Bihar Destination Travel

भारत के समृद्ध इतिहास के गवाह हैं नालंदा विश्वविद्यालय के ये खंडहर

  • 0 Comments

अगर आप भी ऐतिहासिक धरोहरों (Historical monuments) को देखने और उनके इतिहास के बारे में समझने की चाहत रखते हैं तो, आपको बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय को देखना और समझना भी काफी पसंद आएगा। ऐसा विश्वविद्यालय जिसे पूरे दुनिया में ज्ञान का केंद्र माना जाता था, आज वह मात्र एक वर्ल्ड हेरिटेज साइट (World Heritage Site) के रूप में सिमट कर रह गया है। आइए जानते हैं इस विश्वविद्यालय के विनाश की कहानी और आप कैसे यहां घूमने जा सकते हैं इसके बारे में।आइए जानते हैं नालंदा विश्वविद्यालय के बारे में (Lets know about Nalanda University):- किसने बनवाया ? who was the Founder of Nalanda University?यह विश्वविद्यालय ना सिर्फ भारत बल्कि संपूर्ण संसार के प्राचीनतम विश्वविद्यालय के रूप में जाना जाता है। इस विश्वविद्यालय का निर्माण गुप्त वंश के शासक कुमारगुप्त ने पांचवी सदी में करवाया गया था। बाद में कुमारगुप्त के उत्तराधिकारियों (successors) ने इसे सहेज कर रखा। गुप्त वंश के पतन (Downfall) के बाद आने वाले दूसरे शासकों ने भी इसके विकास में सहयोग दिया। इसे महान सम्राट हर्षवर्धन और पाल शासकों का भी संरक्षण (Protection) मिला। किसने खोजा? Discovery of Nalanda University 19वीं शताब्दी में एक अंग्रेज (Englishman) को नालंदा में पढ़ रहे एक चीनी यात्री की डायरी मिली। जब वह उस डायरी (diary) में लिखे पते पर पहुंचा तो वह चारों ओर वीरान खंडहर (deserted ruins) थे। वहाँ टहलते हुए अंग्रेज ने देखा कि वहां कुछ चौथी शताब्दी के बने ईट के अवशेष हैं। फिर उसने हल्के हाथों से उस जगह को कुरेद (scrape) कर देखा तो उसे एक के बाद एक सजी हुई ईटों की श्रंखला (series) दिखाई दिया। उसके बाद उसने हीं वहां की खुदाई (digging) प्रारंभ करवाई और इस प्रकार खोज हुआ विश्व के प्राचीनतम विश्वविद्यालय, नालंदा विश्वविद्यालय की। 19वीं सदी में नालंदा विश्वविद्यालय की खुदाई के समय सिर्फ 5% भाग हीं खुदाई करके बाहर निकाला गया। फिर इसकी खुदाई का काम रोक दिया गया। लेकिन नरेंद्र मोदी की गवर्नमेंट (Goverment) के नेतृत्व में 2016 में इसकी खुदाई और पुनरुद्धार (Restoration) का काम प्रारंभ किया गया। आज के समय में नालंदा विश्वविद्यालय भारत के प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में से एक है। यूनेस्को (UNESCO) ने भी इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट के रूप में मान्यता दी है। नालंदा विश्वविद्यालय में 1500 से अधिक शिक्षक थे और 10,000 से अधिक छात्र पढाई किया करते थे। यहां विश्व के कोने-कोने से विद्यार्थी पढ़ने आते थे।यहां छात्रों के रहने के लिए 300 से अधिक कमरे बने हुए थे। सभी कमरे में रोशनी की व्यवस्था थी। विद्यालय के परिसर में जगह जगह पढ़ने का स्थान, प्रार्थना का प्रांगण (prayer hall) और स्टडी हॉल (study hall) बने हुए थे। एक कमरे में एक या एक से अधिक छात्रों के रहने की व्यवस्था थी।इन कमरों का प्रबंधन (management) संस्थानों और छात्र संगठनों (Institutions and student organizations) के द्वारा संभाला जाता था। नालंदा विश्वविद्यालय के नजदीक हीं एक म्यूजियम बनवाया गया है। यहां पर नालंदा विश्वविद्यालय की खुदाई से मिलने वाले मूर्तियों और अवशेषों को संरक्षित करके रखा गया है। इसमें कई तरह की बुद्ध की काँसे की मूर्तियां भी शामिल हैं। कैसे पहुंचे? how to reach? अगर आप नालंदा आना चाहते हैं तो नालंदा का सबसे करीबी हवाई अड्डा पटना में स्थित जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Jaiprakash Narayan International Airport) है। जहां से नालंदा शहर की दूरी लगभग 90 किलोमीटर है। आपको बता दें कि पटना का जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चंडीगढ़, देहरादून, जयपुर, अहमदाबाद और कोयंबटूर के साथ-साथ देश के काफी सारे अन्य हवाई अड्डों से जुड़ा हुआ है। जिसकी वजह से आपको फ्लाइट (Flight) से पटना पहुंचने में कोई भी तकलीफ नहीं होगी। नालंदा का सबसे करीबी रेलवे स्टेशन नालंदा जिला में ही स्थित है। लेकिन नालंदा रेलवे स्टेशन के लिए आपको सिर्फ नालंदा के नजदीकी रेलवे स्टेशन पटना, दानापुर, गया, बिहार शरीफ और राजगीर से ही ट्रेन की सुविधा मिल पाएगी। अगर आप इन शहरों से जुड़े हुए हैं, तो आप आसानी से अपने शहर से ट्रेन पकड़ कर नालंदा पहुंच सकते हैं और नालंदा शहर को विजिट कर सकते हैं। लेकिन अगर आपके शहर से नालंदा के लिए डायरेक्ट (Direct) ट्रेन की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो आपको अपने शहर से गया या पटना जंक्शन के लिए ट्रेन पकड़नी होगी। अगर प्राचीनतम इमारतों को देखने और उसके बारे में जानने में आपकी भी रुचि है, तो इस जगह पर आना आपके लिए बेहद ही रोमांचक सफर साबित होगा।

