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हिप हॉप जिसकी हर बीट पर थिरकते है पैर, जानिए क्या है इसकी संस्कृति

किसे कहते हैं हिप हॉप?
यो-यो की यह लाइनें पढ़कर आप समझ ही चुके होंगे की आज हम किस बारे में बात करने जा रहे हैं। हिप हॉप जो सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि एक पूरी जीवनशैली है। अगर आपने कभी सड़कों पर बीट्स की थाप सुनी, रैप के बोलों में कहानियां महसूस की या ब्रेकडांस के कमाल को देखा, तो आप हिप हॉप की दुनिया को छू चुके हैं। यह संगीत का ऐसा रूप है, जो दिल को छूता है और समाज की आवाज बनता है।

हिप हॉप की शुरुआत 1970 के दशक में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में हुई थी। यह ब्रॉन्क्स की गलियों से निकला, जहां अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय के लोग रहते थे। उस समय वहां गरीबी और मुश्किलें थीं, लेकिन युवाओं ने अपनी बात कहने के लिए संगीत को चुना। डीजे कूल हर्क को हिप हॉप का जनक माना जाता है। उन्होंने ब्लॉक पार्टियों में दो टर्नटेबल्स का इस्तेमाल कर बीट्स बनाए, जिसे “ब्रेक बीट्स” कहा गया। फिर रैपिंग शुरू हुई, जहां लोग बीट्स पर बोल बोलते थे।

दरअसल, हिप हॉप सिर्फ गाना नहीं है। इसमें चार मुख्य हिस्से भी हैं रैपिंग, डीजे, ब्रेकडांस, और ग्रैफिटी आर्ट। ये चारों मिलकर हिप हॉप की संस्कृति बनाते हैं। भारत में भी हिप हॉप अब बहुत लोकप्रिय हो रहा है। मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में देसी रैपर्स और डांस क्रूज सामने आ रहे हैं। फिल्म “गली बॉय” ने तो हिप हॉप को हर घर तक पहुंचा दिया।

क्या आप जानते हैं कि हिप हॉप सिर्फ मस्ती के लिए नहीं है? यह समाज की समस्याओं को उठाता है। चाहे वह गरीबी हो, भेदभाव हो या सपनों की उड़ान। हिप हॉप में हर कोई अपनी कहानी कह सकता है। इस ब्लॉग में हम हिप हॉप के हर हिस्से को के बारे में जानेंगे। इसकी शुरुआत, भारत में इसकी लोकप्रियता और कैसे आप खुद हिप हॉप का हिस्सा बन सकते हैं।

हिप हॉप को समझने के लिए इसके चार मुख्य हिस्सों को जानना जरूरी है।

हिप हॉप

यह हिप हॉप का दिल है। रैप में एक एमसी जिसे मास्टर ऑफ सेरेमनी कहा जाता है, बीट्स पर बोल बोलता है। ये बोल कविता जैसे होते हैं लेकिन लय में। रैप में कहानियां, गुस्सा, प्यार या समाज की बातें होती हैं। मशहूर रैपर्स जैसे टुपैक, नॉटोरियस बीआईजी, और भारत में यो यो हनी सिंह ने इसे बहुत लोकप्रिय बनाया।

डीजे वह जादूगर होता है जो बीट्स बनाता है। पुराने समय में डीजे टर्नटेबल्स पर रिकॉर्ड्स को स्क्रैच करके नई धुनें बनाते थे। आज डिजिटल सॉफ्टवेयर जैसे फ्रूटी लूप्स इस्तेमाल होते हैं। डीजे कूल हर्क ने “मेरी-गो-राउंड” तकनीक बनाई, जिसमें एक ही बीट को बार-बार दोहराया जाता था। यही बाद में हिप हॉप का आधार बना।

