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जानिए भारत की सबसे बड़ी और प्रसिद्ध दरगाहों के बारे में

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(India’s most famous mosque) “रमजान का महीना हो और ईद आने वाली हो तो जिस जगह आपको सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिलेगी वह है मस्जिद! रमजान के महीने में नमाज अदा करने के लिए बहुत अधिक मात्रा में लोग मस्जिदों की तरफ रुख़ करते हैं, और करे भी क्यों ना? मुस्लिम समुदाय के लिए यह त्यौहार उनका सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार जो होता है। लोग बड़े ही जतन से महीने भर रोजा़ रखने के बाद साफ और सच्चे मन से अल्लाह की इबादत के लिए दरगाह और मस्जिद जाते हैं।” ईद एक महत्वपूर्ण इस्लामी त्योहार है जो मुसलमान समुदाय में मनाया जाता है। यह प्रत्येक साल मुस्लिम कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है और यह ईद-उल-फ़ित्र और ईद-उल-अज़हा के रूप में दो भिन्न प्रकार की होती है। ईद का महत्व इस्लाम धर्म में अल्लाह की कृपा, धार्मिकता, सामाजिक एकता और धार्मिक समर्थन को अवतरित करता है।आज के ब्लॉग में हम आपको बताएँगे भारत की सबसे प्रसिद्ध मस्जिदों (India’s most famous mosque) के बारे में। जामा मस्जिद दिल्ली अब भारत के सबसे प्रसिद्ध दरगाह की बात हो और भारत के सबसे प्रसिद्ध शहर का नाम ना आए तो यह तो नाइंसाफी होगी। जी हाँ, भारत की सबसे प्रसिद्ध दरगाह भारत के सबसे प्रसिद्ध शहर दिल्ली में हीं स्थित है, जिसे हम जामा मस्जिद के नाम से जानते हैं।जामा मस्जिद भारत की एक ऐसी मस्जिद है जिसे शायद ही कोई न जानता हो। लाल किला के सामने बनी यह मस्जिद देश की सबसे प्रसिद्ध मस्जिद मानी जाती है। जामा मस्जिद अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक और वास्तुकला के कारण खास है। यह दिल्ली की सबसे बड़ी मस्जिद है और मुग़ल वास्तुकला का अद्वितीय उदाहरण है। इसे मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने 17वीं सदी में 1656 ईसवी में बनवाया था। इसकी बड़ी शानदार मीनारें, व्यापक सजावट, और विशाल आंगन उसे विशेष बनाती हैं। जामा मस्जिद में ईद के दिन लाखों लोग एक साथ ईद की नमाज अदा करने के लिए इकट्ठा होते हैं। हजरत निजामुद्दीन की दरगाह हजरत निजामुद्दीन की दरगाह एक महत्वपूर्ण सूफी संत के समाधि स्थल के रूप में जानी जाती है। यह दिल्ली में स्थित है और सूफी संत हजरत निजामुद्दीन के नाम पर नामित है, जिन्होंने 14वीं सदी में यहां बहुत से सामाजिक कार्य किए थे। हजरत निजामुद्दीन की दरगाह की सबसे खास बात यह है कि यहां के माहौल में एक अपनेपन का भाव है। यहां के चारों और की रौनक, शांति और भक्ति का वातावरण यहाँ आने वाले आगंतुकों को आकर्षित करता है। अगर बात करें हजरत निजामुद्दीन औलिया के बारे में तो वह भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण सूफी संतों में से एक थे। उनका असली नाम शाहबुद्दीन मोहम्मद था और वे दिल्ली में 13वीं और 14वीं सदी के बीच रहा करते थे। उन्होंने विशेष रूप से सूफी पंथ को फैलाने और धार्मिक