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साउथ इंडियन रेस्टोरेंट्स इन दिल्ली एनसीआर: Best South Indian Food Restaurant in Delhi-NCR

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कहते हैं किसी जगह के खानपान को देख कर वहां की संस्कृति के बारे में बताया जा सकता है और खानपान समाज का आईना होते हैं। खाने में डाले जाने वाले मसाले भी किसी जगह के बारे में बहुत कुछ बयां कर देते हैं। जैसे कश्मीर के मुख्य व्यंजनों में केसर का मेहक होना तय है, वैसे ही साउथ इंडियन South Indian खानों में नारियल और केले के पत्ते का होना अनिवार्य है। भारत विविधताओं (diversity) का देश है और इसके हर भाग में अलग-अलग तरह की संस्कृति, रहन सहन और खानपान देखने को मिल जाते हैं। खानपान और संस्कृतियों के विविधताओं के बीच एक दिल्ली एक ऐसा शहर है, जहां हर संस्कृति का संगम हो जाता है। आपको इस शहर की हर गली में हर तरह के भारतीय पकवानों के दुकान और रेस्टोरेंट मिल जाएंगे। फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल के इस ब्लॉग हम आपको बताने जा रहे हैं दिल्ली स्थित कुछ ऐसे रेस्टोरेंट्स के बारे में जहां आप प्रॉपर साउथ इंडियन डिशेज (proper south Indian dishes) का आनंद उठा सकते हैं। यहां आकर आपको ऐसा लगेगा कि आप केरल या फिर तमिलनाडु में बैठकर खाना खा रहे हैं। नवैद्यम : कनॉट प्लेस(Navaidyam cannaught place) दिल्ली के कनॉट प्लेस में स्थित नैवेद्यम रेस्टोरेंट अपने साउथ इंडियन अंदाज़ के लिए काफी फेमस है। इसकी प्रसिद्धि का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि दिल्ली एनसीआर में इसके 10 ब्रांचेस है। कनॉट प्लेस स्थित इस रेस्टोरेंट के भीतर आते हीं आपको प्रॉपर साउथ इंडियन वाइब्स आने लगेंगे। यहां आते ही सबसे पहले आपको छोटे से गिलास में छाछ सर्व किया जाएगा जिसकी ठंडी तासीर आप को गर्मी से तुरंत रिलीफ दिला देगी। यहां के मेन्यू कार्ड में बहुत सारी साउथ इंडियन डिशेज की वैरायटी उपलब्ध है। आपको यहां हर तरह के साउथ इंडियन डिश खाने को मिल जाएंगे। यहां आपका ऑर्डर केले के पत्ते में परोस कर लाया जाता है। इसके साथ ही यहां काम करने वाले सभी स्टाफ प्रॉपर साउथ इंडियन गेट-अप (South Indian get up) में होते हैं। जिसे देखकर आपको बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगेगा कि आप दिल्ली में हैं। यहां के मैन्यू कार्ड में आपको 15 से भी ज्यादा टाइप के डोसा, इडली, वडा और उत्तपम देखने को मिल जाएंगे। अगर आप खाने के बाद डेजर्ट खाना पसंद करते हैं तो आपको डेजर्ट के ऑप्शन भी यहां मिल जाएंगे। खाने के बाद दिया जाने वाला सौंफ और मिश्री सोने पर सुहागा का काम करता है। यह रेस्टोरेंट दिल्ली के कनॉट प्लेस में रीगल बिल्डिंग के पास स्थित है। पदमनाभम : ग्रेटर कैलाश(Padmanabham Greater Kailash) ग्रेटर कैलाश स्थित यह पद्मनाभम रेस्टोरेंट अपने साउथ इंडियन टेक्सचर (South Indian texture) के लिए पूरे दिल्ली में काफी मशहूर है। इस रेस्टोरेंट का खाना ही नहीं बल्कि यहां की इंटीरियर भी वाकई लाजवाब है। आप जब रेस्टोरेंट के अंदर एंटर करते हैं तो आपको चारों ओर वॉल पर लगाई गई पेंटिंग्स और रेस्टोरेंट के एक कोने में बनाए गए छोटे से मंदिर में रखी गई बालाजी की मूर्ति को देख कर भारतीय संस्कृति की संपन्नता का अद्भुत झलक देखने को मिलेगा। अगर बात करें यहां के मैन्यू की तो यहां के मैन्यू वीक में दिनों के हिसाब से चेंज होती रहती है। या यूं कहें की यहां के मैन्यू कार्ड दिन-ब-दिन बदलते रहते हैं। इस रेस्टोरेंट में चार दक्षिण भारतीय राज्य केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के पारंपरिक भजनों को परोसा जाता है। यहां सप्ताह में दिन के हिसाब से किसी एक राज्य पर फोकस किया जाता है। इस रेस्टोरेंट की एक और खास बात यह है कि यहां के डिशेज में स्पेशल साउथ इंडिया से मंगाए गए मसाले डाले जाते हैं, जो यहां के खाने का स्वाद और निखार देते हैं। यहीं वजह है कि आपको हर बाइट (Bite) में स्पेशल साउथ इंडियन जायके का अनुभव होगा। अपने अनोखे साउथ इंडियन स्वाद के लिए मशहूर पदमनाभम खाने के शौकीन लोगों के आकर्षण का केंद्र है। यहीं वजह है कि यहां वीकेंड्स (weekend) में आपको पहले ही बुकिंग करवा कर रखना होगा।हो सकता है कि वीकडेज (weekdays) में भी आपको यहां लंच करने के लिए इंतजार करना पड़े। जगरनॉट रेस्टोरेंट :(Jaggarnaut Restaurant) यह रेस्टोरेंट दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में स्थित है। आप दिल्ली के किसी भी कोने से यहां पहुंच सकते हैं। बात करें इस रेस्टोरेंट्स के बारे में तो यह सिर्फ खाने की डिश के लिए हीं मशहूर नहीं है बल्कि यहां की प्रेजेंटेशन भी लाजवाब है। रेस्टोरेंट में इंटर करते ही आपका अतिथि सत्कार किया जाता है और आपको टीका लगाया जाता है। जिसमें अतिथि देवो भवः की झलक देखने को मिलती है। इस तरह का अतिथि सत्कार भारतीय संस्कृति की संपन्नता को दर्शाता है। एंट्री के पास हीं आपको साउथ इंडियन स्नैक्स (South Indian snacks) मिल जाएंगे, जिन्हें आप अपनी इच्छा अनुसार खरीद सकते हैं। इस रेस्टोरेंट में बैठने की व्यवस्था फर्स्ट और सेकंड फ्लोर पर की गई है। अगर आप वीकेंड में आते हैं तो आपको यहां अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ेगा। हो सकता है, इंतजार एक घंटे का भी हो जाए। वहीं वीकडेज में भी कभी-कभार आपको रश देखने को मिल सकता है। ऐसे में आप पहले से ही अतिरिक्त समय लेकर आए। अगर बात किया जाए यहां के इंटीरियर की तो यहां के हर एक कोने कोने से आपको भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। इस रेस्टोरेंट की बनावट कुछ ऐसी है कि यहां आप खाना खाते हुए बाहर के ग्रीनरी व्यू का भी मजा ले सकते हैं। अगर यहां के खाने की बात की जाए तो यहां बैठने के साथ ही आपको और पापड़ और रसम सर्व किए जाएंगे। जिसका स्वाद आपकी भूख को और जगाने का काम करेगा। यहां के मैन्यू में आपको हर तरह के साउथ इंडियन फूड जैसे इडली, डोसा, मेदू वडा, अप्पम और उत्तपम आदि मिल जाएंगे। सर्वाना भवन : कनॉट प्लेस(Sarvana Bhavan Cannaught Place) दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित यह रेस्टोरेंट सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि भारत के बाहर भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। इसकी प्रसिद्धि के बारे में जितना कहा जाए उतना कम है। अगर आप यहां आते हैं तो यहां आपको टाइम मार्जिन लेकर चलना होगा। क्योंकि हो सकता

