अजमेर शरीफ़ दरगाह
अजमेर शरीफ़ दरगाह - जहाँ हर किसी की मुराद होती है पूरी
By Pardeep Kumar
राजस्थान यात्रा के अपने अगले पड़ाव में, हम आपको ले कर आये हैं एक बेहद धार्मिक स्थान अजमेर शरीफ दरगाह।
अजमेर शहर के सबसे अधिक देखे जाने वाले स्थानों में से एक, अजमेर शरीफ दरगाह एक सूफी दरगाह है। जिसे राजस्थान के सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है। अजमेर शरीफ, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का भव्य एवं बेहद खूबसूरत मकबरा है। इसे ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह के नाम से भी जाना जाता है। आपको बता दें कि ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती एक प्रसिद्ध सूफी संत होने के साथ-साथ इस्लामिक विद्धान और दार्शनिक भी थे। ऐसा माना जाता है कि अजमेर दरगाह पर अगर आप सच्चे मन से किसी भी चीज के लिए प्रार्थना करते हैं, इबादत करते हैं तो आपकी प्रार्थना अवश्य ही पूरी होती है।

अजमेर शरीफ़ कैसे पहुंचे
राजस्थान का अजमेर शहर देश के लगभग सभी प्रसिद्ध शहरों से रेल, सड़क या हवाई मार्ग से जुड़ा हुआ है। अगर आप दिल्ली से अपने पर्सनल व्हीकल से आ रहे हैं तो आरामदायक नेशनल हाईवे का प्रयोग करते हुए यहाँ बेहद आसानी से पहुँच सकते हैं।
रास्ते में आपको बहुत सारे पांच सितारा टाइप के ढाबे जलपान के लिए मिल जायेंगे। जयपुर हवाई अड्डा अजमेर शहर के सबसे नजदीक है। हवाई अड्डे से, आप या तो टैक्सी किराए पर ले सकते हैं या अजमेर शरीफ दरगाह तक पहुंचने के लिए बस से भी जा सकते हैं।
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अगर आप यहाँ ट्रैन से आना चाहते हैं तो अजमेर के लिए लगभग सभी बड़े शहरों से आपको नियमित ट्रेनें मिल जाएँगी, स्टेशन से आप कैब बुक कर सकते हैं या अजमेर शरीफ दरगाह तक पहुंचने के लिए स्थानीय बस ले सकते हैं।
हालांकि कैब किराए पर लेना एक विकल्प है, लेकिन दिल्ली, जयपुर, जोधपुर और जैसलमेर से अजमेर के लिए सीधी बसें चलती हैं। अजमेर दरगाह तक पहुँचने के लिए आप बस स्टॉप से टैक्सी या अन्य स्थानीय साधन ले सकते हैं।
यहां साल के किसी भी महीने में आ सकते हैं
दिल्ली से लगभग 400 किलोमीटर और अजमेर बस अड्डे से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह दरगाह भक्तों के आकर्षण का महत्वपूर्ण केंद्र है। देश विदेश से लोग यहां अपनी मनोकामना पूरी करने आते हैं दिन-रात यहां भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है। अगर आपके मन में श्रद्धा भाव है तो आप यहां साल के किसी भी महीने में आ सकते हैं। सर्दियों के दौरान यहां गेट सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक खुले रहते हैं और गर्मियों के दौरान के सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक। आप किसी भी समय यहां पर आ सकते हैं।

