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राजस्थानी कंदोरा बना नया फैशन ट्रेंड, Royal Twist with Tradition

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राजस्थान की पहचान उसके ट्रेडिशनल गहनों और शाही अंदाज़ से हमेशा जुड़ी रही है। यहां के पारंपरिक गहने न सिर्फ भारत में, बल्कि देश-विदेश में भी खूब मशहूर हैं। चाहे फिर वो कुंदन हार हो, पोलकी या भंवरकंडी नथ की बात हो, ये सभी राजस्थानी गहने अपनी खूबसूरती और कारीगरी के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। इन्हीं खास गहनों में से एक है राजस्थानी कंदोरा, जो कमर में पहना जाने वाला ट्रेडिशनल गहना है। फिर लौटा कंदोरा का ट्रेंड पहले के समय में कंदोरा ज़्यादातर राजा-महाराजाओं और सामंतों की शान हुआ करता था। यह उनकी खास पोशाक और रॉयल पहचान का हिस्सा माना जाता था। समय के साथ यह गहना महिलाओं के पहनावे में आ गया, लेकिन धीरे-धीरे इसका चलन कम होता चला गया और लोग इसे कम पहनने लगे। लेकिन अब एक बार फिर वही दौर लौट रहा है। आजकल महिलाएं कंदोरा को बड़े शौक से पहन रही हैं और यह गहना फिर से ट्रेंड में आ गया है। खासकर शादी-ब्याह और ट्रेडिशनल मौकों पर कंदोरा पहनना स्टाइल और परंपरा दोनों का खूबसूरत मेल बन गया है। आज के समय में कंदोरा को पहले के मुकाबले ज्यादा हल्का और आरामदायक बनाया जा रहा है। पहले जहां ये गहने भारी हुआ करते थे, वहीं अब इन्हें हल्के वज़न का बनाया जाने लगा है जिसकी वजह से कोई भी महिला इन्हें आसानी से पहन सकती है। कम वजन होने के कारण ये गहने पहनने में अनकंफर्टेबल भी नहीं लगते। ट्रेडिशनल लुक बिना किसी परेशानी के अब आप अपना ट्रेडिशनल लुक बिना किसी परेशानी के, पूरे कंफर्ट के साथ कैरी कर सकती हैं। यही वजह है कि राजस्थानी कंदोरा आज फिर से महिलाओं की पसंद बनता जा रहा है और फैशन के साथ-साथ परंपरा को भी आगे बढ़ा रहा है। एक समय हुआ करता था जब राजस्थानी कंदोरा सिर्फ चांदी में ही बनाया जाता था। लेकिन जैसे-जैसे समय बदला, वैसे-वैसे इसमें भी कई तरह की वैरायटी जुड़ती चली गई। अब कंदोरा सिर्फ चांदी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सोने, पीतल और कई तरह के आर्टिफिशियल मटेरियल में भी बनने लगा है। हर बजट में उपलब्ध, राजस्थानी कंदोरा आजकल ऐसे कंदोरा भी बनाए जा रहे हैं जो देखने में बिल्कुल असली और ट्रेडिशनल लगते हैं, लेकिन उनकी कीमत काफी किफायती होती है। यही वजह है कि अब यह गहना सिर्फ खास या अमीर लोगों तक सीमित नहीं रहा। अब कोई भी व्यक्ति, चाहे वह अमीर हो या साधारण परिवार से हो, अपनी पसंद और बजट के हिसाब से कंदोरा खरीद सकता है और बड़े आराम से पहन भी सकता है। यही बदलाव इस ट्रेडिशनल गहने को एक बार फिर लोगों के दिलों के करीब ला रहा है।

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बिछिया निकला ट्रेडिशन से आगे, बन रहा है फैशन स्टेटमेंट!

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जब भी हम भारतीय शादियों की बात करते हैं, तो उसमें सुहाग की निशानियों को एक अहम भूमिका होती है। इन्हीं में से एक है बिछिया, जिसे शादीशुदा महिला के शृंगार का बहुत खास हिस्सा माना जाता है। यह सिर्फ गहना नहीं, बल्कि पवित्रता, और जिम्मेदारी का प्रतीक होता है। राजस्थान और उत्तर प्रदेश में शादी के फेरे पूरे होने के बाद दूल्हा-दुल्हन को बिछिया पहनाता है। सुहाग की निशानी.. माना जाता है कि यह सिर्फ शादीशुदा जीवन के रिश्ते को नहीं, बल्कि उसे निभाने की जिम्मेदारी को भी दर्शाता है। गांवों में आज भी ट्रेडिशनल डिज़ाइन की बिछिया काफी पसंद की जाती है और नई पीढ़ी की ब्राइड्स भी इन्हें बड़े शोक के साथ पहनती हैं, और इसी महत्व को देखते हुए फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल आपके लिए लाया है बिछिया से जुड़ी ऐसी जानकारी, जिसे पढ़ने के बाद शायद आप भी इसे रोज़ पहनने का मन बना लें। सोलह शृंगार का अहम हिस्सा राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में बिछिया को सोलह शृंगार का एक ज़रूरी हिस्सा माना जाता है। शादी के समय जब दुल्हन सोलह शृंगार से सजी होती है, तो उसकी ब्यूटी और तेज और भी निखर जाता है। पुरानी परंपराओं के हिसाब से बिछिया पहनने से न सिर्फ सुहाग की रक्षा होती है, बल्कि यह उन निशानियों में से एक है जिससे पता चलता है कि महिला शादीशुदा है। चांदी की बिछिया और वैज्ञानिक लाभ हमारे कल्चर में इसे पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास का प्रतीक भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ अगर साइंस की बात करें, तो चांदी की बिछिया पहनना महिलाओं के लिए फायदेमंद माना जाता है। पैरों की दूसरी उंगली में चांदी की बिछिया पहनने से हार्मोन बैलेंस पर पॉजिटिव असर पड़ता है और सेहत बेहतर रहती है। यही वजह है कि बिछिया हमेशा चांदी की ही पहनने की परंपरा रही है। फिर लौटा बिछिया का ट्रेंड एक समय ऐसा भी आया था जब महिलाओं ने बिछिया पहनना कम कर दिया था, लेकिन अब यह फिर से ट्रेंड में लौट आई है। आज की महिलाएं इसे शौक से पहनती हैं और कई तो इसे कभी उतारती भी नहीं हैं। माना जाता है कि शादी में पहली बार बिछिया पहनने के बाद महिलाएं इसे पूरी तरह कभी नहीं उतारतीं, चाहे एक उंगली से निकालें या दूसरी में पहन लें, लेकिन बिछिया को अपने पैरों से अलग नहीं करतीं।

