Culture ladakh Lifestyle Review

कभी भी फैशन ट्रेंड से बाहर नहीं होते हैं ये कश्मीरी पशमीना शॉल

  • 0 Comments

सर्दी के मौसम में शॉल का फैशन ट्रेंड में आ जाता है। यह एक ऐसा परिधान है जो कभी भी ट्रेंड से बाहर नहीं होता है और आउट डेटेड नही होता। इसे भारतीय और विदेशी दोनों हीं प्रकार के परिधानों के साथ पेयर कर के पहना जा सकता है। शॉल में भी अलग अलग प्रकार की वेरायटी उपलब्ध होती है। अगर आप भी इस सर्दी में दूसरे लोगों से जरा हट कर दिखना चाहते हैं तो आप शॉल को अपने वार्डरोब में शामिल कर सकते हैं। फाइव कलर्स ऑफ ट्रेवल (Five colors of travel) के इस ब्लॉग में आज हम आपको कश्मीरी पशमीना शॉल (Pashmina Shawl) के बारे में बताने जा रहे हैं। जो देश हीं नहीं बल्कि दुनिया भर में मशहूर है। कश्मीर की पहचान है पशमीना शॉल (Pashmina shawl is the identity of Kashmir) पशमीना शॉल कश्मीर के संस्कृति की एक पहचान है। इसे कश्मीरी ऊन को कात कर बनाया जाता है। कश्मीरी ऊन को बहुत हीं अच्छी किस्म का ऊन माना जाता है। जिसे लद्दाख मूल की चांगथांगी बकरी के बाल से बनाया जाता है। यह ऐसी बकरियाँ होती हैं जो ठंड के मौसम में अपने शरीर से बाल को खुद व खुद हीं अलग कर देती हैं। इसलिए उनके बालों को काटना नहीं होता है। बकरी के बाल से ऊन कात कर उससे शॉल बुना जाता है। क्योंकि एक बार में एक बकरी से 100 ग्राम के करीब हीं ऊन प्राप्त होता है और पशमीना शॉल को तैयार करने के लिए कई कई दिनों की कड़ी मेहनत लगती है। इसलिए यह शॉल काफी महंगा होता है। पशमीना शॉल की कीमत (Price of Pashmina Shawl) अगर बात करें पशमीना शॉल के कीमत की तो भारत में इस शॉल की कीमत 10,000 से लेकर 50,000 तक की होती है। पशमीना शॉल के इतना अधिक महंगा होने के पीछे कई कारण है। पहला इसे जिस नस्ल की बकरी के बाल से बनाया जाता है वह बकरी 1 साल में बहुत कम बालों को शरीर से अलग करती है। इसके महंगा होने का दूसरा सबसे बड़ा कारण है इस शॉल को हाथ से बुना जाता है। जिसके कारण इसमें कई दिनों का समय लगता है। इसके महंगा होने का तीसरा बड़ा कारण यह है कि पश्मीना शॉल क्वालिटी में बहुत हीं हाई क्वालिटी का होता है। बताया जाता है कि एक पशमीना शॉल में 6 स्वेटर के बराबर गर्मी होती है। इन्हीं सब क्वालिटीज की वजह से यह शॉल इतना महंगा हो जाता है। मिला हुआ है जी आई टैग (GI tag Pashmina Shawl) पशमीना शॉल को जी आई टैग मिला हुआ है। क्योंकि यह कश्मीर की संस्कृति की पहचान है। इसलिए इसे ज्योग्राफिकल टैग दिया गया है। आपको बता दे कि जिस भी पशमीना शॉल को जी आई टैग मिला हुआ होता है, वह पूरी तरीके से हाथ से बन गया शॉल होता है। इसलिए अगर आपको पशमीना शॉल की पहचान करनी हो तो आप उस पर जी आई टैग देख सकते हैं। पश्मीना शॉल के नाम पर कई बार लोग ठगी का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में अगर आप पशमीना शॉल खरीदने जा रहे हैं तो आप यह सुनिश्चित करें कि आप जो शॉल ले रहे हैं वह जी आई टैग वाला हो। कई कारणों से खास है पश्मीना शॉल (Pashmina shawl is special for many reasons) पशमीना शॉल लोगों में कई कारणों से बहुत अधिक फेमस है। यह शॉल बहुत हीं अधिक मुलायम और आरामदेह होता है। इस वजह से लोग इसे खरीदना पसंद करते हैं। इसके अतिरिक्त यह बहुत हीं गर्म शॉल होता है। जो ठंड के मौसम में लोगों के काफी काम आता है। इतना हीं नहीं पश्मीना शॉल के रेशे बहुत हीं महीन और पतले होते हैं। जिसके कारण यह वजन में भी हल्के होते हैं। इसके अतिरिक्त खूबसूरती के मामले में भी पश्मीना शॉल बेहतरीन क्वालिटी के होते हैं यही वजह है कि लोगों में पशमीना शॉल के लिए एक अलग ही क्रेज देखने को मिलता है।दुनिया के सबसे खूबसूरत और सबसे अच्छे क्वालिटी के शॉल में पशमीना शॉल की गिनती शीर्ष पर होती है। क्योंकि इसकी क्वालिटी, इसकी बुनाई, इसकी खूबसूरती और इसकी गर्माहट बाकी किसी भी शॉल से कहीं गुना ज्यादा अधिक होती है। हर मामले में यह शॉल बेजोड़ है। यहीं वजह है कि दुनिया भर में इस साल को पसंद किया जाता है।

Destination Haryana Travel

दिल्ली वालों को लुभाते हैं हरियाणा के ये पिकनिक स्पॉट, आप भी हो जाएंगे यहाँ के मुरीद

