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अद्भुत वास्तुकला को दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं खजुराहो के मंदिर

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खजुराहो इस स्थान को मध्य प्रदेश का सम्मान माना जाता है। यह वही स्थान है जहां आपको विभिन्न प्रकार की कलाकृतियों से समृद्ध मंदिरों का समूह देखने को मिलता है। मध्य प्रदेश का खजुराहो भारत के प्राचीन कालीन इतिहास को बखूबी बयां करता है। खजुराहो के मंदिरों के समूह का निर्माण आज से लगभग 1300 साल पहले हुआ था। मंदिरों पर बनाई गई कलाकृतियां यह दर्शाती हैं कि हमारा भारत आज से हजार साल पहले भी कितना मॉडर्न (modern) था। कहते हैं मॉडर्निटी (modernity) कपड़ों से नहीं आती, मॉडर्निटी सोच में होनी चाहिए और वही मॉडर्निटी आज से हजार साल पहले के भारत के लोगों में भी थी। जिसके कारण भारत उस समय दुनिया में सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। आईए जानते हैं खजुराहो के मन्दिर समूहों के बारे में। खजुराहो की मूर्तियाँ (sculptures of khajuraho) 1. कंदरिया मंदिर (Kandariya Temple) 2. चित्रगुप्त मंदिर (Chitragupta Temple) 3. विश्वनाथ मन्दिर(Vishwanath Temple) कैसे पहुंचे खजुराहो?(How to reach khajuraho) खजुराहो में कहां ठहरे? (Where to stay in Khajuraho?) खजुराहो की मूर्तियाँ (sculptures of khajuraho) खजुराहो में आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम (Archaeological Museum) है, जहां आपको कई सारे छोटे बड़े मंदिरों का समूह देखने को मिलेंगे। आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम के इस एरिया को पश्चिमी मंदिर समूह के नाम से भी जाना जाता है। आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम में जैसे ही आप इंटर करेंगे आपको बहुत ही खूबसूरत से गार्डन से होकर गुजर कर जाना होगा। यहाँ के प्रमुख मंदिरों में कंदरिया मंदिर, मतंगेश्वर मंदिर, लक्ष्मण मन्दिर, विश्वनाथ मंदिर, चित्रगुप्त मंदिर और विष्णु गुप्त मंदिर का नाम आता है। 1. कंदरिया मंदिर (Kandariya Temple) कंदरिया मंदिर यहां की सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। जो यहां की सबसे ऊंची और बड़ी मंदिर है। यह यहां की इकलौती ऐसा मंदिर जिसके दो तोरण प्रवेश द्वार हैं। साथ ही साथ यह मंदिर इसलिए भी और खास हो जाता है क्योंकि यहां के दीवारों पर काम कला को प्रदर्शित करती हुई कुछ मूर्तियां उकेरी गई हैं। यहां के दीवारों में आपको शिकार करते हुए लोगों की, मूर्तियों नाचते हुए लोगों की, हाथियों और घोड़ों की और भी न जाने कई प्रकार की मूर्तियां के उकेरी गई हैं। इस मंदिर का निर्माण चंदेल वंश के राजा विद्याधर ने करवाया था।इस मंदिर को कंदरिया महादेव के नाम से भी जाना जाता है। 2. चित्रगुप्त मंदिर (Chitragupta Temple) बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण कंदरिया महादेव मंदिर के निर्माण से भी पहले हुआ था। इस मंदिर में कंदरिया महादेव मंदिर से अलग तरह की नकाशियां की गई हैं। इस मंदिर में जगह-जगह दीवारों पर विष्णु जी की कलाकृतियों को उकेरा गया है। साथ हीं आपको इस मंदिर में अन्य देवी देवताओं की छोटी-छोटी मूर्तियां भी देखने को मिलेंगी। अगर आप इस मंदिर के अंदर जाएंगे तो अंदर मंडप भी देखने को मिलेगा। साथ ही आपको चित्रगुप्त जी की मूर्ति भी देखने को मिलेगी। यह खजुराहो का इकलौता ऐसा मंदिर है जो कि सूर्य भगवान को समर्पित मंदिर है। 3. विश्वनाथ मन्दिर(Vishwanath Temple) कंदरिया मंदिर और चित्रगुप्त मंदिर के ठीक सामने स्थित है- विश्वनाथ मंदिर। इस मंदिर का नाम विश्वनाथ मंदिर इसलिए है, क्योंकि इस मंदिर में एक शिवलिंग है। जिसके कारण इसको विश्वनाथ महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर के बारे में बताया जाता है कि सन 1002 में राजा धन द्वारा शिव मार्केटेश्वर मंदिर का निर्माण करवाया गया था। इस मंदिर के ठीक सामने नंदी की प्रतिमा विराजमान है। कैसे पहुंचे खजुराहो?(How to reach khajuraho)खजुराहो पहुंचने के लिए खजुराहो का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन खजुराहो रेलवे स्टेशन है। जो कि मुख्य शहर से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। साथ ही खजुराहो में खजुराहो का एक हवाई अड्डा भी है। लेकिन यहां सिर्फ दिल्ली से एक फ्लाइट आती है। अगर आप बाय रोड खजुराहो जाना चाहते हैं तो यह भी एक बहुत ही अच्छा ऑप्शन है। खजुराहो सड़क मार्ग के द्वारा देश के अन्य भागों से बहुत हीं अच्छे तरीके से कनेक्ट है। खजुराहो में कहां ठहरे? (Where to stay in Khajuraho?) खजुराहो में ठहरने के लिए बहुत सारे ऑप्शंस हैं। आप यहां होम स्टेज, रिजॉर्ट, हॉस्टल आदि देख सकते हैं। आप अपने बजट के हिसाब से अपने स्टे के लिए ऑप्शन का चुनाव कर सकते हैं। यहां आपको हर प्राइस रेंज में होटल और हॉस्टल्स में रूम मिल जाएंगे।

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जन्नत का दूसरा नाम है वैली ऑफ फ्लावर्स

