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Vrindavan: जन्माष्टमी में क्या देखें, पूरा ट्रैवल प्लान

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कभी-कभी मन करता है कि बस रोजमर्रा की भागदौड़ से थोड़ा दूर निकल जाएं। फोन, काम और बाकी सारी टेंशन को कुछ देर के लिए भूलकर किसी ऐसी जगह पहुंच जाएं, जहां मन को सुकून मिले। अगर आपके मन में भी कभी ऐसा ख्याल आया है, तो शायद Vrindavan आपको बुला रहा है। कहते हैं Vrindavan सिर्फ घूमने की जगह नहीं है। यहां आने वाला हर इंसान अपने साथ कोई न कोई एहसास लेकर वापस जाता है। कोई यहां शांति ढूंढने आता है, कोई बांके बिहारी के दर्शन के लिए और कोई सिर्फ इस नगरी की गलियों में कुछ वक्त बिताने के लिए। खासकर जन्माष्टमी के समय Vrindavan का माहौल बिल्कुल बदल जाता है। मंदिरों की सजावट, गलियों में गूंजते भजन, हर तरफ राधे-राधे की आवाज और कान्हा के जन्मोत्सव की तैयारी पूरे शहर को अलग ही रंग में रंग देती है। अगर आप भी साल 2026 में जन्माष्टमी के आसपास Vrindavan जाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह ब्लॉग आपके काफी काम आने वाला है। यहां हम आपको मंदिरों से लेकर परिक्रमा, यमुना घाट, खाने-पीने और जरूरी ट्रैवल टिप्स बताएंगे। जन्माष्टमी के समय Vrindavan का माहौल कैसा होता है? जन्माष्टमी के दिनों में Vrindavan की रौनक देखने लायक होती है। वैसे तो यहां पूरे साल श्रद्धालु आते रहते हैं, लेकिन कृष्ण जन्मोत्सव के समय भीड़ कई गुना बढ़ जाती है। मंदिरों को फूलों, रंगीन लाइटों और सुंदर सजावट से तैयार किया जाता है। कई जगह कान्हा के झूले सजाए जाते हैं और अलग-अलग तरह की झांकियां देखने को मिलती हैं। सुबह से लेकर देर रात तक मंदिरों में भजन और कीर्तन चलते रहते हैं। गलियों में चलते हुए आपको हर तरफ भक्तों की भीड़ दिखाई देती है। कोई परिवार के साथ आया होता है तो कोई दोस्तों के साथ इस खास माहौल का हिस्सा बनने पहुंचता है। जन्माष्टमी के समय Vrindavan आने का सबसे बड़ा अनुभव यही है कि यहां सिर्फ मंदिर नहीं, बल्कि पूरा शहर त्योहार मनाता हुआ दिखाई देता है। मंदिरों की सजावट और रोशनी देखने लायक होती है जन्माष्टमी के आसपास Vrindavan के बड़े मंदिरों को खास तरीके से सजाया जाता है। फूलों की सजावट, रंगीन रोशनी और भगवान कृष्ण की अलग-अलग लीलाओं की झांकियां लोगों को काफी आकर्षित करती हैं। खासकर प्रेम मंदिर इस दौरान बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। शाम के समय जब पूरा मंदिर रोशनी से जगमगाता है, तो यहां का नजारा देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। मंदिरों के आसपास की गलियां भी काफी व्यस्त रहती हैं। दुकानों पर प्रसाद, माला, कान्हा की पोशाक और दूसरी धार्मिक चीजें बिकती दिखाई देती हैं। अगर आप पहली बार Vrindavan आ रहे हैं, तो कोशिश करें कि त्योहारों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए अपना समय पहले से तय कर लें। बांके बिहारी मंदिर: Vrindavan की सबसे खास जगह Vrindavan की बात हो और बांके बिहारी मंदिर का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। यह मंदिर यहां आने वाले ज्यादातर श्रद्धालुओं की पहली पसंद होता है। बांके बिहारी जी के दर्शन का अपना अलग ही अनुभव है। मंदिर में भगवान के सामने पर्दा लगाया और हटाया जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बिहारी जी के दर्शन लगातार नहीं कराए जाते। जन्माष्टमी और दूसरे बड़े त्योहारों के समय यहां भारी भीड़ होती है। ऐसे में अगर आप आराम से दर्शन करना चाहते हैं, तो सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर रहता है। मंदिर की गलियां काफी संकरी हैं और भीड़ के समय यहां चलना भी थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इसलिए बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा कर रहे हैं तो पहले से तैयारी जरूर रखें। Vrindavan आने वाले ज्यादातर लोगों के लिए बांके बिहारी मंदिर सिर्फ दर्शन की जगह नहीं, बल्कि पूरी यात्रा का सबसे भावुक अनुभव होता है। प्रेम मंदिर की खूबसूरती जरूर देखें Vrindavan में स्थित प्रेम मंदिर अपनी शानदार बनावट और सफेद संगमरमर के लिए काफी प्रसिद्ध है। यह मंदिर देखने में जितना सुंदर है, शाम के समय इसकी रोशनी इसे और भी खास बना देती है। मंदिर के आसपास भगवान कृष्ण की अलग-अलग लीलाओं को दर्शाती झांकियां बनाई गई हैं। गोवर्धन लीला, कालिया नाग और दूसरी कई कथाओं को यहां खूबसूरती से दिखाया गया है। शाम के समय यहां होने वाला म्यूजिकल फाउंटेन भी लोगों को काफी पसंद आता है। रोशनी और पानी के साथ होने वाला यह शो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को आकर्षित करता है। अगर आप परिवार के साथ Vrindavan आए हैं, तो शाम के समय प्रेम मंदिर घूमना एक अच्छा अनुभव हो सकता है। निधिवन की रहस्यमयी दुनिया Vrindavan की सबसे चर्चित और रहस्यमयी जगहों में निधिवन का नाम जरूर लिया जाता है। यहां के पेड़-पौधे और पूरा माहौल बाकी जगहों से अलग दिखाई देता है। निधिवन से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं हैं। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का मानना है कि यह जगह भगवान कृष्ण की रासलीला से जुड़ी हुई है। शाम होने के बाद यहां किसी को रुकने की अनुमति नहीं होती। आरती के बाद परिसर को खाली कर दिया जाता है। दिन के समय यहां आने वाले लोग इस जगह को देखकर काफी उत्सुक होते हैं। अगर आप Vrindavan की धार्मिक और ऐतिहासिक जगहों को करीब से समझना चाहते हैं, तो निधिवन को अपनी यात्रा में जरूर शामिल कर सकते हैं। ISKCON मंदिर में कीर्तन का अलग ही अनुभव Vrindavan का ISKCON मंदिर, जिसे श्री कृष्ण बलराम मंदिर भी कहा जाता है, देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच काफी लोकप्रिय है। यहां पहुंचते ही सबसे पहले जो चीज आपका ध्यान खींचती है, वह है कीर्तन का माहौल। हरे कृष्ण महामंत्र की धुन और भक्तों का उत्साह यहां का पूरा वातावरण अलग बना देता है। जन्माष्टमी के समय यहां विशेष आयोजन होते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। विदेशी भक्तों की मौजूदगी भी यहां काफी देखने को मिलती है। अगर आप Vrindavan की यात्रा में कुछ समय शांति से बैठकर भजन-कीर्तन सुनना चाहते हैं, तो ISKCON मंदिर जरूर जाएं। Vrindavan परिक्रमा का अनुभव Vrindavan आने वाले बहुत से श्रद्धालु यहां की परिक्रमा भी करते हैं। यह यात्रा सिर्फ पैदल चलने का अनुभव नहीं है, बल्कि रास्ते में कई धार्मिक स्थानों के दर्शन करने का

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Indian Railway वाराणसी-साबरमती सुपरफास्ट ट्रेन को मंजूरी!

