राजस्थान के थार मरुस्थल के बीच बसा ‘स्वर्ण नगरी’ (Golden City) जैसलमेर अपनी मध्यकालीन भव्यता के लिए जाना जाता है। यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ की हवेलियां (Havelis) हैं, जो न केवल वास्तुकला (Architecture) का बेजोड़ उदाहरण हैं, बल्कि मरुस्थल की भीषण गर्मी से निपटने के लिए वैज्ञानिक रूप से भी डिजाइन की गई हैं। फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल के इस ब्लॉग में जानिए जैसलमेर की इन खूबसूरत हवेलियों के बारे में -Havelis in Jaisalmer

Havelis in Jaisalmer– क्यों हैं इतनी खास?
जैसलमेर की हवेलियां मुख्य रूप से पीले बलुआ पत्थर (Yellow Sandstone) से बनी हैं। इनकी नक्काशी इतनी बारीक है कि दूर से देखने पर पत्थर भी लकड़ी की तरह नजर आता है।
इन हवेलियों की सबसे बड़ी विशेषता इनका सेंट्रल आंगन (Central Courtyard) है। यह आंगन एक ‘लाइटवेल’ (Lightwell) की तरह काम करता है, जो घर के अंदर अप्रत्यक्ष रोशनी (Indirect light) लाता है और हवा के बहाव (Wind channeling) को बनाए रखकर कमरों को ठंडा रखता है। दिलचस्प बात यह है कि इन पत्थरों को जोड़ने के लिए सीमेंट का प्रयोग नहीं किया गया, बल्कि इन्हें ‘लेगो ब्लॉक्स’ (Lego blocks) की तरह एक-दूसरे में फिट किया गया है।
1. पटवों की हवेली (Patwon Ki Haveli)
यह जैसलमेर की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण हवेली है। 19वीं शताब्दी में बनी यह वास्तव में पांच हवेलियों का एक समूह है, जिसे पटवा परिवार के पांच भाइयों के लिए बनाया गया था।

मुख्य आकर्षण: इसके कुछ कमरों को छोटे अवतल दर्पणों (Concave mirrors) से सजाया गया है ताकि मोमबत्ती की रोशनी परावर्तित हो सके।

झरोखे: यहाँ की खिड़कियों पर पत्थर की बारीक जाली (Latticed stone meshes) लगी है, जिससे महिलाएं बाहर का नजारा देख सकती थीं लेकिन उन्हें बाहर से कोई नहीं देख सकता था।
इतिहास: सेठ गुमानचंद जी द्वारा निर्मित इस हवेली को बनने में लगभग 50 वर्ष (1805-1860) लगे थे।
2. सालम सिंह की हवेली (Salim Singh Ki Haveli)
यह हवेली जैसलमेर के प्रधानमंत्री सालम सिंह द्वारा 19वीं शताब्दी में बनवाई गई थी। सालम सिंह को उनके क्रूर स्वभाव के लिए याद किया जाता है, लेकिन उनकी हवेली की डिजाइन अद्भुत है।
• अनोखी मीनार: इस हवेली के ऊपर एक विशिष्ट टावर बना है जो इसे अन्य हवेलियों से अलग बनाता है।

सुरक्षा फीचर्स: यहाँ की सीढ़ियाँ असमान (Uneven stairs) बनाई गई थीं ताकि हमलावरों के लिए शोर मचाए बिना चढ़ना मुश्किल हो।
गुप्त स्थान: फर्श और छत के बीच खाली जगह (Gap) छोड़ी गई थी ताकि प्रधानमंत्री अपने कमरे में किसी के भी चलने की गूँज सुन सकें और वहां कीमती सामान भी छिपा सकें।
3. नथमल जी की हवेली (Nathmal Ji Ki Haveli)
1885 में बनी यह हवेली अपनी असममित डिजाइन (Asymmetry) के लिए प्रसिद्ध है।
दो भाइयों की कला: इसे लुलु और हाथी नामक दो भाइयों ने डिजाइन किया था। हवेली के बाएं और दाएं हिस्से में बारीक अंतर देखे जा सकते हैं क्योंकि दोनों भाइयों ने अलग-अलग हिस्सों पर एक साथ काम किया था।

प्रवेश द्वार: इसके प्रवेश द्वार पर पीले पत्थर से तराशे गए दो बड़े हाथी खड़े हैं, जो इस हवेली की पहचान हैं। वर्तमान में इसका केंद्रीय प्रांगण एक ‘सोवेनियर शॉप’ (Souvenir shop) के रूप में उपयोग किया जाता है।
किले के भीतर की हवेलियां
जैसलमेर का किला एक ‘लिविंग फोर्ट’ (Living Fort) है, जहाँ आज भी आबादी रहती है। यहाँ भी कई ऐतिहासिक हवेलियां हैं:
बारी हवेली (Baa Ri Haveli): यह लगभग 450 साल पुरानी हवेली है जो अब एक निजी म्यूजियम है। यहाँ पुराने जमाने के बर्तन, संगीत वाद्ययंत्र और पोशाकें देखी जा सकती हैं।

व्यास हवेली (Vyas Haveli): 15वीं शताब्दी में बनी इस हवेली में आज भी पुराने मालिकों के वंशज रहते हैं।
फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल के सुझाव (Tips for Travelers)
प्रायोरिटी: यदि आपके पास समय कम है, तो ‘पटवों की हवेली’ और ‘फोर्ट पैलेस म्यूजियम’ को प्राथमिकता दें।
शॉपिंग: किले की गलियों में हस्तशिल्प और पारंपरिक कपड़ों की कई दुकानें हैं।
बेस्ट समय: जैसलमेर घूमने के लिए जनवरी से मार्च का समय सबसे सुखद होता है।

जैसलमेर की ये हवेलियां महज इमारतें नहीं, बल्कि पत्थरों पर लिखी गई इतिहास की गौरवगाथा हैं। इनकी यात्रा आपको बीते युग के व्यापारियों और राजाओं की वैभवशाली जीवनशैली की याद दिलाती है..

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