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दिल्ली के नजदीक घूमने के लिए बेस्ट है कालेसर नेशनल पार्क

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चंडीगढ़ से 122 किलोमीटर दूर हरियाणा के यमुनानगर जिले में कालेसर राष्ट्रीय उद्यान (Kalesar National Park) और कालेसर वन्यजीव अभ्यारण्य (Kalesar Wildlife Sanctuary) है जो अपने नेचुरल डाइवर्सिटी (Natural Diversity) के लिए अपने आसपास के क्षेत्र में प्रसिद्ध है। कालेसर राष्ट्रीय उद्यान और कालेसर वन्यजीव अभ्यारण्य क्रमशः 53 वर्ग किमी और 53.45 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है और इन दोनों की स्थापना क्रमशः 8 दिसंबर 2003 और 13 दिसंबर 1996 को हुई थी। यह नेशनल पार्क और वन्यजीव अभ्यारण्य, उत्तराखंड के राजाजी राष्ट्रीय उद्यान (Rajaji National Park) और हिमाचल प्रदेश के सिम्बलबाड़ा राष्ट्रीय उद्यान (Simbalbara National Park) राष्ट्रीय उद्यान से जुड़ा हुआ है। इस नेशनल पार्क का नाम कालेसर महादेव मंदिर के नाम पर रखा गया था जो इसी राष्ट्रीय उद्यान में है। कालेसर नेशनल पार्क में फॉउना (Fauna in Kalesar National Park) कालेसर राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते हैं। यहाँ पाए जाने वाले जीवों में एशियाई हाथी (Asian Elephant), भारतीय तेंदुआ (Indian Leopard), लेपर्ड कैट (Leopard Cat), वाइल्ड कैट (Wild Cat), चीतल (Chital), रस्टी-स्पॉटेड कैट (Rusty-spotted Cat), नीलगाय (Nilgai), सांभर (Sambar), भारतीय सियार (Indian Jackal), रीसस मकाक (Rhesus Macaque), छोटा भारतीय सिवेट (Small Indian Civet), सूअर (Boar), इंडियन क्रेस्टेड पौरक्यूपाइन (Indian Crested Porcupine), ग्रे लंगूर (Grey Langur), भारतीय ग्रे नेवला (Indian Grey Mongoose), बार्किंग डियर (Barking Deer), गोरल (Goral), कॉमन पाम सिवेट (Common Palm Civet), भारतीय खरगोश (Indian Hare) आदि शामिल है। कालेसर नेशनल पार्क में फ्लोरा (Flora in Kalesar National Park) अगर बात की जाए कालेसर नेशनल पार्क के फ्लोरा की तो, यहाँ के 53 प्रतिशत भागों पर घने जंगल 38 प्रतिशत भागों पर खुला जंगल और 9 प्रतिशत भागों पर झाड़ियां है। यहाँ पाए जाने वाले पेड़ों की कुछ प्रमुख प्रजातियाँ में साल (Sal), सेमुल (Semul), अमालतास (Amaltas), बहेरा (Bahera), खैर (Khair), शीशम (Shisham), सैन (Sain), झिंगन (Jhingan), छाल (Chhal), सिन्दूर (Sindoor), आदि है। इस राष्ट्रीय उद्यान में बहुत अधिक संख्या में औषधीय पौधे पाए जाते हैं। बेस्ट टाइम टू विजिट कालेसर नेशनल पार्क (Best time to visit Kalesar National Park) अगर आप कालेसर राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने से बचें क्योंकि समर में इस राष्ट्रीय उद्यान में बहुत गर्मी पड़ती है। आप यहाँ ठण्ड के महीनों (अक्टूबर से मई) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यहाँ का मौसम सुहाना और परिस्थितियां सम रहती हैं और आपको यहाँ ज्यादा से ज्यादा जानवर देखने को मिलेंगे। कैसे पहुंचे कालेसर राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Kalesar National Park)?

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नथ, हंसुल और चवन्नीमाला से है उत्तराखंड की संस्कृति की पहचान।