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अगर आप उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और गुजरात के बीच अक्सर travel करते हैं, तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। Indian Railway ने यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए वाराणसी और साबरमती (अहमदाबाद) के बीच नई सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन को मंजूरी दे दी है। इस नई ट्रेन सेवा के शुरू होने से दोनों राज्यों के बीच रेल कनेक्टिविटी और मजबूत होगी और यात्रियों को एक सीधा, सुविधाजनक और आरामदायक travel विकल्प मिलेगा। काफी समय से इस रूट पर नई ट्रेन चलाने की मांग की जा रही थी। अब रेलवे के इस फैसले से व्यापारियों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और श्रद्धालुओं को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। Indian Railway का नया तोहफा, बढ़ेगी कनेक्टिविटी Indian Railway की यह नई पहल वाराणसी और साबरमती के बीच यात्रा को पहले से ज्यादा आसान बनाने वाली है। दोनों शहर धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हर साल हजारों लोग इन दोनों शहरों के बीच travel करते हैं, लेकिन सीमित ट्रेन विकल्पों की वजह से यात्रियों को अक्सर लंबा इंतजार करना पड़ता था। रेलवे बोर्ड ने यात्रियों की इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए नई सुपरफास्ट ट्रेन को मंजूरी दी है। उम्मीद की जा रही है कि नई सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों को कन्फर्म सीट मिलने की संभावना भी बढ़ेगी और सफर पहले से ज्यादा सुविधाजनक होगा। (Indian Railway) शाम को निकलें और अगले दिन पहुंचें साबरमती रेलवे द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार, यह नई सुपरफास्ट ट्रेन वाराणसी जंक्शन से शाम 5:10 बजे रवाना होगी और अगले दिन रात 8:15 बजे साबरमती पहुंचेगी। वहीं वापसी में यह ट्रेन साबरमती से सुबह 5:20 बजे चलेगी और अगले दिन सुबह 6:30 बजे वाराणसी पहुंचेगी। (Indian Railway) ट्रेन की टाइमिंग को इस तरह तैयार किया गया है कि यात्री रात के समय आराम कर सकें और दिन के दौरान अपने जरूरी काम भी आसानी से निपटा सकें। लंबी दूरी के travel के लिए यह शेड्यूल काफी सुविधाजनक माना जा रहा है। इन प्रमुख स्टेशनों से होकर गुजरेगी ट्रेन यह नई सुपरफास्ट एक्सप्रेस उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के कई महत्वपूर्ण शहरों को आपस में जोड़ेगी। रेलवे के अनुसार, ट्रेन का रूट कई बड़े जंक्शनों से होकर गुजरेगा। इसमें गोविंदपुरी, आगरा, भरतपुर, जयपुर, अजमेर, मारवाड़ और आबू रोड जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं। इसके अलावा बांदीकुई जंक्शन, पालनपुर जंक्शन और वीआईआईके जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर भी ट्रेन का ठहराव रहेगा। (Indian Railway) इस रूट से छोटे शहरों के यात्रियों को भी बेहतर travel सुविधा मिलेगी और उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों को explore करने का नया अवसर मिलेगा। इस रूट पर पहले से चल रही हैं ये ट्रेनें- Indian Railway वाराणसी और अहमदाबाद के बीच पहले से भी कुछ ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हैं। इनमें साबरमती एक्सप्रेस (19168) यात्रियों के बीच काफी लोकप्रिय है। यह ट्रेन वाराणसी सिटी से दोपहर 2:00 बजे अपनी यात्रा शुरू करती है और लगभग 34 घंटे 55 मिनट का सफर तय करके तीसरे दिन अहमदाबाद जंक्शन पहुंचती है। इस ट्रेन में फर्स्ट एसी, एसी थ्री टियर, स्लीपर और जनरल कोच सहित कई श्रेणियों की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा इस रूट पर साप्ताहिक सुपरफास्ट एक्सप्रेस (20964) भी संचालित होती है, जो प्रत्येक शनिवार को चलती है और वाराणसी से साबरमती की दूरी लगभग 29 घंटे 45 मिनट में पूरी करती है। (Indian Railway) नई सुपरफास्ट ट्रेन शुरू होने के बाद यात्रियों को travel के लिए एक और बेहतर विकल्प मिलने वाला है। पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा नई ट्रेन सेवा का फायदा केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे उत्तर प्रदेश और गुजरात के बीच पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अब लोग वाराणसी की प्रसिद्ध गंगा आरती, मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहरों को आसानी से explore कर सकेंगे। वहीं गुजरात जाने वाले यात्रियों के लिए साबरमती आश्रम और अहमदाबाद के ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचना पहले से ज्यादा आसान हो जाएगा। रेलवे का मानना है कि बेहतर travel सुविधाओं से दोनों राज्यों के बीच लोगों की आवाजाही बढ़ेगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। Five Colors of Travel की ओर से आपके लिए 5 खास सुझाव नई ट्रेन शुरू होने के बाद शुरुआती दिनों में सीटों की मांग ज्यादा रह सकती है, इसलिए अपना travel प्लान पहले से तैयार रखें। अगर आप बीच के किसी स्टेशन से यात्रा करने वाले हैं, तो बोर्डिंग और आगमन का समय पहले ही देख लें। खाना, पानी, मोबाइल चार्जर और जरूरी दवाइयां अपने travel बैग में जरूर रखें। स्टेशन के लिए निकलने से पहले NTES या रेलवे की आधिकारिक जानकारी जरूर चेक करें। इस रूट पर कई खूबसूरत शहर आते हैं, इसलिए अपने travel के दौरान आसपास की जगहों को भी explore करने का मौका जरूर लें। वाराणसी और साबरमती के बीच नई सुपरफास्ट ट्रेन की मंजूरी यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। इससे दोनों शहरों के बीच रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी और लंबी दूरी का travel पहले से ज्यादा आसान, सुविधाजनक और आरामदायक बन सकेगा। आने वाले समय में यह नई सेवा पर्यटन, व्यापार और लोगों की आवाजाही को नई रफ्तार देने में अहम भूमिका निभा सकती है। (Indian Railway)

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‎सुबह की बेहतरीन शुरुआत : आयुर्वेद की इन 10 आदतों के साथ