Category Destination Travel Uttar Pradesh

लखनऊ के नवाबी शान के प्रतीक हैं ये नवाबी स्मारक

  • 0 Comments

नवाबों के शहर के नाम से मशहूर शहर लखनऊ (Lucknow) को अपने नजाकत और तहजीब से भरी संस्कृति के लिए जाना जाता है। अगर इतिहास की बात करें तो लखनऊ प्राचीन काल के अवध क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है। लखनऊ हमेशा से हीं एक बहुरंगी संस्कृतियों वाला शहर रहा है। यहां के नवाबों के तमीज, तहजीब और उनके कविता, संगीत और शाही व्यंजनों के प्रति प्रेम के कारण लखनऊ को नबाबी ठाठ बाठ का प्रतीक माना जाता है। इस शहर का इतिहास जितना खूबसूरत रहा है, इसका वर्तमान भी उतना ही खूबसूरत और प्रगतिशील है। आज के समय में इस शहर का काफी तेजी से विकास हो रहा है। लेकिन इस शहर की एक खासियत जो इसे दूसरे शहरों से अलग बनाती है वह यह है कि, इस शहर ने विकास की राह पर चलते हुए भी अपनी संस्कृति को अपने अंदर सहेज कर रखा है। इस शहर के अंदर बहुत से ऐसे पर्यटन स्थल हैं जो देश हीं नहीं बल्कि दुनिया भर से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। आइए जानते हैं लखनऊ के उन्हीं पर्यटन स्थलों (Tourist places) के बारे में जो इस शहर की पहचान है। (Places to visit in Lucknow) 1. बड़ा इमाम बाड़ा (Bada Imam Bada)लखनऊ के सबसे फेमस टूरिस्ट स्पॉट (Famous Tourist Spot) में से एक बड़ा इमामबाड़ा का निर्माण नवाब आसफ़उद्दौला ने करवाया था। इसीलिए इस इमामबाड़े का दूसरा नाम आसफी इमामबाड़ा (Aasfi Imambada) भी है। इसी इमामबाड़े के अंदर लखनऊ की सबसे प्रसिद्ध भूल भुलैया और बावड़ी भी है, जो पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कहा जाता है कि इमामबाड़े के भीतर बने इस भूलभुलैया के अंदर जाने के बाद सेम गेट (Same gate) से वापस आना बहुत हीं मुश्किल है। यहां के बावड़ी के बारे में बताया जाता है कि इस बावड़ी के अंदर बहुत सारा खजाना छुपा हुआ है। इस इमामबाड़े को बनाने का काम 1780 में शुरू हुआ और 1784 में जाकर इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ। यह जगह कोई मकबरा या मस्जिद नहीं है, लेकिन फिर भी लखनऊ के सबसे फेमस बिल्डिंग्स (Famous buildings) में से एक है। आप जब इमामबाड़े के भीतर जाएंगे तो यहां के आर्किटेक्चर (Architecture) को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। इमामबाड़े में 489 एक जैसे दिखने वाले दरवाजे हैं, जिनकी नक्काशी और खूबसूरती देखकर एक बार को आप भी ख्यालों की दुनिया में खो जायेंगे। बड़ा इमामबाड़ा मुगल आर्किटेक्चर का एक बेहतरीन उदाहरण है। 2. ब्रिटिश रेजीडेंसी (British Residency) अंग्रेजों के जमाने में बनाई गई इस रेजीडेंसी में ईस्ट इंडिया कंपनी के ब्रिटिश एंप्लॉय (British Employees of East India Company) रहा करते थे। यह रेजीडेंसी 35 एकड़ में फैली हुई है। जहां बहुत सारे बिल्डिंग्स हैं। जिसे पूरा मिला करके रेजीडेंसी का नाम दिया गया है। कहते हैं कि 1857 के विद्रोह में भारतीय लोगों ने इस रेजीडेंसी पर हमला कर दिया था। जिसमें 2000 अंग्रेजी सैनिक मारे गए थे। जिनकी कब्र इस रेजीडेंसी के अंदर बनवायी गई है। रेजीडेंसी के अंदर आपको रेजीडेंसी कंपलेक्स (Residency Complex), ट्रेजरी बिल्डिंग, रेजीडेंसी का म्यूजियम (Musuem of residency), किचन (Kitchen) और रेजीडेंसी का मस्जिद देखने को मिलेगा। इस बिल्डिंग का निर्माण भी आसफ़उद्दौला ने करवाया था। आज के समय में यह बिल्डिंग लखनऊ के प्रसिद्ध दार्शनिक स्थलों (Famous visiting places) में से एक है। 3. छोटा इमामबाड़ा (Chhota Imambara) लखनऊ शहर में एक छोटा इमामबाड़ा भी है। जिसका निर्माण नवाब मोहम्मद अली ने करवाया था। जो उस समय अवध के नवाब थे। इस जगह को इमामबाड़ा हुसैनाबाद मुबारक के नाम से भी जाना जाता है। इस जगह पर आप को ताजमहल के दो प्रतिरूप देखने को मिलेंगे। जिनमें से पहला नवाब मोहम्मद अली की याद में बनवाया गया था और दूसरा उनकी बेटी प्रिंसेस जीनत के याद में बनवाया गया था। यह जगह एक धार्मिक जगह मानी जाती है। इसलिए यहां लड़कियों को अपना सर ढक कर रखना होता है और विजिटर्स को यहां अपने जूते उतार कर जाना होता है। छोटा इमामबाड़ा एक बेहतरीन आर्किटेक्चर वाला जगह है। इस जगह को पैलेस ऑफ़ लाइट (Palace of Light) के नाम से भी जाना जाता है। इसके अंदर शीशे की नक्काशी की गई है और जिसके कारण यहां एक दिया जलाने पर भी यहाँ चारों ओर सौ दिया के बराबर की रोशनी फैल जाती है। इस इमामबाड़े के भीतर लगे झूमरों को नवाब ने बेल्जियम से मंगवाए थे। इस इमामबाड़े की वास्तुकला भारतीय इस्लामिक और फारसी वास्तु कलाओं से मिलती-जुलती है। 4. रूमी दरवाजा (Rumi Darwaza) छोटा इमामबाड़ा और बड़े इमामबाड़े के बीच में स्थित इस दरवाजे को हम लखनऊ शहर का शान (Pride of lucknow) कह सकते हैं। यह दरवाजा 60 फीट ऊंचा है और इसकी निर्माण शैली अवधि वास्तु कला पर आधारित है। इस दरवाजे का निर्माण भी आसफ़उद्दौला ने करवाया था और इस दरवाजे को तुर्किश गेटवे के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि यह दरवाजा तुर्की के बाव-ए-हुमायूं गेटवे (जो कि इस्तानबुल में है) से मिलता जुलता है।रूमी दरवाजा को गौर से देखने पर इसमें दरवाजे के चारों ओर फूलों की नक्काशी देखने को मिलेगी। इस दरवाजे के ऊपर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां भी हैं, जिससे पता चलता है कि इस दरवाजे का निर्माण नजर रखने के लिए भी करवया गया था। दरवाजे के ऊपर एक छोटा सा गुंबद है जहां से आप चारों ओर झांक सकते हैं। 5. हुसैनाबाद क्लॉक टावर (Hussainabad Clock Tower) लखनऊ के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों के लिस्ट में अगला नाम है हुसैनाबाद क्लॉक टावर का। जोकि इंडिया के सबसे लंबे क्लॉक टावरों में से एक है। कहते हैं इस क्लॉक टावर के घंटे और सुईयों को बनवाने के लिए लंदन से सामग्रियां मंगवाई गई थीं। इस क्लॉक टावर के पेंडुलम (Pendulam) की लंबाई 14 फिट है। इस क्लॉक टावर का निर्माण रिचर्ड रॉक्सेल बेन (Rechard Rockcell ben) ने करवाया था। इस क्लॉक टावर की ऊंचाई लगभग 67 मीटर है। यह क्लॉक टावर भारत में विक्टोरियन गोथिक स्टाइल आर्किटेक्चर (Victorian gothic style architecture) का एक बेहतरीन उदाहरण है। इस क्लॉक टावर को बनवाने में लगभग ₹175000 का खर्च आया था और इसे हुसैनाबाद ट्रस्ट ने 1881 में बनवाया था। 6. दिलखुश कोठी (Dilkhush Kothi) लखनऊ की फेमस दिलखुश कोठी को लाल ईंटों

