अब भारत में यात्रा सिर्फ़ तेज़ ही नहीं, बल्कि पूरी तरह डिजिटल और झंझट-मुक्त होने की ओर बढ़ रही है। अब तक टोल टैक्स तक सीमित रहा फास्टैग, जल्द ही पार्किंग, पेट्रोल पंप, इंश्योरेंस भुगतान और इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन जैसे कई ट्रेवल-संबंधित खर्चों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
केंद्र सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) मिलकर फास्टैग को एक मल्टी-पर्पस डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसका मकसद यात्रियों को “स्टार्ट से डेस्टिनेशन तक” बिना कैश और बिना रुकावट यात्रा का अनुभव देना है।

फिनटेक कंपनियों के साथ मंथन
इस दिशा में संभावनाएं तलाशने के लिए भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (IHMCL) ने नई दिल्ली में फिनटेक कंपनियों के साथ एक विशेष कार्यशाला आयोजित की। इसमें टोल के अलावा फास्टैग के अन्य उपयोगों पर सुझाव लिए गए, ताकि यात्रियों को एक इंटीग्रेटेड ट्रेवल इकोसिस्टम मिल सके। NHAI अधिकारियों के मुताबिक, फास्टैग सिर्फ़ टोल वसूली का साधन नहीं रहेगा, बल्कि यह देशभर में डिजिटल ट्रेवल एक्सपीरियंस का आधार बनेगा।

फास्टैग की मौजूदा स्थिति
- देश के 1,728 टोल प्लाज़ा पर फास्टैग लागू
- 98.5% टोल भुगतान डिजिटल माध्यम से
- 11.04 करोड़ फास्टैग अब तक जारी
- 38 बैंक फास्टैग सेवा दे रहे हैं
ट्रेवल कितना आसान हो जाएगा?
सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर के अनुसार, इस पहल से यात्रा: पूरी तरह कैशलेस होगी, समय की बचत होगी (टोल, पार्किंग, चार्जिंग पर रुकने की ज़रूरत कम), लंबी रोड ट्रिप और इंटर-सिटी ट्रेवल ज्यादा सुविधाजनक होगा, धोखाधड़ी और मानवीय त्रुटियां कम होंगी, इलेक्ट्रिक व्हीकल यूज़र्स को चार्जिंग में बड़ी राहत मिलेगी.
ट्रेवल इंडस्ट्री को क्या फायदा?
यह कदम रोड ट्रिप्स, टूरिज़्म, टैक्सी सर्विस, लॉजिस्टिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल ट्रेवल को नई गति देगा। ट्रैवलर्स के लिए यह “एक टैग – कई भुगतान” वाला अनुभव होगा, जिससे भारत में स्मार्ट और सस्टेनेबल ट्रेवल को बढ़ावा मिलेगा।