  • 0 Comments

हरियाणा अपने स्पिरिचुअल और हिस्टोरिकल वैल्यूज (Spiritual and Historical Values) के लिए फेमस है और यहां की खूबसूरती आसपास के शहरों से पर्यटकों को आकर्षित करती है। राजधानी दिल्ली से नजदीक होने के कारण अक्सर दिल्ली के लोग पिकनिक मनाने यहां आया करते हैं। यहां के फेमस टूरिस्ट प्लेसेस (Famous Tourist Places) की अगर बात की जाए तो उनमें यहाँ के दो नेशनल पार्क, मोरनी हिल्स और फरीदाबाद का नाम भी आता है जो पर्यटकों को आकर्षित करतें है। आज के फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताएँगे इन्ही जगहों के बारें में जहाँ आप नेचर को एक्सप्लोर कर सकते हैं। (Tourist places in Haryana) 1. सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान (Sultanpur National Park) सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान हरियाणा के सुल्तानपुर, फारुखनगर और गुरुग्राम जिले में स्थित भारत का एक प्रसिद्ध बर्ड अभयारण्य है। यह नेशनल पार्क सुल्तानपुर में स्थित है जिसके कारण इस उद्यान को सुल्तानपुर पक्षी विहार भी कहा जाता है। यह नेशनल पार्क लगभग 142 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस पक्षी विहार में हजारों की संख्या में लुप्तप्राय और दुर्लभ पक्षी पाए जाते है। यहाँ पाए जाने वाले पक्षियों में पेलिकन, साइबेरियाई सारस, काले पंखों वाला स्टिल्ट, जलकाग, पैडीफील्ड पिपिट, लिटिल कॉर्मोरेंट, इंडियन कॉर्मोरेंट, पर्पल सनबर्ड, ब्लैक फ्रैंकोलिन, कॉमन स्पूनबिल, कॉमन हूपो, ग्रे फ्रैंकोलिन, इंडियन रोलर, व्हाइट आइबिस, व्हाइट-थ्रोटेड किंगफिशर, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, इंडियन स्पॉट-बिल्ड डक, पेंटेड सारस, कॉमन ग्रीनशैंक्स, कुरजां आदि कुछ ऐसे प्रमुख प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां हैं जो इस नेशनल पार्क में आपको अवश्य मिल जायेंगे। कैसे पहुंचे सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Sultanpur National Park)? सुल्तानपुर नेशनल पार्क, गुड़गाँव-झज्जर हाईवे पर फर्रुखनगर के नजदीक स्थित है। दिल्ली एनसीआर में होने के कारण सुल्तानपुर नेशनल पार्क वीकेंड बिताने का एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। आप दिल्ली मेट्रो से यहाँ आना चाहें तो येलो लाइन से हुडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन पर पहुँच कर, वहां से कोई निजी कैब या ऑटो बुक करके आप इस खूबसूरत पक्षी विहार तक पहुँच सकते हैं। अगर आप गुड़गाँव से जाएँ तो यह लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर है और दिल्ली से लगभग 42 किलोमीटर की दूरी पर। 2. मोरनी हिल्स (Morni Hills)  मोरनी हिल्स (Morni Hills) को हरियाणा का एकमात्र हिल स्टेशन माना जाता है, जो कि अपने स्पिरिचुअल और हिस्टोरिकल वैल्यूज (Spiritual and Historical Values) के लिए फेमस है। यहां की खूबसूरती आसपास के शहरों से पर्यटकों को आकर्षित करती है। राजधानी दिल्ली से नजदीक होने के कारण अक्सर दिल्ली के लोग पिकनिक मनाने यहां आया करते हैं। यहां के फेमस टूरिस्ट अट्रैक्शन (Famous Tourist Attraction) की अगर बात की जाए तो उनमें मोरनी फोर्ट का नाम सबसे पहले आता है। इसके अलावा यहां एडवेंचर पार्क और टिक्कर ताल भी है जो पर्यटकों को आकर्षित करता है। कैसे पहुंचे मोरनी हिल्स (How to reach Morni Hills)? मोरनी हिल्स पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले चंडीगढ़ पहुंचना होगा। चंडीगढ़ से मोरनी हिल्स की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है और यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट चंडीगढ़ एयरपोर्ट है। चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन मोरनी हिल्स का नजदीकतम रेलवे स्टेशन है। चंडीगढ़ पहुंचने के बाद अगर आप वहां से बस लेकर मोरनी हिल जाना चाहेंगे तो आपको चंडीगढ़ से मोरनी हिल्स के लिए डायरेक्ट बसें भी मिल जाएंगी। इसके अलावा आप अपनी सुविधा अनुसार टैक्सी भी कर सकते हैं। 3. फरीदाबाद (Faridabad) फरीदाबाद हरियाणा का एक ऐसा शहर है जहाँ आपको एक हिल स्टेशन की वाइब आएगी। फरीदाबाद के बारे में अगर बात की जाए तो यह एक इंडस्ट्रियल एरिया (Industrial Area) है और बीते कुछ सालों में एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में भी उभर रहा है। अब तो इस शहर को मिनी हिल स्टेशन भी कहा जाने लगा है। फरीदाबाद आपके लिए सबसे बेस्ट विजिटिंग ऑप्शन हो सकता है। क्योंकि यह शहर दिल्ली एनसीआर (Delhi NCR) का हिस्सा है और एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। अगर आप भी फरीदाबाद जाना चाहते हैं तो फरीदाबाद में घूमने लायक जगह के बारे में जानना आपके लिए बहुत ही जरूरी है। फरीदाबाद में बहुत सी ऐसी जगहें हैं जहां आप अपने पिकनिक के लिए या फिर वीकेंड (weekend) के लिए जा सकते हैं।फरीदाबाद के मुख्य पर्यटन स्थल निम्नलिखित हैं : राजा नाहर सिंह पैलेस (Nahar Singh’s Palace), इस्कॉन टेंपल फरीदाबाद (Isckon Temple Faridabaad), सूरजकुंड (Surajkund), टाउन पार्क (Town Park) कैसे पहुंचे फरीदाबाद (How to reach Faridabad)? फरीदाबाद पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले दिल्ली पहुंचना होगा। दिल्ली से फरीदाबाद की दूरी लगभग 28 किलोमीटर है और यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदिरा गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। फरीदाबाद रेलवे स्टेशन फरीदाबाद का नजदीकतम रेलवे स्टेशन है। दिल्ली पहुंचने के बाद अगर आप वहां से बस लेकर फरीदाबाद जाना चाहेंगे तो आपको दिल्ली से फरीदाबाद के लिए डायरेक्ट बसें भी मिल जाएंगी। इसके अलावा आप अपनी सुविधा अनुसार टैक्सी भी कर सकते हैं। आप दिल्ली मेट्रो के कश्मीरी गेट स्टेशन से राजा नाहर सिंह पैलेस पहुंच सकते है। 4. कालेसर राष्ट्रीय उद्यान (Kalesar National Park) चंडीगढ़ से 122 किलोमीटर दूर हरियाणा के यमुनानगर जिले में कालेसर राष्ट्रीय उद्यान और कालेसर वन्यजीव अभ्यारण्य (Kalesar Wildlife Sanctuary) है जो अपने नेचुरल डाइवर्सिटी (Natural Diversity) के लिए अपने आसपास के क्षेत्र में प्रसिद्ध है। कालेसर राष्ट्रीय उद्यान और कालेसर वन्यजीव अभ्यारण्य क्रमशः 53 वर्ग किमी और 53.45 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है और इन दोनों की स्थापना क्रमशः 8 दिसंबर 2003 और 13 दिसंबर 1996 को हुई थी। इस नेशनल पार्क का नाम कालेसर महादेव मंदिर के नाम पर रखा गया था जो इसी राष्ट्रीय उद्यान में है। यहाँ पाए जाने वाले जीवों में एशियाई हाथी (Asian Elephant), भारतीय तेंदुआ (Indian Leopard), लेपर्ड कैट (Leopard Cat), वाइल्ड कैट (Wild Cat), चीतल (Chital), रस्टी-स्पॉटेड कैट (Rusty-spotted Cat), नीलगाय (Nilgai), सांभर (Sambar), आदि शामिल है। कैसे पहुंचे कालेसर राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Kalesar National Park)? यमुनानगर पौंटा साहिब स्टेट हाईवे (NH 907) कालेसर नेशनल पार्क से होकर गुजरता है। कालेसर नेशनल पार्क सड़क मार्ग द्वारा प्रमुख शहरों (यमुनानगर, पोंटा और देहरादून) से जुड़ा हुआ है। इस नेशनल पार्क के पास में एक रेलवे स्टेशन है- ‘यमुनानगर रेलवे स्टेशन’ जहाँ से आप टैक्सी या बस लेकर कालेसर नेशनल पार्क पहुंच सकते है। हवाई मार्ग से आने