Bazar Best of My Blogs Delhi Review

Chandni Chowk- All you need to know  

  • 0 Comments

Chandni Chowk is one of the oldest and most famous markets in Delhi, India. Located in the heart of Old Delhi, it is a vibrant and bustling area known for its historical significance, cultural heritage, and vibrant shopping experience. The name “Chandni Chowk” translates to “Moonlight Square” or “Moonlight Market,” and it has a rich history that dates back to the Mughal era. Chandni chowk was established in the 17th century by the Mughal Emperor Shah Jahan when he decided to shift the capital of his empire from Agra to Delhi. It was designed as one of the main streets of Shahjahanabad, the new walled city of Delhi. The construction of Chandni Chowk began in 1650 and was completed in 1656. In its early days, Chandni Chowk was a grand boulevard lined with trees, canals, and pools, flanked by imposing havelis (mansions) and significant structures. The street was broad and served as the main thoroughfare of Shahjahanabad. It quickly became the commercial and cultural hub of the city, teeming with traders, merchants, artisans, and nobility. The market’s name is said to have originated from the moon’s reflection on a large pool that once existed in the area, creating a beautiful moonlit ambiance. The Mughal royal processions would often pass through Chandni Chowk, adding to its prestige and grandeur. Over the centuries, Chandni Chowk has witnessed various historical events and changes. It experienced the rise and decline of the Mughal Empire, followed by the British colonial rule in India. Many havelis were demolished, and the area underwent modernization. Despite the transformations, Chandni Chowk has managed to retain its old-world charm and cultural heritage. Today, it remains a bustling and vibrant market, featuring narrow lanes filled with a plethora of shops, vendors, and traders selling a diverse range of products. Whether you’re shopping for textiles, jewellery, spices, or indulging in mouth-watering street food, a visit to Chandni Chowk is a must for anyone exploring the cultural and historical treasures of Delhi. Read More on Chandni Chowk Historic monuments near Chandni chowk Chandni Chowk is located in the heart of Old Delhi, which is steeped in history and dotted with numerous historic monuments and landmarks. Here are some of the prominent historic monuments around Chandni Chowk: Red Fort (Lal Qila): One of the most iconic landmarks of Delhi, the Red Fort, is situated just a short distance away from Chandni Chowk. Built by the Mughal Emperor Shah Jahan in the 17th century, the Red Fort served as the main residence of the Mughal emperors until 1857. It is a UNESCO World Heritage Site and an architectural marvel, with its impressive red sandstone walls, magnificent gates, and intricate designs. Jama Masjid: Another significant historical monument near Chandni Chowk is the Jama Masjid, which is one of the largest and most revered mosques in India. Constructed by Shah Jahan between 1644 and 1656, the Jama Masjid’s grandeur lies in its vast courtyard, onion-shaped domes, and two towering minarets. It can accommodate thousands of worshippers during prayers and offers stunning views of Old Delhi from its minarets. Fatehpuri Masjid: Located at the western end of Chandni Chowk, the Fatehpuri Masjid is an elegant mosque built by Fatehpuri Begum, one of Shah Jahan’s wives. The mosque’s architecture exhibits a blend of Mughal and Islamic styles and features a beautiful central dome and minarets. St. James’ Church: While Old Delhi is predominantly associated with Mughal-era monuments, St. James’ Church stands as an example of British colonial architecture. Built-in 1836, it is one of the oldest churches in Delhi and is known for its stunning white exterior and elegant design. Gurudwara Sis Ganj Sahib: This Sikh gurudwara holds immense historical and religious significance. It marks the site where the ninth Sikh Guru, Guru Teg Bahadur, was beheaded on the orders of Aurangzeb, the Mughal Emperor. The present gurudwara was built in his memory and is an essential place of worship for Sikhs. Gauri Shankar Temple: An ancient Hindu temple dedicated to Lord Shiva, the Gauri Shankar Temple is a prominent religious site in Chandni Chowk. The temple features an 800-year-old lingam (phallic symbol) of Lord Shiva and is visited by devotees throughout the year. These are just a few of the historic monuments around Chandni Chowk. Exploring these landmarks offers a glimpse into the rich history, architectural brilliance, and cultural diversity of Old Delhi. Most famous four bazaars of Chandni Chowk Chandni Chowk, being one of the oldest and busiest markets in Delhi, is divided into several smaller bazaars, each with its own specializations and unique offerings. The four main bazaars of Chandni Chowk are: Fatehpuri Market is one of the bustling markets located in Chandni Chowk, Delhi. It is named after Fatehpuri Begum, one of the wives of Mughal Emperor Shah Jahan. The market is well-known for its wholesale trade of a variety of goods and merchandise, catering to both locals and retailers. Fatehpuri Market is primarily a wholesale market, and you’ll find a wide range of products being traded in bulk quantities. Items such as textiles, garments, fabrics, shoes, hardware, kitchenware, and household items are among the commodities sold here. The market is particularly famous for its cloth and garment shops. Retailers from various parts of Delhi and neighboring states come here to purchase textiles and ready-made clothing at wholesale prices. The market area consists of various traditional bazaars, each specializing in specific types of products. For example, there are bazaars for jewelry, cosmetics, accessories, and more. Like many markets in Chandni Chowk, Fatehpuri Market also has its share of street food vendors. You can find some local favorites and quick snacks to refuel while exploring the area. Fatehpuri Market is located close to the historic Fatehpuri Masjid, which adds to the charm and cultural significance of the area. The mosque itself is worth a visit and showcases splendid Mughal architecture. If you’re looking for a unique shopping experience and want to buy goods in bulk or explore the vibrant ambiance of an old Delhi market,

