तेज़ी से बढ़ते प्रदूषण, ओवर-टूरिज्म और ग्लोबल वार्मिंग के बीच एक नई ट्रैवल सोच सामने आ रही है- ग्रीम टूरिज्म की। लोग अब सिर्फ घूमने नहीं बल्कि जिम्मेदारी से ट्रैवल करना चाहते हैं। इसी सोच को आगे बढ़ा रहे हैं भारत के कुछ ऐसे होमस्टे, जो न केवल स्थानीय समुदाय को रोज़गार दे रहे हैं बल्कि प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना पर्यटकों को अनोखा अनुभव भी दे रहे हैं। फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में आज हम आपको रूबरू करवाएंगे भारत के 5 ऐसे ईको-फ्रेंडली होमस्टे जो ग्रीन टूरिज़्म का फ्यूचर हैं।(Eco Friendly Home Stay)
यांगसुम हेरिटेज फॉर्म, सिक्किम
यह सिक्किम में स्थित 44 एकड़ में फैला एक खूबसूरत पहाड़ी फार्म है। इसे थेनडुप ताशी और उनकी पत्नी पेमा संभालते हैं। यहाँ पर खाने में इस्तेमाल होने वाली सब्ज़ियाँ और अनाज इसी फार्म पर जैविक तरीके से उगाए जाते हैं। यहाँ मिलने वाला खाना बिल्कुल घर जैसा और ताज़ा होता है। इनके मेन्यू में सिक्किम की खास चीज़ें मिलती हैं, जैसे—सिक्किम चीज़ और बिच्छू बूटी से बना सूप। यहाँ आने वाले लोग प्राकृतिक माहौल में ताज़ा, हेल्दी और ऑर्गेनिक भोजन का मज़ा लेते हैं।

यह राजस्थान में बना एक परिवार द्वारा चलाया जाने वाला गेस्टहाउस है। इसकी बनावट बिल्कुल स्थानीय वास्तुकला जैसी है, यानी मिट्टी, पत्थर और प्राकृतिक चीज़ों से तैयार की गई। यहाँ बिजली और गर्म पानी के लिए सोलर एनर्जी का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही, यहाँ जैविक खेती, पानी बचाने और पानी को दोबारा इस्तेमाल करने जैसी पर्यावरण-फ्रेंडली प्रैक्टिस अपनाई जाती हैं। यहाँ ठहरने पर आपको गाँव का शांत और सुकून भरा माहौल भी मिलता है।

मकईबारी टी एस्टेट होमस्टे, पश्चिम बंगाल
यह दार्जिलिंग के सबसे पुराने चाय बागानों में से एक है। यहाँ आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों ने अपने घर मेहमानों के लिए खोल दिए हैं, यानी आप सीधे उनके घर में रुककर उनकी संस्कृति और लाइफस्टाइल को करीब से देख सकते हैं। इस होमस्टे को एक स्वयं सहायता समूह ‘वॉलंटियर इन मकईबारी’ चलाता है। जो भी कमाई होती है, वह इस समूह में शामिल महिलाओं के बीच बाँट दी जाती है। यह जगह चाय बागानों की खूबसूरती, सादगी और स्थानीय लोगों की मेहमाननवाज़ी के लिए मशहूर है।

फार्म ऑफ हैप्पीनेस, महाराष्ट्र
यह महाराष्ट्र में स्थित एक पारंपरिक कोकणी घर है, जो 20 एकड़ में फैले खेतों के बीच बना है। यहाँ आने वाले मेहमान सुबह पक्षियों की आवाज़ सुनकर दिन की शुरुआत कर सकते हैं। रात में आप खुले आसमान के नीचे, तारों के बीच मचान पर सोने का अनुभव भी ले सकते हैं। यहाँ आप खेती-बाड़ी के कामों में भी हिस्सा ले सकते हैं। खाने के लिए इस्तेमाल होने वाली सब्ज़ियाँ और अनाज यहीं उगाए जाते हैं और खाना पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जाता है। यहाँ आपको गाँव की असली सादगी, शांति और प्रकृति के बीच रहने का मौका मिलेगा।

द फ्रेग्रेंट सन, मूल्शी
यह मूल्शी झील के पास बना एक इको-फ्रेंडली और शांत होमस्टे है, जो मुंबई से लगभग 3.5 घंटे की दूरी पर है। इसे मिट्टी, ईंटों और लकड़ी से बनाया गया है, जिससे यह पूरी तरह प्रकृति के करीब महसूस होता है। इस जगह को 2018 में ‘बेस्ट अर्थ होम’ श्रेणी के लिए जिम्मेदार पर्यटन भारत पुरस्कार में नामांकित भी किया गया था।

यहाँ मेहमान सिलाई मशीन जैसी डिज़ाइन वाली मेज़ों पर बैठकर टैकोस, सलाद और स्थानीय खाने का मज़ा ले सकते हैं। रात में आप बोनफायर के पास बैठकर लकड़ी पर तैयार पिज़्ज़ा का स्वाद ले सकते हैं। यहाँ आकर आप प्रकृति, स्वादिष्ट भोजन और शांति तीनों का एक साथ अनुभव कर सकते हैं।(Eco Friendly Home Stay)
किस तरह पहुँचे?
अधिकतर होमस्टे की लोकेशन मैप पर उपलब्ध है, और पर्यटक उनकी वेबसाइट या इंस्टाग्राम पेज से सीधा बुकिंग कर सकते हैं।
युवाओं के बीच अब एक नई सोच उभर रही है
“Travel Less, Travel Responsible”
ग्रीन टूरिज़्म सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि भविष्य की ट्रैवल लाइफस्टाइल है। अगर आप भी प्रकृति को प्यार करते हैं, तो अगली यात्रा में इन ईको होमस्टे को जरूर अपनाए

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