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Sacred Heart Cathedral Church : दिल्ली का सबसे बड़ा चर्च

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दिल्ली की हलचल भरी गलियों और शॉपिंग हब कनॉट प्लेस के पास एक ऐसी जगह है, जो भीड़-भाड़ और शोर-शराबे के बीच भी अपनी शांति और खूबसूरती से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। और यह है Sacred Heart Cathedral Church, जो सिर्फ एक चर्च नहीं, बल्कि दिल्ली की एक बेहद खूबसूरत जगह और आस्था का केंद्र है। लगभग 14 एकड़ में फैला यह कैथोलिक चर्च न सिर्फ आकार में बड़ा है, बल्कि इसकी बनावट भी कला की दृष्टि से बहुत खास मानी जाती है। यहाँ की लाल ईंटों वाली बिल्डिंग, भव्य मेहराब, ऊँची छत और रंग-बिरंगी खिड़कियां बहुत ही खूबसूरती से बनाई गई हैं। चाहे आप धार्मिक हों या फिर कला और वास्तुकला में रुचि रखते हों, यह जगह हर किसी के लिए दिल्ली का एक अट्रेक्टिव प्वाइंट है। यह पूरा चर्च बना है लाल इंटों से Sacred Heart Cathedral Church को ब्रिटिश आर्किटेक्ट हेनरी मेड ने डिज़ाइन किया था, जो प्रसिद्ध एडविन लुटियंस की टीम का हिस्सा थे। इसकी लाल ईंटों वाली बिल्डिंग और इतालवी स्टाइल का आर्किटेक्चर देखने को मिलता ही है, ये चर्च जितना बाहर से खूबसूरत दिखता है उतना ही ये अंदर से भी है। बड़ी सी घुमावदार छत, चमकते हुए पत्थर के फर्श और बड़े-बड़े मेहराब इसे और भी खूबसूरत बनाते हैं। इसकी खास बात यह है कि इसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि गर्मियों में भी अंदर ठंडक बनी रहे, जिससे दिल्ली की तपती गर्मी में भी आप यहाँ बिना किसी परेशानी के आराम से बैठ सकते हैं। ये हैं चर्च की मुख्य विशेषताएं चर्च की जो मुख्य वेदी है, जो कि सफेद संगमरमर से बनी हुई है। इसे सर एंथोनी डि मेलो ने दान किया था। वेदी के ठीक पीछे “द लास्ट सपर” की एक बहुत ही खूबसूरत पेंटिंग बनी हुई है, जो इस पूरे चर्च का केंद्र बिंदु है। चर्च की रंगीन कांच की खिड़कियों से जब धूप छनकर अंदर आती है, तो चर्च के अंदर का माहौल और भी खूबसूरत हो जाता है। ऊपर बने ऊँचे-ऊँचे शिखर इसकी खूबसूरती को और भी खास बना देते हैं। कुल मिलाकर, इस चर्च का हर कोने की अपनी खासियत और बनावट है। इसके साथ ही इस चर्च के अंदर गर्ल्स और बॉयज दोनों स्कूल बने हुए है। Sacred Heart Cathedral Church का इतिहास इस चर्च की नींव 1929 में रेवरेंड डॉक्टर ई. वन्नी ने रखी थी, और इसके निर्माण का काम 1930 में शुरू होकर 1934 में पूरा हुआ। यानी लगभग चार साल की मेहनत और लगन के बाद यह भव्य चर्च तैयार हुआ। आज यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं रह गया है, बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत का भी अहम हिस्सा बन चुका है। यहाँ आकर आप न सिर्फ आध्यात्मिक शांति महसूस कर सकते हैं, बल्कि उस समय के आर्किटेक्चर, कला और इतिहास को भी देख सकते हैं। ईसाई श्रद्धालुयों के मिलने का स्थान सेक्रेड हार्ट कैथेड्रल दिल्ली में रहने वाले पूर्वोत्तर के राज्यों जैसे मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड के ईसाई समुदाय के लिए खास महत्व रखता है। यह उनके लिए सिर्फ एक चर्च नहीं, बल्कि एक ऐसा मिलन स्थल है जहाँ वे अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को एक साथ जी सकते हैं। खासकर क्रिसमस और ईस्टर के समय, यहाँ की रौनक देखने लायक होती है। चर्च में सजावट, रंग-बिरंगी लाइटें और भजन-कीर्तन का माहौल पूरे इलाके में खुशी और पॉजिटिविटी भर देता है। इन त्योहारों के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इकट्ठा होते हैं, जिससे यहां की हलचल और भी खास बन जाती है। यह जगह न सिर्फ आध्यात्मिक शांति देती है, बल्कि लोगों को एक साथ जोड़ने का भी काम करती है। Sacred Heart Cathedral Church जाने का सही समय Sacred Heart Cathedral Church रोजाना सुबह 6 बजे से लेकर रात 8 बजे तक खुला रहता है, यानी आप चाहे सुबह आएँ या शाम को दोनों ही समय आपको यहाँ आकर शांति का एहसान होगा। और क्योंकि इसकी लोकेशन दिल्ली के कॉन्ट प्लेस में है इस लिय यह हमेशा शांति बनी रहती है। इसके ठीक पास ही प्रसिद्ध गुरुद्वारा बंगला साहिब है और सामने ही गोल डाकखाना स्थित है। कनॉट प्लेस से केवल कुछ ही कदम की दूरी पर होने की वजह से इसे ढूँढना भी बहुत आसान है, इसलिए आप चाहे ट्विस्ट हों या दिल्ली के रहने वाले, यहाँ आसानी से पहुँच सकते हैं और इस खूबसूरत और भव्य चर्च को देखने का आनंद ले सकते हैं।

