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Durga Puja: जानिए क्यों खास है कोलकाता की दुर्गा पूजा?

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जब भी दुर्गा पूजा का जिक्र होता है, हमारे जहन में पश्चिम बंगाल और कोलकाता का नाम जरूर आता है। सबसे प्रमुख पर्व होने के नाते पश्चिम बंगाल का दशहरा पूरे दुनिया में मशहूर है। दूर-दूर से लोग दुर्गा पूजा के समय यहां घूमने आते हैं। अगर पश्चिम बंगाल की संस्कृति को एक्सप्लोर करना हो तो इसके लिए सबसे बेस्ट तरीका होता है दुर्गा पूजा के समय कोलकाता जाना। कहते हैं हर एक चीज की प्रसिद्धि के पीछे का कोई ना कोई कारण जरूर होता है और कोलकाता के दुर्गा पूजा की प्रसिद्धि का कारण हैं वहां लगने वाले खूबसूरत और भव्य पंडाल। जिनकी खूबसूरती देखते हीं बनती है।(Durga Puja) अगर आप भी दशहरे के समय कहीं घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं तो कोलकाता से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती। यहां की रंग बिरंगी लाइटों से सजी हुई सड़कें और बड़े-बड़े भव्य पंडाल देखकर आप यहाँ की चकाचौंध में खो कर रह जाएंगे। दुर्गा पूजा कार्निवल (Durga Puja Immersion Carnival) कोलकाता में हर वर्ष दुर्गा पूजा के समय कार्निवल फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। इस कार्निवल फेस्टिवल की शुरुआत 2016 में की गई थी। कोरोना के समय वर्ष 2020 और 2021 में इस कार्निवल का आयोजन नहीं किया गया, लेकिन 2022 से फिर से इसका आयोजन शुरू कर दिया गया। यह कार्निवल पर्यटकों में दुर्गा पूजा के रोमांच को और भी ज्यादा बढ़ा देता है। क्यों है खास कोलकाता का दशहरा? (What’s special about Durga puja of Kolkata?) फिजाओं में घुल जाती है स्पिरिचुअलिटी (Spirituality is in the air) अगर कोलकाता के दुर्गा पूजा की थीम से हटकर बात की जाए तो यहां के फिजाओं में फैली धूप की सुगंध, ढाक की लयबद्ध थाप और बंगाली रीति रिवाज से किए जा रहे सारे अनुष्ठानों को देखकर आपके अंदर अपने आप स्पिरिचुअलिटी को लेकर विश्वास और बढ़ता जाएगा। आप भी यहीं के रंग में रंग कर पूरी श्रद्धा से देवी मां की आराधना में लीन हो जाएंगे। कोलकाता आने का सबसे सही समय (Best time to visit Kolkata) कोलकाता आने की अगर प्लानिंग कर रहे हैं तो कोलकाता आने के लिए सबसे सही समय दुर्गा पूजा का ही होता है। क्योंकि इस समय आप दुर्गा पूजा को तो एक्सप्लोर कर हीं सकते हैं साथ हीं आप कोलकाता के लोकल विजिटिंग प्लेसेस को भी कवर कर सकते हैं। कैसे पहुंचे कोलकाता? (How to visit Kolkata? ) कोलकाता देश के बाकी राज्यों और सभी प्रमुख शहरों से काफी अच्छे तरीके से रेल मार्ग द्वारा कनेक्टेड है। अगर आप कोलकाता आना चाह रहे हैं तो आप रेल मार्ग का उपयोग करके यहां आ सकते हैं। इसके अलावा आप हवाई मार्ग और सड़क मार्ग का उपयोग करके भी कोलकाता पहुंच सकते हैं। हवाई मार्ग से कोलकाता पहुंचने के लिए आपको कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक की फ्लाइट लेनी होगी।

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10 Best National Parks of India

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बरसात का सीजन खत्म हो गया है और धीरे-धीरे ठंड बढ़ने लगा है, ऐसे में नेशनल पार्क्स भी जंगल सफारी और टूर के लिए खुल गए हैं। अगर आप अभी किसी अच्छे से वीकेंड टूर की प्लानिंग कर रहे हैं तो जंगल सफारी और टूर आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं भारत के कुछ चुनिंदा नेशनल पार्क्स के बारे में, जहां आप अच्छे से बायोडायवर्सिटी को एक्सप्लोर कर सकते हैं और अपना वीकेंड एंजॉय कर सकते हैं। 1. गिर राष्ट्रीय उद्यान (Gir National Park) चारों तरफ घने जंगल और स्वतंत्र रूप से बिना किसी डर के घूम रहे बब्बर शेर, गुजरात के सोमनाथ जिले में स्थित गिर नेशनल पार्क की पहचान हैं। यहां मैमल्स (mammals) के 38 प्रजाति पक्षियों (birds) के 300 से अधिक प्रजाति रेप्टाइल्स (reptiles) के साथ इस प्रजाति और इनसेक्टस (insects) के 2,000 से भी ज्यादा प्रजाति पाए जाते हैं। यह नेशनल पार्क सिर्फ जानवरों के लिए नहीं बल्कि यहां पाए जाने वाले पौधों के विविधता के लिए भी मशहूर है। 2. बांधवगढ़ नेशनल पार्क (Bandhavgarh National Park) मध्य प्रदेश के विंध्याचल पर्वत में स्थित बांधवगढ़ नेशनल पार्क अपने बाघों के लिए प्रसिद्ध है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में इन बाघों को देखने के लिए दुनिया के अलग-अलग कोने से साल भर में लगभग 50,000 से भी ज्यादा पर्यटक आते हैं और जंगल सफारी के जरिए बाघों की खोज में निकल जाते हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क लगभग 105 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस नेशनल पार्क में बाघ के अलावा कई अन्य प्रकार के स्तनधारी जीव भी पाए जाते हैं। जिनमें तेंदुआ, भेड़िया, सियार, हिरण, भालू, लंगूर, बंदर, जंगली सूअर, जंगली कुत्ते, लोथल बीयर और चीतल जैसे जीव प्रमुख है। वर्तमान समय में बांधवगढ़ नेशनल पार्क में 165 बाघ अपना जीवन यापन कर रहे हैं। 3. मानस नेशनल पार्क (Manas National Park) असम के मानस नदी के तट पर स्थित मानस नेशनल पार्क भारत और भूटान दोनों हीं देश में फैला हुआ है। मानस नदी भारत और भूटान के बॉर्डर पर बहती है, जिसके दोनों ओर घने जंगल बसे हैं। भारत में इस जंगल के भूभाग को मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता हैं। वहीं भूटान में फैले जंगल के क्षेत्र को रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है। मानस नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। असम का यह मानस नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन इसे भी यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया गया है। लगभग 500 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ यह नेशनल पार्क भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित असम का प्रमुख नेशनल पार्क है। 4. राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji National Park) उत्तराखंड राज्य के देहरादून और हरिद्वार में स्थित राजाजी नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 820.5 वर्ग किलोमीटर है। हाथियों, तेंदुओं, बाघों और हिरनों जैसे जानवरों को अपने में पनाह देने वाला यह पार्क पर्यटकों के मन को भी काफी लुभाता है। सुहाने मौसम, हरे भरे पेड़ और पहाड़ियों के बीच खुले में घूम रहे जानवर को देखना अपने आप में ही अविस्मरणीय दृश्य होता है। 5. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (Valmiki Tiger Reserve) चारों तरफ घने जंगल और स्वतंत्र रूप से बिना किसी डर के रह रहे जंगली जानवर!  वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की यही खासियत लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती हैं। बापू के पहले सत्याग्रह की भूमि पश्चिम चंपारण, उपजाऊ भूमि के साथ-साथ टाइगर रिजर्व के लिए भी मशहूर है। यहां स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व एक राष्ट्रीय उद्यान है, जिसका उद्देश्य बाघों का संरक्षण करना है। जंगल सफारी के शौकीन लोगों के घूमने के लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व लगभग 900 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ बिहार का इकलौता राष्ट्रीय उद्यान है। यहां बाघों की अनुमानित संख्या लगभग 50 है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी भी की जा सकती है। यहां जंगल सफारी के लिए एक जीप में अधिकतम 6 लोगों को सीट दी जा सकती है। 6. कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) देश के सबसे प्रसिद्ध नेशनल पार्क में से एक कूनो नेशनल पार्क हाल में ही काफी चर्चा का विषय रहा था। यहां कुछ दिनों पहले नामीबिया से 8 चीतों को ला कर रखा गया था। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित इस नेशनल पार्क में आकर आपको एक अलग ही अनुभूति होगी। चारों ओर घने जंगल और बेफिक्र घूम रहे जंगली जानवर किसी अलग ही दुनिया का आभास करा देते हैं। यह नेशनल पार्क कूनो नदी के तट पर स्थित है। यह कह सकते हैं कि कूनो नदी यहां की जीवन रेखा है। यहां के जंगली जानवरों को गर्मी के समय सिर्फ इसी नदी का सहारा होता है।  बात करें अगर इस पार्क के फैलाव की तो यह नेशनल पार्क 415 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और हजारों जानवरों का आसरा है। 7. काजीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park) असम के सोनितपुर जिले में स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क एक सिंग वाले गैंडे के लिए पूरी दुनिया भर में जाना जाता है। असम का यह काजीरंगा नेशनल पार्क हमेशा से हीं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यह नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और पूरे भारत में पाए जाने वाले 90% गैंडे काजीरंगा नेशनल पार्क में ही पाए जाते हैं। लेकिन काजीरंगा नेशनल पार्क इन गैंडों के अतिरिक्त अन्य कई जानवरों का आशियाना है। जिनमें मुख्यतः बाघ, हाथी, पैंथर, जंगली भैंसे, भालू और अन्य कई प्रकार की पक्षियाँ शामिल हैं। 8. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (Jim Corbette National Park) जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क जिसे पहले हैली नेशनल पार्क भी कहा जाता था। यह हमारे देश का सबसे पुराना नेशनल पार्क भी है। यह उत्तराखंड के रामनगर में स्थित है। दिल्ली से जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की दूरी करीबन 250 किलोमीटर है। यहां पर आप किसी भी साधन से बड़ी ही आसानी से पहुंच सकते है। यहां पर आपको 2000 से भी ज्यादा रंग बिरंगी तितलियों की प्रजातियां मिल जाएगी। आप यहां किफायती दाम में होटल या रिसोर्ट में भी रुक सकते हैं। यह कॉर्बेट

