अगर आप कभी आंध्र प्रदेश जाएं, तो वहां की कलमकारी कला को देखे बिना आपकी यात्रा अधूरी मानी जाएगी। यह सिर्फ एक हस्तशिल्प नहीं, बल्कि सुई और रंगों से बुनी हुई कहानी है। कलमकारी शब्द का मतलब ही होता है कलम से की गई कारीगरी। इसमें कलाकार सूती या रेशमी कपड़े पर बारीक बारीक डिज़ाइन हाथ से बनाते हैं, वो भी नेचुरल रंगों से।

कृष्णा और गोदावरी नदी के किनारे बसे श्रीकलाहस्ती और मछलीपट्टनम इस कला के दो प्रमुख केंद्र हैं। श्रीकलाहस्ती शैली में ब्रश और कलम से धार्मिक कथाएं, जैसे रामायण और महाभारत के दृश्य उकेरे जाते हैं, जबकि मछलीपट्टनम शैली में ब्लॉक प्रिंटिंग के ज़रिए फूलों और ज्यामितीय आकृतियों की सुंदरता झलकती है। कलाकार आज भी पुराने पारंपरिक तरीकों से रंग बनाते हैं इमली के बीज, गुड़, गोंद और फूलों से निकले रंगों का इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि कलमकारी का हर कपड़ा न सिर्फ खूबसूरत होता है बल्कि पर्यावरण के साथ सामंजस्य बैठाता हुआ नजर आता है।( कलमकारी शब्द का मतलब ही होता है कलम से की गई कारीगरी।)

इन दिनों देश-विदेश में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। अगर आप एथनिक फैशन या हस्तशिल्प के शौकीन हैं, और आप आंध्र प्रदेश जा रहे हैं, तो वहां के स्थानीय बाजारों में ज़रूर जाएं और कलाकारों से मिलकर इस जीवंत कला को करीब से महसूस करें क्योंकि कलमकारी सिर्फ कला नहीं, एक विरासत है। फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल का की तरफ से यह सुझाव है की जब भी आप आंध्र प्रदेश जाएं तो इस अद्भुत और प्रकृति की मायने बताने वाली कला कलमकारी को अपनी यात्रा सूची में ज़रूर शामिल करें। क्योंकि कलमकारी के हर कपड़े में छिपी होती है एक जिंदा कहानी, जो दिल से कही जाती है!
