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अगर बर्फबारी देखने का है प्लान तो जाएं इन खूबसूरत जगहों पर

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बर्फबारी किसे पसंद नहीं? बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को बर्फबारी बहुत ही पसंद आती है। और आए भी क्यों ना, यह होता ही इतना खूबसूरत है कि हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर ही लेता है। अगर आप भी बर्फबारी देखना पसंद करते हैं और इस सर्दी में किसी हिल स्टेशन जाने का प्लानिंग कर रहे हैं तो आज का यह ब्लॉग आपके लिए है। आज के इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे भारत के कुछ ऐसे हिल स्टेशनों (Places to Visit for Snowfall) के बारे में जहां आप बर्फबारी की खुबसुरती से एंजॉय कर सकते हैं। 1. पहलगाम (Pahalgam): अगर आप भी केसर के नीले खेतों को देखना चाहते हैं तो पहलगाम इसके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन माना जाता है। पहलगाम अपने केसर के खेतों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां के केसर के नीले बागान और पहाड़ों पर उगे हुए ऊंचे ऊंचे पेड़ किसी भी पर्यटक का मन मोह लेने में सक्षम हैं। पहलगाम में स्थित बेताब घाटी, अरु घाटी और शेषनाग देखने लायक जगह है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमरनाथ के पवित्र घाटी के लिए यात्रा पहलगाम से ही शुरू होती है। 2. गुलमर्ग (Gulmarg): जम्मू कश्मीर राज्य का गुलमर्ग शहर चारों ओर से बर्फीली पहाड़ियों, जंगलों और ऊंचे पहाड़ों से घिरा हुआ है। यह शहर समुद्र तल से लगभग 2800 मीटर ऊपर है। अगर आपको दूर दूर तक फैली बर्फ की पहाड़ियां पसंद है तो आप गुलमर्ग का रुख कर सकते हैं। यह शहर इतना खूबसूरत है कि यहाँ बॉलीवुड के कई फिल्मों के सीन की शूटिंग भी हो चुकी है। यहां आप अपने इंटरटेनमेंट के लिए कई तरह के एडवेंचर एक्टिविटीज कर सकते हैं। यहां ट्रैकिंग, माउंटेन बाइकिंग, और स्कीइंग के मजे ले सकते हैं। हर साल सर्दियों में यहां पर्यटकों की बहुत ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है। क्योंकि लोग इस समय बर्फबारी को देखने के लिए इस शहर का रुख करते हैं। इसके अलावा कपल्स को भी यह जगह काफी ज्यादा पसंद आता है। यहां की हसीन वादियां और शांत सा माहौल पर्यटकों को काफी पसंद आता है। गुलमर्ग में एशिया की सबसे ऊंची केवल कार का भी मज़ा लिया जा सकता है। अगर आप भी एडवेंचर पसंद करते हैं तो आप भी इस राइड का मजा एक बार जरूरी ले। यकीनन यह आपको बहुत पसंद आएगा। 3. शिमला (Shimla): शिमला शब्द सुनते ही हर किसी के मन में एक खूबसूरत नज़ारा आने लगता है खासकर कपल्स के। हाँ बेशक, शोर- शराबे से दूर बर्फ से ढके पहाड़ और हरे-भरे घिरे हुए देवदार के पेड़ किसी भी पर्यटक को यहाँ एक बार आने पर मजबूर कर ही देते हैं।शिमला की बेस्ट प्लेसेज़ की बात करे तो उनमें सबसे मशहूर जगह है माल रोड। अगर हम माल रोड को शिमला का मेन शॉपिंग सेंटर कहें तो ये गलत नहीं होगा। माल रोड शॉपिंग के लिए काफी मशहूर है। यहाँ आपको खान-पान की काफी पुरानी और मशहूर दुकानें देखने को मिल जाएँगी। जिसमें आप हिमाचल की फेमस मिठाई सिड्डू का मजा भी ले सकते हैं। जब आप माल रोड घूमने निकलेंगे तो यहाँ आपको रेस्टोरेंट, कॉफी शॉप, और बहुत सी अलग-अलग दुकानें भी दिखाई देंगी। 4. सोलन वैली (Solan Valley): सोलन वैली जाने वाले रूट पे सबसे पहले आपको नेहरुकुन्द मंदिर दिखेगा जहाँ आप दर्शन करते हुए जा सकते है।और इसी रूट में एक ब्रिज आपको दिखेगा जहाँ टेंगो चार्ली मूवी की शूटिंग भी हुई थी। सोलन वैली में जगह जगह आपको एडवेंचर एक्टिविटीज होती दिखाई देंगी। पैराग्लाइडिंग और बाइक राइड जैसी बहुत सी एक्टिविटीज़ आप यहाँ कर सकते है। और अगर आप दिसंबर या जनवरी के महीने में यहाँ आएँ तो यहाँ आपको बर्फ ही बर्फ दिखाई देगी जिसमें आप बहुत सी स्नो एक्टिविटीज़ कर सकते है। सोलन वैली की खूबसूरती बेशक ही हिमालय का अहसास करा ही देती है। 5. कुफरी (Kufri) शिमला से लगभग 10 किमी की दूरी पर है। कुफरी को एक बेहतरीन पिकनिक स्पॉट मन जाता है। गर्मियों में भी यहाँ के प्राकृतिक नज़ारे देखने लायक होते हैं पर सबसे ज़्यदा मजा आपको यहाँ सर्दियों में आएगा क्योंकि तब आप यहाँ बर्फ का आनंद ले सकते है। यहाँ पर आपको बहुत सी एक्टिविटीज़ जैसे ट्यूब राइडिंग, हॉर्स राइडिंग और याक की सवारी करने को मिल जाएगी। इसके अलावा यहाँ पर फन पार्क है जहाँ आप एडवेंचर के मजे ले सकते हैं। 6. सोनमर्ग (Sonmarg): कश्मीर की वादियों में स्थित सोनमर्ग एक काफी खूबसूरत शहर है। बर्फ से भरे मैदानों, ग्लेशियरों और शांत झीलों वाला यह शहर हमेशा से हीं पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां का माहौल बहुत ही खूबसूरत और शांत है। सोनमर्ग श्रीनगर से लगभग 80 किलोमीटर दूर बसा हुआ शहर है। जो कि समुद्र तल से लगभग 2800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। प्राकृतिक सुंदरता, लुभावने ग्लेशियरों और जीवंत झीलों से भरा या शहर कश्मीर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। जो अपने खुबसुरती से हर साल हजारों भारतीय एवं विदेशी पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है।