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टूर के लिए बेस्ट है मानस नेशनल पार्क जानिए यहां के टूर पैकेजों के बारे में

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असम के मानस नदी के तट पर स्थित मानस नेशनल पार्क भारत और भूटान दोनों हीं देश में फैला हुआ है। मानस नदी भारत और भूटान के बॉर्डर पर बहती है, जिसके दोनों ओर घने जंगल बसे हैं। भारत में इस जंगल के भूभाग को मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता हैं। वहीं भूटान में फैले जंगल के क्षेत्र को रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है।मानस नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। नॉर्थ ईस्ट में फेवरेबल कंडीशन होने के कारण यहां रिच बायोडायवर्सिटी देखने को मिलती है और यहीं वजह है कि यहां कई सारे नेशनल पार्क्स हैं। असम का यह मानस नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन इसे भी यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया गया है। लगभग 500 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ यह नेशनल पार्क भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित असम का प्रमुख नेशनल पार्क है। ब्रह्मपुत्र नदी इस नेशनल पार्क की जीवन दायिनी नदी है। आइये जानते है मानस नेशनल पार्क के जंगल सफारी के पैकजों के बारें में मानस नेशनल पार्क में जंगल सफारी के लिए दो तरह के टूर पैकेजेस उपलब्ध है पहला टूर पैकेज टूर प्लानर (Tour Planner) पहला दिनबारपेटा/बंगईगांव/गुवाहाटी से आपको पिकअप किया जायेगा। इसके बाद आपको मानस नेशनल पार्क ले जाया जायेगा। मानस नेशनल पार्क उत्तर पूर्व भारत के प्रमुख नेशनल पार्कों में से एक है। आप रात्रि में मानस नेशनल पार्क में ही रहेंगे। दूसरा दिनअगले दिन आपको एलीफैंट सफारी करने ले जाया जायेगा। एलीफैंट सफारी करने के बाद आप होटल वापस लौटेंगे। आप होटल आकर फ्रेश होने के बाद नाश्ता करेंगे। दोपहर में आपको जीप सफारी के लिए ले जाया जायेगा। जीप सफारी के दौरान आपको एक सींग वाले गैंडे, बाघ, एशियाई हाथी, जंगली भैंसे आदि जंगली जानवर देखने को मिलेंगी। तीसरा दिनअंतिम दिन आपको बारपेटा/बंगईगांव/गुवाहाटी वापस छोड़ दिया जायेगा। दूसरा टूर पैकेज टूर प्लानर (Tour Planner) पहला दिनबोंगाईगांव/बारपेटा/गुवाहाटी से आपको पिकअप किया जायेगा। इसके बाद आपको मानस राष्ट्रीय उद्यान के जंगल गांव बशबारी ले जाया जायेगा। मानस नेशनल पार्क उत्तर पूर्व भारत के प्रमुख नेशनल पार्कों में से एक है। आप रात्रि में बशबारी गांव में रहेंगे। दूसरा दिनअगले दिन आप नाश्ते के बाद मानस राष्ट्रीय उद्यान के मेन एरियाज को कवर करेंगे। आप इन एरियाज में एक सींग वाले गैंडे, बाघ, एशियाई हाथी, जंगली भैंसे आदि जंगली जानवर देखेंगे। आप रात्रि विश्राम बशबारी गांव में ही रहेंगे। तीसरा दिनअगले दिन आप एलीफैंट सफारी और नाश्ता करके काजीरंगा नेशनल पार्क की ओर रवाना हो जायेंगे। काजीरंगा नेशनल पार्क भारत के प्रमुख नेशनल पार्कों में आता है। आप काजीरंगा नेशनल पार्क के कोहोरा रेंज में रात्रि विश्राम करेंगे। चौथा दिनअगले दिन आप सुबह एलीफैंट सफारी करेंगे। एलीफैंट सफारी करने के बाद नाश्ता करने रिसॉर्ट वापस आएंगे। नाश्ता करके आप जिप्सी द्वारा जंगल सफारी करेंगे। आप कोहोरा रेंज में ही रात्रि विश्राम करेंगे। पांचवा दिनअंतिम दिन आपको नाश्ते के बाद गुवाहाटी वापस छोड़ दिया जायेगा।

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बेहतरीन पर्यटन स्थलों से भरा हुआ है पूर्वोत्तर का गेटवे असम

