होरी खेले रघुवीरा अवध में
होरी खेले रघुवीरा,,,,,
जैसे हीं फाल्गुन मास की शुरुआत होती है हमें नुक्कड़ों और चौराहों पर यह गाना अक्सर सुनने को मिल जाता है। इस गाने के बोल से हीं आपको पता चल गया होगा कि आज हम होली (Holi) के बारे में आपको बताने वाले हैं। होली पूरे भारतवर्ष में मनाया जाने वाला एक ऐसा त्यौहार (Festivals) जो न सिर्फ उत्साह और उमंग का प्रतीक है, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत को भी दर्शाता है। जब भी हम होली का नाम सुनते हैं, हमारे जहन में चारों ओर उड़ते रंग-गुलाल (Colors) और साथ में नाचते गाते लोगों का एक काल्पनिक चित्र कौंधता है। ऐसा होना स्वभाविक भी है क्योंकि ये रंग हीं तो होली की पहचान हैं। लेकिन होली के इन रंगों की कहानी बड़ी पुरानी है। अगर हिंदू धर्म ग्रंथों (Hindu scriptures) की माने तो होली की कहानी भगवान विष्णु और उनके भक्त प्रहलाद से जुड़ी हुई है। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल (Five colors of travel) के इस ब्लॉग में हम आपको इस कहानी के बारे में पूरे विस्तार से बताएंगे। (why is holi celebrated) साथ हीं साथ हम आपको होली के बारे में कुछ रोचक तथ्यों (Interesting facts about Holi) से भी अवगत करवाएंगे।
क्या है खास? (What’s special?)

जैसे ही भारतवर्ष में वसंत ऋतु (spring season) का आगमन होता है चारों ओर जोरों शोरों से होली की तैयारियाँ होने लगती है। लोगों के मन में यह सुगबुगाहट होने लगती है कि बहुत हीं जल्द होली आने वाला है और हमें अपने परिवार जनों के साथ होली मनाना है। होली मनाने के लिए लोगों में इतना उत्साह होना लाजिमी भी है, क्योंकि यह एक ऐसा त्यौहार है जो हर आयु वर्ग के लोगों को पसंद आता है। चाहे वह बच्चे हो या बड़े, सब होली के रंग में रंग जाना चाहते हैं।
जैसे ही मार्च (March) के महीने की शुरुआत होती है बच्चे अपने घर में पिचकारियों की खरीदारी के लिए घर वालों को मानने लगते हैं। हर साल उन्हें नया पिचकारी जो चाहिए होता है! वही घर की महिलाएं होली के दिन कौन से पुए पकवान बनवाएंगी इस बात का प्रबंधन देखने लगती हैं। घर के पुरुष होली में उपयोग में आने वाले सामान जैसे पिचकारी, रंग, गुलाल के साथ-साथ पुए पकवानों (sweets and deserts) के लिए उपयोग में आने वाले राशन के समान लाने की तैयारी में लग जाते हैं। वसंत ऋतु की शुरुआत ही उत्साह (excitement) के साथ होती है। यह मौसम सभी को नवीनता का एक एहसास देता है। इसलिए इस मौसम में लोगों में उत्साह अपने चरम पर होता है। जिसके कारण यह त्यौहार और भी ज्यादा जोरों शोरों से मनाया जाता है।
होली कब और क्यों मनाई जाती है? (When and why is Holi celebrated?)
होली का त्योहार दो दिनों का होता है। जिसमें फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णमासी के दिन रात को होलिका दहन (Holika Dahan) होता है और अगले दिन सब एक दूसरे को रंग गुलाल लगाते हुए होली का उत्सव मनाते हैं। होलिका दहन होली के त्यौहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिसके पीछे की कहानी बहुत पुरानी है, जो रामायण के युग यानी सतयुग से जुड़ी हुई है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार असुर राज हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था। असुर कुल में जन्म लेने के बाद भी वह श्री हरि के नाम का जाप किया करता था। जब हिरण्यकश्यप को यह पता लगा तो उसने प्रहलाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने से मना किया। लेकिन प्रहलाद ने उसका कहना नहीं माना। जिससे क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने अपने हीं पुत्र को मरवाना चाहा। उसने प्रहलाद को मारने के लिए बहुत प्रयत्न किया। लेकिन हर बार उसका प्रयास असफल हो जाता था। क्योंकि श्री नारायण किसी न किसी रूप में प्रहलाद की रक्षा कर दिया करते थे। ऐसे में एक दिन हिरण्यकश्यप की बहन होलिका हिरण्यकश्यप से मिलने आई।
उसको ब्रह्मा जी ने वरदान दिया था कि अग्नि उसे कभी जला नहीं पाएगी। उसने हिरण्यकश्यप से कहा कि उसको वरदान प्राप्त है कि वह अगर जलती अग्नि में प्रवेश कर जाएगी तो भी उसे कुछ नहीं होगा। इसलिए वह प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि की जलती चिता में बैठ जाएगी और प्रहलाद मारा जाएगा। हिरण्यकश्यप ने उसे इसकी अनुमति दे दी। अगले दिन हिरण्यकश्यप ने एक बड़ी सी चिता का निर्माण करवाया। होलिका प्रहलाद को लेकर उस चिता पर बैठ गई। जब चिता में आग लगाया गया तो धीरे-धीरे होलिका को अग्नि का ताप महसूस होने लगा। तब उसने ब्रह्मा जी को स्मरण करते हुए उनसे पूछा कि आखिर उनका दिया हुआ वरदान काम क्यों नहीं कर रहा है? तो ब्रह्मा जी ने उसको कहा कि यह वरदान देते वक्त उन्होंने उससे कहा था कि इस वरदान का उपयोग वह सिर्फ लोगों की भलाई और अपनी सुरक्षा के लिए कर सकती है। लेकिन उसने एक अबोध बालक को मारने के लिए इस वरदान का उपयोग किया है इसलिए यह वरदान एक मिथ्या गया है। इसके बाद ब्रह्मा जी अंतर ध्यान हो गए। आग की लपटें तेज हो चुकी थी और धीरे-धीरे होलिका पूरी तरह से जल गई। लेकिन प्रहलाद को कुछ भी नहीं हो रहा था। क्योंकि प्रहलाद की सुरक्षा स्वयं श्री हरि नारायण कर रहे थे। उसी दिन से फाल्गुन मास की पूर्णमासी के दिन होलिका दहन का त्यौहार मनाया जाता है और उसके अगले दिन लोग रंग गुलाल के साथ बुराई पर अच्छाई के जीत का उत्सव मनाते हैं। इस दिन लोग आपसी बैर भाव को भूलकर एक दूसरे को गले लगाते हैं। इस तरह से यह त्योहार खुशियों और संपन्नता के साथ-साथ लोगों में सामाजिक संवेदनाओं और चेतना को भी बढ़ता है।