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Sadar Bazar Agra- जहां सिर्फ चाट की दुकानें नहीं बल्कि चाट की पूरी गली होती हैं

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जब भी आगरा का नाम लिया जाता है तो ज़हन में सबसे पहले ताजमहल की तस्वीर उभर आती है, लेकिन अगर आप आगरा की असली रौनक और वहाँ की लोकल ज़िंदगी को नज़दीक से देखना चाहते हैं, तो आपको सदर बाज़ार को ज़रूर एक्सप्लोर करना चाहिए यह बजार सिर्फ कपड़ों या लेदर के लिए ही फेमस नहीं है बल्कि यहां की चाट गली तो और भी फेमस है। चारों तरफ रंग-बिरंगी दुकानें, खाने की खुशबू, लोगों की आवाज़ें और लगातार होती चहल-पहल मिलकर यह दिखाती है कि यहां न सिर्फ आगरा के लोकल लोग बल्कि ट्रैवलर भी आना बहुत पसंद करते हैं। यहाँ आप लोकल स्ट्रीट फ़ूड का मज़ा ले सकते हैं और साथ ही छोटी-बड़ी दुकानों से कुछ खास सामान भी खरीद सकते हैं। सच कहें तो सदर बाज़ार आगरा की वो जगह है जहाँ घूमते हुए शहर की धड़कन साफ़ महसूस होती है और यही इसे इतना खास बना देती है। Sadar Bazar Agra शाम को खुशनुमा हो जाता है Sadar Bazar Agra सदर बाज़ार आगरा के सबसे पुराने और सबसे ज़्यादा पसंद किए जाने वाले बाज़ारों में से एक है। जैसे ही शाम ढलती है, यहाँ की रौनक और भी बढ़ जाती हैं। संकरी गलियों में सजी छोटी-बड़ी दुकानें, रंग-बिरंगी लाइट्स से जगमगाते शो-रूम, चारों तरफ से आती स्ट्रीट फ़ूड की खुशबू और खरीदारी मोल-भाव करते लोग सब मिलकर एक अलग ही माहौल बना देते हैं। यहाँ चलते हुए कभी चाट की खुशबू अपनी खींच लेती है, तो कभी कोई दुकान कुछ देखने के लिए रोक लेती है। इस बाज़ार में आपको आगरा के लोकल लोगों के अलावा देश-विदेश से आए टूरिस्ट भी घूमते नज़र आ जाते हैं। कुल मिलाकर, सदर बाज़ार आगरा की असली ज़िंदगी और उसकी रफ्तार को महसूस करने की एक बेहतरीन जगह है। ये है इस बाज़ार की खासियत-Sadar Bazar Agra अगर आपको शॉपिंग करना पसंद है, तो सदर बाज़ार आपको बिल्कुल भी निराश नहीं करेगा। यहाँ घूमने पर आपको हर तरह की चीज़ें देखने को मिल जाएँगी। आगरा की पहचान माने जाने वाले मार्बल के हैंडीक्राफ्ट्स और ताजमहल की छोटी-छोटी खूबसूरत कॉपी तो यहाँ खास तौर पर मिलती हैं। इसके अलावा लेदर के बैग, बेल्ट और जूते, पीतल और लकड़ी की डेकोरेटिव चीज़ें, सब कुछ एक ही जगह आसानी से मिल जाता है। कपड़ों, ज्वेलरी, चूड़ियों और लोकल सॉवेनियर्स की भी यहाँ अच्छी-खासी वैरायटी है, वो भी ठीक दामों पर, अगर आपको मोल-भाव करना आता है, तो बाजार आपके लिए ही है जहां आप कई ऐसी ऑथेंटिक चीजें ले सकते है जो आपको और कही नहीं मिलेगी। चाट से लेकर फलूदा तक सब कुछ है यहाँ सदर बाज़ार का स्ट्रीट फ़ूड अपने आप में ही खास होता है। यहाँ आते ही चाट की खुशबू, गोलगप्पों के स्टॉल और गरमागरम टिक्की देखकर भूख अपने आप लग जाती है। यहाँ की चाट, गोलगप्पे और आलू टिक्की बहुत ही फेमस हैं,लेकिन उसके साथ ही अगर आप आगरा गए हो तो आपको आगरा का पेठा जरूर ट्राई करना चाहिए क्योंकि पेठा आगरा की पहचान माना जाता है। इसके अलावा ठंडी-ठंडी कुल्फी, फालूदा और देसी मिठाइयाँ भी लोगों को खूब पसंद आती हैं। बाज़ार में घूमते हुए, दुकानों को देखते हुए चलते-फिरते खाना ही सदर बाज़ार का असली मज़ा है, जो इस जगह को और भी खास बना देता है।Sadar Bazar Agra यहाँ घूमने का सही समय सदर बाज़ार घूमने का सबसे अच्छा समय शाम का होता है, जब मौसम थोड़ा ठंडा हो जाता है और सारी दुकानें रोशनी से सजी हुई नज़र आती हैं। इस वक्त बाज़ार में अलग ही रौनक होती है जिससे घूमने का मज़ा और भी दोगुना हो जाता है। अगर आपको ज़्यादा भीड़ में घूमना पसंद नहीं है, तो वीक डे में आना सबसे बढ़िया रहता है। फेस्टिवल्स के समय तो यहाँ की सजावट और माहौल और भी खास हो जाता है। असल में सदर बाज़ार सिर्फ़ शॉपिंग की जगह नहीं है, बल्कि यहाँ आकर आप आगरा की रोज़मर्रा की ज़िंदगी, लोगों की बातों और खाने-पीने के स्वाद को करीब से महसूस कर सकते हैं। ताजमहल देखने के अलावा, अगर आपको आगरा को सच में समझना है, तो आपको सदर बाज़ार की सैर ज़रूर करनी चाहिए। आगरा का सदर बाज़ार उन जगहों में से है जहाँ हर कदम पर कुछ नया देखने और चखने को मिलता है। अगर आप गर में कुछ यूनीक एक्सपीरियंस करना चाहते है, तो सदर बाज़ार आपकी लिस्ट में ज़रूर होना चाहिए।