समरसता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी दरगाह पर आज भी लाखों श्रद्धालु आते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। अजमेर शरीफ दरगाह जब हम भारतीय संस्कृति की बात करते हैं तो भारत एक ऐसा देश है जहां हर तरह के रहन-सहन खानपान और बोलचाल वाले लोग एक साथ मिलजुल कर रहते हैं। भारतीय संस्कृति की इसी विशालता का एक बेहतरीन उदाहरण है अजमेर शरीफ दरगाह! अजमेर शरीफ दरगाह जिसे ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह शरीफ के नाम से भी जाना जाता है, राजस्थान के अजमेर में स्थित एक ऐसी दरगाह है, जो संतों सद्गुरुओं और अराधकों की भक्ति और श्रद्धा का केंद्र है। अजमेर शरीफ की दरगाह एक ऐतिहासिक स्थल है। जो सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती से जुड़ा हुआ है। अजमेर शरीफ दरगाह को मुस्लिम धर्म का पवित्रतम स्थान माना जाता है। यहाँ आने वाले लोग अपनी इच्छाएं मनोकामनाएं और संकल्प ख्वाजा साहब के समक्ष रखते हैं और उनकी दुआओं के पूरी होने की कामना करते हैं। अजमेर शरीफ के दरगाह में माथा टेकने के लिए भारत अन्य राज्यों के पर्यटकों के अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी पर्यटक घूमने आते हैं। सलीम चिश्ती की दरगाह फतेहपुर सीकरी शहर में सलीम चिश्ती की दरगाह भी है। यहां सिर्फ देश ही नहीं बल्कि दुनिया के कोने-कोने से लोग मन्नत मांगने आते हैं। जामा मस्जिद सफेद संगमरमर से बनी है जहां आकर आपको अलग शांति महसूस होगी। फतेहपुर सीकरी में सलीम चिश्ती की दरगाह का इतिहास गौरतलब है। यह दरगाह मुग़ल बादशाह अकबर के पुत्र सलीम जिन्हें बाद में जहाँगीर के नाम से जाना गया, के समय में बनवाई गई थी। यह दरगाह उनकी मासूम बेटी के मृत बचपन की यादों को समर्पित थी। इसे अकबर ने अपने बेटी के नाम पर “मारियम-उल-वश्त” का नाम दिया था। आज यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और लोग यहाँ आकर मन्नतें माँगते हैं। हाजी अली दरगाह, मुंबई हाजी अली दरगाह मुंबई के महिम परिसर में स्थित है और मुस्लिम समुदाय के लोग यहाँ नमाज अदा करने आते हैं। हाजी अली दरगाह की निर्माण तारीखों के मामले में कुछ अनिश्चितताएं हैं, लेकिन इसे इस्लामिक धर्मावलम्बियों के प्रमुख स्थलों में से एक के रूप में जाना जाता है। इस मस्जिद से बॉलीवुड अभिनेता धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन जैसे कई फ़िल्मी सितारों का संबंध रहा है। हाजी अली दरगाह के पास मस्जिद और एक बड़ी मस्जिद है। यहाँ एक मुख्य महल भी है जिसमें विशाल अधिवेशन हॉल, श्रद्धालुओं के लिए आरामदायक बैठकरी, और प्रसाद की दुकानें शामिल हैं। दरगाह के चारों ओर रखी गई छतें और जालियां उसे भव्य बनाती हैं। हाजी अली दरगाह एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है और यहाँ हर वर्ष बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ आती है। खासतौर पर जुम्मे के दिन और ईद के मौके पर यहाँ बहुत अधिक भीड़ रहती है। खास करके मुंबई में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए यह सबसे प्रसिद्ध इबादतगाह है।