क्यों खास है मथुरा, वृंदावन और काशी की होली? (Why is Holi of Mathura, Vrindavan and Kashi special?)
अब अगर होली की बात की जाए और मथुरा, वृंदावन तथा काशी का नाम ना आए तो फिर किस बात की होली? ये तीन शहर भारत के ऐसे प्रमुख शहर हैं जो अपने होली के त्यौहार के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। अगर होली के दिन आप न्यूज़ चैनल खोलकर बैठेंगे तो आपको हर न्यूज़ चैनल पर मथुरा, वृंदावन और काशी की होली देखने को मिलेगी। अब यह देखकर आपके दिमाग में कभी न कभी यह सवाल तो जरूर आया होगा कि आखिर क्यों इन शहरों में होली इतने धूमधाम से मनाई जाती है? तो इसका सीधा सा जवाब यह है कि मथुरा वृंदावन की होली इसलिए भी खास है क्योंकि होली की एक कहानी श्री कृष्ण से भी जुडी हुई है। यह कहानी श्रीकृष्ण के बचपन की है जब श्री कृष्ण जी अपनी यशोदा माता से बार-बार यह पूछा करते थे कि राधा उनसे ज्यादा गोरी क्यों है? तो यशोदा माता ने उन्हें एक बार कहा कि तुम जाकर राधा को रंग लगा दो तो फिर राधा भी तुम्हारे जैसी ही काली हो जाएगी। इसके बाद श्रीकृष्ण ने राधा रानी को पहली बार रंग लगाकर होली मनाया। इस दिन के बाद से ही रंगों वाली होली की प्रथाशुरू हो गई।

अद्भुत है काशी की मसान होली (Kashi’s Masan Holi is amazing)
वहीं काशी की होली इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि यहां की होली रंगों की नहीं बल्कि चिता के भस्मों की होती है। आप सभी यह जानते होंगे की काशी महादेव की भूमि है। जो कि स्वयं शमशान वासी भी कहलाते हैं और काशी में ही स्थित है एक ऐसा घाट जो अंतिम संस्कार के लिए जाना जाता है। जहां जाकर लोग मोक्ष को प्राप्त करते हैं । यह घाट है मणिकर्णिका घाट! काशी के इस घाट पर हर साल रंगभरी एकादशी के अगले दिन मसान होली मनाई जाती है, जो यह संदेश देती है कि मृत्यु मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा सत्य है और दुनिया का सबसे पवित्र स्थान शमशान है।

उम्मीद है होली पर यह ब्लॉग आप सभी को पसंद आया होगा और आपको इससे कुछ ना कुछ नई जानकारी अवश्य मिली होगी।









