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ढाई सौ साल से हर नाम में “राम” यह है बांकुड़ा का चमत्कारी गांव!

बांकुड़ा

इस गांव के स्थानीय लोग बताते हैं कि लगभग 250 साल पहले यहां  के मुखोपाध्याय परिवार के एक पूर्वज को एक स्वप्न में श्रीराम दिखाई दिए। उस स्वप्न के बाद उन्होंने गांव में एक राम का मंदिर बनवाया, और रामपाड़ा गांव की शुरुआत हुई। इसी मंदिर और उस परिवार की श्रद्धा के कारण इस परंपरा की शुरुआत हुई। उस मंदिर में एक शालीग्राम शिला को श्रीराम समझकर पूजा जाता है, और धीरे-धीरे गांव वालों ने यह निर्णय लिया कि हर पुरुष का नाम राम के साथ होगा, और जन्म लेने वाले नवजातों का नामकरण भी राम से शुरू होगा। तब से लेकर आज तक यह परंपरा लगातार चली आ रही है और गांव के हर व्यक्ति के नाम में राम शब्द जुड़ा पाया जाता है।(इस गांव की कहानी और इसकी परंपरा बहुत ही रोचक और प्रेरणादायक है।)

बांकुड़ा

रामपाड़ा में एक अनोखी बात यह है कि इस गांव के सभी पुरुषों के नामों में राम शामिल है, जैसे रामकनाई, रामकांत, रामदुलाल, रामकृष्ण आदि। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले लगभग 250-300 सालों से इस परंपरा में अब तक किसी भी नाम की पुनरावृत्ति नहीं हुई है। यानी, एक जैसा नाम दो बार नहीं दिया जाता। यदि किसी नवजात का नामकरण करना होता है, तो वंश और परिवार के गुरु/वरिष्ट लोग मिलकर नया नाम चुनते हैं, जिसमें राम नाम जरूर जुड़ा होता है और वह पिछले किसी नाम से मेल न खाता हो। इस परंपरा को गांव के लोग अपनी पहचान मानते हैं और इसे गर्व से निभाते हैं

बांकुड़ा

आज के समय में जब दुनिया बदल रही है, नामों के साथ विकल्प बहुत हैं, लोग नई-नई पहचान बनाते हैं, तब भी रामपाड़ा की इस परंपरा में बदलाव नहीं आया है। यहां के युवा भी अपने नाम को बदलने या राम नाम हटाने के बारे में सोचते नहीं हैं। यह गांव अपनी इस पहचान को संरक्षित कर रहा है। हालांकि गांव अब धीरे-धीरे आधुनिक हो रहा है, लेकिन इस परंपरा की नींव आज भी मजबूत है। यदि आप पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में जाएं, रामपाड़ा का यह अनोखा अनुभव देखना चाहिए। गांव जहां हर नाम राम है, हर दिल में राम की आस्था।

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By Five Colors Of Travel

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