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अजमेर शरीफ़ दरगाह

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अजमेर शरीफ़ दरगाह – जहाँ हर किसी की मुराद होती है पूरी  By Pardeep Kumar राजस्थान यात्रा के अपने अगले पड़ाव में, हम आपको ले कर आये हैं एक बेहद धार्मिक स्थान अजमेर शरीफ दरगाह। अजमेर शहर के सबसे अधिक देखे जाने वाले स्थानों में से एक, अजमेर शरीफ दरगाह एक सूफी दरगाह है। जिसे राजस्थान के सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है। अजमेर शरीफ, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का भव्य एवं बेहद खूबसूरत मकबरा है। इसे ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह के नाम से भी जाना जाता है। आपको बता दें कि ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती एक प्रसिद्ध सूफी संत होने के साथ-साथ इस्लामिक विद्धान और दार्शनिक भी थे। ऐसा माना जाता है कि अजमेर दरगाह पर अगर आप सच्चे मन से किसी भी चीज के लिए प्रार्थना करते हैं, इबादत करते हैं तो आपकी प्रार्थना अवश्य ही पूरी होती है। अजमेर शरीफ़ कैसे पहुंचे राजस्थान का अजमेर शहर देश के लगभग सभी प्रसिद्ध शहरों से रेल, सड़क या हवाई मार्ग से जुड़ा हुआ है। अगर आप दिल्ली से अपने पर्सनल व्हीकल से आ रहे हैं तो आरामदायक नेशनल हाईवे का प्रयोग करते हुए यहाँ बेहद आसानी से पहुँच सकते हैं। रास्ते में आपको बहुत सारे पांच सितारा टाइप के ढाबे जलपान के लिए मिल जायेंगे। जयपुर हवाई अड्डा अजमेर शहर के सबसे नजदीक है। हवाई अड्डे से, आप या तो टैक्सी किराए पर ले सकते हैं या अजमेर शरीफ दरगाह तक पहुंचने के लिए बस से भी जा सकते हैं। watch Ajmer sharif Vlog with english subtitles अगर आप यहाँ ट्रैन से आना चाहते हैं तो अजमेर के लिए लगभग सभी बड़े शहरों से आपको नियमित ट्रेनें मिल जाएँगी,  स्टेशन से आप कैब बुक कर सकते हैं या अजमेर शरीफ दरगाह तक पहुंचने के लिए स्थानीय बस ले सकते हैं। हालांकि कैब किराए पर लेना एक विकल्प है, लेकिन दिल्ली, जयपुर, जोधपुर और जैसलमेर से अजमेर के लिए सीधी बसें चलती हैं। अजमेर दरगाह तक पहुँचने के लिए आप बस स्टॉप से टैक्सी या अन्य स्थानीय साधन ले सकते हैं। यहां साल के किसी भी महीने में आ सकते हैं दिल्ली से लगभग 400 किलोमीटर और अजमेर बस अड्डे से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह दरगाह भक्तों के आकर्षण का महत्वपूर्ण केंद्र है। देश विदेश से लोग यहां अपनी मनोकामना पूरी करने आते हैं दिन-रात यहां भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है। अगर आपके मन में श्रद्धा भाव है तो आप यहां साल के किसी भी महीने में आ सकते हैं। सर्दियों के दौरान यहां गेट सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक खुले रहते हैं और गर्मियों के दौरान के सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक। आप किसी भी समय यहां पर आ सकते हैं। पार्किंग आपको बता दें कि अजमेर शरीफ दरगाह से लगभग एक किलोमीटर पहले ही आपको अपना वाहन किसी उचित पार्किंग स्थल पर छोड़कर दरगाह तक पैदल ही जाना होगा, तंग गलियों में