Bazar Destination Travel

These are 12 Best Visiting places of Kolkata

  • 0 Comments

कोलकाता- भारत का एक ऐसा शहर, जिसे अंग्रेजी शासन काल में भारत की राजधानी होने का भी गौरव प्राप्त हुआ था। यह शहर आज के समय में भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। हुगली नदी के तट पर बसा हुआ यह शहर भारत के इतिहास में बहुत हीं महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस शहर की जनता ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। स्वतंत्रता संग्राम के समय प्रकाशित होने वाली कई पत्र पत्रिकाएं भी इसे प्रकाशित होती थीं। आज के समय में भी यह शहर भारत के सबसे महत्वपूर्ण शहरों की सूची में शामिल है।ब्रिटिश शासनकाल की राजधानी होने के कारण इस शहर में कई सारी औपनिवेशिक इमारतें भी हैं। जो इस शहर के गौरवशाली इतिहास की गवाही देते हैं। इस ब्लॉग में हम आपको उन्हीं बेहतरीन ऐतिहासिक इमारतों और कुछ ऐसे विजिटिंग प्लेसेस के बारे में बताने वाले हैं जो इस शहर की शान और शौकत में चार चांद लगाने का काम करते हैं। 1. हावड़ा ब्रिज (Howrah Bridge) :जब भी कोलकाता शहर के नाम का जिक्र होता है, सबसे पहले जो ख्याल हमारे दिमाग में आता है वह इस स्थान का होता है। ब्रिटिश काल में हुगली नदी पर बनाया गया यह ब्रिज कोलकाता के गेटवे (Gateway of Kolkata) के जैसा है। इस पुल का निर्माण 1940 में हुआ था और 1965 में रविंद्र नाथ टैगोर (Rabindra nath tagore) के सम्मान में इसका नाम रवींद्र सेतु (Ravinjdra setu) कर दिया गया। आपको यह जानकर हैरानी होगी की प्रतिदिन लगभग एक लाख वाहन और हजारों लोग इस फुल को पार करते हैं।हावड़ा ब्रिज घूमने का सबसे सही समय रात का होता है। क्योंकि जब रात में यहां के लाइट्स ऑन (Lights On) होते हैं तो इस पुल की खूबसूरती और भी ज्यादा बढ़ जाती है। अगर आप भी कोलकाता घूमने गए हैं तो आपको इस जगह पर जरूर घूमने जाना चाहिए। 2. विक्टोरिया मेमोरियल (Victoria Memorial) : ब्रिटिश शासन काल में बनवाया गया यह इमारत अंग्रेजी स्थापत्य कला (English Architecture) का एक बेहतरीन नमूना है। इस इमारत में अंग्रेजी स्थापत्य कला के अलावा मुगल (Mughal), मिश्र (Mishra) और फारसी (Farsi) सहित अन्य शैली की वास्तुकलाओं (Architectures) की झलक भी देखने को मिलती हैं। विक्टोरिया मेमोरियल शहर के बीचोबीच स्थित है औरऔर इसे महारानी विक्टोरिया के सम्मान में बनवाया गया था। विक्टोरिया मेमोरियल का आर्किटेक्चर भी काफी खूबसूरत है। सफेद संगमरमर से बने हुए इस इमारत का निर्माण 1906-1921 के बीच करवाया गया था। यह स्मारक एक बेहतरीन संग्रहालय (Musuem) है। 3. साइंस सिटी (Science City) :अगर आपकी भी रुचि विज्ञान और अनुसंधान (Science and research) के क्षेत्र में है तो यह जगह आपके लिए कोलकाता का सबसे बेस्ट विजिटिंग प्लेस (Best visiting place) होगा। लेकिन ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ विज्ञान के क्षेत्र में इंटरेस्ट (Interest) रखने वाले लोगों कोई पसंद आता है। अगर आपकी रूचि विज्ञान में थोड़ी कम है, फिर भी आप इस जगह को काफी अच्छे से इंजॉय (Enjoy) कर सकते हैं। यह कोलकाता के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। जिसमें स्पेस थिएटर (Space Theater), नेचुरल साइंस पार्क (Natural Science Park), 3D परफॉर्मेंस (3D Performance), टाइम मशीन (Time Machine), डायनासोर कंपलेक्स (Dinosaur Complex), इवोल्यूशन थीम पार्क (Evolution Theme Park) जैसे एडवेंचर (Adventure) से भरे वैज्ञानिक उपकरणों (scientific instruments) का आप मजा ले सकते हैं। यह दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक संग्रहालयों (scientific museums) में से एक है। इसकी खासियत यह है कि यह मनोरंजन (Entertainment) के साथ लोगों को विज्ञान की जानकारी देता है। कोलकाता साइंस सेंटर का इनॉग्रेशन (inauguration) 1997 में हुआ था। यहां आप कई तरह की वैज्ञानिक घटनाओं को देख और समझ सकते हैं। 4. सेंट पॉल कैथेड्रल (St Paul’s Cathedral) :कोलकाता के सबसे प्रसिद्ध जगहों की सूची में सेंट पॉल कैथेड्रल का भी नाम आता है। जिन लोगों को इतिहास में रूचि होती है तथा ऐतिहासिक वास्तुकला और स्थापत्य शैली (Historical architecture and architectural styles) के बारे में जानने की इच्छा होती है, उन लोगों के लिए यह जगह सबसे परफेक्ट (Perfect) होता है। इसके अलावा क्रिसमस (Chirstmas) के समय में भी यहां पर्यटकों (Tourists) की संख्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है। क्योंकि जब क्रिसमस के लिए इस जगह को सजाया जाता है तो मोमबत्ती और लाइट के वजह से यह जगह और भी ज्यादा खूबसूरत दिखने लगता है। सेंट पॉल कैथेड्रल काफी भव्य इमारत है। जिसके चारों ओर बगीचा है। क्रिसमस के रात यहां पर्यटकों की काफी ज्यादा मात्रा में भीड़ उमड़ती है। 5. विश्व बांग्ला गेट (Vishwa Bangla Gate) : विश्व बांग्ला गेट एक प्रकार का स्वागत द्वार (welcome gate) है, जो कि कोलकाता में आपका स्वागत करता है। आज के समय में यह सिर्फ एक स्वागत द्वार के तौर पर नहीं बल्कि एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है। इसके टॉप पर एक रेस्टोरेंट (Restaurant) भी है, जहां आप खाने के साथ-साथ पार्टी भी कर सकते हैं। यहां जाने के लिए आपको पहले से हीं टिकट बुक करवाना पड़ेगा। जिसकी प्राइस (Price) भारतीय लोगों के लिए ₹100 है। 6. प्रिंसेप घाट (Prinsep Ghat) :वोटिंग (Boating) को पसंद करने वाले लोगों के लिए कोलकाता का प्रिंसेप घाट एक बेहतरीन विजिटिंग प्लेस है। जहां नदी के किनारे चलते हुए नेचर (Nature) की खूबसूरती का मजा लिया जा सकता है। प्रिंसेप घाट को 1843 में ब्रिटिश शासन काल के दौरान ही बनवाया गया था। हुगली नदी का यह घाट जेम्स प्रिंसेप (James Prinsep) को समर्पित है, जो अंग्रेजी विद्वान थे। प्रिंसेप घाट पर लोग सुबह शाम को वॉकिंग (Walking) के लिए जाना पसंद करते हैं। यहां आप सुबह और शाम के समय सनराइज और सनसेट (Sunrise and Sunset) की खूबसूरती को बहुत ही अच्छे तरीके से महसूस कर सकते हैं। 7. न्यू मार्केट (New Market) : अगर आपको भी शॉपिंग (Shopping) पसंद है तो कोलकाता का न्यू मार्केट आपको बहुत ही पसंद आने वाला है। यह जगह कोलकाता के सबसे प्रसिद्ध मार्केटों में से एक है। जिसे 1874 में अंग्रेजों ने स्थापित किया था। यह मार्केट लिंडसे स्ट्रीट चौरंगी रोड (Lindsay Street Chowringhee Road) पर स्थित है। अगर आप भी कभी कोलकाता जाए तो आप इस मार्केट को विजिट कर सकते हैं। 8. फ्लोटिंग मार्केट (Floating Market) : कहते