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भारत के पूर्वोत्तर में स्थित राज्य असम अपने खूबसूरत वादियों और चाय के बागानों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। असम में बर्फीले सफेद ऊंचे पहाड़ भी हैं और हरे भरे चाय के बागान भी, यहां रिलिजियस टूरिज्म को बढ़ावा देने वाले मंदिर भी हैं और कई वन्य जीव अभ्यारण्य भी। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के ब्लॉग में हम आपको बताने जा रहे हैं असम के कुछ फेमस टूरिस्ट प्लेस के बारे में, जहां एक बार जाना तो बनता है। 1. काजीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park) असम के सोनितपुर जिले में स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क एक सिंग वाले गैंडे के लिए पूरी दुनिया भर में जाना जाता है। असम का यह काजीरंगा नेशनल पार्क हमेशा से हीं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यह नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और पूरे भारत में पाए जाने वाले 90% गैंडे काजीरंगा नेशनल पार्क में ही पाए जाते हैं। लेकिन काजीरंगा नेशनल पार्क इन गैंडों के अतिरिक्त अन्य कई जानवरों का आशियाना है। जिनमें मुख्यतः बाघ, हाथी, पैंथर, जंगली भैंसे, भालू और अन्य कई प्रकार की पक्षियाँ शामिल हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और अगर इसके भौगोलिक परिस्थितियों की बात की जाए तो यह ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे कार्बी की पहाड़ियों तक फैला हुआ है। काजीरंगा नेशनल पार्क पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले असम के गुवाहाटी शहर तक पहुंचना होगा। काजीरंगा नेशनल पार्क असम की राजधानी गुवाहाटी से लगभग 194 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अगर आप यहां फ्लाइट से आना चाहते हैं तो आप गुवाहाटी हवाई अड्डे तक की फ्लाइट ले सकते हैं।  2. मानस नेशनल पार्क (Manas National Park) असम के मानस नदी के तट पर स्थित मानस नेशनल पार्क भारत और भूटान दोनों हीं देश में फैला हुआ है। मानस नदी भारत और भूटान के बॉर्डर पर बहती है, जिसके दोनों ओर घने जंगल बसे हैं। भारत में इस जंगल के भूभाग को मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता हैं। वहीं भूटान में फैले जंगल के क्षेत्र को रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है। मानस नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी।  मानस नेशनल पार्क पहुंचने के लिए आप सड़क रेल और हवाई तीनों ही मार्गों का उपयोग कर सकते हैं। अगर आप हवाई मार्ग से मानस नेशनल पार्क पहुंचना चाह रहे हैं तो आपको सबसे पहले गुवाहाटी एयरपोर्ट पहुंचना होगा। जो कि असम की राजधानी गुवाहाटी में स्थित है। रेल मार्ग से यहां पहुंचने के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन बरपेटा रेलवे स्टेशन है जो मानस नेशनल पार्क से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अगर आप मानस नेशनल पार्क जाने के लिए सड़क मार्ग का उपयोग करना चाहते हैं तो सिलीगुड़ी गलियारा के द्वारा बड़े ही आसानी से मानस नेशनल पार्क तक पहुंचा जा सकता है। 3. दिसपुर (Dispur) असम के दिसपुर शहर को उसके खूबसूरत प्राकृतिक नजारों और प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों के लिए जाना जाता है। इस शहर में कई ऐसे टूरिस्ट डेस्टिनेशंस हैं जिनकी ओर पर्यटकों का मुख्य रूप से रुझान होता है। अगर आप असम आ रहे हैं तो आप इस शहर को घूमना बिल्कुल भी मिस नहीं कर सकते हैं। वरना असम का टूर आपके लिए अधूरा माना जाएगा। दिसपुर के टूरिस्ट प्लेस में से एक है सूअल्कुची गांव। इस गांव के लोग बहुत ही साधारण और आम जीवन जीने वाले लोग हैं। इस गांव को पूर्व का मैनचेस्टर भी कहा जाता है। असम घूमने आने वाले पर्यटकों को इस गांव में एक बार जरूर जाना चाहिए। यह गांव रेशम के उत्पादन के लिए भी काफी मशहूर है। दिसपुर के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में कामाख्या देवी मंदिर का भी नाम आता है। जो राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। जहां दूर-दूर से लोग देवी कामाख्या की आराधना करने के लिए आते हैं। भारत के सबसे प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है कामाख्या शक्तिपीठ। कामाख्या शक्तिपीठ के अलावा दिसपुर में एक और प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल है। जिसका नाम है सिद्धेश्वर देवालय जो सुअल्कुची गांव में स्थित है। इस मंदिर में कई देवी देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन विशेष रूप से यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। जनार्दन टेंपल दिसपुर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। जिसका निर्माण दसवीं शताब्दी में करवाया गया था और 17वीं शताब्दी में इसका जीर्णोद्धार करवाया गया था। अगर इस मंदिर के वास्तुकला की बात करें तो यहां बौद्ध और जैन दोनों तरह के वास्तुकलाओं का संगम देखने को मिलता है। इसके अलावा दिसपुर में वशिष्ठ आश्रम भी है। इसके बारे में बताया जाता है कि इस आश्रम का संबंध रामायण काल के गुरु वशिष्ट से है। दिसपुर में असम स्टेट जॉन बोटैनिकल गार्डन भी है। जहां आप कई तरह के पेड़ पौधों के साथ-साथ पक्षियों के प्रजातियों को भी एक्सप्लोर कर सकते हैं। 4. माजुली द्वीप (Majuli Island) माजुली आईलैंड दुनिया का सबसे बड़ा नेचुरल रिवर आईलैंड है, जोकि ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित है। अगर आप माजुली आईलैंड घूमना चाहते हैं तो इसके लिए आपको निमती घाट से फेरी के जरिए लगभग डेढ़ घंटे का सफर करके माजुली आईलैंड पहुंचना होगा। अगर आप फेरी नहीं लेना चाहते तो आप बाय ब्रिज भी माजुली आईलैंड जा सकते हैं। जिसके लिए डिब्रूगढ़ के पास से ही एक ब्रिज जाती है। माजुली आईलैंड के खास होने के पीछे और भी कई सारे कारण हैं। जिनमें से सबसे प्रमुख कारण यहां का शांत माहौल और यहां की संस्कृति है। यहां के लोग बहुत हीं सीधे-सादे और सरल व्यक्तित्व के होते हैं। अगर आप शहरों के पॉल्यूशन और शोर सराबे से दूर कुछ दिन शांति से बिताना चाहते हैं तो माजुली आईलैंड का टूर आपके लिए बहुत ही बेहतरीन साबित होगा। माजुली आईलैंड से सनराइज और सनसेट दोनों ही बहुत ही खूबसूरत दिखता है। क्योंकि यह आइलैंड तीन तरफ से ब्रह्मपुत्र नदी और एक तरफ से एक लोकल नदी की धारा से घिरा है। जिसके कारण यह चारों ओर से दूर-दूर तक पानी से घिरा हुआ नजर आता है। जो आयरलैंड की खूबसूरती में चार

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हर तरह के टूरिज्म के लिए बेस्ट है सह्याद्रि की पहाड़ियाँ