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ताजमहल – प्यार की अमर निशानी | Taj Mahal Travel Guide in Hindi

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ताजमहल, आगरा में स्थित भारत की सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहर है। सिर्फ एक मकबरा या इमारत नहीं, बल्कि आप इसे मोहब्बत, कला और मुगल वास्तुकला के अद्भुत प्रतीक के रूप में देख सकते हैं। हर साल लाखों देशी-विदेशी पर्यटक ताजमहल देखने आगरा आते हैं। 1983 में इसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया था। (Tajmahal) ताजमहल का इतिहास ताजमहल का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज़ महल की याद में करवाया था। इसका निर्माण कार्य 1632 में शुरू हुआ और लगभग 22 वर्षों में पूरा हुआ। सफ़ेद संगमरमर से बना यह मकबरा आज भी प्रेम की सबसे खूबसूरत मिसाल माना जाता है। ताजमहल की वास्तुकला ताजमहल की वास्तुकला को दुनिया की सबसे बेहतरीन कलात्मक उपलब्धियों में गिना जाता है। यह मुगल, फारसी और इस्लामिक स्थापत्य शैली का अद्भुत संगम है, जिसमें संतुलन, समरूपता और बारीक कारीगरी साफ़ दिखाई देती है। ताजमहल सिर्फ़ एक मकबरा नहीं, बल्कि वास्तुकला की ऐसी रचना है जो सदियों से लोगों को मंत्रमुग्ध करती आ रही है। सफ़ेद संगमरमर की ख़ूबसूरती ताजमहल का निर्माण मुख्य रूप से मकराना (राजस्थान) के शुद्ध सफ़ेद संगमरमर से किया गया है। यह संगमरमर सूरज की रोशनी में अलग-अलग रंगों की आभा देता है — सुबह हल्का गुलाबी, दिन में दूधिया सफ़ेद और चाँदनी रात में चमकता हुआ सिल्वर सा दिखाई देता है। यही कारण है कि ताजमहल को दिन के अलग-अलग समय में देखने का अनुभव हर बार अलग लगता है। चार मीनारों की अनोखी डिजाइनिंग मुख्य मकबरे के चारों कोनों पर बनी चार मीनारें ताजमहल की पहचान हैं। ये मीनारें हल्की सी बाहर की ओर झुकी हुई बनाई गई हैं, ताकि भूकंप या किसी आपदा की स्थिति में वे मुख्य मकबरे पर न गिरें। यह उस समय की उन्नत इंजीनियरिंग और दूरदर्शिता को दर्शाता है। इन मीनारों से पूरी संरचना में संतुलन और भव्यता आती है। चारबाग़ शैली का सुंदर बाग़ ताजमहल के सामने बना बाग़ फारसी चारबाग़ शैली पर आधारित है, जिसे चार समान हिस्सों में बाँटा गया है। इन हिस्सों के बीच पानी की नहरें और फव्वारे बने हुए हैं, जो स्वर्ग की कल्पना को दर्शाते हैं। बाग़ के बीच से बहती जलधारा में ताजमहल की परछाईं एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती है, जो पर्यटकों और फ़ोटोग्राफ़रों को विशेष रूप से आकर्षित करती है। संगमरमर पर की गई कीमती पत्थरों की नक्काशी ताजमहल की दीवारों पर की गई नक्काशी इसकी सबसे बड़ी खासियतों में से एक है। इसे पिएत्रा ड्यूरा कला कहा जाता है, जिसमें संगमरमर पर नीलम, जैस्पर, मूंगा और फ़िरोज़ा जैसे कीमती पत्थरों को जड़ा गया है। फूलों और ज्यामितीय डिज़ाइनों की यह कारीगरी आज भी उतनी ही जीवंत और आकर्षक दिखाई देती है जितनी सैकड़ों साल पहले रही होगी। सूर्योदय और चाँदनी रात का जादू सूर्योदय के समय ताजमहल पर पड़ती पहली किरणें इसे सुनहरी आभा से भर देती हैं, जबकि चाँदनी रात में यह किसी स्वप्नलोक जैसा प्रतीत होता है। पूर्णिमा की रात को ताजमहल का नाइट व्यू देखने का अनुभव पर्यटकों के लिए बेहद खास माना जाता है। बदलती रोशनी के साथ ताजमहल के रंगों का बदलना इसकी वास्तुकला की जीवंतता को दर्शाता है। ताजमहल घूमने का सही समय ताजमहल टिकट और समय ताजमहल के पास घूमने की जगहें ताजमहल विजिट के लिए फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रैवल टिप्स

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Best Tourist Places in Chandigarh | Complete Travel Guide in Hindi

