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Places to Visit in Mathura and Vrindavan

मथुरा और वृंदावन को कृष्ण की भूमि कहे या फिर यह कहे कि ये मंदिरों के शहर हैं। दोनों ही नाम इस शहर के परिचायक हैं और पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम हैं। कहते हैं यह वह भूमि है, जहां दुनिया को गीता का ज्ञान देने वाले श्री कृष्ण ने जन्म लिया था। यह शहर ना सिर्फ़ आस्था के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि प्रेम के दृष्टिकोण से भी समृद्ध है। यहीं वजह है कि मथुरा और वृन्दावन दोनों ही युवाओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

आइए जानते हैं मथुरा और वृंदावन के बारे में वो तमाम बातें जो इन्हें सिर्फ श्रद्धा और आस्था के केंद्र के तौर पर ही नहीं बल्कि फेमस पर्यटन स्थल के रूप में भी मशहूर बनाते हैं –

मथुरा वृंदावन को कृष्ण की भूमि और मंदिरों के शहर के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि पुराणों के अनुसार यहां भगवान विष्णु ने कृष्ण अवतार में जन्म लिया था। इस शहर के हर गली में कोई ना कोई मंदिर देखने को मिल जाता है। वृंदावन के उन सैकड़ों हजारों मंदिरों में से कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जो विशेष महत्व रखते हैं और जिनका श्री कृष्ण से सीधा संबंध माना जाता है। इन मंदिरों की प्रसिद्धि इतनी है कि दूर दूर से लोग यहां भगवान के दर्शन करने आते हैं। इस शहर की लोकप्रियता का एकमात्र कारण ये मंदिर हीं हैं। आज के दौर में विज्ञान भी यह मानता है कि मंदिर के परिसर में पहुंचते ही लोगों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन बिल्कुल शांत हो जाता है। यहीं वजह है कि तनाव के इस दौर में वृंदावन जाना पर्यटकों के लिए एक अच्छा विकल्प है। इन मंदिरों के नाम और उनसे जुड़ी जानकारियां नीचे दिए गए हैं :

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  1. श्री कृष्ण जन्मभूमि
  2. इस्कॉन टेम्पल
  3. प्रेम मंदिर
  4. निधि वन

श्री कृष्ण जन्मभूमि :

यह मंदिर मूलतः मंदिर नहीं बल्कि एक कारावास है। कहते हैं कि यह वहीं कारावास है जहां, कंस ने श्री कृष्ण के माता पिता ‘देवकी और वासुदेव’ को कैद करके रखा था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्री कृष्ण का जन्म इसी कारावास में हुआ था। बाद में उसी कारावास के जगह मंदिर बना दिया गया। जहां दूर-दूर से भक्तगण पूजा करने आते हैं। यहां वह स्थान भी है जहां, देवकी के पहले 7 संतानों की बलि दी गई थी। यह मंदिर मथुरा रेलवे स्टेशन से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

श्री बांके बिहारी मंदिर : वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर मथुरा जंक्शन से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बिहारीपुरा में है। जहां श्री कृष्ण की काली पत्थर से बनी प्रतिमा विराजमान है। इस मंदिर का निर्माण स्वामी हरिदास द्वारा करवाया गया था। इस मंदिर में पर्दा प्रथा को माना जाता है और यह प्रथा इस मंदिर को वृंदावन के बाकी मंदिरों से अलग बनाती है। इस प्रथा के तहत श्री कृष्ण की मूर्ति के आगे हर कुछ मिनट में पर्दा गिरा दिया जाता है। माना यह जाता है कि ऐसा करने से श्री कृष्ण किसी भक्त पर मोहित होकर उनके साथ कहीं और नहीं जाएंगे और वहीं विराजमान रहेंगे। इस मंदिर से जुड़ी एक और खास बात यह है कि इस मंदिर को सुबह सवेरे मंगला आरती के लिए नहीं खोला जाता है। कहा जाता है कि, भगवान रात को गोपियों के साथ रासलीला करते हैं। ऐसे में सुबह सवेरे आरती करके उन्हें जगा कर उनकी नींद को खराब नहीं किया जाता है।

प्रेम मंदिर

इस मंदिर को सफेद संगमरमर से बनाया गया है और इसके दीवारों पर श्री कृष्ण के जीवन के महत्वपूर्ण कहानियों को कलाकृतियों में उकेरा गया है। जो इस मंदिर को और भी खूबसूरत बनाता है।

चारों ओर सफेद संगमरमर और मार्बल से बनाए गए इस मंदिर के परिसर में छोटी-छोटी वाटिकाऐं भी हैं। जहां कहीं कृष्ण के बचपन की झांकियां मिलती हैं, तो कहीं श्री कृष्ण अर्जुन को गीता का उपदेश देते हुए मिलते हैं।

यहां कृष्ण की गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाने की मुद्रा में भी मूर्ति स्थापित है। वृंदावन स्थित इस मंदिर की आधारशिला 2001 में रखी गई थी और इसे तैयार होने में 12 वर्षों का समय लग गया। इस मंदिर की आधारशिला जगतगुरु कृपाल आचार्य ने रखी थी।

यहीं वजह है कि इस मंदिर के परिसर में उनके स्मृतियों को भी सहेज कर रखा गया है। प्रेम मंदिर आने का सबसे उचित समय शाम का होता है। क्योंकि शाम ढलते हीं यहां लाइटिंग शो शुरू हो जाते हैं, जो इस मंदिर की खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करते हैं।