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पहाड़ और उत्तराखंड किसे पसंद नहीं यह जगह घूमने के शौकीन लोगों के लिए एक बेहतरीन टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। खास कर दिल्ली वालों का तो उत्तराखंड से एक अलग हीं नाता रहता है। तभी तो हर बार गर्मियों की छुट्टी में अक्सर लोग उत्तराखंड की सैर पर निकल जाते हैं। लेकिन पहाड़ों के अलावा उत्तराखंड की एक और विशेषता है और वह है उनका पारंपरिक परिधान। अगर आप भी कभी उत्तराखंड गए हैं तो आपने वहां के स्थानीय लोगों को अपने पारंपरिक परिधान में घूमते हुए आवश्यक देखा होगा। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको उत्तराखंड के परिधान (Traditional clothes of Uttarakhand) के बारे में बताने वाले हैं। कहते हैं हमारा पहनावा हमारे कल्चरल बैकग्राउंड को दर्शाता है। पहनावा से इतिहास का एक बड़ा हीं बेजोड़ नाता रहता है। किसी जगह के स्थानीय लोगों के पहनावे को देखकर उस जगह के ऐतिहासिक और भौगोलिक पृष्ठभूमि को बताना आसान हो जाता है। भारत विविधताओं का देश है जहां हर राज्य के लोगों का अपना एक अलग वेशभूषा और परिधान होता है। ऐसा ही परिधान उत्तराखंड के निवासियों का भी है। आईए जानते हैं उत्तराखंड के परिधान के बारे में कुछ विशेष बातें : नथ से है खास लगाव : अगर आप किसी त्योहार के समय उत्तराखंड जा रहे हैं तो वहां की अधिकतर महिलाएं आपको बड़े-बड़े नथ पहने हुए दिख जाएंगी। उत्तराखंड के लगभग सभी भागों में ऐसे बड़े-बड़े नथ पहनने का प्रचलन कई सौ सालों पुराना है। इन्हें बुलाक या फिर फुल्ली के नाम से जाना जाता है। उत्तराखंड की महिलाओं के लिए नथ एक पूंजी की तरह होता है। जिसे वह पीढ़ी दर पीढ़ी संभाल कर रखती हैं। खासकर टिहरी क्षेत्र की महिलाओं का नथ काफी भारी होता है। कहा जाता है कि जो महिला जितने धनी परिवार से होगी वह उतना ही भारी नथ पहनेगी। पुलिया बिछिया और बिछुआ सब हैं एक : थारू और जोहरी जनजाति की औरतें पुलिया पहने हुए दिख जाती हैं, जिसे उत्तराखंड के दूसरे भाग में बिछिया या बिछुआ के नाम से जाना जाता है। गढ़वाल में बिछुवा कहने का प्रचलन है तो कुमाऊं में इसे बिछिया कहते हैं। दरअसल पुलिया बिछिया अथवा बिछुआ पैरों में पहने जाने वाला एक गहना है जिसे पैर की उंगलियों में पहनते हैं। भारत के अन्य भागों में भी अक्सर विवाहित महिलाएं पैरों में बिछिया पहना करती हैं। गले में पहनी जाती है विशेष हार : यहां की महिलाओं के गले में आपको सिक्कों की मालाएं दिख जाएंगी। जहाँ इन मालाओं को कुमाऊं में अठन्नीमाला, रुपैयामाला, चवन्नीमाला, हंसुली, कंठीमाला, गुलूबंद तथा लॉकेट कहते हैं तो वहीं गढ़वाल में यह माला हमेल के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा गले में चंद्रहार, कंठीमाला और तिलहरी जैसे गहने पहनने का भी प्रचलन है। कमर बंद है खास :- गढ़वाल क्षेत्र की महिलाएं कमरबंद के रूप में कपड़े का कमरबंद पहनती हैं। जिससे उन्हें काम करने में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती है। इसके अलावा वहां की महिलाएं अपने कमर में करधनी, तगड़ी, कमर ज्योड़ी जैसे आभूषण पहना करती हैं।

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तमिलनाडु के कोयंबटूर और तिरुपुर जिलों में स्थित है अन्नामलाई राष्ट्रीय उद्यान

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अन्नामलाई राष्ट्रीय उद्यान (Annamalai National Park) जिसे इंदिरा गाँधी नेशनल पार्क भी कहा जाता है, तमिलनाडु के कोयम्बटूर और तिरुपुर जिले में स्थित है। यह नेशनल पार्क अन्नामलाई के पहाड़ियों में अवस्थित है। अन्नामलाई नेशनल पार्क लगभग 108 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1976 में हुई थी। सर्वप्रथम, 1974 में अन्नामलाई वन्यजीव अभ्यारण्य बनाया गया। इसके पश्चात, 1976 में इसे एक नेशनल पार्क घोषित कर दिया। प्रोजेक्ट टाइगर के तहत 2008 में इंदिरा गाँधी वन्यजीव अभ्यारण्य (IGWS) को एक टाइगर रिजर्व बना दिया गया। इस राष्ट्रीय उद्यान में चार नदियां बहती है जो अपंबर, अलियार, चिन्नार और कदंबरई है। अन्नामलाई नेशनल पार्क में फॉउना (Fauna in Annamalai National Park) अन्नामलाई राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते हैं। यहाँ पाए जाने वाले जीवों में बंगाल टाइगर (Bengal Tiger), भारतीय हाथी (Indian Elephant), भारतीय तेंदुआ (Indian Leopard), ढोल (Dhol), नीलगिरि तहर (Nilgiri Tahr), लायन-टेल्ड मकाक (Lion-tailed Macaque), भारतीय भूरा नेवला (Indian Brown Mongoose), गौर (Gaur), मालाबार स्पाइनी डोरमाउस (Malabar Spiny Dormouse), नीलगिरि लंगूर (Nilgiri Langur), रस्टी-स्पॉटेड कैट (Rusty-spotted Cat), सांभर (Sambar), स्लॉथ भालू (Sloth Bear), भारतीय विशाल गिलहरी (Indian Giant Squirrel) आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ भारतीय पैंगोलिन (Indian Pangolin), गोल्डन सियार (Golden Jackal), लेपर्ड कैट (Leopard Cat), वाइल्ड कैट (Wild Cat), चीतल (Chital), भारतीय मंटजैक (Indian Muntjac), भारतीय चित्तीदार शेवरोटेन (Indian Spotted Chevrotain), जंगली सूअर (Wild Boar), ग्रे लंगूर (Grey Langur), बोनट मकाक (Bonnet Macaque), एशियाई पाम सिवेट (Asian Palm Civet), छोटा भारतीय सिवेट (Small Indian Civet), भारतीय ग्रे नेवला (Indian Grey Mongoose), धारीदार गर्दन वाला नेवला (Striped-necked Mongoose), सुर्ख नेवला (Ruddy Mongoose) भी पाए जाते है। अन्नामलाई नेशनल पार्क में फ्लोरा (Flora in Annamalai National Park) अगर बात की जाए अन्नामलाई नेशनल पार्क के फ्लोरा की तो, यहाँ पाए जाने वाले पेड़ों की कुछ प्रमुख प्रजातियाँ में होपिया परविफ्लोरा (Hopia Parviflora), मेसुआ फेरिया (Messua Ferrea), कैलोफिलम टोमेंटोसम (Calophyllum Tomentosum), एवोडिया मेलियाफोलिया (Evodia Melliafolia), वेटेरिया इंडिका (Vetaria Indica), कुलेनिया एक्सेलसा (Cullenia Excelsa), मैंगीफेरा इंडिका (Mangifera Indica), एल्सटोनिया स्कॉलरिस (Alstonia Scholaris), माचिलस मैक्रान्था (Machilus Macrantha), ऐलेन्थस (Ailanthus), बॉम्बैक्स सीइबा (Bombax Ceiba), यूकेलिप्टस ग्रैंडिस (Eucalyptus Grandis) और पोडोकार्पस वालिचियानस (Podocarpus Wallichianus) शामिल है। बेस्ट टाइम टू विजिट अन्नामलाई नेशनल पार्क (Best time to visit Annamalai National Park) अगर आप अन्नामलाई राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने से बचें क्योंकि समर में यहाँ बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है। आप यहाँ ठण्ड के महीनों (अक्टूबर से मई) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यहाँ का मौसम सुहाना और परिस्थितियां सम रहती हैं और आपको यहाँ ज्यादा से ज्यादा जानवर देखने को मिलेंगे। कैसे पहुंचे अन्नामलाई राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Annamalai National Park)?

