उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित नौकुचियाताल, जिसे ‘नौ कोनों वाली झील’ भी कहा जाता है, प्रकृति, अध्यात्म और वैज्ञानिक जिज्ञासा का एक अनूठा संगम है। समुद्र तल से 1220 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह झील न केवल अपनी मनोरम सुंदरता के लिए, बल्कि नैनीताल क्षेत्र की सबसे गहरी झील (40.3 मीटर या लगभग 175 फीट) होने के कारण भी शोध का विषय रही है। यह ब्लॉग नौकुचियाताल के पौराणिक रहस्यों, इसकी वैज्ञानिक पारिस्थितिकी और यहाँ के साहसिक पर्यटन पर एक विस्तृत शोधपरक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। Naukuchia Taal

Naukuchia Taal-क्या है इस जगह का पौराणिक संदर्भ और नौ कोनों का रहस्य
नौकुचियाताल का नाम इसके अनूठे नौ कोनों के कारण पड़ा है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस झील का निर्माण भगवान ब्रह्मा की कठिन तपस्या के फलस्वरूप उनके आशीर्वाद के रूप में हुआ था। झील के पास ही भगवान ब्रह्मा को समर्पित एक छोटा मंदिर स्थित है, और माना जाता है कि झील की ‘परिक्रमा’ करना सौभाग्य लाता है।
झील से जुड़ी सबसे रोमांचक किंवदंती यह है कि कोई भी व्यक्ति धरातल पर खड़े होकर इसकेसभी नौ कोनों को एक साथ नहीं देख सकता। स्थानीय मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति एक ही समय में सभी नौ कोनों को देखने में सफल हो जाता है, तो वह या तो मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त कर लेता है या उसकी मृत्यु हो जाती है।
बोटिंग
यकीन मानिए अगर आपने नौकुचियाताल में नाव की सवारी नहीं की तो आपने यहाँ की सबसे शानदार चीज मिस कर दी है। मैं उन लोगों में से हूँ जिन्हें पानी से बहुत दूर लगता है लेकिन उसके बावजूद इस झील में बोटिंग करने से मैं अपने आप को रोक नहीं पाई। अगर आप भी नौकुचियाताल का भरपूर मजा उठाना चाहते हैं तो आपको बोटिंग जरूर करनी चाहिए।

एडवेंचर और बर्ड वाचिंग
नौकुचियाताल साहसिक खेलों, विशेषकर पैराग्लाइडिंग के लिए उत्तर भारत के सबसे प्रमुख केंद्रों में से एक के रूप में उभरा है।
पैराग्लाइडिंग का अनुभव: भीमताल की तुलना में यहाँ की उड़ानें अधिक लंबी (15 से 30 मिनट) और ऊँची होती हैं, जहाँ से नौ कोनों वाली झील का विहंगम दृश्य और साफ मौसम में हिमालय की चोटियां स्पष्ट दिखाई देती हैं।
पक्षी दर्शन (Bird Watching):
झील के शांत वातावरण और आसपास के घने ओक व पाइन के जंगलों के कारण यहाँ पक्षियों की विविध प्रजातियां पाई जाती हैं। यहाँ एंग्लिंग (Angling), नौकायन (Rowing) और पैडलिंग की भी पर्याप्त सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

फोटोग्राफी करने का शौक रखने वालों को ये जगह किसी जन्नत से कम नहीं लगेगी। ये जगह इतने सारे खूबसूरत नजारों का समागम है कि ये आसानी से किसी भी विदेशी शहर को पछाड़ सकती है। अगर आपके पास बढ़िया कैमरा और लेंस नहीं भी है तब भी आप यहाँ बेहतरीन तस्वीरें खींच सकते हैं।
कैसे पहुंचे नौकुचियाताल
नैनीताल से 26 किमी और भीमताल से मात्र 4 किमी की दूरी पर स्थित यह झील दिल्ली जैसे बड़े शहरों से लगभग 320 किमी की दूरी पर है।
रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम (44 किमी) है, जहाँ से निजी या साझा टैक्सियाँ उपलब्ध रहती हैं।
वायु मार्ग: सबसे पास का हवाई अड्डा पंतनगर (74 किमी) है।
यहाँ की यात्रा का परफेक्ट समय: पक्षी दर्शन और शांत वातावरण के लिए वसंत (मार्च-मई) और शरद ऋतु (सितंबर-नवंबर) का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।
नौकुचियाताल केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि हिमालयी क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण जल संचय इकाई है। जबकि नैनीताल और भीमताल जैसी झीलें मानवीय दबाव का सामना कर रही हैं, नौकुचियाताल का जल स्तर पूरे वर्ष स्थिर रहता है, जो इसे और भी रहस्यमयी बनाता है। यहाँ का विकास स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल होना अनिवार्य है ताकि इसकी ‘वर्जिन ब्यूटी’ और नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र सुरक्षित रहे। नौकुचियाताल हिमालय के चेहरे पर एक ऐसी गहरी और नीली आँख की तरह है, जिसकी गहराई में सदियों पुराने रहस्य छिपे हैं और जो ऊपर से आकाश की शांति को अपने नौ कोनों में समेटे हुए है।

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