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इस्कॉन मंदिर

इस्कॉन का फुल फॉर्म इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस होता है। इस मंदिर की स्थापना 1966 में स्वामी प्रभुपाद ने की थी। भारत की शानदार स्थापत्य कला का एक बेहतरीन उदाहरण है मथुरा स्थित इस्कॉन मंदिर। इसकी भव्यता और विशालता किसी भी शख्स को अपने में बांध लेने में सक्षम है। इस्कॉन मंदिर का बड़ा सा द्वार और उस द्वार से दिखता अंदर के मंदिर परिसर का झलक किसी को भी मंत्रमुग्ध कर सकती है।

इस्कॉन मंदिर भगवान श्री कृष्ण और उनके भाई श्री बलराम को समर्पित है, इसीलिए इसे कृष्ण बलराम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस्कॉन को वृंदावन के सबसे भव्य मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। मंदिर के सफेद संगमरमर पत्थर से बने दीवारों पर की गई नक्काशी और चित्रकारी में भगवान श्री कृष्ण के जीवन के विभिन्न पहलुओं के झलक देखने को मिलते हैं। जिन्हें देखना बेहद मनमोहक होता है और यह पर्यटकों को अपनी ओर काफी आकर्षित करता है।

निधिवन

निधिवन का हिंदू धर्म में विशेष स्थान रहा है। निधिवन देखने में जितना सरल है, उतना ही रहस्यमयी भी। इस वन में स्थित सभी पेड़ की शाखाएं साधारण पेड़ों से काफी अलग और जटिल होते हैं।

निधिवन का अर्थ होता है, तुलसी का वन। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह वहीं वन है जहां, श्री कृष्ण गोपियों के साथ रासलीला रचाते थे। यह माना जाता है कि, रात्रि के समय आज भी श्री कृष्ण और गोपियां यहां रासलीला करने आते हैं। यहीं वजह है कि रात्रि के समय यहां किसी भी मनुष्य को रुकने की इजाजत नहीं है। वैसे तो वृंदावन के हर एक कण में श्री कृष्ण बसे हुए हैं। लेकिन निधिवन में भक्तों को उनके सानिध्य का एक दुर्लभ अनुभव प्राप्त होता है, जो किसी और जगह नहीं मिलता है।

कब जाएं? Best time to visit Vrindavan

यूं तो मथुरा वृंदावन में हर मौसम में पर्यटक घूमने आते हैं। लेकिन बिना किसी परेशानी के शहर के सफर का आनंद लेने के लिए फरवरी से अप्रैल और अगस्त से नवंबर तक का समय सबसे उपर्युक्त है। ब्रजभूमि में होली का त्यौहार बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। विशेषकर इस समय यहां काफी दूर-दूर से पर्यटक होली खेलने आते हैं और सब बैर भाव भूलकर एक दूसरे के साथ होली खेलते हैं। यहां की होली ब्रज की होली के नाम से मशहूर है। कृष्ण जन्माष्टमी और राधा नवमी के समय में भी इस शहर और यहां के मंदिर में काफी भीड़ होती है। जहां होली मार्च के महीने में आती है वहीं जन्माष्टमी और राधा अष्टमी अक्सर अगस्त और सितंबर के महीने में मनाई जाती है। ऐसे में इन महीनों में लोगों का वृंदावन की ओर काफी रुझान होता है।

कैसे जाएं? How to reach Vrindavan ?

अगर आप मथुरा जाना चाहते हैं तो उसके लिए सबसे बेस्ट रूट है हवाई मार्ग के जरिए दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचा जाए। यहां आकर न्यू दिल्ली रेलवे स्टेशन से ट्रेन के माध्यम से मथुरा जंक्शन पहुंचा जाए। ट्रेन के जरिए न्यू दिल्ली से मथुरा जंक्शन 2 घंटे की दूरी पर है।

आप सीधा ट्रेन के माध्यम से भी मथुरा पहुंच सकते हैं। मथुरा जंक्शन देश के अन्य रेलवे स्टेशनों से भी भली-भांति जुड़ा है। अगर सड़क मार्ग द्वारा मथुरा पहुंचना चाहते हैं तो मथुरा देश के अन्य शहरों से सड़क मार्ग द्वारा अच्छे से जुड़ा हुआ है

कहां ठहरे? Best stay

मथुरा में ठहरने के लिए सबसे सस्ता और अच्छा विकल्प है धर्मशाला! मथुरा के हर मुख्य जगहों और मंदिरों में धर्मशालाएं बनी हुई हैं। जहां आप ₹300 से ₹800 तक में रुक सकते हैं। इसके अलावा मथुरा वृंदावन में कई सारे होटल और गेस्ट हाउस भी उपलब्ध हैं। जहां आपको ₹800 से ₹1200 तक में अच्छे रूम मिल सकते हैं। अगर आप मथुरा वृंदावन को अच्छे से घूमना चाहते हैं तो आप को इसमें कम से कम 3 दिन का समय लगेगा। वहीं अगर आपके पास समय की कमी है तो 1 दिन में भी यहां के मुख्य मंदिरों में घूमा जा सकता है

Written by Shambhavi /Edited by Pardeep Kumar

some beautiful pics related to Vrindavan…….

By Five Colors Of Travel

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