जयपुर की भीड़-भाड़ और रॉयल वाइब्स के बीच अगर आप आमेर किले में घूम रहे हैं, तो दीवान-ए-आम आपकी सबसे पहली और सबसे दिलचस्प स्टॉप होगी। पुराने ज़माने में यह जगह राजा और आम लोगों के बीच का सीधा कनेक्शन हुआ करती थी। लोग यहाँ बिना किसी झिझक के अपनी बातें रखते थे किसी को न्याय चाहिए होता था, किसी को अपनी परेशानी बतानी होती थी। तो राजा यहीं बैठकर लोगों की बात सुनते थे और ज़रूरी फैसले सुनाते थे। इस ब्लॉग में Five Colors of Travel आपको ऐसे ही छोटे-छोटे फैक्ट्स और एक्सपीरियंस बताएगा, जो इस जगह को और भी मज़ेदार बना देते हैं।

आखिर क्या था दीवाने आम?
दीवान-ए-आम एक खुला आँगन है, जिसे देख कर ऐसा लगता है कि काश हम उस समय में जा पाते और देख पाते कि उस समय दीवाने आम में किस तरह से फैसले हुआ करते थे। यहाँ कोई बंद कमरे या बहुत भारी-भरकम महल जैसी चीज़ें नहीं हैं, सब कुछ सीधे-साधे तरीके से दिखाई देता है। जब आप यहाँ खड़े होते हैं, तो चारों तरफ की दीवारें, खंभे और छतें आपको उस पुराने समय का एहसास दिलाती हैं। हर चीज़ इतनी असली लगती है कि आप खुद को उस ज़माने में घूमते हुए महसूस कर सकते हैं। यह जगह देखने के साथ साथ फील करने की भी है।

आम जनता का मंच
जैसा की नाम से ही सब कुछ साफ़ हो जाता है दीवान-ए-आम वो जगह थी जहाँ राजा सीधे आम जनता से मिलते थे। यहाँ कोई फॉर्मल प्रोसेस या कॉम्प्लिकेटेड रुल्स नहीं थे, लोग अपनी बातें सीधे राजा तक पहुँचा सकते थे। सोचिए, उस टाइम में कोई भी अपनी राय या शिकायत राजा को सीधे बता सकता था। अगर आज की भाषा में कहें तो ये बेसिकली उस ज़माने का पब्लिक मीटिंग हॉल था, जहाँ हर किसी को बोलने और अपनी बात रखने का मौका मिलता था। यहाँ खड़े होकर आप आसानी से समझ सकते हैं कि कैसे राजा और आम लोग आमने-सामने मिलते थे, और एक तरह से यह जगह लोगों और शासक के बीच का पुल का काम भी करती थी।
हाथियों की नक्काशी और शाही ठाठ
दीवान-ए-आम में सबसे ज़्यादा ध्यान खींचने वाली चीज़ हैं उसके खंभों पर बनी हाथियों की नक्काशी। ये हाथी सिर्फ सजावट ही नहीं थे, बल्कि ताक़त और शाही शान का प्रतीक माने जाते है। खंभों पर इतनी छोटी-छोटी डिटेल्स बनाई गई हैं जो हमे यह सोचने पर मजबूर करती देती है कि इतनी बारीक डिजाईन उस जमाने में बिना किसी फैसेलिटीज के कैसे बनाई गई होगी। सच में, यही छोटी-छोटी चीज़ें इसे यादगार और खास बनाती हैं।

खुला माहौल, सादा डिजाइन
सबसे अच्छी बात दीवान-ए-आम की यह है कि इसका डिजाइन बिल्कुल खुला और सादा है। यहाँ कोई ज़्यादा दिखावा या भारी-भरकम सजावट नहीं है, सब कुछ बिल्कुल सीधे-सादे तरीके से बना है। यही वजह है कि यह जगह आज की पब्लिक को इतनी खास लगती है और यही सिंपलसिटी इसे और भी खास बनाती है।
आज जब लोग दीवान-ए-आम में खड़े होते हैं, तो उन्हें सिर्फ एक हिस्टोरिकल ढांचा नहीं दिखता, बल्कि उस दौर की सोच और जनता के साथ राजा का रिश्ता भी कैसा हुआ करता था ये भी जानने को मिलता है।

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