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Sultanpur Bird Sanctuary

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क्या आप भी कर रहे हैं दिल्ली के पास वीकेंड ट्रिप प्लान, तो इन सर्दियों में जरूर आएं दिल्ली के बिलकुल पास “सुल्तानपुर बर्ड सेंचुरी”। पक्षियों की तरह बेफिक्री से उड़ना कौन नहीं चाहता, उनकी तरह बेफिक्री से अपनी जिंदगी जीना कौन नहीं चाहेगा। जिंदगी में एक बार तो यह बात सबके मन में आती है कि “काश ये पंख हमारे पास भी होते और फिर ये पूरा आसमान हमारा होता और दुनिया के हर कोने की सैर करते”। पक्षि और उनकी चहचहाहट सुनना किसको नहीं पसंद तो चलिए ले चलते हैं आपको पक्षियों के नगर  “सुल्तानपुर बर्ड सेंचुरी में। अगर आप पक्षियों की प्रजातियों के बारे में जानना चाहते हैं या फिर आप बर्ड लवर हैं तो यह आपको बहुत पसंद आएगी। Sultanpur Bird Sanctuary दिल्ली से 45 किलोमीटर और गुडगांव से लगभग 15 किमी दूर स्थित ये जगह काफी खूबसूरत और शांत है। अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों को देखने का मौका और उनकी चहचहाहट सुनने का सुकून सच में आपका दिल जीत लेगा। और अगर आप फोटोग्राफी में दिलचस्पी रखते हैं तो यह जगह आपके लिए बेस्ट है। सुल्तानपुर बर्ड सेंचुरी : यह जगह न सिर्फ पक्षियों के लिहाज़ से खूबसूरत है बल्कि शोर-शराबे से दूर पिकनिक और क्वालिटी टाइम बिताने के लिए भी बेस्ट है। यहां आपको न सिर्फ पक्षी बल्कि पक्षियों की 250 अलग-अलग प्रजातियां देखने को मिल जाएंगी, इसके अलावा यहां इंडेंजर्ड स्पीशीज के पक्षी भी देखने को मिलेंगे। सुल्तानपुर बर्ड सेंचुरी में कॉमन हूप, पेडीफील्ड पिपिट, पर्पल सनबर्ड, लिटिल कॉर्मोरेंट, इंडियन रोलर, सफेद गले वाला किंगफिशर जैसे कई पक्षीयों की प्रजाति आपको दिखाई देगी। कब आते हैं माइग्रेटिंग बर्ड्स : सितंबर के महीने से इस पार्क में माइग्रेटिंग बर्ड्स का आना शुरू हो जाता है। ठंड के मौसम में साइबेरिया, यूरोप, मध्य एशिया, रूस आदि देशो में बर्फ जम जाती है। बहुत ज्यादा ठंड की वजह से इनका खाना बनने वाले जीव या तो मर जाते हैं या जमीन में छिप जाते हैं, जिससे इनके भोजन-पानी की समस्या पैदा होती है। जिस वजह से यह पक्षी माइग्रेट करते हैं। सितंबर से दिसंबर के महीने में यहां काफी अलग-अलग प्रजातियों की बर्ड्स आपको मिल जाएँगी। कैसे पहुंचे : सुल्तानपुर बर्ड सेंचुरी  हरियाणा के सुल्तानपुर गाँव, फरुख्नगर, गुडगाँव जिले और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से 50 किलोमीटर दूर स्थित है। आप यहां सड़क मार्ग से कैब, बस या फिर अपनी परसनल गाड़ी से आसानी से आ सकते हैं।

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Best Place for Photoshoot or aesthetic Reel in Delhi

