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पक्षियों की हजारों से अधिक प्रजातियां का निवास स्थल है केवलादेव पक्षी विहार

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केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (Keoladeo National Park) भारत के वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की सूची में शामिल, एक प्रसिद्ध बर्ड अभयारण्य है। इस नेशनल पार्क की प्रसिद्धि का कारण है सर्दियों के दौरान यहाँ आने वाले साइबेरियन सारस। यह नेशनल पार्क राजस्थान के भरतपुर में स्थित है जिसके कारण इस उद्यान को भरतपुर पक्षी विहार भी कहा जाता है। इस पक्षी विहार में हजारों की संख्या में लुप्तप्राय और दुर्लभ पक्षी पाए जाते है। केवलादेव नेशनल पार्क लगभग 28 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस राष्ट्रीय उद्यान को 1982 में नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया। गंभीर और बाणगंगा नदी इस पार्क में बहती है। यह पक्षी विहार पर्यटकों को काफी आकर्षित करता है। फॉउना और फ्लोरा (Floras and Faunas in Keoladeo National Park) केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना निवास करते है जिनमे पक्षियों की 350 से अधिक प्रजातियां पायी जाती है। इनमे साइबेरियन सारस (Siberian Stork), घोमरा (Ghomra), उत्तरी शाह चकवा (Northern Shah Chakwa), जल पक्षी (Waterfowl), लाल सर बत्तख (Red-headed Duck) आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ स्तनधारियों की कुल 36 प्रजातियाँ रहती है जिनमे से कुछ प्रमुख ये है- (Sambar), हनुमान लंगूर (Hanuman Langur), चीतल हिरण (Chital Deer), नीलगाय (Nilgai) तथा धारीदार लकड़बग्घा (Striped Hyena)। यहां मछलियां की 43 प्रकार की प्रजातियाँ पाई जाती है। अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ के जंगलों में बबूल (Acacia nilotica), कदंब (Mitragyna parvifolia) और जामुन (Syzygium cuminii) के पेड़ बहुत अधिक संख्या में पाए जाते है। वही जलीय वनस्पतियों में यहाँ वाटर लिली (Nymphaea nouchali), लोटस (Nelumbo nucifera) तथा वॉटर फ़र्न (Azolla), पाए जाते हैं। बेस्ट टाइम टू विजिट केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (Best time to visit Keoladeo National Park) यह राष्ट्रीय उद्यान साल के बारहों महीने खुला रहता है। आप यहाँ किसी भी महीने में आ सकते है। लेकिन अगर आप यहाँ माइग्रेटरी बर्ड्स (Migratory Birds) की ज्यादा प्रजातियाँ देखना चाहते है तो आप सर्दियों (अक्टूबर से फरवरी) में आने का कोशिश करें। वही यदि आप यहां के स्थानीय पक्षियों (Local Birds) के बारें में जानना चाहते है तो आप अगस्त से नवंबर के बीच कभी भी आ सकते है। कैसे पहुंचे केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Keoladeo National Park)?

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200 हिम तेंदुओं का निवास स्थल है हेमिस नेशनल पार्क

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हेमिस राष्ट्रीय उद्यान (Hemis National Park) भारत में हिमालय के उत्तर में एकमात्र नेशनल पार्क है जो लगभग 4400 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। यह राष्ट्रीय उद्यान दक्षिण एशिया में सबसे बड़ा नेशनल पार्क है जो लद्दाख के पूर्वी भाग में स्थित है। हेमिस नेशनल पार्क भारत में सबसे ज्यादा अल्टीट्यूड (Altitude) पर स्थित नेशनल पार्क है। इस नेशनल पार्क का नाम प्रसिद्ध हेमिस मठ के नाम पर पड़ा है। इस नेशनल पार्क के उत्तर में सिंधु नदी बहती है। यह राष्ट्रीय उद्यान नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के बाद दूसरा सबसे बड़ा बायोस्फीयर रिजर्व है। इस नेशनल पार्क की प्रसिद्धि का कारण यहाँ रहने वाले स्नो लेपर्ड है। इस नेशनल पार्क में करीब 1600 लोग रहते है। इतिहास (History of Hemis National Park) सर्वप्रथम, इस उद्यान की 1981 में स्थापना हुई थी और तब उस समय इस पार्क में मरखा और रुम्बक के जलग्रह को सम्मलित किया गया था और इसका क्षेत्रफल 600 वर्ग किमी था। 1988 में, हेमिस राष्ट्रीय उद्यान में कुछ और क्षेत्र को जोड़ा गया जिससे इसका क्षेत्रफल बढ़कर 3350 वर्ग किलोमीटर हो गया। इसके पश्चात, सन् 1990 में हेमिस नेशनल पार्क के क्षेत्रफल को बढ़ाकर 4400 वर्ग किमी कर दिया गया। फॉउना (Faunas in Hemis National Park) हेमिस राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना निवास करते है जिनमे स्तनधारियों की कुल 16 प्रजातियाँ पायी जाती है। इनमे तिब्बती भेड़िया (Tibetan Wolf), यूरेशियन भूरा भालू (Eurasian Brown Bear), माउंटेन नेवला (Mountain Mongoose), हिमालयी माउस खरगोश (Himalayan Mouse Rabbit), एशियाई आइबेक्स (Asian Ibex), रेड फॉक्स (Red Fox) आदि शामिल है। इसके अलावा इस नेशनल पार्क में लगभग 200 हिम तेंदुए निवास करते है। यहाँ पक्षियों की 73 से अधिक प्रजातियां रहती है। फ्लोरा (Floras in Hemis National Park) अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ अल्पाइन वनस्पतियों की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- एनेमोन (Anemone), जेंटियाना (Gentiana), थैलिक्ट्रम (Thalictrum), लॉयडिया (Lloydia), वेरोनिका (Veronica), डेल्फ़िनम (Delphinum), केरेक्स (Carex) और कोब्रेसिया (Kobresia)। एक अध्ययन के अनुसार, इस पार्क में लगभग 15 दुर्लभ और लुप्तप्राय औषधियों की रिपोर्ट दी गयी है जिनमे हयोसायमस नाइजर (Hyoscymus niger), अर्नेबिया यूक्रोमा (Arnebia euchroma), आर्टेमिसिया मैरिटिमा (Artemisia maritima), फेरुला जैशकेना (Ferula jaschkeana), इफेड्रा जेरार्डियाना (Ephedra gerardiana), बर्गनिया स्ट्रेची (Bergenia strachii) और एकेंथोलिमोन लाइकोपोडायोइड्स (Acantholimon lycopodioides) शामिल हैं। बेस्ट टाइम टू विजिट हेमिस नेशनल पार्क (Best time to visit Hemis National Park) अगर आप यहाँ घूमने जाना चाहते है तो ठंड के समय यहाँ जाना के प्लानिंग से बचे क्योंकि विंटर में विज़िटर्स के लिए ये पार्क खुला नहीं होता है। इसका कारण यह है कि इस अवधि में यहाँ बहुत ठंड पड़ती है। आप यहाँ मानसून के महीनों (मई से अक्टूबर) में आ सकते है। कैसे पहुंचे हेमिस राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Hemis National Park)?