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जब भी भारतीय चिकित्सा पद्धति का नाम आता है, तो हमारे ज़हन में सबसे पहला नाम आयुर्वेद का आता है। आयुर्वेद (Ayurveda) एक ऐसा शास्त्र है जिसका उद्देश्य मनुष्य को स्वस्थ व रोग-रहित जीवन देना है। यदि फिर भी कोई रोग की चपेट में आ जाए तो ऐसे में उसका उपचार करना है। आयुर्वेद में भोजन को औषधि कहा गया है। अत: यदि हम भोजन का ही उचित रूप से सेवन करें, तो हमेशा स्वस्थ और निरोगी रहेंगे। ‎’आयुर्वेद’ दो शब्दों आयु तथा वेद(ज्ञान) से बना हैl अत: जिससे आयु का ज्ञान हो उसे आयुर्वेद कहते हैं। लेकिन यहाँ आयु का मतलब केवल उम्र नहीं है। आयुर्वेद में शरीर, इन्द्रिय (ज्ञानेन्द्रियाँ और कर्मेन्द्रियाँ) मन और आत्मा(Consciousness) के संयोग को आयु कहते हैं। इन सभी के स्तर पर स्वस्थ होकर मनुष्य संपूर्ण रूप से स्वस्थ रह सकता है और दीर्घायु को प्राप्त कर सकता है। आयुर्वेद में व्यक्ति के स्वास्थ्य के रक्षण के लिए पौष्टिक भोजन, दिनचर्या, रात्रिचर्या, ऋतुचर्या, आहार-विहार, पथ्य-अपथ्य इत्यादि का वर्णन किया गया है। ‎आइये जानते हैं कि आयुर्वेदके अनुसार हम एक बेहतरीन सुबह की शुरुआत कैसे कर सकते हैं- 1.उठने का समय : ब्रह्ममुहूर्त हमें ब्रह्ममुहूर्त अर्थात् सूर्योदय से दो घंटे पूर्व लगभग सुबह 4 से 5:30 बजे के बीच उठ जाना चाहिए। उठने का यह समय सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि ब्रह्ममुहूर्त में शरीर को स्वच्छ, सात्त्विक और प्रदूषण रहित वायु मिलती है। ब्रह्म मुहूर्त के समय उठने पर नित्य कर्म करने से हमारी आयु लम्बी होती है। 2.उषापान- सुबह-सुबह पानी पीने की प्रक्रिया उषा का अर्थ होता है सुबह और सुबह-सुबह पानी पीने की प्रक्रिया को उषापान कहा जाता है। उषापान में धातु(चांदी, तांबा, सोना आदि) के बर्तन में रात भर रखे हुए साफ पानी को पिया जाता है। तांबे के बर्तन में रखा सादा या हल्का गुनगुना पानी पीना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। आयुर्वेद के अनुसार हमें सुबह उठने के बाद बिना कुल्ला किये यह पानी पीना चाहिए। हमें लगभग 1.4 लीटर पानी को थोड़ा थोड़ा करके पीना चाहिए ताकि हमारी आतें(intestines), जो लगभग 6 से 8.5 मीटर लंबी होती हैं, पूरी तरह से साफ़ हों पाएँ। शुरुआत में एक या दो गिलास पानी से शुरुआत करें, फिर धीरे धीरे ये मात्रा बढ़ाकर 4 से 6 गिलास करें।‎यह आंतों को साफ़ करने के अलावा पूरी रात सोने के बाद सुबह हमारी बॉडी को दोबारा हाइड्रेट करता है। यह दिमाग को तरोताजा करता है और शरीर को ऊर्जा देता है। यह अपच की समस्या को भी दूर करता है। मुंह और दांतों के विकारों को भी ठीक करता है। 3.मलोत्सर्ग या मल त्याग करना: उठने के बाद मल का त्याग मौन होकर करना चाहिए। प्रयत्नपूर्वक मलोत्सर्ग नहीं करना चाहिए। यदि आप नियमित और प्रतिदिन मल का त्याग करते हैं, तो आपका शरीर स्वस्थ, पवित्र और दुर्गन्ध रहित होकर स्वच्छ हो जाता है। इसके लिए आपको सही मात्रा में संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए और अपनी शरीर की जरूरत के अनुसार पानी पीते रहना चाहिए। 4. आयुर्वेद में मुख-प्रक्षालन (मुख की शुद्धि) मल का त्याग करने के पश्चात् अपने हाथों को अच्छी तरह से धोकर, स्वच्छ जल से अपने मुख, आँख, नाक, कान तथा चेहरे को अच्छी तरह धोना चाहिए। इससे सुस्ती दूर होती है और मुख की शुद्धि होती है। 5.दाँत साफ करना: आयुर्वेद के अनुसार, आगे की ओर से कोमल दातुन से प्रातः और भोजन के पश्चात् दातुन करना चाहिए। दातुन को छोटी अंगुली के समान मोटी, सीधी तथा लम्बाई में 12 अंगुली होना चाहिए। दातुन के द्वारा किसी भी प्रकार से मसूढ़ों को हानि न पहुँचाएँ। लम्बी दातुन से चीरकर जीभ को भी साफ करें।‎आजकल दाँतों के लिए टूथब्रश और टूथपेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। इनका सावधानी से गर्म पानी के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। 6.गण्डूष (Oil pulling): गण्डूष या ऑयल पुलिंग में मुंह में तेल भरकर कुछ देर के लिए उसे मुंह में चारों तरफ घुमाया जाता है। इसके बाद इस तेल का कुल्ला कर दिया जाता है। आप 4 से 5 मिनट तक इस प्रक्रिया को कर सकते हैं। इसके लिए तिल या सरसों का तेल के प्रयोग को उत्तम कहा गया है। गण्डूष क्रिया होंठों का फटना, मुँह का सूखना और छाले इत्यादि के लिए फायदेमंद होती है। इससे दाँत और मसूड़े मजबूत होते हैं और मुख की मलिनता और दुर्गन्धता का नाश होता है। 7.अभ्यंग(तेल मालिश): आयुर्वेद के अनुसार ‎आयुर्वेद के अनुसार प्रतिदिन शरीर पर अभ्यंग यानि तेल मालिश करनी चाहिए। इससे त्वचा साफ़ और शरीर मजबूत होता है। तेल को हल्के हाथों से पूरे शरीर पर लगाना चाहिए। सिर, कान और पैर के तलवों का विशेष रूप से प्रतिदिन अभ्यंग करना चाहिए। पैरों में तेल लगाने से आँखों की रोशनी बढ़ती है, रूखापन, थकावट, पैरों का फटना, आदि नहीं होते। कान में तेल लगाने से कान दर्द, बहरापन, कान के रोग इत्यादि नहीं होते। सिर पर तेल लगाने से बालों के गिरना रुकता है, सफेद बालों में कमी आती है, सिरदर्द नहीं होता है। अभ्यंग से चेहरे पर चमक आती है और मन शांत होता है। 8.योग व ध्यान: सबसे पहले वॉर्म अप के लिए कुछ हल्के व्यायाम फिर सूर्य नमस्कार और क्षमतानुसार अन्य आसन करने चाहिए तथा कूल डाउन के लिए शवासन या तितली आसान किया जा सकता है। तत्पश्चात् ध्यान व प्राणायाम करना चाहिए, ताकि पूरे दिन शरीर व मन ऊर्जावान रहे।‎आयुर्वेद मतानुसार शक्ति से अधिक व्यायाम नहीं करना चाहिए, वह शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। व्यायाम अपनी आधी शक्ति अर्थात् माथे पर पसीना आने तक करना चाहिए। 9.स्नान: स्नान यानि नहाने से शरीर साफ होता है और ताज़गी मिलती है। इससे पसीना, गंदगी और थकान दूर होती है, तथा शरीर को ऊर्जा मिलती है, इससे शरीर भी स्वच्छ होता है और मन को भी प्रसन्नता मिलती है। 10.सुबह का भोजन: आयुर्वेद के अनुसार हमें अपनी प्रकृति (वात, पित्त या कफ) तथा ऋतु के अनुसार भोजन करना चाहिए। तथा सुबह के नाश्ते में सदैव ताज़ा, गर्म व हल्का भोजन करना चाहिए। क्योंकि सुबह के समय हमारी पाचन अग्नि बढ़ने की प्रक्रिया चल रही होती है और गर्म भोजन जल्दी पचता है। अत: नाश्ते में अत्यधिक मसालेदार, भारी या कच्चा भोजन नहीं करना चाहिए। आजकल हम समय

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मानसून में नेशनल पार्क क्यों बंद रहते हैं? जानिए इसके पीछे के कारण

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हर साल जब जून के अंत में मानसून की पहली बारिश धरती को भिगोती है, तो जंगलों की हरियाली और भी गाढ़ी हो जाती है। लेकिन क्या आपने गौर किया है कि इसी समय भारत के ज्यादातर नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व अपने दरवाज़े पर्यटकों के लिए बंद कर देते हैं? अगर आप जंगल सफारी और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो ये सवाल ज़रूर मन में आता होगा — आख़िर मानसून में नेशनल पार्क क्यों बंद रहते हैं?फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल के इस ब्लॉग में हम इसी सवाल का जवाब जानेंगे, और आपको बताएंगे कि इसके पीछे केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि प्राकृतिक और पारिस्थितिकी (इकोलॉजिकल) कारण भी हैं। प्रजनन का मौसम – जानवरों को चाहिए शांति मानसून के महीने यानी जुलाई से सितंबर के बीच अधिकतर वन्यजीवों का प्रजनन (Breeding) समय होता है। बाघ, तेंदुए, हिरण, हाथी जैसे जानवर इसी दौरान अपने शावकों को जन्म देते हैं या उनके पालन-पोषण में व्यस्त रहते हैं। ऐसे समय में टूरिस्ट की हलचल, सफारी जीपों की आवाज़ और कैमरों की क्लिक जानवरों को डरा सकती है।इसलिए पार्क प्रशासन इन महीनों में नेशनल पार्कों को बंद करके जानवरों को एक शांत वातावरण प्रदान करता है। खराब रास्ते और जलभराव – सफारी बन सकती है खतरनाक मानसून में जब लगातार बारिश होती है, तो जंगल के कच्चे रास्ते कीचड़ भरे और फिसलनदार हो जाते हैं।इससे सफारी जीपों का फँसना आम हो जाता है और कई बार तो दुर्घटनाएँ भी हो सकती हैं।पार्क प्रशासन इन हालातों में न केवल पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखता है, बल्कि जंगल की मिट्टी और पेड़ों की रक्षा भी करना ज़रूरी समझता है। भारी वाहन इन नर्म रास्तों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। बढ़ जाता है कीड़े-मकोड़ों और सांपों का खतरा बरसात के मौसम में सांप, बिच्छू, मच्छर और अन्य कीड़े-मकोड़े ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं।इनका सामना पर्यटकों के साथ-साथ सफारी गाइड और कर्मचारियों को भी करना पड़ सकता है।संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों से बचाने के लिए भी मानसून में पार्कों को बंद रखना समझदारी होती है। जंगल की हरियाली – लेकिन दिखते नहीं जानवर मानसून में जंगल हरे-भरे हो जाते हैं, जो देखने में तो बेहद सुंदर लगता है, लेकिन जानवरों को देख पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।घनी घास और पेड़ों के बीच शेर, बाघ या हाथी अक्सर दिखाई ही नहीं देते।इसलिए सफारी का अनुभव उतना अच्छा नहीं रहता, और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स को निराशा हाथ लग सकती है। भूस्खलन और पर्यावरणीय खतरे कुछ नेशनल पार्क जैसे जिम कॉर्बेट, राजाजी, या काज़ीरंगा जैसे इलाकों में भूस्खलन या बाढ़ की आशंका बनी रहती है।ऐसे में टूरिस्ट की जान जोखिम में पड़ सकती है, साथ ही प्राकृतिक नुकसान भी ज्यादा होता है। मानसून में नेशनल पार्क कब तक रहते हैं बंद? पार्क का नाम-बंद रहने का समयजिम कॉर्बेट- 15 जून से 15 नवंबर तकरणथंभौर टाइगर रिज़र्व – 1 जुलाई से 30 सितंबरकाजीरंगा नेशनल पार्क – जून से अक्टूबर तकबांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व – 1 जुलाई से 15 अक्टूबर तारीखें मौसम पर निर्भर करती हैं; कुछ क्षेत्रों में बारिश जल्दी या देर से आती है। लेकिन कुछ पार्क रहते हैं आंशिक रूप से खुले! कुछ जगह जैसे रणथंभौर, सरिस्का, या पेंच टाइगर रिज़र्व के चुनिंदा जोन मानसून में भी सीमित सफारी की अनुमति देते हैं।लेकिन यहाँ भी बुकिंग सीमित होती है और पर्यटकों को खास सावधानी बरतनी होती है।मानसून में पार्क बंद होना नकारात्मक नहीं, बल्कि एक ज़रूरी कदम है। इससे न केवल जानवरों को सुरक्षित और शांत वातावरण मिलता है, बल्कि जंगल की प्राकृतिक पुनर्जीवन प्रक्रिया भी पूरी हो पाती है। तो अगर आप जंगल प्रेमी हैं, तो अगली बार मानसून के दौरान सफारी की योजना बनाने से पहले इस ब्रेक को ‘नेचर की जरूरत’ समझें – और अगली सीजन में जब पार्क फिर से खुलें, तो एक अद्भुत अनुभव आपका इंतजार कर रहा होगा!