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नीलगिरी तहर का आशियाना है तो एराविकुलम नेशनल पार्क

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एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान (Eravikulam National Park) जिसे राजमलाई नेशनल पार्क भी कहा जाता है, केरल के इडुक्की और एर्नाकुलम जिले में स्थित है। एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान केरल का सबसे पुराना और बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। यह नेशनल पार्क पश्चिमी घाट के पहाड़ियों में अवस्थित है। एराविकुलम नेशनल पार्क लगभग 97 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1978 में हुई थी। एराविकुलम नेशनल पार्क की स्थापना नीलगिरी तहर के संरक्षण के लिए की गयी थी जो इस राष्ट्रीय उद्यान में बहुत अधिक संख्या में निवास करती है। अनामुडी (2695 मीटर) जो दक्षिण भारत की सबसे ऊंची चोटी है, एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में ही है। यह राष्ट्रीय उद्यान पूयमकुट्टी और इदमलयार जंगलों से घिरा हुआ है। इस राष्ट्रीय उद्यान में दो नदियां बहती है जो चिन्नार और पम्बर है। एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास (History of Eravikulam National Park) सर्वप्रथम, 1971 से पहले तक इस राष्ट्रीय का संरक्षण ‘कानन देवन हिल्स प्रोड्यूस कंपनी’ (Kanan Devan Hills Produce Company) करती थी। 1971 के पश्चात इस कंपनी से संरक्षण का अधिकार केरल सरकार ने ले लिया। 1975 में केरल सरकार द्वारा इस उद्यान को एराविकुलम-राजमाला वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद 1978 में इसे नेशनल पार्क बना दिया गया। एराविकुलम नेशनल पार्क में फॉउना (Fauna in Eravikulam National Park) एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते हैं जिनमें मैमल्स की 26 प्रजातियाँ, एम्फीबियन की 19 प्रजातियाँ, तितलियों की 101 प्रजातियाँ और बर्ड्स की 132 प्रजातियाँ शामिल है। एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में सर्वाधिक रूप से नीलगिरि तहर निवास करते है जिनकी संख्या इस उद्यान में 750 के करीब है। नीलगिरि तहर के अलावा यहाँ पाए जाने वाले जीवों में ब्लैक एंड ऑरेंज फ्लाईकैचर (Black and Orange Flycatcher), नीलगिरि पिपिट (Nilgiri Pipit), नीलगिरि वुड पिजन (Nilgiri Wood Pigeon), सफेद बेलदार शॉर्टविंग (White-bellied Shortwing), केरल लाफिंगथ्रश (Kerala Laughingthrush) आदि शामिल है। वही यहाँ पाए जाने वाले जानवरों में बाघ (Tiger), हाथी (Elephant), तेंदुआ (Leopard), लायन-टेल्ड मकाक (Lion-tailed Macaque), सांभर (Sambhar), गौर (Gaur), भारतीय मंटजेक (Indian Muntjac), सुनहरा सियार (Golden Jackal), वाइल्ड कैट (Wild Cat), वाइल्ड डॉग (Wild Dog), ढोल (Dhole), नीलगिरि लंगूर (Nilgiri Langur), धारीदार गर्दन वाला नेवला (Striped-necked Mongoose), भारतीय साही (Indian Porcupine), नीलगिरि मार्टन (Nilgiri Marten), नीलगिरि फ्लाईकैचर (Nilgiri Flycatcher), छोटे पंजे वाला ऊदबिलाव (Short-toed Beaver), सुर्ख नेवला (Ruddy Mongoose), डस्की पाम गिलहरी (Dusky Palm Squirrel), पालनी फोररिंग (Palani Four-ringed), रेड डिस्क बुशब्राउन (Red Disc Bushbrown) आदि है। एराविकुलम नेशनल पार्क में फ्लोरा (Flora in Eravikulam National Park) अगर बात की जाए एराविकुलम नेशनल पार्क के फ्लोरा की तो, यहाँ पाए जाने वाले वनस्पतियों की कुछ प्रमुख प्रजातियाँ में एक्टिनोडाफेन बॉर्डिलोनी (Actinodaphne Bordiloni), माइक्रोट्रोपिस रामिफ्लोरा (Microtropis Ramiflora), पिटोस्पोरम टेट्रास्पर्मियम (Pittosporum Tetraspermium), सिसिजियम अरोनोटियानम (Syzygium Auronotianum), क्राइसोपोगोन ज़ेलानियस (Chrysopogon Zelanius), यूपेटोरियम एडेनोफोरम (Uupatorium Adenoforam), स्ट्रोबिलेंथस कुंथियानस (Strobilanthus Kunthianus), यूलिया फियोथ्रिक्स (Eulea Phaeothrix), ट्रिपोजेन ब्रोमोड्स (Trypogena Bromodes) और अरुंडिनेला फस्काटा (Arundinella Fuscata) शामिल है। बेस्ट टाइम टू विजिट एराविकुलम नेशनल पार्क (Best time to visit Eravikulam National Park) अगर आप एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने से बचें क्योंकि समर में यहाँ बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है। आप यहाँ ठण्ड के महीनों (नवंबर से फरवरी) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं और आपको यहाँ ज्यादा से ज्यादा जानवर देखने को मिलेंगे। फरवरी से लेकर मार्च महीने तक यह राष्ट्रीय उद्यान बंद रहता है। कैसे पहुंचे एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Eravikulam National Park)?