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“क्या आपने कभी किसी ऐसे जगह घूमने जाने का सपना सजाया है जहां दूर-दूर तक पहाड़ियां हो, चारों ओर फूल के बगीचे हो और जहां खूबसूरत रंग-बिरंगे फूल खिले हुए हो? अपनी आंखों को बंद करके सोचिए कि कितना खूबसूरत होगा वह जगह, जहां यह सब सच होगा? अपने ख्यालों से पूछिए कि उस जगह की फिजाओं में घुली हुई फूलों की खुशबू कितनी खूबसूरत होगी? ….और फिर अपने दिल से पूछिए कि क्या आप उस जगह से वापस लौट कर आना चाहेंगे या वहीं का हो कर रह जाना चाहेंगे?” यह सब पढ़ कर आपके मन में ख्याल आ रहा होगा कि मैं ऐसा क्यों सोचूं? वैसी जगह थोड़ी ना एक्जिस्ट करती है! तो मेरे दोस्तों यह जगह सच में एक्जिस्ट करती है, वह भी भारत में। यह जगह है उत्तराखंड की वैली ऑफ़ फ्लावर!आज के इस ब्लॉग में हम आपको इस खूबसूरत से जगह के बारे में बताने वाले हैं। तो आईए जानते हैं- क्या है वैली ऑफ़ फ्लावर?( what is valley of flower?) वैली ऑफ़ फ्लावर उत्तराखंड में एक ऐसी जगह है जहां आपको चारों ओर हजारों प्रकार के फूलों, पौधों और छोटे-छोटे जीव जंतुओं को देखने का अवसर मिलेगा। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि इस शब्दों में बयां किया जा सकना नामुमकिन है। इस जगह की खूबसूरती को महसूस करने के लिए और यहां के फिजाओं में बसे सुकून के एहसास को समझने के लिए आपको खुद ही यहां तक आना पड़ेगा। नेचर्स लवर के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि आप इसे तस्वीरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। इस जगह के बारे में आपको एक और खास बात यह है कि ये जगह वर्ल्ड हेरिटेज साइट के सूची में शामिल है। कैसे पहुंचे वैली ऑफ फ्लावर? (How to visit valley of flowers? ) बद्रीनाथ से 25 किलोमीटर पहले एक जगह पड़ता है, जिसका नाम है गोविंद घाट। जहां अलकनंदा और लक्ष्मण गंगा का संगम होता है। गोविंद घाट से आपको फूलों की घाटी जाने के लिए पहले आपको पुलना गांव जाना होगा। पुलना गांव जाने के लिए आप शेयरिंग टैक्सी भी ले सकते हैं। पुलना पहुंचने के बाद आपको घांगरिया के लिए पैदल ट्रैकिंग करना होगा। लेकिन घांगरिया के लिए निकलने से पहले आप पुलना में ही रुक कर वैली ऑफ फ्लावर के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवा ले। रजिस्ट्रेशन के बाद आप घांगरिया के लिए निकल सकते हैं।अगर आप अपने बाइक या फिर कार से आ रहे हैं तो पुलना में आपको छोटे-छोटे होमस्टे, ढाबे और मोटरसाइकिल या कार की पार्किंग मिल जाएगी। पुलना से घांगरिया लगभग 10 किलोमीटर दूर है और इसकी चढ़ाई आपको पैदल ही करनी होगी।थकान तो बहुत होगी, लेकिन यकीन मानिए इस ट्रैकिंग के रास्ते में आने वाले खूबसूरत नजारे देख कर आप खुद को आगे बढ़ने से रोक नहीं पाएंगे। ये रास्ते इतनी खूबसूरत होते हैं कि आपको पहले से ही एक्साइटमेंट होने लगेगी कि अगर रास्ता इतना खूबसूरत है तो मंजिल कितना खूबसूरत होगा? और यकीन मानिए, जब आप फूलों की घाटी तक पहुंचेंगे तो आपको लगेगा कि आप किसी जन्नत में उतर आए हैं। घांगरिया के रास्ते में आपको सबसे पहले जंगल चट्टी नाम का एक बाजार मिलेगा। जो एक बहुत ही छोटा सा बाजार है। जिसके बाद फिर जब आप आगे बढ़ेंगे तो आपको भ्युवदार गांव से गुजरना होगा। यह गांव इस ट्रैक का एक इंपॉर्टेंट पॉइंट माना जाता है। जहां आपको कई सारे ढाबे देखने को मिल जाएंगे। आप यहां कुछ देर रुक कर लंच कर सकते हैं और थोड़ा रेस्ट कर सकते हैं। इस गांव को क्रॉस करते हुए हीं आप लक्ष्मण गंगा को पार करेंगे।पुलना से भ्युवदार गांव के रास्ते में आपको पानी लेकर चलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। क्योंकि इस रास्ते में जगह-जगह मिनरल वाटर के नल लगाए गए हैं। जहां से आप पानी पी सकते हैं। लेकिन भ्युवदार गाँव से आगे आपको सीधा घांगरिया पहुंचने पर ही पानी मिलेगा। इसीलिए आप घांगरिया के लिए निकलने से पहले आप अपने साथ पानी का बोतल रख ले। ट्रैकिंग का समय (Timing of treckking)घंगारिया से वैली ऑफ फ्लावर का रास्ता लगभग 4 किलोमीटर का है और सुबह के 7:00 बजे से दोपहर के 12:00 बजे के तक हीं यहां से आगे की ट्रैकिंग के लिए रास्ता खुला होता है। 12:00 बजे के बाद घंगारिया से फ्लावर वैली के लिए आपको ट्रैकिंग करने नहीं दिया जाएगा। इसीलिए आपको घंगारिया पहुंचकर उस दिन वहीं रुकना होगा। घांगरिया में आपको बहुत सारे होटल और टेंट्स भी रहने के लिए मिल जाएंगे। घांगरिया से आप अगले दिन सुबह 7:00 बजे के बाद फ्लावर वैली के लिए निकल सकते हैं। पुलना से घांगरिया का रास्ता जितना खूबसूरत है, घांगरिया से फ्लावर वैली का रास्ता उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत हो जाता है। जब आप घांगरिया से निकलेंगे तो आपको बहुत ही जल्दी ग्लेशियर दिखने शुरू हो जाएंगे। जैसे-जैसे आप फूलों की घाटी की ओर बढ़ेंगे, आपको रास्ते में कई सारे झरने और देवदार के पेड़ देखने को मिलेंगे। देवदार पहाड़ी इलाकों में मिलने वाला एक ऐसा पेड़ है जिसके छाल से पुराने जमाने में भोजपत्र बनाए जाते थे। इस फ्लॉवर वैली में खास क्या है? (What’s special in this valley of flower?) बेस्ट टाइम टू विजिट (Best time to visit) वैसे तो यहां बहुत सारे विजिटर्स घूमने आते रहते हैं। लेकिन अगर आप शांति से यहां घूमना चाहते हैं तो आप ऐसे समय का चयन करें जब बद्रीनाथ के लिए ट्रैकिंग बंद रहती है। क्योंकि यहां आने वाले अधिकतर विजिटर्स बद्रीनाथ के पर्यटक हीं होते हैं। ऐसे में जब बद्रीनाथ की ट्रैकिंग बंद हो जाती है तो यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या भी कम जाती है।

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Delhi-NCR में रहने वाले लोगों के हैंगआउट के लिए बेहतरीन डेस्टिनेशन है फरीदाबाद