Destination Travel

मालदीव से कम नहीं हैं भारत के अंडमान निकोबार के ये द्वीप

  • 0 Comments

खूबसूरत वादियों और दूर दूर तक फैले हुए समुद्र को देखने की चाहत हो तो आप “अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का रुख कर सकते हैं। चाहे आप अकेले यहाँ आना चाहते हो या फिर पार्टनर के साथ, यह जगह दोनों हीं सिचुएशन में आपको काफी पसंद आएगी। रेतीले समुंदर के तट पर अकेले टहलना भी उतना हीं ज्यादा खूबसूरत होता है, जितना कि अपने पार्टनर के हाथों में हाथ डाल कर चलना।” अगर फेवरेट हॉलीडे स्पॉट की लिस्ट बनाई जाए तो अधिकतर पर्यटकों के पसंद के होलीडे डेस्टिनेशन में आईलैंड जरूर होते हैं। क्योंकि आईलैंड पर बाकी शहरों की तरह रोजमर्रा की जिंदगी के लिए भागम-भाग और शोर शराबा का सामना नहीं करना पड़ता है। आईलैंड पर लोगों को एक बहुत ही शांत और साफ वातावरण मिलता है, जो कि पर्यटकों को काफी पसंद आता है। प्रकृति की खूबसूरती जितने पहाड़ों में है, उतनी ही ज्यादा समुद्रो में भी! आईलैंड के पसंद किए जाने का कारण मुख्य कारण यह भी है कि, वहां आप बिंदास होकर अपनी जिंदगी के कुछ खूबसूरत पल को इंजॉय कर सकते हैं और ढेरों यादें बना सकते हैं। क्योंकि यहां आपको कोई जज करने वाला नहीं होता है। वहाँ आप जैसी मर्जी वैसे कपड़े पहन सकते हैंऔर न ही किसी भी चीज की रोक टोक होती है। अगर असल में फ्रीडम महसूस करनी हो तो आईलैंड से बेहतर कोई और हॉलिडे डेस्टिनेशन नहीं हो सकता। दूर दूर तक फैला समुद्र , खुला आसमान और समुद्र में उठती लहरों को देखना वाकई में कभी ना भुला जा सकने वाला एहसास होता है। इस ब्लॉग में हम भारत के केंद्र शासित प्रदेशों के सूची में आने वाले आईलैंड अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के प्रमुख होलीडे डेस्टिनेशन के बारे में जानेंगे। सेल्यूलर जेल cellular jail :यह जेल भारत के इतिहास में बहुत हीं महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली जगह है। काला पानी की सजा के बारे में तो आपने कभी न कभी जरूर सुना होगा। जब भारत अंग्रेजों के अधीन था तो स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले वीरों को इसी जेल में बंद कर दिया जाता था। काला पानी की सजा को भारत में उस समय सबसे कड़ी सजा के रूप में जाना जाता था। आज के समय में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के याद के रूप में पोर्ट ब्लेयर में उपस्थित है। सेल्यूलर जेल के अलावा पोर्ट ब्लेयर में रॉस द्वीप भी है। जहां आप घूमने जा सकते हैं। रॉस द्वीप में आप चर्च, बेकरी और स्विमिंग पूल आदि का मजा ले सकते हैं। नॉर्थ बे द्वीप North Bay Island :अगर आप भी तरह-तरह की वाटर एक्टिविटीज (water activities) का मजा लेना चाहते हैं और स्कूबा डाइविंग (Scuba diving) जैसे एक्टिविटीज (activities) करना चाहते हैं तो नॉर्थ बे द्वीप इसके लिए सबसे बेस्ट डेस्टिनेशन (Best destination) है। यहां आप छोटी पनडुब्बी की सवारी या ग्लास बॉटम बोर्ड (Glass bottom board) की सवारी करने के लिए भी जा सकते हैं। जिसके जरिए समुद्र के नीचे के समुद्री जीवो को देखने और समझने का आनंद ले सकते हैं। ग्लास बॉटम बोर्ड की सवारी के जरिए आप यह भी समझ पाएंगे कि समुद्र जितना सुंदर बाहर से लगता है, इस की गहराइयों में भी उतनी हीं खूबसूरती छुपी हुई है। क्योंकि समुद्र के अंदर पाए जाने वाले तरह-तरह के रंग-बिरंगे जीव इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। हैवलॉक द्वीप havelock island : हैवलॉक द्वीप अंडमान और निकोबार (Andaman and Nicobar) दीप समूह के सबसे खूबसूरत द्वीपों में से एक है। कपल्स के लिए फेवरेट डेस्टिनेशन माना जाता है। पोर्ट ब्लेयर से हैवलॉक पहुंचने के लिए आपको क्रूज (cruse) का सहारा लेना पड़ेगा।हैवलॉक द्वीप पर पहुंचकर आप यहाँ के बीचों पर एंजॉय (enjoy) कर सकते हैं। हैवलॉक द्वीप की खासियत यह है कि यहां आप एशिया के सबसे साफ समुद्र तट पर तैराकी का मजा ले सकते हैं। हैवलॉक द्वीप अंडमान के सबसे खूबसूरत द्वीपों में से एक है। यहां आपको दूर-दूर तक फैले नीले रंग के समुद्र, कोरल रीफ और खुला आसमान देखने को मिलेगा।नेचर को पसंद करने वाले लोगों के लिए हैवलॉक द्वीप किसी खजाने की तरह है। यहीं वजह है कि यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के सबसे प्रसिद्ध द्वीपों में से एक है। नील द्वीप Neil Island :अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में बसे इस छोटे से द्वीप की खासियत यहां की वाइल्ड लाइफ वैरायटी (Wildlife variety) है। यहां आप सफेद रेतीले बीजों और ट्रॉपिकल वुडलैंड (Tropical woodlands) के बीच अपनी छुट्टियां बिता सकते हैं। नील द्वीप पूरी तरह से फ्लैट आईलैंड (Island) है। यहां आप इसके चारों ओर साइकिलिंग (Cycling) भी कर सकते हैं।यह उन लोगों के लिए सबसे बेस्ट जगह है जो शांति से अपना समय बिताना पसंद करते हैं।इसके अलावा इस द्वीप पर रामायण के किरदारों के नाम पर कई सारे जगह भी हैं। जैसे भरतपुर बीच और लक्ष्मपुर बीच आदि।नील द्वीप का यह लक्ष्मपुर बीच यहां का सबसे बड़ा सेंटर ऑफ़ अट्रैक्शन (Centre of attraction) है। क्योंकि यह सनसेट पॉइंट फोटोग्राफी को पसंद करने वाले लोगों के लिए यह जगह सबसे परफेक्ट होता है। इसके अलावा इस द्वीप पर एक नेचुरल पूल (Natural pool) भी है। जिसका निर्माण खुद-ब-खुद हुआ है।यह द्वीप पोर्ट ब्लेयर से लगभग 37 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और इसे अंडमान के सब्जी का कटोरा भी कहा जाता है। क्योंकि यहाँ फलों तथा सब्जियों की खेती के लिए बहुत ही फेवरेबल मौसम होता है। अंडमान और निकोबार द्वीप जाने का सबसे बेहतरीन समय Best time to visit Andaman and Nicobar : अंडमान जाने का सबसे सही समय अक्टूबर से मई तक का होता है। क्योंकि इस समय यहां का मौसम बहुत हीं सुहाना होता है। इस समय यहां जाने पर आप बहुत ही खुशनुमा माहौल में अपने ट्रिप (Tirp) का मजा ले पाएंगे। मॉनसून (Monsoon) के समय में इस जगह पर जाना बहुत हीं रिस्की (Risky) हो सकता है। क्योंकि मॉनसून में समुद्र में आने वाली ऊंची ऊंची ज्वारीय लहरों, लगातार बारिशों और तेज आंधी की वजह से यहां घूमने जाना खतरे से खाली नहीं होता है। अंडमान घूमने के लिए आपको कम से कम 6 दिन का समय लेकर जाना होगा। तभी आप इस जगह को आराम से घूम पाएंगे और अच्छे से

Destination Lifestyle Review Travel

Hotels vs Hostels – which is best during travelling

  • 0 Comments

The choice between staying in hotels vs hostels during traveling depends on various factors, including personal preferences, budget, travel style, and the destination. Both options have their advantages and disadvantages, and what might be considered the “best” can vary from one traveller to another. Here’s a comparison to help you decide which option suits you best: Hotels Advantages: Disadvantages: Hostels Advantages: Disadvantages: Ultimately, the decision comes down to your preferences, travel goals, and budget. If you prioritize comfort, privacy, and are willing to spend more, hotels may be the better option. On the other hand, if you want to meet other travellers, have a limited budget, and don’t mind shared spaces, hostels can be a fantastic choice for a social and cost-effective travel experience. Many travellers often mix and match, staying in hotels for some portions of their trip and hostels for others to get the best of both worlds.