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अगर आप दिल्ली में कुछ खूबसूरत और फोटोग्राफी या रील के लिहाज़ से किसी जगह की तलाश में है, तो आप बिलकुल सही जगह आए हैं। आज अच्छी रील और अच्छे फोटोग्राफ से अपने सोशल मीडिया अकाउंट को सजाना कौन नहीं चाहता। फिर एस्थेटिक शूट तो आजकल बिल्कुल ट्रेंडिंग में है, वो चाहे एस्थेटिक रील हो या एस्थेटिक पिक्चर। ऐसे में अपना इंस्टाग्राम या फिर अपना कोई भी सोशल मीडिया अकाउंट बढ़ाने के लिए, या यूं कहें कि अपने सोशल मीडिया अकाउंट को सुन्दर और सबसे अलग बनाने लिए जो सबसे मेन चीज़ आपको ध्यान में रखनी पड़ती है वो है एक सुन्दर सा बैकग्राउंड। (Best Place for Photoshoot or aesthetic Reel in Delhi) चांदनी चौक के मसाला बज़ार से लेकर ऐतिहासिक इमारत, गार्डन्स और मकबरे यूं तो यहां आपको सब कुछ अपनी अलग अंदाज़ के साथ दिखाई देगा पर आज हम आपको उन जगहों से रूबरू कराएंगे जो आजकल काफी ट्रेंड में है। हर चीज़ में एक अलग अंदाज़ और इतिहास समेटे यह दिल्ली, आपको किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने देगी। और यही कारण है कि आज हम आपके लिए लेकर ए हैं दिल्ली की बेस्ट ट्रेंडिंग इंस्टाग्रामएबल जगहों की लिस्ट। जहां जाकर आपका कंटेंट काफी अट्रक्टिंग होने वाला है। सुन्दर नर्सरी – Best Family Picnic Spot इंस्टाग्राम रील्स में आजकल जो सबसे ट्रेंडिंग में है, वो है सुन्दर नर्सरी। ये न सिर्फ एक गार्डन है बल्कि अब दिल्ली के बेस्ट पिकनिक स्पॉट्स में भी शुमार है। शाम के ढ़लते सूरज की पड़ती हल्की-हल्की किरणें आपकी रील्स और फोटोज को अलग ही इफ़ेक्ट देती हैं। हुमायूँ टॉम्ब के सामने स्थित यह नर्सरी एक नर्सरी के साथ-साथ बायो-डाइवर्सिटी पार्क, एक ऐतिहासिक विरासत और एक गार्डन भी है। जहां आप 40 रुपए टिकट देकर प्रवेश कर सकते हैं। यह सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। तो आप सुबह उगते सूरज और शाम के ढलते सूरज के साथ काफी शानदार शॉट्स ले सकते हैं। नाम से समझ आता है कि यह सिर्फ एक गार्डन हो। पर अंदर जाने पर आपको कुछ अलग ही माहौल देखने को मिलेगा। जिससे सूरज ढलने के बाद यहां जगमगाती लाइट्स में भी आप शूट कर सकते हैं। एक और खास बात यह है कि इस खूबसूरत जगह में बांस के पेड़ों की ओंठ में ठीक झील के सामने आपको एक कैफ़े भी मिल जायेगा। सोच के देखिये कुदरत की गोद में बैठ कर लंच करने का मज़ा कैसा होगा। इसकी दूसरी तरफ ठीक सामने फूलों से भरी रंगीन नर्सरी भी है। ऐसे में प्रेमी जोड़ों की हस्ते और खिलखिलाते चेहरे किसी का भी फोटोग्राफर का दिन मुकम्मल कर देती हैं। हुमायूं टॉम्ब – Beautiful Location हुमायूं टॉम्ब में एंट्री भारतियों के लिए 30 रुपए और फॉरनर्स के लिए 500 रुपए है। आजकल हुमायूं टॉम्ब भी काफी ट्रेंडिंग में है, और यक़ीनन आपने काफी एस्थेटिक रील्स देखी भी होंगी हुमायूं टॉम्ब की। यह टॉम्ब सच में काफी सुन्दर है। जहां आप एक से बढ़कर एक रील और फोटोशूट कर सकते हैं। जैसा की हम सभी जानते हैं कि मुगलों द्वारा बनाई गयी हर विरासत काफी भव्य और शानदार होती है, तो एक ऐसी ही उत्कृष्ट विरासतों में से एक है हुमायूं टॉम्ब। अगर आप सोच रहें हैं कि हुमायूं का मकबरा भी इतिहास पढ़ने की तरह उबाऊ होगा तो आप बिलकुल गलत है। एक बात इस मकबरे की खास है कि हर हैरिटेज की तरह हुमायूं का मकबरा किसी बादशाह द्वारा नहीं बल्कि हुमायूं की बेगम रानी हमीदा बानो ने अपने शोहर की याद में बनाया था। इस मकबरे में आप एस्थेटिक लुक के साथ काफी शानदार शूट कर सकते हैं। तो दोस्तों खिले हुए फूलों और ऊँचे पेड़ों के साथ सही तस्वीर और रील्स का कई सारा कंटेंट लेकर अपने सोशल मीडिया अकाउंट को सजाएं। हौज़ ख़ास – Where History meets Modernity यह तो हम सभी जानते है कि दिल्ली की सबसे मशहूर जगह माना जाता है, हौज़ ख़ास। पर यह जगह आपकी विडिओ शूट और फोटोशूट के लिहाज़ से भी बेस्ट है। हौज़ ख़ास विलेज में एक शांत झील के साथ एक पुराना ऐतिहासिक किला है जिसे शूटिंग के लिए काफी पसंद किया जाता है। यहां आपको प्री वेडिंग शूट करते कपल्स भी दिखाई देंगे। आपको एक ओपिनियन के तौर पर बता दें कि यहां आप किसी इंडियन लुक, या इंडियन वियर में शूटिंग करें तो यह काफी खूबसूरत होगा। क़ुतुब मीनार – Best Travel Spot of Delhi क़ुतुब मीनार की रील्स भी आजकल काफी ट्रेंडिंग पर चल रही हैं। दिन में क़ुतुब मीनार की खूबसूरती की झलक तो बेशक ही आप सभी ने देखि होगी। पर अगर आपको क़ुतुब मीनार की कुछ अलग तस्वीरों को अपने कमरे में कैद करना है तो यहां रात को जाएं। चमचमाती लाइट्स इस मीनार को काफी सुन्दर बना देती है, जिसमे आप काफी शानदार सिनेमेटिक शॉट्स ले सकते हैं। और इसके अलावा क़ुतुब मीनार के ऊपर से गुजरता प्लेन रात के समय दोनों की जगमगाती लाइट्स एक अलग ही माहौल बना देती है। पर इसके लिए आपको सही समय का इंतज़ार करना होगा। और एक फोटोग्राफर तो हमेशा से ही ऐसे किसी शॉट की तलाश में रहता है। तो अब यहां की रात में बनाई गयी रील्स ज्यादा चलती हैं, एक बार जरूर जाएं और अपने अकाउंट को औरों से अलग बनाएं। चंपा गली न सिर्फ स्वादिष्ट खाना बल्कि यह जगह सोशल मीडिया के लिए परफेक्ट एस्थेटिक वाइब्स प्लेस है। यकीन मानिये, यहां जाकर आपका कैमरा खुद-ब-खुद चलना शुरू हो जायेगा क्योंकि यहां की वाइब्स ही काफी अत्त्रक्टिंग हैं। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए यह जगह बिलकुल परफेक्ट है। इस जगह में आपको ऐसे-ऐसे कैफे दिखाई देंगे जो सोशल मीडिया वाइब के लिए बिलकुल सही है। इसके अलावा यहां जलती अलग-अलग लाइट्स परियों के शहर जैसा फील देती हैं।  चंपा-गली इस युथ की सबसे फेमस और सबसे पसंदीदा जगहों  है।

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IRCTC : क्या है आईआरसीटीसी? जानिए यहां  पूरी जानकारी

