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हर तरह के टूरिज्म के लिए बेस्ट है सह्याद्रि की पहाड़ियाँ

सह्याद्री की पहाड़ियों की असीम खूबसूरती दुनिया भर से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। पहाड़ियों की श्रृंखला में खतरनाक ट्रैकिंग डेस्टिनेशंस के साथ-साथ कुछ ऐतिहासिक किले और कई सारे प्राकृतिक झरने भी हैं जो पर्यटकों के मनमोहन में सक्षम है। यहां एडवेंचर टूरिज्म से लेकर रिलिजियस टूरिज्म तक के लिए हर तरह के पर्यटन स्थल मौजूद हैं। आज के फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको सह्याद्रि की पहाड़ियों में बसे कुछ खूबसूरत पर्यटन स्थलों के बारें में बताएँगे।

  • एलोरा की गुफाएँ (Ellora Caves)
  • अजंता की गुफाएँ (Ajanta Caves)
  • कुम्भे वॉटरफॉल (Kumbhe Waterfall)
  • भैरवगढ़ ट्रेक (Bhairavgarh Trek)
  • मांगी तुंगी पिनेकल्स (Mangi Tungi Pinnacles)
  • हरिहर फोर्ट (Harihar Fort)

1. एलोरा की गुफाएँ (Ellora Caves)

चट्टानों पर की गई शिल्पकलाओं के जरिए विश्व विरासत स्थल में अपना स्थान बनाने वाले महाराष्ट्र के एलोरा की गुफाओं की खूबसूरती देखने लायक है। भारतीय इतिहास के उत्कृष्ट कलाकारी को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने वाली ये गुफाएं आज से लगभग हजारों साल पुरानी हैं। लेकिन आज भी इन गुफाओं में चट्टानों पर की गई नक्काशियों में वहीं फिनिशिंग देखने को मिलती है जो नए नक्काशियों में मिलते हैं। सह्याद्री पर्वत श्रृंखलाओं को काट कर बनाए गए इस गुफा की श्रृंखलाओं में मानव द्वारा की गई बेहतरीन शिल्पकारी और नक्काशी की कला देखने को मिलती है। एलोरा की गुफ़ाएँ महाराष्ट्र के संभाजी नगर अर्थात औरंगाबाद जिले में स्थित है। अगर आप एलोरा की गुफाओं को घूमना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सबसे पहले औरंगाबाद आना पड़ेगा। औरंगाबाद से एलोरा की गुफाओं की दूरी लगभग 30 किलोमीटर है। जहां आप कैब बुक करके या फिर अपनी गाड़ी से आसानी से पहुंच सकते हैं।

2. अजंता की गुफाएँ (Ajanta Caves)

संभाजी नगर के पहाड़ियों को खोदकर बनाई गई यह गुफाएं और उनके अंदर उकेरी गई कलाकृतियां भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया से पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए अजंता कई वर्षों से शोध का एक महत्वपूर्ण स्थान बना हुआ है। अजंता की गुफाएं बौद्ध धर्म के उपासकों के लिए किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं है। इन गुफाओं में भगवान बुद्ध के हजारों मूर्तियों को उकेरा गया है। अगर इतिहास की बात करें तो अजंता की गुफाओं का निर्माण कई सौ सालों के मेहनत की परिणिति है। इतिहासकारों का मानना है कि गुफा नंबर 9 और 10 को बनाने में 400 सालों का वक्त लगा था और इनका निर्माण 200 ईसा पूर्व से 200 ई के बीच करवाया गया था। गुफा नंबर 9 और 10 को अजंता की सबसे पुरानी गुफा के रूप में जाना जाता है। वहीं गुफा नंबर 4, 6, 11, 15, 16 और 17 के निर्माण के बारे में बताया जाता है कि इनका निर्माण 350 ई से 500 ई तक के बीच में हुआ।
अगर आप अजंता की गुफाओं को घूमना चाहते हैं तो इसके लिए तीनों तरह के परिवहन माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं। अजंता की गुफाएं महाराष्ट्र के औरंगाबाद में स्थित है। इसलिए अगर आप बाय रोड आना चाहते हैं तो आप सबसे पहले औरंगाबाद पहुंच सकते हैं। औरंगाबाद से अजंता की गुफाओं तक पहुंचने में आपको लगभग 45 मिनट का समय लगेगा।

3. कुम्भे वॉटरफॉल (Kumbhe Waterfall)

कुम्भे वॉटरफॉल के इस असीम खूबसूरती को देखने के लिए दुनिया भर के अलग-अलग कोने से पर्यटक यहां घूमने आते हैं। यहां अक्सर लोग पिकनिक मनाने, ट्रैकिंग करने और कैंप लगाने के लिए आते हैं। अगर आप नेचर को पसंद करने वाले हैं तो आपको यह जगह बहुत ही पसंद आने वाला है। नेचर फोटोग्राफी करने वाले लोगों के लिए भी कुम्भे वॉटरफॉल एक बेहतरीन फोटोग्राफी डेस्टिनेशन है। जहां से वह प्रकृति की खूबसूरती को बहुत ही बेहतरीन तरीके से अपने कैमरे में कैद कर सकते हैं। सह्याद्री की पहाड़ियों में बहता कुम्भे वॉटरफॉल महाराष्ट्र के मानगांव में स्थित है।

