बनारस की देव दीपावली हजारों लाखों लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित करती है। कहते हैं बनारस के लोगों में दीपावली को लेकर जितना उत्साह होता है उससे कई गुना ज्यादा देव दीपावली को लेकर उत्साह होता है। क्योंकि बनारस में देव दीपावली का आयोजन हीं इतना भव्य तरीके से किया जाता है कि यहां देश-विदेश से लोग उस आयोजन का हिस्सा बने आते हैं। इस साल भी बनारस में देव दीपावली का आयोजन किया जाना है। ऐसे में फाइव कलर्स ऑफ ट्रेवल (five colors of travel) के इस ब्लॉग (Blog) में हम आपको बताने जा रहे हैं बनारस के देव दीपावली के बारे में।

कब मनाया जाएगा देव दीपावली (When will Dev Diwali be celebrated)?
काशी में मनाए जाने वाले देव दीपावली के तारीखों को लेकर इस बार बहुत ही ज्यादा विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है। क्योंकि हिंदी पंचांग के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा की तिथि 26 नवंबर और 27 नवंबर की है। ऐसे में दोनों दोनों में से किस दिन देव दीपावली का आयोजन होगा इसको लेकर पर्यटकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। लेकिन काशी में देव दीपावली का आयोजन करने वाली समिति के अनुसार देव दीपावली का आयोजन 27 नवंबर को किया जाएगा। क्योंकि 27 नवंबर को हीं स्नान दान की तिथि है और दीपदान स्नान दान के बाद ही होता है।

क्यों है खास बनारस की देव दीपावली (What is special about Dev Diwali) ?
बनारस के घाटों की खूबसूरती के बारे में तो आपने सुना ही होगा। हो सकता है कि आपने पहले कभी वहां जाकर इस खूबसूरती को महसूस भी किया होगा। लेकिन इन घाटों की खूबसूरती तब कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है, जब इन घाटों पर लाखों की संख्या में दिए जलाए जाते हैं। जी हाँ! बनारस की देव दीपावली के अवसर पर यहां के घाटों पर लाखों दिए जलाए जाते हैं। यह दिए क्रमबद्ध तरीके से और काफी सजावटी तरीके से व्यवस्थित किए गए होते हैं। जिसके कारण घाटों की खूबसूरती और भी कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है। जब आप बनारस के देव दीपावली के दिन गंगा नदी में रात को वोटिंग करने के लिए उतरेंगे तो यहां की खूबसूरती देखकर आपको बनारस की भव्यता और देव दीपावली के उत्सव के लिए लोगों के उत्साह का कारण समझ में आएगा। यह आयोजन इतना भव्य होता है कि देश-विदेश से यहां पर्यटक इस अवसर पर घूमने आते हैं। अगर आप भी इस बार फेस्टिव सीजन में कहीं घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं तो बनारस आपके लिए बहुत ही अच्छा ऑप्शन हो सकता है। क्योंकि यहां आकर आप फेस्टिव वाइब्स भी इंजॉय कर पाएंगे और छुट्टियों का मजा भी ले पाएंगे।

यहां गंगा किनारे घाटों पर जलाए जाने वाले दियों और घाटों पर चलने वाले लेजर शो बनारस की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। देव दीपावली दीपावली के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। आस्था के पर्व के अवसर पर यहां के घाटों पर हर साल लाखों दिए जलाए जाते हैं। उन लाखों दियों की जगमगाहट सभी के मनो को मोह लेती हैं। इस पर्व को त्रिपुरोत्सव और त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

बनारस कैसे आए (How to visit Banaras) ?
अगर आपको बनारस आना है तो बनारस सड़क मार्ग और रेल मार्ग दोनों से भारत के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। NH 44 वाराणसी से जुड़ा हुआ है और आप NH 44 द्वारा वाराणसी आ सकते है। वाराणसी में दो रेलवे स्टेशन है: जिनमें से एक है वाराणसी जंक्शन और दूसरा मुगलसराय जंक्शन। बनारस हवाई मार्ग से दिल्ली और मुंबई से जुड़ा हुआ है।