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इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन यानी आईआरसीटीसी भारतीय रेलवे की सहायक कंपनी है, जिसकी अपनी ऑफिसियल वेबसाइट है। इसे रेल मंत्रालय द्वारा 27 सितम्बर 1999 में स्थापित किया गया था। IRCTC का मुख्यालय नई दिल्ली में स्तिथ है। यह कंपनी ही भारतीय रेल में ऑनलाइन टिकट ,खानपान व पर्यटन का कार्य करती है। अगर आप सब भी किसी यात्रा पर ट्रेन से जाना चाहते है उसके लिए ऑनलाइन टिकट बुक करना चाहते है तो आप इसकी आधिकारिक वेबसाइट की मदद से अपनी यात्रा के लिए या फिर प्लेन की टिकट उसके साथ साथ होटल भी बुक कर सकते हो। आप घर पर बैठे बैठे आसानी से अपनी टिकट बुक कर सकते है।  इसके लिए आपको कही  जाने की जरूरत नहीं होगी और आजकल तो डिजिटल का  ज़माना है हर चीज़ चुटकियो में। इस विभाग ने न केवल वेबसाइट पर इंटरनेट के जरिये बल्कि मोबाइल फ़ोन से जीपीआरएस (GPRS )के जरिये भी रेल टिकट बुक करने की सुविधा उपलब्ध कराइ हैं। आईआरटीसी में मिलने वाली सुविधाएँ : बात अगर IRCTC की सुविधाओं की करे तो इसके जरिये टिकट बुक करने से काफी फैसिलिटीज मिलती है- . घर बैठे जान सकते है कि कौनसी ट्रेन की क्या टाइमिंग है ? . कौन सी  कौन -कौन से स्टेशन में रुकेगी ? . तत्काल टिकट की सुविधा . लाइव ट्रेन की लोकेशन देख सकते हैं। . ऑनलाइन माध्यम से टिकट बुक कर सकते है। . कौन सी रेल में कितनी सीटे खाली है ? IRCTC में अकाउंट कैसे बनायें ? 1. अकाउंट बनाने के लिए सबसे पहले आपको इसकी ऑफिसियल वेबसाइट पर जाना होगा। 2. IRCTC की वेबसाइट : www.irctc.co.in 3. जब इसमें साइन अप का ऑप्शन आएगा तो उस पर क्लीक् कर के ,निचे स्क्रीन जैसा एक फॉर्म खुलेगा , जिसमे आपको अपनी डिटेल्स भरना होगा और रजिस्ट्रेशन पूरा करना होगा। क्या IRCTC वेबसाइट एकदम सेफ है? बहुत से लोगो को यह डर बैठा रहता है ऑनलाइन बुकिंग करा दी कुछ गड़बड़ तो नहीं होगा ?हमारी इन्फॉर्मेशन लीक तोह नहीं होगी ?तो आप बिलकुल बेफिक्र रहिये यह एकदम सुरक्षित कंपनी है। यहां आपको डरने की कोई जरुरत नहीं। यह रेल मंत्रालय द्वारा बनाई गयी सब्सिडियरी हैं। इसको बनाने का उद्देश्य ही आप लोगो की मुस्किलो को घर बैठे आसान करने का है। इसमें आपको पर्याप्त सुविधाएँ  उपलब्ध होती हैं।

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ISKCON Vrindavan : ऐसा मंदिर जिसे अंग्रेजों का मंदिर कहा जाता है

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इस्कॉन मंदिर, जिसे कृष्ण बलराम मंदिर भी कहा जाता है, वृन्दावन की सबसे मशहूर और खास जगहों में से एक है। इस मंदिर की स्थापना स्वामी प्रभुपाद ने साल 1975 में राम नवमी के दिन की थी। लोग इसे प्यार से “अंग्रेजों का मंदिर” भी कहते हैं, क्योंकि यहाँ देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी भक्त आते हैं। केसरिया कपड़ों में हरे कृष्ण का जाप करते विदेशी भक्तों को देखना अपने आप में बहुत अलग और अच्छा अनुभव देता है इस ब्लॉग में Five Colors of Travel आपको बताएगा इस्कॉन की खासियत, यहां की खूबसूरती और यहां लगातार बढ़ती भक्तों की भीड़ का राज। इस्कॉन मंदिर की बनावट मंदिर में तीन मुख्य वेदियाँ हैं, जो इसकी सबसे बड़ी खास पहचान मानी जाती हैं। बीच वाली वेदी पर श्री कृष्ण बलराम विराजमान हैं, बाईं तरफ श्री गौर निताई के दर्शन होते हैं और दाईं तरफ श्री राधा श्यामसुंदर ललिता और विशाखा सखी के साथ विराजे हुए हैं। मंदिर में दिन-रात, यानी पूरे 24 घंटे कीर्तन चलता रहता है, जिसकी वजह से यहाँ हर समय एक अलग ही शांति और भक्ति वाला माहौल महसूस होता है। जैसे ही आप अंदर कदम रखते हैं, मन अपने आप हल्का और शांत हो जाता है। मंदिर परिसर में स्वामी प्रभुपाद की बहुत बड़ी समाधि भी है, साथ ही उनका पुराना निवास स्थान भी मौजूद है, जिसे अब एक संग्रहालय में बदल दिया गया है, जहाँ उनकी जिंदगी, विचारों और इस्कॉन की शुरुआत से जुड़ी कई बातें देखने और जानने को मिलती हैं। मंदिर में होने वाले कार्यक्रम इस्कॉन मंदिर में भगवान कृष्ण से जुड़े बड़े-बड़े त्योहार बहुत धूमधाम से मनाए जाते हैं। जन्माष्टमी पर तो पूरा वृन्दावन खुशियों में डूब जाता है और यहाँ की रौनक कई दिन पहले से ही देखने लायक होती है। राधाष्टमी के दिन भक्तों को राधारानी के चरण कमलों के खास दर्शन मिलते हैं, गोवर्धन पूजा या अन्नकूट के मौके पर ढेर सारा प्रसाद बनता है और सबको प्यार से बाँटा जाता है। झूलन यात्रा में भगवान को सजे-धजे झूलों में झुलाया जाता है, जिसे देखने भक्त दूर-दूर से आते हैं। वहीं कार्तिक मास में दामोदर महोत्सव के दौरान पूरे मंदिर में भक्ति और साधना का माहौल और भी ज़्यादा गहरा और सुकून देने वाला हो जाता है। रोज खिचड़ी का प्रसाद बांटने की वजह स्वामी प्रभुपाद की सोच थी कि मंदिर के आसपास कोई भी इंसान भूखा न रहे, इसी वजह से यहाँ रोज़ अन्नदान किया जाता है और प्यार से खिचड़ी का प्रसाद बाँटा जाता है। सुबह से शाम तक ज़रूरतमंद लोग यहाँ आते हैं और बिना किसी भेदभाव के सबको भोजन मिलता है। यह सेवा सिर्फ धार्मिक काम नहीं है, बल्कि इंसानियत और अपनापन दिखाने का एक खूबसूरत तरीका है, जहाँ प्रसाद लेते हुए ऐसा लगता है जैसे कोई अपने घर में बैठकर खाना खिला रहा हो। वृन्दावन यात्रा का सुकून वृन्दावन के मंदिर और यहाँ के रंग-बिरंगे उत्सव ऐसी जगहें हैं जहाँ आते ही मन अपने-आप हल्का और शांत महसूस करने लगता है। यहाँ की गलियों में घूमना, मंदिरों में घंटियों और भजनों की आवाज़ सुनना और भक्तों की श्रद्धा देखना दिल को सुकून दे देता है। ये यात्रा सिर्फ घूमने या फोटो खींचने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आपके मन को अंदर से जोड़ने वाला अनुभव बन जाती है। यहाँ आकर इंसान थोड़ी देर के लिए अपनी भागदौड़ भरी ज़िंदगी भूल जाता है और मन व आत्मा दोनों को एक अलग तरह की शांति मिलती है।