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मेघालय की खूबसूरती और संस्कृति दोनों को दर्शाता है चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल

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मेघालय राज्य की खूबसूरती किसी से छुपी नहीं है। जनजाति बहुल जनसंख्या होने के कारण इस राज्य में वनों का घनत्व बहुत अधिक देखने को मिलता है। साथ ही साथ यह राज्य हिमालयन रेंज के पहाड़ों पर बसा हुआ है। ऐसे में सामान्य दिनों में भी यह राज्य किसी जन्नत से काम नहीं दिखता है। लेकिन इस राज्य की खूबसूरती में चार चांद तब लग जाते हैं जब यहां चेरी ब्लॉसम यानि चेरी के फूल खिलते हैं। खुशी में मेघालय के शिलांग में एक बहुत बड़ा फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। जिसे चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल कहा जाता है। आइए आज के फाइव कॉलर्स ऑफ ट्रैवल के इस ब्लॉग (Blog) में हम आपको चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल शिलांग (Cherry Blossom Festival Shillong) के बारे में बताते हैं :- क्या है चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल (What is cherry blossoms festival)? चेरी ब्लॉसम हर साल नवंबर महीने के आसपास ही होता है। ऐसे में चेरी के फूल के खिलने के समय यहां हर साल चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल मनाया जाता है। यह मेघालय के शिलांग के सबसे प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। क्योंकि इसकी लोकप्रियता सिर्फ भारत हीं नहीं बल्कि दुनिया भर में है। मेघालय के चेरी ब्लॉसम को देखने के लिए यहां पर्यटक तो देश-विदेश से आते ही हैं, साथ ही साथ यहां परफॉर्म करने वाले आर्टिस्ट भी इंटरनेशनल आर्टिस्ट होते हैं। क्यों है खास यह चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल (Why this festival is too special)? इस फेस्टिवल में कई तरह के कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं।जिस में मेघालय के संस्कृति से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। अगर आपको मेघालय की संस्कृति को समझना है तो चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल के समय आप दो-तीन दिनों के लिए मेघालय में रख कर यहां की खूबसूरतीयों का आनंद ले। तब आपको पता चलेगा कि असल में मेघालय कितनी खूबसूरत जगह है। चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल का इतिहास (History of Cheery Blossom Festival) : चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल मनाने की प्रथा भारत में जापान से आई है। जापान में कई सदियों से यह परंपरा निभाई जाती है। भारत में चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल पहली बार वर्ष 2021 में मनाई गई थी। इस फेस्टिवल की शुरुआत शिलांग के उत्सव पैलेस के वेन्यू वाईड्स लेक और पोलो ग्राउंड में हुआ था।चेरी ब्लॉसम के समय चेरी के हल्के गुलाबी रंग के पेड़ परियों की कहानी के किसी कल्पवृक्ष से कम नहीं लगते हैं। यह इतने खूबसूरत होते हैं कि अगर आप पहली बार इन्हें देख रहे हैं तो आप जरूर उनके प्यार में पड़ जाएंगे। प्रकृति की अद्भुत रचना के उदाहरण हैं चेरी के पेड़ और जब एक साथ कई सारे चेरी के पेड़ हल्के गुलाबी रंग के फूलों की चादर से ढक जाते हैं तो इस समय मेघालय का यह नजारा देखने लायक होता है। कैसे पहुंचे शिलांग (How to reach Shillong)?