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अगर आप दिल्ली एनसीआर में रह रहे हैं और अपने वीकेंड पर  किसी ऐसे विजिटिंग प्लेस को एक्सप्लोर करना चाहते हैं जहां आपको हिल स्टेशन वाली वाइब आ जाए और वह जगह दिल्ली एनसीआर से नजदीक भी हो तो फरीदाबाद आपके लिए सबसे बेस्ट विजिटिंग ऑप्शन हो सकता है। क्योंकि यह शहर दिल्ली एनसीआर (Delhi NCR) का हिस्सा है और एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।अगर आप भी फरीदाबाद जाना चाहते हैं तो फरीदाबाद में घूमने लायक जगह के बारे में जानना आपके लिए बहुत ही जरूरी है। इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि फरीदाबाद की कौन सी ऐसी जगहें हैं जहां आप अपने पिकनिक के लिए या फिर वीकेंड (weekend) के लिए जा सकते हैं। फरीदाबाद के बारे में अगर बात की जाए तो यह एक इंडस्ट्रियल एरिया (Industrial Area) है और बीते कुछ सालों में एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में भी उभर रहा है। अब तो इस शहर को मिनी हिल स्टेशन भी कहा जाने लगा है। फरीदाबाद के मुख्य पर्यटन स्थलों की सूची निमनांकित हैं : 1. राजा नाहर सिंह पैलेस (Naharsingh’s palace) इस पैलेस को फरीदाबाद आने वाले पर्यटकों का सेंटर ऑफ़ अट्रैक्शन भी कह सकते हैं। इस पैलेस को बल्लभगढ़ पैलेस (Ballabhgarh Palace) के नाम से भी जाना जाता है। यह पैलेस बहुत हीं विशाल तथा खूबसूरत है। इस पैलेस का निर्माण राजा नाहर सिंह के पूर्वज राजा राम बलराम जी ने करवाया था। राजा नाहर सिंह एक शक्तिशाली योद्धा थे जिन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी जान दे दी थी। इस महल में कार्तिक संस्कृति उत्सव का आयोजन किया जाता है। जिसे देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक यहां आते हैं। इस कार्यक्रम में बहुत तरह के संगीत और कलाकृतियों का प्रदर्शन किया जाता है। यह महल इतना खूबसूरत है कि यहां कई सारे फिल्मों और गानों की शूटिंग भी हुई है। 2. इस्कॉन टेंपल फरीदाबाद (Isckon temple faridabad) फरीदाबाद के सेक्टर 36 में स्थित इस्कॉन मंदिर (iskcon temple) कृष्ण भक्तों के लिए आस्था का एक पवित्र केंद्र है। जहाँ दूर दूर से पर्यटक पूजा करने के लिए आते हैं। इस मंदिर को गोविंद मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर बाहर से देखने में जितना खूबसूरत है, अंदर से इसका माहौल उतना ही शांत सुकून देने वाला है। यह मंदिर फरीदाबाद मेन सिटी से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भगवान श्री कृष्ण और राधा को समर्पित यह प्रसिद्ध मंदिर हर समय श्रद्धालुओं की भीड़ से भरा हुआ होता है। अगर आप भी फरीदाबाद आ रहे हैं तो इस्कॉन टेंपल फरीदाबाद को विजिट करना ना भूलें। 3. सूरजकुंड (Surajkund)दसवीं शताब्दी में बने इस सूरजकुंड का निर्माण तोमर वंश के राजा सूरजपाल द्वारा करवाया गया था। यह फरीदाबाद से केवल 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक शानदार जगह है। जहां आप पिकनिक मनाने के लिए जा सकते हैं। यहां सामान्य दिनों में बहुत ही शांति होती है। आप सूरजकुंड आकर यहां से कुछ ही दूरी पर स्थित सूर्य मंदिर के भी दर्शन कर सकते हैं। यूं तो सामान्य दिनों में सूरजकुंड बहुत ही शांत होता है, लेकिन मेले के समय यहां लोगों की चहल कदमी बढ़ जाती है। यहां लगने वाले इंटरनेशनल आर्ट एंड क्राफ्ट मेला (International Art and Craft Fair) की वजह से सूरजकुंड को पूरी दुनिया में जाना जाने लगा है। हर साल यहां इस मेले में अलग-अलग देशों से आने वाले लोग अपनी कलाकृतियों को दुनिया के सामने पेश करते हैं। अगर आप सूरजकुंड जाना चाहते हैं तो इसका सबसे सही समय इंटरनेशनल आर्ट एंड क्राफ्ट मेले का समय होता है। क्योंकि इस समय यहां पर्यटकों को अलग-अलग देशों के संस्कृतियों को जानने का मौका मिलता है और उनके आर्ट एंड क्राफ्ट्स को खरीदने का अवसर मिलता है। साथ ही साथ इस मेले में पर्यटकों को अलग-अलग देशों के पकवानों का जायका लेने का भी अवसर प्राप्त होता है। 4. टाउन पार्क (Town park) फरीदाबाद के सबसे फेमस पार्क के तौर पर जाना जाने वाला यह पार्क फरीदाबाद के सेक्टर 12 में स्थित है। यह पार्क बहुत हीं बड़ा और सुंदर भी है। यहां बच्चों और बड़ों सभी के लिए मनोरंजन के बहुत सारे साधन उपलब्ध हैं। इस पार्क में बहुत सारे झूले लगे हुए हैं, जहां फ्री और पेड दोनों तरह की राइड्स (Free Pads and Rides) का मजा लिया जा सकता है। इस पार्क की सबसे खास बात यह है कि इस पार्क में एक फ्लोरल क्लॉक बनी हुई है। जिसे फूलों से बनाया गया है और जो यहाँ की शोभा में चार चांद लगाने का काम करती है। अगर आप फरीदाबाद आ रहे हैं तो आप इस जगह को अपने विजिटिंग प्लेस की लिस्ट में डेफिनेटली ऐड करें।

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मन को मोह लेते हैं मोक्ष नगरी बनारस के ये खूबसूरत घाट

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1. गंगा घाट (Ganga Ghaat)अब क्योंकि यह शहर नदी के किनारे बसा हुआ है इसलिए यहां 80 से भी अधिक घाट हैं और इसे घाटों का शहर भी कहते हैं।अगर बात करें यहां के प्रमुख घाटों की तो उनमें दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, मणिकर्णिका घाट, पंच गंगा घाट आदि प्रमुख हैं। (i) मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat)मणिकर्णिका घाट को शमशान स्थल के रूप में भी जाना जाता है। जहां हर साल रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन चिता के भस्म से होली खेली जाती है, जिसे मसान होली या भस्म होली के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है की महादेव स्वयं अपने गणों के साथ उस दिन होली खेलते हैं। (ii) दशाश्वमेध घाट (Dashashwamedh Ghat)यहां का दशाश्वमेध घाट बनारस की सबसे प्रसिद्ध घाटों में से एक है। मान्यता है कि आदि काल में ब्रह्मा जी ने यहां 10 अश्वमेध यज्ञ करवाया था। जिसके कारण इसे दशाश्वमेध घाट के नाम से जाना जाने लगा। इसे बनारस के सबसे पुराने घाट के रूप में भी जाना जाता है। (iii) अस्सी घाट (Assi Ghat)अस्सी घाट बनारस का दक्षिणतम घाट है जो आगंतुकों और विदेशी पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होता है। यह बनारस के सबसे खूबसूरत घाटों में से एक माना जाता है। 2. गंगा आरती (Ganga Aarti)गंगा घाट की बात हो और गंगा आरती का जिक्र ना हो भला ऐसा हो सकता है?जब यहां के घाटों पर संध्या के समय गंगा आरती होती है तब, चारों ओर हो रहे शंखनाद, गंगा की कलकल बहती धारा, ठंडी हवा के झोंके और मंत्र उच्चारण की मधुर ध्वनि वातावरण में एक अलग ही प्रकार की सकारात्मकता का प्रसार करती है। जिसके कारण यहां आने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा होती है, और कई खास मौकों पर तो यहां पैर रखने का भी जगह नहीं होता है।यहां के घाट नदियां और यहां के प्राचीन मंदिर, प्रकृति और संस्कृति के एक अद्भुत समन्वय को दर्शाती है। यही वजह है कि बनारस सिर्फ घाटों ही नहीं बल्कि अपने गंगा आरती के लिए भी सुप्रसिद्ध है। काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple)भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग भी बनारस में ही स्थित है। जिसे काशी विश्वनाथ के नाम से भी जाना जाता है।काशी विश्वनाथ दशाश्वमेघ घाट के निकट स्थित है और श्रद्धालु दशाश्वमेध घाट के पानी में डुबकी लगाकर महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर जाया करते हैं। कुछ समय पहले तक घाट और मंदिर के बीच में भवनों के बन जाने के कारण घाट से मंदिर जाना कठिन होता था। लेकिन हाल ही में यहां गंगा कॉरिडोर के निर्माण हो जाने के बाद गंगा नदी से मंदिर पूरी तरह जुड़ गया है।मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ वास किया था। इस मंदिर का इतिहास भी काफी चर्चा और विवाद का विषय रहा है क्योंकि इसे बार-बार तोड़ा और बनाया गया। वर्तमान के मंदिर को रानी अहिल्याबाई ने मंदिर के बचे अवशेषों के साथ 1770 ईस्वी में बनवाया था। जिसके बाद 1835 में राजा रंजीत सिंह ने इसके गुंबद को सोने से मंडवा दिया था जो इस मंदिर को और भी आकर्षक बनाता है। 3. रामनगर का किला (Ramnagar Fort)घाटों और मंदिरों के अतिरिक्त यहां एक बेहद खूबसूरत 18वीं शताब्दी का रामनगर का किला भी है, जिसकी शिल्प कला मुगल शिल्प का बेहतरीन उदाहरण पेश करती है। 4. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (Banaras Hindu University)बनारस सिर्फ संस्कृति के क्षेत्र में आगे नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के क्षेत्र में भी बहुत आगे है और इसका जीता जागता उदाहरण है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय जिसे काशी हिंदू विश्वविद्यालय के नाम से भी जाना जाता है। इस की स्थापना स्वतंत्रता पूर्व ही हुई थी। जिसकी नींव पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा रखी गई थी। इसके स्थापना में एनी बेसेंट का भी बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान रहा। आज बनारस हिंदू विश्वविद्यालय भारत के सबसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में से एक है। इस विश्वविद्यालय को “राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान” का दर्जा प्राप्त है। इस विश्वविद्यालय के दो परिसर हैं, जिनमें मुख्य परिसर वाराणसी में स्थित है। इसके परिसर में हाल ही में एक नए काशी विश्वनाथ मंदिर की स्थापना की गई है। जो लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। 75 छात्रावासों के साथ यह विश्वविद्यालय एशिया का सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय है। 5. बनारस का खान पान (food of banaras)बनारस के खानपान भी बाकी शहरों से काफी अलग हैं। यहां के बनारसी पान और मलइयो की तो बात ही अलग है। यहां के सबसे प्रसिद्ध व्यंजन में से एक है टमाटर चाट, जो आपको बनारस की गलियों में कहीं भी मिल जाएगा। चाट का खट्टा मीठा और तीखा स्वाद आपको उंगलियां चाटने पर मजबूर हो जाएंगे। बनारस आने का सबसे सही समय (Best time to visit Banaras)यूं तो आप बनारस कभी भी जा सकते हैं यह शहर हर समय हर मौसम में आने वाले पर्यटकों का भी खोलकर स्वागत करता है लेकिन महाशिवरात्रि और देव दीपावली के अवसर पर यहां जाना आपके लिए सबसे वर्थईट साबित होगा।अगर बात महाशिवरात्रि की हो तो इस दिन भारत के कोने कोने से महादेव के भक्त बनारस आकर काशी विश्वनाथ के दर्शन और गंगा स्नान करते हैं। यूं तो बनारस की गलियों में गंगा आरती को लेकर हर दिन ही भीड़ होती है, लेकिन महाशिवरात्रि एक ऐसा दिन है जिस दिन यहां अन्य दिनों के मुकाबले कई गुनी हो जाती है। पुराणों के अनुसार इस नगरी का महादेव के साथ विशेष संबंध रहा है। इसलिए शिव भक्तों के लिए यह शहर किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं है। इस दिन भी विवाह उत्सव से पहले बाबा विश्वनाथ को हल्दी लगाई जाती है और मंगल गीत गाए जाते हैं। शाम के समय भगवान शिव को हल्दी लगाते देखने के लिए श्रद्धालुओं में बेहद उत्साह होता है। इसके बाद शिव की बारात निकलती है। बनारस में देव दिवाली(Dev Diwali in Banaras)अगर यहां के देव दीपावली की बात की जाए तो यहां गंगा किनारे घाटों पर जलाए जाने वाले दियों और घाटों पर चलने वाले लेजर शो बनारस की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। देव दीपावली दीपावली के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। आस्था के पर्व के