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Tadoba National Park-चंद्रपुर जिले में स्थित है महाराष्ट्र का सबसे बड़ा और पुराना राष्ट्रीय उद्यान

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ताडोबा अंधेरी राष्ट्रीय उद्यान (Tadoba National Park) महाराष्ट्र का सबसे बड़ा और पुराना नेशनल पार्क है जो, चंद्रपुर जिले में स्थित है। यह नेशनल पार्क ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान और अंधेरी वन्यजीव अभ्यारण्य का सम्मलित रूप है। ताडोबा नेशनल पार्क लगभग 625 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1955 में हुई थी। सर्वप्रथम, ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान को 1955 में नेशनल पार्क बनाया गया था। इसके पश्चात 2008 में अंधेरी वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित कर दिया गया था। इसके बाद 1995 में इन दोनों को मर्ज कर दिया गया। ताडोबा और अंधेरी के जंगलों में रहने वाले जनजातियों द्वारा ताडोबा या तरु भगवान की पूजा की जाती है। और इसी भगवान के नाम पर इस राष्ट्रीय उद्यान का नामकरण हुआ है अंधेरी वन्य जीव अभ्यारण का नाम अंधेरी नदी के नाम पर रखा गया है। फॉउना (Fauna in Tadoba National Park) ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते हैं। यहाँ पाए जाने वाले जीवों में बंगाल टाइगर (Bengal Tiger), भारतीय तेंदुआ (Indian Leopard), स्लॉथ भालू (Sloth Bear), गौर (Gaur), सांभर (Sambar), ढोल (Dhole), स्मॉल इंडियन सिवेट (Small Indian Civet), नीलगाय (Nilgai), वाइल्ड कैट्स (Wild Cats), चौसिंगा (Chausingha), बार्किंग डियर (Barking Deer), चीतल (Chital), हनी बैजर (Honey Badger), ग्रे -हेडेड फिश ईगल (Grey-headed Fish Eagle), क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल (Crested Serpent Eagle), चेंजेबल हॉक-ईगल (Changeable Hawk-Eagle), इंडियन पिटा (Indian Pitta), क्रेस्टेड ट्रीस्विफ्ट (Crested Treeswift), स्टोन कर्लेव (Stone Curlew), ब्लैक-नेप्ड ब्लू फ्लाईकैचर (Black-naped Blue Flycatcher), पैराडाइज फ्लाईकैचर (Paradise Flycatcher), क्रेस्टेड हनी बज़र्ड (Crested Honey Buzzard), ब्रॉन्ज-विंग्ड जैकाना (Bronze-winged Jacana), लेसर गोल्डनबैक्ड वुडपेकर (Lesser Goldenbacked Woodpecker), ऑरेंज-हेडेड थ्रश (Orange-headed Thrush), भारतीय मोर (Indian Peacock), मॉर्मन (Mormon), मोनार्क (Monarch), स्वोर्डटेल (Swordtail), मार्श मगरमच्छ (Marsh Crocodile), भारतीय मॉनिटर टेरापिंस (Indian Monitor Terrapins), इंडियन पाइथन (Indian Python), भारतीय स्टार कछुआ (Indian Star Tortoise), इंडियन कोबरा (Indian Cobra) और रसेल वाइपर (Russell’s Viper) शामिल है। फ्लोरा (Flora in Tadoba National Park) अगर बात की जाए ताडोबा नेशनल पार्क के फ्लोरा की तो, यहाँ पायी जाने वाली वन की प्रजाति दक्षिणी उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती है। यहाँ पाए जाने वाले वृक्षों की प्रजातियों में सागौन (Teak), क्रोकोडाइल बार्क (Crocodile Bark), बीजा (Beeja), हल्द (Hald), तेंदू (Tendu), सेमल (Semal), सलाई (Salai), बहेड़ा (Bahera), हिरदा (Hirda), कराया गोंद (Karaya Gum), फ्लेम-ऑफ-द-फॉरेस्ट (Flame-of-the-Forest), क्रेप मर्टल (Crape Myrtle), लानिया कोरोमंडेलिका (Lania coromandelica), एक्सलवुड (Axlewood), अर्जुन (Arjun) और ब्लैक प्लम (Black Plum) शामिल हैं। बेस्ट टाइम टू विजिट ताडोबा नेशनल पार्क (Best time to visit Tadoba National Park) यदि आप ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान घूमने जाना चाहते है तो समर (Summer) के समय यहाँ जाना के प्लानिंग से बचे। इसका कारण यह है कि इस अवधि में यहाँ बहुत गर्मी होती है जिसके कारण आप इस नेशनल पार्क में अच्छी तरह से नहीं घूम पाएंगे। यदि आप गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान को अच्छी तरह से एक्सप्लोर करना चाहते है तो आप यहाँ ठंड के महीनों (नवंबर से मार्च) में आ सकते है। कैसे पहुंचे ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Tadoba National Park)?