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चंडीगढ़ को भारत की सबसे खूबसूरत और प्लान्ड सिटी कहा जाता है। साफ-सुथरी सड़कें, हरियाली, शांत वातावरण और बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर इसे भारत के बेस्ट ट्रैवल डेस्टिनेशन में शामिल करते हैं। अगर आप एक ऐसी जगह की तलाश में हैं जहां घूमना भी हो और सुकून भी मिले, तो Chandigarh Trip आपके लिए परफेक्ट है। इस ट्रैवल वेबसाइट ब्लॉग में हम आपको चंडीगढ़ की उन प्रमुख जगहों से रूबरू कराएंगे, जिन्हें आपको अपनी यात्रा के दौरान ज़रूर एक्सप्लोर करना चाहिए। सुखना झील – चंडीगढ़ की सबसे प्रसिद्ध जगह Sukhna Lake Chandigarh शहर की शान मानी जाती है। यह एक विशाल और बेहद सुंदर झील है, जहां देश-विदेश से आए टूरिस्ट देखने को मिलते हैं। लोकेशन: सेक्टर-1, चंडीगढ़दूरी: सेक्टर-17 से लगभग 4 किमी यहां खाने-पीने की अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हैं और पर्यटक स्केच आर्टिस्ट से अपनी पेंटिंग भी बनवा सकते हैं।  ज़ाकिर हुसैन रोज़ गार्डन – गुलाबों का स्वर्ग Zakir Hussain Rose Garden एशिया का सबसे बड़ा रोज़ गार्डन माना जाता है। यहां 1000 से ज्यादा किस्मों के गुलाब देखने को मिलते हैं। Best Time to Visit: फरवरी से मार्चलोकेशन: सेक्टर-16, चंडीगढ़ यह जगह नेचर और फोटोग्राफी लवर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। रॉक गार्डन – कबाड़ से बनी कला Rock Garden of Chandigarh दुनिया भर में अपनी अनोखी कला के लिए प्रसिद्ध है। इसे प्रसिद्ध कलाकार नेक चंद ने बनाया था। यहां आपको बोतलें, चूड़ियां, टूटे बर्तन और अन्य वेस्ट मटेरियल से बनी शानदार मूर्तियां और झरने देखने को मिलेंगे। सुखना झील से 2 किमी  छत्तबीर चिड़ियाघर – वाइल्डलाइफ का अनुभव Chhatbir Zoo (Mahendra Chaudhary Zoological Park) बच्चों और वाइल्डलाइफ लवर्स के लिए एक बेहतरीन जगह है। यहां अलग-अलग प्रजातियों के जानवर देखने को मिलते हैं और यह जगह एजुकेशनल ट्रिप के लिए भी उपयुक्त है। एलांते मॉल – शॉपिंग और एंटरटेनमेंट हब Elante Mall Chandigarh न सिर्फ चंडीगढ़ बल्कि भारत के सबसे बड़े मॉल्स में से एक है। टाइमिंग: सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तकलोकेशन: इंडस्ट्रियल एरिया, फेज-1, चंडीगढ़

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Rajasthani Kathputli जो आज भी राजस्थान की शान मानी जाती है, जिसके बिना राजस्थान अधूरा सा है

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जब भी राजस्थान घूमने की बात होती है, तो अक्सर लोग किलों के बारे में, राजाओं-महाराजाओं की शान के बारे में और रेगिस्तान के बारे में सोचते हैं। उन्हें लगता है कि यहाँ हर तरफ सूखा होगा, ऊँट होंगे और दूर-दूर तक बस रेत ही रेत होगी। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। राजस्थान सिर्फ रेगिस्तान नहीं, बल्कि रंगों और शान से भरा हुआ एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ खान-पान से लेकर पहनावे तक सब कुछ अलग और खास है। इसके साथ ही राजस्थान की पहचान सिर्फ किले या महल नहीं हैं, बल्कि यहाँ का कल्चर है, और इस कल्चर का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है राजस्थानी कठपुतली कला और आज इस ब्लॉग में आप जानेंगे राजस्थान की शान, राजस्थानी कठपुतली के बारे में। नागौर: जहाँ से शुरू हुई कठपुतलियों की कहानी नागौर की गलियों में घूमते हुए रंग-बिरंगी कठपुतलियाँ हर किसी का ध्यान खींच लेती हैं। माना जाता है कि इसी इलाके से इस कला की शुरुआत हुई थी। यह कोई नई परंपरा नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही विरासत है, जिसका ज़िक्र लोकगीतों और कहानियों में मिलता है। आज नागौर की कठपुतली को जीआई टैग भी मिल चुका है, जो इसे इस जगह की खास पहचान बनाता है। कठपुतली बनाने वाले और दिखाने वाले कौन होते है इस कला को आज तक ज़िंदा रखने का सारा श्रेय भाट और नट समुदाय को जाता है। इन समुदायों के लिए कठपुतली सिर्फ कमाई का जरिया ही नहीं, बल्कि उनकी आस्था और विश्वास का केंद्र है। भाट समुदाय तो कठपुतली को माता भवानी का रूप मानता है और उसे एक खिलौना नहीं, बल्कि माता समझकर बहुत सम्मान देता है। ऐसा माना जाता है कि जब कठपुतली बनकर तैयार हो जाती है, तो कलाकार उससे एक बार माफी माँगते हैं कि आने वाले समय में काम करते हुए अगर कोई गलती हो जाए या अनजाने में कठपुतली का अपमान हो जाए, तो उसके लिए वे पहले ही क्षमा माँग लेते हैं। यहाँ तक कि रोज़ अपना काम खत्म करने के बाद वे कठपुतली की पूजा करते हैं और उसे मिठाई भी खिलाते हैं। यह सब देखकर ऐसा लगता है कि इनके लिए कठपुतली कोई साधारण खिलौना नहीं, बल्कि सदियों से चला आ रहा एक गहरा विश्वास है, जो आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जा रहा है। Rajasthani Kathputli कैसे बनती है राजस्थानी कठपुतली ज़्यादातर आम की लकड़ी से बनाई जाती है। इसकी बड़ी-बड़ी आँखें, चमकीले रंगों वाले सजे-धजे कपड़े और राजपूती अंदाज़ इसे अलग पहचान देता हैं। इसकी सबसे खास बात यह है कि इन कठपुतलियों के पैर नहीं होते। कमर के नीचे लंबा सा घाघरा पहनाया जाता है, जिसे नाचते समय देखकर ऐसा लगता है जैसे पुतली सच में चल रही हो। एक कठपुतली बनाना भी कोई आसान काम नहीं होता। पहले लकड़ी को काटकर उसका आकार बनाया जाता है, फिर उसे अच्छे से घिसा जाता है, रंग किया जाता है और आखिर में कपड़े पहनाए जाते हैं। इन सभी चरणों से होकर जब कठपुतली तैयार होती है, तब जाकर उसमें जान आती है। वीरता की कहानियाँ और मशहूर पात्र कठपुतली कला में वीरता की कहानियों का खास महत्व होता है और इनमें नागौर के बहादुर योद्धा अमर सिंह राठौर की कहानी सबसे ज़्यादा दिखाई जाती है। पहले एक पूरे खेल में कई दर्जन पात्र होते थे, लेकिन आज के समय में कलाकार कुछ चुनिंदा किरदारों के साथ ही कहानी दिखाते हैं, ताकि दर्शक आसानी से समझ सकें और उनसे जुड़ सकें। समय के साथ यह कला भी बदल रही है। आज के कठपुतली कलाकार सिर्फ मंच पर खेल दिखाने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि की-रिंग, वॉल हैंगिंग और दूसरी सजावटी चीज़ें भी बना रहे हैं। साथ ही सोशल मीडिया और यूट्यूब के ज़रिए ये कलाकार अपनी कला को नकीबुल पूरे देश बल्कि पुरी दुनिया तक पहुँचा रहे हैं, जिससे यह परंपरा नई पीढ़ी तक भी पहुँच रही है।