Raimona National Park Destination Travel

सुनहरे लंगूरों का घर है रायमोना नेशनल पार्क

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नॉर्थ ईस्ट में फेवरेबल कंडीशन होने के कारण यहां रिच बायोडायवर्सिटी देखने को मिलती है और यहीं वजह है कि यहां कई सारे नेशनल पार्क्स हैं। असम का यह रायमोना नेशनल पार्क (Raimona National Park) पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन आप यहां शहरों से दूर जंगलों के बीच प्रकृति को महसूस करते हुए अपना एक अच्छा सा वीकेंड ट्रिप प्लान कर सकते हैं। रायमोना नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। रायमोना राष्ट्रीय उद्यान असम का छठा नेशनल पार्क है जो, असम के कोकराझार जिले में स्थित है। इस राष्ट्रीय उद्यान की सीमा क्षेत्र इंडो-भूटान बॉर्डर और पश्चिम बंगाल की राज्य सीमा से लगती है। 5 जून 2021 को पर्यावरण दिवस के अवसर पर असम के मुख्यमंत्री श्री हिमन्त बिश्व शर्मा के द्वारा घोषणा की गई जिसके तहत इस उद्यान को नेशनल पार्क घोषित कर दिया गया था। रायमोना राष्ट्रीय उद्यान में फॉउना और फ्लोरा (Fauna and Flora in Raimona National Park) रायमोना राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे एशियाई हाथी (Asian Elephant), रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), क्लाउडेड तेंदुआ (Clouded Leopard), हॉर्नबिल (Hornbill), चित्तीदार हिरण (Spotted Deer), भारतीय गौर (Indian Gaur), वाइल्ड वॉटर बफैलो (Wild Water Buffalo), आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ पक्षियों की 170 से अधिक प्रजातियां तथा तितलियों की 150 से अधिक प्रजातियां निवास करती है। रायमोना राष्ट्रीय उद्यान की प्रसिद्धि का कारण यह है कि, यहाँ गोल्डन लंगूर पाए जाते है जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते है। वही अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ वनस्पतियों की लगभग 380 प्रजातियाँ पायी जाती हैं। कैसे पहुंचे रायमोना राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Raimona National Park)?

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पक्षियों की 350 से अधिक प्रजातियां का निवास स्थल है असम का डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क

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नॉर्थ ईस्ट में फेवरेबल कंडीशन होने के कारण यहां रिच बायोडायवर्सिटी (Rich Biodiversity) देखने को मिलती है और यहीं वजह है कि यहां कई सारे नेशनल पार्क्स हैं। असम का यह डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क (Dibru-Saikhowa National Park) पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन आप यहां शहरों से दूर जंगलों के बीच प्रकृति को महसूस करते हुए अपना एक अच्छा सा वीकेंड ट्रिप (Weekend Trip) प्लान कर सकते हैं। डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ (Wildlife) की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। यह राष्ट्रीय उद्यान ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित एक नेशनल पार्क है जो, असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिले में स्थित है। डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क लगभग 340 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। ब्रह्मपुत्र और लोहित नदी उत्तर में एवं डिब्रू नदी इस पार्क के दक्षिण में बहती है। इतिहास (History of Dibru-Saikhowa National Park) डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान को 1995 में वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया। इसके पश्चात 1997 में इसे बायोस्फियर रिजर्व बनाने की घोषणा की गयी जिसमे इस 765 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाले उद्यान को दो भागों में बाँट दिया गया। कोर जोन क्षेत्र (340 वर्ग किमी) और बफर जोन क्षेत्र (425 वर्ग किमी)। इसके बाद में कोर जोन क्षेत्र को 1999 में नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया। फॉउना (Faunas in Dibru-Saikhowa National Park) डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना निवास करते है जिनमे स्तनधारियों की कुल 36 प्रजातियाँ पायी जाती है। इनमे रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), स्पॉटेड तेंदुआ (Spotted Leopard), तेंदुआ (Leopard), स्लॉथ बीयर (Sloth Bear), जंगली बिल्ली (Wild Cat), जंगली घोड़ा (Wild Horse), एशियाई हाथी (Asian Elephant) आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ पक्षियों की 350 से अधिक प्रजातियां रहती है। फ्लोरा (Floras in Dibru-Saikhowa National Park) अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ आर्किड वनस्पतियों की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- सैलिक्स टेट्रास्पर्मा (Salix tetrasperma), बिशोफिया जावानिका (Bischofia javanica), डिलेनिया इंडिका (Dillenia indica), बॉम्बेक्स सीइबा (Bombax ceiba), टर्मिनलिया मायरियोकार्पा (Terminalia myriocarpa) और लेगरस्ट्रोमिया परविफ्लोरा (Lagerstroemia parviflora)। बेस्ट टाइम टू विजिट डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क (Best time to visit Dibru-Saikhowa National Park) अगर आप यहाँ घूमने जाना चाहते है तो मानसून के समय यहाँ जाना के प्लानिंग से बचे क्योंकि मानसून में विज़िटर्स के लिए ये पार्क खुला नहीं होता है। इसका कारन यह है कि इस अवधि में यहाँ गर्मी और भारी बारिश होती है। आप यहाँ ठंड के महीनों (नवंबर से अप्रैल) में आ सकते है। कैसे पहुंचे डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Dibru-Saikhowa National Park)?

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375 से अधिक प्रजातियों का निवास स्थल है ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क