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Kanak Ghati जयपुर की ऐसी खूबसूरत लोकेशन जहाँ हो चुकी है बॉलीवुड की कई सुपरहिट फिल्मों की शूटिंग

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जयपुर में एक ऐसी जगह है जहाँ एक नहीं, बल्कि कई बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। क्तोयोंकि यह जगह है ही इतनी खूबसूरत कि फ़िल्मी सितारे खुद को यहाँ आने से रोक ही नहीं पाते, अगर आप भी जयपुर जा रहे हैं, तो कनक घाटी को अपनी लिस्ट में ज़रूर शामिल कीजिए। नाहरगढ़ की पहाड़ियों के बिल्कुल नीचे, आमेर रोड पर बसी यह जगह इतनी खूबसूरत है कि यहाँ पहुँचते ही मन को अलग ही सुकून मिलता है करीब 275–280 साल पहले महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने इस बाग को बनवाया था और आज भी इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे वक्त वहीं थम गया हो, क्योंकि इसकी बनावट आज भी लगभग वैसी ही है जैसी तब थी। इसकी खूबसूरती में आज तक कोई कमी नहीं आई है। चारों तरफ हरियाली, ठंडी हवा और पानी की हल्की-हल्की आवाज़ आपको पूरी तरह से रिलैक्स कर देती है। आज फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल आपको इस व्लॉग में कनक घाटी की पूरी हिस्ट्री बताएगा और यह भी कि यह जगह आज भी लोगों के लिए इतनी खास क्यों है। Kanak Ghati Kanak Ghati –जहाँ हिस्ट्री और स्पिरिचुअलिटी मिलते हैं कनक घाटी से जुड़ी कई पुरानी कहानियाँ भी हैं। कहा जाता है कि पहले यहाँ अश्वमेध यज्ञ हुआ था, जो राजाओं के लिए एक बहुत बड़ा धार्मिक अनुष्ठान माना जाता था। इसी के साथ यह पूरा बाग भगवान कृष्ण के धाम वृंदावन से इंस्पायर होकर बनाया गया था और इसलिए इसका नाम कनक वृंदावन पड़ा। यहीं पर राधा मंदिर और माधव मंदिर भी स्थित हैं, जिसे लोग जयपुर का पुराना गोविंद देव जी मंदिर भी कहते हैं। मान्यता है कि गोविंद देव जी की मूर्ति पहले इसी जगह रखी गई थी, बाद में उसे दूसरे मंदिर में स्थापित कर दिया गया। Kanak Ghati की बनावट और खूबसूरती कनक घाटी को बहुत ही खूबसूरत तरीके से बनाया गया है। यहाँ की बनावट में राजपूत स्टाइल साफ़ दिखाई देती है और कुछ जगहों पर मुग़ल आर्किटेक्चर की झलक भी देखने को मिलती है। ज़मीन पर की गई पुरानी अराइश तकनीक आज भी संगमरमर जैसी चमक देती है। बीच-बीच में बने संगमरमर के फव्वारे, छोटे-छोटे झरने और उनसे बहता पानी इस जगह की खूबसूरती को और भी बढ़ा देता है। इसके साथ ही इसकी लोकेशन भी इतनी शानदार है कि अगर आप यहाँ के व्यू पॉइंट तक जाएँ जो अब किसी वजह से बंद कर दिया गया है तो यहीं से आपको जल महल, नाहरगढ़, आमेर और आसपास की कई खूबसूरत जगहों का नज़ारा एक साथ देखने को मिल जाता है। Best Place in jaipur इसकी खूबसूरती और शानदार बनावट को देखते हुए आज के समय में कनक घाटी एक बढ़िया ट्रैवल स्पॉट बन चुका है। यहाँ सिर्फ टूरिस्ट ही नहीं आते, बल्कि आसपास के लोकल लोग भी अपने परिवार के साथ अक्सर यहाँ पिकनिक मनाने आते हैं। यह ऐसी जगह है जहाँ आप आराम से फोटो खींच सकते हैं, वीडियो या फोटोशूट करा सकते हैं। इतना ही नहीं, यह एक पॉपुलर स्पॉट बन गया है जहाँ कई वेडिंग और प्री-वेडिंग शूट्स भी होते हैं। यह जगह सुबह से शाम तक खुली रहती है और यहाँ की एंट्री टिकट सिर्फ ₹35 प्रति व्यक्ति है। यह जगह जयपुर शहर से लगभग 5 किलोमीटर ही दूर है, इसलिए यहाँ पहुँचना भी आपके लिए काफी आसान हो जाता है। क्यों जाएँ कनक घाटी? कनक घाटी एक ऐसी जगह है जो आपको हिस्ट्री, स्पिरिचुअलिटी और नेचर तीनों को एक साथ महसूस कराती है। अगर आप जयपुर आए हैं और भीड़-भाड़ से दूर थोड़ा शांत समय बिताना चाहते हैं, तो कनक घाटी आपके लिए एकदम परफेक्ट जगह है। यहाँ का पारिवारिक माहौल दिल को सुकून देता है और चारों तरफ हरियाली, ठंडी हवा और बहता ठंडा पानी मन को इतना ताज़ा कर देता है कि आपकी सारी थकान अपने आप उतर जाती है।

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Ganesh pol: आमेर किले का सबसे खूबसूरत और यादगार द्वार

