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क्यों आत्महत्या के लिए उकसाता है इस बावड़ी का कुआं…

Agarsen Ki Baoli

Agarsen Ki Baoli

जी हां, हम आपको बता रहे हैं अग्रसेन की उस बावड़ी के बारे में जिसका अलग हीं इतिहास रहा है। बावड़ी को भारतीय इतिहास के समृद्धि का एक नमूना और वाटर कंजर्वेशन के प्रति हमारे पूर्वजों की सोच को दर्शाता का प्रतीक माना जाता है। ऐसा हीं एक बावड़ी दिल्ली के दिल यानि कनॉट प्लेस के बीच में स्थित है जिसे अग्रसेन की बावड़ी के नाम से जाना जाता है। लेकिन यह बावड़ी देश की बाकी बावड़ियों से काफी अलग है और दिल्ली के सबसे हॉन्टेड प्लेस में से एक माना जाता है। क्या आपने कभी सोचा है ऐसा क्यों है? आइए हम बताते हैं आपको इस हांटेड बावड़ी के बारे में।Agarsen Ki Baoli

बेहतरीन स्थापत्य कला :

कहा यह जाता है कि इस बावड़ी का निर्माण महाराजा अग्रसेन ने महाभारत के समय पर चौदहवीं शताब्दी में करवाया था। इस बावड़ी की संरचना कुछ ऐसी है कि इसमें जो कुआं वाटर कंजर्वेशन के लिए बनाया गया है, वहां तक पहुंचने के लिए 108 सीढ़ियां हैं। यह बावड़ी तीन मंजिली इमारत है और इसकी सबसे निचले मंजिल में वह कुआं है। यह बावड़ी 7 मीटर लंबी और 15 मीटर चौड़ी है। इस बावड़ी के निर्माण में बलुआही पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। अगर यहां के स्थापत्य कला और संरचना की बात की जाए तो यह मुगलकालीन संरचनाओं से काफी मिलती-जुलती है। बावड़ी को देखकर आपको ऐसा लगेगा कि दो दिवारे हैं और दोनों के बीच से नीचे की ओर सीढ़ियां जा रहीं हैं जो जाकर एक तीन मंजिली इमारत के तल में खत्म होती हैं।

क्या है यहां का अनसुलझा राज?

कहानियों की माने तो इस स्थान के हांटेड होने का कारण वह कुआं है। बताया जाता है कि इस कुएं के काले पानी में कुछ ऐसे तत्व थे जो यहां आने वाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते थे। जिसके कारण से लोग इस कुएं में कूदकर अपनी जान भी दे दिया करते थे। कोई कहता था कि इस पानी में एक अप्सरा है जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। तो कोई कहता था कि यह पानी हीं शापित है जो लोगों को आत्महत्या करने के लिए उकसाता है। हालांकि अभी यहां के इस पानी को सुखा दिया गया है। लेकिन फिर भी यह बाओली रात को लोगों के लिए नहीं खुली होती है। यहां तक कि दिन के उजाले में यहां आने वाले पर्यटकों को भी दूर से ही बाओली को देखना होता है। क्योंकि बावड़ी वाली कमरे की गेट को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है।

कई फिल्मों की शूटिंग हुई है यहां :

भारतीय स्थापत्य कला का एक बेहतरीन नमूना पेश करता हुआ यह बावड़ी लोगों के बीच काफी चर्चा का विषय रहा है। पहले तो यह बावड़ी यहां के आसपास के लोगों में हीं चर्चा का विषय था लेकिन पीके मूवी के रिलीज के बाद से इसकी लोकप्रियता बढ़ी है और उसके साथ हीं यहां आने वाले लोगों की संख्या भी काफी बढ़ी है। पी के अलावा यहां सुल्तान मूवी,  झूम बराबर झूम मूवी और श्रीदेवी की मॉम मूवी की शूटिंग भी हुई है। लेकिन हो सकता है कि यहां गार्ड आपको कैमरा ले जाने से रोके। इस स्थान के संरक्षण का दायित्व फिलहाल आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया उठा रही है। अगर आप किसी विशेष कार्य के लिए यहां शूटिंग करना चाहते हैं या फिर यहां की वीडियो बनाना चाहते हैं तो आपको उसके लिए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारियों से परमिशन लेनी होगी।Agarsen Ki Baoli

Best time to visit

पीके मूवी के रिलीज के बाद से यूं तो यहां पर्यटकों की तादाद काफी बढ़ी है, लेकिन अगर आप यहां अकेले घूमना चाहते हैं तो आप सुबह के समय यहां आ सकते हैं। सुबह के समय यहां ना के बराबर लोग होते हैं। यह बावड़ी सुबह के 8:00 बजे से शाम के 5:00 बजे तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है। उसके बाद यहां के गेट को बंद कर दिया जाता है और यहां रात में रुकने की इजाजत किसी को भी नहीं होती है

By Five Colors Of Travel

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