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राजस्थान की संस्कृति को वैश्विक पटल पर रखता है घूमर

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घूमर सिर्फ एक नृत्य नहीं बल्कि समर्पण का एहसास है। यह नृत्य की एक ऐसी विद्या है जो वर्षों से राजस्थान में पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षित होती चली आ रही है। राजस्थान हमेशा से ही अपने सांस्कृतिक विविधताओं और राजसी ठाठ बाट के लिए दुनिया भर में जाना जाता रहा है। यहां के ऐतिहासिक इमारत, पहनावे, रहन-सहन, बोलचाल और नृत्य के कारण यह राज्य भारत के सबसे समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों वाला राज्य माना जाता है। राजस्थान का इतिहास इसलिए भी इतना खास है क्योंकि यहां निभाई जाने वाली परंपराओं का इतिहास बेहद हीं समृद्ध रहा है। यह सांस्कृतिक विरासत हीं है जो राजस्थान को पूरे भारत में सबसे अनोखा बनाता है और इसी सांस्कृतिक विरासत का एक हिस्सा है यहां का सबसे प्रमुख लोकनृत्य “घूमर” (Ghoomar Dance) आज के ब्लॉग में हम आपको बताने जा रहे हैं राजस्थानी नृत्य घूमर के इतिहास के बारे में और इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में। भारी भरकम घेर वाला घाघरा पहनकर और माथे पर घूंघट डालकर किया जाने वाला यह नृत्य आज के समय में दुनिया भर में प्रसिद्ध हो गया है।इस नृत्य में महिलाएं बड़ा घेरा बनाकर नृत्य प्रस्तुत करती हैं। इस नृत्य के दौरान पहने जाने वाले पोशाक इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। हालांकि राजस्थान के अलग-अलग भागों में घूमर नृत्य की शैली तथा इस नृत्य के दौरान पहने जाने वाले पहनावे में थोड़ा बहुत अंतर देखने को मिलता है, लेकिन इस नृत्य को प्रस्तुत करने वाले लोगों के भावनाओं में कोई अंतर नहीं होता।आपको बता दें कि घूमर राजस्थान का राजकीय नृत्य है और राजस्थान में होने वाले सामाजिक कार्यक्रमों में आपको इसकी झलक देखने को मिल जाएगी। ट्रेड फेयर जैसे मौके पर भी घूमर नृत्य की झलकियां देखने को मिल जाती हैं। घूमर नृत्य की शुरुआत राजस्थान के भील जनजातियों के द्वारा किया गया था। भील जनजाति के लोग माता सरस्वती की आराधना में यह नृत्य प्रस्तुत किया करते थे। राजा-रजवाड़ों के समय यह नृत्य बहुत ही प्रसिद्ध हो गया। जिसके बाद राज्यसभाओं में इस नृत्य की प्रस्तुति होने लगी और वहीं परंपरा आज तक चली आ रही है। आज भी राजस्थान में अक्सर किसी भी शुभ अवसर पर घूमर की झलकी देखने को मिल जाती है। घूमर सिर्फ नृत्य नहीं राजस्थान की संस्कृति का एक अमूल्य धरोहर है। अक्सर नर्तकों द्वारा नृत्य के सभी विधाओं में घूमर को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इतना हीं नहीं आपको यह जानकर हैरानी होगी कि घूमर राजस्थान का सबसे प्राचीनतम लोक नृत्य है और सिर्फ महिलाओं के द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। घूमर सिर्फ एक नृत्य नहीं एक परंपरा है, जिसे वर्षों से राजस्थान में निभाया जाता रहा है। जब भी राजस्थान में कोई नव विवाहिता अपने ससुराल आती है तो वह घूमर नृत्य करके अपने वैवाहिक जीवन में कदम रखती है।इसके अलावा शादियों, त्योहारों और अलग-अलग सामाजिक तथा धार्मिक अवसरों पर घूमर नृत्य प्रस्तुत किया जाता है। इतना हीं नहीं समय-समय पर इस नृत्य की झलकियां फिल्मों में भी हमें देखने को मिलती रहती है।राजस्थान सरकार भी इस नृत्य को बढ़ावा देने का प्रयास करती रहती है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले जैसे जगहों पर भी इस नृत्य की प्रस्तुति हमें देखने को मिलती है।

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राजस्थानी आत्मसम्मान का प्रतीक है साफा