Culture Destination Travel Uttar Pradesh

Ayodhya-बहुत हीं कम खर्चे में मैनेज हो जाएगा अयोध्या का टूर, ऐसे कीजिए प्लानिंग

  • 0 Comments

राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो गई है। ऐसे में देश के अलग-अलग भागों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु अयोध्या आना चाह रहे हैं। अगर आप भी अयोध्या आना चाहते हैं और अभी तक आपने कोई प्लानिंग नहीं की है तो यह ब्लॉग आपके लिए ही है। फाइव कलर्स ऑफ ट्रेवल के इस ब्लॉग में हम आपको अयोध्या घूमने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी देने वाले हैं। जो आपके इस टूर को और भी ज्यादा आसान और बजट फ्रेंडली बना देगा। Tour planning for Ayodhya) महत्वपूर्ण जानकारियां जिन्हें ध्यान में रखना आवश्यक है (Important facts you should keep in your mind) : अयोध्या कैसे पहुंचे? (How to reach Ayodhya): फ्लाइट से अयोध्या पहुंचने के लिए आप अयोध्या एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट ले सकते हैं। अगर आपके शहर से डायरेक्ट फ्लाइट की उपलब्धता है तो आप डायरेक्ट फ्लाइट ले सकते हैं या फिर आप कनेक्टिंग फ्लाइट के जरिए भी आप अयोध्या पहुंच सकते हैं।अयोध्या पहुंचने का सबसे सस्ता रूट ट्रेन का है। अगर आप ट्रेन से अयोध्या आना चाहते हैं तो अयोध्या जंक्शन के लिए आप ट्रेन की बुकिंग कर सकते हैं। अयोध्या जंक्शन के लिए आपको दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, भोपाल, पटना और कोलकाता जैसे बड़े शहरों से ट्रेन की डायरेक्ट कनेक्टिविटी मिल जाएगी। अगर आप बाय रोड अयोध्या आना चाहते हैं तो वह ऑप्शन भी उपलब्ध है। अयोध्या बाकी देश के बाकी शहरों से काफी अच्छे तरीके से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। यहां आप अपनी गाड़ी या फिर पब्लिक ट्रांसपोर्ट या फिर कैब के जरिए आ सकते हैं।अयोध्या पहुंचकर वहां घूमने के लिए आप ऑटो रिक्शा या फिर कैब की सुविधा ले सकते हैं। कितने समय की आवश्यकता होगी?(How much time will be required) :अगर आप अयोध्या आना चाहते हैं और घूमना चाहते हैं तो आप एक दिन का समय निकाल कर भी अयोध्या को बहुत हीं अच्छे से एक्सप्लोर कर लेंगे। लेकिन अगर आप ठहर कर अयोध्या घूमना चाहते हैं और हर एक जगह को बारीकी से एक्सप्लोर करना चाहते हैं तो आपको इसके लिए दो दिन ठहरने की आवश्यकता पड़ेगी। मंदिर में दर्शन करने की टाइमिंग(Timings of the temple) : आज से यानी की 23 जनवरी से अयोध्या स्थित राम मंदिर जनता के लिए खुला रहेगा। आप कभी भी यहां विजिट करने के लिए आ सकते हैं। 23 जनवरी के बाद से लोग यहां दर्शन करने और आरती सत्र में भाग लेने के लिए आ सकते हैं।हालांकि मंदिर में विजिट करने के कुछ रूल्स हैं। जैसे आप यहां अंदर प्रतिबंध वस्तुओं को नहीं ले जा सकते हैं। इन प्रतिबंधित वस्तुओं में कैमरा फोन माचिस या फिर अन्य ज्वलनशील पदार्थ लेकर नहीं जा सकते हैं। हालांकि घबराने वाली बात नहीं है। आपके इन सभी उपयोग के सामानों को मंदिर के प्रवेश द्वार के निकट बने काउंटर के एक प्राइवेट लॉकर में रखा जाएगा। इसके अलावा मंदिर में दर्शन की टाइमिंग भी फिक्स है। आप सुबह 7:00 से 11:30 बजे तक और दोपहर के 2:00 बजे से शाम के 7:00 बजे तक दर्शन करने और आरती मे शामिल होने के लिए जा सकते हैं। अयोध्या में घूमने लायक जगह (Visiting places in Ayodhya) अयोध्या में राम मंदिर के अलावा घूमने के लिए और भी कई सारे पर्यटन स्थल हैं। जिनमें सरयू नदी का तट, मणि पर्वत, हनुमानगढ़, नागेश्वर नाथ मंदिर, रामकोट और कनक भवन जैसे पर्यटन स्थल प्रमुख हैं। कहां ठहरे? (Where to stay) अयोध्या में ठहरने के लिए सबसे सस्ता ऑप्शन धर्मशाला है। जहां आप कम से कम खर्चे में ठहर सकते हैं। इसके अलावा आप को यहां सस्ते और महंगे हर प्रकार के होटल रूम्स अवेलेबल हो जाएंगे।अगर आप चाहे तो अयोध्या के नजदीक के शहर फैजाबाद में भी ठहरने का इंतजाम कर सकते हैं। इस शहर में भी बहुत सारे होटल अवेलेबल हैं। खासकर अगर आप 3 स्टार होटल में ठहरने के बारे में सोच रहे हैं तो आप फैजाबाद का रुख कर सकते हैं।

Bihar Category Destination Travel

भारतीय इतिहास की महानता के गवाह हैं बिहार के ये पाँच शहर

  • 0 Comments

बिहार के प्रमुख शहर (Famous cities of Bihar) बिहार भारत का एक ऐसा राज्य है जिसका भारत के इतिहास में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रहा है। अगर आप भारत के इतिहास को समझना चाहते हैं तो बिना बिहार घूमे इसे समझना संभव नहीं है। अगर आप भी ऐतिहासिक स्थलों पर घूमने जाना और इतिहास को कुरेदना पसंद करते हैं तो बिहार आपके लिए एक पसंदीदा टूरिस्ट डेस्टिनेशन हो सकता है। चाहे वह नालंदा विश्वविद्यालय हो या फिर पटना स्थित सम्राट अशोक द्वारा निर्मित अगम कुआं। यहां के हर एक धरोहर आपको भारत के इतिहास की झलक दिखाएंगे। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं बिहार के प्रमुख पांच शहरों के बारे में जहां घूमने जाना मस्ट विजिट है। 1. नालंदा (Nalanda) अगर आप भी ऐतिहासिक धरोहरों (Historical monuments) को देखने और नके इतिहास के बारे में समझने की चाहत रखते हैं तो, आपको बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय को देखना और समझना भी काफी पसंद आएगा। यह विश्वविद्यालय ना सिर्फ भारत बल्कि संपूर्ण संसार के प्राचीनतम विश्वविद्यालय के रूप में जाना जाता है। इस विश्वविद्यालय का निर्माण गुप्त वंश के शासक कुमारगुप्त ने पांचवी सदी में करवाया गया था। बाद में कुमारगुप्त के उत्तराधिकारियों (successors) ने इसे सहेज कर रखा। गुप्त वंश के पतन (Downfall) के बाद आने वाले दूसरे शासकों ने भी इसके विकास में सहयोग दिया। इसे महान सम्राट हर्षवर्धन और पाल शासकों का भी संरक्षण (Protection) मिला। 19वीं शताब्दी में एक अंग्रेज (Englishman) को नालंदा में पढ़ रहे एक चीनी यात्री की डायरी मिली। जब वह उस डायरी (diary) में लिखे पते पर पहुंचा तो वह चारों ओर वीरान खंडहर (deserted ruins) थे। वहाँ टहलते हुए अंग्रेज ने देखा कि वहां कुछ चौथी शताब्दी के बने ईट के अवशेष हैं। फिर उसने हल्के हाथों से उस जगह को कुरेद (scrape) कर देखा तो उसे एक के बाद एक सजी हुई ईटों की श्रंखला (series) दिखाई दिया। उसके बाद उसने हीं वहां की खुदाई (digging) प्रारंभ करवाई और इस प्रकार खोज हुआ विश्व के प्राचीनतम विश्वविद्यालय, नालंदा विश्वविद्यालय की। नालंदा विश्वविद्यालय में 1500 से अधिक शिक्षक थे और 10,000 से अधिक छात्र पढाई किया करते थे। यहां विश्व के कोने-कोने से विद्यार्थी पढ़ने आते थे। यहां छात्रों के रहने के लिए 300 से अधिक कमरे बने हुए थे। सभी कमरे में रोशनी की व्यवस्था थी। विद्यालय के परिसर में जगह जगह पढ़ने का स्थान, प्रार्थना का प्रांगण (prayer hall) और स्टडी हॉल (study hall) बने हुए थे। एक कमरे में एक या एक से अधिक छात्रों के रहने की व्यवस्था थी। कैसे पहुंचे नालंदा (How to reach Nalanda)? अगर आप नालंदा आना चाहते हैं तो नालंदा का सबसे करीबी हवाई अड्डा पटना में स्थित जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Jaiprakash Narayan International Airport) है। जहां से नालंदा शहर की दूरी लगभग 90 किलोमीटर है। आपको बता दें कि पटना का जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चंडीगढ़, देहरादून, जयपुर, अहमदाबाद और कोयंबटूर के साथ-साथ देश के काफी सारे अन्य हवाई अड्डों से जुड़ा हुआ है। जिसकी वजह से आपको फ्लाइट (Flight) से पटना पहुंचने में कोई भी तकलीफ नहीं होगी।नालंदा का सबसे करीबी रेलवे स्टेशन नालंदा जिला में ही स्थित है। लेकिन नालंदा रेलवे स्टेशन के लिए आपको सिर्फ नालंदा के नजदीकी रेलवे स्टेशन पटना, दानापुर, गया, बिहार शरीफ और राजगीर से ही ट्रेन की सुविधा मिल पाएगी। अगर आप इन शहरों से जुड़े हुए हैं, तो आप आसानी से अपने शहर से ट्रेन पकड़ कर नालंदा पहुंच सकते हैं और नालंदा शहर को विजिट कर सकते हैं। लेकिन अगर आपके शहर से नालंदा के लिए डायरेक्ट (Direct) ट्रेन की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो आपको अपने शहर से गया या पटना जंक्शन के लिए ट्रेन पकड़नी होगी। 2. पटना (Patna) जब बात भारत के इतिहास की हो तो इस शहर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। हम बात कर रहे हैं पटना शहर की। यह शहर गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है। अगर बात किया जाए इस शहर के वर्तमान की तो यह काफी विकसित हो चुका है। शहर के बड़े-बड़े बिल्डिंग्स, बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल और यहां की सड़कें यह बताने के लिए काफी हैं कि यह शहर भी किसी अन्य शहर से पीछे नहीं है। पटना पर्यटन के लिए भी काफी मशहूर है। जिन लोगों को इतिहास में रुचि है, यह शहर उनका बाहें फैलाकर स्वागत करता है। इस शहर के कुछ प्रमुख पर्यटन स्थल, जो इस शहर की शान माने जाते है निम्नलिखित है- गोलघर (Golghar), श्री कृष्ण साइंस सेंटर पटना (Shri Krishna Science Center Patna), बिस्कोमान भवन (Biscomaun Bhawan), गांधी मैदान (Gandhi maidan), बुद्धा स्मृति पार्क (Buddha smriti park), महावीर मंदिर (Mahaveer mandir), तारामंडल (Patna Planetarium – Taramandal), बिहार म्यूजियम (Bihar museum), गांधी म्यूजियम (Gandhi museum), पटना म्यूजियम (Patna museum), संजय गांधी जैविक उद्यान पटना (Sanjay Gandhi Biological Park), पटना साहिब (Patna sahib), इको पार्क (Eco park), गंगा घाट (Ganga Ghat), अगम कुआं (Agam Kuan) तथा कुम्हरार (Kumhrar)। कैसे पहुंचे पटना (How to reach Patna)? यदि आप पटना आना चाह रहे है तो आप तीनों मार्गों से यहाँ आसानी से आ सकते हैं। पटना सड़क मार्ग द्वारा भारत के सभी शहरों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता तथा सिलीगुड़ी से यहाँ के लिए बस सर्विस उपलब्ध है। भारत के किसी भी प्रमुख शहर से पटना के डायरेक्ट ट्रेन है। पटना के जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भारत के किसी प्रमुख शहर के लिए डायरेक्ट फ्लाइट उपलब्ध है। 3. वाल्मीकि नगर (Valmiki nagar) वाल्मीकि नेशनल पार्क जो बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है, पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित है। यह नेशनल पार्क वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (Valmiki Tiger Reserve) का हिस्सा है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व लगभग 900 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1978 हुई थी। यह टाइगर रिजर्व भारत का अठारहवाँ टाइगर रिजर्व है। 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में 54 बाघ है। 1950 से पहले यह संरक्षित क्षेत्र, बेतिया महाराज के राज में आता था। सर्वप्रथम, 1978 में इस संरक्षित क्षेत्र को वन्य जीव अभ्यारण घोषित कर दिया गया। इसके पश्चात, 1990 में वाल्मीकि वन्य जीव अभ्यारण्य को नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया।