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दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए हिमाचल प्रदेश हमेशा से ही हैंगआउट डेस्टिनेशन के लिस्ट में सबसे ऊपर रहा है। क्योंकि हिमाचल प्रदेश में पहाड़ी, नदियाँ, स्नोफॉल, ट्रैकिंग, पैराग्लाइडिंग, हाइकिंग आदि जैसी एक्टिविटीज को आप बहुत ही आसानी से इंजॉय कर सकते हैं। लेकिन अगर आप इन सब से बोर आ गए हैं और कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं तो मैं आपको बताने वाली हूं एक ऐसे डेस्टिनेशन के बारे में जो हिमाचल प्रदेश में ही है और यहां जाना आपके लिए वर्थ ईट भी साबित होगा। क्योंकि यहां आप उन सभी एडवेंचरस एक्टिविटीज के साथ-साथ वाइल्डलाइफ को एंजॉय कर पाएंगे। मैं बात कर रही हूं हिमाचल प्रदेश के ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के बारे में। जो न सिर्फ बच्चों बल्कि बुजुर्गों के लिए भी एक अच्छी ट्रैवल डेस्टिनेशन है। अगर आप अपने फैमिली के साथ किसी वेकेशन को प्लान कर रहे हैं तो, इस जगह को आप अपने बकेट लिस्ट में टॉप प्रायोरिटी पर रख सकते हैं। क्या है ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की विशेषताएं (What are the features of Great Himalayan National Park)? ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (GHNP) पर्यटकों की मनपसंद जगहों में से एक हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित है। यह नेशनल पार्क हिमालय की खूबसूरत वादियों में है। इस नेशनल पार्क को वर्ल्ड हेरिटेज साइट (World Heritage Site) की सूची में भी शामिल किया गया है। यह नेशनल पार्क अपने ब्राउन बियर्स (Brown Bears) के लिए प्रसिद्ध है। यह नेशनल पार्क लगभग 1171 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। सर्वप्रथम ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान को 1984 में बनाया गया था। इसके पश्चात 1999 में इसे नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में ब्राउन बियर्स के अलावा भी कई प्रकार के वन्य जीव निवास करते है जिनमे थार, गोराल, मस्‍क डीयर, चीता आदि प्रमुख है। यह नेशनल पार्क हिमाचल के सबसे प्रसिद्ध नेशनल पार्कों में से एक है और आपको यहाँ 25 से भी अधिक प्रकार के वन देखने को मिलेंगे। साथ ही साथ यहां 800 प्रकार के पौधे और 180 से भी अधिक पक्षियों की प्रजातियां निवास करती है। जिसके कारण इस नेशनल पार्क में आप बायोडायवर्सिटी को बहुत ही अच्छे तरीके से एक्सप्लोर कर पाएंगे। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में कई सारे ऐसे स्पॉट हैं जिनका नाम संतो के नाम पर रखा गया है। क्योंकि पुराने जमाने में देश के अलग-अलग कोने से यहां ऋषि मुनि साधना करने के लिए आया करते थे। इस नेशनल पार्क को 2014 में वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स (World Heritage Sites) की सूची में शामिल किया गया था। कैसे पहुंचे ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (How to reach Great Himalayan National Park)? यदि आप ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क आना चाहते हैं तो आप तीनो मार्गों से आप बहुत आसानी से आ सकते है। सड़क मार्ग से दिल्ली से आने के लिए आप 10 से 12 घंटे ड्राइव करके ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क पहुंच सकते है। इस नेशनल पार्क का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन जोगिन्दर नगर में है जो नेशनल पार्क से 143 किमी दूर है। इसके अलावा हवाई मार्ग से आने के लिए आप भुंतर एयरपोर्ट आ सकते है जो 20 किमी दूर है।

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20 Most Famous National Parks in India