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जब भी कभी साफा का जिक्र होता है हमारे ध्यान में सबसे पहले राजस्थान का नाम आता है। और आए भी क्यों ना साफा का इतिहास कहीं न कहीं राजस्थान से हीं जुड़ा हुआ है। सर पर बड़े-बड़े पगड़ी बांधे राजस्थानी लोग अपने राजसी संस्कृति को पूरे विश्व के सामने प्रस्तुत करते हैं। यह साफा न सिर्फ उनके लिए एक श्रृंगार है बल्कि उनका आत्मसम्मान भी है। राजस्थान में साफ़ा का बहुत हीं ऐतिहासिक और नैतिक महत्व है। लोग इसे आत्म सम्मान से जोड़कर देखते हैं।आपको बता दें की राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग तरीके से साफा बांधने का प्रचलन रहा है। इतना हीं नहीं सफा के रंग में भी एक कहानी छुपी हुई होती है जो साफा के मूल्य से हमें अवगत करवाती है। जैसे सफेद साफा का राजस्थान में अपना ही एक महत्व है, वहीं केसरिया साफा के पीछे एक अलग ही कहानी छुपी हुई होती है। अगर रंगों के आधार पर साफा को विभाजित किया जाए तो वह विभाजन कुछ इस प्रकार का होगा। :- केसरिया साफा :यह सफा शौर्य और वीरता की निशानी है। यह सफा एक राजस्थानी तब अपने सिर पर बांधता है जब वह युद्ध के लिए अग्रसर होता है। अक्सर जब राजा महाराजा युद्ध के लिए जाया करते थे तो वह अपने सिर पर केसरिया साफा बांधकर जाते थे। क्योंकि केसरिया रंग का अर्थ शौर्य और वीरता से परिपूर्ण होता है। अधिकतर राजपूतानराजपूतानों में केसरिया रंग के साफा को बांधने का प्रचलन था। सफेद साफा :राजस्थान में सफेद रंग के साफे का अर्थ होता है शोक! अगर आपको कोई भी राजस्थानी व्यक्ति सफेद रंग का साफा पहना दिख जाए तो इसका मतलब है कि वह शोक में है। हालांकि राजस्थान में कुछ ऐसे समुदाय भी हैं जहां सफेद रंग का साफा आम दिनों में भी पहना जाता है। ऐसे समुदाय में बिश्नोई समुदाय का नाम सबसे पहले आता है बिश्नोई समुराई के लोग सामान्य दिनों में भी सिर पर सफेद साफा बांधा करते हैं। लेकिन अधिकतर जगहों पर सफेद रंग के साफे को शोक से जोड़कर देखा जाता है। खाकी साफा :खाकी साफा राजस्थान में अक्सर बुजुर्ग लोगों द्वारा बांधा जाता है। आम दिनों में राजस्थानी बुजुर्ग खाकी शाखा बांधा करते हैं। आप आम दिनों में कभी भी राजस्थान में ऐसे बुजुर्गों को देख लेंगे जो अपने सिर पर खाकी साफा बांधकर घूमते हैं। नीला और मरून साफा :राजस्थान में साफा के रंगों का बहुत हीं महत्व होता है। अगर कोई राजस्थानी व्यक्ति किसी के प्रति सहानुभूति व्यक्त करने जाता है तो वह नीले या फिर मेहरून रंग के साफ़ा को पहन कर जाता है। इसलिए नीला और मेहरून रंगों के साफों को सहानुभूति सभा से जोड़कर देखा जाता है। बहुरंगा साफा :बहुरंगे साफों का उपयोग अधिकतर अलग-अलग समारोहों में किया जाता है। हालांकि कुछ समुदाय ऐसे भी हैं जो बहुरंगे साफे को सामान्य दिनों में भी पहनते हैं, लेकिन अधिकतर इसका उपयोग किसी कार्यक्रम में ही किया जाता है। क्यों पहना जाता है साफा (Why is Safa worn)? अगर राजस्थान के जलवायु के बारे में बात की जाए तो यह भारत का सबसे गर्म प्रदेश है और यहां लगभग 9 महीने तक गर्मी पड़ती है। ऐसे में लंबे समय तक यहां लू की आंधी चलती रहती है। साफा का इतिहास भी कहीं ना कहीं गर्मी और लू से जुड़ा हुआ है। राजस्थानी लोग अपने आप को लू के थपेड़ों से बचाने के लिए कई परतों वाला साफा अपने सिर पर बांधते हैं। यह साफा लोगों को डिहाइड्रेशन से बचता है। इसके अलावा राजस्थान राजा रजवाड़ों का गढ़ रहा है। ऐसे में वहां अक्सर युद्ध जैसी परिस्थितियों आती रहतीं थी। सफा युद्ध के समय पर सिर पर किए गए अकस्मात आघात से योद्धाओं को बचता था। आज साफा राजस्थान के संस्कृति का एक अहम हिस्सा बन चुका है। रंग है अलग-अलग समुदाय की निशानी (Color is a symbol of different communities): पूरे राजस्थान में अलग-अलग समुदाय के लोग अलग-अलग तरह के साफा का उपयोग करते हैं। राजस्थान के लोगों के साफा के रंग और उसे बांधने के स्टाइल को देखकर काफी हद तक आप उनके समुदाय का पता लगा सकते हैं। जैसे बिश्नोई समुदाय के लोग हमेशा सफेद साफा बांधते हैं। वहीं रेवाड़ी और राईका समुदाय के लोग लाल रंग का साफा बांधते हैं। कलबेलिया, लंगा- मांगणियार लोग रंग बिरंगे छापों वाला साफा बांधते हैं, जबकि व्यापारी समुदाय गुलाबी केसरिया और लाल रंग का पगड़ी बांधते हैं।

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कर्नाटक के कोडागु जिले में स्थित है भारत का सैंतीसवां टाइगर रिजर्व