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सह्याद्री की पहाड़ियों की असीम खूबसूरती दुनिया भर से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। पहाड़ियों की श्रृंखला में खतरनाक ट्रैकिंग डेस्टिनेशंस के साथ-साथ कुछ ऐतिहासिक किले और कई सारे प्राकृतिक झरने भी हैं जो पर्यटकों के मनमोहन में सक्षम है। यहां एडवेंचर टूरिज्म से लेकर रिलिजियस टूरिज्म तक के लिए हर तरह के पर्यटन स्थल मौजूद हैं। आज के फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको सह्याद्रि की पहाड़ियों में बसे कुछ खूबसूरत पर्यटन स्थलों के बारें में बताएँगे। 1. एलोरा की गुफाएँ (Ellora Caves) चट्टानों पर की गई शिल्पकलाओं के जरिए विश्व विरासत स्थल में अपना स्थान बनाने वाले महाराष्ट्र के एलोरा की गुफाओं की खूबसूरती देखने लायक है। भारतीय इतिहास के उत्कृष्ट कलाकारी को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने वाली ये गुफाएं आज से लगभग हजारों साल पुरानी हैं। लेकिन आज भी इन गुफाओं में चट्टानों पर की गई नक्काशियों में वहीं फिनिशिंग देखने को मिलती है जो नए नक्काशियों में मिलते हैं। सह्याद्री पर्वत श्रृंखलाओं को काट कर बनाए गए इस गुफा की श्रृंखलाओं में मानव द्वारा की गई बेहतरीन शिल्पकारी और नक्काशी की कला देखने को मिलती है। एलोरा की गुफ़ाएँ महाराष्ट्र के संभाजी नगर अर्थात औरंगाबाद जिले में स्थित है। अगर आप एलोरा की गुफाओं को घूमना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सबसे पहले औरंगाबाद आना पड़ेगा। औरंगाबाद से एलोरा की गुफाओं की दूरी लगभग 30 किलोमीटर है। जहां आप कैब बुक करके या फिर अपनी गाड़ी से आसानी से पहुंच सकते हैं। 2. अजंता की गुफाएँ (Ajanta Caves) संभाजी नगर के पहाड़ियों को खोदकर बनाई गई यह गुफाएं और उनके अंदर उकेरी गई कलाकृतियां भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया से पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए अजंता कई वर्षों से शोध का एक महत्वपूर्ण स्थान बना हुआ है। अजंता की गुफाएं बौद्ध धर्म के उपासकों के लिए किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं है। इन गुफाओं में भगवान बुद्ध के हजारों मूर्तियों को उकेरा गया है। अगर इतिहास की बात करें तो अजंता की गुफाओं का निर्माण कई सौ सालों के मेहनत की परिणिति है। इतिहासकारों का मानना है कि गुफा नंबर 9 और 10 को बनाने में 400 सालों का वक्त लगा था और इनका निर्माण 200 ईसा पूर्व से 200 ई के बीच करवाया गया था। गुफा नंबर 9 और 10 को अजंता की सबसे पुरानी गुफा के रूप में जाना जाता है। वहीं गुफा नंबर 4, 6, 11, 15, 16 और 17 के निर्माण के बारे में बताया जाता है कि इनका निर्माण 350 ई से 500 ई तक के बीच में हुआ।अगर आप अजंता की गुफाओं को घूमना चाहते हैं तो इसके लिए तीनों तरह के परिवहन माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं। अजंता की गुफाएं महाराष्ट्र के औरंगाबाद में स्थित है। इसलिए अगर आप बाय रोड आना चाहते हैं तो आप सबसे पहले औरंगाबाद पहुंच सकते हैं। औरंगाबाद से अजंता की गुफाओं तक पहुंचने में आपको लगभग 45 मिनट का समय लगेगा। 3. कुम्भे वॉटरफॉल (Kumbhe Waterfall) कुम्भे वॉटरफॉल के इस असीम खूबसूरती को देखने के लिए दुनिया भर के अलग-अलग कोने से पर्यटक यहां घूमने आते हैं। यहां अक्सर लोग पिकनिक मनाने, ट्रैकिंग करने और कैंप लगाने के लिए आते हैं। अगर आप नेचर को पसंद करने वाले हैं तो आपको यह जगह बहुत ही पसंद आने वाला है। नेचर फोटोग्राफी करने वाले लोगों के लिए भी कुम्भे वॉटरफॉल एक बेहतरीन फोटोग्राफी डेस्टिनेशन है। जहां से वह प्रकृति की खूबसूरती को बहुत ही बेहतरीन तरीके से अपने कैमरे में कैद कर सकते हैं। सह्याद्री की पहाड़ियों में बहता कुम्भे वॉटरफॉल महाराष्ट्र के मानगांव में स्थित है। 4. भैरवगढ़ ट्रेक (Bhairavgarh Trek) भारत में कई ट्रैकिंग डेस्टिनेशंस हैं, जो पर्यटकों का ध्यान अपनी और आकर्षित करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा ट्रैकिंग डेस्टिनेशन भी है जिसकी चढ़ाई करने से पहले एक एक सामान्य पर्यटक को सौ बार सोचना पड़ता है? भारत के इस खतरनाक ट्रेक का नाम है- “भैरवगढ़ ट्रेक” (Bhairavgarh Treck) महाराष्ट्र के जंगलों में बहुत से ऐसे ट्रेक हैं जो पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं, उन्हीं में से एक ट्रेक भैरवगढ़ भी है। लेकिन भैरवगढ़ ट्रेक पर चढ़ाई इतनी भी आसान नहीं! क्योंकि यहां सीधे 90 डिग्री ढलान पर आपको ट्रैकिंग करनी होती है। कई जगह तो आपको रैपलिंग करने की भी जरूरत पड़ेगी। यह सुनने में जितना एडवेंचरस है उतना ही ज्यादा खतरनाक ट्रेक भी है। क्योंकि इस ट्रेक पर आपको एक तरफ गहरी हजारों फीट की खाई और दूसरी तरफ ऊंचे पहाड़ देखने को मिलेंगे। इस ट्रेक पर चढ़ाई के लिए सीढियाँ बनाई गई है लेकिन कुछ जगहों पर तो यह सीढियाँ एक फीट से भी कम चौड़ाई वाली हैं। ऐसे में इतनी पतली सीढियों और एक ओर दिखने वाली सैकडों फीट गहरी खाई को देखकर किसी भी इंसान का दिल एक बार को थम जाता है। अगर आप ट्रैकिंग को पसंद करते हैं और इस तरह के एडवेंचरस ट्रेक पर जाना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले मोरोशी गांव पहुंचना होगा। भैरवगढ़ मुंबई से लगभग 100 किलोमीटर और पुणे से लगभग 140 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 5. मांगी तुंगी पिनेकल्स (Mangi Tungi Pinnacles) जैन धर्म के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक मांगी तुंगी पिनेकल्स महाराष्ट्र के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक है। जिसे एक्सप्लोर करने दूर-दूर से पर्यटक यहां घूमने आते हैं। असल में मांगी और तुंगी सह्याद्री के पहाड़ियों की दो चोटियां है जिन्हें जोड़ने के लिए सीढ़ियां बनाई गई हैं। जो दूर से देखने पर बिल्कुल ‘द ग्रेट वॉल ऑफ चाइना’ के जैसी दिखाई देती है। मांगी तुंगी पिनेकल्स तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का निर्माण करवाया गया है। अगर सीढ़ियों के संख्या की बात की जाए तो इन सीढ़ियों की संख्या लगभग 3500 से भी ज्यादा है। जिसे चढ़ने में आपको दो से तीन घंटे का समय लग सकता है। मांगी तुंगी नासिक शहर से लगभग 125 किलोमीटर, मुंबई से तकरीबन 280 किलोमीटर और पुणे शहर से लगभग 330 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अगर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट से मांगी तुंगी पहुंचना चाहते हैं तो इसके लिए

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काजीरंगा नेशनल पार्क घूमने का है प्लान तो जानिए टूर पैकेजों के इन ऑपशंस के बारे में