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मनिहारों का रास्ता : जहां लाख की चूड़ियों में दिखती है 300 साल की विरासत

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जयपुर की हर एक गली, हर एक रास्ता और बाज़ार अपने आप में बेहद ख़ास है, क्योंकि यहाँ आपको रंग-बिरंगी संस्कृति देखने को मिलती है। चाहे फिर बात हो यहाँ के गुलाबी बाज़ार की या रात में टिमटिमाते बाज़ारों की रोशनी की। इन सबमें सबसे ख़ास है मनिहारो का रास्ता। और आज five colors of travel आपको इसी खास बाजार के बारे में बताएगा कि यह बाजार कितना पुराना है और इस बाजार की खासियत क्या है। Lac Ki Choodiyan मणिहारों का रास्ता, सदियों पुरानी पहचान त्रिपोलिया बाजार के पास मौजूद मनिहारों का रास्ता सिर्फ एक गली नहीं, बल्कि सदियों पुरानी विरासत है। जयपुर का मनिहार समुदाय 1727 से लाख के काम में लगा हुआ है। यही लोग गुलाल गोटा और रंग-बिरंगी लाख की चूड़ियाँ बनाते हैं, जिनसे जयपुर की पहचान जुड़ी है। मनिहारो का रास्ता देसी बाज़ार का एक ऐसा हिस्सा है जो सदियों पुराना माना जाता है। यहाँ राजस्थान की उस संस्कृति की झलक मिलती है जो हर एक राजस्थानी घर में मौजूद है। राजस्थानी महिलाओं के हाथों में सजने वाली लाख की चूड़ियाँ यहीं बनती हैं, जो न केवल राजस्थान में पहनी जाती हैं बल्कि पूरी दुनिया तक जाती हैं। यहाँ सदियों पुराने दुकानदार मौजूद हैं, जो अपनी पीढ़ियों की बातें बताते हैं और समझाने की कोशिश करते हैं कि लाख की चूड़ियाँ सिर्फ़ गहना नहीं, बल्कि यहाँ की संस्कृति को संजोकर रखने वाली पहचान हैं। जयपुर की होली और गुलाल गोटा की परंपरा जयपुर की होली सिर्फ रंग खेलने का त्योहार नहीं, बल्कि एक शाही एहसास है। करीब 400 साल पुरानी परंपरा में गुलाल गोटा इसकी जान है। गुलाल गोटा बनाना आसान काम नहीं है। सबसे पहले लाख को उबालकर नरम किया जाता है, फिर उसमें प्राकृतिक रंग मिलाए जाते हैं। इसके बाद कारीगर एक खास धातु की पाइप, जिसे फूँकनी कहते हैं, से उसमें हवा फूँककर बेहद पतला गोला बनाते हैं। गरम गोले को तुरंत पानी में डालकर ठंडा किया जाता है। इसके बाद उसमें अरारोट से बना इको-फ्रेंडली गुलाल भरा जाता है और आखिर में उसे सुनहरी पन्नी से सील कर दिया जाता है। और क्योंकि इतने पतले होते हैं यह बिल्कुल कागज की तरह पतले होते हैं इसलिए अगर इन्हें दूसरों पर फेककर मारा जाता है तब भी यह कोमल ही लगते हैं मनिहारों की सबसे बड़ी चुनौतियां राजस्थानी संस्कृति में लाख की चूड़ियों का एक अलग ही महत्व है, खासकर नई दुल्हन के लिए इन्हें पहनना बहुत शुभ माना जाता है। ये चूड़ियाँ दिखने में तो सुंदर होती ही हैं, साथ ही ये बिना किसी केमिकल के इस्तेमाल से बनती हैं, इसलिए पर्यावरण के लिए भी बेहतर मानी जाती हैं। लेकिन आज मनिहार कारीगरों को फैक्ट्री में बनी सस्ती और केमिकल वाली चूड़ियों से कड़ी टक्कर मिल रही है, ऊपर से गुलाल गोटा इतने नाज़ुक होते हैं कि ज़रा सी गर्मी या दबाव में टूट सकते हैं, जिससे इन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाना भी मुश्किल हो जाता है। अच्छी बात ये है कि सोशल मीडिया और वायरल वीडियोज़ की वजह से गुलाल गोटा फिर से ट्रेंड में आ गए हैं और नई पीढ़ी अब इन पारंपरिक चीज़ों को पसंद करने लगी है, जिससे कारीगरों की मेहनत को दोबारा पहचान मिल रही है। देखिये लाख की चूड़ियों पर फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल की खूबसूरत डाक्यूमेंट्री

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आगरा में होमस्टे का शानदार ऑप्शन- Big Brother Hostel and Homestay

