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मेहरानगढ़ फोर्ट-क्यों है भारत का सबसे शानदार किला? जानिए पूरी कहानी

आप सभी जानते हैं भारत को मंदिरों का देश माना जाता है, लेकिन अगर भारत को ऐतिहासिक किलों का देश कहा जाये तो बिलकुल भी गलत नहीं होगा, क्योंकि देश का चाहे कोई भी हिस्सा हो उत्तर से लेकर दक्षिण तक आपको देश भर में 500 से भी ज्यादा किले देखने को मिल जाएंगे, जो देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित हैं। इनमें से कई किले सैकड़ों साल पुराने हैं, बहुत से किले तो ऐसे भी हैं, जो कब बने और इन्हें किसने बनाया, के बारे में कोई नहीं जानता। (Mehrangarh Fort)

आज हम आपको इस ब्लॉग में एक ऐसे ही किले के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह किला भारत के सबसे पुराने और विशाल किलों में से एक है, जिससे भारत के समृद्धशाली अतीत की झलक मिलती है।

Mehrangarh Fort-क्यों है भारत का सबसे शानदार किला? जानिए पूरी कहानी

किले का ऐतिहासिक दृष्टिकोण

इस किले को मेहरानगढ़ दुर्ग या मेहरानगढ़ फोर्ट के नाम से जाना जाता है। राजस्थान के जोधपुर शहर के ठीक बीचों-बीच स्थित यह किला करीब 125 मीटर की ऊंचाई पर बना है। अगर ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखें तो 15वीं शताब्दी में इस किले की नींव राव जोधा ने रखी थी, लेकिन इसके निर्माण का कार्य बाद में महाराज जसवंत सिंह ने पूरा किया। मेहरानगढ़ किले के बनने की कहानी कुछ इस तरह है कि राव जोधा जब जोधपुर के 15वें शासक बने, उसंके एक साल बाद ही उन्हें लगने लगा कि मंडोर का किला उनके लिए सुरक्षित नहीं है। इसलिए उन्होंने अपने तत्कालीन किले से एक किलोमीटर दूर पहाड़ी पर एक किला बनवाने की सोची। उस पहाड़ी को ‘भोर चिड़ियाटूंक‘ के नाम से जाना जाता था, क्योंकि वहां काफी संख्या में पक्षी रहते थे।

Mehrangarh Fort – जानिए इतिहास, टिकट, समय व रोचक तथ्य

आठ दरवाजों और अनगिनत बुर्जों से युक्त यह किला ऊंची-ऊंची दीवारों से घिरा हुआ है।

Mehrangarh Fort-क्यों है भारत का सबसे शानदार किला? जानिए पूरी कहानी

दूर से देखने पर ही आपको इस किले की विशालता का पता चल जायेगा। जोधपुर शहर के किसी भी हिस्से से आप इस किले को देख सकते हैं।  वैसे तो इस किले के सात ही द्वार(पोल) हैं, लेकिन कहते हैं कि इसका आठवां द्वार भी हैं जो रहस्यमयी है। और ऐसे रहस्यों के पीछे बहुत सी कहानियां जुड़ी होती हैं जिनको समझना आसान नहीं।

Mehrangarh Fortक्यों है भारत का सबसे शानदार किला? जानिए पूरी कहानी

किले के मुख्य द्वार  पर हाथियों के हमले से बचाव के लिए नुकीली कीलें लगवाई गई थीं। सुरक्षा के लिहाज़ से इस तरह की कारीगरी आपको कुछ दूसरे किलों में दिखाई देगी।

Mehrangarh Fort-क्यों है भारत का सबसे शानदार किला? जानिए पूरी कहानी

चामुंडा माता का मंदिर

Mehrangarh Fort-क्यों है भारत का सबसे शानदार किला? जानिए पूरी कहानी

किले में चामुंडा माता का मंदिर भी है, जिसे राव जोधा ने 1460 ईस्वी में बनवाया था। नवरात्रि के दिनों में यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है। बताते हैं जब राव जोधा ने अपनी राजधानी को मंडोर से जोधपुर शिफ्ट किया था तब वह अपने साथ दुर्गा माता की मूर्ति को भी ले गए थे। इस मूर्ति को मेहरानगढ़ किले में स्थापित किया गया था जिसे आज चामुंडा माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहीं इसी जगह हर साल माता का प्रसिद्ध मेला भी लगता है जिसमे दूर दराज से हज़ारों श्रद्धालु पूजा अर्चना करने आते हैं

Mehrangarh Fort-क्यों है भारत का सबसे शानदार किला? जानिए पूरी कहानी

किले की इमारतों की बनावट

Mehrangarh Fort – जानिए इतिहास, टिकट, समय व रोचक तथ्य

जब आप इस किले की इमारतों की बनावट देखेंगे तो देखते ही रह जाएंगे। महाराजा अजीत सिंह के शासन के समय इस किले की कई इमारतों का निर्माण मुगल डिजाइन में किया गया है