Explore the Beautiful Beaches of Lakshadweep Category Destination Travel

Lakshadweep-रूट से लेकर बजट तक, जानिए लक्षद्वीप ट्रिप के बारे में सब कुछ

  • 0 Comments

Explore the Beautiful Beaches of Lakshadweep प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप जाने के साथ मालदीव बनाम लक्षद्वीप का विवाद सुर्खियों में आ गया। अब भारत के बड़े-बड़े सेलिब्रिटी से लेकर क्रिकेटर तक लक्षद्वीप जाने की बात कर रहे हैं और लक्षद्वीप एक बेतरीन टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है। ऐसे में अगर आप भी लक्षद्वीप की यात्रा करना चाहते हैं तो यह ब्लॉग आपको आपके लिए बहुत ही मददगार साबित होगा। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम बात करने वाले हैं लक्षद्वीप के कुछ फेमस द्वीपों के बारे में और इस ब्लॉग में हम यह भी बात करेंगे कि लक्षद्वीप कैसे पहुंचे? कहां ठहरें? और लक्षद्वीप के दौर में आपके लिए कितना तक का आएगा? परमिट की होगी आवश्यकता (Permit will be required) : भारत के कुछ संवेदनशील जगहों पर जाने के लिए गवर्नमेंट से परमिट लेने की आवश्यकता होती है। लक्षद्वीप भी उन्हीं जगहों में से एक है। यहां जाने के लिए आपको परमिट लेने की जरूरत होगी। लेकिन घबराने वाली बात नहीं है क्योंकि परमिट लेना इतना भी मुश्किल काम नहीं है। अगर आप परमिट लेना चाहते हैं तो आप सबसे पहले केरल के कोच्चि स्थित कार्यालय में जाकर परमिट के लिए अप्लाई कर सकते हैं और अपना पर बनवा सकते हैं। उसके बाद आप अपनी आगे की यात्रा जारी रख सकते हैं। इसके अलावा अगर आप इन सब पचड़ों में नहीं पड़ना चाहते हैं तो आप ऑनलाइन बुकिंग भी कर सकते हैं। इसके लिए आपको लक्षद्वीप गवर्नमेंट के वेबसाइट पर जाकर एंट्री परमिट के लिए अप्लाई करना होगा। जिसका लिंक नीचे दिया गया है :- http://epermit.utl.gov.in लक्षद्वीप जाने का सबसे बेहतरीन समय (Best time to visit Lakshadweep) : अगर बात करें कि लक्षद्वीप कब जाना चाहिए तो लक्षद्वीप का मौसम हमेशा हीं अच्छा होता है और घूमने लायक होता है लेकिन गर्मी के समय में इक्वेटर से नजदीक होने के कारण यहां ज्यादा गर्मी होती है। इसलिए आप अक्टूबर से मई तक के समय में यहां जाने की कोशिश करें। क्योंकि इस समय जहां उत्तर भारत में भीषण ठंड का प्रकोप होता है, वहां लक्षद्वीप में मौसम सुहाना और घूमने लायक होता है। इस वजह से आप यहां बहुत हीं अच्छे से अपना वोकेशन इंजॉय कर पाएंगे। लक्षद्वीप घूमने के लिए कितने समय की आवश्यकता होगी? (Time require to explore Lakshadweep) : अगर बात करें लक्षद्वीप घूमने के लिए आपको कितने दिनों के ट्रिप की बुकिंग करनी होगी तो हम आपको बता दे कि लक्षद्वीप घूमना बहुत ही आसान है। यह बहुत ही खूबसूरत और ईजी टू एक्सप्लोर जगह है। इस वजह से आप इसे 5 दिन में हीं बहुत ही आसानी से और बहुत ही बेहतरीन तरीके से घूम लेंगे। हां अगर आप ज्यादा दिनों तक समय लेकर यहाँ आना चाहते हैं तो यह एक अच्छा ऑप्शन है। क्योंकि शायद 5 दिन में यहाँ सब कुछ घूम लेने के बाद भी आपका मन यहाँ से जाने का नहीं करेगा। क्योंकि यह जगह है ही इतनी खूबसूरत कि लोगों को खुद से बांध लेती है। क्या होगा बजट (Budget for Lakshadweep tour) : अगर बात करें लक्ष्यदीप जाने के लिए आपको कितने बजट की आवश्यकता होगी तो यह डिपेंड करता है कि आप किस शहर से लक्षद्वीप जा रहे हैं। हालांकि लक्षद्वीप में ठहरने और घूमने फिरने का खर्च लगभग 40,000 से शुरू होकर 1,20,000 तक जा सकता है। यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप किस तरह की और कितनी प्रीमियम सेवाओं का उपयोग करते हैं। लक्षद्वीप में घूमने लायक जगह (Places to visit in Lakshadweep) :लक्षद्वीप में घूमने के लिए बहुत सारी जगहें हैं अगर आप जानना चाहते हैं कि यहां घूमने के लिए कौन कौन से द्वीप हैं तो हम आपको बता दे यहां के सबसे खूबसूरत द्वीपों में अगात्ति, बंगाराम, कल्पनी, कदमत जैसे द्वीप फेमस हैं। इसके अतिरिक्त लक्षद्वीप की राजधानी कवारत्ती भी काफी खूबसूरत है। आप इसे भी एक्सप्लोर कर सकते हैं। लक्षद्वीप कैसे पहुंचे (How to reach Lakshadweep?)अगर आप उत्तर भारत से हैं तो आपको लक्षद्वीप जाने के लिए अपने शहर से कोच्चि शहर के लिए ट्रेन अथवा फ्लाइट लेने की आवश्यकता होगी। क्योंकि लक्षद्वीप के लिए दिल्ली जैसे उत्तर भारतीय शहरों से डायरेक्ट फ्लाइट की व्यवस्था नहीं है।अगर आप फ्लाइट से लक्षद्वीप जाना चाहते हैं तो आप सबसे पहले केरल के कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट लेकर कोच्चि पहुंच जाएँ। फिर वहां से अपना लक्षद्वीप जाने का परमिट बनवाकर अगात्ति हवाई अड्डा के लिए फ्लाइट ले सकते हैं।वहीं अगर आप ट्रेन के जरिए लक्षद्वीप जाना चाहते हैं तो आप कोच्चि के लिए ट्रेन ले सकते हैं। हालांकि कोच्चि शहर के बाद आप या तो फ्लाइट या फिर बोट के जरिए ही लक्षद्वीप जा पाएंगे। अगर आप क्रूज के सफर का आनंद लेना चाहते हैं तो आपको मुंबई, गोवा, कोच्चि, बेपोर और मंगलौर जैसे शहरों से डायरेक्ट क्रूज कनेक्टिविटी मिल जाएगी और आप बड़े हीं आराम से लक्षद्वीप विजिट करने के लिए जा सकते हैं।

