नमस्कार मैं डॉ प्रदीप कुमार, फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल के इस ब्लॉग में आज बात करूँगा दुनिया की दो सबसे लंबी और अभेद्य दीवारों की—एक जिसे ‘अंतरिक्ष’ से देखने का दावा किया गया, और दूसरी जिसे ‘भारत की महान दीवार’ कहा जाता है। Kumbhalgarh Fort vs Great Wall of China
शुरुआत करते हैं चाइना की दीवार से
जानते हैं इसकी विशाल लंबाई और विस्तार के बारे में

चीन की महान दीवार दुनिया की सबसे लंबी मानव निर्मित संरचना है, जिसकी कुल लंबाई 21,196.18 किलोमीटर मापी गई है। यह दीवार पूर्व में लियाओडोंग से लेकर पश्चिम में लोप झील तक फैली हुई है।
ड्रैगन का प्रतीक
इस दीवार की तुलना अक्सर एक विशाल ड्रैगन से की जाती है, जिसका सिर पूर्व में और पूंछ पश्चिम में पहाड़ों और पहाड़ियों पर घूमती हुई दिखाई देती है। एक प्राचीन किंवदंती के अनुसार, एक ड्रैगन ने ही उस मार्ग को निर्धारित किया था जिस पर यह दीवार बनाई गई है।
निर्माण सामग्री और तकनीक
दीवार के निर्माण में मिट्टी, पत्थर, लकड़ी और ईंटों का उपयोग किया गया था। मिंग राजवंश के दौरान, ईंटों को मजबूती से जोड़ने के लिए चिपचिपे चावल के मोर्टार (Sticky Rice Mortar) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था।

हड्डियों का मिथक: एक लोकप्रिय शहरी मिथक यह है कि इस दीवार के मोर्टार में मानव हड्डियों का उपयोग किया गया था, लेकिन शोध के अनुसार यह पूरी तरह से गलत है और दीवार के किसी भी हिस्से में मानव अवशेष नहीं पाए गए हैं
क्या सच में यह चाँद से दिखाई देती है?
लेकिन… क्या सच में यह चाँद से दिखाई देती है?
तो इसका जवाब है नहीं।
यह एक बहुत बड़ा मिथक है कि चीन की दीवार चाँद से नग्न आँखों से दिखाई देती है। हकीकत में, अंतरिक्ष यात्रियों और नासा (NASA) के अनुसार, यह अंतरिक्ष से देख पाना बेहद कठिन है क्योंकि इसकी चौड़ाई केवल 6 से 7 मीटर है और इसका रंग आसपास की ज़मीन से मेल खाता है.
दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार

कुम्भलगढ़ की यह दीवार 36 किलोमीटर लंबी है. यह चीन की दीवार के बाद दुनिया की दूसरी सबसे लंबी निरंतर (Continuous) दीवार मानी जाती है.
असाधारण चौड़ाई

इस दीवार की चौड़ाई इतनी प्रभावशाली है कि इस पर 8 घोड़े एक साथ अगल-बगल दौड़ सकते हैं. इसकी अग्रगामी दीवारें लगभग 4.5 मीटर मोटी हैं.
निर्माण और वास्तुकार
इसका निर्माण 15वीं शताब्दी (1448-1463 ईस्वी) के दौरान मेवाड़ के शासक राणा कुंभा ने करवाया था. इसके मुख्य वास्तुकार मंडन थे, जिन्होंने अपनी कार्यशैली को ‘राजवल्लभ’ नामक ग्रंथ में संकलित किया था.
अजेय दुर्ग

अरावली पहाड़ियों पर समुद्र तल से 1,100 मीटर (3,600 फीट) की ऊँचाई पर स्थित यह किला रणनीतिक रूप से इतना सुरक्षित था कि इसे ‘अजेय’ माना जाता था. केवल एक बार 1576 में मुगल सम्राट अकबर के सेनापति मानसिंह ने इसे जीता था.
जन्मस्थली
यह दीवार और किला महान राजपूत योद्धा महाराणा प्रताप की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है.
धार्मिक महत्व
दीवार के भीतर घेरे गए किले के परिसर में 360 से अधिक मंदिर हैं, जिनमें से लगभग 300 जैन मंदिर और शेष हिंदू मंदिर हैं.
बलिदान की लोककथा
एक प्राचीन कथा के अनुसार, इस दीवार का निर्माण कई शुरुआती असफलताओं के बाद ही सफल हो सका जब एक आध्यात्मिक गुरु की सलाह पर एक स्वयंसेवक ने स्वेच्छा से अपनी बलि दी थी. किले में उस स्थान पर एक मंदिर बना है जहाँ उनका सिर गिरा था.
विश्व धरोहर
अपनी अद्वितीय वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के कारण, इसे 2013 में यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था.
सुरक्षा संरचना

किले तक पहुँचने के लिए सात विशाल द्वारों (जैसे राम पोल, हनुमान पोल आदि) को पार करना पड़ता है, जो इसे सुरक्षा की दृष्टि से बेहद मजबूत बनाते हैं.

डॉ. प्रदीप कुमार को मीडिया इंडस्ट्री में सोलह वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने डिजिटल मीडिया के साथ-साथ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी सक्रिय रूप से कार्य किया है। वे एक अनुभवी पत्रकार होने के साथ-साथ शिक्षक, लेखक, फोटोग्राफर और डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर भी हैं। ग्राउंड लेवल की कहानियों को कैमरे और कलम के ज़रिए लोगों तक पहुँचाना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। उनकी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘चाय-चाय’ को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
अब तक उनके द्वारा विभिन्न विषयों पर पाँच पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी हैं। यात्रा करना, नई जगहों को खोजना, वहाँ की संस्कृति को समझना और परंपरागत व स्थानीय स्वादिष्ट व्यंजनों का अनुभव लेना उनकी खास रुचियों में शामिल है।