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जब भी हम आगरा जाने की बात करते हैं तो हमारे ज़हन में सबसे पहले ताजमहल की तस्वीर बन उभरती है। लेकिन किसी भी शहर की यात्रा सिर्फ उसकी इमारतों को देखने भर से पूरी नहीं हो जाती बल्कि उन लम्हों से यादगार बनती है जो हम वहाँ बिताते हैं। और इन पलों की शुरुआत अक्सर उस जगह से होती है जहाँ हम ठहरते हैं। आज Five Colors of Travel के इस ब्लॉग में हम आगरा के एक होमस्टे Homestay के बारे में बताएंगे क्योंकि ये होटल के तय ढाँचे से अलग लेकिन सुविधाओं में उतने ही शानदार होते है। (Big Brother Hostel & Homestay) शायद यही वजह है कि आजकल होमस्टे का क्रेज दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। आज के समय में होमस्टे और हॉस्टल यात्रियों के बीच इसलिए लोकप्रिय हो रहे हैं क्योंकि ये ठहरने की जगह देने के साथ-साथ बिलकुल अपनेपन वाला माहौल देते हैं। Big Brother Hostel & Homestay यह होमस्टे आगरा के एक चलायमान इलाके में स्थित है। VIP Road के पास होने की वजह से यह जगह ट्रैवलर्स के लिए बेहद सुविधाजनक हो जाती है। यहाँ से ताजमहल सिर्फ 500 मीटर की पैदल दूरी पर है, जिससे सुबह-सुबह या शाम के समय ताजमहल तक टहलते हुए पहुँचना भी संभव हो जाता है। और सबसे ख़ास बात तो ये कि इस घर की छत से ताजमहल साफ नज़र आता है। और जब शहर की प्रमुख जगहें पास हों, तो सफर में जल्दबाज़ी नहीं रहती और आप शहर को समय से घूम पाते हैं। Big Brother Hostel & Homestay- कमरे और ठहरने का अनुभव इस होमस्टे की सबसे अच्छी बात यह है कि यहाँ हर तरह के यात्री के लिए ठहरने का विकल्प मौजूद है। चाहे आप परिवार के साथ हों, दोस्तों के साथ ट्रिप पर हों या फिर अकेले यात्रा कर रहे हों, हर किसी के लिए यहाँ उनके अनुकूल सुविधाएं उपलब्ध हैं।यहाँ उपलब्ध हैं:Deluxe Double Bed RoomsTriple Bed Deluxe Rooms (बालकनी के साथ और बिना बालकनी)6 Bed Mixed Dormitory6 Bed Female DormitorySafe Lockers के साथ Dormitoryकमरे एकदम साफ सुथरे और आरामदायक हैं। साफ बिस्तर, हवादार स्पेस और शांत वातावर घूमने के बाद चैन से आराम करने के लिए बेहतरीन अनुभव देता है। हॉस्टल कल्चर और साझा अनुभव होटल में अक्सर लोग अपने कमरे तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन हॉस्टल और होमस्टे यात्रियों को आपस में जोड़ते हैं। यहाँ अलग-अलग जगहों से आए लोग मिलते हैं, अपनी यात्राओं की कहानियाँ साझा करते हैं और कई बार अजनबी दोस्त बन जाते हैं। जैसे सर्दियों के समय यहाँ रात में छत पर बने हुए कैफे एरिया के पास आग जलाकर सब लोग बैठकर बातचीत कर सकते हैं।यह जगह खासतौर पर सोलो ट्रैवलर्स के लिए एक शानदार विकल्प है, क्योंकि यहाँ का माहौल बिल्कुल अपनापन महसूस करवाता है। Big Brother Hostel & Homestay- सुरक्षा और भरोसा यह होमस्टे एक बहुत ही सुरक्षित और सिक्योर एरिया में स्थित है, जो यात्रियों के लिए खासतौर पर महिला ट्रैवलर्स के लिए भरोसेमंद बनता है। डॉरमिट्री में सुरक्षित लॉकर की सुविधा दी गई है, जिससे यात्री निश्चिंत होकर शहर घूम सकते हैं। साफ-सफाई, बेसिक सुविधाएँ और सहयोगी होस्ट आपके ठहराव को और अधिक सहज बना सकते हैं। खाने-पीने और आसपास का माहौल आसपास कई लोकल ढाबे और छोटे रेस्टोरेंट हैं, जहाँ आपको बिल्कुल घर जैसा खाना मिल जाएगा। यहाँ मौजूद लोग आपको लोकल फूड और घूमने की जगहों के बारे में सही जानकारी भी दे देते हैं, जिससे आपका सफर और आसान हो जाता है। क्यों ज़रूरी हैं ऐसे होमस्टे और हॉस्टल? आजकल लोग यात्रा करते हुए केवल इमारतों को नहीं देखना चाहते बल्कि वे ऐसे ठिकाने ढूंढते हैं जहाँ बजट का ध्यान रखा जाए, सुरक्षा मिले और एक जुड़ाव महसूस हो। होमस्टे और हॉस्टल यात्रियों को शहर या राज्य की संस्कृति के करीब ले जाते हैं। आगरा जैसे ऐतिहासिक शहर में Big Brother Hostel & Homestay भी उसी सोच का प्रतिनिधित्व करता है। क्योंकि कई बार सफर की सबसे अच्छी यादें वही होती हैं, जो हमें रास्ते में या ठहराव के दौरान मिलती हैं।

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दीवान-ए-आम: आमेर किले का सबसे शानदार हिस्सा

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जयपुर की भीड़-भाड़ और रॉयल वाइब्स के बीच अगर आप आमेर किले में घूम रहे हैं, तो दीवान-ए-आम आपकी सबसे पहली और सबसे दिलचस्प स्टॉप होगी। पुराने ज़माने में यह जगह राजा और आम लोगों के बीच का सीधा कनेक्शन हुआ करती थी। लोग यहाँ बिना किसी झिझक के अपनी बातें रखते थे किसी को न्याय चाहिए होता था, किसी को अपनी परेशानी बतानी होती थी। तो राजा यहीं बैठकर लोगों की बात सुनते थे और ज़रूरी फैसले सुनाते थे। इस ब्लॉग में Five Colors of Travel आपको ऐसे ही छोटे-छोटे फैक्ट्स और एक्सपीरियंस बताएगा, जो इस जगह को और भी मज़ेदार बना देते हैं। आखिर क्या था दीवाने आम? दीवान-ए-आम एक खुला आँगन है, जिसे देख कर ऐसा लगता है कि काश हम उस समय में जा पाते और देख पाते कि उस समय दीवाने आम में किस तरह से फैसले हुआ करते थे। यहाँ कोई बंद कमरे या बहुत भारी-भरकम महल जैसी चीज़ें नहीं हैं, सब कुछ सीधे-साधे तरीके से दिखाई देता है। जब आप यहाँ खड़े होते हैं, तो चारों तरफ की दीवारें, खंभे और छतें आपको उस पुराने समय का एहसास दिलाती हैं। हर चीज़ इतनी असली लगती है कि आप खुद को उस ज़माने में घूमते हुए महसूस कर सकते हैं। यह जगह देखने के साथ साथ फील करने की भी है। आम जनता का मंच जैसा की नाम से ही सब कुछ साफ़ हो जाता है दीवान-ए-आम वो जगह थी जहाँ राजा सीधे आम जनता से मिलते थे। यहाँ कोई फॉर्मल प्रोसेस या कॉम्प्लिकेटेड रुल्स नहीं थे, लोग अपनी बातें सीधे राजा तक पहुँचा सकते थे। सोचिए, उस टाइम में कोई भी अपनी राय या शिकायत राजा को सीधे बता सकता था। अगर आज की भाषा में कहें तो ये बेसिकली उस ज़माने का पब्लिक मीटिंग हॉल था, जहाँ हर किसी को बोलने और अपनी बात रखने का मौका मिलता था। यहाँ खड़े होकर आप आसानी से समझ सकते हैं कि कैसे राजा और आम लोग आमने-सामने मिलते थे, और एक तरह से यह जगह लोगों और शासक के बीच का पुल का काम भी करती थी। हाथियों की नक्काशी और शाही ठाठ दीवान-ए-आम में सबसे ज़्यादा ध्यान खींचने वाली चीज़ हैं उसके खंभों पर बनी हाथियों की नक्काशी। ये हाथी सिर्फ सजावट ही नहीं थे, बल्कि ताक़त और शाही शान का प्रतीक माने जाते है। खंभों पर इतनी छोटी-छोटी डिटेल्स बनाई गई हैं जो हमे यह सोचने पर मजबूर करती देती है कि इतनी बारीक डिजाईन उस जमाने में बिना किसी फैसेलिटीज के कैसे बनाई गई होगी। सच में, यही छोटी-छोटी चीज़ें इसे यादगार और खास बनाती हैं। खुला माहौल, सादा डिजाइन सबसे अच्छी बात दीवान-ए-आम की यह है कि इसका डिजाइन बिल्कुल खुला और सादा है। यहाँ कोई ज़्यादा दिखावा या भारी-भरकम सजावट नहीं है, सब कुछ बिल्कुल सीधे-सादे तरीके से बना है। यही वजह है कि यह जगह आज की पब्लिक को इतनी खास लगती है और यही सिंपलसिटी इसे और भी खास बनाती है। आज जब लोग दीवान-ए-आम में खड़े होते हैं, तो उन्हें सिर्फ एक हिस्टोरिकल ढांचा नहीं दिखता, बल्कि उस दौर की सोच और जनता के साथ राजा का रिश्ता भी कैसा हुआ करता था ये भी जानने को मिलता है।