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असम के सोनितपुर जिले में स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क एक सिंग वाले गैंडे के लिए पूरी दुनिया भर में जाना जाता है। असम का यह काजीरंगा नेशनल पार्क हमेशा से हीं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यह नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और पूरे भारत में पाए जाने वाले 90% गैंडे काजीरंगा नेशनल पार्क में ही पाए जाते हैं। लेकिन काजीरंगा नेशनल पार्क इन गैंडों के अतिरिक्त अन्य कई जानवरों का आशियाना है। जिनमें मुख्यतः बाघ, हाथी, पैंथर, जंगली भैंसे, भालू और अन्य कई प्रकार की पक्षियाँ शामिल हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क में जंगल सफारी (Jungle Safari in Kaziranga National Park) काजीरंगा नेशनल पार्क के चार रेंज हैं। जिनमें सबसे पहला है वेस्टर्न रेंज, जिसे बागरी रेंज के नाम से भी जाना जाता है। सेंट्रल रेंज को कोहरा रेंज कहा जाता है। पूर्वी रेंज को अगरतोली रेंज के नाम से पुकारा जाता है। बुरापहाड़ रेंज का कोई दूसरा उपनाम नहीं है। अगर आप भी काजीरंगा नेशनल पार्क का टूर करना चाहते हैं तो इसके लिए यहां चार तरह के टूर पैकेज उपलब्ध हैं। 1. काजीरंगा फन टूर 1 जीप सफार:- टूर पैकेज 2 दिन और एक रात का है, जिसका टूर प्लानर कुछ इस प्रकार का होगा:- पहला दिन (गुवाहाटी से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान) यात्रा के पहले दिन आप गुवाहाटी पहुंचेंगे और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के लिए निकल जाएंगे। जहां पहुंचकर आप जंगल के रिजॉर्ट में चेक इन करेंगे। दोपहर के समय आपको भोजन उपलब्ध करवाया जाएगा। दोपहर का खाना खाकर आप काजीरंगा नेशनल पार्क के वेस्टर्न रेंज यानी बागोरी रेंज और केंद्रीय रेंज यानी कोर रेंज में जीप सफारी के लिए जाएंगे। आपको रात इसी रिसोर्ट में बितानी होगी। दूसरा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से गुवाहाटी) सुबह के समय काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के सेंट्रल रेंज यानी कोहरा रेंज और वेस्टर्न रेंज यानी बागोरी रेंज में हाथी की सफारी के लिए निकल जाएं। एलिफेंट सफारी के बाद आप काजीरंगा ऑर्किड पार्क घूमने के लिए चले जाएंं। यहां आपको ऑर्किड की 500 से भी अधिक अलग-अलग तरह की प्रजातियां देखने को मिलेगी। इसके अलावा भी आप यहां 132 अलग-अलग तरह की पत्तेदार सब्जियों की वैरायटी और बेत की 12 प्रजातियों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। इसके बाद आप असम के खूबसूरत चाय के बागानों का दौरा करने जाएंगे। चाय के बागानों में घूमने के बाद आप गुवाहाटी हवाई अड्डा के लिए निकल जाएंगे। इसके बाद आपकी यात्रा समाप्त हो जाएगी। 2. जीप और हाथी सफारी के साथ काजीरानागा मनोरंजन यात्रा:- यह टूर पैकेज तीन दिनों और दो रातों का होगा। पहला दिन (गुवाहाटी से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान) पहले दिन आप गुवाहाटी हवाई अड्डे या फिर गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के लिए निकलेंगे। जहां पहुंचकर आप रिजॉर्ट में चेक इन करेंगे और शाम को इधर-उधर टहलने के बाद रात को रिजॉर्ट में हीं आराम करेंगे। दूसरा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान)दूसरे दिन सुबह के समय काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पश्चिमी और केंद्रीय रेंज में हाथी सफारी के लिए निकल जाएंगे। हाथी सफारी के बाद आप काजीरंगा ऑर्किड पार्क का दौरा करेंगे। जहां आप 500 से भी अधिक प्रकार की ऑर्किड के प्रजातियों का निरीक्षण करेंगे और इसके अलावा खट्टे फलों और पत्तेदार सब्जियों की कई प्रजातियों के बारे में भी जानेंगे और समझेंगे। ऑर्किड पार्क से लौट कर असम के चाय बागानों के दौरे के लिए निकल जाएंगे। इसके बाद आप दोपहर में लौट कर आएंगे और भोजन करके काजीरंगा के केंद्रीय रेंज में जीप सफारी के लिए चले जाएंगे। जीप सफारी के बाद वापस रिजॉर्ट लौट कर वहीं रात को आराम करेंगे। तीसरा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से गुवाहाटी) अगले दिन आप पहले सुबह नाश्ता करने के बाद गुवाहाटी हवाई अड्डा या रेलवे स्टेशन के लिए निकल जाएंगे। इसके बाद आपकी यात्रा समाप्त हो जाएगी। 3. काजीरंगा हॉलिडे टूर:- यह टूर पैकेज तीन रातों और चार दिनों का है। पहला दिन (गुवाहाटी से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान)यात्रा के पहले दिन आप गुवाहाटी रेलवे स्टेशन या फिर हवाई अड्डा से काजीरंगा नेशनल पार्क के लिए आगे बढ़ेंगे। नेशनल पार्क पहुंचकर आप वहीं के जंगल रिजॉर्ट में चेक इन करेंगे और रात को यहीं आराम करेंगे। दूसरा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान)अगले दिन आप सुबह नाश्ता करने के बाद काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पश्चिमी क्षेत्र यानी बागोरी और केंद्रीय क्षेत्र यानी कोहरा रेंज में हाथी की सफारी का आनंद लेंगे। इस दिन आप भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों को जानने और समझने के लिए काजीरंगा नेशनल पार्क को एक्सप्लोर करेंगे। यहां आप ऑर्किड पार्क के विजिट के लिए भी जा सकते हैं। जहां आपको 500 से अधिक तरह की और किट की प्रजातियां देखने को मिलेगी। इसके अलावा आप काजीरंगा में 132 प्रकार की पत्तेदार सब्जियों की प्रजातियां और 46 प्रकार के बँसो की प्रजातियां को करीब से देखेंगे और उनके बारे में जानेंगे। तीसरा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान) सुबह नाश्ता करने के बाद आप काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पूर्वी रेंज में जीप सफारी के लिए जाएंगे इसके बाद आप काजीरंगा नेशनल पार्क के पास बसे हुए आदिवासी गांव कार्बी का दौरा करेंगे और कार्बी के लोगों की ग्रामीण जीवन शैली के बारे में जानने और समझने का प्रयास करेंगे। कार्बी गांव से लौटकर आप दोपहर का भोजन करेंगे और फिर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के केंद्रीय रेंज में जीप सफारी के तीसरे दौर के लिए चले जाएंगे। फिर रात में जंगल रिजॉर्ट में आराम करेंगे चौथा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से गुवाहाटी) यह आपके इस सफर का आखिरी दिन होगा। जहां आप सुबह नाश्ता करने के बाद नेशनल पार्क से गुवाहाटी हवाई अड्डा या फिर रेलवे स्टेशन के लिए निकल जाएंगे। आपकी यात्रा यहीं समाप्त हो जाएगी। 4. काजीरंगा शिलांग यात्रा:- यह टूर पैकेज चार रातों और पाँच दोनों का होगा। पहला दिन (गुवाहाटी से काजीरंगा नेशनल पार्क) इस टूर पैकेज का पहला दिन भी बाकी के टूर पैकेज की तरह ही होगा। जिसमें आप गुवाहाटी से काजीरंगा नेशनल पार्क की ओर आएंगे और जंगल रिसॉर्ट में चेकिंग करके वही रात को आराम करेंगे। दूसरा दिन काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान सुबह के समय आप काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के बागोरी और कोहरा रेंज में हाथी के सफारी के लिए जाएंगे। हाथी के सफारी से लौट

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एक ऐसा राष्ट्रीय उद्यान जो भारत और भूटान दोनों देशों में फैला हुआ है