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Gorumara National Park-स्तनधारियों की 50 प्रजातियों का घर है गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान

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गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान (Gorumara National Park) पश्चिम बंगाल में एक नेशनल पार्क है जो, जलपाईगुड़ी जिले के मालबाजार सबडिवीज़न में स्थित है। यह नेशनल पार्क पूर्वी हिमालय के उपपर्वतीय तराई बेल्ट में अवस्थित है। गोरुमारा नेशनल पार्क लगभग 80 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1992 में हुई थी। यह पार्क मूर्ति रिवर और रैडक रिवर के फ्लड प्लेन (Flood Plain) पर स्थित है। सर्वप्रथम, जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान को 1949 में वन्यजीव अभ्यारण्य बनाया गया था। इसके पश्चात 31 जनवरी 1992 को इसे एक राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया गया था। छपरामारा वाइल्डलाइफ रिजर्व और जलदापाड़ा नेशनल पार्क, गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान के निकट स्थित है। फॉउना (Fauna in Gorumara National Park) गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते हैं. यहाँ मैमल्स की 50 प्रजातियां, पक्षियों की 194 प्रजातियां, रेप्टाइल्स की 22 प्रजातियां, टर्टल्स की 7 प्रजातियां और मछलियों की 27 प्रजातियां पाई जाती है। यहाँ पाए जाने वाले जीवों में भारतीय गैंडा (Indian Rhinoceros), गौर (Gaur), तेंदुआ (Leopard), एशियाई हाथी (Asian Elephant), स्लॉथ बियर (Sloth Bear), चीतल (Chital), सांभर हिरण (Sambar Deer), जंगली सूअर (Wild Boar), हॉग डियर (Hog Deer), बार्किंग डियर (Barking Deer), स्पैंगल्ड ड्रोंगो (Spangled Drongo), भारतीय हॉर्नबिल (Indian Hornbill), एशियाई पैराडाइज़ फ्लाईकैचर (Asian Paradise Flycatcher), स्कार्लेट मिनीवेट (Scarlet Minivet), सनबर्ड (Sunbird), वुडपेकर (Woodpecker), पीकॉक (Peacock), तीतर (Pheasant), ब्राह्मणी बत्तख (Brahminy Duck), किंग कोबरा (King Cobra) और भारतीय अजगर (Indian Python) शामिल है। फ्लोरा (Flora in Gorumara National Park) अगर बात की जाए गोरुमारा नेशनल पार्क के फ्लोरा की तो, यहाँ उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय घास के मैदान, झाड़ीदार बायोम के घास के मैदान, निचले गंगा के मैदान, उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय नम चौड़ी पत्ती वाले वन बायोम के नम पर्णपाती वन पाई जाती है। यहाँ पाए जाने वाले वनस्पतियों की प्रजातियों में सागौन (Teak), वर्षा वृक्ष (Rain Tree), बॉम्बैक्स (Bombax) और बांस (Bamboo) शामिल है। बेस्ट टाइम टू विजिट गोरुमारा नेशनल पार्क (Best time to visit Gorumara National Park) यदि आप गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान घूमने जाना चाहते है तो समर और मानसून के समय यहाँ जाना के प्लानिंग से बचे। इसका कारण यह है कि इस अवधि में यहाँ गर्मी और भारी बारिश होती है जो आपके लिए खतरनाक हो सकता है। यदि आप गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान को अच्छी तरह से एक्सप्लोर करना चाहते है तो आप यहाँ ठंड के महीनों (नवंबर से मार्च) में आ सकते है। कैसे पहुंचे गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Gorumara National Park)?