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बरसात का सीजन खत्म हो गया है और धीरे-धीरे ठंड बढ़ने लगा है, ऐसे में नेशनल पार्क्स भी जंगल सफारी और टूर के लिए खुल गए हैं। अगर आप अभी किसी अच्छे से वीकेंड टूर की प्लानिंग कर रहे हैं तो जंगल सफारी और टूर आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं भारत के कुछ चुनिंदा नेशनल पार्क्स के बारे में, जहां आप अच्छे से बायोडायवर्सिटी को एक्सप्लोर कर सकते हैं और अपना वीकेंड एंजॉय कर सकते हैं। 1. गिर राष्ट्रीय उद्यान (Gir National Park) चारों तरफ घने जंगल और स्वतंत्र रूप से बिना किसी डर के घूम रहे बब्बर शेर, गुजरात के सोमनाथ जिले में स्थित गिर नेशनल पार्क की पहचान हैं। यहां मैमल्स (mammals) के 38 प्रजाति पक्षियों (birds) के 300 से अधिक प्रजाति रेप्टाइल्स (reptiles) के साथ इस प्रजाति और इनसेक्टस (insects) के 2,000 से भी ज्यादा प्रजाति पाए जाते हैं। यह नेशनल पार्क सिर्फ जानवरों के लिए नहीं बल्कि यहां पाए जाने वाले पौधों के विविधता के लिए भी मशहूर है। 2. पेरियार नेशनल पार्क (Periyar National Park) पेरियार नेशनल पार्क 350 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ एक ऐसा नेशनल पार्क है जो हाथियों और बाघों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। पेरियार नेशनल पार्क को दो नदियों का पानी उपलब्ध होता है। जिसमें से पहली नदी का नाम है पेरियार और दूसरी नदी का नाम है पांबा। यह नेशनल पार्क 1934 में नीली कक्कांपेट्टी गेम सेंचुरी के नाम से स्थापित किया गया था। इस नेशनल पार्क का नाम 1950 में बदलकर पेरियार वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी रखा गया। इस पार्क के देखरेख का काम डिपार्मेंट आफ फॉरेस्ट एंड वाइल्डलाइफ केरल और साथ ही गवर्नमेंट आफ इंडिया द्वारा संभाला जाता है। 3. बांधवगढ़ नेशनल पार्क (Bandhavgarh National Park) मध्य प्रदेश के विंध्याचल पर्वत में स्थित बांधवगढ़ नेशनल पार्क अपने बाघों के लिए प्रसिद्ध है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में इन बाघों को देखने के लिए दुनिया के अलग-अलग कोने से साल भर में लगभग 50,000 से भी ज्यादा पर्यटक आते हैं और जंगल सफारी के जरिए बाघों की खोज में निकल जाते हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क लगभग 105 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस नेशनल पार्क में बाघ के अलावा कई अन्य प्रकार के स्तनधारी जीव भी पाए जाते हैं। जिनमें तेंदुआ, भेड़िया, सियार, हिरण, भालू, लंगूर, बंदर, जंगली सूअर, जंगली कुत्ते, लोथल बीयर और चीतल जैसे जीव प्रमुख है। वर्तमान समय में बांधवगढ़ नेशनल पार्क में 165 बाघ अपना जीवन यापन कर रहे हैं। 4. दुधवा नेशनल पार्क (Dudhwa National Park) दुधवा नेशनल पार्क उत्तर प्रदेश का सबसे प्रमुख नेशनल पार्क है। यह राष्ट्रीय उद्यान 490 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस उद्यान की स्थापना 1977 में हुई थी। इस राष्ट्रीय उद्यान का उद्देश्य बारहसिंघा का संरक्षण करना है। यहां पर बाघ, बारहसिंघा, सुस्त भालू, एक सींग वाले गैंडे और 400 से अधिक पक्षी प्रजातियों के साथ, एक वन्यजीव हॉटस्पॉट है। सुहेली नदी और मोहाना नदी इस उद्यान की जीवन रेखा का कार्य करती है। इन नदियों में गंगेटिक डॉल्फिन भी निवास करती है। 5. सुंदरवन नेशनल पार्क (Sundarban National Park) सुंदरवन नेशनल पार्क विश्व के सबसे बड़े डेल्टाई क्षेत्र (सुंदरवन डेल्टा) में स्थित है। यह नेशनल पार्क अपने रॉयल बंगाल टाइगरों (Royal Bengal Tigers) के लिए प्रसिद्ध है। यह नेशनल पार्क लगभग 1330 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। सर्वप्रथम सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान को 1973 में मूल सुंदरवन बाघ रिज़र्व क्षेत्र का कोर क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। इसके पश्चात 1977 में इसे वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया। तथा बाद में 4 मई 1984 को इसे नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया। सुंदरवन नेशनल पार्क में रॉयल बंगाल टाइगरों के अलावा भी कई प्रकार के वन्य जीव निवास करते है जिनमे बर्ड्स (Birds), रेप्टाइल्स (Reptiles) और इनवर्टेब्रेट्स (Invertebrates) शामिल है। इसके अलावा यहाँ साल्ट वाटर (Salt Water) में रहने वाले मगरमच्छ भी पाए जाते है। 6. मानस नेशनल पार्क (Manas National Park) असम के मानस नदी के तट पर स्थित मानस नेशनल पार्क भारत और भूटान दोनों हीं देश में फैला हुआ है। मानस नदी भारत और भूटान के बॉर्डर पर बहती है, जिसके दोनों ओर घने जंगल बसे हैं। भारत में इस जंगल के भूभाग को मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता हैं। वहीं भूटान में फैले जंगल के क्षेत्र को रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है। मानस नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। असम का यह मानस नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन इसे भी यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया गया है। लगभग 500 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ यह नेशनल पार्क भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित असम का प्रमुख नेशनल पार्क है। 7. पेंच नेशनल पार्क (Pench National Park) पेंच नेशनल पार्क मध्य प्रदेश का एक प्रमुख नेशनल पार्क है। यह राष्ट्रीय उद्यान 758 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस उद्यान की स्थापना 1975 में हुई थी। यहां पर पीफोल, कोपीजेन्ट, रेड जंगल फोल, रेड वेन्टेड बुलबुल, बेस्ट डबारबेट, क्रीमसन, मेंगपाई राबिन, रॉकेट टेल डोगों, व्हिस्टल टील, लेसर आदि पक्षियों की प्रजातियों के साथ, एक वन्यजीव हॉटस्पॉट है। पेंच नदी इस उद्यान को दो भागों में बाँटती है। पेंच टाइगर रिज़र्व को भारत का सर्वश्रेष्ठ टाइगर रिज़र्व होने का गौरव प्राप्त है। रुडयार्ड किपलिंग की प्रसिद्ध कहानियों में से एक ‘द जंगल बुक’ इसी पार्क पर आधारित है। 8. राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji National Park) उत्तराखंड राज्य के देहरादून और हरिद्वार में स्थित राजाजी नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 820.5 वर्ग किलोमीटर है। हाथियों, तेंदुओं, बाघों और हिरनों जैसे जानवरों को अपने में पनाह देने वाला यह पार्क पर्यटकों के मन को भी काफी लुभाता है। सुहाने मौसम, हरे भरे पेड़ और पहाड़ियों के बीच खुले में घूम रहे जानवर को देखना अपने आप में ही अविस्मरणीय दृश्य होता है। 9. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (Valmiki Tiger Reserve) चारों तरफ घने जंगल और स्वतंत्र रूप से बिना किसी डर के रह रहे जंगली जानवर!  वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की यही खासियत लोगों

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15 Best National Parks of India