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राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित आमेर किला वैसे तो अपनी शानदार बनावट, ऊँची दीवारों और शाही इतिहास के लिए दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन इसके अंदर बना गणेश पोल एक ऐसी जगह है जो पहली ही नज़र में आपको रोक लेती है। जैसे ही आप इस बड़े से द्वार के सामने पहुंचते हैं, तो आपको एहसास होता है कि यह सिर्फ एक एंट्री गेट नहीं है, बल्कि उस दौर की ट्रेडिशन सोच, आस्था और कला का एक शानदार कॉम्बिनेशन है। आमेर किले के अंदर प्रवेश करने से पहले गणेश पोल मानो आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाने की तैयारी कर लेता है। तो फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे गणेश पोल की शानदार बनावट के बारे मे फूल के बारे में कलाकारों की अनोखी कलाकारी गणेश पोल की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी बारीक और रंगीन पेंटिंग्स में देखने को मिलती है। इस गेट के ऊपर गणेश की आकृति बनी हुई है, क्योंकि हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम की शुरुआत गणेश जी को याद करके की जाती है। यही वजह है कि इसे किले का शुभ प्रवेश द्वार माना जाता है, ताकि महल में आने वाला हर व्यक्ति मंगल भावना के साथ अंदर प्रवेश करे। दीवारों पर बना फ्रेस्को वर्क, फूलों और बेलों के डिजाइन और हल्के सॉफ्ट रंग आज भी उतने ही ताजे और सुंदर लगते हैं, और जब धूप की हल्की किरणें इन रंगों पर पड़ती हैं तो पूरा गेट और भी ज्यादा खूबसूरत नजर आने लगता है। Ganesh Pol–शाही रास्ता, जो आपको महलों तक ले जाता है गणेश पोल सिर्फ देखने में ही खूबसूरत नहीं है, बल्कि इसे आमेर महल की शान माना जाता था। पुराने समय में इसी रास्ते से राजा-महाराजा, शाही परिवार के लोग और उनके खास लोग जैसे मंत्री, नौकर और निजी सेवक अंदर जाया करते थे। यह द्वार आपको सीधे जय मंदिर और सुख निवास जैसे खास और प्राइवेट हिस्सों तक ले जाता है। जब आप गणेश पोल के नीचे से गुजरते हैं तो अपने आप एक अलग सा रॉयल एहसास होने लगता है, जैसे कुछ पल के लिए आप भी उसी शाही ज़िंदगी का हिस्सा बन गए हों। Ganesh Pol-ये फोटो क्लिक करने के साथ-साथ फील करने वाली जगह है आज के समय में गणेश पोल आमेर किले के सबसे फोटोजेनिक स्पॉट्स में से एक माना जाता है। यहां किसी भी एंगल से ली गई फोटो खूबसूरत ही आती है, लेकिन ये जगह सिर्फ फोटो के लिए ही मशहूर नहीं है, बल्कि ये इसकी बनावट और उस पर की गई बारीक कलाकारी के लिए जाना जाता है। अगर आप थोड़ी देर रुककर इसकी डिटेलिंग, रंगों और डिजाइन को ध्यान से देखें, तो उस समय की कारीगरी और धैर्य साफ समझ में आता है कि कैसे बिना किसी मशीन के भी इतनी शानदार और खूबसूरत बनावट तैयार की गई थी, और यही एहसास आपके ट्रैवल एक्सपीरियंस को और भी खास बना देता है।  क्यों याद रह जाता है गणेश पोल गणेश पोल की खासियत यही है कि यह बहुत बड़ा होने के बावजूद सॉफ्ट और ग्रेसफुल लगता है। यहां आकर आपको समझ आता है कि शाही जीवन में सुंदरता और आस्था कैसे साथ-साथ चलती थी। यह जगह शोर-शराबे से दूर, एक शांत लेकिन प्रभावशाली एहसास देती है, जो लंबे समय तक याद रहता है। तो जब भी आप जयपुर ट्रिप प्लान करें और आमेर किले जाएं, तो गणेश पोल को सिर्फ एक एंट्री पॉइंट या फोटो स्पॉट समझकर आगे न बढ़ जाएं। यहां थोड़ा रुकें, इसे महसूस करें और उस दौर की शाही शुरुआत का अनुभव लें क्योंकि आमेर किले की कहानी यहीं से धीरे-धीरे खुलती है और यहीं से आपका असली ट्रैवल एक्सपीरियंस शुरू होता है।

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जयपुर में Homestay देख रहे हैं? जगनिवास है एक बेहतरीन ऑप्शन!