Mehrangarh Fort– जानिए इतिहास, टिकट, समय व रोचक तथ्य

इस किले में पर्यटकों को आकर्षित करने वाले सात विशाल दरवाज़ों के अलावा मोती महल (पर्ल पैलेस), फूल महल (फूल महल), दौलत खाना, शीश महल (दर्पण पैलेस) जैसे कई शानदार शैली में बने कमरें हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें मोती महल का निर्माण राजा सूर सिंह द्वारा बनवाया गया था। शीश महल, या हॉल ऑफ मिरर्स बेहद आकर्षक ढंग से बनाया गया है जो अपनी दर्पण के टुकड़ों पर जटिल डिजाइन की कारीगरी की वजह से पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहता है।

Mehrangarh Fort – जानिए इतिहास, टिकट, समय व रोचक तथ्य

फेमस म्यूजियम

मेहरानगढ़ फोर्ट भारत के सबसे पुराने किलों में से एक है, जो भारत के मजबूत और गौरवशाली इतिहास को खुद में समेटे है. मेहरानगढ़ किले का म्यूजियम राजस्थान  के बेहतरीन और फेमस म्यूजियम में से एक है., जिसमें राजा-महाराजाओं की पोशाकें और उनके हथियार रखे गए हैं. साथ ही, उनके रहन-सहन, दैनिक जीवन  और कल्चर से जुड़ी चीजें आज भी यहां मौजूद हैं जो यहाँ आने वाले पर्यटकों को अपनी और आकर्षित जरूर करती है।

Mehrangarh Fort– जानिए इतिहास, टिकट, समय व रोचक तथ्य
Mehrangarh Fort – जानिए इतिहास, टिकट, समय व रोचक तथ्य

मेहरानगढ़ किले के परकोटों से पूरे जोधपुर शहर का बेहतरीन नजारा आप देख सकते हैं. इस फोर्ट की दीवार 10 किलोमीटर तक फैली है और दीवार की ऊंचाई 20 फीट से 120 फीट तक है. वहीं, दीवार की चौड़ाई 12 फीट से 70 फीट तक है.

ट्रेडिशनल बाजार 

Mehrangarh Fort – जानिए इतिहास, टिकट, समय व रोचक तथ्य

इस किले में पर्यटकों के लिए एक छोटा सा बाजार भी बनाया गया है जहाँ से आप राजस्थानी  पारम्परिक परिधानों और जूतियो के अलावा विभिन्न प्रकार के अन्य डेकोरेटिव आइटम्स की खरीदारी भी  कर सकते हैं

Mehrangarh Fort – जानिए इतिहास, टिकट, समय व रोचक तथ्य

इसके अलावा इस किले के अंदर एक शाही रेस्टोरेंट भी मौजूद है, जहां पर आप अपने पार्टनर के साथ कैंडल लाइट डिनर का आनंद भी ले सकते हैं।

इस किले की एंट्री टिकट पर व्यक्ति 200 रुपए है। क्योंकि यह किला आज भी जोधपुर के राज घराने के संरक्षण में है न की भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन, इसलिए यहाँ के रख रखाव के लिए टिकट की कीमत ज्यादा रखी गई है। लेकिन किला इतना शानदार है कि आपको लगेगा की टिकट के पैसे वसूल हो गए।

कितना समय काफी रहेगा इस किले को देखने के लिए-Mehrangarh Fort timings
क्योंकि मेहरानगढ़ फोर्ट देश के सबसे पुराने और बड़े किलो में से एक है इसलिए इस पूरे किले को देखने के लिए आप तीन से चार घंटे मान कर चलिए। अगर आप ऐतिहासिक इमारतों और चीजों को पसंद करते हैं तब थोड़ा एक्स्ट्रा समय इसमें और जोड़ लीजिये। किले की बनावट, महल और विशेषकर यहाँ का म्यूजियम आपको जल्दी से यहाँ से रुख़्सत नहीं होने देगा।

कैसे पहुंचें मेहरानगढ़ का किला

मेहरानगढ़ किला पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जोधपुर में स्थित है। वहीं, यहां पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जोधपुर जंक्शन है। । क्योंकि जोधपुर राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर है इसलिए  यहां पर सड़क मार्ग से भी बेहद आसानी से पहुंचा जा सकता है।

By Dr. Pardeep Kumar

डॉ. प्रदीप कुमार को मीडिया इंडस्ट्री में सोलह वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने डिजिटल मीडिया के साथ-साथ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी सक्रिय रूप से कार्य किया है। वे एक अनुभवी पत्रकार होने के साथ-साथ शिक्षक, लेखक, फोटोग्राफर और डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर भी हैं। ग्राउंड लेवल की कहानियों को कैमरे और कलम के ज़रिए लोगों तक पहुँचाना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। उनकी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘चाय-चाय’ को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
अब तक उनके द्वारा विभिन्न विषयों पर पाँच पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी हैं। यात्रा करना, नई जगहों को खोजना, वहाँ की संस्कृति को समझना और परंपरागत व स्थानीय स्वादिष्ट व्यंजनों का अनुभव लेना उनकी खास रुचियों में शामिल है।

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