यात्रा सिर्फ शहरों की नहीं होगी, बल्कि दिल की यात्रा भी होगी जिसमें आप सीखेंगे कि इंसान की सबसे बड़ी ताक़त उसका भरोसा है और रोशनी कभी हारती नहीं।