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जब आप जयपुर घूमने की योजना बनाते हैं तो घूमने की जगहें तो इंटरनेट पर आसानी से मिल जाती हैं, लेकिन अगर रुकने की जगह सही न हो, तो पूरा सफर फीका सा लगने लगता है। और क्योंकि सही जगह ठहरना अपने आप में ट्रिप का एक ज़रूरी आयाम होता है। उसमें भी जब बात पिंक सिटी जयपुर जैसी शाही नगरी की हो, तो ठहरने का अनुभव भी तो उतना ही खास होना चाहिए। Homestay अपने आप में एक एक ऑप्शन होते हैं जो किसी और विकल्प से बेहतर महसूस होते हैं। क्योंकि ये आपको ऐसा वातावरण देते हैं जिसमें आपको अपनेपन का एहसास मिले। आज Five Colors of Travel के इस ब्लॉग में हम आपको जयपुर के एक ऐसे होमस्टे के बारे में बताएंगे जहाँ रुकना न सिर्फ आरामदायक है, बल्कि किफायती भी होगा। Jagniwas Homestay, Jaipur जगनिवास Jagniwas Homestay जयपुर के एक ऐसे एरिया में बना है जो शहर का एक शांत और सुविधाजनक इलाका माना जाता है। यह होमस्टे सिंधी कैंप बस स्टैंड के पास है, जिससे यहाँ पहुँचना बहुत आसान हो जाता है। रेलवे स्टेशन, मेट्रो और जयपुर के प्रमुख बाज़ार यहाँ से ज़्यादा दूर नहीं हैं। इस घर की बनावट, आंगन और दीवारों पर लगी तस्वीरें जयपुर की संस्कृति के इतिहास और संस्कृति की झलक पेश करती हैं। कमरे और ठहरने का अनुभव Jagniwas Homestay में ठहरने के लिए डीलक्स और साधारण कमरे उपलब्ध हैं। कमरे साफ-सुथरे और आरामदायक हैं। कमरों में मिलने वाली सुविधाएँ:आरामदायक बेड और साफ बिस्तरएयर कंडीशनरवाई-फाई की सुविधाअटैच बाथरूमटीवी खाने-पीने की व्यवस्था Jagniwas Homestay में आपको घर में बने खाने जैसा स्वाद मिलता है। यहाँ का खाना सादा, ताज़ा और पेट के लिए हल्का होता है। अगर आप चाहें तो बोलकर भी अपने हिसाब से डिश चुन सकते हैं या होमस्टे के आसपास मौजूद लोकल ढाबों और रेस्टोरेंट्स में जाकर भी जयपुर के ज़ायके का मज़ा ले सकते हैं। जयपुर में खानपान के लिए मसाला चौक भी काफी मशहूर है जो आप हमारी इस वीडियो में भी देख सकते हैं। पार्किंग और अन्य सुविधाएँ Jagniwas Homestay में पार्किंग की सुविधा मौजूद है, जो जयपुर जैसे बड़े शहर में बहुत काम की चीज़ है। यहाँ कार और बाइक दोनों को सुरक्षित जगह मिल जाती है। आप घर के अंदर भी पार्किंग कर सकते हैं।यहाँ के लोग और स्टाफ काफी सहयोगी हैं। जरूरत पड़ने पर वे आपको जयपुर में घूमने की जगहों, लोकल ट्रैवल और बाज़ारों के बारे में सही जानकारी भी दे देते हैं। लोकेशन का फायदा इस होमस्टे की सबसे अच्छी बात इसकी लोकेशन है। यहाँ से आप आसानी से:हवा महलसिटी पैलेसआमेर किलालोकल बाज़ार जैसी जगहों तक पहुँच सकते हैं। जयपुर घूमते हुए ठहरने के लिए एक Homestay बढ़िया ठिकाना साबित हो सकता है। जयपुर ही नहीं आजकल लगभग हर राज्य में ऐसे होमस्टे मिल जाते हैं, जो सफर को थोड़ा और खास बना देते हैं। इसलिए अब आप जब भी कहीं घूमने जाएं और रुकने के लिए जगह ढूंढें तो अपनी लिस्ट में होमस्टे को जगह ज़रूर दें।

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Hidden Leaf Homestay- रामनगर में घर से दूर भी घर जैसा एहसास

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जब भी हम कहीं बाहर जाने की प्लानिंग करते हैं तो हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि आखिर हम कहां रुकेंगे या कहाँ ठहरेंगे? उसमें भी बात अगर उत्तराखंड जैसे डेस्टिनेशन की हो, तो प्लानिंग और सॉलिड होनी चाहिए! आज फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में आप जानेंगे एक ऐसे होमस्टे Hidden Leaf Homestay के बारे में जहां रुकना किफायती भी होगा और मजेदार भी। आजकल होमस्टे रुकने और ठहरने के लिए एक बेहतर विकल्प माने जाते हैं क्योंकि यह न केवल आपको ठहरने की जगह देते हैं बल्कि ऐसा एहसास कराते हैं जैसे आप अपने ही किसी दूसरे घर में रुके हों। Hidden leaf Homestay यह होमस्टे रामनगर में जिम कॉर्बेट के पास स्थित है, जो जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से लगभग 5 किमी दूर है। ये एक पहाड़ी घर है जिसे बने हुए बहुत लम्बा वक़्त नहीं हुआ है इसलिए ये बेहद सुंदर और नया-नया सा भी लगता है। इस होमस्टे की सबसे बड़ी खासियत है इसके आसपास का शांत माहौल। अगर आप यहाँ रुकते हैं तो आपके दिन की शुरुआत सुबह पक्षियों की चहचहाहट और ठंडी हवाओं के साथ होती है। कमरे और ठहरने की जानकारी यहाँ डीलक्स और सुपर डीलक्स कमरे उपलब्ध हैं, जिनके साथ आपको बालकनी और माउंटेन व्यू भी देखने को मिलता है। रोजाना कमरों की सफ़ाई और हॉउसकीपिंग की सुविधा मिलती है। कुछ कमरों में वर्क डेस्क भी मिलती है। कमरे में मिलेंगी ये सुविधाएँ-आरामदायक बेड और साफ बिस्तरएसी ACवाई-फाई Wi-Fiअटैच बाथरूम Attach Bathroomसीटिंग एरिया Seating Area खाने पीने की व्यवस्था (Hidden Leaf Homestay) इस होमस्टे की एक खासियत है कि यहाँ आपको बिल्कुल घर जैसा खाना मिलता है। इस होमस्टे में इन-हाउस रेस्टोरेंट है जहाँ लंच/डिनर, ब्रंच और हाई-टी सर्व की जा सकती है। साथ ही, यहाँ मेहमानों के अनुसार खाने में स्थानीय ऑप्शन्स में भी उपलब्ध कराए जाते हैं। पार्किंग और अन्य सुविधाएँ यहाँ पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। कार और बाइक दोनों के लिए सुरक्षित जगह मिल जाती है। और होमस्टे के मालिक राजदीप सिंह सूद से बातचीत कर आप अन्य सुविधाओं की पुष्टि भी कर सकते हैं क्योंकि यहाँ आपको बिल्कुल पारिवारिक माहौल मिलता है। Hidden Leaf Homestay में रुकना और यहां वक्त बिताना अपने आप में शानदार अनुभव होता है। इसकी लोकेशन ऐसी है कि आपको आसपास की प्रसिद्ध जगहों पर जाने के लिए बहुत दूर नहीं निकालना पड़ता, बल्कि कुछ किलोमीटर के अंदर ही आप जिम कॉर्बेट और अन्य विजिटिंग प्लेसेस पर जा सकते हैं। न सिर्फ Hidden leaf homestay बल्कि आजकल आपको लगभग हर राज्य में ऐसे होमस्टे मिल जाएंगे। ये एक बेहतर विकल्प होते हैं तो अब आप जब कहीं घूमने जाएं और ठहरने की जगह देखें तो अपनी लिस्ट में होमस्टे को ज़रूर शामिल करें। होमस्टे कैसे काम करते हैं और सरकार से इन्हें कैसे सहायता मिलती है? ये जानने के लिए अभी देखिए हमारे युट्यूब चैनल पर ये वीडियो-

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Amer fort: जयपुर का सबसे शानदार और हिस्टोरिकल प्लेस