Destination Travel

कश्मीर को धरती का स्वर्ग बनाते हैं वहां के ये टूरिस्ट प्लेस

  • 0 Comments

जब भी कश्मीर का जिक्र होता है तो खूबसूरत वादियों और बर्फ से ढ़की पहाड़ियों की कल्पनाएँ दिल में हलचल मचाने लगती हैं। चाहे बच्चे हो या जवान कश्मीर के पहाड़ों में खो जाने की ख्वाहिश सभी को होती है। शायद ही कोई घुमक्कड़ ऐसा होगा जो कश्मीर नहीं जाना चाहता होगा। कश्मीर की प्राकृतिक खुबसुरती इसे भारत का स्वर्ग बनाती है। जिस स्वर्ग को देखने के लिए यहां दुनिया भर से लाखों लोग घूमने आते हैं।हम आपको इस ब्लॉग में कश्मीर के कुछ बेहद खूबसूरत जगहों के बारे में बताएंगे। अगर आप भी कश्मीर जाने की प्लानिंग कर रहे हैं तो कश्मीर की इन जगहों पर जरूर जाएं। 1. वैष्णो देवी मंदिर (vaishno devi mandir) : त्रिकुटा पहाड़ियों में कटरा से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 5300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। माता वैष्णो देवी मंदिर कश्मीर हीं नहीं बल्कि पूरे भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। जहां हर साल लाखों भक्त पूजा अर्चना करने और अपनी मनोकामना मांगने आते हैं। बर्फीली पहाड़ियों में बसा हुआ यह मंदिर काफी शांत और सुंदर है। जहां जाकर आपको अलग हीं तरह की पॉजिटिव एनर्जी और मन की शांति का एहसास होगा। आध्यात्मिक लोगों के लिए यह मंदिर किसी स्वर्ग से कम नहीं है।वैष्णो देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए तीर्थ यात्रियों को लगभग 13 किलोमीटर तक पैदल चलकर ट्रैकिंग करते हुए मंदिर की गुफाओं तक पहुंचना होता है। मां वैष्णो देवी का यह मंदिर भारत के 108 शक्तिपीठों में से एक है। वैष्णो देवी मंदिर जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Vaishno Devi Mandir) : वैष्णो देवी मंदिर पूरे साल श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। इसीलिए वहां कभी भी जाया जा सकता है, लेकिन मार्च से मई और सितंबर से नवंबर तक का समय यहां आने के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है। इस समय अवधि में यहां श्रद्धालुओं की भी बहुत ज्यादा भीड़ होती है। क्योंकि इस समय में यहां का मौसम बहुत हीं बेहतरीन होता है। जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। 2. ट्यूलिप गार्डन (Tulip Garden) : जैसा कि आप जानते होंगे कि कश्मीर का ट्यूलिप गार्डन एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन के रूप में जाना जाता है। यहां की खूबसूरती देखने के लिए हर साल दूर-दूर से देशी और विदेशी पर्यटक घूमने आते हैं। यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि बेशक ये ट्यूलिप सिर्फ 4-5 दिन के लिए खिलते हैं, लेकिन इस बाग़ में काम करने वाले स्टाफ को यह ध्यान रखना पड़ता है कि ट्यूलिप के बल्ब की क्वालिटी हर साल अच्छी हो। इसके लिए वह साल भर कड़ी मेहनत करते हैं | 2007 में इस गार्डन को इस उद्देश्य के साथ शुरू किया गया था कि इससे कश्मीर वैली में फूलों की खेती और पर्यटन को बढ़ावा मिले। इस गार्डन को ढलान वाले क्षेत्र में सीढ़ीदार तरीके से बनाया गया है। यह इंदिरा गाँधी ट्यूलिप गार्डन 30 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। टयूलिप गार्डन जाने का सबसे बेस्ट समय (Best time to visit Tulip garden) : ट्यूलिप हर साल मार्च से मई के महीने के बीच में खिलते हैं। इनके खिलने की समय अवधि फिक्स नहीं होती है। क्योंकि यह मौसम के अनुरूप हीं खेलते हैं। एक अनुमान के तौर पर कहा जाए तो यह लगभग 1 से 2 सप्ताह के लिए खिलते हैं। इसीलिए ट्यूलिप गार्डन के खुलने की अवधि भी हर साल फिक्स नहीं होती है। अगर आप टयूलिप गार्डन घूमना चाहते हैं तो आपको मार्च से मई तक के समय के लिए प्लानिंग करके रखनी होगी। 3. अमरनाथ की गुफा (Amarnath temple) : भारत के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक अमरनाथ की गुफा हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए एक बहुत हीं प्रमुख साधना स्थल है। भगवान शिव में आस्था रखने वाले लोगों के लिए अमरनाथ की गुफा सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है। अमरनाथ के गुफा में प्राकृतिक रूप से बने हुए बर्फ के शिवलिंग की पूजा की जाती है। यहां हर साल लाखों पर्यटक घूमने के लिए जाते हैं। अमरनाथ की गुफा तक के लिए यात्रा को लोग अमरनाथ यात्रा के नाम से जानते हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि मई जून की गर्मी में भी अमरनाथ के गुफा में यह शिवलिंग बिल्कुल भी नहीं पिघलता है और ज्यों का त्यों ही बना रहता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह वहीं गुफा है, जहां महादेव ने माता पार्वती को जीवन और मृत्यु के सत्य के बारे में बताया था। अमरनाथ जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Amarnath temple): अमरनाथ की गुफा के लिए यात्रा करने का सबसे सही समय मई से अगस्त तक का होता है। सर्दियों में अमरनाथ का मौसम बहुत हीं अधिक कठोर हो जाता है और उस समय यहां बहुत ज्यादा सर्दी होती है। इसीलिए सर्दियों में अमरनाथ यात्रा का प्लान बनाने से बचें। 4. सोनमर्ग (sonamarg) : कश्मीर की वादियों में स्थित सोनमर्ग एक काफी खूबसूरत शहर है। बर्फ से भरे मैदानों, ग्लेशियरों और शांत झीलों वाला यह शहर हमेशा से हीं पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां का माहौल बहुत ही खूबसूरत और शांत है। सोनमर्ग श्रीनगर से लगभग 80 किलोमीटर दूर बसा हुआ शहर है। जो कि समुद्र तल से लगभग 2800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। प्राकृतिक सुंदरता, लुभावने ग्लेशियरों और जीवंत झीलों से भरा या शहर कश्मीर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। जो अपने खुबसुरती से हर साल हजारों भारतीय एवं विदेशी पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है। सोनमार्ग जाने का सबसे सही समय (Best time तो visit sonamarg) सोनमर्ग जाने के लिए सबसे सही समय अप्रैल से सितंबर के बीच का होता है। क्योंकि इस समय भारत के दूसरे राज्य में प्रचंड गर्मी पड़ रही होती है। ऐसे में सोनमर्ग का खुशनुमा मौसम आपको इस भयानक गर्मी से छुटकारा दिला सकता है। 5. पहलगाम (Pahalgam): अगर आप भी केसर के नीले खेतों को देखना चाहते हैं तो पहलगाम इसके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन माना जाता है। पहलगाम अपने केसर के खेतों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां के केसर के