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मिनिमल मेकअप में काजल लगाने का सही तरीका, बना देगा लुक को एकदम परफेक्ट!

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क्या आप भी अपनी छोटी आँखों से परेशान हैं और चाहती हैं कि आपकी आँखें बड़ी और खूबसूरत दिखें? अगर आप काजल लगाने से जुड़ी ऐसी आसान टिप्स जानना चाहती हैं, जिनसे आपकी आँखें फोटो में भी बड़ी और अट्रैक्टिव नज़र आएँ, तो इसीलिए फाइव कलर्स आफ ट्रैवल आपको कुछ ऐसे आसान और काम के तरीके बताएँगे, जिन्हें जानने के बाद आप खुद को उन्हें ट्राई करने से रोक ही नहीं पाएँगी। सही तरीके से काजल लगाने से आपकी आँखें न सिर्फ सुंदर दिखेंगी, बल्कि फोटो में आँखें छोटी दिखने की टेंशन भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। स्मोकी आईज अगर आप भी अपनी छोटी आँखों से परेशान हैं और चाहती हैं कि काजल और आईलाइनर को इस तरह इस्तेमाल करें कि आपकी आँखें अपने-आप बड़ी दिखने लगें, तो स्मोकी आई मेकअप आपके लिए एकदम परफेक्ट ऑप्शन है। इस स्टाइल में काजल को सिर्फ निचली पलकों तक ही नहीं रखा जाता, बल्कि ऊपर की पलकों पर भी लगाया जाता है। इसके बाद हल्के हाथ से उसे ब्लेंड किया जाता है, जिससे आईज़ ऊपर-नीचे और कोनों से कवर होती हैं और आँखें बड़ी दिखने लगती हैं। आमतौर पर महिलाएं यह लुक रात के फंक्शन या पार्टी में बनाती हैं, लेकिन आप चाहें तो इसे हल्के तरीके से डेली लुक में भी ट्राई कर सकती हैं। इससे आपके चेहरे पर आँखें अलग ही तरह से हाइलाइट होती हैं और छोटी आँखों की टेंशन भी खत्म हो जाती है। बस एक बात का खास ध्यान रखें स्मोकी आई मेकअप करते समय बहुत ज्यादा डार्क न जाएं। ऊपर और नीचे दोनों तरफ पतली लाइन का ही इस्तेमाल करें। अगर लाइन बहुत मोटी बना ली गई, तो आँखें और छोटी लग सकती हैं। वहीं, पतली और सॉफ्ट लाइन से आपकी आँखें ज्यादा खुली, ब्राइट और बड़ी नज़र आएंगी। बेस्ट क्वॉलिटी काजल कई बार महिलाएँ इस बात से परेशान हो जाती हैं कि काजल लगाने के कुछ समय बाद ही वह फैलने लगता है या उतर जाता है। इससे पूरा आई मेकअप खराब हो जाता है और चेहरे का लुक भी बिगड़ा-सा लगने लगता है। इसी परेशानी से बचने के लिए हमेशा अच्छी क्वालिटी का काजल चुनना बहुत ज़रूरी होता है। कोशिश करें कि आप वॉटरप्रूफ काजल ही इस्तेमाल करें, ताकि आप स्मोकी आई लुक बनाएं या किसी और तरह से काजल लगाएं, वह लंबे समय तक टिका रहे और फैले नहीं। खराब क्वालिटी का काजल पसीने या नमी के कारण जल्दी फैल जाता है, जिससे आंखों के नीचे काले दाग पड़ जाते हैं। इसलिए ध्यान रखें कि काजल ऐसा हो जो गर्मी, पसीना या सर्दी हर मौसम में आराम से टिक सके। अच्छी क्वालिटी का काजल न सिर्फ आपके आई मेकअप को लंबे समय तक बनाए रखता है, बल्कि आपकी आंखों को साफ, शार्प और खूबसूरत भी दिखाता है। काजल लगाने का सही तरीका काजल लगाने का सबसे सही तरीका यह होता है कि आप हमेशा इसकी शुरुआत आँखों के इनर कॉर्नर से करें। खासतौर पर छोटी आँखों में पतली और साफ लाइन सबसे अच्छा लुक देती है। इसके लिए निचली लैश लाइन से लेकर बाहर की तरफ कॉर्नर तक हल्के हाथ से काजल लगाएँ। ध्यान रखें कि लाइन बहुत मोटी न हो, क्योंकि मोटी लाइन आँखों को और छोटी दिखा सकती है। इसलिए जब भी काजल लगाना शुरू करें, तो मोटी लाइन बनाने से बचें। छोटी-छोटी और पतली लाइन बनाएं, जिससे आपकी आँखें ज्यादा खुली, साफ और बड़ी नज़र आएँगी। कॉर्नर्स को हाइलाइट करना बिल्कुल न भूलें अपनी आँखों को और ज़्यादा खुला, फ्रेश और ब्राइट दिखाने के लिए इनर कॉर्नर को हाइलाइट करना बिल्कुल न भूलें। इसके लिए आप हल्का सा शिमरी आईशैडो, जैसे व्हाइट या गोल्डन शेड, इनर कॉर्नर पर लगा सकती हैं। यह आँखों को तुरंत बड़ा और फ्रेश दिखाने का एक आसान तरीका है। अगर आप चाहें, तो वॉटरलाइन में न्यूड काजल का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। आजकल व्हाइट कलर का काजल भी आसानी से मिल जाता है। ऊपर ब्लैक काजल और नीचे व्हाइट या न्यूड काजल लगाने से आँखों को एक अलग ही शानदार लुक मिलता है। इससे आपकी पूरी लुक में चार चाँद लग जाते हैं।