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जयपुर के रंग-बिरंगे बाज़ार और रॉयल वाइब्स के बीच एक जगह ऐसी है जो आपको सीधे पास्ट में ले जाती है और वो है आमेर किला। यहाँ कदम रखते ही महसूस होता है कि हिस्ट्री सिर्फ किताबों तक ही नहीं है, बल्कि यहां की हर दीवार, हर आँगन और हर नज़ारे में आज भी ज़िंदा है। इसी एहसास को और करीब से दिखाने के लिए Five Colors of Travel आपके लिए यह ब्लॉग लेकर आया है, जिसमें आमेर किले की पूरी कहानी, इसे बनाने के पीछे जुड़ी दिलचस्प बातें और वे खास जगहें जिन्हें देखकर आप खुद इस किले के दीवाने हो जाएंगे। इसके साथ ही अगर आपको ट्रैवल करना पसंद है, नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है और आप ऐसी लोकेशन ढूंढते हैं जहाँ रॉयल वाइबस के साथ कमाल की फोटोस भी मिलें, तो यह ब्लॉग आपके लिए ही है। (Amer Fort Jaipur) History of Amer fort आमेर किला जयपुर से करीब 11 किलोमीटर दूर, आमेर नाम की जगह पर एक ऊँची पहाड़ी पे बना हुआ है और इसे देखते ही ऐसा लगता है जैसे आप सीधे हिस्ट्री में कदम रख रहे हों। इसको 1592 में राजा मान सिंह प्रथम बनवाना शुरू किया था और बाद में सवाई जय सिंह द्वितीय ने इसमें कई बदलाव किए। यह किला राजपूत वास्तुकला का बेहतरीन एग्जाम्पल है, जिसमें मुगल शैली की झलक भी देखने को मिलती है। लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बना यह किला देखने में बहुत ही आई कैचिंग लगता है, और इसके हर कोने में हिस्ट्री की कहानियां और रियल लाइफ़ की झलकियाँ नजर आती हैं। Amer Fort-एंट्री जो पहली नज़र में ही दिल जीत ले आमेर किले में एंट्री सूरज पोल से होती है, जो आपको सीधे जलेब चौक यानी इस महल के मेन आँगन तक ले जाती है। पुराने ज़माने में यहीं पर सेनाओं की परेड होती थी और शाही स्वागत भी यहीं किया जाता था, इसलिए इसकी हिस्ट्री बड़ी ही खास है। इसी आँगन के पास शीला देवी मंदिर भी है, जिसे 1604 में राजा मान सिंह ने बनवाया था और यहां आज भी एक अलग ही शांति और पॉज़िटिव वाइब्स मिलती हैं, जलेब चौक के चारों तरफ किले की पुरानी दीवारें देखने लायक हैं और इस महल के हर कोने में हिस्ट्री की कहानियां छुपी हुई है। दीवान-ए-आम–जहाँ राजा जनता से मिलते थे अगला पड़ाव है दीवान-ए-आम, यानी वो जगह जहाँ राजा सीधे आम लोगों की बातें सुनते थे और उनके मसलों का हल निकालते थे। यहाँ खंभों पर हाथियों और दूसरे जानवरों की बेहद खूबसूरत नक्काशी बनी हुई है, जो इस जगह को और भी खास बना देती है। यहां खड़े होकर आप महसूस कर सकते हैं कि उस ज़माने में यहाँ कैसे बड़े-बड़े फैसले लिए जाते होंगे, और किस तरह राजा और उनके सलाहकार यहाँ बैठकर लोगों की परेशानियों पर चर्चा करते होंगे।दीवान-ए-आम की खुली और शानदार जगह को देखकर ये समझ आता है कि राजाओं की शान और ताकत सिर्फ उनके महलों तक ही नहीं, बल्कि उनके कामकाज की जगहों में भी साफ दिखती है। शीश महल आमेर किले का सबसे खास हिस्सा आमेर किले का सबसे खास हिस्सा माना जाता है शीश महल को जहाँ लगी छोटी-छोटी शीशों की सजावट इतनी शानदार है कि इसे देखते ही नज़रें वहीं ठहर जाती हैं। कहा जाता है कि सिर्फ एक मोमबत्ती जलाने से पूरा महल चमक उठता था। शीश महल को दीवान-ए-ख़ास भी कहा जाता है, जहाँ केवल राजा-महाराजा, उनकी रानियाँ और खास मेहमानों को ही आने की इजाज़त थी। शीश महल के सामने ही सुख निवास बना हुआ है। दीवारों और छतों पर बने अलग-अलग डिज़ाइन लोगों को इतना अट्रेक्ट करते हैं कि ज़्यादातर लोग यहीं रुक जाते हैं और फोटो क्लिक करने लगते हैं, वहीं सामने चारबाग शैली इस जगह की खूबसूरती को और भी बढ़ा देती है। सुरक्षा और प्राइवेसी किले का आख़िरी हिस्सा रानी महल है, जहाँ पुराने ज़माने में शाही परिवार की महिलाएँ रहा करती थीं। इसी इलाके में राजा मान सिंह का महल भी मौजूद है, जिसे आमेर किले का सबसे पुराना हिस्सा माना जाता है। किले के बाकी हिस्सों के मुकाबले यहाँ का माहौल काफ़ी शांत और प्राइवेट सा लगता है, जैसे यहाँ आकर शोर-शराबा अपने आप ही पीछे छूट जाता हो। चारों तरफ बनी जालियाँ, बंद रास्ते और सादा लेकिन शाही बनावट ये दिखाती है कि उस दौर में सुरक्षा और प्राइवेसी का कितना ध्यान रखा जाता था। ये जगह भले ही कम दिखावटी हो, लेकिन हिस्ट्री और शांति से भरी हुई है। लोकेशन और नज़ारे जो याद रह जाएँ आमेर किले के ठीक नीचे माओटा झील है, जो पहले के समय में महल के लिए पानी का मेन ज़रिया हुआ करती थी। किले के ऊपर से इस झील और आसपास की पहाड़ियों का नज़ारा सच में बहुत खूबसूरत लगता है और यहाँ खड़े होकर फोटो लेने का मन अपने आप करने लगता है। एक और मज़ेदार बात ये है कि आमेर किले और जयगढ़ किले के बीच एक गुप्त सुरंग भी है, जिसे ज़रूरत पड़ने पर शाही परिवार इस्तेमाल करते थे। ये सारी बातें आमेर किले को और भी ज़्यादा दिलचस्प बना देती हैं। आज का आमेर किला एक्सपीरियंस पहले टूरिस्ट हाथी की सवारी करके किले तक जाया करते थे, लेकिन अब जानवरों की देखभाल को ध्यान में रखते हुए ज़्यादातर लोग जीप राइड से ऊपर जाते हैं, जो काफ़ी आरामदायक और आसान भी है। इसके अलावा, 2013 में आमेर किले को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल किया गया, जिससे इसकी हिस्टोरिकल अहमियत और भी ज़्यादा बढ़ गई है जिससे दुनिया भर में इसकी पहचान बनी है।