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पहाड़ों की रानी मसूरी: जहाँ वादियाँ दिल के हाल सुनाती हैं

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धुंध में लिपटी वो सुबह की वादियाँ,बोलती नहीं… पर सब कुछ कह जाती हैं।हर मोड़ पर रुकी हुई सी एक कहानी,यहाँ की हवा भी जैसे गीत सुनाती है।हाँ, मसूरी, सिर्फ़ एक जगह नहीं,बल्कि जिन्दादिली से भरी एक नज़्म है जो बस दिल में उतर जाती है… मसूरी की गलियों में टहलिए, झीलों में अपना अक्स देखिए, और हर सांस में पहाड़ों की ताजगी भर लीजिए। चाहे आप फैमिली ट्रिप पर हों या रोमांटिक हनीमून पर, मसूरी हर किसी के लिए कुछ न कुछ खास ज़रूर लेकर आती है। उत्तराखंड की वो पहाड़ों की रानी जो हर मौसम में दिल चुरा लेती है।हिमालय की वादियों में बसा यह हिल स्टेशन ना सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य का खज़ाना है, बल्कि सुकून, रोमांच और रोमांस का अद्वितीय संगम भी है। अगर आप भारत के बेस्ट हिल स्टेशनों में छुट्टियाँ बिताने की योजना बना रहे हैं, तो मसूरी को ज़रूर आपकी ट्रैवल सूची में होना चाहिए।मसूरी उत्तराखंड राज्य के देहरादून जिले में स्थित है और समुद्र तल से लगभग 2,000 मीटर की ऊँचाई पर बसा है। यह देहरादून से केवल 35 किलोमीटर की दूरी पर है और यहाँ सड़क मार्ग से आराम से पहुँचा जा सकता है। मसूरी में घूमने की जगहें | Top Places to Visit in Mussoorie केम्पटी फॉल्स (Kempty Falls) मसूरी का सबसे लोकप्रिय झरनामसूरी की खूबसूरती में चार चाँद लगाने वाला स्थान है केम्पटी फॉल्स, जो ना सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि यहां हर साल लाखों पर्यटक अपनी यादों में एक ठंडी, झरने से भीगी छाप ले जाते हैं। हरियाली के बीच गिरते झरने की आवाज़ आपके दिल को सुकून देगी। यहाँ आप नहाने और पिकनिक का मजा ले सकते हैं।केम्पटी फॉल्स, मसूरी से लगभग 12 किलोमीटर दूर यमुनोत्री रोड पर स्थित है। गन हिल पॉइंट (Gun Hill Point) मसूरी की सबसे प्रसिद्ध और ऊँची जगहों में से एक है गन हिल पॉइंट (Gun Hill Point)। यह स्थान केवल एक व्यू पॉइंट नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक धरोहर, रोमांच और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग है। अगर आप मसूरी के बेस्ट व्यू पॉइंट्स खोज रहे हैं, तो गन हिल पॉइंट आपकी सूची में सबसे ऊपर होना चाहिए। मसूरी का दूसरा सबसे ऊँचा स्थान, जहाँ से आपको हिमालय की बर्फीली चोटियाँ साफ़ दिखाई देंगी। यहाँ आप केबल कार की सवारी करना ना भूलें।गन हिल का नाम एक समय की ब्रिटिश सैन्य परंपरा से जुड़ा है। कहा जाता है कि अंग्रेजी शासन काल में हर दिन दोपहर को एक तोप (Gun) दागी जाती थी, जिससे लोग अपने घड़ियों का समय मिला सकें। तभी से इस जगह का नाम पड़ा गन हिल।यह मसूरी के मॉल रोड से लगभग 400 फीट ऊपर स्थित है। आप यहां पैदल ट्रेक करते हुए या केबल कार (Ropeway) से पहुंच सकते हैं, जो लिबरटी चौक से शुरू होती है। मॉल रोड (Mall Road) मॉल रोड मसूरी का वो हिस्सा है जो हर यात्री के दिल को छू लेता है। ये सड़क सिर्फ चलने का रास्ता नहीं, बल्कि मसूरी के इतिहास, संस्कृति, स्वाद और शॉपिंग का सबसे जीवंत केन्द्र है। शॉपिंग, लोकल स्ट्रीट फूड और झील के किनारे टहलने का परफेक्ट कॉम्बिनेशन है यह जगह। मॉल रोड, मसूरी का धड़कता हुआ दिल है, जहाँ हर कदम पर एक नई कहानी, एक नया स्वाद और एक नई याद मिलती है।यह जगह यात्रियों को अपने जीवन की रफ्तार से हटाकर कुछ देर के लिए ठहरने, देखने, महसूस करने और मुस्कुराने का मौका देती है। “मसूरी की रूह अगर कहीं बसती है, तो वो है – मॉल रोड पर, जहाँ हर शाम एक उत्सव सी लगती है।”सड़क के किनारे बने बेंचों से वादियों और घाटियों का नज़ारा ले सकते हैं। सूर्यास्त के समय का दृश्य खास तौर पर मनमोहक होता है। यहां का ब्रिटिश-कालीन लैंप पोस्ट और पैदल पथ फोटोग्राफी के लिए परफेक्ट हैं।मॉल रोड मसूरी के लाइब्रेरी चौक (Library Chowk) से शुरू होकर पिक्चर पैलेस तक फैला हुआ है। यह मसूरी की मुख्य सड़क है, जो स्थानीय जीवन और पर्यटक गतिविधियों का केन्द्र मानी जाती है। लाल टिब्बा (Lal Tibba) लाल टिब्बा (Lal Tibba) मसूरी का सबसे ऊँचा और सबसे शांत व्यू पॉइंट है, जहाँ से आप हिमालय की बर्फ़ीली चोटियों को अपनी आंखों के सामने महसूस कर सकते हैं। ये वो जगह है जहाँ नज़ारा सिर्फ “देखा” नहीं जाता, बल्कि जिया जाता है। लाल टिब्बा मसूरी के लैंडौर क्षेत्र में स्थित है। यह जगह फोटोग्राफरों के लिए स्वर्ग है। टेलिस्कोप से आप केदारनाथ और बद्रीनाथ की पहाड़ियों को देख सकते हैं।यहां शोरगुल बहुत कम होता है, जो इसे मेडिटेशन और रिलैक्सेशन के लिए आदर्श बनाता है।पक्षियों की चहचहाहट, देवदार और बुरांश के वृक्षों की भीनी भीनी खुशबू यहाँ के माहौल को खुशनुमा बनाने के लिए काफी है. मसूरी झील (Mussoorie Lake) मसूरी झील एक कृत्रिम लेकिन बेहद सुंदर झील है, जो मसूरी की प्राकृतिक सुंदरता और सुकून भरे पलों का संगम है। यह झील परिवार, कपल्स और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए एक आदर्श स्थान है, जहाँ झील के शांत पानी में नौका विहार (boating) और चारों ओर पहाड़ियों की हरियाली आपका स्वागत करती है। मसूरी झील मसूरी-देहरादून मार्ग पर स्थित है। यह मसूरी से लगभग 6 किलोमीटर पहले स्थित है – यानी देहरादून से मसूरी आते समय रास्ते में ही।झील में पेडल बोटिंग और फैमिली बोट राइड्स उपलब्ध हैं। झील के चारों ओर खूबसूरत पहाड़ियाँ, ठंडी हवा और झील में तैरती नावें आपको रोमांच से भरने के लिए काफी हैं. क्राइस्ट चर्च (Christ Church) मसूरी सिर्फ पहाड़ों, झीलों और बाजारों की नगरी नहीं है — यह एक सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत भी समेटे हुए है। यहाँ की पुरानी गॉथिक स्टाइल चर्च न सिर्फ आस्था का केंद्र हैं, बल्कि अंग्रेज़ी शासनकाल की वास्तुकला और इतिहास की अनमोल धरोहर भी हैं।यह मॉल रोड के पास, कासल हिल में स्थित है. इसकी स्थापना वर्ष 1836 में हुई थी.यह उत्तर भारत की सबसे पुरानी प्रोटेस्टेंट चर्चों में से एक है. मसूरी में खाने की खास चीज़ें • तिब्बती मोमोज़• गरमा-गरम कॉर्नर कॉफी• मैगी प्वाइंट्स पर पहाड़ी स्टाइल मैगी• बेकरीज़ में बन और पेस्ट्रीज़ मसूरी में कहाँ ठहरें? | Best Hotels in Mussoorie मसूरी में ठहरने के लिए आपको हर तरह के विकल्प मिलते हैं – बजट फ्रेंडली होमस्टे