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Yamuna Biodiversity Park

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शहरों के लोगों को किसी चीज़ की कमी सबसे ज्यादा खलती है, तो वो है “प्राकृतिक सौंदर्य” और अगर दिल्ली में आप किसी ऐसी ही जगह की तलाश में हैं, तो आज आपकी यह तलाश मुकम्मल हुई क्योंकि फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल के इस नए ब्लॉग में आज हम आपको ले चलेंगे दिल्ली की एक ऐसी ही खूबसूरत जगह में जो पूरी तरह प्रकृति को समर्पित है। दिल्ली का बायोडायवर्सिटी पार्क जोकि आज देश भर के लिए एक रोल मॉडल साबित हो रहा है। दिल्ली एनसीआर में ही यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क के बाद पिछले दो साल में छह और ऐसे पार्क तैयार हो चुके हैं। वहीँ देश के पांच और राज्यों में भी इस दिशा में काम चल रहा है। Yamuna Biodiversity Park दिल्ली में बायोडायवर्सिटी पार्क दिल्ली में बायोडायवर्सिटी पार्क का कारवां सन 2002 में शुरू हुआ था। पहला पार्क यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क के नाम से शुरू हुआ। इसके चलते ही राजधानी में आबोहवा और जीव-जंतुओं की भी संख्या भी कई मात्रा में बढ़ती दिखाई दी। और आज इस पार्क में आपको देश के सभी जीव-जंतुओं की अलग-अलग स्पीशीज यहां दिखाई देगी। आपको बता दें कि दिल्ली में कुदरत को करीब से देखने का इससे बेहतर और कोई ठिकाना नहीं है। यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में एंट्री फीस निशुल्क है। कैसे पहुंचे -Yamuna Biodiversity Park यमुना डाइवर्सिटी पार्क वज़ीराबाद के जगतपुर गांव में स्थित है।  आप बस से वजीराबाद आकर कैब की सहायता से इस पार्क में आसानी से पहुंच सकते हैं। इसके अलावा आप अपनी पर्सनल गाड़ी में गूगल मैप की सहायता से भी यहां आसानी से आ सकते हैं।   जैसे ही आप पार्क के अंदर एंटर करेंगे तो यहां आपको चारों तरफ पेड़ पौधों से घिरी ग्रीनरी दिखाई देगी। शहर से दूर इस शांत और प्रकृति के करीब जाने का यह सुकून आपको दिल्ली में शायद ही और कहीं देखने को मिलेगा। 457 एकड़ में फैला यह पार्क न केवल प्राकृतिक सौंदर्य के लिहाज़ से बल्कि कई अन्य मायनों में भी ख़ास है। इस पार्क में आपको काफी कुछ सीखने और देखने को मिलने वाला है क्योंकि यहां तितलियों से लेकर सभी अन्य जीवों की नेटिव स्पीशीज का जमावड़ा लगा रहता है।  यहाँ देखने को मिल जाएँगी तितलियों की 30 प्रजातियां इसके अलावा कई नेचर एजुकेशन के छात्र-छात्राओं के ग्रुप्स भी अपनी रिसर्च और नई-नई स्पीशीज की स्टडी करने यहां आते हैं। यमुना का यह वेटलैंड जोकि घनी आबादी के बीचों-बीच बसा है, आपकी इकोलॉजिकल वैरिएशंस के कारण यहां आने वाले लोगों को काफी चकित करता है। यहां जानवरों और पक्षियों की अनेक प्रजातियां तो दिखाई देती ही थी। पर लॉकडाउन के बाद बढ़ते प्रदूषण के बीच दिल्‍ली में तितलियों की 30 प्रजातियों की 342 तितलियाँ इस पर्क में दिखाई दी। यह पार्क यमुना नदी के किनारे जीव-जंतुओं को नया जीवन देने वाली जगह है। किसी भी नदी को जीवित रखने की बात करें तो उसके आस पास का इकोसिस्टम और पर्यावरण की स्वछता मायने रखती है। यह जगह जल का भण्डारण करती है साथ ही आपको यहां स्थानीय पक्षी, जंगली गाय जंगली सुवर व अन्य प्रकार के कई जानवर भी देखने को मिलेंगे। यमुना के लिए यह पार्क जिंदगी की सांसे देने का काम कर रहा है। आज यह पार्क एक उदाहरण है जिसने सबको यह बताया है कि हम नदियों को आज भी जिन्दा कर सकते हैं। और प्रकृति को बचाने का इससे अच्छा तरीका और क्या हो सकता है। यमुना बायो डाइवर्सिटी पार्क की डाक्यूमेंट्री देखने के लिए लिंक पर क्लिक कीजिये ……