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नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान (Nagarhole National Park) जिसे राजीव गांधी नेशनल पार्क कहा जाता है, कर्नाटक के कोडागु और मैसूर जिले में स्थित है। नागरहोल नेशनल पार्क लगभग 643 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1988 में हुई थी। सर्वप्रथम, इसको 1955 में वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया था। इसके पश्चात को इसे 1988 में नेशनल पार्क बना दिया गया। 1999 में इस राष्ट्रीय उद्यान को प्रोजेक्ट टाइगर के तहत भारत का सैंतीसवां टाइगर रिजर्व बना दिया गया। इस नेशनल पार्क के नजदीक में ही बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान और मुदुमलै राष्ट्रीय उद्यान अवस्थित है। नागरहोल नदी इस नेशनल पार्क के बीचों-बीच बहती है और कबीनी नदी से जाकर मिलती है। नागरहोल नेशनल पार्क उन गिने-चुने उद्यानों में से एक है जहाँ एशियाई हाथी (Asian Elephant) पाए जाते हैं। फॉउना (Fauna in Nagarhole National Park) नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है। यहाँ पाए जाने वाले मैमल्स में भारतीय एलीफैंट (Indian Elephant), बंगाल टाइगर (Bengal Tiger), भारतीय तेंदुआ (Indian Leopard), गौर (Gaur), बार्किंग डियर (Barking Deer), सांभर (Sambar), ढोल (Dhole), भारतीय सियार (Indian Jackal), चार-सींग वाला मृग (Four-Horned Antelope), चीतल (Chital), रेड जायंट फ्लाइंग गिलहरी (Red Giant Flying Squirrel), ग्रे लंगूर (Gray Langur), स्लॉथ बियर (Sloth Bear), बोनेट मैकाक (Bonnet Macaque), इंडियन जायंट फ्लाइंग गिलहरी (Indian Giant Flying Squirrel), एशियाई पाम सिवेट (Asian Palm Civet), रेड स्लेंडर लोरिस (Red Slender Loris), जंगली सुअर (Wild Boar), भारतीय विशाल गिलहरी (Indian Giant Squirrel), यूरेशियन ओटर (Eurasian Otter), भारतीय भूरा नेवला (Indian Brown Mongoose), स्मॉल इंडियन सिवेट (Small Indian Civet), तेंदुआ बिल्ली (Leopard Cat), भारतीय खरगोश (Indian Hare), भारतीय कलगी साही (Indian Crested Porcupine), इंडियन पैंगोलिन (Indian Pangolin), धारीदार गर्दन वाला नेवला (Stripe-Necked Mongoose), जंगली बिल्ली (Wild Cat), इंडियन ग्रे नेवला (Indian Grey Mongoose) और इंडियन स्पॉटेड हेवरोटेन (Indian Spotted Hevrotain) शामिल है। फ्लोरा (Flora in Nagarhole National Park) अगर बात की जाए नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान के फ्लोरा की तो, यहाँ पेड़ों की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- टीक (Teak), शीशम (Rosewood), चंदन (Sandalwood), आंवला (Indian Gooseberry), बीचवुड (Beachwood), एक्सलवुड (Axlewood), गोल्डन शॉवर (Golden Shower), सिल्वर ओक (Silver Oak), गुच्छेदार बांस (Clumped bamboo) और भारतीय किनो (Indian Kino) शामिल है। बेस्ट टाइम टू विजिट नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान (Best time to visit Nagarhole National Park) अगर आप नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने से बचें क्योंकि समर में यहाँ बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है। आप यहाँ ठण्ड के महीनों (नवंबर से मार्च) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं और आपको यहाँ ज्यादा से ज्यादा जानवर देखने को मिलेंगे। कैसे पहुंचे नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Nagarhole National Park)?

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अगर कैंपिंग के हैं शौकीन तो आपको जरूर पसंद आएगा कैंप विलेज

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दुनिया में शायद हीं कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसे ट्रैवलिंग नहीं पसंद हो। ऐसे में ट्रैवलिंग तो आप सब ने भी जरूर किया होगा। तो अगर मैं आप सभी से पूछूँ कि आप ट्रैवलिंग करते समय कहां ठहरते हैं तो आपका क्या जवाब होगा? अधिकतर लोग कहेंगे कि होटल या रिजॉर्ट!,,,,,और कहेंगे भी क्यों नहीं यह एक पारंपरिक तरीका है। हम कहीं जाते हैं वहां के होटल में रुकते हैं। वहां घूमते हैं और फिर घर आ जाते हैं। लेकिन क्या हो अगर किसी होटल या फिर रिज़ॉर्ट के जगह किसी कैंप हाउस में ठहरा जाए? क्या हो कि कहीं कैंपिंग करते हुए बोनफायर जलाकर, अनजान लोगों के साथ खूबसूरत सी शाम को जिया जाएमजेदा,,,,, है ना मजेदार आईडिया?फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल के आज के ब्लॉग में हम आपको बताने जा रहे हैं कैंपिंग विलेज (Camp village) में ठहरने के फायदों के बारे में :- नए दोस्त बनाने के अवसर मिलेंगे : जब आप कैंपिंग करते हैं और किसी कैंप हाउस में रहते हैं तो वहां आपको अलग-अलग जगह से आए पर्यटकों से मिलने का मौका मिलता है। ऐसे में आप नए दोस्त बना सकते हैं। उनसे बातचीत कर सकते हैं। इतना हीं नहीं इन कैंपिंग हाउसों में खाने पीने का अरेंजमेंट भी एक साथ किया जाता है। ऐसे में अलग-अलग शहर से आए अलग-अलग लोगों से मिलने उनके साथ खाना खाने और घूमने फिरने से आपको कुछ ऐसे मुसाफिर मिल जाते हैं जो बाद में आपकी बहुत अच्छे दोस्त बन जाते हैं। अलग-अलग कल्चर को जानने कहां मिलता है मौका : कैंप हाउस में ठहरने पर हर शाम बोनफायर की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। जहां सब एक साथ बैठकर नाचते-गाते वहाँ के हसीन वादियों को एंजॉय करते हैं। ऐसे में अलग-अलग जगह से आए लोगों के पहनावे, उनका रहन-सहन, उनके लोकगीत, उनके डांस आदि को जानने का अवसर मिलता है। बजट फ्रेंडली है यह टेंट हाउस : आजकल ऋषिकेश जैसे शहरों में कैंपिंग बहुत हीं ट्रेंड में है। ऐसे में वहां बहुत सारे कैंप विलेज बन गए हैं जहां आपको 1500 से 2000 के कीमत पर बहुत ही आसानी से एक अच्छा सा कैंप हाउस मिल जाएगा। जहां आपके रहने के साथ-साथ लंच और डिनर की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी। ऐसे में यह ट्रिप आपके लिए काफी बजट फ्रेंडली होगा। अगर आप कैंपिंग के शौकीन इंसान हैं तो ऐसे में कैंप हाउस में ठहरना आपके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन हो सकता है। क्योंकि इसके लिए आपको अलग से टेंट खरीदने की और कैंपिंग के सामानों को ढो कर ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती है। आपको जिस भी चीज की आवश्यकता होगी, वह आपको वहीं पर उपलब्ध करवा दी जाएगी। खुद को करें नेचुरली रिफ्रेश : ये कैंप हाउस अधिकतर शहरों के शोर-सराबे से दूर किसी शांत जगह पर बनाए गए होते हैं। जहां आप नेचर की खूबसूरती को महसूस करते हुए अपने ट्रिप को एंजॉय कर पाएंगे। आप इस ट्रिप पर पर्यावरण की खूबसूरती को बहुत हीं करीब से महसूस कर पाएंगे। अक्सर ये टेंट हाउस वहां बनाए जाते हैं जहां से सनराइज और सनसेट का बहुत हीं बेहतरीन नजारा लिया जा सकता है। ऐसे में अगर आप कैंपिंग करते हुए सुबह उठकर अपने टेंट हाउस से बाहर निकलेंगे तो आप एक बहुत ही खूबसूरत सुबह का आनंद उठा पाएंगे। इंटरटेनमेंट का है पुरा इंतजाम : ऐसे कैंपिंग टेंट हाउस में स्विमिंग पूल के साथ-साथ अलग-अलग तरह के स्पोर्ट्स एक्टिविटीज का भी इंतजाम किया जाता है। आप अपने इंटरेस्ट के अनुसार अपना फेवरेट स्पोर्ट इंजॉय कर सकते हैं और एक साथ मिलजुल कर कई तरह की एक्टिविटीज में शामिल हो सकते हैं।