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Lakshadweep-रूट से लेकर बजट तक, जानिए लक्षद्वीप ट्रिप के बारे में सब कुछ

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Explore the Beautiful Beaches of Lakshadweep प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप जाने के साथ मालदीव बनाम लक्षद्वीप का विवाद सुर्खियों में आ गया। अब भारत के बड़े-बड़े सेलिब्रिटी से लेकर क्रिकेटर तक लक्षद्वीप जाने की बात कर रहे हैं और लक्षद्वीप एक बेतरीन टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है। ऐसे में अगर आप भी लक्षद्वीप की यात्रा करना चाहते हैं तो यह ब्लॉग आपको आपके लिए बहुत ही मददगार साबित होगा। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम बात करने वाले हैं लक्षद्वीप के कुछ फेमस द्वीपों के बारे में और इस ब्लॉग में हम यह भी बात करेंगे कि लक्षद्वीप कैसे पहुंचे? कहां ठहरें? और लक्षद्वीप के दौर में आपके लिए कितना तक का आएगा? परमिट की होगी आवश्यकता (Permit will be required) : भारत के कुछ संवेदनशील जगहों पर जाने के लिए गवर्नमेंट से परमिट लेने की आवश्यकता होती है। लक्षद्वीप भी उन्हीं जगहों में से एक है। यहां जाने के लिए आपको परमिट लेने की जरूरत होगी। लेकिन घबराने वाली बात नहीं है क्योंकि परमिट लेना इतना भी मुश्किल काम नहीं है। अगर आप परमिट लेना चाहते हैं तो आप सबसे पहले केरल के कोच्चि स्थित कार्यालय में जाकर परमिट के लिए अप्लाई कर सकते हैं और अपना पर बनवा सकते हैं। उसके बाद आप अपनी आगे की यात्रा जारी रख सकते हैं। इसके अलावा अगर आप इन सब पचड़ों में नहीं पड़ना चाहते हैं तो आप ऑनलाइन बुकिंग भी कर सकते हैं। इसके लिए आपको लक्षद्वीप गवर्नमेंट के वेबसाइट पर जाकर एंट्री परमिट के लिए अप्लाई करना होगा। जिसका लिंक नीचे दिया गया है :- http://epermit.utl.gov.in लक्षद्वीप जाने का सबसे बेहतरीन समय (Best time to visit Lakshadweep) : अगर बात करें कि लक्षद्वीप कब जाना चाहिए तो लक्षद्वीप का मौसम हमेशा हीं अच्छा होता है और घूमने लायक होता है लेकिन गर्मी के समय में इक्वेटर से नजदीक होने के कारण यहां ज्यादा गर्मी होती है। इसलिए आप अक्टूबर से मई तक के समय में यहां जाने की कोशिश करें। क्योंकि इस समय जहां उत्तर भारत में भीषण ठंड का प्रकोप होता है, वहां लक्षद्वीप में मौसम सुहाना और घूमने लायक होता है। इस वजह से आप यहां बहुत हीं अच्छे से अपना वोकेशन इंजॉय कर पाएंगे। लक्षद्वीप घूमने के लिए कितने समय की आवश्यकता होगी? (Time require to explore Lakshadweep) : अगर बात करें लक्षद्वीप घूमने के लिए आपको कितने दिनों के ट्रिप की बुकिंग करनी होगी तो हम आपको बता दे कि लक्षद्वीप घूमना बहुत ही आसान है। यह बहुत ही खूबसूरत और ईजी टू एक्सप्लोर जगह है। इस वजह से आप इसे 5 दिन में हीं बहुत ही आसानी से और बहुत ही बेहतरीन तरीके से घूम लेंगे। हां अगर आप ज्यादा दिनों तक समय लेकर यहाँ आना चाहते हैं तो यह एक अच्छा ऑप्शन है। क्योंकि शायद 5 दिन में यहाँ सब कुछ घूम लेने के बाद भी आपका मन यहाँ से जाने का नहीं करेगा। क्योंकि यह जगह है ही इतनी खूबसूरत कि लोगों को खुद से बांध लेती है। क्या होगा बजट (Budget for Lakshadweep tour) : अगर बात करें लक्ष्यदीप जाने के लिए आपको कितने बजट की आवश्यकता होगी तो यह डिपेंड करता है कि आप किस शहर से लक्षद्वीप जा रहे हैं। हालांकि लक्षद्वीप में ठहरने और घूमने फिरने का खर्च लगभग 40,000 से शुरू होकर 1,20,000 तक जा सकता है। यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप किस तरह की और कितनी प्रीमियम सेवाओं का उपयोग करते हैं। लक्षद्वीप में घूमने लायक जगह (Places to visit in Lakshadweep) :लक्षद्वीप में घूमने के लिए बहुत सारी जगहें हैं अगर आप जानना चाहते हैं कि यहां घूमने के लिए कौन कौन से द्वीप हैं तो हम आपको बता दे यहां के सबसे खूबसूरत द्वीपों में अगात्ति, बंगाराम, कल्पनी, कदमत जैसे द्वीप फेमस हैं। इसके अतिरिक्त लक्षद्वीप की राजधानी कवारत्ती भी काफी खूबसूरत है। आप इसे भी एक्सप्लोर कर सकते हैं। लक्षद्वीप कैसे पहुंचे (How to reach Lakshadweep?)अगर आप उत्तर भारत से हैं तो आपको लक्षद्वीप जाने के लिए अपने शहर से कोच्चि शहर के लिए ट्रेन अथवा फ्लाइट लेने की आवश्यकता होगी। क्योंकि लक्षद्वीप के लिए दिल्ली जैसे उत्तर भारतीय शहरों से डायरेक्ट फ्लाइट की व्यवस्था नहीं है।अगर आप फ्लाइट से लक्षद्वीप जाना चाहते हैं तो आप सबसे पहले केरल के कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट लेकर कोच्चि पहुंच जाएँ। फिर वहां से अपना लक्षद्वीप जाने का परमिट बनवाकर अगात्ति हवाई अड्डा के लिए फ्लाइट ले सकते हैं।वहीं अगर आप ट्रेन के जरिए लक्षद्वीप जाना चाहते हैं तो आप कोच्चि के लिए ट्रेन ले सकते हैं। हालांकि कोच्चि शहर के बाद आप या तो फ्लाइट या फिर बोट के जरिए ही लक्षद्वीप जा पाएंगे। अगर आप क्रूज के सफर का आनंद लेना चाहते हैं तो आपको मुंबई, गोवा, कोच्चि, बेपोर और मंगलौर जैसे शहरों से डायरेक्ट क्रूज कनेक्टिविटी मिल जाएगी और आप बड़े हीं आराम से लक्षद्वीप विजिट करने के लिए जा सकते हैं।

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ट्रैकिंग और कैंपिंग के लिए बेहतरीन बेहतरीन डेस्टिनेशन है माल देवता