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शोर से दूर शांति चाहिए? ऋषिकेश से करें नए साल की आध्यात्मिक शुरुआत

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नया साल सिर्फ पार्टियों और शोर-शराबे का नाम नहीं है। कई लोग New Year 2026 की शुरुआत शांति, आत्मचिंतन और सकारात्मक ऊर्जा के साथ करना चाहते हैं। अगर आप भी भीड़-भाड़ से दूर सुकून चाहते हैं, तो आध्यात्मिक जगह पर नया साल मनाना सबसे बेहतरीन विकल्प है। ऋषिकेश: योग, ध्यान और शांति की राजधानी उत्तराखंड में स्थित ऋषिकेश को विश्व की योग राजधानी कहा जाता है। गंगा नदी के पवित्र तट, हिमालय की गोद और आध्यात्मिक वातावरण इसे नए साल के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन बनाते हैं। यहाँ न तेज़ म्यूज़िक है, न शोर—सिर्फ मंत्रों की गूंज, गंगा की धारा और आत्मा को सुकून देने वाली शांति। New Year 2026 में ऋषिकेश जाने के 5 बड़े कारण 1. गंगा आरती से मिलेगी सकारात्मक ऊर्जा हर शाम त्रिवेणी घाट पर होने वाली गंगा आरती मन और आत्मा को शुद्ध कर देती है। नए साल की पहली आरती देखना एक यादगार अनुभव होता है। 2. योग और मेडिटेशन से करें साल की शुरुआत ऋषिकेश में कई आश्रम और योग केंद्र हैं जहाँ New Year Meditation Retreats आयोजित किए जाते हैं। यह आपको मानसिक शांति और स्पष्टता प्रदान करता है। 3. डिजिटल डिटॉक्स का बेस्ट मौका यहाँ आकर आप मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रहकर खुद से जुड़ सकते हैं—जो नए साल के लिए बेहद ज़रूरी है। 4. आध्यात्मिक के साथ एडवेंचर का संतुलन अगर चाहें तो रिवर राफ्टिंग, नेचर वॉक और हिमालयन ट्रेक्स का आनंद भी ले सकते हैं। 5. बजट-फ्रेंडली Spiritual Trip ऋषिकेश एक किफायती डेस्टिनेशन है—आश्रमों में ठहरना, सादा भोजन और फ्री योग सेशन इसे बजट में रखता है। ऋषिकेश में घूमने की प्रमुख आध्यात्मिक जगहें त्रिवेणी घाट-त्रिवेणी घाट ऋषिकेश का सबसे पवित्र और प्रसिद्ध घाट माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों का संगम होता है। हर शाम होने वाली गंगा आरती मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। नए साल की शुरुआत यहाँ स्नान और आरती के साथ करना बहुत शुभ माना जाता है। परमार्थ निकेतन आश्रम-परमार्थ निकेतन आश्रम योग, ध्यान और आध्यात्मिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। यहाँ रोज़ाना योग कक्षाएं, सत्संग और ध्यान सत्र आयोजित होते हैं। शांत वातावरण और गंगा किनारे स्थित यह आश्रम आत्मचिंतन और मानसिक शांति के लिए आदर्श जगह है। बीटल्स आश्रम-बीटल्स आश्रम (चौरासी कुटिया) ध्यान और साधना के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि मशहूर विदेशी बैंड The Beatles ने यहाँ ध्यान साधना की थी। आज यह स्थान शांति, प्रकृति और आध्यात्मिक ऊर्जा का सुंदर संगम है, जहाँ लोग ध्यान और आत्मचिंतन के लिए आते हैं। लक्ष्मण झूला-लक्ष्मण झूला ऋषिकेश का ऐतिहासिक और धार्मिक प्रतीक है। मान्यता है कि भगवान लक्ष्मण ने इसी स्थान से गंगा पार की थी। झूले से गंगा का दृश्य बेहद मनमोहक लगता है और आसपास मौजूद मंदिर एवं आश्रम आध्यात्मिक अनुभव को और गहरा बना देते हैं। नीलकंठ महादेव मंदिर-ऋषिकेश से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान शिव ने यहाँ विषपान किया था। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर ध्यान, भक्ति और प्राकृतिक शांति का अद्भुत अनुभव कराता है। New Year 2026 के लिए ऋषिकेश के लिए फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रैवल टिप्स अगर आप New Year 2026 में शोर-शराबे से दूर रहकर अपने मन, शरीर और आत्मा को नई दिशा देना चाहते हैं, तो ऋषिकेश से बेहतर जगह कोई नहीं। यह सिर्फ एक ट्रिप नहीं, बल्कि खुद से जुड़ने की एक आध्यात्मिक यात्रा है। एक खास मशवरा – इस नए साल, बाहर नहीं—अंदर की यात्रा पर निकलें।

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अगर आपको ठंड में भी अपने स्टाइल को ऑन टॉप रखना है तो ट्राई करें ये विंटर बूट्स