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मैमल्स की 73 प्रजातियों का घर है बुक्सा राष्ट्रीय उद्यान

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बुक्सा राष्ट्रीय उद्यान (Buxa National Park) पश्चिम बंगाल में एक नेशनल पार्क है जो, अलीपुरद्वार जिले में स्थित है। बुक्सा नेशनल पार्क लगभग 760 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1983 में हुई थी। सर्वप्रथम, बुक्सा राष्ट्रीय उद्यान को 1983 में भारत का पन्द्रहवाँ टाइगर रिजर्व बना दिया गया था। इसके पश्चात 1986 में इसमें कुछ अन्य क्षेत्रों को भी जोड़ा गया। अंतः इस टाइगर रिजर्व में कुछ और क्षेत्रों को जोड़कर पश्चिम बंगाल सरकार ने 1992 में एक राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया गया था। यह नेशनल पार्क गंगेटिक प्लेन्स (Gangetic Plains) में फैला हुआ है। इस उद्यान की नार्थ बाउंड्री (North Boundary) भूटान के साथ लगती है। इस राष्ट्रीय उद्यान को जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (Geological Survey of India) ने राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक (National Geological Monument) घोषित कर दिया गया है। फॉउना (Fauna in Buxa National Park) बुक्सा राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे पक्षियों की 284 प्रजातियां, मछलियों की 65 प्रजातियां, रेप्टाइल्स की 41 प्रजातियां, मैमल्स की 73 प्रजातियां और एम्फीबियन की 4 प्रजातियां शामिल है। यहाँ प्रमुख रूप से एशियाई हाथी (Asian Elephant), रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), सांभर हिरण (Sambar Deer), क्लाउडेड तेंदुआ (Clouded Leopard), भारतीय तेंदुआ (Indian Leopard) और गौर (Gaur), एशियाई सुनहरी बिल्ली (Asian Golden Cat), जंगली सूअर (Wild Boar), चीतल (Chital), विशाल गिलहरी (Giant Squirrel), यूरेशियन ग्रिफॉन (Eurasian Griffon), अमूर फाल्कन (Amur Falcon), बंगाल फ्लोरिकन (Bengal Florican), रीगलगेन (Regelgen), चीनी पैंगोलिन (Chinese Pangolin), हिस्पिड खरगोश (Hispid Rabbit), हॉग हिरन (Hog Deer), शैलेट चोंच वाला गिद्ध (Shalet-Billed Vulture), चेस्टनट-ब्रेस्टेड पार्ट्रिज (Chestnut-Brested Partridge), रूफस नेकड हॉर्नबिल (Rufous Necked Hornbill), वाइट रम्पड वल्चर (White-Rumped Vulture), फेरुजिनस पोचार्ड (Ferruginous Pochard) और ग्रेट हॉर्नबिल (Great Hornbill) पाए जाते है। फ्लोरा (Flora in Buxa National Park) अगर बात की जाए बुक्सा नेशनल पार्क के फ्लोरा की तो, यहाँ पेड़ों (Trees) की 450 प्रजातियाँ, झाड़ियों (Shrubs) की 250 प्रजातियाँ, जलीय वनस्पतियों (Aquatic Plant) की 150 प्रजातियाँ, घासों (Grass) की 100 प्रजातियाँ, बाँसों (Bamboo) की 10 प्रजातियाँ, आर्किड (Orchid) की 150 प्रजातियाँ, और हर्ब्स (Herbs) की 400 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यहाँ के पेड़ों की कुछ प्रमुख प्रजातियाँ निम्नलिखित है- साल (Sal), चंपा (Champa), गम्हार (Gamhar), सिमुल (Simul) और चिक्रासी (Chikrasi) शामिल है। बेस्ट टाइम टू विजिट बुक्सा नेशनल पार्क (Best time to visit Buxa National Park) अगर आप बुक्सा राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने से बचें क्योंकि समर में यहाँ बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है। आप यहाँ ठण्ड के महीनों (नवंबर से मार्च) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं और आपको यहाँ ज्यादा से ज्यादा जानवर देखने को मिलेंगे। कैसे पहुंचे बुक्सा राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Buxa National Park)?