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आईए जानते हैं देश के योग कैपिटल ऋषिकेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के बारे में

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ऋषिकेश भारत का एक ऐसा शहर है जहां के कण-कण में अध्यात्म बसता है। ऋषिकेश की पावन धरती पर आते हीं आपको ऐसा एहसास होगा की इससे ज्यादा सुकून तो कहीं और हो ही नहीं सकता है। पहाड़ियों की गोद में बसा हुआ यह शहर, अपने शांत और खूबसूरत माहौल के लिए जाना जाता है। यहां आपको हर ओर सिर्फ पॉजिटिविटी हीं नजर आएगी और यहाँ आने के बाद आपका स्ट्रेस तुरंत छूमंतर हो जाएगा।आज के इस ब्लॉग में हम आपको इसी शहर के बारे में बताने वाले हैं। तो आईए जानते हैं इस शहर के बारे में:- भारत के योगा कैपिटल के नाम से मशहूर इस शहर में घूमने लायक बहुत सी ऐसी जगहें हैं जहां जाने के बाद आपको वापस लौटने का बिल्कुल मन भी नहीं होगा। ऐसे हीं कुछ दूर प्लेसेस के नाम नीचे दिए गए हैं। 1. शिव प्रतिमा (Statue of Shiva)2. नीलकंठ महादेव मन्दिर (Neelkanth Mahadev temple)3. नीलगढ़ वाटरफॉल्स (Neelgarh waterfalls)4. बीटल्स आश्रम (Beatles Ashram)5. त्रंबकेश्वर मंदिर (Triyambkeshwara temple)6. भरत मंदिर (Bharat mandir)7. त्रिवेणी घाट की आरती (Ganga aarti of Triveni ghaat)8. ऋषिकुंड (Rishi kund)9. लक्ष्मण झूला (laxman jhoola) शिव प्रतिमा (Statue of Shiva)ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में भगवान शिव की बहुत बड़ी प्रतिमा है। जहाँ भगवान शिव ध्यान की मुद्रा में बैठे हुए हैं और इस मूर्ति की खास बात यह है कि यह मूर्ति गंगा नदी में बनी हुई है। जिसके कारण यह और भी अनोखी प्रतीत होती है। बहती गंगा के धारा के बीच में स्थित विशालकाय शिव की प्रतिमा को देखकर आने वाले पर्यटकों का भी मन योगा की और आकर्षित हो जाता है। परमार्थ निकेतन आश्रम से जब आप इस मूर्ति को देखेंगे तो आपको बहुत हीं अलौकिक और अद्भुत एहसास होगा। परमार्थ निकेतन का यह भाग बहुत ही खूबसूरत और मनमोहक है। जब आप परमार्थ निकेतन में प्रवेश करेंगे तो आपका मन खुद-ब-खुद शांत हो जाएगा और आपके अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। आश्रम जितना शान्त है उतना ही ज्यादा खूबसूरत भी है। इसीलिए दूर दूर से पर्यटक इस स्थान पर घूमने के लिए आते हैं। नीलकंठ महादेव मन्दिर (Neelkanth Mahadev temple)ऋषिकेश के नजदीक स्थित चित्रकूट पर्वत पर बना यह मंदिर हजारों साल पुराना है। पुरानी कथाओं के अनुसार ऋषिकेश के इसी स्थान पर महादेव ने समुंद्र मंथन से निकले हलाहल को पिया था और उनका शरीर नीला हो गया था। यही कारण है कि इस मंदिर को नीलकंठ महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर से जुड़ी सबसे खास बात यह है कि यह मन्दिर तीन पर्वतों से घिरा हुआ है। जिनका नाम है- मनिकुट, विष्णुकुट और ब्रह्मकुट। इस मंदिर का आर्किटेक्चर बहुत हीं कलरफुल है। जब आप इस मंदिर में एंटर करेंगे तो आपको सबसे पहले समुंद्र मंथन का दृश्य दिखेगा। जिसमें नागराज वासुकी को रस्सी बनाकर देवता और दानव समुंद्र का मंथन कर रहे होते हैं। ऋषिकेश से नीलकंठ महादेव मंदिर कि दूरी लगभग 32 किलोमीटर है। अगर आप नीलकंठ महादेव मंदिर जाना चाहते हैं तो कोशिश करें कि आप 6:00 बजे तक इस मंदिर में पहुंच जाएं। ताकि आप यहां सुबह की आरती में हिस्सा ले सके। नीलगढ़ वाटरफॉल (Neelgarh waterfall) तीन वॉटर फॉल्स को मिलाकर बना हुआ यह वाटरफॉल ऋषिकेश के सीक्रेट वाटरफॉल के नाम से भी जाना जाता है। यह वाटरफॉल इतना खूबसूरत है कि इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। जंगलों से घिरे हुए इस वाटरफॉल की खास बात यह है कि यहां का पानी इतना क्लीयर है कि आप वाटरफॉल के नीचे की जमीन को भी साफ साफ देख सकते हैं। अगर आप ऋषिकेश घूमने आ रहे हैं तो इस वाटरफॉल को विजिट करना बिल्कुल ना भूलें।यहाँ पहुँचने के लिए 1-1.5 किलोमीटर की ट्रैकिंग भी करनी पड़ती है। लेकिन आपका यह सफर बहुत हीं खूबसूरत होने वाला है। साथ ही रास्ते में आपको दो ब्रिज क्रॉस करने होंगे। झांसी दिखने वाला नजारा इतना खूबसूरत होता है कि आप एक पल को सब कुछ भूल कर खुशी पल में हो जाएंगे। इस वॉटर फॉल तक पहुंचने के लिए आपको ऋषिकेश बस स्टैंड से 8.5 किलोमीटर का सफ़र करना पड़ेगा। आप इसके लिए कोई प्राइवेट टैक्सी में बुक कर सकते हैं। अगर आप यहाँ के वॉटर फॉल में जाना चाहते हैं तो यहां जाने का सबसे बेहतरीन समय मॉनसून की ठीक बाद सितंबर या अक्टूबर का होता है। क्योंकि इस समय वाटरफॉल में पानी ज्यादा होता है और आसपास का माहौल भी बहुत हीं खूबसूरत होता है। वहाँ जाने के लिए आप अपने साथ कुछ स्नैक्स, पानी की बॉटल और अपने साथ एक कपड़ा ले जा सकते हैं। ताकि आप इस विज़िट को बहुत अच्छे से एंजॉय कर सके। बीटल्स आश्रम (Beatles Aashram)बीटल्स आश्रम को चौरासी कुटिया के नाम से भी जाना जाता है। यह आश्रम महा ऋषि महेश योगी के विद्यार्थियों के लिए ट्रेनिंग सेंटर था। इस आश्रम को पहचान तब मिली जब रॉकबैंड द बीटल्स यहां पर मेडिटेशन करने के लिए आए थे। बैंड के लोगों का कहना था कि जो समय उन्होंने यहाँ बिताया वह उनकी लाइफ का सबसे बेस्ट टाइम था और यही पर उन्होंने अपने बहुत से फेमस गाने लिखे। बीटल्स आश्रम 1990 में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के हवाले कर दिया गया था। 2015 में इस आश्रम को पर्यटकों के लिए खोला गया। बिट्स आश्रम में जाने की टाइमिंग सुबह के 10:00 बजे से शाम के 4:00 बजे तक की है। यहां जाने के लिए पर्यटकों को किसी भी प्रकार का टिकट नहीं लेना पड़ता है। यह बिल्कुल फ्री ऑफ कॉस्ट है। त्रंबकेश्वर मंदिर ऋषिकेश (Triyambkeshwara Temple Rishikesh)त्रंबकेश्वर मंदिर को तेरह मंजिला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के हर एक फ्लोर पर अलग-अलग देवी देवताओं की पूजा की जाती हैं। यह मंदिर लक्ष्मण झूला के बहुत नजदीक है। जहां से आप लक्ष्मण झूला का व्यू देख सकते हैं। साथ हीं इस मंदिर से दिखने वाला गंगा जी का दृश्य बहुत खूबसूरत होता है। यहाँ का वातावरण बहुत शांत है और दिल को सुकून देने वाला है। कुछ किंवदंतियों के अनुसार इस मंदिर को शंकराचार्य द्वारा 8 शताब्दी के आसपास बनवाया था। इस मंदिर के सबसे ऊपर के फ्लोर पर भगवान महादेव की शिवलिंग स्थापित है। इस मंदिर से दिखने