Destination Rajasthan Travel

Best Places to visit in Alwar

  • 0 Comments

Alwar is a beautiful city in the state of Rajasthan, India, known for its rich history, stunning palaces, and scenic landscapes. Here are some of the best places to visit in Alwar: Bala Quila (Alwar Fort) This ancient fort is perched on a hilltop and offers breath-taking panoramic views of the city and surrounding areas. It is an excellent spot for history enthusiasts and photographers. Location: Bala Quila is situated atop the Aravalli Range, approximately 5 kilometers from the main city of Alwar. The strategic location provides stunning views of the surrounding landscape. Points of Interest: Within the fort, you can explore various structures, including palaces, temples, and cenotaphs. Some notable attractions include Jai Mahal, Nikumbh Mahal, Salim Sagar Tank, and Suraj Kund. Panoramic Views: Bala Quila offers breathtaking panoramic views of the Alwar city below and the picturesque hills of the Aravalli Range. It’s an excellent spot for photography and enjoying the scenic beauty. Visiting Bala Quila is not only an opportunity to witness a historical marvel but also a chance to immerse yourself in the rich heritage and culture of Alwar. If you plan to visit, make sure to wear comfortable shoes and carry water, especially if you decide to trek to the top. The fort is a must-visit attraction for history enthusiasts, architecture admirers, and nature lovers alike. Sariska Tiger Reserve Sariska Tiger Reserve is a well-known wildlife sanctuary located in the Alwar district of Rajasthan, India. It is one of the important protected areas in the Aravalli Range and is famous for its diverse flora and fauna, including the majestic Royal Bengal Tigers. Here are some key details about the Sariska Tiger Reserve: 1. History: Sariska was declared a wildlife sanctuary in 1958 and later became a Tiger Reserve in 1978 under India’s Project Tiger initiative, aimed at conserving the endangered Bengal tiger population. 2. Location: The reserve is situated around 200 kilometres from Delhi and approximately 107 kilometres from Jaipur, making it easily accessible from both cities. 3. Geography: The Sariska Tiger Reserve covers an area of approximately 866 square kilometers. It encompasses hills, valleys, dry deciduous forests, and rocky landscapes typical of the Aravalli Range. 4. Wildlife: The reserve is home to a variety of wildlife species, including tigers, leopards, wild boars, sambar deer, spotted deer (chital), nilgai (blue bull), langurs, hyenas, jackals, and various bird species. 5. Bengal Tigers: Sariska is known for its Bengal tiger population, though the numbers have fluctuated over the years due to various factors, including poaching and habitat loss. Conservation efforts have been made to protect and increase the tiger population in the reserve. 6. Safari and Tourism: Visitors can explore the Sariska Tiger Reserve through guided safaris. The reserve offers both Jeep safaris and Canter (open-top bus) safaris, allowing tourists to get a glimpse of the wildlife in their natural habitat. 7. Other Attractions: Apart from wildlife, Sariska has several historical and architectural attractions nearby, such as the 17th-century Kankwari Fort, Neelkanth Temple, and the ancient Pandupol Temple. 8. Best Time to Visit: The best time to visit Sariska Tiger Reserve is during the cooler months between October and March when the weather is pleasant for wildlife viewing. Siliserh Lake:  A serene lake located about 13 km from Alwar, surrounded by hills and adorned with a beautiful palace-turned-hotel. Boating in the lake and enjoying the scenic beauty is a must. Siliserh Lake is a picturesque lake located near Alwar city in the state of Rajasthan, India. It is a popular tourist destination known for its serene surroundings and historical significance. Here are some key details about Siliserh Lake: 1. Location: Siliserh Lake is situated about 13 kilometers southwest of Alwar city, nestled amidst the Aravalli Range. 2. Origin: The lake was built in 1845 by Maharaja Vinay Singh as a part of a water conservation project to provide water to the residents of Alwar and nearby villages. It was named after the queen, Shila, the consort of Maharaja Vinay Singh. 3. Scenic Beauty: The lake is surrounded by lush green hills, making it a tranquil and picturesque spot. The scenic beauty of the lake and its surroundings attracts visitors throughout the year. 4. Boating: Boating facilities are available at Siliserh Lake, allowing visitors to enjoy a peaceful boat ride on the serene waters. It’s a popular activity and provides an opportunity to take in the beauty of the lake from a different perspective. 5. Siliserh Palace: The lake also houses the beautiful Siliserh Palace, which was originally built as a royal hunting lodge. It has now been converted into a heritage hotel by the Rajasthan Tourism Development Corporation (RTDC). The palace offers a royal ambiance and a chance to experience the regal lifestyle. 6. Birdwatching: The lake and its surroundings attract a variety of bird species, making it a good spot for birdwatching. Bird enthusiasts can spot several resident and migratory birds around the lake. 7. Picnicking and Relaxation: Siliserh Lake is an ideal spot for picnics and leisurely walks. Many visitors come here to relax and enjoy the serene environment. 8. Light and Sound Show: The Siliserh Lake also hosts an evening light and sound show that narrates the history and legends associated with the lake and the surrounding region. 9. Accessibility: The lake is easily accessible from Alwar city, and it takes around 30 minutes by road to reach the lake. 10. Best Time to Visit: The best time to visit Siliserh Lake is during the monsoon and winter seasons, from July to March, when the weather is pleasant, and the surroundings are lush green. Moosi Maharani ki Chhatri Moosi Maharani ki Chhatri, also known as Moosi Rani ki Chhatri or Moosi Rani ki Chatri, is a historic cenotaph (chhatri) located in Alwar, Rajasthan, India. It is one of the notable architectural landmarks in the city and holds historical significance. Here are some key details about Moosi Maharani ki Chhatri: 1. History: Moosi Maharani ki Chhatri was constructed in the memory of Maharaja Bakhtawar

Culture Delhi Destination Travel

नोएडा में खुला देश का पहला वैदिक थीम पार्क : वेद वन(Ved Van Park)

  • 0 Comments

जैसे जैसे हम मॉडर्न (Modern) होते जा रहे हैं वैसे वैसे हीं हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। आज के समय में तो पार्क भी काफी मॉडर्न हो गए हैं। लेकिन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के नोएडा में एक ऐसा पार्क खुला है, जो हमारी संस्कृति को दुनिया के सामने बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत (represents our culture) कर रहा है। इस पार्क का नाम है वेद वन! जी हाँ आपने बिल्कुल सही पढ़ा। नोएडा के सेक्टर 78 (Noida sector-78) में वेदों की थीम पर एक पार्क बना है, जो कि भारत का पहला वैदिक थीम पार्क (Vaidik theme park) है। वेदवन पार्क का इनॉग्रेशन (Inaugration) 4 जुलाई को किया गया और फिलहाल इसकी एंट्री फ्री (free entry) है। अभी इस पार्क के उद्घाटन को ज्यादा दिन नहीं हुआ है, फिर भी यहां लोगों की भीड़ उमड़ने लगी है। दूर-दूर से लोग यहां हैंग आउट (hangout) करने आते हैं। यह पार्क दिल्ली एनसीआर में काफी पॉपुलर हो चुका है।….और हो भी क्यों ना इस पार्क का थीम हीं कुछ ऐसा है कि जो भी इसके बारे में सुनता है वह यहां आना चाहता है। 1. क्या है खास?(what is special about this park?) : वैदिक थीम पर बने होने के कारण यह पार्क बहुत ही शांत वातावरण (peaceful environment) वाला है। यहां आने पर आपको इंटरनल पीस (internal peace) फील होगा। जिसकी जरूरत आज के भाग दौर वाले समय में सभी को है। यहां जगह-जगह वैदिक कलाकृतियां बनी हुई है जो देखने में तो खूबसूरत है हीं साथ ही बहुत सारे मैसेज भी लोगों को देते हैं। इस पार्क में चारों वेदों के बारे में जानकारियां दी गई हैं। जिससे आज का यूथ हमारे वैदिक कल्चर (vaidik culture) को समझ सके। 2. लेजर शो है मुख्य आकर्षण (Laser show is centre of attraction) : वेदों पर आधारित इस खूबसूरत से पार्क का सेंटर ऑफ़ अट्रैक्शन यहां हर रोज शाम को होने वाला लेजर शो है। जिसमें वेदों के बारे में बहुत सारी जानकारियां दी जाती हैं। दिन भर तो आपको यहां बहुत कम भीड़ देखने को मिलेगी, लेकिन जैसे ही शाम गहरी होती जाती है और लेजर शो का वक्त होता है, यहां सैकड़ों लोग आ जाते हैं। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह पार्क दिल्ली एनसीआर (Delhi-NCR) में इतने कम दिनों में हीं कितना फेमस (famous) हो चुका है। 3. क्या है टाइमिंग? (What is the timing of Ved Van park?) :इस पार्क की टाइमिंग सुबह 6:00 बजे से लेकर रात 9:00 बजे तक की है और इस पार्क में कोई भी एंट्री टिकट (entry ticket) नहीं लगता है। वहीं अगर इस पार्क में होने वाले लेजर शो की टाइमिंग की बात की जाए तो लेजर शो हर रात 8:00 बजे शुरू होता है। 4. वेदवन जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Ved van) :यूं तो वेद वन हमेशा हीं खूबसूरत लगता है। इसलिए यहाँ घूमने कभी भी जाया जा सकता है, लेकिन शाम के समय में यहां घूमना वाकई बहुत खूबसूरत एहसास होता है। जैसे-जैसे अंधेरा बढ़ता है और लाइट्स ऑन होते जाते हैं, इस पार्क की खूबसूरती में चार चांद लग जाता है। लेजर शो की टाइमिंग (timing of laser show) भी 8:00 बजे शाम की है। इसलिए शाम में आकर पार्क को एक्सप्लोर (explore) करना एक अच्छा डिसीजन होगा। Also Read- Best Places to visit in Alwar