ayodhya Culture Destination Uttar Pradesh

Best Places to Visit in Ayodhya

  • 0 Comments

Ram Janmabhoomi This is believed to be the birthplace of Lord Rama. It is now the site where the construction of the Ram Mandir is underway. Pilgrims and tourists visit this site to pay their respects. Hanuman Garhi: A temple dedicated to Lord Hanuman, it is situated atop a hill. The temple is a popular pilgrimage site and offers panoramic views of Ayodhya. Kanak Bhawan Also known as Sone ka Mandir, Kanak Bhawan is a beautiful temple dedicated to Lord Rama and his consort Sita. The temple is known for its intricately carved interiors. Treta Ke Thakur: This temple is believed to be the spot where Lord Rama performed the Ashwamedha Yajna. It holds religious importance for followers of Rama.(Best Places to Visit in Ayodhya) Swarg Dwar: Swarg Dwar, meaning “Gateway to Heaven,” is a significant spot in Ayodhya. According to mythology, it is believed that Lord Rama ascended to heaven from this place. Nageshwarnath Temple This temple is dedicated to Lord Shiva and is considered one of the oldest temples in Ayodhya. It is believed to have been established by Kush, the son of Lord Rama. Tulsi Smarak Bhawan A museum dedicated to the renowned Hindi poet Tulsidas, the author of the epic Ramcharitmanas. The museum showcases artifacts related to Tulsidas and his works. Guptar Ghat: Situated on the banks of the Sarayu River, this ghat is considered sacred. Pilgrims often take a dip in the river here. Remember that Ayodhya is a city with a rich history and deep cultural significance, so exploring its streets, interacting with locals, and immersing yourself in the spiritual atmosphere can also be rewarding experiences. Keep in mind that the availability of attractions and their accessibility might be subject to change, so it’s advisable to check with local authorities or reliable sources for the latest information before planning your visit. Why is Ayodhya Famous Ayodhya is primarily famous for its historical and religious significance, especially in Hinduism. Here are some reasons why Ayodhya is considered famous: Birthplace of Lord Rama: Ayodhya is believed to be the birthplace of Lord Rama, a significant deity in Hinduism and the central character of the ancient Indian epic, the Ramayana. Ram Janmabhoomi: The city gained prominence due to the Ayodhya dispute, which revolved around the Babri Masjid located in the city. The disputed site, known as Ram Janmabhoomi, is believed to be the birthplace of Lord Rama. Ram Mandir Construction: Ayodhya became the center of attention in 2019 when the Supreme Court of India ruled in favor of constructing a Ram Mandir at the disputed site. The construction of the Ram Mandir is an ongoing project, drawing pilgrims and tourists alike. Religious Pilgrimage: Ayodhya is a significant pilgrimage site for Hindus. Devotees visit the city to pay homage to Lord Rama and other revered figures associated with the Ramayana. Historical Significance: Ayodhya is one of the oldest continuously inhabited cities in the world, with a rich historical and cultural heritage. It has been mentioned in various ancient texts and scriptures. Cultural and Literary Importance: The city is associated with various ancient texts, including the Ramayana and several Puranas. It has also been the inspiration for numerous literary and artistic works. Religious Festivals: Ayodhya is known for grand celebrations during festivals like Diwali, as it is believed to be the place where Lord Rama returned after defeating the demon king Ravana. Temples and Ghats: Ayodhya is home to several temples, including the Hanuman Garhi, Kanak Bhawan, and Nageshwarnath Temple. The city also has ghats along the Sarayu River, where religious ceremonies and rituals take place. The combination of religious, historical, and cultural significance has contributed to Ayodhya’s fame as a revered and celebrated city in India. The ongoing developments, including the construction of the Ram Mandir, continue to keep Ayodhya in the public eye. Famous food spots in Ayodhya Ayodhya, with its rich cultural and historical heritage, offers a variety of local dishes that reflect the traditional flavors of the region. While Ayodhya may not be as famous for its street food scene as some other cities in India, there are still local eateries and restaurants where you can enjoy authentic dishes. Keep in mind that the food scene might evolve, so it’s always a good idea to check for the latest recommendations. Local Street Food Stalls While Ayodhya may not have a prominent street food scene, you can explore local markets and streets for small food stalls offering snacks like chaat, samosas, and other Indian street food items. Ayodhya Haat Ayodhya Haat is a market area where you can find local vendors selling traditional snacks and sweets. It’s a good place to explore local flavors. Remember that Ayodhya is known for its vegetarian cuisine, and you’ll find a variety of sweets and snacks that are popular in the region. Additionally, it’s always a good idea to ask locals for recommendations to discover hidden gems and local favorites. How to reach Ayodhya Ayodhya, located in the state of Uttar Pradesh, India, is well-connected by various modes of transportation. Here are the common ways to reach Ayodhya: By Air: Nearest Airport: Ayodhya International Airport, officially named as Maharishi Valmiki International Airport, Ayodhya Dham, is an international airport serving the twin cities of Ayodhya and Faizabad in the state of Uttar Pradesh, India. From the airport, you can hire a taxi or use other local transportation to reach Ram Janm Bhoomi Ayodhya. By Train Ayodhya Junction: Ayodhya has its own railway station, known as Ayodhya Junction (AY). Several trains connect Ayodhya to major cities in India. You can check the train schedules and book tickets through the official website of Indian Railways or other online platforms. By Road: Road Transport: Ayodhya is well-connected by road to various cities in Uttar Pradesh and other neighboring states. State-run and private buses operate on different routes to Ayodhya. You can also hire a taxi or use other private transportation services. The city is connected to major highways, making it accessible by road.

