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कभी भी फैशन ट्रेंड से बाहर नहीं होते हैं ये कश्मीरी पशमीना शॉल

कश्मीर की पहचान है पशमीना शॉल (Pashmina shawl is the identity of Kashmir)

पशमीना शॉल कश्मीर के संस्कृति की एक पहचान है। इसे कश्मीरी ऊन को कात कर बनाया जाता है। कश्मीरी ऊन को बहुत हीं अच्छी किस्म का ऊन माना जाता है। जिसे लद्दाख मूल की चांगथांगी बकरी के बाल से बनाया जाता है। यह ऐसी बकरियाँ होती हैं जो ठंड के मौसम में अपने शरीर से बाल को खुद व खुद हीं अलग कर देती हैं। इसलिए उनके बालों को काटना नहीं होता है। बकरी के बाल से ऊन कात कर उससे शॉल बुना जाता है। क्योंकि एक बार में एक बकरी से 100 ग्राम के करीब हीं ऊन प्राप्त होता है और पशमीना शॉल को तैयार करने के लिए कई कई दिनों की कड़ी मेहनत लगती है। इसलिए यह शॉल काफी महंगा होता है।

पशमीना शॉल की कीमत (Price of Pashmina Shawl)

मिला हुआ है जी आई टैग (GI tag Pashmina Shawl)

पशमीना शॉल को जी आई टैग मिला हुआ है। क्योंकि यह कश्मीर की संस्कृति की पहचान है। इसलिए इसे ज्योग्राफिकल टैग दिया गया है। आपको बता दे कि जिस भी पशमीना शॉल को जी आई टैग मिला हुआ होता है, वह पूरी तरीके से हाथ से बन गया शॉल होता है। इसलिए अगर आपको पशमीना शॉल की पहचान करनी हो तो आप उस पर जी आई टैग देख सकते हैं। पश्मीना शॉल के नाम पर कई बार लोग ठगी का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में अगर आप पशमीना शॉल खरीदने जा रहे हैं तो आप यह सुनिश्चित करें कि आप जो शॉल ले रहे हैं वह जी आई टैग वाला हो।

कई कारणों से खास है पश्मीना शॉल (Pashmina shawl is special for many reasons)

  • यह कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत है। जो सदियों से कश्मीर की पहचान बनकर दुनिया के सामने प्रस्तुत है। इसे बनाने वाले कश्मीरी कारीगर काफी कुशल और निपुण होते हैं। जो अपने कार्य को दक्षता से करना जानते हैं। यही वजह है कि इतने महीन रेशे से इतना बेहतरीन शॉल बना पाते हैं। पशमीना शॉल कश्मीर के शिल्पकारी का एक प्रतीक है जो कश्मीर के विरासत को परिभाषित करता है। यह दुनिया भर में भारत के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर के विरासत की अभूतपूर्व पहचान है।
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