भारत में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और वैश्विक मानकों तक पहुंचाने की दिशा में हाल ही में एक महत्वपूर्ण खबर आई है। UN Tourism (यूएन टूरिज़्म) ने अपने “Best Tourism Villages 2025” कार्यक्रम में दुनिया भर के 52 गावों को सम्मानित किया, लेकिन इस सूची में भारत का एक भी गांव शामिल नहीं हुआ। यह पहल ग्रामीण पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संसाधनों, सामाजिक-पर्यावरणीय स्थिरता तथा स्थानीय रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई है। इस वर्ष कुल 270 से अधिक आवेदनों में से 52 गांवों को चुना गया है और साथ ही 20 और गावों को “अपग्रेड प्रोग्राम” में रखा गया है। लेकिन बड़ी बात यह है कि इस सम्मान-सूची में भारत का नाम कहीं नहीं है। यह न केवल एक संकेत है बल्कि खुले रूप से एक चुनौती भी है, इससे हमारी ग्रामीण पर्यटन नीतियों, बुनियादी ढांचे और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयारियों पर सवाल उठता है।

क्या है वजह?
यूएन टूरिज़्म द्वारा चयन के लिए जिन नौ प्रमुख मानदंडों को रखा गया है उनमें शामिल हैं- सांस्कृतिक और प्राकृतिक संसाधन, स्थानीय सांस्कृतिक संसाधनों का संरक्षण एवं प्रचार, आर्थिक स्थिरता, सामाजिक-पर्यावरणीय स्थिरता, बुनियादी ढांचा एवं कनेक्टिविटी, पर्यटन विकास एवं मूल्य-शृंखला का एकीकरण, शासन-प्राथमिकता और स्वास्थ्य-सुरक्षा। भारत के ग्रामीण-पर्यटन स्टेकहोल्डर्स को अब यह विचार करना होगा कि किन पहलुओं में हम पिछड़ रहे हैं। क्या हमारे गांव पर्यटन मॉडल पर्याप्त रूप से तैयार नहीं हैं? क्या जागरूकता दस्तावेज़-प्रस्तुति, स्थानीय समुदाय-सहभागिता और अंतरराष्ट्रीय मानकों की पूर्ति का अभाव रहा है? यह सवाल लाजमी हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह न सिर्फ सम्मान-विवरण है बल्कि एक मैसेज है कि ग्रामीण पर्यटन में हमारी क्षमता और तैयारी कहां तक हैं? जब कोई गांव विश्व मानांकन का हिस्सा नहीं बनता, तो यह दर्शाता है- (“Best Tourism Villages 2025”)

- हम वैश्विक स्तर पर अपने गांवों का प्रचार कैसे और किस तरह कर रहे हैं?
- स्थानीय समुदायों को पर्यटन माध्यम से आर्थिक लाभ क्या मिल रहा है?
- बुनियादी ढांचा जैसे सड़क, बिजली, इंटरनेट, स्वच्छता और कनेक्टिविटी कितनी प्रभावी है?
- सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का संरक्षण किस हद तक हो रहा है? आदि!

इसके अलावा आगे का रास्ता क्या है?
जानकारी के अनुसार, अगले संस्करण के लिए आवेदन-प्रक्रिया 2026 की शुरुआत में खुलने वाली है, जो भारत के गांवों के लिए एक नया अवसर है।
इस लिए हमें इस और ध्यान केंद्रित करना जरूरी है-

- राज्यों में सक्रिय ग्रामीण-पर्यटन परियोजनाओं को बेहतर बनाना होगा।
- स्थानीय समुदायों को पर्यटन-मंच में शामिल करना होगा ताकि उनकी संस्कृति और भाषा-परम्पराएं जीवित रहें।
- बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, बिजली, पानी, सफाई, नेटवर्क को वैश्विक मानक तक पहुंचाना होगा।
- दस्तावेज़ीकरण, अंग्रेजी एवं मल्टी-लिंगुअल प्रचार सामग्री तैयार करना होगा ताकि ग्रामीण स्थल अंतरराष्ट्रीय-पर्यटक को आकर्षित कर सकें।
- प्रदेश-केंद्र सरकार को इसके लिए नीति-ढांचा तैयार करना होगा।

जब विश्व स्तर पर “ग्राम-पर्यटन” का मंच बनता है, भारत का एक भी गांव सूची में न होना हमें न सिर्फ हैरानी देता है, बल्कि जगाने वाला संदेश भी भेजता है हम कितने पीछे हैं और कितना सुधार करना शेष है। अगले मौके के लिए भारत की ग्रामीण-पर्यटन योजनाओं को तुरंत, सशक्त और दस्तावेजी रूप से तैयार होना होगा। यह खबर मुख्यमंत्री, पर्यटन विभाग, मीडिया-हाउस, और हर पर्यटन-प्रेमी तक पहुंचनी चाहिए ताकि हम भारत के ग्रामीण-पर्यटन को विश्व-मानक तक ले जा सकें। नहीं तो यह साबित होगा कि हम समय के पंखे में बैठने के बजाय सिर्फ देख रहे हैं। उम्मीद है कि आने-वाले वर्षों में भारत के गांवों का नाम इस ग्लोबल सूची में आएगा और हम गर्व से कह सकेंगे देखो हमारा गांव, दुनिया में बना बेस्ट टूरिज़्म विलेज!