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असम के मानस नदी के तट पर स्थित मानस नेशनल पार्क भारत और भूटान दोनों हीं देश में फैला हुआ है। मानस नदी भारत और भूटान के बॉर्डर पर बहती है, जिसके दोनों ओर घने जंगल बसे हैं। भारत में इस जंगल के भूभाग को मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता हैं। वहीं भूटान में फैले जंगल के क्षेत्र को रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है।मानस नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। नॉर्थ ईस्ट में फेवरेबल कंडीशन होने के कारण यहां रिच बायोडायवर्सिटी देखने को मिलती है और यहीं वजह है कि यहां कई सारे नेशनल पार्क्स हैं। असम का यह मानस नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन इसे भी यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया गया है। यहां आप शहरों से दूर जंगलों के बीच प्रकृति को महसूस करते हुए अपना एक अच्छा सा वीकेंड ट्रिप प्लान कर सकते हैं। लगभग 500 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ यह नेशनल पार्क भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित असम का प्रमुख नेशनल पार्क है। ब्रह्मपुत्र नदी इस नेशनल पार्क की जीवन दायिनी नदी है। मानस नेशनल पार्क का इतिहास (History of Manas National Park) सबसे पहले मानस नेशनल पार्क को वर्ष 1928 में एक सेंचुरी डिक्लेयर किया गया था। 1973 ई. में इसे बायो रिजर्व क्षेत्र घोषित कर दिया गया। 1990 में इस क्षेत्र को नेशनल पार्क की उपाधि दी गई और इस वन क्षेत्र का नाम मानस नेशनल पार्क पड़ गया। मानस नेशनल पार्क में जंगल सफारी (Jungle safari in manas national park)मानस नेशनल पार्क में अगर आप जंगल सफारी करना चाहते हैं तो यहां जंगल सफारी के दो ऑप्शन उपलब्ध हैं। पहला जीप सफारी और दूसरा एलिफेंट सफारी। जीप सफारी (Jeep Safari)अगर आप भारतीय हैं और बाँसबाड़ी जोन में जंगल सफारी करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको 4500 रुपए पर जीप खर्च करना होगा। वहीं भुईयांपाड़ा जॉन के लिए आपको ₹5500 पर जीप पे करना होगा। अगर बात किया जाए विदेशी पर्यटकों की तो विदेशी पर्यटकों को बाँसबाड़ी जोन में जंगल सफारी करने के लिए ₹8000 पर जीप पे करना होता है। वहीं भुईयांपाड़ा जोन में उनकाे ₹9000 पर जीप पे करना होता है। एक जीप को एक बार में पांच आदमी के लिए बुक किया जा सकता है।अगर बात करें जीप सफारी की टाइमिंग की तो यहां हर दिन तीन टाइम जीप सफारी करवाई जाती है। पहला सुबह के 6:30 से 9:30 तक, दूसरा सुबह के 10:00 से दोपहर के 1:00 तक और तीसरा दोपहर के 2:00 से शाम के 5:00 बजे तक। अगर आप यहां जंगल सफारी करने आ रहे हैं तो आप अपने हिसाब से जंगल सफारी की टाइमिंग सेट कर सकते हैं। एलिफेंट सफारी (Elephant Safari) मानस नेशनल पार्क में एलिफेंट सफारी सिर्फ बाँसबाड़ी जोन में करवाई जाती है अगर आप एलिफेंट सफारी करना चाह रहे हैं तो इसके लिए टिकट की प्राइस भारतीय पर्यटकों के लिए 1450 रुपए प्रति व्यक्ति और विदेशियों के लिए ₹3200 प्रति व्यक्ति होता है। एलिफेंट सफारी का यह टिकट 1 घंटे के लिए मान्य होता है। मानस नेशनल पार्क में एलिफेंट सफारी की टाइमिंग सुबह के समय ही होती है। आप यहां सुबह के 6:00 बजे से 7:00 बजे तक और 7:00 बजे से 8:00 बजे तक इस एलिफेंट सफारी का लुफ्त उठा सकते हैं।मानस नेशनल पार्क में चार तरह के टूर पैकेज उपलब्ध करवाए जाते हैं। अगर आप मानस नेशनल पार्क घूमना चाहते हैं तो आप अपनी सुविधा अनुसार इन टूर पैकेज में से किसी एक टूर पैकेज का चयन कर सकते हैं। मानस नेशनल पार्क के टूर पैकेजों के बारे में जानकारी निम्नांकित है : मानस नेशनल पार्क जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Manas National Park) अगर आप वाइल्डलाइफ को पसंद करते हैं और वाइल्डलाइफ को एक्सप्लोर करने के लिए अगर आप मानस नेशनल पार्क जा रहे हैं तो मानसून के समय जाने से बचें। क्योंकि मानसून के समय पूर्वोत्तर भारत में बहुत अधिक बारिश होने के कारण बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो जाती है। जिसके कारण आपका पूरा का पूरा टूर प्लान खराब हो सकता है। इससे बचने के लिए आप अक्टूबर से मार्च तक के समय का चयन कर सकते हैं। क्योंकि इस समय बारिश की संभावना कम होती है और मौसम भी ठंडा होता है। कैसे पहुंचे मानस नेशनल पार्क (How to reach Manas National Park) मानस नेशनल पार्क पहुंचने के लिए आप सड़क रेल और हवाई तीनों ही मार्गों का उपयोग कर सकते हैं। अगर आप हवाई मार्ग से मानस नेशनल पार्क पहुंचना चाह रहे हैं तो आपको सबसे पहले गुवाहाटी एयरपोर्ट पहुंचना होगा। जो कि असम की राजधानी गुवाहाटी में स्थित है और देश के प्रमुख शहरों से बहुत ही अच्छे तरीके से फ्लाइट से कनेक्टेड है। अगर आपके शहर से यहां की डायरेक्ट फ्लाइट नहीं मिल रही है तो आप कनेक्टिंग फ्लाइट के जरिए अभी यहां पहुंच सकते हैं।रेल मार्ग से यहां पहुंचने के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन बरपेटा रेलवे स्टेशन है जो मानस नेशनल पार्क से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां से आप बहुत ही आसानी से मानस नेशनल पार्क पहुँच सकते हैं। बरपेटा रेलवे स्टेशन देश के अन्य राज्यों के रेलवे स्टेशनों से बहुत ही अच्छे तरीके से जुड़ा है।अगर आप मानस नेशनल पार्क जाने के लिए सड़क मार्ग का उपयोग करना चाहते हैं तो आसपास के शहरों से यहां आप आसानी से पहुंच सकते हैं। इसके अलावा दूर के शहरों से भी आप यहां अपनी पर्सनल गाड़ी या कैब का उपयोग करके आ सकते हैं। सिलीगुड़ी गलियारा के द्वारा बड़े ही आसानी से मानस नेशनल पार्क तक पहुंचा जा सकता है।

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भारत के 90% से अधिक एक सींग वाले गैंडों का आशियाना है काजीरंगा नेशनल पार्क

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असम के सोनितपुर जिले में स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क एक सिंग वाले गैंडे के लिए पूरी दुनिया भर में जाना जाता है। असम का यह काजीरंगा नेशनल पार्क हमेशा से हीं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यह नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और पूरे भारत में पाए जाने वाले 90% गैंडे काजीरंगा नेशनल पार्क में ही पाए जाते हैं। लेकिन काजीरंगा नेशनल पार्क इन गैंडों के अतिरिक्त अन्य कई जानवरों का आशियाना है। जिनमें मुख्यतः बाघ, हाथी, पैंथर, जंगली भैंसे, भालू और अन्य कई प्रकार की पक्षियाँ शामिल हैं। काजीरंगा का नेशनल पार्क इतिहास (History of Kaziranga National Park) काजीरंगा नेशनल पार्क की स्थापना 1905 ईस्वी में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन के द्वारा की गई थी। बताया जाता है कि लॉर्ड कर्जन की पत्नी मैरी विक्टोरिया लिटर कर्जन ने गैंडों की घटती संख्या की समस्या से चिंतित होकर अपने पति से उनके संरक्षण के लिए कार्रवाई करने के लिए कहा। इसके बाद लॉर्ड कर्जन द्वारा 1904 में काजीरंगा को एक रिजर्व बनाने का प्रस्ताव रखा गया और यह प्रस्ताव 1905 में पारित हुआ।हजारों जीव जंतुओं का यह आशियाना यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट में भी शामिल है। यूनेस्को ने इसे 1985 ईस्वी में वैश्विक धरोहर स्थल के रूप में अपने सूची में स्थान दिया। काजीरंगा नेशनल पार्क कैसे पहुंचे (How to reach Kaziranga National Park) काजीरंगा नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और अगर इसके भौगोलिक परिस्थितियों की बात की जाए तो यह ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे कार्बी की पहाड़ियों तक फैला हुआ है। काजीरंगा नेशनल पार्क पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले असम के गुवाहाटी शहर तक पहुंचना होगा। काजीरंगा नेशनल पार्क असम की राजधानी गुवाहाटी से लगभग 194 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अगर आप यहां फ्लाइट से आना चाहते हैं तो आप गुवाहाटी हवाई अड्डे तक की फ्लाइट ले सकते हैं। जहां देश के मुख्य हवाई अड्डों से आपको डायरेक्ट फ्लाइट की सुविधा मिल जाएगी। अगर आपके निकटतम हवाई अड्डे से डायरेक्ट फ्लाइट की सुविधा न हो तो आप कनेक्टिंग फ्लाइट भी ले सकते हैं। गुवाहाटी शहर से काजीरंगा नेशनल पार्क जाने के लिए आप बस या फिर कैब की सुविधा ले सकते हैं। नेशनल हाईवे 37 काजीरंगा नेशनल पार्क के पास से ही गुजरती है। अगर आप रेल मार्ग के द्वारा काजीरंगा नेशनल पार्क पहुंचाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हेलेम रेलवे स्टेशन पड़ेगा, जो काजीरंगा नेशनल पार्क से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नजदीक के शहरों से आप बस के जरिए भी काजीरंगा नेशनल पार्क पहुंच सकते हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क में जंगल सफारी (Jungle Safari in Kaziranga National Park) काजीरंगा नेशनल पार्क के चार रेंज हैं। जिनमें सबसे पहला है वेस्टर्न रेंज, जिसे बागरी रेंज के नाम से भी जाना जाता है। सेंट्रल रेंज को कोहरा रेंज कहा जाता है। पूर्वी रेंज को अगरतोली रेंज के नाम से पुकारा जाता है। बुरापहाड़ रेंज का कोई दूसरा उपनाम नहीं है। अगर आप यहां जंगल सफारी करना चाहते हैं तो जंगल सफारी में अलग-अलग रेंज के लिए अलग-अलग चार्ज लगते हैं।काजीरंगा नेशनल पार्क में जंगल सफारी के दो ऑप्शंस देखने को मिलते हैं। पहला जीप सफारी और दूसरा एलिफेंट सफारी! जीप सफारी की सुविधा तो लगभग सभी नेशनल पार्क में अवेलेबल हो जाती है, लेकिन एलिफेंट सफारी की सुविधा कहीं-कहीं उपलब्ध है। काजीरंगा के नेशनल पार्क में भी आप एलिफेंट सफारी कर सकते हैं। एलिफेंट सफारी के लिए उपयोग में ले जाने वाले हाथी वाइल्ड एलिफेंट से काफी अलग होते हैं। बड़े से गजराज पर बैठकर जंगल की सैर करते समय आपको बिल्कुल राजा महाराजाओं वाली फीलिंग आएगी। अगर आप कुछ अलग ट्राई करना चाहते हैं तो आप जंगल सफारी के लिए एलिफेंट सफारी का उपयोग कर सकते हैं। यह सच में एडवेंचरस होता है। काजीरंगा नेशनल पार्क में जंगल सफारी के खर्च (Charges of Jungle Safari in Kaziranga National Park) जीप सफारी (Jeep Safari) सेंट्रल यानी कोहरा रेंज के जंगल सफारी के टिकट की कीमत भारतीयों के लिए ₹3700 और विदेशियों के लिए ₹6800 है। वेस्टर्न रेंज जिसे बागोरी रेंज भी कहा जाता है, में जंगल सफारी के टिकट की कीमत ₹3800 भारतीयों के लिए और ₹6900 विदेशियों के लिए है। पूर्वी रेंज यानी अगरतोली रेंज में जंगल सफारी के लिए विदेशियों को ₹10,300 की टिकट लेना पड़ता है, वहीं भारतीयों के लिए इस टिकट की कीमत ₹4400 होती है। अगर बात करें बुरापहाड़ रेंज के सफारी के टिकट की तो इसके लिए विदेशियों को ₹10,800 की टिकट लेनी होती है। वहीं भारतीयों को ₹4900 की टिकट लेना होता है। एलिफेंट सफारी (Elephant Safari) काजीरंगा में एलिफेंट सफारी की सुविधा वेस्टर्न यानी बागोरी रेंज और सेंट्रल यानी कोहरा रेंज में उपलब्ध है। वेस्टर्न रेंज की एलिफेंट सफारी सिर्फ भारतीय पर्यटकों के लिए उपलब्ध है। जिसके टिकट की कीमत ‘₹900 प्लस सर्विस चार्ज’ प्रति व्यक्ति है।वहीं सेंट्रल रेंज की एलिफेंट सफारी सिर्फ विदेशी पर्यटकों के लिए उपलब्ध है। जिसके टिकट की कीमत ₹3500 पर पर्सन है।