वाहन ले जाने की कोई सुविधा नहीं है। कार पार्किंग को लेकर आप थोड़ा ध्यान रखें, क्योंकि दरगाह से एक डेढ़ किलोमीटर पहले ही आपको बहुत से पार्किंग स्लॉट मिलेंगे, जो तकरीबन सौ रुपए में आपकी कार अपने प्लॉट या दुकान के सामने पार्क करवा देंगे। ध्यान रहें कार में कोई भी कीमती सामान न छोड़ें। क्योंकि अधिकतर पार्किंग वाले किसी भी तरह की स्लिप नहीं देंगे। हाँ, आप यहाँ पैदल चलने के अलावा रिक्शा से भी जा सकते हैं, यहां की सैंकड़ों साल पुरानी छोटी-छोटी गलियों से निकलकर आपको सामने की ओर दरगाह का गेट दिखाई देगा। दरगाह जाने के रास्‍ते वैसे दरगाह जाने के लिए चारों और दरवाजे हैं लेकिन रूटीन में दो ही दरवाजे खुले रहते हैं बाकी दरवाजे विशेष मौकों और त्यौहारों पर ही खुलते हैं। दो दरवाजे – एक गेट नंबर 4 और दूसरा गेट नंबर 2, गेट नंबर 2 से दरगाह में एंट्री थोड़ी आसान है क्‍योंकि गेट नंबर 2 तक लोकल रिक्शा वगैरह जाते हैं और इसलिए यहां पर भीड़ नहीं लगती। वहीं अगर आप गेट नंबर 4 पर आपको भीड़ भी मिलेगी और काफी चलना भी होगा। वैसे आमतौर पर यहाँ भीड़ फेस्टिवल सीजन के दौरान ज्यादा होती है। गेट नंबर 4 पर दरगाह का मुख्‍य प्रवेश द्वार है। आप अपनी पार्किंग की सुविधा के हिसाब से किसी भी गेट से एंट्री कर सकते हैं। इन संकरी गलियों से गुजरते हुए आपको गुलाब के फूलों, मनमोहक इत्र,  अजमेर शरीफ की स्पेशल मिठाई और अगरबत्ती की दुकान दिखाई देंगी। आप यहां से दरगाह के लिए चादर, फूल या अपने अनुसार कोई भी चढ़ाने की वस्तु ले सकते हैं। याद रहे कि प्रवेश करते वक्त आप अपने जूते-चप्पल दरगाह के गेट के बाहर ही उतार कर जाए। अजमेर शरीफ दरगाह में कैमरा इत्यादि चीजें ले जाने की इजाजत नहीं है इसलिए आप अपना कीमती सामान किसी सुरक्षित स्थान पर छोड़कर जाएं। गेट में प्रवेश करते ही आपकी यात्रा शुरू हो जाती है। जैसे ही आप दरगाह में प्रवेश करेंगे मुगल सम्राट हुमायूं द्वारा निर्मित  सुंदर नक्काशी वाले विशाल दरवाजों की एक श्रृंखला आपको दिखाई देगी। ये सभी दरवाजे शुद्ध चांदी से बने हैं, और इन पर बेहतरीन नक्काशी देखने लायक है। एक विशाल गेट से होते हुए आप एक बड़े से प्रांगण में पहुंचेंगे। जहाँ आपको ख़वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के मकबरे की एक झलक दिखाई देगी, जो संगमरमर से बना है। दरगाह के शीर्ष पर, सोने की परत चढ़ी हुई है, जो शुद्ध चांदी और संगमरमर से बनी रेलिंग से सुरक्षित है। दरगाह के प्रांगण के अंदर पहुँचते ही आपको असीम सुकून का अहसास होता है जो आपको और कहीं मिलना दुर्लभ है। यहीं प्रांगण के बीच में स्थित अजमेर शरीफ दरगाह के चारों ओर बहुत सारे लोग इबादत करते दिखाई देंगे। यहाँ सिर्फ इस्लाम धर्म को मानने वाले ही नहीं बल्कि  सभी धर्मों के लोग दूर-दूर से अपनी-अपनी मुरादें लेकर आते हैं। इतना ही नहीं मुराद पूरी होने पर ख्वाजा का शुक्राना अदा करने भी आते हैं। यहाँ चादर और फूलों की टोकरी चढ़ाते हैं। आम लोगों के अलावा अक्सर बॉलीवुड स्टार भी अपनी फिल्मों की सफलता के लिए यहाँ दुआ मांगने आते हैं। यहाँ आपको बहुत सारे श्रद्धालु धागा बांध कर मन्नत मांगते हुए