पार्किंग
आपको बता दें कि अजमेर शरीफ दरगाह से लगभग एक किलोमीटर पहले ही आपको अपना वाहन किसी उचित पार्किंग स्थल पर छोड़कर दरगाह तक पैदल ही जाना होगा, तंग गलियों में वाहन ले जाने की कोई सुविधा नहीं है। कार पार्किंग को लेकर आप थोड़ा ध्यान रखें, क्योंकि दरगाह से एक डेढ़ किलोमीटर पहले ही आपको बहुत से पार्किंग स्लॉट मिलेंगे, जो तकरीबन सौ रुपए में आपकी कार अपने प्लॉट या दुकान के सामने पार्क करवा देंगे। ध्यान रहें कार में कोई भी कीमती सामान न छोड़ें। क्योंकि अधिकतर पार्किंग वाले किसी भी तरह की स्लिप नहीं देंगे। हाँ, आप यहाँ पैदल चलने के अलावा रिक्शा से भी जा सकते हैं, यहां की सैंकड़ों साल पुरानी छोटी-छोटी गलियों से निकलकर आपको सामने की ओर दरगाह का गेट दिखाई देगा।

दरगाह जाने के रास्ते
वैसे दरगाह जाने के लिए चारों और दरवाजे हैं लेकिन रूटीन में दो ही दरवाजे खुले रहते हैं बाकी दरवाजे विशेष मौकों और त्यौहारों पर ही खुलते हैं। दो दरवाजे – एक गेट नंबर 4 और दूसरा गेट नंबर 2, गेट नंबर 2 से दरगाह में एंट्री थोड़ी आसान है क्योंकि गेट नंबर 2 तक लोकल रिक्शा वगैरह जाते हैं और इसलिए यहां पर भीड़ नहीं लगती। वहीं अगर आप गेट नंबर 4 पर आपको भीड़ भी मिलेगी और काफी चलना भी होगा। वैसे आमतौर पर यहाँ भीड़ फेस्टिवल सीजन के दौरान ज्यादा होती है। गेट नंबर 4 पर दरगाह का मुख्य प्रवेश द्वार है। आप अपनी पार्किंग की सुविधा के हिसाब से किसी भी गेट से एंट्री कर सकते हैं।

इन संकरी गलियों से गुजरते हुए आपको गुलाब के फूलों, मनमोहक इत्र, अजमेर शरीफ की स्पेशल मिठाई और अगरबत्ती की दुकान दिखाई देंगी। आप यहां से दरगाह के लिए चादर, फूल या अपने अनुसार कोई भी चढ़ाने की वस्तु ले सकते हैं।

याद रहे कि प्रवेश करते वक्त आप अपने जूते-चप्पल दरगाह के गेट के बाहर ही उतार कर जाए। अजमेर शरीफ दरगाह में कैमरा इत्यादि चीजें ले जाने की इजाजत नहीं है इसलिए आप अपना कीमती सामान किसी सुरक्षित स्थान पर छोड़कर जाएं।


गेट में प्रवेश करते ही आपकी यात्रा शुरू हो जाती है। जैसे ही आप दरगाह में प्रवेश करेंगे मुगल सम्राट हुमायूं द्वारा निर्मित सुंदर नक्काशी वाले विशाल दरवाजों की एक श्रृंखला आपको दिखाई देगी। ये सभी दरवाजे शुद्ध चांदी से बने हैं, और इन पर बेहतरीन नक्काशी देखने लायक है। एक विशाल गेट से होते हुए आप एक बड़े से प्रांगण में पहुंचेंगे। जहाँ आपको ख़वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के मकबरे की एक झलक दिखाई देगी, जो संगमरमर से बना है। दरगाह के शीर्ष पर, सोने की परत चढ़ी हुई है, जो शुद्ध चांदी और संगमरमर से बनी रेलिंग से सुरक्षित है।

दरगाह के प्रांगण के अंदर पहुँचते ही आपको असीम सुकून का अहसास होता है जो आपको और कहीं मिलना दुर्लभ है। यहीं प्रांगण के बीच में स्थित अजमेर शरीफ दरगाह के चारों ओर बहुत सारे लोग इबादत करते दिखाई देंगे।