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अगर आप भी एक स्टाइल आइकन बनना चाहती हैं और अपनी ड्रेस से लेकर फुटवियर तक हर चीज़ को स्टाइलिश रखना चाहती हैं, तो ये स्पेशल बूट्स आपके लिए एकदम परफेक्ट हैं। आजकल सिर्फ स्लीपर्स और हिल्स का ही ट्रेंड नहीं रहा, बल्कि विंटर्स में बूट्स भी खूब पसंद किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, अगर आप किसी विंटर या स्नो लोकेशन पर घूमने जाती हैं, तो वहां भी आपको ज्यादातर लोग बूट्स ही पहने नजर आएंगे, और उसकी वजह यही है कि बूट्स न सिर्फ देखने में आपको क्लासी लुक देते हैं, बल्कि इन्हें पहनने के बाद पैरों में ठंड लगने का डर खत्म हो जाता हैं। इसी ट्रेंड और कंफर्ट को ध्यान में रखते हुए फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल आपके लिए लेकर आया है बूट्स के कुछ ऐसे शानदार ऑप्शन, जिन्हें आपको इस सर्दियों में जरूर ट्राई करना चाहिए। (विंटर बूट्स ट्रेंड 2025) थाई हाई बूट्स थाई हाई बूट्स शॉर्ट ड्रेस की शान माने जाते हैं। अगर आप सर्दियों में शॉर्ट ड्रेस पहनना चाहती हैं और साथ-साथ अपने पैरों को भी गर्म रखना चाहती हैं, तो थाई हाई बूट्स आपके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन हैं। ये बूट्स आमतौर पर घुटनों तक आते हैं और सीधे बूट से अटैच होते हैं। देखने में ये बिल्कुल शॉक्स जैसे लगते हैं, जो आपके पूरे लुक में चार चांद लगा देते हैं। शॉर्ट ड्रेस के साथ जब इन्हें पहना जाता है, तो लुक एकदम क्लासी और स्टाइलिश बन जाता है। इतना ही नहीं, इन्हें ट्रैकिंग के दौरान भी पहना जाता है। जींस के ऊपर पहनने से ये पैरों को गर्म रखते हैं और बाहर की ठंड व धूल-मिट्टी से भी अच्छी तरह बचाते हैं। यानी स्टाइल के साथ-साथ कंफर्ट भी पूरा। लेदर बूट्स लेदर बूट्स सच में बहुत फेमस होते हैं। फिर चाहे ब्लैक हों या ब्राउन, लेदर बूट्स की बात ही अलग होती है। इन्हें पहनने की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इन्हें साफ करने की ज्यादा टेंशन नहीं रहती बस थोड़ी-सी पॉलिश लगाइए और एक मिनट में ये फिर से चमचमाते नजर आने लगते हैं। बाकी बूट्स के मुकाबले लेदर बूट्स जल्दी खराब भी नहीं होते और काफी लंबे समय तक चलते हैं। हां, ये नॉर्मल बूट्स से थोड़े महंगे जरूर होते हैं, क्योंकि इनमें इस्तेमाल किया गया लेदर महंगा होता है। लेकिन बदले में ये आपके पैरों को अच्छी तरह गर्म रखते हैं और इन्हें पहने के बाद सर्दियों में ठंड बहुत कम लगती हैं। यानी स्टाइल, मजबूती और कंफर्ट तीनों का परफेक्ट कॉम्बिनेशन है ये बूट्स। वेल्वेट बूट्स वेलवेट बूट्स भले ही हर समय ट्रेंड में न हों, लेकिन ये ऐसे बूट्स हैं जो आपको आसानी से मार्केट में मिल जाते हैं। इनका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट ये है कि इनका प्राइस काफी सही होता है, यानी लगभग हर कोई इन्हें अफोर्ड कर सकता है। हां, ये लेदर बूट्स के मुकाबले थोड़े जल्दी खराब हो जाते हैं, इसलिए इन्हें थोड़ा संभालकर पहनना पड़ता है। लेकिन देखने में ये एकदम स्टाइलिश लगते हैं। वेलवेट इतना सॉफ्ट होता है कि जब आप इन्हें पहनते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे पैरों में कुछ पहना ही न हो, क्योंकि ये वेलवेट के बने होते हैं, इसलिए इनमें वॉर्मनेस लेदर बूट्स के मुकाबले ज्यादा होती है। यानी अगर आपको ज्यादा गर्मी चाहिए और सॉफ्ट फील पसंद है, तो वेलवेट बूट्स आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन हैं।

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जानिए कौन से होते है सोलह शृंगार, जिनके बिना अधूरी है हर शादी!