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तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में स्थित है भारत का दूसरा सबसे पुराना नेशनल पार्क

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मुदुमलै राष्ट्रीय उद्यान (Mudumalai National Park) नीलगिरी पहाड़ियों के बीच तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में स्थित है। मुदुमलै नेशनल पार्क लगभग 321 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1940 में हुई थी। सर्वप्रथम, मुदुमलै राष्ट्रीय उद्यान को 1940 में वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया था। इसके पश्चात को इसे नीलगिरि बायोस्फियर रिजर्व (Nilgiri Biosphere Reserve) में जोड़ दिया गया। 2007 में इस राष्ट्रीय उद्यान को प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिजर्व बना दिया गया। यह राष्ट्रीय उद्यान हैली नेशनल पार्क के बाद भारत का दूसरा सबसे पुराना नेशनल पार्क है। यह नेशनल पार्क कर्नाटक और केरल राज्य के साथ अपनी सीमाएँ शेयर (Share) करता है। फॉउना (Fauna in Mudumalai National Park) मुदुमलै राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे पक्षियों की 266 प्रजातियां, मछलियों की 38 प्रजातियां, शाकाहारी जानवरों की 10 प्रजातियां और माँसाहारी जानवरों की 18 प्रजातियां शामिल है। यहाँ प्रमुख रूप से एशियाई हाथी (Asian Elephant), इंडियन लेपर्ड (Indian Leopard), बंगाल टाइगर (Bengal Tiger), चीतल (Chital), रस्टेड स्पॉटेड कैट (Rusted Spotted Cat), लेपर्ड कैट (Leopard Cat), सुनहरे सियार (Golden Jackal), नीलगिरि मार्टन (Nilgiri Marten), स्लॉथ भालू (Sloth Bear), छोटा भारतीय सिवेट (Small Indian Civet), एशियाई पाम सिवेट (Asian Palm Civet), भूरा पाम सिवेट (Brown Palm Civet), सुर्ख नेवला (Ruddy Mongoose), धारी-गर्दन वाला नेवला (Striped-necked Mongoose), भारतीय ग्रे नेवला (Indian Grey), जंगल बिल्ली (Wild Cat), गौर (Gaur), सांभर (Sambhar), हिरण (Deer), भारतीय मंटजैक (Indian Muntjac), ब्लैकबक (Blackbuck), जंगली सूअर (Wild Boar), भारतीय पैंगोलिन (Indian Pangolin) और भारतीय क्रेस्टेड साही (Indian Crested Porcupine) पाए जाते है। फ्लोरा (Flora in Mudumalai National Park) अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ पेड़ों (Trees) की 154 प्रजातियाँ, झाड़ियों (Shrubs) की 77 प्रजातियाँ, लताओं (Vines) की 53 प्रजातियाँ और हर्ब्स (Herbs) की 214 प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- सागौन (Teak), एक्सलवुड (Axlewood), भारतीय लॉरेल (Indian Laurel), कुसुम (Kusum), वीवर्स बीम (Weaver’s Beam), मालाबार किनो (Malabar Kino), भारतीय रोज़वुड (Indian Rosewood), मालाबार प्लम (Malabar Plum), रेशम (Silk), कपास (Cotton), भारतीय बांस (Indian Bamboo), आम (Mango), ख़ुरमा (Persimmon), ऑरेंज क्लाइंबर (Orange Climber), वट्टाकाका (Wattakaka), वोलुबिलिस (Volubilis), फ्रेंगिपानी (Frangipani), धारीदार ककड़ी (Striped Cucumber), चमेली सीलोन साटनवुड (Jasmine Ceylon Satinwood) और रेड सीडर कैटेचू (Red Cedar Catechu) शामिल है। बेस्ट टाइम टू विजिट मुदुमलै राष्ट्रीय उद्यान (Best time to visit Mudumalai National Park) अगर आप मुदुमलै राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने से बचें क्योंकि समर में यहाँ बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है। आप यहाँ ठण्ड के महीनों (नवंबर से मार्च) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं और आपको यहाँ ज्यादा से ज्यादा जानवर देखने को मिलेंगे। कैसे पहुंचे मुदुमलै राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Mudumalai National Park)?

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भारत के फेमस टाइगर रिजर्वों की सूची में शामिल है छत्तीसगढ़ का इंद्रावती टाइगर रिजर्व