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कहते हैं किसी हिल स्टेशन पर जाना तब तक वर्थ ईट नहीं होता है जब तक कि आप वहां जाकर ट्रैकिंग, कैंपिंग और बोनफायर का मजा ना ले। खासकर ट्रैवलिंग को पसंद करने वाले लोगों के लिए तो यह मस्ट नीडेड है। और ऐसा हो भी क्यों ना, यह सारे एक्टिविटीज ऐसे हैं जो आपके ट्रैवलिंग के एक्सपीरियंस को कई गुना बेहतर बना देते हैं। ट्रैवलिंग के दौरान की गई इन एक्टिविटीज की यादें जिंदगी भर कभी ना भूली जा सकने वाली यादों के रूप में आपके साथ रहती हैं। अगर आप भी ट्रैवलिंग के शौकीन हैं और अपने ट्रैवल ट्रिप पर ट्रैकिंग और कैंपिंग जैसी एक्टिविटीज करना चाहते हैं तो भीड़भाड़ और शोर-शराबे से दूर स्थित शहर ‘मालदेवता’ में आपका स्वागत है। प्रकृत‍ि की गोद में चारो तरफ पहाड़ियों और हरियाली से सजा-धजा ‘मालदेवता’ आजकल टूरिस्ट्स के लिए फेवरेट डेस्टिनेशन (Favourite destination) बनता जा रहा है। वजह है इसकी खूबसूरती और यहाँ बहती नदी और झरनों का गीत संगीत। यहां पर्वतों से गिरने वाले छोटे-छोटे झरनों का संगीत विजिटर्स का ध्‍यान अपनी ओर खींच ही लेते हैं। यही वजह है कि बीते कुछ सालों में यह देहरादून का सबसे डिमांड वाला डेस्टिनेशन है। मालदेवता में आप क्या-क्या कर सकते हैं? (Things to do in Maldevta) यहां की खूबसूरत वादियों को देखकर आपका भी मन कैंपिंग करने को कहेगा, तो आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं। यहां आसानी से आपको रेंट पर कैंप मिल जाएंगे। लोग यहां रेस्‍टोरेंट में जाने से ज्‍यादा खुद चूल्‍हा बनाकर या पेट्रोमैक्‍स में खाना बनाना पसंद करते हैं। इसके अलावा आप यहाँ ट्रैकिंग कर सकते हैं , ट्रैकिंग के लिए अगर आप अकेले हैं और आपको रास्‍ता समझ न आ रहा हो तो आपको यहाँ गाइड (Tour guide) भी मिल जाएंगे जो आपके ट्रैकिंग (trekking) के इस शौक को पूरा करने में मदद करेंगे। यहां आप कैंपिंग (Camping) कर सकते हैं। पिकनिक (Best Picnic spot) के लिए यह बेहतर आप्‍शन है। इसके अलावा ट्रैकिंग और पैराग्‍लाडिंग भी कर सकते हैं। यहां कई रेस्‍टोरेंट और होटल भी हैं। जहां बेहतरीन खाने के साथ कुछ दिन प्रकृति के बीच में रुक भी सकते हैं।वैसे अधिकतर यहाँ वीकेंड (weekend rush) पर ज्यादा भीड़ दिखाई देती है। क्योंकि वीकेंड पर यहाँ देहरादून के लोकल लोग भी पिकनिक मनाने आ जाते हैं। चाहे वह किसी भी ऐज ग्रुप के क्यों न हो। मलदेवता ही क्यों? (Why Maldevta?) मालदेवता आने का सबसे सही समय ( Best time to visit Maldevta) वैसे यहाँ आने का सबसे बेहतर समय सर्दियों का ही माना जाता है या फिर आप अगर नदी के एडवेंचर (Adventure) का मजा लेना चाहते हैं तो जुलाई अगस्त में भी आ सकते है उस समय यहाँ आपको चारो और हरियाली ही हरियाली (Greenery) दिखाई देगी। कैसे पहुंचे? (How to reach Maldevta?)मालदेवता देहरादून से सिर्फ 17-18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां जाने के लिए आप देहरादून सिटी बस या फिर लोकल ट्रैवल (Local travel options) में ऑटो, स्‍मॉल कैब्‍स ले सकते हैं। अगर आप अपनी कार से यहाँ आते हैं तो इससे बेहतर तो क्या ही कुछ होगा। क्योंकि यहाँ का सफर ही यहाँ का पैसा वसूल है। मालदेवता में कहां ठहरे? (Where to stay in Maldevta) मालदेवता में ठहरने के लिए आपको हर तरह के होटल (Hotel) और होमस्टे (Home stay) मिल जाएंगे। आप अपने बजट (Accourding to your Budget) के हिसाब से यहां होटल या फिर होम स्टे ले सकते हैं। इसके अलावा आप माल देवता में कैंपिंग भी कर सकते हैं। यहां आपको आसानी से कैंपिंग टेंट रेंट (Camping tent is also avilable on rent) पर मिल जाएंगे।

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कसौली हिल स्टेशन के लिए ऐसे प्लान करें अपना ट्रिप

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खूबसूरत पहाड़ियों के पनाह में एक छोटा सा हिल स्टेशन बसा हुआ है, जिसे लोग कसौली के नाम से जानते हैं। अगर आप चंडीगढ़ से शिमला की ओर बढ़ेंगे तो आपको रास्ते में सबसे पहला हिल स्टेशन कसौली हीं मिलेगा। अब क्योंकि यह शहर पहाड़ियों के गोद में बसा हुआ है इसलिए इसकी खूबसूरती भी काफी मनमोहक है। यहीं वजह है कि हर साल यहां हजारों लोग अपनी गर्मी की छुट्टियां मनाने आते हैं और जमकर एंजॉय करते हैं। आज के इस ब्लॉग में हम आपको बताने जा रहे हैं कसौली के उन खूबसूरत ठिकानों के बारे में जहां जाए बिना कसौली के सफर को अधूरा माना जाता है।अगर आप कभी भी कसौली नहीं गए हैं तो आप यहां के लिए एक अच्छा सा वीकेंड का ट्रिप प्लान कर सकते हैं। क्योंकि कसौली दिल्ली और चंडीगढ़ से सबसे नजदीकी हिल स्टेशन है। अगर बात किया जाए कसौली के हिस्ट्री की तो अंग्रेजों ने यहां की प्राकृतिक खूबसूरती को देखते हुए इसे जगह को हिल स्टेशन के रूप में डेवलप किया था। आज के टाइम में यह सेना की छावनी के अधिकार का इलाका है। इस जगह घूमने के लिए कई तरह के पॉपुलर डेस्टिनेशन हैं जिनके नाम निम्नांकित हैं :- यह चर्च 1844 में अंग्रेजों के द्वारा बनवाया गया था। कसौली विजिट (visit) करते समय आप सबसे पहले इस पॉइंट (point) को विजिट कर सकते हैं। क्योंकि यह कसौली के मेन पार्किंग एरिया से बहुत हीं नजदीकी स्थित है। अगर आप कसौली अपनी गाड़ी से जा रहे हैं तो गाड़ी पार्क करने के बाद आप इस जगह को विजिट करने जा सकते हैं। यह बहुत हीं शांत जगह है और यहां पर्यटकों की अच्छी खासी संख्या होने के बावजूद भी आपको एक अलग हीं शांति का एहसास होगा। इस चर्च के बारे में एक और खास बात यह है कि यह हिमाचल प्रदेश का सबसे पुराना चर्च है। इसमें लगाए गए शीशे (glass) खास तौर पर इंग्लैंड से मंगवाए गए थे। इस चर्च में विजिट करने की टाइमिंग (timings) सुबह 7:00 बजे से शाम के 7:00 बजे की है। माल रोड पर आपको कई तरह के कपड़ों के दुकान देखने को मिलेंगे। वहां से आप हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक कपड़ों को खरीद सकते हैं। साथ ही साथ गर्म कपड़े भी खरीद सकते हैं। इसके अलावा आप माल रोड पर अपने घर वालों या अपने पसंदीदा लोगों को गिफ्ट करने के लिए कई तरह के वुडन आइटम्स भी खरीद सकते हैं। अगर आपको भी बाजारों को इग्नोर करना अच्छा लगता है तो मॉल रोड आपके लिए एक बेहतरीन शॉपिंग डेस्टिनेशन हो सकता है। बहुत हीं अलग-अलग तरह के आइटम आपको यहाँ मिल जाएंगे। आपको माल रोड में शॉपिंग की बहुत अच्छी वैरायटी देखने को मिल जाएंगी।इसके अलावा माल रोड पर स्ट्रीट फूड के भी कई सारे आइटम्स मिलते हैं। आप भी इन लजीज स्ट्रीट फूड्स का लुफ्त उठाना ना भूलें। गिलबर्ट ट्रेल डेढ़ किलोमीटर तक का एक बहुत हीं पतला संकरा सा रास्ता है। जो लोगों को ले जाता है सुसाइडल पॉइंट की ओर! जहां से मिलने वाले व्यूज बहुत हीं अमेजिंग होते हैं। जिन्हें शब्दों में बयां कर पाना बहुत हीं मुश्किल है। गिलबर्ट ट्रेल के लिए जब आप चढ़ाई करना शुरू करेंगे तो आपको यह ध्यान रखना होगा कि रास्ता बहुत ही संकरा है और बहुत हीं रिस्की भी। इस बात का ध्यान रखें और आराम आराम से चढ़ाई करें। यह रास्ता जितना पतला संकरा और डिफिकल्ट दिखता है एक्चुअल में यह उतना हीं ज्यादा एडवेंचरस भी है। आप अपने साथ एक पानी का बोतल जरूर कैरी करें। क्योंकि आपको इसकी बहुत ज्यादा जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा जब आप गिलबर्ट ट्रेल की ओर बढ़ेंगे तो रास्ता बहुत आगे तक जाता है। ऐसे में आप भटके ना इसके लिए सुसाइडल पॉइंट तक जाने के लिए एक हमारी ओर से एक लैंडमार्क टिप है। जब आप गिलबर्ट ट्रेल के लिए चढ़ाई शुरू करेंगे और करीब 1.5 किलोमीटर तक चलेंगे तो आपको रास्ते में एक हट दिखेगा। जिसके पीछे से आपको सुसाइडल पॉइंट के लिए रास्ता मिलेगा। सुसाइडल पॉइंट से आप कसौली को एक बहुत हीं अलग नजरिए से एक्सप्लोरर कर सकते हैं। यहां से सनसेट को देखना काफी खूबसूरत होता है। अगर आप नेचर को इंजॉय करना पसंद करते हैं तो यह पॉइंट आपको काफी पसंद आने वाला है। साथ हीं अगर आप फोटोग्राफ़ी भी पसंद करते हैं तो भी यह जगह आपके लिए बहुत हीं बेहतरीन जगह होने वाला है। मंकी प्वाइंट कसौली की सबसे ऊंची पहाड़ी है। जहाँ हनुमान जी का एक मंदिर भी है। इस मंदिर से जुड़ी एक कहानी यह भी है कि जब हनुमान जी संजीवनी लेकर जा रहे थे तब उनका एक कदम इस पहाड़ी पर भी पड़ा था। जहां पर आज के समय में यह मंदिर है। इस मंदिर में आपको बहुत सारे बंदर देखने को मिलेंगे। यहां आने वाले पर्यटकों में इस मंदिर को लेकर काफी क्रेज देखने को मिलता है। माल रोड से मंकी पॉइंट की दूरी लगभग 3.5 किलोमीटर के आसपास है। अगर आप मंकी पॉइंट जाना चाहते हैं तो आप चलते हुए भी जा सकते हैं। मंकी प्वाइंट के लिए टैक्सी की सुविधा भी उपलब्ध है। यहां विजिट करने की टाइमिंग सुबह 9:00 बजे से शाम के 5:00 बजे तक की है। जैसा कि नाम से हीं पता चल रहा है यह कसौली का सबसे बेस्ट सनसेट पॉइंट है। यहां से आपको शाम के सबसे खूबसूरत नज़ारें देखने को मिलेंगे। जिसका एक्सपीरियंस आपकी लाइफ में अनफॉरगेटेबल हो सकता है। यहां पर बैठने के लिए जगहें भी बनाई गईं हैं। आप अपनों के साथ आराम से यहां बैठकर सनसेट को एंजॉय कर सकते हैं। यहां बैठकर जब आप सन सेट को देखोगे तो वह आपको बहुत हीं मैजिकल लगेगा और बहुत ही अच्छा एक्सपीरियंस होगा। अगर आपके पास समय की कमी हो और आपको गिलबर्ट ट्रेल और सनसेट पॉइंट को एक हीं दिन में विजिट करना हो तो आप पहले गिलबर्ट ट्रेल को विजिट कर सकते हैं उसके बाद सनसेट पॉइंट का रुख कर सकते हैं।गिलबर्ट ट्रेल को विजिट करने के बाद सनसेट से लगभग 1 घंटे पहले आप इस पॉइंट पर पहुंच जाना। तब आप यहां बहुत हीं आराम

