गंगा किनारे बसे पवित्र नगर गढ़मुक्तेश्वर में इस साल का कार्तिक मेला पूरी भव्यता के साथ शुरू हो चुका है। जैसे ही कार्तिक पूर्णिमा का पावन समय नजदीक आया, वैसे-वैसे यहां की हवा में आस्था, श्रद्धा और उत्साह का रंग और भी गहरा होता गया। दूर-दूर से आए लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए यहां पहुंच रहे हैं, और हर ओर सिर्फ एक ही माहौल भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक रोमांच। गढ़मुक्तेश्वर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास और पौराणिकता की ऐसी जीवंत धरोहर है जिसका सीधा संबंध महाभारत काल और श्री कृष्ण से भी बताया जाता है। मान्यता है कि पांडवों के काल में यह स्थान विशेष आध्यात्मिक केंद्र था, वहीं कुछ किंवदंतियां इसे श्री कृष्ण की नगरी से भी जोड़ती हैं। गंगा के तट पर स्थित यह जगह आज भी उस दौर की पवित्रता और शक्ति का एहसास कराती है। गंगा किनारे

कार्तिक मेले में इस समय गढ़मुक्तेश्वर की गलियां रोशनी से जगमग हैं। जगह-जगह मेले के आकर्षक झूले, खाने-पीने की दुकानों की खुशबू, और भक्तों की जय-जय कारे, हर चीज मिलकर ऐसा अद्भुत माहौल बनाती है जो किसी भी यात्री को मंत्रमुग्ध कर देता है। भोर की पहली किरण के साथ गंगा के घाटों पर लाखों लोग डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं। माना जाता है कि इस पवित्र महीने में गंगा स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और सभी पापों का नाश हो जाता है। यात्रियों के लिए प्रशासन ने इस बार विशेष इंतज़ाम किए हैं ड्रोन से निगरानी, मेडिकल कैंप, पीने का पानी, सुरक्षा बलों की तैनाती और अलग-अलग घाटों पर सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। इस कारण यहां आने वालों को परेशानी का कम से कम सामना करना पड़ेगा। साथ ही इस बार मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक-नृत्य, भजन संध्या और अनेक धार्मिक आयोजन भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।(गढ़मुक्तेश्वर में इस साल का कार्तिक मेला पूरी भव्यता के साथ शुरू हो चुका है।)

यदि आप ट्रैवल के शौकीन हैं और भारत के असली रंगों को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो गढ़मुक्तेश्वर का कार्तिक मेला एक अविस्मरणीय अनुभव साबित हो सकता है। गंगा घाटों की शांति, मेले का शोर, आस्था की रोशनी और इतिहास की गहराइयों में डूबी कहानियां सब मिलकर इस जगह को एक जादुई यात्रा बना देते हैं। यहां पहुंचना बेहद आसान है। दिल्ली से गढ़मुक्तेश्वर की दूरी लगभग 110 किलोमीटर है और सड़क मार्ग से सिर्फ 2.5 घंटे में पहुंचा जा सकता है। मेरठ, हापुड़ और गाजियाबाद से भी नियमित बसें और टैक्सियां उपलब्ध रहती हैं। मेले के दौरान भीड़ अधिक रहती है, इसलिए सुबह या शाम का समय यात्रा के लिए बेहतर है। इस बार अगर आप गंगा की गहराई में उतरती आस्था का साक्षी बनना चाहते हैं, तो गढ़मुक्तेश्वर का कार्तिक मेला आपकी प्रतीक्षा कर रहा है।