छठ पूजा भारत का एक प्रमुख और पवित्र त्यौहार है, जो मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बड़े श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य देव और छठी माई जो उषा या प्रकृति देवी की आराधना को समर्पित है।

छठ पूजा कब होती है और इसमें क्या क्या होता है?
छठ पूजा साल में दो बार मनाई जाती है चैत्र मास और कार्तिक मास में, जिसमें कार्तिक छठ सबसे प्रसिद्ध होती है। यह त्यौहार चार दिनों तक चलता है। पहले दिन ‘नहाय-खाय’ से शुरुआत होती है,( छठी माई जो उषा या प्रकृति देवी)

जिसमें व्रती स्नान कर शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। दूसरे दिन ‘लोहंडा और खरना’ होता है, जब व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को गुड़ की खीर और रोटी खाकर व्रत की शुरुआत करते हैं।

क्यूं नहीं रख सकतीं कुंवारी कन्याएं छठ का वृत!?
नहीं, छठ पूजा सिर्फ शादीशुदा महिलाओं के लिए नहीं होती। यह पर्व हर कोई कर सकता है चाहे पुरुष हों, अविवाहित महिलाएं या बच्चे। इसका मकसद सूर्य देव और छठी मईया की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करना होता है।

लेकिन माना जाता है की माता कुंती ने कुंवारी अवस्था में सूर्य भगवान की पूजा की थी। जिससे वे माँ बन गई थीं, इसलिए धार्मिक मान्यता के अनुसार कुंवारी कन्याओं को छठ का वृत रखना वर्जित हैं।
कौन कराता है पूजा को सम्पन्न?
तीसरे दिन ‘संध्या अर्घ्य’ के समय सूर्यास्त के समय डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। चौथे दिन ‘उषा अर्घ्य’ में उगते सूर्य को जल चढ़ाकर पूजा पूरी की जाती है।

छठ पूजा में लोग नदी, तालाब या घाटों पर साफ-सफाई करते हैं और वहां व्रत रखते हैं। इस पर्व की खासियत है कि इसमें कोई पुजारी नहीं होता व्रती स्वयं पूजा करते हैं।

प्रकृति से प्रेम है छठ पूजा!
यह पर्व आत्मशुद्धि, अनुशासन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, सादगी और पर्यावरण प्रेम का अद्भुत संगम है।