बड़ा इमामबाड़ा लखनऊ: लखनऊ की तहज़ीब, अदब और नवाबी अंदाज़ की असली झलक अगर कहीं सबसे गहराई से महसूस होती है, तो वह है बड़ा इमामबाड़ा। यह इमारत लखनऊ की पहचान है, एक ऐसी जगह जहां इतिहास सांस लेता है, वास्तुकला चकित करती है और रहस्य रोमांच पैदा करता है। गोमती नदी के किनारे फैली इस शानदार धरोहर को हर साल लाखों पर्यटक देखने आते हैं और पहले ही कदम पर यह दिल में बस जाती है।

क्या है बड़ा इमामबाड़ा?
बड़ा इमामबाड़ा एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक परिसर है जिसे असफी इमामबाड़ा भी कहा जाता है। यह एक विशाल सभागार Hal है, जिसका उपयोग पहले धार्मिक समारोहों और मजलिसों के लिए किया जाता था। इसकी सबसे अद्भुत बात यह है कि इसका मुख्य हाल बिना किसी लोहे, बीम और खंभे के खड़ा है—20,000 वर्ग फीट का बिना सपोर्ट वाला इतना बड़ा हॉल दुनिया में बहुत कम देखने को मिलता है। इसके भीतर बनी भूलभुलैया Labyrinth इसकी असली पहचान है जहां एक बार अंदर जाने पर रास्ता ढूंढना आसान नहीं होता।
क्यों बनाया गया था यह अद्भुत भवन?
18वीं सदी में अवध में आए भीषण अकाल से लोग बहुत दुखी और बेरोजगार थे। तब नवाब आसफ़-उद-दौला ने 1784 में इसकी नींव रखवाई ताकि लोगों को रोजगार मिले और संकट का समय गुजर सके। जिसको न दे मौला, उसको दे आसफ़-उद-दौला यह मशहूर कहावत इसी निर्माण से जुड़ी है। दिन में मजदूर यह इमारत बनाते और रात में अमीर लोग इसे गिरा देते, ताकि अगले दिन दोबारा काम मिले और रोज़गार चलता रहे। यह भवन उसी शाही दानशीलता और सामाजिक भावना का प्रतीक है।(बड़ा इमामबाड़ा एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक परिसर है जिसे असफी इमामबाड़ा भी कहा जाता है।)

यह इतना खास और रहस्यमयी क्यों है?
बड़ा इमामबाड़ा की भूलभुलैया में करीब 489 दरवाज़े और अनगिनत रास्ते हैं, जहां हर गलियारा दूसरे का रास्ता काटता है। बिना गाइड के यहां घूमना मना है, क्योंकि रास्ते इतने उलझे हैं कि आसानी से कोई भी भटक सकता है। यहां एक जगह खड़े होकर धीमे से बोलने पर आवाज़ दूर तक सुनाई देती है यह अद्भुत ध्वनिकी Acoustic विज्ञान का शानदार उदाहरण है। इस परिसर में बावली स्टेपवेल भी है, जो पहले सुरक्षा और पानी दोनों का स्रोत हुआ करती थी। इसके ऊपरी हिस्से से लखनऊ का खूबसूरत नज़ारा दिखाई देता है।
कैसे और कब जाएं?
बड़ा इमामबाड़ा पूरे साल खुला रहता है लेकिन सर्दी और बसंत का मौसम घूमने के लिए बेहतरीन माना जाता है। सुबह 9 बजे से शाम 5 से 6 बजे तक यह पर्यटकों के लिए खुला रहता है। टिकट किफायती है और गाइड के साथ घूमना अनुभव को और भी खास बना देता है। यहां पहुंचने में कोई मुश्किल नहीं चारबाग स्टेशन और एयरपोर्ट दोनों से यह करीब 6 से 10 किलोमीटर की दूरी पर है। पास में रूमी दरवाज़ा, छोटा इमामबाड़ा, हुसैनाबाद क्लॉक टॉवर और भोजनो का मशहूर चौक बाज़ार भी है, जहां टुंडे कबाब और मख़न मलाई का स्वाद जरूर चखें।