Destination Haryana Travel

Best National Parks of Haryana

  • 0 Comments

हरियाणा अपने स्पिरिचुअल और हिस्टोरिकल वैल्यूज (Spiritual and Historical Values) के लिए फेमस है और यहां की खूबसूरती आसपास के शहरों से पर्यटकों को आकर्षित करती है। राजधानी दिल्ली से नजदीक होने के कारण अक्सर दिल्ली के लोग पिकनिक मनाने यहां आया करते हैं। यहां के फेमस टूरिस्ट प्लेसेस (Famous Tourist Places) की अगर बात की जाए तो उनमें यहाँ के दो नेशनल पार्क्स का नाम भी आता है। इसके अलावा यहां मोरनी हिल्स, मोरनी फोर्ट, एडवेंचर पार्क और टिक्कर ताल भी है जो पर्यटकों को आकर्षित करता है। आज के फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताएँगे इन दो नेशनल पार्क्स (National Parks of Haryana) के बारें में जहाँ आप नेचर को एक्सप्लोर कर सकते हैं। 1. सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान (Sultanpur National Park) सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान हरियाणा के सुल्तानपुर, फारुखनगर और गुरुग्राम जिले में स्थित भारत का एक प्रसिद्ध बर्ड अभयारण्य है। यह नेशनल पार्क सुल्तानपुर में स्थित है जिसके कारण इस उद्यान को सुल्तानपुर पक्षी विहार भी कहा जाता है। यह नेशनल पार्क लगभग 142 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस पक्षी विहार में हजारों की संख्या में लुप्तप्राय और दुर्लभ पक्षी पाए जाते है। यहाँ पाए जाने वाले पक्षियों में पेलिकन, साइबेरियाई सारस, काले पंखों वाला स्टिल्ट, जलकाग, पैडीफील्ड पिपिट, लिटिल कॉर्मोरेंट, इंडियन कॉर्मोरेंट, पर्पल सनबर्ड, ब्लैक फ्रैंकोलिन, कॉमन स्पूनबिल, कॉमन हूपो, ग्रे फ्रैंकोलिन, इंडियन रोलर, व्हाइट आइबिस, व्हाइट-थ्रोटेड किंगफिशर, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, इंडियन स्पॉट-बिल्ड डक, पेंटेड सारस, कॉमन ग्रीनशैंक्स, कुरजां आदि कुछ ऐसे प्रमुख प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां हैं जो इस नेशनल पार्क में आपको अवश्य मिल जायेंगे। कैसे पहुंचे सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Sultanpur National Park)? सुल्तानपुर नेशनल पार्क, गुड़गाँव-झज्जर हाईवे पर फर्रुखनगर के नजदीक स्थित है। दिल्ली एनसीआर में होने के कारण सुल्तानपुर नेशनल पार्क वीकेंड बिताने का एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। आप दिल्ली मेट्रो से यहाँ आना चाहें तो येलो लाइन से हुडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन पर पहुँच कर, वहां से कोई निजी कैब या ऑटो बुक करके आप इस खूबसूरत पक्षी विहार तक पहुँच सकते हैं। अगर आप गुड़गाँव से जाएँ तो यह लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर है और दिल्ली से लगभग 42 किलोमीटर की दूरी पर। 2. कालेसर राष्ट्रीय उद्यान (Kalesar National Park) चंडीगढ़ से 122 किलोमीटर दूर हरियाणा के यमुनानगर जिले में कालेसर राष्ट्रीय उद्यान और कालेसर वन्यजीव अभ्यारण्य (Kalesar Wildlife Sanctuary) है जो अपने नेचुरल डाइवर्सिटी (Natural Diversity) के लिए अपने आसपास के क्षेत्र में प्रसिद्ध है। कालेसर राष्ट्रीय उद्यान और कालेसर वन्यजीव अभ्यारण्य क्रमशः 53 वर्ग किमी और 53.45 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है और इन दोनों की स्थापना क्रमशः 8 दिसंबर 2003 और 13 दिसंबर 1996 को हुई थी। इस नेशनल पार्क का नाम कालेसर महादेव मंदिर के नाम पर रखा गया था जो इसी राष्ट्रीय उद्यान में है। यहाँ पाए जाने वाले जीवों में एशियाई हाथी (Asian Elephant), भारतीय तेंदुआ (Indian Leopard), लेपर्ड कैट (Leopard Cat), वाइल्ड कैट (Wild Cat), चीतल (Chital), रस्टी-स्पॉटेड कैट (Rusty-spotted Cat), नीलगाय (Nilgai), सांभर (Sambar), आदि शामिल है। कैसे पहुंचे कालेसर राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Kalesar National Park)? यमुनानगर पौंटा साहिब स्टेट हाईवे (NH 907) कालेसर नेशनल पार्क से होकर गुजरता है। कालेसर नेशनल पार्क सड़क मार्ग द्वारा प्रमुख शहरों (यमुनानगर, पोंटा और देहरादून) से जुड़ा हुआ है। इस नेशनल पार्क के पास में एक रेलवे स्टेशन है- ‘यमुनानगर रेलवे स्टेशन’ जहाँ से आप टैक्सी या बस लेकर कालेसर नेशनल पार्क पहुंच सकते है। हवाई मार्ग से आने के लिए इस नेशनल पार्क का निकटम एयरपोर्ट चंडीगढ़ (शहीद भगत सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट) में है।