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Delhi-NCR के ऐसे प्रमुख कृष्ण मंदिर जहाँ आप दर्शन करने जा सकते हैं

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दिल्ली जैसे शहरों में रहते हुए अगर वर्कलोड और स्ट्रेस को कम करना हो और अपने लाइफ में पॉजिटिविटी लानी हो तो इसका इकलौता शॉर्टकट है मंदिर जाकर कुछ देर के लिए भगवान की आस्था में तल्लीन हो जाना। अगर आप दिल्ली से हैं तो आज का यह ब्लॉग आपके लिए ही है।आज के इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे दिल्ली के कुछ प्रमुख कृष्ण मंदिरों के बारे में :- इस्कॉन टेंपल दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर के रूप में जाना जाता है। यह मंदिर बहुत हीं बड़ा और भव्य है। इसकी खूबसूरती और प्रसिद्धि का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इस मंदिर में दर्शन करने के लिए देश के कोने कोने से श्रद्धालुओं की भीड़ इकट्ठा होती है। इस मंदिर में हर शाम श्री कृष्ण के नाम का कीर्तन होता है। जिसमें आने वाले सभी भक्तजन शामिल हो सकते हैं। यह मंदिर नेहरू प्लेस मेट्रो स्टेशन के नजदीक ही स्थित है और सुबह के 6:00 से रात के 9:00 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर को बिरला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह दिल्ली एनसीआर में मौजूद एक फेमस मंदिर है जो कृष्ण भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस मंदिर की भव्यता और लुभावने सजावट देख कर आपका मन करेगा कि आप भी वहीं ठहर जाएं। खास कर जन्माष्टमी के मौके पर इस मंदिर को बहुत हीं बेहतरीन तरीके से सजाया जाता है। यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच बहुत हीं फेमस है और ध्यान करने वाले लोगों को यह काफी पसंद आता है। इस मंदिर के खुलने की टाइमिंग सुबह के 4:30 से दोपहर के 1:00 तक है और दोपहर के 2:30 बजे से रात के 9:00 तक की है। गीता गायत्री धाम मंदिर भगवान श्री कृष्णा और वेद माता गायत्री को समर्पित मंदिर है। इस मंदिर में आपको सभी देवी देवताओं की मूर्तियों के दर्शन एक ही बार में हो जाएंगे। इस मंदिर को सत्यम शिवम सुंदरम सोसायटी के द्वारा बनवाया गया है और यह मंदिर गुरुग्राम सिटी में स्थित है। इस मंदिर का माहौल बहुत हीं अच्छा और शांत है। यहां आकर आपको अपने आप में एक अलग तरह की पॉजिटिविटी का एहसास होगा। इस मंदिर के खुलने की टाइमिंग सुबह के 5:00 से रात के 9:00 तक की होती है। आप इस समय अंतराल के भीतर कभी भी मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं। ईस्ट दिल्ली के सबसे बेहतरीन कृष्ण मंदिरों के सूची में श्री राधा कृष्ण मंदिर का भी नाम गिना जाता है। इस मंदिर को भी जन्माष्टमी के समय में बहुत हीं बेहतरीन तरीके से सजाया जाता है। बाकी के सामान्य दिनों में भी यह मंदिर काफी खूबसूरत दिखता है। इस मंदिर में आकर आपको अलग ही तरह के शांति की अनुभूति होगी।यह मंदिर सुबह के 5:00 बजे से शाम के 9:00 तक खुला रहता है। आप जब भी चाहे यहां आ सकते हैं।

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भारत के ऐसे गांव जिनके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे