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Papikonda National Park-संकटग्रस्त और लुप्तप्राय जीवों का घर है पापीकोंडा नेशनल पार्क

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पापीकोंडा राष्ट्रीय उद्यान (Papikonda National Park) आंध्र प्रदेश में एक नेशनल पार्क है जो, अल्लूरी सीतारामा राजू और एलूरु जिले में स्थित है। यह नेशनल पार्क राजमंड्री के पास पापी पहाड़ियों में अवस्थित है। पापीकोंडा नेशनल पार्क लगभग 216 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 2008 में हुई थी। सर्वप्रथम, पापीकोंडा राष्ट्रीय उद्यान को 1978 में वन्यजीव अभ्यारण्य बनाया गया था। इसके पश्चात 2008 में इसे एक राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया गया था। गोदावरी नदी इस राष्ट्रीय उद्यान में बहती है। पापीकोंडा नेशनल पार्क कई प्रकार के संकटग्रस्त और लुप्तप्राय जीवों का निवास स्थल है। फॉउना (Fauna in Papikonda National Park) पापीकोंडा राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते हैं। यहाँ पाए जाने वाले मैमल्स (Mammals) में बंगाल टाइगर (Bengal Tiger) भारतीय तेंदुआ (Indian Leopard), रस्टी-स्पॉटेड कैट (Rusty-spotted Cat), लेपर्ड कैट (Leopard Cat), वाइल्ड कैट (Wild Cat), स्लॉथ बियर (Sloth Bear), एशियन पाम सिवेट (Asian Palm Civet), स्मॉल इंडियन सिवेट (Small Indian Civet), वाइल्ड बोअर (Wild Boar), स्पॉटेड डियर (Spotted Deer), इंडियन स्पॉटेड शेवरोटेन (Indian Spotted Chevrotain), इंडियन मंटजैक (Indian Muntjac), गौर (Gaur), सांभर (Sambar), नीलगाय (Nilgai) और चार सींग वाला मृग (Four-horned Antelope) शामिल है। फ्लोरा (Flora in Papikonda National Park) अगर बात की जाए पापीकोंडा नेशनल पार्क के फ्लोरा की तो, यहाँ पायी जाने वाली वन की प्रजाति नम पर्णपाती और शुष्क पर्णपाती है। यहाँ पाए जाने वाले वृक्षों की प्रजातियों में टर्मिनलिया एलिप्टिका (Terminalia elliptica), टर्मिनलिया अर्जुन (Terminalia arjuna), एडिना कॉर्डिफोलिया (Adina cordifolia), टेरोकार्पस मार्सुपियम (Pterocarpus marsupium), स्टेरकुलिया यूरेन्स (Sterculia urans), एनोजीसस लैटिफोलिया (Anozicus latifolia) और मैंगीफेरा इंडिका (Mangifera indica) शामिल हैं। बेस्ट टाइम टू विजिट पापीकोंडा नेशनल पार्क (Best time to visit Papikonda National Park) अगर आप पापीकोंडा राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने से बचें क्योंकि समर में यहाँ बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है। आप यहाँ ठण्ड के महीनों (नवंबर से मार्च) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं और आपको यहाँ ज्यादा से ज्यादा जानवर देखने को मिलेंगे। कैसे पहुंचे पापीकोंडा राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Papikonda National Park)?

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जलदापाड़ा नेशनल पार्क में पाई जाती है एक सींग वाले गैंडो की दूसरी सबसे बड़ी आबादी