Destination Travel

गोवा का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है मोलेम नेशनल पार्क

  • 0 Comments

मोलेम नेशनल पार्क (Mollem National Park) जो गोवा का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है, दक्षिणी गोवा जिले में स्थित है। यह नेशनल पार्क सह्याद्रि की पहाड़ियों (Western Ghats) में अवस्थित है। मोलेम नेशनल पार्क लगभग 107 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1978 हुई थी। यह नेशनल पार्क भगवान महावीर अभ्यारण्य (Bhagwan Mahavir Sanctuary) का हिस्सा है, जिसका कुल क्षेत्रफल 240 वर्ग किलोमीटर है। यह नेशनल पार्क पणजी से 57 किलोमीटर दूर है। दूधसागर जलप्रपात (Dudhsagar Falls) और तांबडी जलप्रपात (Tambdi Falls) इसी नेशनल पार्क में है जो इस नेशनल पार्क को पर्यटकों के लिए और खास बनाता है। इसके अतिरिक्त इस नेशनल पार्क में फ्लोरा और फॉउना के कई प्रजातियां है जो इसको नेचर लवर्स के लिए खास बनाती है। मोलेम नेशनल पार्क का इतिहास (History of Mollem National Park) सर्वप्रथम, 1978 में इस संरक्षित क्षेत्र को मोलेम गेम सेंचुरी के नाम से जाना जाता था। इसके पश्चात, 1969 में इस संरक्षित क्षेत्र को वन्य जीव अभयारण्य घोषित कर दिया गया और इसका नाम बदलकर भगवान महावीर अभयारण्य कर दिया गया। 1978 में, इसके कोर क्षेत्र को नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया जिसका क्षेत्रफल 107 वर्ग किमी था। मोलेम नेशनल पार्क में फॉउना (Fauna in Mollem National Park) मोलेम राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते हैं। यहाँ पाए जाने वाले जीव निम्नलिखित हैं। 1. मैमल्स (Mammals) बंगाल टाइगर (Bengal Tiger), ब्लैक पैंथर (Black Panther), वाइल्ड बोअर (Wild Boar), बोनट मकाक (Bonnet Macaque), इंडियन गौर (Indian Gaur), स्पॉटेड डियर (Spotted Deer), मालाबार जायंट गिलहरी (Malabar Giant Squirrel), सांभर (Sambar), बार्किंग डियर (Barking Deer), स्लेंडर लोरिस (Slender Loris), सिवेट (Civet), उड़ने वाली गिलहरी (Flying Squirrel), औटर (Otter), पॉर्क्यूपाइन (Porcupine), वाइल्ड डॉग (Wild Dog), पैंगोलिन (Pangolin), लंगूर (Langur), मॉउस डियर (Mouse Deer) 2. बटरफ्लाई (Butterfly) प्लेन टाइगर (Plain Tiger), ब्लू मॉर्मन (Blue Mormon), कॉमन माइम (Common Mime), प्लम जुडी (Plum Judy), मालाबार ट्री निम्फ (Malabar Tree Nymph), ग्रेट एगफ्लाई (Great Egg fly), साउथर्न बर्डविंग (Southern Birdwing), कॉमन मॉर्मन (Common Mormon), ग्रे पैंसी (Grey Pansy), पिग्मी स्क्रब-हॉपर (Pygmy Scrub-hopper), क्रिमसन रोज (Crimson Rose), टेल्ड जय (Tailed Jay), तमिल योएमैन (Tamil Yeoman), कॉमन जेजेबेल (Common Jezebel), लाइम बटरफ्लाई (Lime Butterfly), कॉमन वैंडरर (Common Wanderer) 3. बर्ड्स (Birds) पैराडाईज फ्लाईकैचर (Paradise Flycatcher), पन्ना डव (Emerald Dove), लार्ज ग्रीन बारबेट (Large Green Barbet), ग्रे जंगल फॉउल (Gray Jungle Fowl), ग्रेटर इंडियन हॉर्नबिल (Greater Indian Hornbill), ड्रोंगो (Drongo), मालाबार पाइड हॉर्नबिल (Malabar Pied Hornbill), रूबी-थ्रोटेड येलो बुलबुल (Ruby-throated Yellow Bulbul), इंडियन ब्लैक वुडपेकर (Indian Black Woodpecker), गोल्डन ओरियल (Golden Oriole), वैगटेल्स (Wagtails), तीन पंजों वाली नीलकंठ (Three-toed Kingfisher), फेयरी ब्लूबर्ड (Fairy Bluebird), ग्रे-हेडेड मैना (Grey-headed Myna), श्राइक (Shrike), मालाबार ग्रे हार्नबिल (Malabar Gray Hornbill) रैकेट-टेल्ड ड्रोंगो (Racket-tailed Drongo), श्रीलंका फ्रॉगमॉउथ (Sri Lanka Frogmouth) 4. रेप्टाइल्स (Reptiles) कैट स्नेक (Cat Snake), किंग कोबरा (King Cobra), इंडियन रॉक पाइथन (Indian Rock Python), हंप-नोज्ड पिट वाईपर (Hump-nosed Pit Viper), कॉमन करैत (Common Krait), मालाबार पिट वाईपर (Malabar Pit Viper), इंडियन कोबरा (Indian Cobra), रैट स्नेक (Rat Snake), रसेल वाईपर (Russell’s Viper), ब्रॉन्जजैक ट्री स्नेक (Bronze jack Tree Snake) मोलेम नेशनल पार्क में फ्लोरा (Flora in Mollem National Park) अगर बात की जाए मोलेम नेशनल पार्क के फ्लोरा की तो, यहाँ पाए जाने वाले फ्लोरा निम्नलिखित है। वनों के प्रकार (Types of Forests) सदाबहार वन (Evergreen forests), पश्चिमी तट के उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन (Tropical evergreen forests of the west coast), पश्चिमी तट के अर्ध-सदाबहार वन (Semi-evergreen forests of the west coast) और नम पर्णपाती वन (Moist deciduous forests) इसके अलावा, यहाँ 492 जनेरा और 122 फैमिली से संबंधित पुष्पीय पौधों के 722 प्रजातियां, एंडेमिक पौधों के 128 प्रजातियां और टेरीडोफाइट की 37 प्रजातियां पाई जाती है। बेस्ट टाइम टू विजिट मोलेम नेशनल पार्क (Best time to visit Mollem National Park) अगर आप मोलेम राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने से बचें क्योंकि समर में यहाँ बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है। आप यहाँ ठण्ड के महीनों (अक्टूबर से मार्च) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यहाँ का मौसम सुहाना और परिस्थितियां सम रहती हैं और आपको यहाँ ज्यादा से ज्यादा जानवर देखने को मिलेंगे। कैसे पहुंचे मोलेम राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Annamalai National Park)? मोलेम नेशनल पार्क में आकर्षण के केंद्र (Points of attraction in Mollem National Park)

Bihar Destination Travel

पश्चिम चंपारण जिले में स्थित है बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान

  • 0 Comments

वाल्मीकि नेशनल पार्क (Valmiki National Park) जो बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है, पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित है। यह नेशनल पार्क वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (Valmiki Tiger Reserve) का हिस्सा है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व लगभग 900 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1978 हुई थी। यह टाइगर रिजर्व भारत का अठारहवाँ टाइगर रिजर्व है। 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में 54 बाघ है। यह टाइगर रिज़र्व बिहार का एकमात्र टाइगर रिजर्व है। यह संरक्षित क्षेत्र शिवालिक हिमालय की तलहटी में है। गंडक नदी इस राष्ट्रीय उद्यान के पश्चिमी सीमा से गुजरती है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में फ्लोरा और फॉउना के कई प्रजातियां है जो इस टाइगर रिजर्व को नेचर लवर्स के लिए खास बनाती है। वाल्मीकि नेशनल पार्क का इतिहास (History of Valmiki National Park) 1950 से पहले यह संरक्षित क्षेत्र, बेतिया महाराज के राज में आता था। सर्वप्रथम, 1978 में इस संरक्षित क्षेत्र को वन्य जीव अभ्यारण घोषित कर दिया गया। इसके पश्चात, 1990 में वाल्मीकि वन्य जीव अभ्यारण्य को नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया। 1990 में ही, इसे प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिजर्व बना दिया गया। वाल्मीकि नेशनल पार्क और वाल्मीकि वन्यजीव अभयारण्य वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) का हिस्सा है। वाल्मीकि नेशनल पार्क में फॉउना (Fauna in Valmiki National Park) वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते हैं। यहाँ पाए जाने वाले जीव निम्नलिखित हैं। 1. मैमल्स (Mammals) बंगाल टाइगर (Bengal Tiger), इंडियन लेपर्ड (Indian Leopard), एशियन एलीफैंट (Indian Elephant), भारतीय गैंडा (Indian Rhinoceros), क्लाउडेड लेपर्ड (Clouded Leopard), वाइल्ड वाटर बफैलो (Wild Water Buffalo), वाइल्ड बोअर (Wild Boar), एशियाई काला भालू (Asiatic Black Bear), भारतीय स्लॉथ भालू (Indian Sloth Bear), इंडियन गौर (Indian Gaur), स्पॉटेड डियर (Spotted Deer), सांभर (Sambar), बार्किंग डियर (Barking Deer), फिशिंग कैट (Fishing Cat), हॉग डियर (Hog Deer), बंदर (Monkey), उड़ने वाली गिलहरी (Flying Squirrel), औटर (Otter), लेपर्ड कैट (Leopard Cat), वाइल्ड डॉग (Wild Dog), ब्लू बुल या नीलगाय (Blue Bull or Nilgai), लंगूर (Langur), नेवला (Mongoose) 2. बर्ड्स (Birds) पैराडाईज फ्लाईकैचर (Paradise Flycatcher), कलिज तीतर (Kalij Pheasant), व्हाइट-आई बार्बलर (White-eye Barbler), तीन पंजों वाली बटेर (Three-toed Quail), पाइड हॉर्नबिल (Hornbill), स्टॉर्क (Storks), ग्रीन बारबेट (Green Barbet), प्लोवर (Plover), व्हाइट-ईयर नाइट हेरॉन (White-eared Night Heron), स्निप्स (Snipes), ट्री पिपिट (Tree Pipit), आइबिस (Ibis), ग्रे श्राइक (Gray Shrike), पन्ना डव (Emerald Dove), पिटा (Pitta), ग्रीन विलो वार्बलर (Green Willow Warbler), वेडर्स (Waders) 3. रेप्टाइल्स (Reptiles) किंग कोबरा (King Cobra), अजगर (Python ), करैत (Krait), मॉनिटर लिजर्ड (Monitor Lizard), बैंडेड करैत (Banded Krait), घड़ियाल (Alligator), क्रोकोडाइल (Crocodile), दोमुंहा सांप (Two-headed Snake) 4. बटरफ्लाई (Butterfly) ग्लासी टाइगर (Glassy Tiger), ग्रेट मॉर्मन (Great Mormon), ग्रेट एगफ्लाई (Great Eggfly), कॉमन मॉर्मन (Common Mormon), ग्रे पैंसी (Gray Pansy), क्लब बीक (Club Beak), कॉमन क्रो (Common Crow), लाइम बटरफ्लाई (Lime Butterfly) वाल्मीकि नेशनल पार्क में फ्लोरा (Flora in Valmiki National Park) अगर बात की जाए मुकुर्थी नेशनल पार्क के फ्लोरा की तो, यहाँ पाए जाने वाले फ्लोरा निम्नलिखित है। 1. महत्वपूर्ण पेड़ (Important Trees) करम (Karam), साल (Sal), सिमल (Simal), मंदार (Mandar), बंजन (Banjan), बहेरा (Bahera), सतसाल (Satsal), बोडेरा (Bodera), पियार (Piyar), असिद्ध (Asidh), असान (Asan), हर्रा (Harra), चिर पाइन (Chir Pine), 2. घास (Grass) इम्पेराटा सिलिंड्रिका (Imperata Cylindrica), कंस (Kans), चोरंथ (Choranth), मुंज (Munj), सबाई (Sabai), हाथी घास (Elephant Grass), वेटिवेरिया ज़िज़ानियोइड्स (Vetiveria Zizanioides), नरकट (Narkat) 3. औषधीय पौधे (Medicated Plants) कुटज (Cottage), आंवला (Gooseberry), सतावर (Satawar), सफेद मूसली (Safed Musli), पाइपर (Piper) बेस्ट टाइम टू विजिट वाल्मीकि नेशनल पार्क (Best time to visit Valmiki National Park) अगर आप वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) और मानसून (Monsoon) में यहाँ आने से बचें क्योंकि इस समय यहाँ बहुत गर्मी पड़ती है और यह नेशनल पार्क बंद रहता है। यह राष्ट्रीय उद्यान 1 अक्टूबर से 31 मई तक खुला रहता है। आप यहाँ नवंबर से फरवरी के बीच में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यहाँ का मौसम सुहाना और परिस्थितियां सम रहती हैं और आपको यहाँ ज्यादा से ज्यादा जानवर देखने को मिलेंगे। कैसे पहुंचे वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Valmiki National Park)? सड़क मार्ग- वाल्मीकि नेशनल पार्क सड़क मार्ग द्वारा प्रमुख शहरों (पटना, लखनऊ और प्रयागराज) से जुड़ा हुआ है। निकटतम शहर बेतिया (80 किमी) से यहाँ के डेली बस सर्विस है। रेल मार्ग- इस नेशनल पार्क के पास में निकटम रेलवे स्टेशन ‘वाल्मीकि रेलवे स्टेशन’ है जहाँ से आप टैक्सी या बस लेकर वाल्मीकि नेशनल पार्क पहुंच सकते है। हवाई मार्ग- इस नेशनल पार्क का निकटम एयरपोर्ट पटना (जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल एयरपोर्ट) में है जो नेशनल पार्क से 295 किलोमीटर दूर है।