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इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान (Indravati National Park) छत्तीसगढ़ में एक नेशनल पार्क है जो, बीजापुर जिले में स्थित है। इंद्रावती नेशनल पार्क लगभग 1,258 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1975 में हुई थी। सर्वप्रथम, इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान को 1981 में नेशनल पार्क घोषित किया गया था। इसके पश्चात 1983 में इसे प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिजर्व बना दिया गया। यह टाइगर रिजर्व भारत के प्रसिद्ध टाइगर रिजर्वों में आता है। इस नेशनल पार्क का नाम इंद्रावती नदी के नाम पर रखा गया था जो इस नेशनल पार्क के किनारे से बहती है। यह नेशनल पार्क वाइल्ड वाटर बफैलो (Wild Water Buffalo) का निवास स्थल है जो अब विलुप्त होने के कगार पर है। फॉउना (Fauna in Indravati National Park) इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे वाइल्ड वॉटर बफैलो (Wild Water Buffalo), टाइगर (Tiger), गौर (Gaur), तेंदुआ (Leopard), एशियाई हाथी (Asian Elephant), करैत (Krait), चौसिंगा (Chausingha), चीतल (Chital), फ्लाइंग गिलहरी (Flying Squirrel), भारतीय मंटजैक (Indian Muntjac), पैंगोलिन (Pangolin), सांभर (Sambar), जंगली सूअर (Wild Boar), काला हिरण (Black Deer), जंगली कुत्ते (Wild Dog), रीसस बंदर (Rhesus Monkey), साही (Porcupine), भारतीय गिरगिट (Indian Chameleon), भारतीय रॉक अजगर (Indian Rock Python), नीलगाय (Nilgai), कोबरा (Cobra), फ्रेशवॉटर क्रोकोडाइल (Freshwater Crocodile), भालू (Bear) और मॉनिटर छिपकली (Monitor Lizard) शामिल है। फ्लोरा (Flora in Indravati National Park) अगर बात की जाए इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के फ्लोरा की तो, यहाँ पेड़ों की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- बेर (Ber), बांस (Bamboo), सागौन (Teak), लेगरस्ट्रोमिया (Lagerstroemia), पलाश (Palas), बेहरा (Behera), बेल (Bel), शीशम (Sheesham), कर्ता (Karta), कुल्लू (Kullu), बीजा (Bija), मुंडी (Mundi), धोबन (Dhoban), रोहन (Rohan), सिरस (Siras), अर्जुन (Arjun), सलाई (Salai), जामुन (Jamun), साल (Sal), तेंदू (Tendu), सेमल (Semal), हल्दू (Haldu) और महुआ (Mahua) शामिल है। बेस्ट टाइम टू विजिट इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान (Best time to visit Indravati National Park) अगर आप इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने से बचें क्योंकि समर में यहाँ बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है और टेम्प्रेचर (Temperature) 40 डिग्री से ऊपर पहुँच जाता है। आप यहाँ ठण्ड के महीनों (नवंबर से मार्च) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं। कैसे पहुंचे इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Indravati National Park)?

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कश्मीरी हंगुल का घर है दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान

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दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान (Dachigam National Park) जम्मू कश्मीर में एक नेशनल पार्क है जो, श्रीनगर जिले से 22 किमी दूर स्थित है। दाचीगाम नेशनल पार्क लगभग 141 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1981 में हुई थी। सर्वप्रथम, दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान को 1910 को जम्मू कश्मीर के महराजा ने इस क्षेत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया। इसके पश्चात, 1981 इसे नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया। डल झील के निकट होने के कारण डल झील का जलक्षेत्र इस नेशनल पार्क के संरक्षण क्षेत्र में आता है और इसी कारण डल झील दाचीगाम नेशनल पार्क के जीवों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। दाचीगाम का कश्मीरी में अर्थ होता है ‘दस गांव’ और इन्ही दस गाँवों को जोड़कर इस नेशनल पार्क का निर्माण हुआ था। फॉउना (Fauna in Dachigam National Park) दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे कश्मीरी हंगुल (Kashmir Hangul), हिम तेन्दुआ (Snow Leopard), कस्तूरी मृग (Musk Deer), वल्चर (Vulture), गीदड़ (Jackal), मोनाल (Monal), हिमालयी काला भालू (Himalayan Black Bear), बुलबुल (Bulbul), लेपर्ड कैट (Leopard Cat), कश्मीर धूसर लंगूर (Kashmir Gray Langur), हिमालय भूरा भालू (Himalayan Brown Bear), हिमालय सराव (Himalayan Sarao), मिनिवेट (Minivet), पहाड़ी लोमड़ी (Mountain Fox), गोल्डन ईगल (Golden Eagle), हिमालय रासू (Himalayan Rasu) और जंगली बिल्ली (Jungle Cat) शामिल है। फ्लोरा (Flora in Dachigam National Park) अगर बात की जाए दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान के फ्लोरा की तो, यहाँ पेड़ों की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- हिमालयी नम शीतोष्ण सदाबहार (Himalayan Moist Temperate Evergreen), नम पर्णपाती झाड़ियाँ (Moist Deciduous Shrubs), देवदार (Deodar), चीड़ (Pine) एवं ओक (Oak) शामिल है। बेस्ट टाइम टू विजिट दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान (Best time to visit Dachigam National Park) अगर आप दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप विंटर (Winter) में आने से बचें क्योंकि विंटर में यहाँ बहुत ज्यादा ठंड पड़ती है। आप यहाँ मार्च से जून के बीच में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं। कैसे पहुंचे दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Dachigam National Park)?

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Top 6 National Parks of Uttarakhand