यहाँ सिर्फ इस्लाम धर्म को मानने वाले ही नहीं बल्कि सभी धर्मों के लोग दूर-दूर से अपनी-अपनी मुरादें लेकर आते हैं। इतना ही नहीं मुराद पूरी होने पर ख्वाजा का शुक्राना अदा करने भी आते हैं। यहाँ चादर और फूलों की टोकरी चढ़ाते हैं। आम लोगों के अलावा अक्सर बॉलीवुड स्टार भी अपनी फिल्मों की सफलता के लिए यहाँ दुआ मांगने आते हैं।


यहाँ आपको बहुत सारे श्रद्धालु धागा बांध कर मन्नत मांगते हुए दिखाई देंगे। कहते हैं यहाँ धागा बांध कर मन्नत मांगने से आपकी मुराद अवश्य पूरी होती है।
मुगल बादशाह अकबर की सबसे पसंदीदा जगह
बताते हैं मुगल बादशाह अकबर के लिए यह दरगाह बरसों तक सबसे पसंदीदा जगह थी। वह बेटे की ख्वाहिश पूरी होने पर सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर यहां आया था। अकबर ने दरगाह पर मन्नत मांगी थी कि अगर मेरे घर बेटे का जन्म हुआ तो मैं आगरा से अजमेर पैदल चल कर दरगाह पर आऊंगा, आखिर ईश्वर ने अकबर की सुन ली और उसके घर जहांगीर का जन्म हुआ। जहांगीर के जन्म के बाद अकबर 1570 में पैदल चलकर अजमेर गया और वहां कई दिन बिताए। कहा जाता है कि अकबर आगरा से चार सौ किलोमीटर से भी ज्यादा पैदल चलकर इस दरगाह तक पहुंचा था।
अजमेर शरीफ की दरगाह का इतिहास
इतिहासकारों की माने तो खिलज़ी वंश के सुलतान गयासुद्दीन खिलजी ने लगभग 1465 में अजमेर शरीफ की दरगाह का निर्माण करवाया था। बाद में मुगल शासक हुंमायूं, अकबर, शाहजहां और जहांगीर ने इस दरगाह का जमकर विकास करवाया।

अजमेर शरीफ दरगाह का दौरा करते समय आपको कुछ प्रसिद्ध इमारतें जिसमें बुलंद दरवाज़ा, निज़ाम गेट, महफ़िल खाना , बेग़मी दालान, जन्नती दरवाज़ा मिलेंगी। इन सभी इमारतों का निर्माण भारत के विभिन्न शासकों के द्वारा करवाया गया।
इस दरगाह के अंदर दो बड़े-बड़े कढ़ाहे रखे गए हैं, चितौड़गढ़ से युद्ध जीतने के बाद मुगल सम्राट अकबर ने बड़े कढ़ाहे को दान किया था, जबकि जहांगीर द्धारा छोटा कढाहा भेंट किया गया था।
अजमेर शरीफ के अंदर हॉल महफिलखाना में सूफी गायकों के द्धारा रोजाना नमाज के बाद बेहद खूबसूरत कव्वाली गाईं जाती हैं, जिसका यहां आने वाले भक्त लुत्फ़ उठा सकते हैं। इसके अलावा ख्वाजा गरीब नवाज की इस दरगाह में ऑलिया मस्जिद, सनडली मस्जिद, बीबी हाफिज जमाल की मजार समेत कुछ अन्य स्मारक भी बने हुए हैं।

दरगाह के अंदर शाह जहानी मस्जिद मुगल वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है। इसके गुंबद में अल्ला के 99 पवित्र नामों को 33 खूबसूरत छंदों में लिखा गया है। अजमेर शरीफ दरगाह के अंदर बनी हुई अकबर मस्जिद अकबर ने तब बनवाई थी जब जहाँगीर का जन्म हुआ था आज यहाँ मुस्लिम धर्म के बच्चों को कुरान की तामिल प्रदान की जाती है। आपको यहाँ प्रांगण में बहुत से लोग नमाज़ पढ़ते हुए दिखाई देंगे।