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Jantar Mantar Jaipur : जहां है दुनिया की सबसे बड़ी सूरज घड़ी

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अगर आपको भी लगता है कि जयपुर यानी पिंक सिटी में घूमने का मतलब बस किले देखना, बाज़ार घूमना और राजा-महाराजाओं की कहानियाँ सुनना ही होता है, तो ज़रा रुकिए। जयपुर में एक ऐसी जगह भी है जो आपको बिल्कुल अलग वाइब देती है। जिस जगह पर आप बिना मोबाइल फोन, वॉच के भी टाइम को देख सकते हैं। और वो है जयपुरा का जंतर-मंतर। यहां आकर सच में महसूस होता है कि पुराने ज़माने में बिना किसी मॉडर्न टेक्नोलॉजी के भी लोग कितनी कमाल की चीज़ें बना लेते थे। फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि आखिर जंतर-मंतर होता क्या है और ये जगह जयपुर में इतनी खास क्यों मानी जाती हैं।(Jantar Mantar Jaipur) आखिर किसने बनवाया है Jantar Mantar 18वीं सदी में जयपुर को बसाने वाले और अपने समय के बड़े खगोलशास्त्री महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय को सितारों और ग्रहों की चाल समझने का बहुत शौक था। इसी शौक की वजह से उन्होंने 1724 से 1734 ईस्वी के बीच कई खास खगोलीय यंत्र बनवाए, जिनसे उस समय के लोग समय जानना, ग्रहों की स्थिति को समझना और सूरज-चांद की चाल का सही अंदाज़ा लगा पाते थे। उन्होंने ये वेधशालाएँ भारत के पाँच शहरों जयपुर, दिल्ली, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में बनवाईं ताकि खगोल विज्ञान को अच्छे से समझा जा सके। इनमें से जयपुर की वेधशाला सबसे बड़ी और सबसे खास मानी जाती है, जो आज भी उस दौर की समझ, सोच और शानदार आर्किटेक्चर को दिखाती है। पत्थर जो समय बताते हैं यहाँ आते ही सबसे पहले आपकी नज़र उन बड़े- बड़े पत्थर से बने यंत्रों की बनावटों पर जाती है। पहली बार देखने पर तो लगता है जैसे ये कोई आर्ट पीस हों, लेकिन असल में ये ऐसे यंत्र हैं जिनसे समय, सूरज और ग्रहों की चाल को समझा और नापा जाता था। महाराजा सवाई जयसिंह ने छोटे पीतल के यंत्रों की जगह पत्थर और संगमरमर से बड़े-बड़े यंत्र इसलिए बनवाए, ताकि ये ज्यादा मज़बूत रहें और धूप, बारिश या मौसम से जल्दी खराब न हों। आज भी इन्हें देखकर समझ आता है कि उस समय लोग विज्ञान को कितनी समझदारी और दूर की सोच के साथ देखते थे। 19 यंत्र और हर एक की अपनी कहानी जयपुर के जंतर-मंतर में कुल 19 खगोलीय यंत्र बने हुए हैं, और हर यंत्र का अपना अलग काम है। इनमें से सबसे खास सम्राट यंत्र है, जो दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की सूरज घड़ी मानी जाती है। करीब 27 मीटर ऊँचा यह यंत्र आज भी हैरान कर देता है, क्योंकि यह दो सेकंड तक का भी एक सटीक समय बता सकता है। जय प्रकाश यंत्र देखने में एक बड़े कटोरे जैसा लगता है, जिसमें आसमान का उल्टा नक्शा नजर आता है और इससे ग्रहों की स्थिति समझी जाती थी। वहीं राम यंत्र और राशि वलय यंत्र से यह पता चलता है कि उस दौर में भी भारत में खगोल विज्ञान कितनी ऊँचाई पर था। इन सभी यंत्रों को देखकर साफ समझ आता है कि पहले के लोग विज्ञान और समय की कितनी गहरी समझ रखते थे। Jantar Mantar-खूबसूरती का एक अनोखा नमूना यहां के स्थानीय पत्थर, ईंट, चूना और सफेद संगमरमर से बने ये यंत्र जितने काम के हैं, उतने ही देखने में भी सुन्दर हैं। इनकी बनावट ऐसी है कि आपको साइंस और आर्ट दोनों एक साथ नजर आते हैं। यही वजह है कि लोग यहाँ आकर सिर्फ जानकारी ही नहीं लेते। बल्कि इसकी खूबसूरती भी लोगो का ध्यान अपने ऊपर खींचती हैं। इसकी खासियत और साइंटिफिक इंपॉर्टेंट को देखते हुए साल 2010 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस अनोखी धरोहर को देख और समझ सकें। आज भी सीख सकते हैं यहां टाइम देखना आज जंतर-मंतर सिर्फ घूमने की जगह ही नहीं है। बल्कि ये तो ऐसी जगह है जहाँ आकर आपको चीज़ों को अपने आप समझने का मौका मिल जाता है। यहाँ खड़े होकर जब आप सूरज की छाया देखकर समय का अंदाज़ा लगाते हैं, तो मन में यही ख्याल आता है कि इतने साल पहले लोग बिना मोबाइल और घड़ी के भी आसमान और ब्रह्मांड को कितनी समझदारी से समझ लेते थे। अगर आप आपकी जयपुर की ट्रिप में कुछ यूनिक देखना, और समझना चाहते है, तो जंतर-मंतर जरूर जाएँ। यहाँ से लौटते समय आप सिर्फ फोटो नहीं, बल्कि समय और आसमान से जुड़ा एक खास अनुभव अपने साथ ले जाएंगे।