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बरसात का सीजन खत्म हो गया है और धीरे-धीरे ठंड बढ़ने लगा है, ऐसे में नेशनल पार्क्स भी जंगल सफारी और टूर के लिए खुल गए हैं। अगर आप अभी किसी अच्छे से वीकेंड टूर की प्लानिंग कर रहे हैं तो जंगल सफारी और टूर आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं भारत के कुछ चुनिंदा नेशनल पार्क्स के बारे में, जहां आप अच्छे से बायोडायवर्सिटी को एक्सप्लोर कर सकते हैं और अपना वीकेंड एंजॉय कर सकते हैं। 1. पेरियार नेशनल पार्क (Periyar National Park) पेरियार नेशनल पार्क 350 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ एक ऐसा नेशनल पार्क है जो हाथियों और बाघों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। पेरियार नेशनल पार्क को दो नदियों का पानी उपलब्ध होता है। जिसमें से पहली नदी का नाम है पेरियार और दूसरी नदी का नाम है पांबा। यह नेशनल पार्क 1934 में नीली कक्कांपेट्टी गेम सेंचुरी के नाम से स्थापित किया गया था। इस नेशनल पार्क का नाम 1950 में बदलकर पेरियार वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी रखा गया। इस पार्क के देखरेख का काम डिपार्मेंट आफ फॉरेस्ट एंड वाइल्डलाइफ केरल और साथ ही गवर्नमेंट आफ इंडिया द्वारा संभाला जाता है। 2. गिर राष्ट्रीय उद्यान (Gir National Park) चारों तरफ घने जंगल और स्वतंत्र रूप से बिना किसी डर के घूम रहे बब्बर शेर, गुजरात के सोमनाथ जिले में स्थित गिर नेशनल पार्क की पहचान हैं। यहां मैमल्स (mammals) के 38 प्रजाति पक्षियों (birds) के 300 से अधिक प्रजाति रेप्टाइल्स (reptiles) के साथ इस प्रजाति और इनसेक्टस (insects) के 2,000 से भी ज्यादा प्रजाति पाए जाते हैं। यह नेशनल पार्क सिर्फ जानवरों के लिए नहीं बल्कि यहां पाए जाने वाले पौधों के विविधता के लिए भी मशहूर है। 3. दुधवा नेशनल पार्क (Dudhwa National Park) दुधवा नेशनल पार्क उत्तर प्रदेश का सबसे प्रमुख नेशनल पार्क है। यह राष्ट्रीय उद्यान 490 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस उद्यान की स्थापना 1977 में हुई थी। इस राष्ट्रीय उद्यान का उद्देश्य बारहसिंघा का संरक्षण करना है। यहां पर बाघ, बारहसिंघा, सुस्त भालू, एक सींग वाले गैंडे और 400 से अधिक पक्षी प्रजातियों के साथ, एक वन्यजीव हॉटस्पॉट है। सुहेली नदी और मोहाना नदी इस उद्यान की जीवन रेखा का कार्य करती है। इन नदियों में गंगेटिक डॉल्फिन भी निवास करती है। 4. बांधवगढ़ नेशनल पार्क (Bandhavgarh National Park) मध्य प्रदेश के विंध्याचल पर्वत में स्थित बांधवगढ़ नेशनल पार्क अपने बाघों के लिए प्रसिद्ध है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में इन बाघों को देखने के लिए दुनिया के अलग-अलग कोने से साल भर में लगभग 50,000 से भी ज्यादा पर्यटक आते हैं और जंगल सफारी के जरिए बाघों की खोज में निकल जाते हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क लगभग 105 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस नेशनल पार्क में बाघ के अलावा कई अन्य प्रकार के स्तनधारी जीव भी पाए जाते हैं। जिनमें तेंदुआ, भेड़िया, सियार, हिरण, भालू, लंगूर, बंदर, जंगली सूअर, जंगली कुत्ते, लोथल बीयर और चीतल जैसे जीव प्रमुख है। वर्तमान समय में बांधवगढ़ नेशनल पार्क में 165 बाघ अपना जीवन यापन कर रहे हैं। 5. सुंदरवन नेशनल पार्क (Sundarban National Park) सुंदरवन नेशनल पार्क विश्व के सबसे बड़े डेल्टाई क्षेत्र (सुंदरवन डेल्टा) में स्थित है। यह नेशनल पार्क अपने रॉयल बंगाल टाइगरों (Royal Bengal Tigers) के लिए प्रसिद्ध है। यह नेशनल पार्क लगभग 1330 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है।सर्वप्रथम सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान को 1973 में मूल सुंदरवन बाघ रिज़र्व क्षेत्र का कोर क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। इसके पश्चात 1977 में इसे वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया। तथा बाद में 4 मई 1984 को इसे नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया। सुंदरवन नेशनल पार्क में रॉयल बंगाल टाइगरों के अलावा भी कई प्रकार के वन्य जीव निवास करते है जिनमे बर्ड्स (Birds), रेप्टाइल्स (Reptiles) और इनवर्टेब्रेट्स (Invertebrates) शामिल है। इसके अलावा यहाँ साल्ट वाटर (Salt Water) में रहने वाले मगरमच्छ भी पाए जाते है। 6. मानस नेशनल पार्क (Manas National Park) असम के मानस नदी के तट पर स्थित मानस नेशनल पार्क भारत और भूटान दोनों हीं देश में फैला हुआ है। मानस नदी भारत और भूटान के बॉर्डर पर बहती है, जिसके दोनों ओर घने जंगल बसे हैं। भारत में इस जंगल के भूभाग को मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता हैं। वहीं भूटान में फैले जंगल के क्षेत्र को रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है। मानस नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। असम का यह मानस नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन इसे भी यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया गया है। लगभग 500 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ यह नेशनल पार्क भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित असम का प्रमुख नेशनल पार्क है। 7. पेंच नेशनल पार्क (Pench National Park) पेंच नेशनल पार्क मध्य प्रदेश का एक प्रमुख नेशनल पार्क है। यह राष्ट्रीय उद्यान 758 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस उद्यान की स्थापना 1975 में हुई थी। यहां पर पीफोल, कोपीजेन्ट, रेड जंगल फोल, रेड वेन्टेड बुलबुल, बेस्ट डबारबेट, क्रीमसन, मेंगपाई राबिन, रॉकेट टेल डोगों, व्हिस्टल टील, लेसर आदि पक्षियों की प्रजातियों के साथ, एक वन्यजीव हॉटस्पॉट है। पेंच नदी इस उद्यान को दो भागों में बाँटती है। पेंच टाइगर रिज़र्व को भारत का सर्वश्रेष्ठ टाइगर रिज़र्व होने का गौरव प्राप्त है। रुडयार्ड किपलिंग की प्रसिद्ध कहानियों में से एक ‘द जंगल बुक’ इसी पार्क पर आधारित है। 8. राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji National Park) उत्तराखंड राज्य के देहरादून और हरिद्वार में स्थित राजाजी नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 820.5 वर्ग किलोमीटर है। हाथियों, तेंदुओं, बाघों और हिरनों जैसे जानवरों को अपने में पनाह देने वाला यह पार्क पर्यटकों के मन को भी काफी लुभाता है। सुहाने मौसम, हरे भरे पेड़ और पहाड़ियों के बीच खुले में घूम रहे जानवर को देखना अपने आप में ही अविस्मरणीय दृश्य होता है। 9. ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (Great Himalayan National Park) ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (GHNP) पर्यटकों की मनपसंद जगहों में से एक हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित है। यह नेशनल