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जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान (Jaldapara National Park) पश्चिम बंगाल में एक नेशनल पार्क है जो, अलीपुरद्वार जिले में स्थित है। यह नेशनल पार्क पूर्वी हिमालय के तलहटी के तराई क्षेत्र में अवस्थित है। जलदापाड़ा नेशनल पार्क लगभग 216 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 2014 में हुई थी। सर्वप्रथम, जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान को 1941 में अभ्यारण्य बनाया गया था। इसके पश्चात मई 2014 में इसे एक राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया गया था। चिलपाटा वन (Chilapata Forest) बुक्सा नेशनल पार्क और जलदापाड़ा नेशनल पार्क के बीच एक एलीफैंट कॉरिडोर (Elephant Corridor) का कार्य करती है। असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के बाद एक सींग वाले गैंडे सबसे ज्यादा जलदापाड़ा नेशनल पार्क में ही पाए जाते है। तोर्षा नदी जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान में बहती है। फॉउना (Fauna in Jaldapara National Park) जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते हैं जिनमें एक सींग वाला गैंडा (One-horned Rhinoceros), रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), भारतीय तेंदुआ (Indian Leopard), भारतीय हाथी (Indian Elephant), चीतल (Chital), बार्किंग डियर (Barking Deer), सांभर (Sambar), गौर (Gaur), हॉग डियर (Hog Deer), जंगली सूअर (Wild Boar), बंगाल फ्लोरिकन पलास फिश ईगल (Bengal Florican Pallas Fish Eagle), क्रेस्टेड ईगल (Crested Eagle), शिकरा (Shikra), फिन्स वीवर (Finn’s Weaver), जंगल फाउल (Jungle Fowl), मोर (Peacock) लैसर पीएड हॉर्नबिल (Lesser Pied Hornbill), मॉनिटर छिपकली (Monitor Lizard), करैत (Krait), पाइथन (Python), कोबरा (Cobra) और गेको (Gecko) शामिल है। फ्लोरा (Flora in Jaldapara National Park) अगर बात की जाए जलदापाड़ा नेशनल पार्क के फ्लोरा की तो, 2016-2018 की रिपोर्ट के अनुसार, यहां पेड़ों की 294 प्रजातियां जो 4 जिम्नोस्पर्म सहित, 189 जेनेरा और 63 फैमिलीज़ से सम्बंधित है जलदापाड़ा नेशनल पार्क में पाई जाती है। यहाँ पाए जाने वाले घासों की प्रजातियों में थीमेडा अरुंडिनेशिया (Themeda arundinacea), फ्राग्माइट्स कार्का (Phragmites karka), इम्पेराटा साइक्लिडेरिका (Imperata cylindrica), सिंबोपोगोन एसपीपी (Cymbopogon spp.), थाइसैनोलाएना मैक्सिमा (Thysanolaena maxima), टी. विलोसा (Thapsia villosa), अरुंडो डोनैक्स (Arundo donax) और सेटेरिया पाल्मिफोलिया (Setaria palmifolia) शामिल है। इन्ही ग्रासलैंड के बीच-बीच में सिस्सू (Sissu), खैर (Khair), सिमुल (Simul), सिरिस (Siris) आदि जैसे पेड़ हैं। बेस्ट टाइम टू विजिट जलदापाड़ा नेशनल पार्क (Best time to visit Jaldapara National Park) यदि आप जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान घूमने जाना चाहते है तो मानसून के समय यहाँ जाना के प्लानिंग से बचे। इसका कारण यह है कि इस अवधि में यहाँ भारी बारिश होती है जो आपके लिए खतरनाक हो सकता है। यदि आप जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान को अच्छी तरह से एक्सप्लोर करना चाहते है तो आप यहाँ ठंड के महीनों (नवंबर से मार्च) में आ सकते है। कैसे पहुंचे जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Jaldapara National Park)?

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उड़ीसा के मयूरभंज जिले में स्थित है सिमलिपाल राष्ट्रीय उद्यान

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सिमलिपाल राष्ट्रीय उद्यान (Simlipal National Park) ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित है जो लगभग 2750 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। सिमलिपाल राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1980 में हुई थी। यहाँ सेमल या लाल कपास के पेड़ बहुत ज्यादा संख्या में पाए जाते है और इन्ही पेड़ों के कारण इस उद्यान का नाम सिमलिपाल पड़ा। सर्वप्रथम, इसको 1956 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। इसके पश्चात को इसे 1979 में वाइल्ड लाइफ सेंचुरी बना दिया गया। 1980 में इसको राष्ट्रीय उद्यान बना दिया गया। इस राष्ट्रीय उद्यान 2009 में यूनेस्को वर्ल्ड नेटवर्क ऑफ बायोस्फीयर रिजर्व (UNESCO World Network of Biosphere Reserves) की सूची में शामिल किया गया था। यह भारत के 18 बायोस्फीयर रिजर्वों में से एक हैं। फॉउना (Fauna in Simlipal National Park) सिमलिपाल राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते हैं जिनमें मैमल्स की 42 प्रजातियाँ, रेप्टाइल्स की 30 प्रजातियाँ और बर्ड्स की 242 प्रजातियाँ शामिल है। यहाँ पाए जाने वाले जानवरों में चीता (Cheetah), सांभर (Sambhar), हाथी (Elephant), भालू (Bear), बार्किंग डियर (Barking Deer), जंगली बिल्ली (Wild Cat), तेंदुआ (Leopard), जंगली सूअर (Wild Boar), रकून (Raccoon), गौर (Gaur), बिजोन (Bison), साही (Porcupine), चित्तीदार हिरण (Spotted Deer), चौसिंगा (Chousingha), स्मॉल मस्क डियर (Small Musk Deer), ग्रे हॉर्नबिल (Grey Hornbill), जायंट गिलहरी (Giant Squirrel), लंगूर (Langur), ऊद (Otter), फ्लाइंग गिलहरी (Flying Squirrel), स्लॉथ बियर (Sloth Bear) और छिपकली (Lizard) शामिल है। फ्लोरा (Flora in Simlipal National Park) अगर बात की जाए सिमलिपाल नेशनल पार्क के फ्लोरा की तो, यहाँ वनों की विस्तृत प्रजातियाँ है जिनमें अर्ध-सदाबहार वन (Semi-Evergreen Forest), शुष्क पर्णपाती पहाड़ी वन (Dry Deciduous Mountain Forest) और उष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती वन (Tropical Moist Deciduous Forest) शामिल है। यहाँ पौधों की 102 फैमिलीज़ की 1076 प्रजातियाँ और आर्किड की 96 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती है। बेस्ट टाइम टू विजिट सिमलिपाल राष्ट्रीय उद्यान (Best time to visit Simlipal National Park) अगर आप सिमलिपाल राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने से बचें क्योंकि समर में यहाँ बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है। आप यहाँ ठण्ड के महीनों (नवंबर से मार्च) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं और आपको यहाँ ज्यादा से ज्यादा जानवर देखने को मिलेंगे। कैसे पहुंचे सिमलिपाल राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Simlipal National Park)?