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भारत विविधताओं(Diversity) का देश है। इसके हर भाग में अलग-अलग तरह की संस्कृतियों(cultural) और रहन-सहन वाले लोग निवास करते हैं। ऐसे में भारत के कुछ गांव ऐसे भी हैं जिनके बारे में जानकर आपको बहुत ही हैरानी होगी। भारत के उन प्रसिद्ध गांव(famous village) के बारे में जो किसी न किसी दृष्टि(Vision) से खास माने जाते हैं। माणा गांव को भारत का सबसे पहला गांव माना जाता है। ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि यह गांव सबसे पहले बसा था। बल्कि ऐसा इसलिए है क्योंकि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 में माणा गांव का दौरा किया था। जिस दौरान उन्होंने कहा कि इस गांव को भारत का प्रथम गांव माना जाना चाहिए। और सिर्फ इसी गांव को नहीं, बल्कि भारत के सीमा से जुड़े सभी गांव को भारत का प्रथम गांव माना जाना चाहिए। उसी दिन के बाद से इस गांव को भारत का पहला गांव कहकर बुलाया जाने लगा। 2.लोंगवा विलेज नागालैंड(Longwa Village Nagaland) नागालैंड के मौन जिले में स्थित यह लोंगवा गांव अपने आप में ही बहुत अचंभित (astonished) करने वाला गांव है जहां आज के समय में एक देश से दूसरे देश जाने के लिए लोगों को वीजा और पासपोर्ट (Visa and Passport) और भी न जाने कई तरह के कागजातों की जरूरत पड़ती है। वहीं नागालैंड का यह लोंगवा गांव दो देशों की सीमा पर बसा हुआ है।भारत और म्यांमार का अंतरराष्ट्रीय सीमा(International border of India and Myanmar) इस गांव को दो टुकड़ों में विभाजित कर देती है। लेकिन इससे भी ज्यादा हैरानी करने वाली बात यह है कि इस गांव में किसी के घर के बीच से अंतरराष्ट्रीय सीमा गुजरती है। जी हां आपने सही पढ़ा इस गांव में किसी का बेडरूम भारत में है और किचन म्यांमार में। जहां लोग एक कदम आगे बढ़ते हीं भारत के हो जाते हैं और वहीं अगले हीं पल अपने कदम पीछे कर फिर से म्यांमार चले जाते हैं। इस गांव के लोगों के पास भारत और म्यांमार दोनों देश की नागरिकता(citizenship of both countries) है। इस गांव में घूमने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। यह गांव सिर्फ इसलिए हीं मशहूर(famous) नहीं है, बल्कि इस गांव की प्रकृति खुबसूरती(nature beauty) भी बहुत ही बेहतरीन है। यहां के लोग बहुत हीं सदा जीवन जीने वाले लोग हैं और वे लोग एक साथ मिलजुल कर रहते है। 3.मधापुर गांव गुजरात(Madhapar Village Gujarat) जब भी हम गांव की परिकल्पना करते हैं या गांव के बारे में सोचते हैं तो हमें छोटे-छोटे मकान झुग्गियाँ और खेत खलिहान (huts and farm barns) नजर आते हैं। यह सब देखने के बाद ऐसा लगता है कि गांवों में कितनी गरीबी (poverty) है। लेकिन आज मैं आपको बताने जा रही हूं एक ऐसे गांव के बारे में जहां धन और दौलत (money and wealth) के मामले में बड़े शहरों के निवासियों (residents of cities) से भी ज्यादा अमीर लोग रहते हैं। यह भारत का सबसे अमीर गांव है। गुजरात के मधापुर गांव में 7600 घर है और इस गांव की आबादी (population) 92000 के आसपास है। अब आप सोचेंगे कि ऐसा क्या है इस गांव में जो इसे भारत के दूसरे गांव से अलग बनाती है। क्या है वह वजह जिसके कारण इस गांव में चारों ओर अमीरी ही अमीरी दिखती है।दरअसल यह है कि इस गांव के अधिकतर लोग विदेश में रहते हैं। यहां के लोग मुख्यतः कनाडा यूएई जैसे जगहों पर रहते हैं। इस गांव के कुछ लोग तो करोड़पति हैं। ऐसे में इस गांव में चारों तरफ रौनक दिखना तो लाज़िमी (mandatory) है।

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ट्रैकिंग और कैंपिंग के लिए बेहतरीन बेहतरीन डेस्टिनेशन है माल देवता

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कहते हैं किसी हिल स्टेशन पर जाना तब तक वर्थ ईट नहीं होता है जब तक कि आप वहां जाकर ट्रैकिंग, कैंपिंग और बोनफायर का मजा ना ले। खासकर ट्रैवलिंग को पसंद करने वाले लोगों के लिए तो यह मस्ट नीडेड है। और ऐसा हो भी क्यों ना, यह सारे एक्टिविटीज ऐसे हैं जो आपके ट्रैवलिंग के एक्सपीरियंस को कई गुना बेहतर बना देते हैं। ट्रैवलिंग के दौरान की गई इन एक्टिविटीज की यादें जिंदगी भर कभी ना भूली जा सकने वाली यादों के रूप में आपके साथ रहती हैं। अगर आप भी ट्रैवलिंग के शौकीन हैं और अपने ट्रैवल ट्रिप पर ट्रैकिंग और कैंपिंग जैसी एक्टिविटीज करना चाहते हैं तो भीड़भाड़ और शोर-शराबे से दूर स्थित शहर ‘मालदेवता’ में आपका स्वागत है। प्रकृत‍ि की गोद में चारो तरफ पहाड़ियों और हरियाली से सजा-धजा ‘मालदेवता’ आजकल टूरिस्ट्स के लिए फेवरेट डेस्टिनेशन (Favourite destination) बनता जा रहा है। वजह है इसकी खूबसूरती और यहाँ बहती नदी और झरनों का गीत संगीत। यहां पर्वतों से गिरने वाले छोटे-छोटे झरनों का संगीत विजिटर्स का ध्‍यान अपनी ओर खींच ही लेते हैं। यही वजह है कि बीते कुछ सालों में यह देहरादून का सबसे डिमांड वाला डेस्टिनेशन है। मालदेवता में आप क्या-क्या कर सकते हैं? (Things to do in Maldevta) यहां की खूबसूरत वादियों को देखकर आपका भी मन कैंपिंग करने को कहेगा, तो आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं। यहां आसानी से आपको रेंट पर कैंप मिल जाएंगे। लोग यहां रेस्‍टोरेंट में जाने से ज्‍यादा खुद चूल्‍हा बनाकर या पेट्रोमैक्‍स में खाना बनाना पसंद करते हैं। इसके अलावा आप यहाँ ट्रैकिंग कर सकते हैं , ट्रैकिंग के लिए अगर आप अकेले हैं और आपको रास्‍ता समझ न आ रहा हो तो आपको यहाँ गाइड (Tour guide) भी मिल जाएंगे जो आपके ट्रैकिंग (trekking) के इस शौक को पूरा करने में मदद करेंगे। यहां आप कैंपिंग (Camping) कर सकते हैं। पिकनिक (Best Picnic spot) के लिए यह बेहतर आप्‍शन है। इसके अलावा ट्रैकिंग और पैराग्‍लाडिंग भी कर सकते हैं। यहां कई रेस्‍टोरेंट और होटल भी हैं। जहां बेहतरीन खाने के साथ कुछ दिन प्रकृति के बीच में रुक भी सकते हैं।वैसे अधिकतर यहाँ वीकेंड (weekend rush) पर ज्यादा भीड़ दिखाई देती है। क्योंकि वीकेंड पर यहाँ देहरादून के लोकल लोग भी पिकनिक मनाने आ जाते हैं। चाहे वह किसी भी ऐज ग्रुप के क्यों न हो। मलदेवता ही क्यों? (Why Maldevta?) मालदेवता आने का सबसे सही समय ( Best time to visit Maldevta) वैसे यहाँ आने का सबसे बेहतर समय सर्दियों का ही माना जाता है या फिर आप अगर नदी के एडवेंचर (Adventure) का मजा लेना चाहते हैं तो जुलाई अगस्त में भी आ सकते है उस समय यहाँ आपको चारो और हरियाली ही हरियाली (Greenery) दिखाई देगी। कैसे पहुंचे? (How to reach Maldevta?)मालदेवता देहरादून से सिर्फ 17-18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां जाने के लिए आप देहरादून सिटी बस या फिर लोकल ट्रैवल (Local travel options) में ऑटो, स्‍मॉल कैब्‍स ले सकते हैं। अगर आप अपनी कार से यहाँ आते हैं तो इससे बेहतर तो क्या ही कुछ होगा। क्योंकि यहाँ का सफर ही यहाँ का पैसा वसूल है। मालदेवता में कहां ठहरे? (Where to stay in Maldevta) मालदेवता में ठहरने के लिए आपको हर तरह के होटल (Hotel) और होमस्टे (Home stay) मिल जाएंगे। आप अपने बजट (Accourding to your Budget) के हिसाब से यहां होटल या फिर होम स्टे ले सकते हैं। इसके अलावा आप माल देवता में कैंपिंग भी कर सकते हैं। यहां आपको आसानी से कैंपिंग टेंट रेंट (Camping tent is also avilable on rent) पर मिल जाएंगे।