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भारतीय इतिहास का गढ़ है ग्वालियर शहर

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मंदिरों और किले के लिए मशहूर शहर ग्वालियर मध्य प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित शहरों में से एक है। इस शहर का भारतीय इतिहास में भी बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रहा है। आज के इस ब्लॉग में हम आपको ग्वालियर के बेस्ट विजिटिंग प्लेस के बारे में बताने वाले हैं। तो आईए जानते हैं ग्वालियर के टूरिस्ट प्लेस के बारे में! ग्वालियर का किला भारत के इतिहास को प्रदर्शित करने वाला यह किला ग्वालियर के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। इस किले के टॉप पॉइंट से आप पूरे ग्वालियर शहर का नजारा देख सकते हैं। इस किले में एक म्यूजियम भी है जो इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों का ध्यान अपनी और खींचता है। अगर आप ग्वालियर फोर्ट घूमना चाहते हैं तो इसके लिए आपको ऑनलाइन टिकट लेना होगा। इसके बाद आप ग्वालियर फोर्ट में इंटर कर सकते हैं। ग्वालियर फोर्ट बहुत हीं बड़ा और विशाल है। अगर आप ग्वालियर आना चाहते हैं और ग्वालियर फोर्ट घूमना चाहते हैं तो हमारा यह सुझाव रहेगा कि आप गर्मी में यहां जाने से बचें। अगर बात करें ग्वालियर फोर्ट के इतिहास की तो इसका निर्माण राजा मानसिंह तोमर ने करवाया था। उनके बाद कई अन्य राजाओं ने भी इस किले पर राज किया। ग्वालियर के किले तक पहुंचने के दो रास्ते हैं। पहला उर्वै गेट का और दूसरा गुजारी महल का। किले तक पहुंचने के लिए हमारी ओर से आपको एक सुझाव यह रहेगा कि आप उर्वै गेट से जाएं। क्योंकि अगर आप उर्वै गेट से जाएंगे तो आपको रिक्शा सीधे फोर्ट के पास जाकर उतारेगी। वहीं अगर आप गुजारी महल गेट से जाएंगे तो रिक्शा आपको गेट पर हीं उतार देगी वहां से आपको पैदल चलकर किले तक पहुंचना होगा। सास बहु टेंपल ग्वालियर फोर्ट के ही नजदीक स्थित है सास बहु टेंपल। यह सुनने में थोड़ा अजीब है लेकिन सच है कि ग्वालियर में एक सास बहू नाम का टेंपल भी है। सास बहु टेंपल को सहस्रबाहु टेंपल भी कहा जाता है। इस मंदिर के दीवारों पर पत्थरों को तराश कर की गई नकाशी बहुत ही सुंदर है। साथ ही इस मंदिर का प्रांगण भी बहुत खूबसूरत है। आप इस मंदिर से पूरे ग्वालियर सिटी का एक बेहतरीन बर्ड व्यू ले सकते हैं। इस मंदिर से आपको ग्वालियर के फोर्ट का व्यू भी दिख जाएगा। गुरुद्वारा श्री दाता बंदी छोड़ साहिब (Gurdwara Shri Data Bandi Chhor Sahib) ग्वालियर में श्री दाता बंदी छोड़ साहिब गुरुद्वारा भी है जो सिखों के छठे गुरु हरगोविंद साहब को समर्पित है। इस गुरुद्वारा का इतिहास मुगल इतिहास से जुड़ा हुआ है। यह गुरुद्वारा बहुत ही बड़ा और खूबसूरत है। अगर आप ग्वालियर जा रहे हैं तो आपको इस जगह पर जरूर जाना चाहिए। बटेश्वर ग्वालियर के सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है, जहां आपको कई सारे छोटे-छोटे मंदिरों के समूह देखने को मिलेंगे। इन मंदिरों के बारे में बताया जाता है कि इनका निर्माण भूतों द्वारा करवाया गया है। इन छोटे-छोटे मंदिरों के भीतर शिवजी की प्रतिमा है वही मंदिर के बाहर नंदी विराजमान हैं। यहां आपको एक हीं तरह के दिखने वाले कई सारे मंदिर देखेंगे। जिनकी नक्काशियाँ भी बिल्कुल एक जैसी हीं हैं। इस जगह पर आकर आपको ऐसी वाइब आएगी कि आप किसी प्रॉपर हिस्टोरिकल प्लेस को देख रहे हैं। गढ़ी पढ़ावली एक किला है जो ग्वालियर के हिस्टोरिकल प्लेसेस में से एक है। गढ़ी पढ़ावली के दीवारों पर की गई नक्काशियों को देखकर आप यह सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि आज से हजारों साल पहले बिना उन्नत तकनीक के कैसे लोग इस तरह की नक्काशी कर लिया करते थे। गढ़ी पढ़ावली ग्वालियर का एक प्रसिद्ध मंदिर है। जिसका निर्माण 10वीं शताब्दी में करवाया गया था। अगर आप ग्वालियर आ रहे हैं तो इस जगह को विजिट करना ना भूलें। मितावली यह ग्वालियर का वह स्थान है जिस पर ग्वालियर हमेशा से हीं गर्व करता आया है। मितावली में मंदिरों का एक समूह है जिसका कंस्ट्रक्शन बिल्कुल हमारे पुराने संसद भवन की तरह है। या फिर यूं कहे कि हमारे पुराने संसद भवन को मितावली के मंदिरों के समूह के तर्ज पर ही बनवाया गया था। यहां के मंदिरों में बहुत से देवी देवताओं के प्रतिमाओं को उकेरा गया है और यहां के हर मंदिर के भीतर शिवलिंग स्थापित है। यहां की गई सुंदर नक्काशिययाँ किसी भी पर्यटक के मन को मोह लेने में सक्षम हैं। मितावली के बारे में बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1323 ईस्वी में महाराजा देवपाल ने करवाया था। इस मंदिर के नीचे से बहुत सेआभूषण और मूर्तियां खुदाई में प्राप्त हुए। जिन्हें अब ग्वालियर फोर्ट के म्यूजियम में रखा गया है। इसके साथ हीं मितावली के टॉप पॉइंट से दिखने वाला भी बहुत ही खूबसूरत होता है। जहां दूर-दूर तक आपको ग्वालियर शहर के साथ-साथ ग्रीनरी ही ग्रीनरी देखने को मिलेगी। कैसे पहुंचे ग्वालियर (How to visit Gwalior) अगर आप ग्वालियर आना चाहते हैं तो यहां आने के लिए हर तरह के यातायात साधन उपलब्ध हैं। आप परिवहन के तीनों माध्यमों का उपयोग करके ग्वालियर पहुंच सकते हैं। अगर आप बाय रोड ग्वालियर जाना चाहते हैं तो आप बहुत ही आसानी से ग्वालियर जा सकते हैं। क्योंकि ग्वालियर सड़क मार्ग द्वारा देश के अन्य शहरों से काफी अच्छे तरीके से जुड़ा हुआ है। आसपास के शहरों से आप बाय बस भी ग्वालियर आसानी से आ सकते हैं। अगर बात करें रेलवे स्टेशन की तो ग्वालियर का अपना एक रेलवे स्टेशन है जहां भारत के कोने-कोने से ट्रेन आती और जाती हैं। ग्वालियर में एक एयरपोर्ट भी है। लेकिन वर्तमान समय में यहां कुछ ही शहरों से फ्लाइट आती जाती हैं। अगर आपके शहर से ग्वालियर की डायरेक्ट फ्लाइट नहीं है तो आप कनेक्टिंग फ्लाइट के जरिए ग्वालियर आ सकते हैं।

