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खुद को जानने का एक सुनहरा अवसर होता है सोलो ट्रैवलिंग

अगर आप किसी आम आदमी से पूछेंगे कि ट्रैवलिंग (travelling) उनके लिए क्या है? तो वह जवाब देंगे कि अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से थोड़ा सा ब्रेक (break) लेकर किसी नई जगह जाकर मौज मस्ती करना ट्रैवलिंग है। लेकिन यहीं सवाल अगर आप किसी ट्रैवलर (traveller) से पूछेंगे तो वो कहेंगे कि उनकी जिंदगी ही ट्रैवलिंग है।

भले हीं ट्रैवलिंग के ऊपर लोगों की राय अलग-अलग हो, लेकिन सभी के मन में ट्रैवलिंग के लिए उत्साह (excitement) एक जैसा ही होता है। और हो भी क्यों ना? तय बजट में किसी परफेक्ट ट्रैवल डेस्टिनेशन (Perfect travel destination) की खोज, दोस्तों और परिवार वालों की सहमति और महीनों की लंबी प्लानिंग (planning) के बाद कोई ट्रिप फाइनलाइज (finalize) होती है।

लेकिन कई बार लास्ट मोमेंट (Last Moment) पर साथ जाने वाले लोग, चाहे वो फ्रेंड हो या फैमिली मेंबर, किसी कारण से ट्रिप के लिए मना कर देते हैं। ऐसे में अक्सर उनलोगों की वजह से लोग अपना ट्रिप भी कैंसिल (cancel) कर देते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि बिना साथियों के ट्रिप को इंजॉय नहीं किया जा सकता है। कई बार सोलो ट्रैवलर्स (solo travellers) भी बहुत इंजॉय (enjoy) करते हैं। बस जरूरत होती है हमें थोड़ी सी समझदारी दिखाने की। इस ब्लॉग में हम आपको कुछ ऐसे टिप्स के बारे में बताएंगे जिन्हें फॉलो करके आप अकेले भी किसी ट्रिप का भरपूर मजा ले सकते हैं।

डेस्टिनेशन के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारियां जुटाएं (Do deep research about the destination) :

जब भी आप कहीं ट्रिप पर जाते हैं तो यह जरूरी हो जाता है कि उस जगह के बारे में छोटी से छोटी जानकारी भी आपके पास हो। सोलो ट्रैवलिंग (solo travelling) में तो इसकी बहुत ज्यादा जरूरत होती है। क्योंकि उस समय आपके पास आपकी मदद के लिए कोई पर्टनर (partner) नहीं होता है। कई बार ऐसा होता है कि हमें उस जगह के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है। ऐसे में हम उस जगह के लिए प्रॉपर (Proper) कपड़े और सामान लेकर नहीं जाते हैं। इस वजह से स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। जिससे आपके ट्रिप का मजा खराब हो सकता है। या फिर कई बार यह भी होता है कि लोग किसी जगह जाते हैं लेकिन उन्हें उस जगह के बारे में सारी जानकारियां नहीं होती हैं। ऐसे में वह आधा अधूरा घूम कर वहां से आ जाते हैं। ऐसे में ट्रिप तो पुरा हो जाता है। लेकिन कहीं ना कहीं यह मलाल रह जाता है कि, अरे यार,,,, वह जगह छूट गया!

कम से कम लगेज रखें साथ (Carry minimum luggage with you) :

वैसे तो लगेज (luggage) की समस्या सभी ट्रैवलर्स (travellers) को परेशान करती है। लेकिन सोलो ट्रैवलर्स के लिए यह बड़े चैलेंज (challange) की तरह होता है। क्योंकि ज्यादा लगेज होने पर उनकी सिक्योरिटी (security) के लिए भी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आपके पास जितना कम लगेज (minimum luggage) होगा, आप उतने ही बेफिक्र होकर इंजॉय कर पाएंगे। लेकिन पैकिंग करते वक़्त इस बात का ख्याल रखें कि मिनिमम एसेंशियल्स (minimum essentials) आपके पास जरूर हो। लगेज इतना भी कम नहीं रखना है कि, जिन चीजों की आपको जरूरत हो वह आपके साथ न हो।

खुद को समझने की कोशिश करें (Try to understand yourself) :

सोलो ट्रैवलिंग जितना चैलेंजिंग (challanging) है उतना हीं एक्साइटिंग (exciting) भी! क्योंकि इसमें आपको खुद के साथ टाइम स्पेंड करने का मौका मिलता है। जहां कोई आपको जज (judge) करने वाला नहीं होता है। इस समय आप अपनी मर्जी से घूमते हैं, अपने हिसाब से खाते हैं और अपने नजरिए से किसी चीज को समझने की कोशिश करते हैं। सोलो ट्रैवल ऐसा समय होता है जहां आप को खुद के साथ बिताने के लिए पर्याप्त समय मिलता है (enjoy your own company)। इस समय में आप अपने आप को बहुत ही अच्छे तरीके से समझ सकते हैं। सोलो ट्रैवलिंग में बहुत कुछ सीखने को मिलता है, ताकि आप अपने आप में सुधार करें और वह गलतियां फिर ना दोहराएं।

आजादी को करें महसूस (Feel the freedom ) :

जब भी बात सोलो ट्रैवलिंग की आती है, तो मन में ऐसे ख्याल आते हैं जैसे कि हर तरह की पाबंदी से दूर किसी नई जगह पर जाकर खुद के साथ एंजॉय करना। ऐसे में इस समय आप बाकी दुनिया की फिक्र छोड़ कर आजादी को महसूस करें। जिसकी तलाश कहीं ना कहीं हर किसी को होती है। अपनी हर तरह की ख्वाहिशों (live your dreams) को पूरा करने की कोशिश करें। इस समय आपको इस बात की बिल्कुल भी फिक्र करने की जरूरत नहीं होती है कि आसपास के लोग आपको क्या कहेंगे? क्योंकि आप नई जगह पर होंगे तो जो भी लोग आपको देखेंगे वह आपके लिए स्ट्रेंजर होंगे और आप उनके लिए। खुद की कंपनी को इंजॉय करें और अपनी फीलिंग्स को समझने की कोशिश करें। शोले ट्रैवलिंग में अपने इमोशन को बेहद अच्छे से एक्सप्लोर (explore your feelings) किया जा सकता है।

आत्मनिर्भर बने (Be Independent):

सोलो ट्रैवलिंग अपने आप में ही आत्मनिर्भरता का एक दूसरा नाम है। यह आपको खुद से ही सब कुछ मैनेज (manage everything) करना सिखाता है। ऐसे में आप अपने ट्रिप की सारी प्लानिंग खुद करें। कोशिश करें कि किसी स्ट्रेंजर (stranger) से मदद लेने की जरूरत ना हो। पहले से ही अपने होटल रूम कैब और बाकी चीजों की बुकिंग (pre booking) करवा के रखें। सोलो ट्रैवलिंग करते वक्त आपको जितना इंजॉय करना होता है, उतना ही ज्यादा अलर्ट (Alert) रहना भी जरूरी होता है, इस बात को समझे।

By Five Colors Of Travel

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