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नाईट आउट के लिए बेस्ट हैं दिल्ली के ये थीम कल्चर रेस्टोरेंट्स

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आज के समय में दिल्ली में रेस्टोरेंट कल्चर (Restaurant culture) काफी फल फूल रहा है। ऐसे में सभी रेस्टोरेंट्स अपने इंटीरियर को कस्टमर (Customer) के मुताबिक अट्रैक्टिव और फैशनेबल (Attractive and fashionable) बनाने की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। कस्टमर्स को लुभाने के लिए आजकल थीम रेस्टोरेंट का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। ऐसे में दिल्ली एनसीआर में भी कई रेस्टोरेंट ऐसे हैं जिनके थीम लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। आईए जानते हैं दिल्ली एनसीआर के कुछ ऐसे थीम रेस्टोरेंट्स (Theme Restaurant) के बारे में जिनका थीम आपको काफी पसंद आयेगा। 1. फूड बस ऑफ इंडिया (Food Bus of India) फूड बस ऑफ इंडिया के नाम से मशहूर यह रेस्टोरेंट डबल डेकर बस के थीम पर बना हुआ है। यह एक मूविंग रेस्टोरेंट है। आप सभी ने अपने लाइफ में कभी ना कभी तो बस से ट्रैवलिंग (traveling) जरूर की होगी। लेकिन अब आप बस में रेस्टोरेंट वाली फिलिंग्स (feelings) के साथ खाना भी खा सकते हैं। जी हां ऐसा संभव हुआ है फूड बस ऑफ इंडिया के वजह से, जिन्होंने डबल डेकर बस के थीम पर एक रेस्टोरेंट खोला है। यह रेस्टोरेंट दिल्ली के राजेंद्र प्लेस में स्थित है। इस रेस्टोरेंट में आपको हर तरह के स्वादिष्ट भोजन के ऑप्शन मिल जाएंगे। इस रेस्टोरेंट का मेनू बहुत ही वास्ट है। आप पिज्जा से लेकर हाइ टी तक हर तरह के फूड ऑप्शंस यहां देख सकते हैं।बच्चों को यह रेस्टोरेंट काफी पसंद आता है। अगर आप अपने बच्चों के साथ कहीं घूमने जा रहे हैं तो आप इस रेस्टोरेंट को जरुर विजिट कर सकते हैं। खासकर अगर आप राजेंद्र प्लेस के आसपास के हैं तब तो आपको यहां एक बार जरूर जाना चाहिए। अगर आप दिल्ली से नहीं हैं लेकिन दिल्ली आए हुए हैं तो आप भी इस रेस्टोरेंट को विजिट कर सकते हैं। 2. रेल रेस्टोरेंट (Rail Restaurant) यह एक ऐसा रेस्टोरेंट है जहाँ रेल से खाना सर्व किया जाता है। यह रेस्टोरेंट दिल्ली के पश्चिम विहार में स्थित हैं।इस रेस्टोरेंट का नाम ट्रेन रेस्टोरेंट है और इसकी खासियत यह है कि इस पूरे रेस्टोरेंट्स का थीम भारतीय रेलवे को समर्पित है। आपको यहां लखनऊ, प्रयागराज, मुंबई, कल्याण,अहमदाबाद, नई दिल्ली जैसे कई सारे रेलवे स्टेशन आपको रेस्टोरेंट में देखने को मिल जाएंगे।इस रेस्टोरेंट की एक और खास बात यह है कि यहां आपको टेबल चेंज (table change) करते ही आपका स्टेशन चेंज (station change) हो जाएगा। यह रेस्टोरेंट बच्चों को बच्चों को काफी आता है। फैमिली के साथ लंच या फिर डिनर के लिए यह रेस्टोरेंट्स एक अच्छा ऑप्शन (option) है। इस रेस्टोरेंट में इंटर (enter) करते हीं यहां के सजावट को देखकर आपका भी बचपन जाग उठेगा और बचपन के खिलौने वाली रेलगाड़ी की यादें ताजा हो जाएंगी। यहाँ टेबल तक रेलवे की पटररियां बिछीं हुई हैं। जिस पर से ट्रेन आकर आपका खाना सर्व करेगी। यह बिल्कुल ही यूनिक कांसेप्ट है। 3. रनवे 1 रेस्टोरेंट (Runway 1 Restaurant) रिठाला मेट्रो स्टेशन से कुछ ही दूरी पर स्थित है- एडवेंचर आइलैंड। जहां आप कई तरह के एडवेंचरस एक्टिविटीज कर सकते हैं। यूं तो दिल्ली में बहुत सारे एडवेंचर आइलैंड है लेकिन यह आइलैंड(island) बाकियों से थोड़ा अलग है क्योंकि इस आईलैंड पर आपको एक एयरप्लेन थीम रेस्टोरेंट देखने को मिलता है। जिसका नाम है रनवे 1 रेस्टोरेंट!इस रेस्टोरेंट में एंट्री के लिए आपको ₹200 फीस देना होगा। इसके बाद आपको एंट्री टिकट मिलेगी। एंट्री टिकट लेने के बाद आप प्लेन की ओर बढ़ जाएंगे। दूर से देखने पर यह बिल्कुल रियलिस्टिक प्लान (realistic plan) की तरह ही दिखता है। आपको ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगेगा कि यह प्लेन ना होकर एक रेस्टोरेंट है। यहां मिलने वाले सर्विसेज (services) भी बहुत हीं शानदार हैं। जब आप यहां एंट्री करेंगे तो यहां के सारे स्टाफ मेंबर्स आपको एयरप्लेन के केबिन क्रू मेंबर्स (cabin crew members) की तरह ही वेल ड्रेस्ड (well dressed) देखेंगे। इस रेस्टोरेंट का मेनू कार्ड भी काफी इंटरेस्टिंग है। आपके यहां कई तरह के डिशेज खाने को मिल जाएंगे। यहां फूड में काफी बेस्ट ऑप्शन (best option) देखने को मिलते हैं। आप अपने पसंद के अनुसार यहां फूड ऑर्डर कर सकते हैं। इस रेस्टोरेंट की डेकोरेशन और सर्विसेज भी बहुत अच्छी है। अगर बजट के हिसाब से देखे तो यह रेस्टोरेंट बाकी रेस्टोरेंट्स से थोड़ा ज्यादा महंगा पड़ता है, लेकिन अगर आप एडवेंचर के शौकीन हैं तो फिर बजट उतना ज्यादा मैटर नहीं करता है। इस रेस्टोरेंट की वजह से एडवेंचर आइलैंड पर काफी दूर-दूर से लोग विजिट करने आते हैं। रनवे 1 रेस्टोरेंट में लंच करने के बाद एडवेंचर आइलैंड पर अलग-अलग तरह की एडवेंचरस एक्टिविटीज भी कर सकते हैं। जो की काफी इंटरेस्टिंग (interesting) होते हैं।

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पर्यटकों को काफी आकर्षित करते हैं संगम नगरी के ये प्रमुख पर्यटन स्थल