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दुनिया भर से पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती हैं एलोरा की ये गुफाएं

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चट्टानों पर की गई शिल्पकलाओं के जरिए विश्व विरासत स्थल में अपना स्थान बनाने वाले महाराष्ट्र के एलोरा की गुफाओं की खूबसूरती देखने लायक है। भारतीय इतिहास के उत्कृष्ट कलाकारी को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने वाली ये गुफाएं आज से लगभग हजारों साल पुरानी हैं। लेकिन आज भी इन गुफाओं में चट्टानों पर की गई नक्काशियों में वहीं फिनिशिंग देखने को मिलती है जो नए नक्काशियों में मिलते हैं।सह्याद्री पर्वत श्रृंखलाओं को काट कर बनाए गए इस गुफा की श्रृंखलाओं में मानव द्वारा की गई बेहतरीन शिल्पकारी और नक्काशी की कला देखने को मिलती है। एलोरा का गौरवशाली इतिहास (Glorious History of Ellora) इतिहासकारों के मुताबिक इन गुफाओं का निर्माण 600 ई. से 1000 ई. के बीच करवाया गया था। एलोरा की गुफाओं की श्रृंखला में कुल 34 गुफाओं का निर्माण करवाया गया था। जिनमें 17 गुफाएं ब्राह्मणों से संबंधित थीं, 12 गुफाएं बौद्ध धर्म से संबंध रखती थीं और पांच गुफाओं का जैन धर्म से जुड़ाव था। इन गुफाओं का निर्माण पैठन से उज्जैन जाने वाले व्यापारिक मार्गों के पास करवाया गया था।एलोरा की गुफाओं में कई हिंदू और बौद्ध गुफाओं का ताल्लुकात राष्ट्रकूट वंश के काल से है। वहीं जैन गुफाओं का निर्माण बाद में करवाया गया था। बताया जाता है कि जैन गुफाओं का निर्माण चालुक्य और देवगिरी के यादव शासकों के समय में हुआ था। इन गुफाओं में हिंदू बौद्ध और जैन तीनों धर्मों का उल्लेख देखने को मिलता है। अतः कहा जा सकता है कि एलोरा धार्मिक संगम का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है। यह उदाहरण है धार्मिक सहिष्णुता और एकता की जो अलग-अलग धर्म के बीच सामंजस्य स्थापित करने का कार्य करता है। एलोरा कैसे पहुंचे (How to visit Ellora Caves)? एलोरा की गुफ़ाएँ महाराष्ट्र के संभाजी नगर अर्थात औरंगाबाद जिले में स्थित है। अगर आप एलोरा की गुफाओं को घूमना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सबसे पहले औरंगाबाद आना पड़ेगा। औरंगाबाद से एलोरा की गुफाओं की दूरी लगभग 30 किलोमीटर है। जहां आप कैब बुक करके या फिर अपनी गाड़ी से आसानी से पहुंच सकते हैं। अगर आप फ्लाइट से एलोरा की गुफाओं तक पहुंचाना चाहते हैं तो एलोरा की गुफाओं से निकटतम हवाई अड्डा जलगांव एयरपोर्ट है। लेकिन यहां भारत के कुछ ही शहरों से फ्लाइट की व्यवस्था है। एलोरा की गुफाओं तक बाय रोड और बाय रेलवे भी पहुंचा जा सकता है। क्योंकि औरंगाबाद में बस स्टॉप और रेलवे स्टेशन दोनों हीं उपलब्ध हैं। आप औरंगाबाद रेलवे स्टेशन से एलोरा पहुंचने के लिए लोकल बस की सुविधा भी ले सकते हैं। एलोरा ने यात्रियों, व्यापारियों, जनसाधारणों और यहां तक की राजा महाराजाओं को भी अपनी ओर आकर्षित किया। यहां की सुंदर कलाकृतियों के चर्चे काफी दूर-दूर तक फैले हुए थे। अगर बात करें एलोरा की गुफाओं के निर्माण के बारे में तो सबसे पहले गुफा नंबर 29 जिसे डुमर लीना गुफा भी कहते हैं, का निर्माण छठी शताब्दी में शुरू हुआ। इसके बाद गुफा नंबर 10 यानी विश्वकर्मा गुफा, गुफा नंबर 11 धो ताल गुफा और गुफा नंबर 12 तीन ताल गुफा का निर्माण चालुक्य शासन वंश के समय में किया गया था। वहीं अगर गुफा नंबर 15 की बात की जाए तो इनका निर्माण आठवीं शताब्दी के अंत में राष्ट्रकूटों के समय में किया गया था। यह गुफा शिलालेख गुफा के नाम से जानी जाती है। एलोरा की गुफा आने का सबसे सही समय (Best time to visit Ellora) अगर आप एलोरा की गुफाओं को घूमना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे सही समय ठंड के महीनों में होता है। इस समय तापमान कम होने के कारण आप सहजता से सभी गुफाओं को घूम पाएंगे और उनके बारे में जान पाएंगे। इसीलिए अगर आप एलोरा की गुफाओं को घूमने आ रहे हैं तो आप नवंबर से मार्च तक के समय में आएं। महाराष्ट्र आने का यह सबसे सही समय होता है। अगर आप इस समय यहां आएंगे तो आप महाराष्ट्र के अन्य खूबसूरत पर्यटन स्थलों पर भी घूमने जा सकते हैं। खास करके सहयाद्री के पर्वत श्रृंखला में बसे हुए वॉटरफॉल्स और ट्रेक्स इस समय सामान्य दिनों से और भी ज्यादा खूबसूरत दिखते हैं।