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अपने हाथियों के लिए मशहूर है केरल का पेरियार नेशनल पार्क

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केरल राज्य अपने रिच कल्चर और बेहतरीन नेचुरल टूरिस्ट स्पॉट्स के कारण पूरे भारत में फेमस है और यहां दुनिया के कोने कोने से लोग घूमने के लिए आते हैं। ऐसे में यहां के लोगों को यहां का कल्चर जितना पसंद आता है, उससे कहीं ज्यादा यहां के लोगों की सोच और उनका व्यवहार पसंद आता है। इसके पीछे का कारण है यहां रहने वाले मेहनती और पर्यावरण के प्रति जागरूक लोग। अधिकतर केरल को समुद्री तटों से जोड़कर देखा जाता है लेकिन, केरल में इन बीचों के अलावा बहुत से केले के बागान, नारियल के पेड़ और हाथी भी मौजूद हैं। जो यहां की संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। अगर केरल की बात हो और गजराज का जिक्र ना हो तो केरल का किस्सा अधूरा माना जाएगा। ऐसे में अगर आप केरल घूमने के लिए जा रहे हैं तो आप किसी ऐसी जगह घूमने जरूर जाएं जहां पर आप हाथियों को देख सके और फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं केरल के एक ऐसे नेशनल पार्क के बारे में जहां जाकर आप केरल के हाथियों को देख पाएंगे और उनकी सवारी भी कर पाएंगे। क्यों प्रसिद्ध है पेरियार नेशनल पार्क (Why is Periyar National Park famous)? पेरियार नेशनल पार्क 350 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ एक ऐसा नेशनल पार्क है जो हाथियों और बाघों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। पेरियार नेशनल पार्क को दो नदियों का पानी उपलब्ध होता है। जिसमें से पहली नदी का नाम है पेरियार और दूसरी नदी का नाम है पांबा। यह नेशनल पार्क 1934 में नीली कक्कांपेट्टी गेम सेंचुरी के नाम से स्थापित किया गया था। इस नेशनल पार्क का नाम 1950 में बदलकर पेरियार वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी रखा गया। इस पार्क के देखरेख का काम डिपार्मेंट आफ फॉरेस्ट एंड वाइल्डलाइफ केरल और साथ ही गवर्नमेंट आफ इंडिया द्वारा संभाला जाता है।अगर बात करें यहां मिलने वाले पेड़ों के बारे में तो यहां आपको आम, जामुन, इमली, अंजीर, किनो, बाँस, चंदन और लाल चंदन जैसे पेड़ देखने को मिलेंगे।इस पार्क में स्तनधारियों की 35 प्रजातियां, पक्षियों की 265 प्रजातियां, सरीसृपों की 45 प्रजातियां, मछलियों की 40 प्रजातियां और कीड़े तितलियों की 160 प्रजातियां पाई जाती हैं। कैसे पहुंचे पेरियार नेशनल पार्क (How to reach Periyar National Park)? पेरियार नेशनल पार्क आना बहुत हीं आसान है, क्योंकि यहां तक बाय रोड बहुत अच्छी कनेक्टिविटी मिल जाती है। अगर आप आसपास के शहरों से आ रहे हैं तो आप बहुत ही आसानी से बस के जरिए पेरियार नेशनल पार्क तक पहुंच सकते हैं। वहीं अगर आप हवाई मार्ग से आना चाहते हैं तो मदुरै एयरपोर्ट आ सकते हैं। जहाँ से इस पार्क की दुरी लगभग 140 किलोमीटर है। पार्क से सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन कोट्टायम है जो 110 किमी दूर है। पेरियार सभी प्रमुख शहरों से रोड मार्ग द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा है। पेरियार नेशनल पार्क आने का सबसे सही समय (Best time to visit Periyar National Park): अगर आप पेरियार नेशनल पार्क आ रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि कहीं भी जाने से पहले वहां के मौसम का पता जरूर लगा ले। क्योंकि मौसम अगर अनुकूल न हो तो आपके ट्रिप का मजा किरकिरा हो सकता है। ऐसे में अगर आप पेरियार नेशनल पार्क आ रहे हैं तो आप यह सुनिश्चित करें कि आप अक्टूबर से मार्च तक के समय में जा रहे हैं। क्योंकि उसे समय यहां का टेंपरेचर सबसे ज्यादा सूटेबल होता है। आप बहुत हीं आराम से नेशनल पार्क में घूम पाएंगे। इस समय ना तो आपको बहुत ज्यादा गर्मी सताएगी ना ही बारिश के कारण आपकी जीप रास्ते में फंसेगी। आप बहुत ही अच्छे से इस समय वाइल्डलाइफ को इंजॉय कर सकते हैं।