Destination Review Travel

Top 6 Amazing & Most Famous Museums of India

  • 0 Comments

इतिहास में रुचि रखने वाले हर व्यक्ति की खोज म्यूजियम पर आकर ठहर जाती है, क्योंकि म्यूजियम एक ऐसा जगह होता है जहां सालों के सभ्यताओं और इतिहास को एक ही बार में समझा और जिया जा सकता है। अगर आपकी भी रुचि इतिहास में है और आप भी म्यूजियम जाना पसंद करते हैं तो यह ब्लॉग आपके लिए ही है। क्योंकि यहां हम आपको बताने वाले हैं देश के कुछ बेहतरीन म्यूजियम्स के बारे में। आइए जानते हैं देश के उन म्यूजियम के बारे में जहां ना सिर्फ भारत के बल्कि संसार के इतिहास से जुड़े हुए वस्तुओं को भी देखा और समझा जा सकता है। 1. राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्ली (National Museum Delhi) : राजधानी दिल्ली में स्थित इस संग्रहालय के स्थापना की नींव आजादी से पहले ही रखी गई थी। इस म्यूजियम का उद्घाटन 15 अगस्त 1949 को भारत के गवर्नर जनरल श्री आरसी राजगोपालाचारी ने राष्ट्रपति भवन में किया था। 12 मई 1955 को भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसके नए भवन की आधारशिला रखी। इस संग्रहालय में आकर भारत के समृद्धि इतिहास को बहुत अच्छे तरीके से समझा जा सकता है। यहां कई तरह की ऐतिहासिक वस्तुओं का संग्रह किया गया है। जिनमें कुछ भारतीय तो कुछ विदेशों से लाई गयी वस्तुएँ हैं। यहां लगभग 2,00,000 एंटीक चीजों का कलेक्शन किया गया है। जो अपने आप में हीं एक बहुत बड़ी संख्या है। https://fivecolorsoftravel.com/know-about-cultural-heritage-best-places-of-jaipur/ 2. नेशनल रेल म्यूजियम दिल्ली (National rail museum Delhi) : यह म्यूजियम दिल्ली में स्थित है और पूरी तरह से भारतीय रेलवे को समर्पित है। इस म्यूजियम की खास बात यह है कि यहां जाकर आप भारतीय रेलवे के इतिहास को बहुत ही अच्छी तरीके से समझ पाएंगे। यह रेल म्यूजियम करीब 11 एकड़ से अधिक जगह पर फैला हुआ है और भारत के 166 वर्षों के गौरवशाली यात्रा को अपने आप में सहेजे हुए है। इस म्यूजियम में भाप से चलने वाले इंजन से लेकर अत्याधुनिक इंजन तक की यात्रा को सहेज कर रखा गया है।यहां आपको भाप, डीजल और इलेक्ट्रिक इंजनों के साथ-साथ वैगन, गाड़ियां, बख्तरबंद ट्रेनें आदि का संग्रह देखने को मिल जाएगा।यहां आप टॉय ट्रेन की सवारी भी कर सकते हैं। साथ ही 3D वर्चुअल कोच, डीजल और स्टीम इंजन के कोच में सैर करने के साथ-साथ हाल ही में बने रेल रेस्टोरेंट में लंच का भी आनंद ले सकते हैं। 3. सालार जंग म्यूजियम हैदराबाद (Salar jung museum Hyderabad) :सालार जंग म्युजियम एक कला संग्रहालय (Art Museum) है जो कि हैदराबाद में स्थित है। इस म्यूजियम का उद्घाटन 16 दिसंबर 1951 को हुआ था।यह भारत के सबसे समृद्ध संग्रहालय में से एक है और यहां मुख्यतः सालारजंग परिवार का एक निजी कला संग्रह किया गया है। इसमें फारसी, जापानी, नेपाली, चीनी, एवं उत्तरी अमेरिका और यूरोप से लाई गई मूर्तियों, पेंटिंग्स, नक्काशी किए गए वस्तुओं और पांडुलिपियों का संग्रह किया गया है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह म्यूजियम दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालयओं की सूची में भी शामिल है। 4. गवर्नमेंट म्यूजियम चेन्नई (Government Museum Chennai) : चेन्नई का यह गवर्नमेंट म्यूजियम एक आर्ट म्यूजियम है और यह भारत का दूसरा सबसे पुराना म्यूजियम है। इसकी शुरुआत 1851 ईसवी में हुई थी। इस म्यूजियम का मुख्य आकर्षण यहाँ की पुरातत्विक और शास्त्रीय वस्तुओं का कलेक्शन है। बताया जाता है कि यूरोप के बाहर यह दुनिया का सबसे बड़ा पुरातात्विक अवशेषों का संग्रह है। इस म्यूजियम में जाकर आप मनुष्यों के इतिहास और उनके विकास के बारे में काफी कुछ जान सकते हैं। यहां कई सारी दुर्लभ पेंटिंग्स भी रखी गई हैं। जिन्हें ना सिर्फ़ एशिया बल्कि यूरोप के देशों से भी लाया गया है। इस म्यूजियम को फिलहाल भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा चलाया जाता है। यहां कई सारी मूर्तियां ऐसी भी हैं जो 500 से 1000 ईसा पूर्व की हैं। इसी बात से पता चलता है कि यह म्यूजियम कितना विशाल और ज्ञानवर्धक है। अगर आपको भी कभी चेन्नई जाने का मौका मिले तो आप इस म्यूजियम को एक बार विजिट कर सकते हैं। यह आपके लिए टोटली वर्थ इट होगा। 5. द कैलिको म्यूजियम आफ टैक्सटाइल्स अहमदाबाद ( The Calico museum of textiles Ahmedabad) : आपको शायद यह जानकर हैरानी होगी कि हमारे भारत में कपड़ों का भी एक म्यूजियम है, जोकि अहमदाबाद में स्थित है। म्यूजियम का नाम द कैलिको म्यूजियम ऑफ टैक्सटाइल्स है, जोकि साराभाई फाउंडेशन के द्वारा चलाया जाता है। यह भारत का सबसे प्रमुख टैक्सटाइल म्यूजियम है। यहां के भारतीय कपड़ों के संग्रह को दुनिया में बेहतरीन और वाइड माना जाता है। यहां आपको कपड़ों के साथ-साथ साराभाई फाउंडेशन के दक्षिण भारतीय कला और जैन कलाओं के लघु चित्रों के संग्रहों के बारे में भी जानने को मिलेगा। इस संग्रहालय की स्थापना गौतम साराभाई और गिरा साराभाई द्वारा किया गया था। उस समय अहमदाबाद कपड़ा उद्योग का केंद्र था। यह संग्रहालय मूल रूप से कपड़ा उद्योग के एक कैलिको मिल्स में लगाया गया था। लेकिन धीरे-धीरे यह संग्रह बढ़ता गया। वर्ष 1983 में शाहीबाग के साराभाई हाउस में इस म्यूजियम को ट्रांसफर कर दिया गया। 6. छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय मुंबई ( Chhatrapati shivaji maharaj Museum Mumbai) :छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय का पुराना नाम प्रिंस ऑफ वेल्स संग्रहालय है। जो कि मुंबई में स्थित है। इसमें प्राचीन से लेकर आधुनिक भारत तक की यात्रा को बहुत ही आसानी से देखा और समझा जा सकता है। इसकी स्थापना ब्रिटिश शासन के दौरान ही हुई थी। बताया जाता है कि इसे प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत यात्रा के याद में बनवाया गया था। यह संग्रहालय गेटवे ऑफ इंडिया के पास ही है और यहां लगभग 50000 से भी ज्यादा कलाकृतियों को सहेज कर रखा गया है। 1998 में इस म्यूजियम का नाम बदलकर मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रख दिया गया था। यहां आपको मुगल, मराठा और जैन शैली की वास्तुकलाओं (architecture) का संग्रह देखने को मिल जायेगा।