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प्रयागराज का नाम सुनते ही हमारे मन में सबसे पहले जो ख्याल आता है वह है “कुंभ“प्रयागराज शहर को कुंभ नगरी के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि यहां सिर्फ कुंभ के समय में हीं आया जाता है। आप कभी भी प्रयागराज विज़िट कर सकते हैं। यह एक बहुत ही खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस और आस्था का बहुत ही बेहतरीन केंद्र माना जाता है। इस ब्लॉग में हम आपको प्रयागराज शहर के बेहतरीन जगहों के बारे में तो बताएंगे हीं साथ ही साथ हम आपको यह भी बताएंगे कि प्रयागराज कैसे पहुंचे? और प्रयागराज में कहां ठहरे? 1. त्रिवेणी संगम त्रिवेणी संगम वह स्थान है जहां गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है। इस जगह को देखने के लिए काफी लोग आते हैं। अगर आप भी त्रिवेणी संगम को देखना चाहते हैं तो उसके लिए आपको पहले नाव की सवारी करनी होगी और नाव के जरिए उस पवित्र जगह तक पहुंचना होगा जहां गंगा जमुना सरस्वती एक दूसरे में घुल मिल जाती हैं। जब आप नाव से त्रिवेणी संगम की ओर बढ़ेंगे तो चारों ओर कल कल बहती गंगा, शांत और प्रदूषण रहित वातावरण, आसमान में उड़ती चिड़ियाँ, आपको काफी अट्रैक्टिव लगेंगे। नेचर की खूबसूरती को एंजॉय करने के लिए इससे बेहतरीन कोई दूसरा ऑप्शन तो हो ही नहीं सकता है। अगर आप चाहे तो आकाश में उड़ रहे पंछियों को खाना खिला सकते हैं। इसके लिए आपको नदी के बीचो-बीच ही नमकीन के पैकेट बिकते हुए मिल जाएंगे जिसे खरीद कर आप पक्षियों को खाना खिला सकते हैं और यकीन मानिए जब आप वह नमकीन पक्षियों को खिलाएंगे तो वहां आसपास उमड़ी हुई पक्षियों के भीड़ को देखकर आपको भी ऐसा महसूस होगा जैसे आप खुद भी एक पंछी हो।अगर आप चाहे तो त्रिवेणी संगम पहुंचकर आप वहां गंगा जी में डुबकी भी लगा सकते हैं। हालांकि इसके लिए आपको यह भी ध्यान में रखना होगा कि आपके पास एक्स्ट्रा कपड़े रखे हो। 2. गंगा आरती (Ganga Aarti)अब गंगा की नगरी आओ और गंगा आरती ना देखो तो यह तो बहुत बड़ी नाइंसाफी वाली बात होगी। प्रयागराज जैसे शहर में जाकर गंगा आरती को देखना तो मस्ट विजिट हो जाता है। ऐसे में आप शाम के समय रामघाट का रुख कर सकते हैं। जहां हर रोज गंगा आरती होती है। यह गंगा आरती इतना सुकून देने वाली होती है कि आप अपने सारे तनाव को भूलकर एकदम से चार्ज्ड अप हो जाएंगे। पॉजिटिविटी तो यहां के फिजाओं में घुली रहती है। ऊपर से मंत्र उच्चारण के साथ-साथ शंखनाद की ध्वनि दिलो दिमाग पर इस तरह कब्जा कर लेती हैं कि आप कुछ पल के लिए बस उसी समय में ठहर कर रह जाना चाहेंगे। 3. श्री बड़े हनुमान जी मंदिर (Shri Bade Hanuman Ji Temple)इस मंदिर में हनुमान जी विश्राम की मुद्रा में लेटे हुए हैं। इसलिए इस मंदिर को बड़े हनुमान जी या फिर लेटे हनुमान जी मंदिर के नाम से जाना जाता है। वैसे तो यहां हर रोज हीं भीड़ देखने को मिलती है। लेकिन आप अगर मंगलवार या फिर शनिवार के दिन यहां घूमने आएंगे तो आपको बहुत ज्यादा भीड़ देखने को मिलेगी। यकीन मानिए इस मंदिर में आकर आपको इतनी पॉजिटिविटी मिलेगी कि आप एक पल को अपने लाइफ के सारे नेगेटिव प्वाइंट्स को भूल जाएंगे। 4. अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क (Amar Shaheed Chandrashekhar Azad Park)हमारे देश में कई सारे स्वतंत्रता सेनानी हुए जिन्होंने आजादी के लिए लड़ते हुए अपनी जान गवा दी। उन्हीं शहीद वीरों की सूची में एक नाम चंद्रशेखर आजाद का भी आता है। जिन्होंने अंग्रेजों से लड़ते हुए अपनी जान दे दी। बताया जाता है कि चंद्रशेखर आजाद इस पार्क में घूम रहे थे। जब किसी ने इसकी सूचना अंग्रेजों तक पहुंचा दी। अंग्रेजों ने उन्हें इस पार्क में चारों ओर से घेर लिया। चंद्रशेखर आजाद काफी देर तक अंग्रेजों के गोलीबारी का जवाब देते रहे। लेकिन जब उनके पास सिर्फ एक गोली बची तो उन्होंने वह गोली खुद को मार ली। क्योंकि वह अंग्रेजों के हाथों नहीं मरना चाहते थे। उस समय का अल्फ्रेड पार्क आज के समय में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क के नाम से जाना जाता है। अगर आप प्रयागराज आ रहे हैं तो आप इस पार्क को जरुर विजिट करें। यह पार्क आजादी के लिए दिए गए बलिदानों का एक बेहतरीन उदाहरण है। 5. आनंद भवन (Anand Bhawan)आनंद भवन के विजिट के लिए पहले आपको टिकट लेना पड़ेगा। जहां आपको दो तरह के टिकट ऑप्शन मिलेंगे। एक ₹30 के टिकट की और ₹100 के टिकट की। अगर आप सिर्फ ग्राउंड फ्लोर को घूमना चाहते हैं तो आपको ₹30 का टिकट लेना होगा। जबकि अगर आप ग्राउंड फ्लोर के साथ-साथ फर्स्ट फ्लोर को भी घूमना चाहते हैं तो आपको ₹100 की टिकट लेनी होगी।आनंद भवन की टाइमिंग सुबह 10:00 बजे से शाम के 5:30 बजे तक की होती है और दोपहर में 1 घंटे का लंच टाइम होता है। आनंद भवन को 1927 में बनाया गया था। यह नेहरू जी का अपना घर था और यहां नेहरू जी रहा करते थे। गांधी जी भी यहां आया जाया करते थे। आज के समय में आनंद भवन एक म्यूजियम की तरह है। जहां पंडित जवाहरलाल नेहरू के यादों को बहुत हीं बेहतरीन तरीके से संजोकर रखा गया है। यहां आकर पता चलता है कि नेहरू जी किस तरह राजसी शान के साथ रहा करते थे। यहां कांग्रेस का ऑफिस भी हुआ करता था। ये प्रयागराज के मुख्य विजिटिंग प्लेसेस हैं। इनके अलावा प्रयागराज में और भी बहुत सारे मंदिर और घूमने के लिए बेहतरीन विजिटिंग प्लेसेस हैं। जहां आप घूमने के लिए जा सकते हैं। प्रयागराज में कहां ठहरे (Where to stay in Prayagraj) हम जब भी किसी नए शहर जाते हैं तो वहां सबसे बड़ी समस्या आती है कि बसेरा किस जगह बनाया जाए। अगर प्रयागराज की बात करें तो प्रयागराज में आपको हर रेंज में होटल और धर्मशालाएं उपलब्ध हो जाएंगे। अगर आप प्रीमियम होटल में ठहरना पसंद करते हैं तो आप सिविल लाइंस एरिया में होटल देख सकते हैं। वहीं अगर आप नॉर्मल रेंज के होटल और धर्मशाला में ठहरना चाहते हैं तो आप रामबाग या फिर रेलवे स्टेशन