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सोलह शृंगार के बारे में तो आपने ज़रूर सुना होगा। भारत के कल्चर में सोलह शृंगार को जितनी अहमियत दी जाती है, उतनी शायद ही किसी और देश में दी जाती हो। हिंदू धर्म में जब शादी होती है, तो दुल्हन को पूरे सोलह शृंगार के साथ सजाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये 16 शृंगार आखिर होते कौन-कौन से हैं? अक्सर लड़कियाँ इस बात को लेकर कन्फ्यूज़ हो जाती हैं कि सोलह शृंगार में कौन-सी चीज़ें शामिल होती हैं और कौन-सी नहीं। इसी कन्फ्यूज़न को दूर करने के लिए फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल आपके लिए लेकर आया है ब्राइडल के 16 सिंगार के बारे में, जिसे पढ़ने के बाद आपको साफ समझ आ जाएगा कि दुल्हन के सोलह शृंगार आखिर होते कौन से हैं। तो आइए, जानते हैं ब्राइडल सोलह शृंगार के बारे में! 1. सिंदूर जब लड़की की शादी होती है, तब उसकी मांग में रेड या ऑरेंज कलर का सिंदूर लगाया जाता है। इसके बाद वह शादीशुदा कहलाती है। हिन्दू धर्म में सिंदूर पति की लंबी उम्र और सुहाग की पहचान माना जाता है। 2. बिंदी माथे पर एक प्यारी-सी बिंदी लग जाए तो खूबसूरती में जैसे चार चाँद लग जाते हैं। यह चेहरे को एक अलग ही चमक देता है जो लोगों की नजरों को माथे की ओर खींचती है। 3. बालों की सजावट सजे-संवरे बाल पूरे लुक की जान होते हैं। चाहे चोटी हो, जूड़ा हो या खुले बाल। बालों की अच्छी स्टाइलिंग से लुक और निखर जाता है। 4. काजल आँखों में लगाया गया काजल आँखों को बड़ा, गहरा और आकर्षक बनाता है। काजल बिना मेकअप के भी चेहरे में जान डाल देता है। और इसे इन सोलह सिंगर में खास भी माना गया है। 5. आईलाइनर आईलाइनर आँखों की शेप को उभारता है। हल्का हो या विंग स्टाइल इसे लगाने के बाद नजरों में एक अलग ही कॉन्फिडेंस आ जाता है। 6. नथ नाक में पहनी जाने वाली नथ दुल्हन के लुक को रॉयल टच देती है। यह चेहरे की खूबसूरती को खास बना देती है। यहां तक कि भारत के कई स्टेट में इसे सोलह सिंगारो में सबसे खास माना गया है। जैसे उत्तराखंड में नथ के बिना शादी नहीं हो सकती क्योंकि उत्तराखंड में नथ को सुहागन महिलाओं की पहचान माना जाता है। 7. कुंडल (झुमके) कानों के झुमके चेहरे के साथ-साथ गर्दन की सुंदरता भी बढ़ाते हैं। भारी या हल्के हर स्टाइल का अपना चार्म होता है। अगर हम यह कहे कि झुमकों या फिर कुंडलों के बिना एक ब्राइडल का लुक या फिर किसी सुहागन महिला का लुक अधूरा है तो हम कुछ गलत नहीं कहेंगे। 8. हार गले में पहना जाने वाला हार पूरे आउटफिट को कंप्लीट करता है। बिना हार के लुक अधूरा-सा लगता है। इसी लिए तो लगभग भारत के हर स्टेट के अपने हार होते है चाहे फिर राजस्थान का कुंदन हार हो या गुजरात का चोकर इनके बिना तो ब्राइडल का लुक अधूरा ही रहता हैं। 9. मेहंदी हाथों और पैरों में रची मेहंदी खुशियों और शुद्धता का प्रतीक है। और इसे तो सीधा दुल्हे के प्यार से जोड़ा जाता है कहा जाता है कि जितनी गहरी मेहंदी, उतना गहरा प्यार और तभी तो सदियों से इसे सोलह सिंगार की जान माना जाता है। 10. चूड़ियाँ हाथों में खनकती चूड़ियाँ ही तो महिलायों की खूबसूरती को दिखाती है और यही तो खुशीयो की पहचान मानी जाती हैं। दुल्हन के हाथ चूड़ियों के बिना अधूरे से लगते हैं,और शादियों तो हरी चूड़ियां दुल्हन को चढ़ाई भी जाती है क्योंकि जिस तरह सिंदूर शादीशुदा महिलाओं की पहचान होता हैं ठीक उसी तरह चूड़ियां भी महिलाओं के शादीशुदा होने की निशानी होती हैं। 11. कंगन कंगन चूड़ियों से थोड़े भारी होते हैं और हाथों को रिच और ग्रेसफुल लुक देते हैं। कंगन को अक्सर रिश्ता जोड़ने का प्रतीक माना जाता है। आपने देखा ही होगा कि जब भी कोई रिश्ता पक्का होता है तब दुल्हन को रिश्ता पका होने की निशानी के रूप में कंगन पहनाए जाते हैं। 12. अंगूठी उंगली में सजी अंगूठी हाथों की सुंदरता बढ़ाती है और सादगी के साथ एलिगेंस दिखाती है। इसके साथ अंगूठी ही तो हाथों का सबसे खास गहना मानी जाती है। जिसे पहने के बाद आपके हाथ खाली नहीं लगते। 13. कमरबंद कमर पर पहना जाने वाला कमरबंद साड़ी या लहंगे को परफेक्ट शेप देता है और ट्रेडिशनल लुक में चार्म जोड़ता है। कुछ महिलाएं तो कमरबंद को बतौर चाभी के झल्लो के रूप में भी इस्तेमाल करती हैं। 14. पायल पैरों में पहनी जाने वाली पायल की हल्की-सी छनक चलते समय बहुत मधुर लगती है और पायल ही तो महिलाओं की खूबसूरती को उभारती है। इसी के साथ पायल को नारी की सुंदरता का प्रतीक माना गया है। जिसके बारे में जाने कितने ही लेखकों ने कितनी ही बाते लिखी हैं। 15. बिछिया पैरों की उंगलियों में पहनी जाने वाली बिछिया शादीशुदा होने की पहचान होती है और इसे ही तो पारंपरिक श्रृंगार का जरूरी हिस्सा माना गया है। यहां तक ही ये भी माना जाता है कि महिलाएं इन बिछियों को अपनी शादी पे पहनती है उसके बाद जब तक वह सुहागन रहती है तब तक वह कभी भी इन्हें पूरी तरह से नहीं उतारती। 16. इत्र (परफ्यूम) हल्की-सी खुशबू पूरे श्रृंगार को पूरा करती है। अच्छी सुगंध से पर्सनालिटी और भी आकर्षक लगती है और यही तो नई ब्राइड्स की पहचान होती हैं।

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रांची की लहंगा साड़ियाँ कभी नहीं होती आउट ऑफ फैशन- Best for Bridal and Festive looks