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उत्तराखंड हिमालयी क्षेत्र में बसा हुआ एक राज्य है जहाँ धार्मिक संस्कृति के साथ-साथ नेचुरल ब्यूटी भी हैं। यहाँ गंगा और यमुना का उद्गम स्थल भी है और दुनिया का सबसे खूबसूरत नेशनल पार्क भी। यहाँ हिन्दुओं के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल चार धाम (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) भी है। यहाँ नेचुरल ब्यूटी बहुत ज्यादा है इसलिए छोटा राज्य होने के बावजूद, यहाँ छह नेशनल पार्क्स है। आज के फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताएँगे इन सभी नेशनल पार्क्स (National Parks of Uttarakhand) के बारें में जहाँ आप नेचर को एक्सप्लोर कर सकते हैं। 1. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (Jim Corbette National Park) जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क जिसे पहले हैली नेशनल पार्क भी कहा जाता था। यह हमारे देश का सबसे पुराना नेशनल पार्क भी है। यह उत्तराखंड के रामनगर में स्थित है। दिल्ली से जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की दूरी करीबन 250 किलोमीटर है। यहां पर आप किसी भी साधन से बड़ी ही आसानी से पहुंच सकते है। यहां पर आपको 2000 से भी ज्यादा रंग बिरंगी तितलियों की प्रजातियां मिल जाएगी। आप यहां किफायती दाम में होटल या रिसोर्ट में भी रुक सकते हैं। यह कॉर्बेट यकीनन प्रकृति के बहुत करीब और शांति प्रिय है। कैसे पहुंचे जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Jim Corbette National Park)? 2. फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Valley of Flowers National Park) वैली ऑफ़ फ्लावर उत्तराखंड में एक ऐसी जगह है जहां आपको चारों ओर हजारों प्रकार के फूलों, पौधों और छोटे-छोटे जीव जंतुओं को देखने का अवसर मिलेगा। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि इस शब्दों में बयां किया जा सकना नामुमकिन है। इस जगह की खूबसूरती को महसूस करने के लिए और यहां के फिजाओं में बसे सुकून के एहसास को समझने के लिए आपको खुद ही यहां तक आना पड़ेगा। नेचर्स लवर के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि आप इसे तस्वीरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। इस जगह के बारे में आपको एक और खास बात यह है कि ये जगह वर्ल्ड हेरिटेज साइट के सूची में शामिल है। यहाँ लगभग 500 से भी ज्यादा प्रकार की पौधों और जड़ी बूटियों की प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- एनीमोन (Anemone), जर्मेनियम (Germanium), मार्श (Marsh), गेंदा (Marigold), प्रिभुला (Pribula), रानुनकुलस (Ranunculus), कोरिडालिस (Corydalis), इन्डुला (Indula), सौसुरिया (Saussurea) और कम्पानुला (Campanula)। कैसे पहुंचे फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Valley of Flowers National Park)? वैली ऑफ फ्लावर नेशनल पार्क पहुंचने के लिए आपको ट्रैकिंग करनी पड़ेगी। इसके लिए आपको सबसे पहले उत्तराखंड के गोविंद घाट से पुलना गांव तक पहुंचना होगा। पुलना गांव से आपकी ट्रैकिंग की शुरुआत होगी। जब आप पुलना गांव से अपनी ट्रैकिंग की शुरुआत करेंगे तो रास्ते में आपको सबसे पहले जंगल चट्टी नाम के एक बाजार से गुजरना होगा। जंगल चट्टी से गुजरते हुए आप भ्युवदार गांव पहुंचेंगे। भ्युवदार गांव इस ट्रक का सबसे इंपॉर्टेंट पॉइंट होगा। जहां से आप घांगरिया के लिए निकलेंगे। पुलना से घांगरिया तक का ट्रैक लगभग 10 किलोमीटर का होता है। घांगरिया पहुंचकर आपको एक दिन रुकना पड़ेगा, क्योंकि दिन के 12:00 के बाद घांगरिया से आगे की ट्रैकिंग रोक दी जाती है। अगले दिन आप वैली ऑफ फ्लावर के लिए ट्रैकिंग शुरू कर सकते हैं। घांगरिया से वैली ऑफ फ्लावर का रास्ता लगभग 4 किलोमीटर का है और आप बहुत ही आसानी से इस ट्रैक को पूरा कर लेंगे। 3. गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान (Govind Pashu Vihar National Park) गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान सुपीन रेंज में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के पास स्थित है। गोविन्द पशु विहार नेशनल पार्क लगभग 958 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1955 में हुई थी। इस नेशनल पार्क का नाम स्वतंत्रता सेनानी और राजनितज्ञ गोविन्द बल्लभ पंत के नाम पर रखा गया था जो उस समय होम मिनिस्टर (Home Minister) के पद पर आसीन थे। हिंदी को भारत की राष्ट्रीय भाषा घोषित करने में गोविन्द बल्लभ पंत का प्रमुख हाथ था। यह नेशनल पार्क गढ़वाल हिमालय (Garhwal Himalayas) क्षेत्र में स्थित हैं। इस राष्ट्रीय उद्यान में भारत सरकार द्वारा चलाये जा रहे स्नो लेपर्ड प्रोजेक्ट (Snow Leopard Project) के तहत यहाँ स्नो लेपर्ड का संरक्षण किया जाता है। आप इस नेशनल पार्क में ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। कैसे पहुंचे गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Govind Pashu Vihar National Park)? 4. गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (Gangotri National Park)  गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान गंगोत्री हिमानी के गोद में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है।यह नेशनल पार्क उत्तराखंड का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। गंगोत्री नेशनल पार्क लगभग 2390 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1989 में हुई थी। इस उद्यान के पूर्व में तिब्बत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा है। गंगा नदी का उद्गम स्थल गोमुख इसी उद्यान में स्थित है। इस उद्यान का नाम गंगोत्री ग्लेशियर के नाम पर रखा गया है जो हिन्दुओं के प्रमुख पूजनीय स्थलों में से एक है। आपको यहाँ की ऊंचाई में भारी विषमता देखने को मिलेंगी। यहाँ प्रमुख रूप से हिम तेंदुआ (Snow leopard), बाघ (Tiger), भरल (Bharal), हिमालयन तहर (Himalayan Tahr), भूरा भालू (Brown Bear), हिमालयन मोनाल (Himalayan Monal), हिमालयन स्नोकॉक (Himalayan Snowcock), काला भालू (Black Bear), कस्तूरी मृग (Musk Deer) पाए जाते है। कैसे पहुंचे गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Gangotri National Park)? 5. राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji National Park) उत्तराखंड राज्य के देहरादून और हरिद्वार में स्थित राजाजी नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 820.5 वर्ग किलोमीटर है। हाथियों, तेंदुओं, बाघों और हिरनों जैसे जानवरों को अपने में पनाह देने वाला यह पार्क पर्यटकों के मन को भी काफी लुभाता है। सुहाने मौसम, हरे भरे पेड़ और पहाड़ियों के बीच खुले में घूम रहे जानवर को देखना अपने आप में ही अविस्मरणीय दृश्य होता है। कैसे पहुंचे राजाजी राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Rajaji National Park)? 6. नंदा देवी नेशनल पार्क (Nanda Devi National Park) उत्तराखंड के चमोली गढ़वाल में स्थित नंदा देवी नेशनल पार्क (Nanda Devi National Park) देश के सबसे प्रसिद्ध नेशनल पार्कों की सूची में गिना जाता है।