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कश्मीर को धरती का स्वर्ग बनाते हैं वहां के ये टूरिस्ट प्लेस

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जब भी कश्मीर का जिक्र होता है तो खूबसूरत वादियों और बर्फ से ढ़की पहाड़ियों की कल्पनाएँ दिल में हलचल मचाने लगती हैं। चाहे बच्चे हो या जवान कश्मीर के पहाड़ों में खो जाने की ख्वाहिश सभी को होती है। शायद ही कोई घुमक्कड़ ऐसा होगा जो कश्मीर नहीं जाना चाहता होगा। कश्मीर की प्राकृतिक खुबसुरती इसे भारत का स्वर्ग बनाती है। जिस स्वर्ग को देखने के लिए यहां दुनिया भर से लाखों लोग घूमने आते हैं।हम आपको इस ब्लॉग में कश्मीर के कुछ बेहद खूबसूरत जगहों के बारे में बताएंगे। अगर आप भी कश्मीर जाने की प्लानिंग कर रहे हैं तो कश्मीर की इन जगहों पर जरूर जाएं। 1. वैष्णो देवी मंदिर (vaishno devi mandir) : त्रिकुटा पहाड़ियों में कटरा से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 5300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। माता वैष्णो देवी मंदिर कश्मीर हीं नहीं बल्कि पूरे भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। जहां हर साल लाखों भक्त पूजा अर्चना करने और अपनी मनोकामना मांगने आते हैं। बर्फीली पहाड़ियों में बसा हुआ यह मंदिर काफी शांत और सुंदर है। जहां जाकर आपको अलग हीं तरह की पॉजिटिव एनर्जी और मन की शांति का एहसास होगा। आध्यात्मिक लोगों के लिए यह मंदिर किसी स्वर्ग से कम नहीं है।वैष्णो देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए तीर्थ यात्रियों को लगभग 13 किलोमीटर तक पैदल चलकर ट्रैकिंग करते हुए मंदिर की गुफाओं तक पहुंचना होता है। मां वैष्णो देवी का यह मंदिर भारत के 108 शक्तिपीठों में से एक है। वैष्णो देवी मंदिर जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Vaishno Devi Mandir) : वैष्णो देवी मंदिर पूरे साल श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। इसीलिए वहां कभी भी जाया जा सकता है, लेकिन मार्च से मई और सितंबर से नवंबर तक का समय यहां आने के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है। इस समय अवधि में यहां श्रद्धालुओं की भी बहुत ज्यादा भीड़ होती है। क्योंकि इस समय में यहां का मौसम बहुत हीं बेहतरीन होता है। जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। 2. ट्यूलिप गार्डन (Tulip Garden) : जैसा कि आप जानते होंगे कि कश्मीर का ट्यूलिप गार्डन एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन के रूप में जाना जाता है। यहां की खूबसूरती देखने के लिए हर साल दूर-दूर से देशी और विदेशी पर्यटक घूमने आते हैं। यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि बेशक ये ट्यूलिप सिर्फ 4-5 दिन के लिए खिलते हैं, लेकिन इस बाग़ में काम करने वाले स्टाफ को यह ध्यान रखना पड़ता है कि ट्यूलिप के बल्ब की क्वालिटी हर साल अच्छी हो। इसके लिए वह साल भर कड़ी मेहनत करते हैं | 2007 में इस गार्डन को इस उद्देश्य के साथ शुरू किया गया था कि इससे कश्मीर वैली में फूलों की खेती और पर्यटन को बढ़ावा मिले। इस गार्डन को ढलान वाले क्षेत्र में सीढ़ीदार तरीके से बनाया गया है। यह इंदिरा गाँधी ट्यूलिप गार्डन 30 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। टयूलिप गार्डन जाने का सबसे बेस्ट समय (Best time to visit Tulip garden) : ट्यूलिप हर साल मार्च से मई के महीने के बीच में खिलते हैं। इनके खिलने की समय अवधि फिक्स नहीं होती है। क्योंकि यह मौसम के अनुरूप हीं खेलते हैं। एक अनुमान के तौर पर कहा जाए तो यह लगभग 1 से 2 सप्ताह के लिए खिलते हैं। इसीलिए ट्यूलिप गार्डन के खुलने की अवधि भी हर साल फिक्स नहीं होती है। अगर आप टयूलिप गार्डन घूमना चाहते हैं तो आपको मार्च से मई तक के समय के लिए प्लानिंग करके रखनी होगी। 3. अमरनाथ की गुफा (Amarnath temple) : भारत के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक अमरनाथ की गुफा हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए एक बहुत हीं प्रमुख साधना स्थल है। भगवान शिव में आस्था रखने वाले लोगों के लिए अमरनाथ की गुफा सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है। अमरनाथ के गुफा में प्राकृतिक रूप से बने हुए बर्फ के शिवलिंग की पूजा की जाती है। यहां हर साल लाखों पर्यटक घूमने के लिए जाते हैं। अमरनाथ की गुफा तक के लिए यात्रा को लोग अमरनाथ यात्रा के नाम से जानते हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि मई जून की गर्मी में भी अमरनाथ के गुफा में यह शिवलिंग बिल्कुल भी नहीं पिघलता है और ज्यों का त्यों ही बना रहता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह वहीं गुफा है, जहां महादेव ने माता पार्वती को जीवन और मृत्यु के सत्य के बारे में बताया था। अमरनाथ जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Amarnath temple): अमरनाथ की गुफा के लिए यात्रा करने का सबसे सही समय मई से अगस्त तक का होता है। सर्दियों में अमरनाथ का मौसम बहुत हीं अधिक कठोर हो जाता है और उस समय यहां बहुत ज्यादा सर्दी होती है। इसीलिए सर्दियों में अमरनाथ यात्रा का प्लान बनाने से बचें। 4. सोनमर्ग (sonamarg) : कश्मीर की वादियों में स्थित सोनमर्ग एक काफी खूबसूरत शहर है। बर्फ से भरे मैदानों, ग्लेशियरों और शांत झीलों वाला यह शहर हमेशा से हीं पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां का माहौल बहुत ही खूबसूरत और शांत है। सोनमर्ग श्रीनगर से लगभग 80 किलोमीटर दूर बसा हुआ शहर है। जो कि समुद्र तल से लगभग 2800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। प्राकृतिक सुंदरता, लुभावने ग्लेशियरों और जीवंत झीलों से भरा या शहर कश्मीर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। जो अपने खुबसुरती से हर साल हजारों भारतीय एवं विदेशी पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है। सोनमार्ग जाने का सबसे सही समय (Best time तो visit sonamarg) सोनमर्ग जाने के लिए सबसे सही समय अप्रैल से सितंबर के बीच का होता है। क्योंकि इस समय भारत के दूसरे राज्य में प्रचंड गर्मी पड़ रही होती है। ऐसे में सोनमर्ग का खुशनुमा मौसम आपको इस भयानक गर्मी से छुटकारा दिला सकता है। 5. पहलगाम (Pahalgam): अगर आप भी केसर के नीले खेतों को देखना चाहते हैं तो पहलगाम इसके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन माना जाता है। पहलगाम अपने केसर के खेतों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां के केसर के

