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दुनिया भर से पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती हैं एलोरा की ये गुफाएं

चट्टानों पर की गई शिल्पकलाओं के जरिए विश्व विरासत स्थल में अपना स्थान बनाने वाले महाराष्ट्र के एलोरा की गुफाओं की खूबसूरती देखने लायक है। भारतीय इतिहास के उत्कृष्ट कलाकारी को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने वाली ये गुफाएं आज से लगभग हजारों साल पुरानी हैं। लेकिन आज भी इन गुफाओं में चट्टानों पर की गई नक्काशियों में वहीं फिनिशिंग देखने को मिलती है जो नए नक्काशियों में मिलते हैं।
सह्याद्री पर्वत श्रृंखलाओं को काट कर बनाए गए इस गुफा की श्रृंखलाओं में मानव द्वारा की गई बेहतरीन शिल्पकारी और नक्काशी की कला देखने को मिलती है।

एलोरा का गौरवशाली इतिहास (Glorious History of Ellora)

इतिहासकारों के मुताबिक इन गुफाओं का निर्माण 600 ई. से 1000 ई. के बीच करवाया गया था। एलोरा की गुफाओं की श्रृंखला में कुल 34 गुफाओं का निर्माण करवाया गया था। जिनमें 17 गुफाएं ब्राह्मणों से संबंधित थीं, 12 गुफाएं बौद्ध धर्म से संबंध रखती थीं और पांच गुफाओं का जैन धर्म से जुड़ाव था। इन गुफाओं का निर्माण पैठन से उज्जैन जाने वाले व्यापारिक मार्गों के पास करवाया गया था।
एलोरा की गुफाओं में कई हिंदू और बौद्ध गुफाओं का ताल्लुकात राष्ट्रकूट वंश के काल से है। वहीं जैन गुफाओं का निर्माण बाद में करवाया गया था। बताया जाता है कि जैन गुफाओं का निर्माण चालुक्य और देवगिरी के यादव शासकों के समय में हुआ था। इन गुफाओं में हिंदू बौद्ध और जैन तीनों धर्मों का उल्लेख देखने को मिलता है। अतः कहा जा सकता है कि एलोरा धार्मिक संगम का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है। यह उदाहरण है धार्मिक सहिष्णुता और एकता की जो अलग-अलग धर्म के बीच सामंजस्य स्थापित करने का कार्य करता है।

एलोरा कैसे पहुंचे (How to visit Ellora Caves)?

एलोरा की गुफ़ाएँ महाराष्ट्र के संभाजी नगर अर्थात औरंगाबाद जिले में स्थित है। अगर आप एलोरा की गुफाओं को घूमना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सबसे पहले औरंगाबाद आना पड़ेगा। औरंगाबाद से एलोरा की गुफाओं की दूरी लगभग 30 किलोमीटर है। जहां आप कैब बुक करके या फिर अपनी गाड़ी से आसानी से पहुंच सकते हैं। अगर आप फ्लाइट से एलोरा की गुफाओं तक पहुंचाना चाहते हैं तो एलोरा की गुफाओं से निकटतम हवाई अड्डा जलगांव एयरपोर्ट है। लेकिन यहां भारत के कुछ ही शहरों से फ्लाइट की व्यवस्था है। एलोरा की गुफाओं तक बाय रोड और बाय रेलवे भी पहुंचा जा सकता है। क्योंकि औरंगाबाद में बस स्टॉप और रेलवे स्टेशन दोनों हीं उपलब्ध हैं। आप औरंगाबाद रेलवे स्टेशन से एलोरा पहुंचने के लिए लोकल बस की सुविधा भी ले सकते हैं।

एलोरा ने यात्रियों, व्यापारियों, जनसाधारणों और यहां तक की राजा महाराजाओं को भी अपनी ओर आकर्षित किया। यहां की सुंदर कलाकृतियों के चर्चे काफी दूर-दूर तक फैले हुए थे। अगर बात करें एलोरा की गुफाओं के निर्माण के बारे में तो सबसे पहले गुफा नंबर 29 जिसे डुमर लीना गुफा भी कहते हैं, का निर्माण छठी शताब्दी में शुरू हुआ। इसके बाद गुफा नंबर 10 यानी विश्वकर्मा गुफा, गुफा नंबर 11 धो ताल गुफा और गुफा नंबर 12 तीन ताल गुफा का निर्माण चालुक्य शासन वंश के समय में किया गया था। वहीं अगर गुफा नंबर 15 की बात की जाए तो इनका निर्माण आठवीं शताब्दी के अंत में राष्ट्रकूटों के समय में किया गया था। यह गुफा शिलालेख गुफा के नाम से जानी जाती है।

एलोरा की गुफा आने का सबसे सही समय (Best time to visit Ellora)

अगर आप एलोरा की गुफाओं को घूमना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे सही समय ठंड के महीनों में होता है। इस समय तापमान कम होने के कारण आप सहजता से सभी गुफाओं को घूम पाएंगे और उनके बारे में जान पाएंगे। इसीलिए अगर आप एलोरा की गुफाओं को घूमने आ रहे हैं तो आप नवंबर से मार्च तक के समय में आएं। महाराष्ट्र आने का यह सबसे सही समय होता है। अगर आप इस समय यहां आएंगे तो आप महाराष्ट्र के अन्य खूबसूरत पर्यटन स्थलों पर भी घूमने जा सकते हैं। खास करके सहयाद्री के पर्वत श्रृंखला में बसे हुए वॉटरफॉल्स और ट्रेक्स इस समय सामान्य दिनों से और भी ज्यादा खूबसूरत दिखते हैं।

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