इसे बी-बॉयिंग भी कहते हैं। यह एक ऐसा नृत्य है जिसमें शरीर की लचक और ताकत दिखती है। सिर पर घूमना, जमीन पर तेज चक्कर, और फुटवर्क इसके खास मूव्स हैं। ब्रेकडांस 1980 के दशक में बहुत लोकप्रिय हुआ। भारत में भी अब डांस क्रूज जैसे डी-मैनिक्स इसे मशहूर कर रहे हैं।

यह सड़कों पर दीवारों को रंगने की कला है। हिप हॉप की शुरुआत में युवा अपनी बात दीवारों पर रंगों से कहते थे। यह कला अब दुनिया भर में मानी जाती है। भारत में मुंबई की दीवारों पर आपको हिप हॉप स्टाइल ग्रैफिटी दिखेगी। ये चारों हिस्से मिलकर हिप हॉप को एक संस्कृति बनाते हैं। यह सिर्फ गाना सुनना नहीं, बल्कि एक जुनून है। अगर आप हिप हॉप में रुचि रखते हैं, तो इनमें से कोई एक हिस्सा चुनकर शुरू कर सकते हैं। जैसे, मैंने एक बार ग्रैफिटी ट्राई की थी। दीवार पर रंगों से खेलना मजेदार था! अब चलिए, भारत में हिप हॉप की कहानी को देखते हैं।

भारत में हिप हॉप का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है लेकिन इसका असर गजब का है। 2000 के दशक में यो यो हनी सिंह ने पंजाबी हिप हॉप को मशहूर किया। उनके गाने जैसे “ब्राउन रंग” और “अंग्रेजी बीट” ने युवाओं को झुमा दिया। लेकिन असली बदलाव आया 2010 के बाद, जब देसी हिप हॉप सामने आया।

हिप हॉप

मुंबई की गलियों से निकले रैपर्स जैसे डिवाइन और नेजी ने अपनी जिंदगी की कहानियां रैप में कही। डिवाइन का गाना “मेरी गली में” सुपरहिट हुआ। फिर 2019 में फिल्म “गली बॉय” आई, जिसमें रणवीर सिंह ने एक रैपर का रोल किया। इस फिल्म ने हिप हॉप को हर घर तक पहुंचाया। यह फिल्म सच्ची कहानियों से प्रेरित थी, जो डिवाइन और नेजी जैसे रैपर्स की जिंदगी पर आधारित थी।

भारत में हिप हॉप अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों और कस्बों में भी युवा रैप लिख रहे हैं। यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर देसी रैपर्स के वीडियो वायरल हो रहे हैं। दिल्ली में रैप बैटल्स होने लगे हैं, जहां रैपर्स एक-दूसरे को बोलों से टक्कर देते हैं। बेंगलुरु में ब्रेकडांस क्रूज हर हफ्ते जमा होते हैं। एक बार मैंने एक रैप बैटल देखा। दो लड़के स्टेज पर थे, और उनके बोल सुनकर भीड़ चिल्ला रही थी। यह देखकर लगा कि हिप हॉप भारत में एक नया रंग ले रहा है। देसी हिप हॉप में हिंदी, पंजाबी, तमिल, और मराठी जैसे भाषाओं का इस्तेमाल होता है। वास्तव में यह भारत की विविधता को दिखाता है।

हिप हॉप

भारत में हिप हॉप की खास बात यह है कि यह स्थानीय कहानियों को उठाता है। जैसे, रैपर बादशाह ने पंजाबी संस्कृति को अपने गानों में डाला। इसी तरह, तमिल रैपर्स जैसे यूपी बॉयज अपनी भाषा में गाते हैं। अगर आप भारत में हिप हॉप सुनना चाहते हैं, तो डिवाइन, नेजी, रफ्तार, और एमसी स्टैन को सुनें। अब अगले हिस्से में देखते हैं कि हिप हॉप का असर क्या है।

