बरखा आवे, संग में लावे उमंग भरी बौछार
घिर-घिर आवें बदरा कारे, मानसून कौ सार
मेरा भारत देश महान और महान है मेरे देश की संस्कृति, विरासत, धरोहर और यहाँ का हर एक मौसम।

भारत में बदलते समय पर मौसम भी बदलते हैं जिनमें मानसून, एक बहुत खूबसूरत मौसम माना जाता है। मानसून में वर्षा होती है जो सबके दिल खुश कर देती है। लेकिन, बारिश के बाद होने वाली उमस का क्या? छोटे दिन, धूप में कमी और उमस का वातावरण मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
मानसून में स्वास्थ्य पर पड़ सकते हैं ये नकारात्मक प्रभाव
मानसून के महीने में सूर्य का प्रकाश कम हो जाता है, जिससे हमारे शरीर में बनने वाला सेरोटोनिन हार्मोन प्रभावित होता है। यह हार्मोन हमारे शरीर में नींद, भूख और मनोस्तिथि का संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है। जब यह असंतुलित हो जाता है तो व्यक्ति को उदासी, अवसाद और अनचाही मनोस्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
इस असंतुलन के नतीजतन व्यक्ति मौसमी उत्तेजित विकार यानी सीज़नल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) का शिकार भी हो सकता है। जिसमें उदासी, सुस्ती, ऊर्जा की कमी, और अकेलेपन की भावना जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
क्या है अवसाद से लड़ने का हथियार?
योग और ध्यान, न केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को मजबूत करते हैं बल्कि हमारे मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के भी सबसे सशक्त माध्यम माने जाते हैं। योग, मानसिक तनाव, दुख, पीड़ा और अवसाद को काम करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग और प्राणायाम। Mental health benefits of yoga during monsoon
योग आसन
सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार के दौरान गहरी सांस लेने से मन शांत होता है और तनाव में कमी आती है जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह प्राणायाम शरीर को गर्म करता है और परिसंचरण को सुधारता है।
वृक्षासन

वृक्षासन शांति की भावना को बढ़ावा देता है जिससे तनाव में राहत मिलती है। यह आसन संतुलन और एकाग्रता को भी बढ़ाता है।
त्रिकोणासन

यह आसान करते समय व्यक्ति अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करता है जिससे मन शांत हो जाता है। यह आसन शरीर को लचीला भी बनाता है और तनाव को कम करता है।
भुजंगासन

भुजंगासन करते हुए शरीर में वायु का संचार होता है और ऑक्सीजन शरीर के विभिन्न भागों तक पहुंचता है। यह आसन शरीर को मजबूत करता है और पीठ दर्द को कम करता है।
शवासन

शवासन के दौरान व्यक्ति एक गहन विश्राम की मुद्रा में होता है जो मस्तिष्क में आने वाले नकारात्मक विचारों को कम करने में सहायता करती है। यह आसन शरीर को आराम देने और तनाव को कम करने में मदद करता है।
प्राणायाम
भ्रामरी
यह प्राणायाम तनाव और चिंता को कम करने में सहायता करता है।
कपालभाति
यह प्राणायाम पाचन क्रिया में सुधार करता है और शरीर को डिटॉक्स करने में सहातीय करता है।
नाडी शोधन
इसे नासिक श्वास भी कहा जाता है। यह प्राणायाम मन को शांत करता है और ध्यान केंद्रित करने में सहायता करता है।
अनुलोम-विलोम
अनुलोम विलोम सांस को नियंत्रित करता है। इससे व्यक्ति नकारात्मक विचारों से लड़ने में प्रबल होता है।
आपका मनपसंद खाना भी कर सकता है मूड को रिफ्रेश
कहते हैं दिल का रास्ता पेट से होकर गुजरता है।
मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने में योग और प्राणायाम तो महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन जब बात हो मानसून की, तो गरमा-गरम पकौड़े और चाय भी आपका मूड को रिफ्रेश कर सकते हैं। जब हम दुखी होते हैं या हमें कुछ अच्छा नहीं लग रहा होता ऐसे समय में कुछ अच्छा खाना हमारे मन और मस्तिष्क, दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालने की पूरी क्षमता रखता है। इसलिए अगर आप मानसून में थोड़ा उदास महसूस करते हैं तो एक बार अपने आहार पर ध्यान दीजिए और उसमें अधिक से अधिक पौष्टिक तत्व शामिल करने का प्रयास कीजिए।
मॉनसून में योग करते समय इन बातों का रखें ध्यान
- हवादार स्थान पर योग करें।
- योग के दौरान हल्के और आरामदायक कपड़े पहनें।
- नियमित दिनचर्या बनाए रखें
- एक अच्छी और पूरी नींद लाभदायक हो सकती है।