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लहंगा साड़ी का नाम तो आपने ज़रूर सुना होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में लहंगा साड़ियाँ सबसे ज़्यादा कहाँ बनाई जाती है? लहंगा साड़ी का लेटेस्ट वर्ज़न रांची में बहुत से स्टोर में वेडिंग सीज़न के टाइम देखने को मिल रहा है। इस समय रांची लहंगा साड़ियों का सबसे फैशनेबल अड्डा बन चुकी है, जिसे हर एक महिला पसंद कर रही है। और अगर आपको भी यह लहंगा साड़ी चाहिए, तो रांची की दुकानों को ज़रूर देखें। इन साड़ियों की सबसे खास बात यह है कि इन्हें आप लहंगे की तरह भी पहन सकती हैं और साड़ी की तरह भी। अगर आपका मन लहंगा पहनने का है, तो नीचे स्कर्ट और ऊपर दुपट्टे को सिंपल तरीके से डालकर लहंगे जैसा लुक ले सकती हैं। वहीं अगर आपका मन साड़ी पहनने का है, तो नीचे स्कर्ट पहनें और दुपट्टे को साड़ी के पल्लू की तरह ड्रेप करें यह बिल्कुल साड़ी जैसी दिखने लगेगी। रांची के बेस्ट स्टोर्स जहाँ मिलती हैं लहंगा साड़ियाँ रांची के पंचवटी प्लाज़ा में आपको चकोरी या फिर सांवरिया जैसे कई ऐसे स्टोर्स मिल जाएंगे, जहाँ आपको एक से बढ़कर एक लहंगा साड़ियों का कलेक्शन देखने को मिलेगा। अगर आप नॉर्मल लहंगे पहनने वालों से थोड़ा अलग दिखना चाहती हैं यानी एक यूनिक लुक लेना चाहती हैं, तो लहंगा साड़ी आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट रहेगी। ब्लाउज डिज़ाइन और इंस्टेंट स्टिचिंग लहंगा साड़ी में अक्सर ब्लाउज को थोड़ा स्पेशल और यूनिक डिजाइन में बनाया जाता है, ताकि जब भी आप इसे पहनें तो ब्लाउज की खूबसूरती अलग ही नज़र आए। इसके साथ-साथ रांची की इन दुकानों पर लहंगे के साथ ब्लाउज की स्टिचिंग भी होती है, जिससे आपको ब्लाउज सिलवाने के लिए कहीं और जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। लहंगा भी वहीं से और ब्लाउज की झंझट भी खत्म। क्योंकि रांची की ज्यादातर दुकानों पर उनके पर्सनल टेलर्स होते हैं, तो आपको बस दुकान पर जाना है। जैसे ही आपने अपना लहंगा सिलेक्ट किया, उसके साथ ही आपका ब्लाउज और पेटीकोट सिर्फ़ 5 मिनट में रेडी होकर आपके हाथ में आ जाता है। कैसे बनता है ये शानदार सिस्टम? लहंगा साड़ी का पेटीकोट अक्सर थोड़ा बड़ा होता है, क्योंकि इसमें फ्लेयर बनाने के लिए पेटीकोट के अंदर प्लास्टिक की जाली लगाई जाती है। इससे जब आप लहंगा साड़ी पहनती हैं, तो इसका लुक बिल्कुल लहंगे जैसा नज़र आता है। इसके साथ ही इसका पल्लू काफ़ी हैवी होता है, क्योंकि यह अलग से दिया जाता है। दुपट्टा इतना बड़ा होता है कि कमर से लेकर सिर तक ड्रेप करने में लंबाई बिल्कुल भी कम नहीं पड़ती। एक ड्रेस, दो लुक.. हर फंक्शन के लिए परफेक्ट हम यह कह सकते हैं कि यह लहंगा साड़ी उन महिलाओं के लिए एकदम परफेक्ट है, जिन्हें अक्सर कई शादियों या पार्टियों में जाना होता है। जिससे वह एक शादी में इसे लहंगे की तरह पहन सकती हैं और दूसरी शादी में उसी लहंगे को साड़ी की तरह पहन सकती हैं। इस तरह एक ही ड्रेस से आप दो अलग-अलग फ़ंक्शन अटेंड कर सकती हैं।

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वूमेन शर्ट हैं आज के समय में स्टाइल और कंफर्ट वाला सबसे बेहतरीन ट्रेंड!