4. भैरवगढ़ ट्रेक (Bhairavgarh Trek)

भारत में कई ट्रैकिंग डेस्टिनेशंस हैं, जो पर्यटकों का ध्यान अपनी और आकर्षित करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा ट्रैकिंग डेस्टिनेशन भी है जिसकी चढ़ाई करने से पहले एक एक सामान्य पर्यटक को सौ बार सोचना पड़ता है? भारत के इस खतरनाक ट्रेक का नाम है- “भैरवगढ़ ट्रेक” (Bhairavgarh Treck) महाराष्ट्र के जंगलों में बहुत से ऐसे ट्रेक हैं जो पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं, उन्हीं में से एक ट्रेक भैरवगढ़ भी है। लेकिन भैरवगढ़ ट्रेक पर चढ़ाई इतनी भी आसान नहीं! क्योंकि यहां सीधे 90 डिग्री ढलान पर आपको ट्रैकिंग करनी होती है। कई जगह तो आपको रैपलिंग करने की भी जरूरत पड़ेगी। यह सुनने में जितना एडवेंचरस है उतना ही ज्यादा खतरनाक ट्रेक भी है। क्योंकि इस ट्रेक पर आपको एक तरफ गहरी हजारों फीट की खाई और दूसरी तरफ ऊंचे पहाड़ देखने को मिलेंगे। इस ट्रेक पर चढ़ाई के लिए सीढियाँ बनाई गई है लेकिन कुछ जगहों पर तो यह सीढियाँ एक फीट से भी कम चौड़ाई वाली हैं। ऐसे में इतनी पतली सीढियों और एक ओर दिखने वाली सैकडों फीट गहरी खाई को देखकर किसी भी इंसान का दिल एक बार को थम जाता है। अगर आप ट्रैकिंग को पसंद करते हैं और इस तरह के एडवेंचरस ट्रेक पर जाना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले मोरोशी गांव पहुंचना होगा। भैरवगढ़ मुंबई से लगभग 100 किलोमीटर और पुणे से लगभग 140 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

5. मांगी तुंगी पिनेकल्स (Mangi Tungi Pinnacles)

जैन धर्म के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक मांगी तुंगी पिनेकल्स महाराष्ट्र के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक है। जिसे एक्सप्लोर करने दूर-दूर से पर्यटक यहां घूमने आते हैं। असल में मांगी और तुंगी सह्याद्री के पहाड़ियों की दो चोटियां है जिन्हें जोड़ने के लिए सीढ़ियां बनाई गई हैं। जो दूर से देखने पर बिल्कुल ‘द ग्रेट वॉल ऑफ चाइना’ के जैसी दिखाई देती है। मांगी तुंगी पिनेकल्स तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का निर्माण करवाया गया है। अगर सीढ़ियों के संख्या की बात की जाए तो इन सीढ़ियों की संख्या लगभग 3500 से भी ज्यादा है। जिसे चढ़ने में आपको दो से तीन घंटे का समय लग सकता है। मांगी तुंगी नासिक शहर से लगभग 125 किलोमीटर, मुंबई से तकरीबन 280 किलोमीटर और पुणे शहर से लगभग 330 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अगर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट से मांगी तुंगी पहुंचना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सबसे पहले ताराबाद टाउन पहुंचाना पड़ेगा।

6. हरिहर फोर्ट (Harihar Fort)

उस ट्रेक को भारत के सबसे खतरनाक ट्रकों के लिस्ट में में गिना जाता है। इस ट्रैक में आपको 30-45 डिग्री नहीं बल्कि सीधे 80 डिग्री वर्टिकल ढलान की चढ़ाई करनी होगी। सोच के ही डर लग रहा है ना? लेकिन डरिये मत क्योंकि यहां हर रोज कई ऐसे विजिटर्स भी ट्रैकिंग करने आते हैं जो ट्रैकिंग के एक्सपर्ट नहीं होते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि इतनी खतरनाक ट्रैक पर लोग क्यों आना चाहते हैं? आपके इस सवाल का जवाब यह है कि इस जगह ट्रैकिंग करके आने के लिए लोगों की दीवानगी के पीछे का कारण यहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती है। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि आपको लगेगा ही नहीं कि आप इस दुनिया में हैं। यह जगह आपको बताएगी की प्रकृति कितनी खूबसूरत हो सकती है। इस जगह को देखकर कोई भी नेचर लवर अपने आप को यहां जाने से रोक नहीं सकता और अगर बरसात के सीजन या फिर विंटर की बात की जाए तो इस समय अगर आप इस ट्रैकिंग प्वाइंट के टॉप पर जाएंगे तो यहां आपको आज मैं ऊपर आसमां नीचे का एहसास होगा। हरिहर फोर्ट पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले महाराष्ट्र के नासिक पहुंचना होगा। नासिक शहर से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर है हरिहर फोर्ट। जिसके लिए आपको सबसे पहले नासिक से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित निर्गुणपाड़ा गांव पहुंचाना पड़ेगा। जहां से इस किले की ट्रैकिंग शुरू होती है।

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