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Best places to visit in Chandigarh –

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पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ एक बहुत खूबसूरत शहर है। ये भारत के केंद्र शासित प्रदेशों में से भी एक है। चंडीगढ़ सिटी को बेहद खूबसूरती के साथ बसाया गया है जो अपनी कला और संस्कृति (art and culture) के लिए जाना जाता है। दोस्तों हम लोगों में अक्सर ये इच्छा रहती है कि सभी जगह के कल्चर को अच्छे से जाने, इसलिए अगर आप भी छुट्टियों के लिए हिमाचल प्रदेश की ओर जाने वाले हैं तो आप पंजाब और हरियाणा के कल्चर को ठीक से समझने के लिए चंडीगढ़ भी जरूर आए। हेरिटेज (Heritage) को अच्छे से समझने वालो के लिए और बाकी सबके लिए भी चंडीगढ़ एक बेस्ट डेस्टिनेशन (Best Destination) है क्योंकि यहां आपको हर दूसरे कदम पर कलाओं का भंडार (art store) मिलेगा। चंडीगढ़ अपने कई खूबसूरत पार्कों और बगीचों की वजह से ‘गार्डन सिटी’ (Garden City) के नाम से फेमस है। ये पार्क और बगीचे भी चंडीगढ़ में घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक हैं। चंडीगढ़ में ऐसे कई टूरिस्ट प्लेस हैं जहां आप न जाकर बड़ी गलती कर सकते हैं। 1. जाकिर हुसैन रोज़ गार्डन (Zakir Hussain Rose Garden)- गुलाबों से भरा यह खूबसूरत और खुशबूदार गार्डन (Nice and Smelling garden) काफी बड़ा है जो की भारत के पूर्व राष्ट्रपति ज़ाकिर हुसैन को डेडिकेटिड (Dedicated) है। ज़ाकिर हुसैन गार्डन में अमेजिंग आर्किटेक्चर (Amazing Architecture) है जो फूलों की खूबसूरती को और भी ज्यादा बढ़ाती है। इस गार्डन सबसे की स्पेशल बात ये है कि यहां 1500 से भी ज्यादा वैरायटी (Variety) के गुलाब लगाए गए हैं । पूरे इंडिया से गुलाब कलेक्ट (Collect) करके यहां लगाए गए हैं। अगर आप अपने हनीमून (Honeymoon) पर हैं और अपने हिमाचल हनीमून पैकेज (Himachal honeymoon package) पर चंडीगढ़ में रुक रहे हैं, तो इस गार्डन का विजिट (Visit) करना एक बढ़िया ऑप्शन (Option) है।कपल्स (Couples) अक्सर ऐसी जगह की तलाश में रहते हैं जहां वो एक दूसरे के साथ कुछ क्वालिटी टाइम स्पेंड (Qualitiy time spend) कर पाएं तो जाकिर हुसैन गार्डन आपकी इस इच्छा को पूरा करने के लिए एक दम सही जगह है। जहां आप फूलों के बीच एक दूसरे से तसल्ली से समय बिता पायेंगे। यहां आने का सबसे अच्छा समय फरवरी और मार्च रहेगा। तो आप भी इस जगह को अपनी डेस्टिनेशन लिस्ट (Destination list) में शामिल कर लें। 2. इस्कॉन मंदिर (Iskcon temple)- पूरे भारत में कृष्ण भगवान की पूजा करने वाले लोगो की संख्या हमारे इमेजिनेशन (Imazination) से भी कई ज्यादा है। और आजकल हम सब ने रील्स (Reels), पोस्ट (Post) और न्यूज (News) में भी इस्कॉन मंदिर का नाम तो सुना ही होगा जो कि काफी कम समय में काफी ज्यादा पॉपुलर (Popular) हो चुका है। इस्कॉन मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित एक बहुत लोकप्रिय मंदिर है। भारत भर में कई इस्कॉन मंदिर फैले हुए हैं और ये सभी मंदिर कृष्ण मंदिर हैं। हिंदू कैलेंडर (Hindu calender) में कुछ त्यौहार (Festivals) के दिनों में, इस्कॉन मंदिर में काफी ग्रैंड इवेंट्स (Grand events) होते हैं और कृष्ण भजन से पूरा माहौल भक्ति भरा होता है। इस्कॉन मंदिर भारत आने वाले इंटरनेशनल ट्रैवलर्स (International travelers) के बीच एक बहुत फेमस डेस्टिनेशन (Famous destination) है। ये मंदिर चंडीगढ़ के फेमस प्लेसिस (Famous Places) में से एक माना जाता है। किसी भी दिन, आप इस मंदिर में भक्तों की भीड़ को देख सकते हैं । परिवारों को मंदिर घुमाने और पिकनिक (Picnic) मनाने के लिए लोग अक्सर यहां समय निकालकर आते है। अक्टूबर से अप्रैल का मंथ (Month) इस जगह को विजिट करने के लिए एक दम परफेक्ट रहेगा। 3. सेक्टर 17 मार्केट (Sector 17 Market)- चंडीगढ़ का 17 सेक्टर चंडीगढ़ शहर का सबसे ज्यादा बिजी एरिया (Busy area) माना जाता है। शॉपिंग और खाने पीने के लिए ये जगह सबसे बढ़िया है। इस जगह पर टीनएजर्स (teenagers) काफी ज्यादा आते है खासकर वो लोग, जो कपल्स है। ये जगह दिल्ली के चांदनी चौक से कम बिल्कुल नही है। यहां भी आप हैंड क्राफ्ट (Hand craft), और कई ऐसे मीमेंटो (Memento) मिल जाएंगे जिसे देख कर आपके गेस्ट (Guest) आपसे जरूर पूछ बैठेंगे की कहाँ से लिया ये आपने? अगर आप अपनी बीवी बच्चो के साथ घूमने निकले है तो इस जगह पर जरूर आए, आफ्टरऑल वूमेन लव्स शॉपिंग (after all women’s love shopping)। 4. सुखना लेक (Sukhna lake)- चंडीगढ़ का ये फेमस लेक काफी बड़े एरिया (Big area) में है और यह एक ऐसी जगह है जहाँ कई माइग्रेटरी बर्ड्स आते हैं। कुछ फेमस बर्ड्स (Famous Birds) जो यहां देखे जा सकते हैं वो हैं क्रेन (Crane) और साइबेरियन बत्तख (Siberian Duck)। अगर आप बर्ड्स (birds) के शौकीन हैं या फोटोग्राफर (Photographer) हैं तो ये जगह घूमने के लिए काफी शानदार है। सुखना लेक उन रोमांटिक जोड़ों (Romantic couples) के लिए एक दम सही है जो यहां पीस (peace) के लिए आते हैं। अगर आप हिमाचल जाने के लिए चंडीगढ़ से गुजर रहे हैं तो आप अपने ट्रेवलिंग प्रोग्राम (Traveling program) में सुखना लेक को ऐड (Add) करने के लिए अपने किसी भी हिमाचल हनीमून पैकेज को आसानी से बुक कर सकते हैं। वैसे तो ये जगह कपल्स के लिए है लेकिन आप यहां अपने फ्रेंड्स ग्रुप (Friends Group) या अपने फैमिली (Family) के साथ या फिर अकेले भी आ सकते हैं। यहां आप कई सारी फन एक्टिविटीज (Fun Activities) को एंजॉय (Enjoy) कर सकते है जैसे कि, वाटर स्कीइंग (Water Skiing), फिशिंग (Fishing) और बोटिंग (Boating) हैं। ये चंडीगढ़ के मोस्ट फेमस प्लेस (Most famous place) में से एक है। 5. हॉप्स एन ग्रेन्स (Hops n Grains)- जो चीज़ चंडीगढ़ को एक ग्रेट सिटी (Great city) बनाती है वो है इसकी नाइटलाइफ़ (Nightlife)। फ्रेंड सर्कल या पार्टनर (Friend circle or partner) के साथ ट्रैवल (Travel) कर रहे एक एडल्ट (Adult) होने के नाते, आप हॉप एन ग्रेन्स को शाम या देर रात बिताने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक पाएंगे। यह सिटी का बेस्ट रेस्टोरेंट है जहाँ आपको डिलीशियस फूड (Delicious Food) और अमेजिंग ड्रिंक्स एंजॉय (Enjoy amazing drinks) करने को मिलेंगी।चिंता मत कीजिए यह फैमिली के लिए स्पेशल प्लेस है जहां गुड अमाउंट (Good amount) पर टेस्टी फूड (Taty food) का टेस्ट (Taste) ले