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आज के वेस्टर्न वियर ट्रेंड में टॉप्स और मिडी ड्रेसेज़ के साथ-साथ वूमेन शर्ट्स भी खूब चल रहीं हैं। चाहे ऑफिस वियर हो, कॉलेज वियर हो या किसी पार्टी में जाना हो या फिर डेली वियर के लिए कुछ स्टाइलिश और कंफर्टेबल पहनना हो। वूमेन शर्ट हर मौके पर एक परफेक्ट ऑप्शन बन चुकी है। आजकल लड़कियां वेस्टर्न वियर में शर्ट पहनना ज्यादा पसंद कर रही हैं, क्योंकि यह अन्य वेस्टर्न कपड़ों के मुकाबले कम रिवीलिंग होती है और लुक में भी आपको एक क्लासी और परफेक्ट लुक देती है। इसी बढ़ते ट्रेंड को देखते हुए फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल आपके लिए लेकर आया है कुछ ऐसे शानदार शर्ट ऑप्शंस, जिन्हें देखने के बाद आप खुद को इन्हें खरीदने से रोक नहीं पाएंगी। कोरियन लाइट शेड्स ओवरसाइज्ड शर्ट्स कोरियन लाइट शेड्स ओवरसाइज्ड शर्ट्स आजकल बहुत ट्रेंडिंग में है। अगर आप भी अपने लुक को कोरियन एसथेटिक टच देना चाहती हैं, तो यह शर्ट आपके लिए एकदम परफेक्ट चॉइस है। चाहे कॉलेज हो या ऑफिस वियर दोनों ही जगह यह शर्ट बिल्कुल परफेक्ट रहती है। इसके साथ-साथ यह कंफर्ट में भी इतनी अच्छी होती है कि आप इसे जींस के साथ, पैंट्स के साथ या स्कर्ट के साथ आसानी से पहन सकती हैं, और क्योंकि यह लाइट कलर में होती है, इस वजह से इसमें आपका स्किन शेड यानी कलर कॉम्प्लेक्शन भी, न तो बहुत डल लगता है और न ही बहुत ज़्यादा लाइट दिखाई देता है। कैजुअल शर्ट कैजुअल शर्ट को अगर नॉर्मल जींस के साथ रोज़ाना पहन लिया जाए, तो न सिर्फ़ पूरा दिन आपको कंफर्ट मिलता है बल्कि आपका लुक भी स्मार्ट और स्टाइलिश दिखता है। जो आपको एक ऐसी पर्सनालिटी देता है जो परफेक्ट स्टाइल आइकन की पहचान होती है। उसके साथ-साथ कैजुअल शर्ट में आपको इतनी डिजाइंस के ऑप्शंस मिल जाते हैं कि आप सेलेक्ट करने में कन्फ्यूज हो जाएंगी कि कौन सी लें और कौन सी नहीं। ड्रेसबैरी ओवरसाइज शर्ट ड्रेसबैरी ओवरसाइज़्ड शर्ट आज सिर्फ़ लड़कों की ही फेवरेट नहीं रही, बल्कि लड़कियाँ भी इसे बड़े शौक से पहन रही हैं। जहाँ लड़के आमतौर पर लिमिटेड या सेटल कलर्स चुनते हैं, वहीं लड़कियों के लिए इसमें कई कलर ऑप्शन्स अवेलेबल होते हैं जैसे पिंक, ऑरेंज, रेड, ग्रीन, ब्लू और भी बहुत से कलर आपको ऑप्शन में मिल जाएंगे। यही वजह है कि लड़कियाँ इसे अलग-अलग तरीकों से स्टाइल करके अक्सर कैरी करती हैं। यह शर्ट उन लड़कियों के लिए एकदम परफेक्ट है जो वेस्टर्न लुक चाहती हैं, लेकिन ऐसे वेस्टर्न कपड़े पहनना पसंद करती हैं जो कम्फ़र्टेबल हों और रिवीलिंग न हों। तो ये शर्ट आपके लिए सबसे अच्छा ऑप्शन हैं। फॉर्मल शर्ट अगर आप कॉरपोरेट ऑफिसर हैं या ऐसी पर्सनैलिटी हैं जिसे अक्सर मीटिंग्स अटेंड करनी होती हैं या प्रोफेशनल इवेंट्स में जाना पड़ता है, तो फॉर्मल शर्ट आपकी वॉर्डरोब में ज़रूर होनी चाहिए। आजकल फॉर्मल शर्ट्स में इतने सारे ऑप्शन्स आ गए हैं कि इन्हें ईज़िली सेलेक्ट किया जा सकता है। पहले जहाँ रेड, ब्लैक और व्हाइट तक ही चॉइस रहती थी, वहीं अब नेवी ब्लू, स्काई ब्लू और बेबी पिंक जैसे शेड्स की शर्ट्स भी फॉर्मल वियर में बड़े आराम से पहनी जा रही हैं। ये शेड्स न सिर्फ आपकी फॉर्मल लुक में एक स्टाइलिश टच ऐड करती हैं, बल्कि इन्हें पहनने के बाद आप एक परफेक्ट, क्लासी और प्रोफेशनल लुक भी क्रिएट कर पाते हैं।

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नैनीताल है महिलाओं के लिए सुरक्षित सोलो ट्रैवल डेस्टिनेशन

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अगर आप Women Solo Travel in India की योजना बना रही हैं और एक ऐसा स्थान चाहती हैं जो सुरक्षित, शांत और खूबसूरत हो, तो नैनीताल, उत्तराखंड आपके लिए परफेक्ट चॉइस है। पहाड़ों की गोद में बसा यह हिल स्टेशन न सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है, बल्कि महिलाओं के लिए सुरक्षित सोलो ट्रैवल डेस्टिनेशन in Uttarakhand भी माना जाता है। क्यों नैनीताल महिलाओं के लिए सुरक्षित है? नैनीताल को Safe Places for Solo Female Travelers in India की लिस्ट में हमेशा टॉप पर रखा जाता है। इसके पीछे कई कारण हैं: यही वजह है कि पहली बार सोलो ट्रैवल करने वाली महिलाओं के लिए भी नैनीताल एक Best Solo Trip for Women माना जाता है। नैनीताल की खूबसूरती जो दिल जीत ले नैनीताल को Lake City of India भी कहा जाता है। यहां की नैनी झील, चारों ओर फैले हरे-भरे पहाड़ और ठंडी हवा मन को सुकून देती है। नैनी झील सुबह की शांति हो या शाम की रोशनी, झील का हर रूप बेहद खास होता है। Boating in Nainital महिलाओं के बीच सबसे पसंदीदा एक्टिविटी है। स्नो व्यू पॉइंट यहां से हिमालय की बर्फीली चोटियों का नज़ारा देखने को मिलता है — परफेक्ट फोटोग्राफी स्पॉट। माल रोड Shopping in Nainital का असली मज़ा माल रोड पर ही आता है। यहां आप बिना किसी चिंता के अकेले घूम सकती हैं। सोलो महिला यात्रियों के लिए टॉप एक्टिविटीज़ नैनीताल सिर्फ घूमने के लिए नहीं, बल्कि एडवेंचर के लिए भी जाना जाता है: Horse Riding in Nainital, Camping near Nainital, Trekking in Kumaon Region, योग और मेडिटेशन रिट्रीट, कैफे होपिंग और लोकल कुमाऊनी फूड. ये सभी एक्टिविटीज़ नैनीताल को Best Hill Station for Women Travelers बनाती हैं। महिलाओं के लिए रहने के सुरक्षित विकल्प नैनीताल में आपको कई Women Friendly Hotels in Nainital, होमस्टे और गेस्टहाउस मिल जाएंगे, जहां: महिला स्टाफ उपलब्ध होता है, CCTV और 24×7 सिक्योरिटी, साफ-सुथरा और आरामदायक माहौल। सोलो ट्रैवल करने वाली महिलाओं के लिए फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल की बेस्ट सेफ्टी टिप्स हालांकि नैनीताल काफी सुरक्षित है, आप देर शाम या रात को भी मॉल रोड पर आराम से टहल सकते हैं, फिर भी कुछ ज़रूरी बातें ध्यान में रखें: क्यों नैनीताल है महिलाओं के लिए बेस्ट ट्रैवल डेस्टिनेशन? अगर आप Safe Hill Stations for Women in India, Solo Female Travel Destinations या Peaceful Travel Places in Uttarakhand खोज रही हैं, तो नैनीताल हर पैमाने पर खरा उतरता है। यह जगह आपको आत्मनिर्भर बनने, खुद के साथ समय बिताने और नेचर से जुड़ने का मौका देती है — वो भी पूरी सुरक्षा और सुकून के साथ। नैनीताल सिर्फ एक हिल स्टेशन नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए एक सुरक्षित, आत्मविश्वास बढ़ाने वाला और यादगार सोलो ट्रैवल अनुभव है। अगर आप अपनी अगली यात्रा प्लान कर रही हैं, तो नैनीताल को अपनी ट्रैवल लिस्ट में ज़रूर शामिल करें।

