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अजमेर शरीफ दरगाह- जानिए क्या है ख़ास?

अजमेर शरीफ दरगाह :

जब हम भारतीय संस्कृति की बात करते हैं तो भारत एक ऐसा देश है जहां, हर तरह के रहन-सहन खानपान और बोलचाल वाले लोग एक साथ मिलजुल कर रहते हैं। भारतीय संस्कृति की इसी विशालता का एक बेहतरीन उदाहरण है अजमेर शरीफ दरगाह! अजमेर शरीफ दरगाह जिसे ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह शरीफ के नाम से भी जाना जाता है, राजस्थान के अजमेर में स्थित एक ऐसा दरगाह है, जो संतों सद्गुरुओं और अराधकों की भक्ति और श्रद्धा का केंद्र है। अजमेर शरीफ का दरगाह एक ऐतिहासिक स्थल है। जो सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती से जुड़ा हुआ है। अजमेर शरीफ दरगाह को मुस्लिम धर्म का पवित्रतम स्थान माना जाता है। आने वाले लोग अपनी इच्छाएं मनोकामनाएं और संकल्प ख्वाजा साहब के समक्ष रखते हैं और उनकी दुआओं के पूरी होने की कामना करते हैं। अजमेर शरीफ के दरगाह में माथा टेकने के लिए भारत अन्य राज्यों के पर्यटकों के अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी पर्यटक घूमने आते हैं।

अजमेर शरीफ दरगाह की कव्वाली परंपरा (Qawwali ritual in Ajmer Sharif Dargah) :


जब बात अजमेर शरीफ दरगाह की आती है तो इसके साथ हीं संबंधित एक खास परंपरा हमारे मन को छूने लगता है, वह है कव्वाली। कव्वाली यानी सूफी संगीत अजमेर शरीफ दरगाह में बड़े ही उत्साह से आयोजित की जाती है और लोग इसे बहुत ही आनंद और उत्साह के साथ सुनते हैं। कव्वाली आकर्षक रूप में अभिव्यक्ति का एक संगीत माध्यम है। इसमें उसूल-ए-कव्वाली धून और ताल की विवेचना के साथ-साथ स्वरों का भी उपयोग किया जाता है। कव्वाली संगीत समर्पण और भक्ति का मिश्रण है। जो श्रद्धालुओं के भावनाओं को व्यक्त करने का काम करता है।

अजमेर शरीफ में सूफी उर्स महोत्सव(Urs Festival in Ajmer Sharif) :


अजमेर शरीफ दरगाह भारत के प्रमुख सूफी धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां पर हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह स्थित है, जो सूफी धर्म की एक प्रमुख प्रतिष्ठा हैं। जिनकी याद में हर साल उर्स महोत्सव आयोजित किया जाता है। यह एक महान सूफी महोत्सव है। जो ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की पुण्यतिथि पर मनाया जाता है। इस पर्व के दौरान हजरत ख्वाजा की दरगाह पर लाखों श्रद्धालु और पर्यटक इकट्ठा होते हैं। ताकि वह अपने उन्नति के लिए ध्यान और आराधना कर सके। यह पर्व संगीत नृत्य और धार्मिक कार्यक्रमों का एक साझा महोत्सव है। जहां भक्ति समर्पण और सद्गुरु की दुआ में सभी एकत्र होते हैं। उर्स के दौरान दरगाह में सूफी कव्वाली गायन का भी आयोजन किया जाता है। जो पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र होता है।

अजमेर शरीफ का दरगाह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि का आध्यात्मिक स्थल भी है। जो लाखों लोगों के दिलों में बसा हुआ है। यह बेहतरीन इतिहास, आध्यात्मिक महत्व और संस्कृति का एक अद्भुत समन्वय है। यह दरगाह लोगों के दिलों में चिश्ती साहब के सीखों को आज भी जिंदा रखे हुए है। यहां जाकर आपको मोहब्बत और एकता की एक अलग ही झलक देखने को मिलेगी।

अजमेर शरीफ दरगाह आने का सबसे बेहतरीन समय (Best time to visit Ajmer Sharif Dargah) :


अगर आप अजमेर शरीफ दरगाह के दर्शन के लिए इच्छुक हैं और वहां किसी फेस्टिवल में भी शामिल होना चाहते हैं तो उर्स महोत्सव के समय वहां जाना आपके लिए सबसे बेहतरीन ऑप्शन है। यह महोत्सव हर साल हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की पुण्यतिथि पर आयोजित होती है और इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है। इसीलिए यहां जाने से पहले आप एक बार उसकी तिथि के बारे में पता कर ले। अजमेर शरीफ की दरगाह का ट्रिप प्लान करने के दौरान मौसम के अवस्था का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है। यूं तो यहां हर महीने पर्यटक घूमने आते हैं, लेकिन सर्दियों में यहां जाने से आपको बचना चाहिए। क्योंकि सर्दियों में अजमेर में काफी ठंड पड़ती है।

कैसे पहुंचे?(How to reach?)

अजमेर शरीफ जाने के लिए आप अगर हवाई मार्ग से सफर करना चाहते हैं तो, जयपुर हवाई अड्डा के लिए प्लेन का टिकट बुक कर सकते हैं। जयपुर पहुंचने के बाद आपको जयपुर से अजमेर के लिए कई सारी बसें मिल जाएंगी। अगर अपनी गाड़ी से अजमेर पहुंचना चाहते हैं तो, अजमेर सड़क मार्ग से भी देश के अन्य शहरों से जुड़ा हुआ है। आप अपनी गाड़ी से भी आसानी से अजमेर पहुंचे सकते हैं।

By Five Colors Of Travel

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