Destination Travel

एक ऐसा राष्ट्रीय उद्यान जिसे नीलगिरी तहर राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता है

  • 0 Comments

मुकुर्थी राष्ट्रीय उद्यान (Mukurthi National Park) जो भारत के पहले अंतर्राष्ट्रीय बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है, तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में स्थित है। यह नेशनल पार्क वेस्टर्न घाट के माउंटेन रेंज में अवस्थित है। इस राष्ट्रीय उद्यान को पहले नीलगिरि तहर राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता था। मुकुर्थी नेशनल पार्क लगभग 78 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 12 दिसंबर 2001 को हुई थी। सर्वप्रथम, 3 अगस्त 1982 को इस क्षेत्र को एक वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित कर दिया। इसके पश्चात, 15 अक्टूबर 1990 में इसे अपग्रेड कर नेशनल पार्क में बदल दिया गया। इस नेशनल पार्क का निर्माण नीलगिरि तहर के संरक्षण के लिए किया गया था। इस राष्ट्रीय उद्यान में तीन नदियां बहती है जो बिल्लिथदहल्ला, पायकारा और कुंडाह है। मुकुर्थी नेशनल पार्क में फॉउना (Fauna in Mukurthi National Park) मुकुर्थी राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते हैं। यहाँ पाए जाने वाले जीवों में नीलगिरि तहर (Nilgiri Tahr), बंगाल टाइगर (Bengal Tiger), लेपर्ड (Leopard), नीलगिरि मार्टन (Nilgiri Marten), नीलगिरि लंगूर (Nilgiri Langur), इंडियन एलीफैंट (Indian Elephant), बोनट मकाक (Bonnet Macaque), सांभर (Sambar), बार्किंग डियर (Barking Deer), सियार (Jackal), माउस डियर (Mouse Deer), ब्लैक-नेप्ड रैबिट (Black-napped Rabbit), औटर (Otter), वाइल्ड कैट (Wild Cat), स्मॉल इंडियन सिवेट (Small Indian Civet), वाइल्ड डॉग (Wild Dog), मालाबार स्पाइनी डोरमाउस (Malabar spiny dormouse), सॉफ्ट-हेयर रैट (Soft-haired rat), नीलगिरि लाफिंगथ्रश (Nilgiri laughingthrush) आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ मालाबार व्हिसलिंग थ्रश (Malabar whistling thrush), यूरेशियन वुडकॉक (Eurasian woodcock), नीलगिरि वुड पिजन (Nilgiri wood pigeon), ब्लैक-एंड-ऑरेंज फ्लाईकैचर (Black-and-orange flycatcher), नीलगिरि फ्लाईकैचर (Nilgiri flycatcher, ), ग्रे-हेडेड कैनरी फ्लाईकैचर (Grey-headed canary flycatcher), ब्लैक बुलबुल (Black bulbul), इंडियन व्हाइट-आई (Indian white-eye), नीलगिरी पिपिट (Nilgiri pipit), ब्लैक ईगल (Black Eagle), कॉमन केस्ट्रल (Common Kestrel) भी पाए जाते है। मुकुर्थी नेशनल पार्क में फ्लोरा (Flora in Mukurthi National Park) अगर बात की जाए मुकुर्थी नेशनल पार्क के फ्लोरा की तो, यहाँ पाए जाने वाले आर्किड की कुछ प्रमुख प्रजातियाँ में एरिया एब्लिफ़्लोरा (Area abliflora), ओबेरोनिया सैंटापौई (Oberonia centapoui), एराइड्स रिंगेंस (Arides ringense), एराइड्स क्रिस्पा (Arides crispa), कोएलोग्ने ओडोरैटिसिमा (Coelogne odoratissima), ब्राचीकोरीथिस इएंथा (Brachycorythis iantha), सैटिरियम नेपालेंस (Satyrium nepalense), हेबेनेरिया सेफलोट्स (Habenaria cephalotes), सेडेनफिया डेंसिफ्लोरा (Seidenphia densiflora), स्पिरैंथेस साइनेंसिस (Spiranthes sinensis), लिपारिस एट्रोपुरप्यूरिया (Liparis atropurpurea) शामिल है। बेस्ट टाइम टू विजिट मुकुर्थी नेशनल पार्क (Best time to visit Mukurthi National Park) अगर आप मुकुर्थी राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने से बचें क्योंकि समर में यहाँ बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है। आप यहाँ फरवरी से मई और सितम्बर से नवंबर के बीच में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यहाँ का मौसम सुहाना और परिस्थितियां सम रहती हैं और आपको यहाँ ज्यादा से ज्यादा जानवर देखने को मिलेंगे। कैसे पहुंचे मुकुर्थी राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Mukurthi National Park)?