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जानिए GT टैग वाली भारतीय साड़ियों के बारे में, दुनिया भर में हैं मशहूर

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जब भी हम भारत में महिलाओं के पहनावे के बारे में बात करते हैं, तो सबसे पहले जिसका ज़िक्र हमारे जेहन में आता है वो है साड़ी। साड़ी सिर्फ़ भारतीय होने का एहसास नहीं दिलाती, बल्कि साड़ी एक ऐसा फ़ैशन रहा है जो कभी भी आउट ऑफ़ फ़ैशन नहीं हुआ। चाहे 90s का दौर रहा हो या 2025, साड़ी हमेशा ट्रेंडिंग रहीं, क्योंकि साड़ी पुराने समय में भी जिस शौक और स्टाइल से पहनी जाती थी, आज भी उसी स्टाइल और उस ही शौक से लोग इसे पहनना पसंद करते हैं। और इसी को देखते हुए आज हम बताएँगे दुनिया भर में मशहूर GT टैग वाली साड़ियों के बारे में जिनकी खूबसूरती ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। तो आइए जानते है वो कौन सी साड़ीयां है जिन्होंने पूरी दुनिया में जादू फैला दिया है!? पटोला साड़ी (गुजरात) – GT टैग पटोला साड़ी जो पूरे देश में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली साड़ियों में से एक है। पटोला साड़ी गुजरात के पाटन की एक मशहूर हाथ से बनी साड़ी है, जिसे डबल इक्कत बुनाई टेक्निक से बनाया जाता है। यह साड़ी रेशम के धागों से हाथ से बना कर तैयार की जाती है, जिसमें इसके अंदर बहुत ही ट्रिकी डिजाइन और रंगों का उपयोग किया जाता है। पटोला साड़ी की बुनाई के प्रोसेस में बहुत टाइम लगता है और एक साड़ी बनाने में महीनों लग जाते हैं। और इसी खासियत के कारण 2013 में इसे GT टैग दिया गया। बनारसी सिल्क साड़ी (उत्तर प्रदेश) – GT टैग बनारसी साड़ी के बारे में तो सबने ही सुना है क्योंकि भारत की शान बनारसी साड़ियों को ही माना जाता है। बनारसी सिल्क साड़ी भारत की सबसे फेमस साड़ियों में से एक है और यह यूपी के वाराणसी में हाथ से बनाई जाती है। इसमें जरी यानी सोने-चांदी की धागों का उपयोग करके इसकी बुनाई की जाती है। बनारसी साड़ियों में आपको मुगल और भारतीय डिजाइनों का एक अनोखा मिक्सर देखने को मिलता है। यहां के लोगों की मेहनत और साड़ियों की ऑथेंटिसिटी को देखते हुए 2009 में सरकार ने बनारसी सिल्क साड़ियों को GT टैग दिया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि केवल बनारसी क्षेत्र में बनी साड़ियां ही बनारसी सिल्क साड़ी कहलाएंगी। तसर सिल्क साड़ी (बिहार) अगर कभी बिहार की बात आए और बिहार की तसर सिल्क साड़ी की बात न हो तो बात कुछ अधूरी लगती है, क्योंकि यही वह साड़ी है जो नेचुरल सिल्क से बनी होती है। इसमें जंगली रेशम के कीड़ों का प्रयोग होता है और यह साड़ी झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के आदिवासी इलाकों में ही बनाई जाती है। इस साड़ी को नॉन-वॉयलेंट सिल्क भी कहा जाता है क्योंकि इसे बनाने के लिए रेशम के कीड़े को मारना नहीं पड़ता। तसर सिल्क साड़ियां नेचुरल रंग और मोटी बनावट के लिए जानी जाती हैं, और इसे भी 2009 में GT टैग मिला, जिससे इसका संरक्षण सुनिश्चित हुआ। तंगेल साड़ी (पश्चिम बंगाल)  तंगेल साड़ी, जो कि पिछले ही साल GT टैग में शामिल हुई है, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और नदिया जिले में बुनी जाती है। जी हां, यह साड़ी आम साड़ी की तरह नहीं बल्कि बुनकरों द्वारा खास तरीके से तैयार की जाती है। इसे बनाने के लिए हथकरघा (हैंडलूम) का प्रयोग किया जाता है, जिन पर हाथ से बनी बुट्टियां बनाई जाती हैं। इन पर बहुत ट्रिकी डिजाइन, वाइब्रेंट रंग और मजबूत बनावट इन साड़ियों को बेहद खास बनाते हैं।