सह्याद्री की पहाड़ियों की खूबसूरती के बारे में तो आपने बहुत कुछ सुन रखा होगा। लेकिन आज हम आपको ले जाने वाले हैं सह्याद्री की पहाड़ियों के सबसे खतरनाक ट्रेक के सफर पर। भारत में कई ट्रैकिंग डेस्टिनेशंस हैं, जो पर्यटकों का ध्यान अपनी और आकर्षित करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा ट्रैकिंग डेस्टिनेशन भी है जिसकी चढ़ाई करने से पहले एक एक सामान्य पर्यटक को सौ बार सोचना पड़ता है? भारत के इस खतरनाक ट्रेक का नाम है-
“भैरवगढ़ ट्रेक” (Bhairavgarh Treck)
महाराष्ट्र के जंगलों में बहुत से ऐसे ट्रेक हैं जो पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं, उन्हीं में से एक ट्रेक भैरवगढ़ भी है। लेकिन भैरवगढ़ ट्रेक पर चढ़ाई इतनी भी आसान नहीं! क्योंकि यहां सीधे 90 डिग्री ढलान पर आपको ट्रैकिंग करनी होती है। कई जगह तो आपको रैपलिंग करने की भी जरूरत पड़ेगी। यह सुनने में जितना एडवेंचरस है उतना ही ज्यादा खतरनाक ट्रेक भी है। क्योंकि इस ट्रेक पर आपको एक तरफ गहरी हजारों फीट की खाई और दूसरी तरफ ऊंचे पहाड़ देखने को मिलेंगे। इस ट्रेक पर चढ़ाई के लिए सीढियाँ बनाई गई है लेकिन कुछ जगहों पर तो यह सीढियाँ एक फीट से भी कम चौड़ाई वाली हैं। ऐसे में इतनी पतली सीढियों और एक ओर दिखने वाली सैकडों फीट गहरी खाई को देखकर किसी भी इंसान का दिल एक बार को थम जाता है। आज हम आपको इसी ट्रेक के बारे में बताएंगे।

कैसे पहुंचे भैरवगढ़ (How to reach Bhairavgarh)
अगर आप ट्रैकिंग को पसंद करते हैं और इस तरह के एडवेंचरस ट्रेक पर जाना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले मोरोशी गांव पहुंचना होगा। भैरवगढ़ मुंबई से लगभग 100 किलोमीटर और पुणे से लगभग 140 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भैरवगढ़ की चढ़ाई शुरू करने के लिए आपको मोरोशी गांव तक पहुंचना होगा जो की मालशेज घाट रीजन में एक छोटा सा गांव है। मोरोशी गांव से भैरवगढ़ तक का ट्रेक लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा ट्रेक है।
कैसे करें ट्रेकिंग (How to do trekking)
भैरवगढ़ ट्रेक के दो भाग हैं। पहले पथरीले रास्तों से ट्रैकिंग करते हुए और घने जंगलों से गुजरते हुए आपको भैरवगढ़ ट्रेक के एक्चुअल बेस तक पहुंचना होगा। जहां से सीधे 90 डिग्री की ढलान की चढ़ाई शुरू होगी। मरोशी से भैरवगढ़ तक आपको लगभग 3.5 किलोमीटर की ट्रैकिंग करनी होगी। यह ट्रैकिंग इतनी आसान नहीं होगी क्योंकि कई जगह आपको घने जंगलों से होकर गुजरना होगा। इस ट्रेक के रास्ते में कई जगह ऐसे भी हैं जहां झाड़ियां दिखाई पड़ती हैं, लेकिन झाड़ियों के तुरंत बाद सैकड़ों फीट गहरी खाई होती है। इसीलिए आपको इस ट्रेक पर संभाल कर चलना होगा।

भैरवगढ़ फोर्ट से मिलने वाला व्यू बहुत ही खूबसूरत होता है। जब आप घंटों की ट्रैकिंग के बाद भैरवगढ़ के पीक पर पहुंचेंगे तो आप अपनी सारी थकान को भूलकर उसे मूमेंट को एंजॉय करने में लग जाएंगे।
भैरवगढ़ फोर्ट के पिक से आपके आसपास के पहाड़ियों का बहुत ही क्लियर व्यू देखने को मिलेगा। अगर आप साफ वेदर वाले दिन चढ़ाई कर रहे हैं तो आप अपने आसपास गोकन कड़ा, तारामती पिक और अजोबा फोर्ट का क्लियर व्यू देख पाएंगे। भैरवगढ़ पिक का उपयोग ओल्ड मालशेज घाट के ट्रेड रूट पर नजर रखने के लिए किया जाता था। यहां से मालशेज घाट के ट्रेड रूट पर आने जाने वाले व्यापारियों और सामानों की देखरेख की जाती थी।

इस ट्रैकिंग के दौरान इन बातों का रखें ख्याल :
- बिना रस्सी और हार्नेस के यहां ट्रैकिंग करना बहुत ही खतरनाक है। इसीलिए आप अपने साथ रस्सी और हार्नेस जरूर रखें।
- अपने साथ एक गाइड को जरूर रखे, जो पूरी ट्रैक के दौरान आपका मार्गदर्शन करेगा। आप मोरोसी गांव के किसी भी लोकल को गाइड के रूप में अपने साथ ले जा सकते हैं।
- अगर आप ट्रैकिंग करने के लिए जा रहे हैं तो किसी भी प्रकार के कचरे को पहाड़ियों में न फेंके। कोशिश करें कि आप उसे अपने बैग में ही कलेक्ट करके वापस से अपने साथ ले जाएं।
- बरसात के दिनों में इस ट्रेक पर जाने से बचे। क्योंकि यहां की सीढ़ियां बहुत ही पतली हैं और ऐसे में पैर फिसलने का बहुत ज्यादा डर होता है।
- इस ट्रेक पर जितना मुश्किल चढ़ना है, उससे ज्यादा मुश्किल उतरना है। इसलिए उतरते समय जल्दबाजी न दिखाएं। संभल संभल कर पैर रखते हुए नीचे उतरे।
- अगर आप रेगुलर ट्रेकर हैं और ट्रैकिंग और हाइकिंग करते रहते हैं तो आपको पता होगा कि हाइकिंग पोल की क्या अहमियत होती है। इसलिए अपने साथ हाइकिंग पोल ले जाना ना भूले।
- अगर आप ट्रैकिंग के लिए जा रहे हैं तो आप कोशिश करें कि ऐसे कपड़े और जूते पहनें जिन्हें पहनकर मूवमेंट करने में आप कंफर्टेबल महसूस करें।

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