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‘जटायु शिला’ जहां भगवान राम के भक्त जटायु ने दी थी वीरगाथा की मिसाल”

जटायु शिला पर एक नजर

कहा जाता है कि जब रावण माता सीता का अपहरण कर लंका की ओर जा रहा था, तब भगवान राम के परम भक्त जटायु पक्षी ने उनका मार्ग रोका और सीता माता को बचाने के लिए वीरता पूर्वक युद्ध किया। रावण से हुई इस भीषण लड़ाई में घायल जटायु यहीं इस शिला पर गिरे थे, इसलिए इस स्थान का नाम ‘जटायु शिला’ पड़ा। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह वही पवित्र स्थल है, जहां भगवान राम ने घायल जटायु को मोक्ष का आशीर्वाद दिया था। यह जगह घने जंगलों और शांत प्राकृतिक वातावरण के बीच बसी हुई है। आसपास के क्षेत्र में हरियाली, पहाड़ी झरने और घुमावदार रास्ते पर्यटकों को एक अलग ही अनुभव कराते हैं। यहां आने वाले यात्रियों को ऐसा लगता है मानो वे किसी पौराणिक कथा के दृश्य में खुद को पा रहे हों। धार्मिक और आध्यात्मिक भावना से ओत-प्रोत यह स्थल धीरे-धीरे पर्यटकों की सूची में अपनी जगह बना रहा है

कैसे पहुंचे जटायु शिला?

जटायु शिला तक पहुंचने के लिए पर्यटक जगदलपुर या फरसगांव से सड़क मार्ग का सहारा ले सकते हैं। दोनों ही दिशाओं से यह स्थान लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर है। जगदलपुर से बस, टैक्सी या निजी वाहन से आराम से यहां पहुंचा जा सकता है। रास्ते में पड़ने वाले छोटे-छोटे गांव और घने जंगल यात्रा को और रोमांचक बना देते हैं।

क्या खास है यहां?

जटायु शिला के आसपास का क्षेत्र आज भी अत्यंत शांत और स्वच्छ है। सुबह-सुबह यहां की हवा में घुली ठंडक और पक्षियों की चहचहाहट मन को शांति देती है। इस स्थल पर स्थानीय प्रशासन ने अब धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कुछ सुविधाएं भी विकसित की हैं। आसपास के ग्रामीण श्रद्धालु इस स्थान को बेहद पवित्र मानते हैं और रामनवमी या अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन करते हैं। जटायु शिला न केवल एक पर्यटन स्थल है, बल्कि यह श्रद्धा, साहस और त्याग की कहानी को अपने भीतर समेटे हुए है। यहां आकर व्यक्ति को न केवल ऐतिहासिक महत्व का अनुभव होता है बल्कि मन को आध्यात्मिक शांति भी मिलती है। अगर आप बस्तर की यात्रा पर हैं, तो फरसगांव-जगदलपुर रोड की इस रहस्यमयी शिला को देखे बिना आपकी यात्रा अधूरी मानी जाएगी। यह स्थल वास्तव में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर का गौरव है।

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