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पर्यटकों को खूब लुभाता है ये दिल्ली का मीना बाजार

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आई हो कहाँ से गोरी आंखों में प्यार लेके,दिल्ली शहर का पूरा मीना बाजार लेके,,,,, इस गाने के बोलने जिस तरह से दिल्ली शहर के मीना बाजार का जिक्र किया गया है वह अपने आप में हीं दिल्ली के मीना बाजार को मुकम्मल तरीके से कहानी के रूप में बयां करता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है यह जो दिल्ली शहर का मीना बाजार है वह आखिर दिखता कैसा है और इसे कब और क्यों बसाया गया था? दिल्ली वासियों के लिए तो यह आम बात है, लेकिन दिल्ली से बाहर रहने वाले लोग इस बात को लेकर जरूर उत्सुक होते होंगे कि आखिर दिल्ली शहर का यह मीना बाजार दिखता कैसा है? तो आज के फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको दिल्ली शहर के मीना बाजार के बारे में बताएंगे। लाल किला के सामने लगने वाला यह बाजार हर तरह के शॉपिंग करने वाले लोगों के लिए एक अच्छा ऑप्शन होता है। क्योंकि यहां हर तरह के समान आपको मिल जाएंगे। चाहे फिर इलेक्ट्रॉनिक्स की बात हो या फिर डेकोरेटिव आइटम्स की, हर तरह के खरीदारी के लिए यह मीना बाजार परफेक्ट है। इस बाजार को छाता बाजार भी कहा जाता है। चलिए इस बाजार के बारे में जानते हैं और जानते हैं कि यहां से आप किस तरह की शॉपिंग कर सकते हैं। दूर से हीं दिखने लगते हैं गहनों के दुकान : इस मीना बाजार को बसाने का उद्देश्य हीं मुगल राजकुमारियों का मनोरंजन था। इसलिए इस मीना बाजार में हर तरह के गहने और साथ सजावट के समान मिलते थे और आज भी आपको मीना बाजार में यह सारे सामान देखने को मिल जाएंगे। यहां आपको हर वैरायटी की चूड़ियां झुमके बालियां और गहने खरीदने को मिल जाएंगे। यहां गहनों की इतनी वैरायटी है कि उन्हें देखकर आप खुद हीं यह डिसाइड नहीं कर पाएंगे कि कौन सा लेना है? क्लासी लेडीज पर्स (Classy Ladies Purse in Chhata Bazaar) यहां आपको बहुत ही बढ़िया क्वालिटी के जरी और मोती के वर्क वाले पर्स देखने को मिल जाएंगे जो किसी भी लूक में चार चांद लगाने का काम करते हैं। ऐसे में आप यहाँ से बहुत अच्छे-अच्छे और यूनिक क्वालिटी के पर्स को परचेस कर सकते हैं। आपको भी तरह-तरह के क्लच रखने का शौक है तो यहां क्लच के मामले में भी बहुत सारी वैराइटीज उपलब्ध है। जो यहां आने वाले महिला पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बनते हैं एंटीक कलेक्शन (Antique Collection of Chhata Bazaar) अगर आपको भी अपने घरों को पुराने और एंटीक चीजों से सजाने का शौक है और आप भी बहुत सारे रंग-बिरंगे शोपीसेज से अपने आशियाने को और भी खूबसूरत बनाना चाहते हैं तो इस बाजार में आपको ऐसे कई सारे एंटीक ऑब्जेक्ट्स मिल जाएंगे जिन्हें आप अपने घर में सजा सकते हैं और घर की खूबसूरती को बढ़ा सकते हैं। अगर आप किसी के लिए एक परफेक्ट गिफ्ट की तलाश कर रहे हैं तो यहां मिलने वाले एंटीक पीस आपके लिए एक बेहतरीन गिफ्ट बन सकते हैं। क्लासिक शॉल (Classic Shawl in Chhata Bazaar) अगर आप भी अपने फैशन के साथ एक्सपेरिमेंट करना पसंद करते हैं तो आपके वार्डरोब में शॉल की उपस्थिति अनिवार्य हो जाती है। मीना बाजार में आपको बहुत सारे ऐसे दुकान मिल जाएंगे जहां आपको हर तरह के शॉल देखने को मिल जाएंगे। सर्दियों का मौसम शुरू होने वाला है ऐसे में शॉल फैशन ट्रेंड में आने वाले हैं। इस समय शॉल लेना आपके लिए दोहरे फायदे का काम हो सकता है और मीना बाजार में आपको बहुत ही अच्छी क्वालिटी के शॉल देखने को मिल जाएंगे। बच्चों के खिलौने (Children’s Toys in Chhata Bazaar) अब किसी बाजार का जिक्र हो और वहां बच्चों के खिलौने ना हो तो वह बाजार, बाजार नहीं हो सकता। अगर आप भी लाल किला आ रहे हैं और आपके साथ बच्चे भी हैं तो, आप उनके लिए भी बहुत अच्छी खरीदारी कर सकते हैं। यहां आपके बच्चों के बहुत सारे खिलौने जैसे रुबिक्स क्यूब्स, पजल्स और भी अतरंगे खिलौने देखने को मिल जाएंगे। यहां से आप अपने बच्चों के लिए गिफ्ट के तौर पर खिलौने भी ले जा सकते हैं।