हिप हॉप सिर्फ मनोरंजन नहीं है, यह समाज को बदलने की ताकत रखता है। शुरुआत से ही हिप हॉप ने उन लोगों की आवाज उठाई, जिन्हें कोई नहीं सुनता था। अमेरिका में हिप हॉप ने अश्वेत समुदाय की समस्याओं को दुनिया तक पहुंचाया। गाने जैसे “फाइट द पावर” ने नस्लवाद के खिलाफ आवाज उठाई। भारत में भी हिप हॉप ऐसा ही कर रहा है। देसी रैपर्स गरीबी, बेरोजगारी, और सामाजिक भेदभाव पर बोलते हैं। जैसे, डिवाइन का गाना “जंगल में मंगल” मुंबई की झुग्गियों की कहानी कहता है। यह सुनकर आपको लगेगा कि रैप सिर्फ गाना नहीं, बल्कि एक क्रांति है।

हिप हॉप ने युवाओं को आत्मविश्वास दिया है। बहुत से लड़के-लड़कियां जो पहले शर्माते थे, अब स्टेज पर रैप कर रहे हैं। एक बार मैंने एक लड़की का रैप सुना, जिसमें उसने औरतों के हक की बात की। वह सुनकर सब तालियां बजा रहे थे। हिप हॉप ने लोगों को अपनी बात कहने का हौसला दिया है। यह संस्कृति नशे और हिंसा को भी कम करने में मदद करती है। कई जगहों पर हिप हॉप स्कूल्स खुले हैं, जहां बच्चे डांस और रैप सीखते हैं। इससे वे गलत रास्ते से बचते हैं।

हिप हॉप

भारत में भी कई एनजीओ हिप हॉप के जरिए युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। हिप हॉप का असर फैशन पर भी है। ढीले कपड़े, स्नीकर्स, और कैप्स हिप हॉप का हिस्सा हैं। भारत में भी युवा इस स्टाइल को फॉलो करते हैं। लेकिन सबसे बड़ा असर है खुद को व्यक्त करने की आजादी। हिप हॉप कहता है अपनी कहानी सुनाओ, दुनिया सुनेगी। अब देखते हैं कि आप हिप हॉप का हिस्सा कैसे बन सकते हैं।

हिप हॉप का हिस्सा बनना बहुत आसान है। आपको बस जुनून चाहिए। अगर आप रैप करना चाहते हैं, तो पहले अपनी कहानी लिखें। एक डायरी लें, और अपने आसपास की चीजों पर कविता लिखें। फिर यूट्यूब पर फ्री बीट्स डाउनलोड करें और उन पर रैप करें। अपने दोस्तों को सुनाएं। डरें नहीं, शुरुआत में गलतियां होंगी। अगर डांस पसंद है, तो ब्रेकडांस सीखें। यूट्यूब पर ट्यूटोरियल्स हैं। स्थानीय डांस क्रूज से जुड़ें। भारत में कई शहरों में डांस ग्रुप्स हैं। डीजिंग सीखना चाहते हैं? तो सस्ते सॉफ्टवेयर से शुरू करें। फ्रूटी लूप्स या ऑडेसिटी जैसे टूल फ्री हैं। ग्रैफिटी के लिए पहले कागज पर डिजाइन बनाएं। फिर दीवारों पर पेंट करने की अनुमति लें। भारत में कई जगह ग्रैफिटी फेस्टिवल होते हैं। वहां शामिल हों। मैंने एक बार एक दोस्त के साथ रैप लिखा। हमने अपनी गली की बातें डालीं, और मजा भी आया।

हिप हॉप में मेहनत जरूरी है, इसलिए रोज प्रैक्टिस करें। स्थानीय इवेंट्स में हिस्सा लें। सोशल मीडिया पर अपने वीडियो डालें। इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फॉलोअर्स बढ़ाएं। सबसे जरूरी अपनी कहानी ईमानदारी से कहें। हिप हॉप असलियत को पसंद करता है। हिप हॉप की दुनिया में कदम रखें। यह आपको नई पहचान देगा। चाहे आप गाएं, नाचें या पेंट करें, हिप हॉप आपके लिए है

By Five Colors Of Travel

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