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जम्मू कश्मीर में घूमने के लिए बेहतरीन जगह है गुलमर्ग

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जम्मू कश्मीर राज्य का गुलमर्ग शहर चारों ओर से बर्फीली पहाड़ियों, जंगलों और ऊंचे पहाड़ों से घिरा हुआ है। यह शहर समुद्र तल से लगभग 2800 मीटर ऊपर है। अगर आपको दूर दूर तक फैली बर्फ की पहाड़ियां पसंद है तो आप गुलमर्ग का रुख कर सकते हैं। यह शहर इतना खूबसूरत है कि यहाँ बॉलीवुड के कई फिल्मों के सीन की शूटिंग भी हो चुकी है। यहां आप अपने इंटरटेनमेंट के लिए कई तरह के एडवेंचर एक्टिविटीज कर सकते हैं। यहां ट्रैकिंग, माउंटेन बाइकिंग, और स्कीइंग के मजे ले सकते हैं। हर साल सर्दियों में यहां पर्यटकों की बहुत ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है। क्योंकि लोग इस समय बर्फबारी को देखने के लिए इस शहर का रुख करते हैं। इसके अलावा कपल्स को भी यह जगह काफी ज्यादा पसंद आता है। यहां की हसीन वादियां और शांत सा माहौल पर्यटकों को काफी पसंद आता है। गुलमर्ग में एशिया की सबसे ऊंची केवल कार का भी मज़ा लिया जा सकता है। अगर आप भी एडवेंचर पसंद करते हैं तो आप भी इस राइड का मजा एक बार जरूरी ले। यकीनन यह आपको बहुत पसंद आएगा। कुदरत के असीम कृपा के कारण इन हसीन वादियों की यादें लोगों के जहन में सालों तक जिंदा रहतीं हैं। अगर आप भी गुलमर्ग आ रहे हैं तो इस जगह को अच्छे से एक्सप्लोर करना तो बनता है। ताकि यहां से लौटने के बाद दिल में यह कसक ना रह जाए कि अरे यार,,, यहां तो घूमे हीं नहीं! गुलमर्ग में घूमने लायक जगहों में टॉप फाइव जगहों की सूची निम्नांकित है :- गोंडोला राइड : गुलमर्ग में घूमने लायक जगह में सबसे पहले नंबर पर आता है गोंडोला राइड, जो कि आपको गुलमर्ग की खूबसूरत वादियों के सैर पर ले जाएगा। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि गुलमर्ग की यह गोंडोला राइड दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची और दुनिया में सबसे लंबी केबल कार है। स्ट्रॉबेरी वैली : इसके अलावा अगर आप स्ट्रॉबेरी खाने के शौकीन हैं तो आप स्ट्रॉबेरी वैली घूमने जा सकते हैं। यह गुलमर्ग की सबसे खूबसूरत वैली में से एक है और दूर-दूर से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। खिलनमर्ग : गुलमर्ग में खिलनमर्ग भी एक बेहतरीन टूरिस्ट प्लेस है। अगर आप गर्मी के समय में गुलमर्ग जा रहे हैं तब यह जगह गुलमर्ग में आपको सबसे ज्यादा पसंद आएगा। ठंढ के समय में भी आप यहां कई तरह के स्नो एक्टिविटीज कर सकते हैं। अलपत्थार लेक : यह गुलमर्ग का बहुत हीं खूबसूरत लेक है जो कि साल में अधिकतर समय के लिए जमी हुई रहती है। अगर आप गर्मी के समय में भी यहां घूमने आएंगे तो भी आपको यह झील जमी हुई दिखेगी। अफरवत पीक : अगर आपको गुलमर्ग में सबसे खूबसूरत बर्फबारी देखनी है तो आप अफरवत पीक का रुख कर सकते हैं। यह गुलमर्ग के सबसे हसीन जगहों में से एक है। जहां साल के अधिकतर महीने में चारों ओर बर्फ हीं बर्फ दिखती है। इस जगह पर होने वाले भारी बर्फबारी के कारण यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या बहुत अधिक होती है। गुलमर्ग आने का सबसे बेस्ट समय (Best time to visit Gulmarg) : अगर आप भी बर्फ की बरसात देखना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कड़ाके की ठंड के तुरंत बाद जनवरी से फरवरी बीच में इस शहर का रुख करना चाहिए। यहां घूमने के लिए विजिटर्स को यह समय काफी पसंद आता है। कैसे पहुंचे गुलमर्ग (How to reach Gulmarg)? गुलमर्ग सड़क मार्ग द्वारा श्रीनगर से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। गुलमर्ग के लिए डायरेक्ट ट्रेन की व्यवस्था नहीं है। गुलमर्ग से 290 किलोमीटर दूर जम्मू तवी रेलवे स्टेशन है जहाँ से आप बस या कैब लेकर गुलमर्ग पहुँच सकते हैं। गुलमर्ग का निकटम एयरपोर्ट 56 किलोमीटर दूर श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट है।